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Wednesday, January 4, 2023

अरे चीथड़ों कब जागोगे -सतीश सक्सेना

अरे चीथड़ों कब जागोगे , 
लूट मची है , पछताओगे !
खद्दर धारी बाजीगर हैं ,
और तुम बने जमूरे रहना !
सपने , रैली , भाषण मीठे
जीवन भर तुम पीते रहना
छोड़ देखना , स्वप्न सुनहरे 
भाग सके तो भाग सभी संग 
दुनिया फ़ायदा उठा रही है 
सीख लगाना डुबकी, तू भी
लूट सके तो लूट देश को , नहीं तो पीछे रह जाओगे  !
लूट मची है, पछताओगे !

शपथ उठाए संविधान की 
खद्दर पहने , नेता लूटें !
नियम और क़ानून दिखायें 
दफ़्तर वाले, बाबू लूटें !
हाथ में झंडा ले छुटभैया, 
धमकी देकर चौथ वसूले   
सब्जी वाला तक डंडी के  
बल पर, बहिन बनाके लूटे
उल्लू मत बन, बनो जुगाड़ू  
आँख उठा ले, राष्ट्रभक्त बन 
झूठ को सत्य बनाना सीखो , वरना बेटा क्या खाओगे !
देश लुट रहा पछताओगे !

आँखें खोलो नंगों तुम भी 
बहती गंगा में मुँह धो लो
फेंक मजीरा, तबला, ढोलक  
हर हर गंगे अलख जगा ले ! 
जय श्री राम बोल नेता को 
जीत दिलाकर शोर मचा ले 
हाथ में आएगा, घंटा ही ,
चाहे जितना ज़ोर लगा ले 
त्याग पसीना, बनो हरामी 
बुद्धि के बल नोट कमाओ 
फेंक रज़ाई फटी, लूट ले , वरना पीछे रह जाओगे  !
तुम वन्दे मातरम गाओगे  !

तुमको धांसू न्यूज़ सुनाकर  
प्रेस मीडिया नोट कमाये !'
तुमको भरमाने की खातिर 
चोर को साहूकार बताये  ! 
टेलिविज़न बनाए उल्लू ,
मीठे मीठे स्वप्न दिखाये !
जो घर को ही, चले लूटने  
उनके जयजयकार लगाए 
समय बचा है अब भी बकरे 
मूर्ख़ बनाना सीखो भोंदू  ,
वरना जीवन भर तुम लल्लू , क्या ओढ़ोगे क्या बिछाओगे  !
हाथ में बस घंटा पाओगे !

#व्यंग्य 

Saturday, December 26, 2020

तो फिर मेरी चाल देख ले -सतीश सक्सेना

शायद यह अकेला समाज है जहाँ ऊपरी दिखावे को सम्मान देना सिखाया जाता है ! अगर सामने से कोई गेरुआ वस्त्र धारी और पैर में खड़ाऊं पहने आ रहा है तो पक्का उस महात्मा के चरणों में झुकना होगा और आशीर्वाद मांगना ही है चाहे वह बुड्ढा पूरे जीवन डाके डालकर दाढ़ी बढ़ाकर छिपने के लिए बाबा क्यों न बना हो और किसी गए गुजरे का आशीर्वाद पाने के योग्य भी न हो !

मंदिर जाएँ तो पंडित (जी) धोती, कुरता में ही मिलेंगे , और आजतक किसी पुजारी की हिम्मत नहीं कि वह निक्कर या पैंट पहनकर भगवान की पूजा करे ! शायद यह मंदिर का ड्रेस कोड बना दिया गया है हमारे यहाँ , कष्ट निवारण हेतु पूजा पाठ के अलग अलग रेट हैं ज्यादा रेट तगड़ी पूजा की गारंटी है !

भारतीय राजनीति में खद्दर और सफ़ेद कपडे पहनने का रिवाज शुरू से ही है , खद्दर ग़रीबी की मदद करने और 90 प्रतिशत भूखे नंगे समाज में खुद को गरीब सा दिखाने की तड़प है , इससे बहुमत के वोट मिलने में, आसानी रहती है ! उन पर बहुत प्रभाव पड़ता है क्योंकि यही वह तबका है जो जीवन भर सफ़ेद कपडे कभी नहीं पहन पाता और सफ़ेद रंग स्पॉटलेस करेक्टर की पहचान है सो जितने भी दल्ले हमारे देश में दिखते हैं सब के सब बड़े नेताजी से लिंक का प्रतीक, खद्दर पहने ही मिलते हैं , यह लोग कोई भी असम्भव काम सरकार से कराने का वादा करते हैं और आपसे धन लेकर ऊपर पहुंचाते हैं , बदले में इनको बाकायदा मोटा पारितोषिक मिलता है और आपसे वाहवाही कि पैसे देकर नौकरी लगा दी लल्ला की ! अगले ही दिन इन श्वेत वस्त्रधारियों द्वारा श्वेत महंगे जूते भी ख़रीदे जाते हैं इससे इन्हें मिलने वाला सम्मान और अधिक हो जाता है देसी भाषा में इन्हें जमीन से जुड़ा पार्टी कार्यकर्ता कहा जाता है और इसका मुख्यतः काम नेता के पास लल्लुओं के काम कराने के लिए उनसे नेताजी के लिए नोट इकट्ठा करना होता है ! मोटा एक काम भी करा दिया तो अगले दिन इनके पास एक झंडा लगी एस यू वी मिलेगी !

और हिंदी का मशहूर विद्वान बनना और भी आसान है बस अपना खटारा सा सरनेम बदलकर एक बेहतरीन शास्त्रीय सांस्कृतिक नाम तलाश कर लें जैसे सतीश सक्सेना के नाम पर सतीश अपरिमेय हो तो मेरे पाठक मुझे आदरणीय कहना शुरू कर देंगे पक्का , और अगर मैं अपनी दाढ़ी महा गुरु जैसी रख लूँ तब लोग मुझे आचार्यश्री का दर्जा और जयजयकार आसानी से देंगे भले मैंने हिंदी की पढ़ाई, कक्षा १२ सेकंड डिवीजन पास तक ही की हो ! साहित्यिक लेख लिखने में कोई कष्ट ही नहीं , एक पैरा राजीव मित्तल और दूसरा शम्भुनाथ शुक्ल का और तोड़ मरोड़ कर उसे आकर्षक बनाकर पेश कर दूँ तो तालियों की जबरदस्त गड़गड़ाहट न मिले तो कहना क्योंकि आचार्य जैसी शक्ल और ज्ञान टपकाता नाम इनके पास है ही नहीं !

सो नए साल में क्यों न यह रंग ही धारण कर लूँ भाइयों और बैनों !!
तो फिर मेरी चाल देख ले ...!!

https://youtu.be/7iSDtiBipAk

Friday, November 13, 2020

दरी बिछाकर फटी तेरे , दरवाजे आके नाचेंगे -सतीश सक्सेना

नाम तुम्हारा ले बस्ती में , जोर शोर से गाएंगे !
दरी बिछाकर फटी तेरे, दरवाजे आके नाचेंगे !

जै जै कारों के नारों में , खेत किसानों को भूले
बर्तन भांडे बिके कभी के, टांग उठा के नाचेंगे !

कोर्ट कचहरी सारे तेरे, जेल मिले, गर बोले तो 
घर की जमा लुट गई, नंगे घर के आगे नाचेंगे !

अनपढ़ जाहिल रहे शुरू से न्याय कहाँ से पाएंगे 
भुला जांच आयोग हम तेरे घर के आगे नाचेंगे !

ब्रह्मर्षि अवतारी जैसे भारत रत्न ने, जन्म लिया !
जनम जनम के पाप धुल गए डर के मारे नाचेंगे !

Monday, June 8, 2020

बस्ती के मुकद्दर को ही जान क्या करेंगे -सतीश सक्सेना


ये कौम ही मिटी, तो वरदान क्या करेंगे !
धूर्तों से मिल रहे, ये अनुदान क्या करेंगे ?

गुंडों के राज में भी, जीना लिखा के लाये
बस्ती के मुकद्दर को ही
  जान क्या करेंगे ?

आशीष कुबेरों का, लेकर बने हैं हाकिम  
लालाओं के बनाये दरबान, क्या करेंगे ?

घुटनों पे बैठ, पगड़ी पैरों में मालिकों के !
बोतल में बंद हैं ये, मतदान क्या करेंगे ?

बेशर्म जमूरे और सच को जमीं बिछाकर
हथियार मदारी के , आह्वान क्या करेंगे !

इक दिन छटे अँधेरा विश्वास की किरण है 
जनतंत्र की व्यथा हैं, व्यवधान क्या करेंगे !

Tuesday, March 31, 2020

शाही सलाम में कलम, क्या ख़ाक लिखेगी ? -सतीश सक्सेना

जयकार में उठी कलम, क्या ख़ाक लिखेगी
अभिव्यक्ति को वतन में, खतरनाक लिखेगी !

अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?
मन भाव ही कह न सकी, चार्वाक लिखेगी ?

बस्ती को उजड़ते हुए देखा है , मगर वो   
तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !

किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !
दरबार के खिलाफ ,क्यों  बेबाक लिखेगी ?

सुलतान की जय से ही, वो धनवान बनेगी !
एतराज ए हुक्मरान को , नापाक लिखेगी !

Monday, January 20, 2020

थोड़े से दर्द में ही , क्यूँ ऑंखें छलक उठी -सतीश सक्सेना

मुर्दा हुए शरीर  को , जीना सिखाइये !
मरते हुए ज़मीर को , पीना सिखाइये !

इतने से दर्द में ही , क्यूँ ऑंखें छलक उठी 

गुंडों की गली  में  इन्हें , रहना सिखाइये !

गद्दार कोई हो , मगर  हक़दार सज़ा के ,
उस्ताद, मोमिनों को ही चलना सिखाइये  !

अनभिज्ञ निरक्षर निरे जाहिल से देश को !
सरकार,शाही खौफ से, डरना सिखाइये !

नज़रें उठायीं तख़्त पे दिलदार, तो खुद को ,
सरकार के डंडों को भी,सहना सिखाइये !

Friday, May 24, 2019

भारत में उद्देश्यहीन विपक्ष का कोई भविष्य नहीं -सतीश सक्सेना

मोदी -शाह की जोड़ी को आखिरकार शानदार बहुमत मिला और देश के सत्ता सिंहासन पर अगले पांच वर्षों तक
बैठने का जनादेश भी , इस नाते मैं उन्हें मुबारकबाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि वे विरोधियों का विश्वास पाने के प्रयत्न करने के साथ, देश के हर वर्गों को साथ लेकर, चलने का प्रयास करेंगे ! पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने अपनी डूबती छवि सँभालने का हर संभव प्रयास किया और राहुल की छवि में काफी निखार भी आया मगर कांग्रेस के आलसी और चापलूस कार्यकर्ताओं पर भाजपा के प्रतिबद्ध, वचनबद्ध एवं उद्देश्य के प्रति समर्पित कार्यकर्ता बहुत भारी पड़े, सोने पर सुहागे का कार्य, धन की कोई कमी न होना था इसके होते , प्रचार में भरपूर शक्ति लगाई गयी !

भाजपाई कार्यकर्ताओं के मन में कूट कूट कर असुरक्षा भर दी गयी है, उनमें एक साथ चलो , लाठी चलाना सीखो , अपने लोगों की मदद करने में सबसे आगे रहो , संगठन में शक्ति है , की भावना को सामान्य जन ने सहज भाव से अपना लिया नतीजा हर मोहल्ले में आरएसएस की शाखाएं नजर आने लगीं जबकि अन्य दलों का उद्देश्य, धन लाभ हेतु, ऐन केन प्रकारेण इलेक्शन जीतना ही रहा !


बेहतर विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए कांग्रेसियों को चाहिए कि अपनी पार्टी से एक निर्मम मारक क्षमता वाला एक चतुर नेता तलाश करें और उसे अपना प्रेसिडेंट बनाकर समस्त शक्तियां हस्तांतरित करें ! हर हालत में सत्ता केंद्र गांधी परिवार से हस्तांतरित होना चाहिए ! इलेक्शन जीतने के लिए चालाकी , निर्ममता , निडरता एवं धनपतियों का साथ आवश्यक है और यह सब गुण गाँधी परिवार में किसी के पास नहीं !

अगली लड़ाई में विपक्ष को एक और अमित शाह मोदी तलाशना होगा अन्यथा अगले १५ वर्षों तक भारत में विपक्ष जूते ही खाता रहेगा !

अरविन्द केजरीवाल का मैं शुरुआत से ही समर्थक रहा हूँ मेरी नजर में वे भृष्ट नहीं हैं मगर उनके फैसले अव्यवहारिक हैं जो राजनीति में फलीभूत नहीं हो सकते सो उनकी किस्मत में निस्संदेह पराजय ही आएगी , मेरे विचार में वे भारतीय राजनीति के योग्य नहीं उन्हें अगर अपमान और कष्टों से बचना है तो राजनीति छोड़कर चौकीदार की भूमिका अपनानी चाहिए , वे निस्संदेह बेहतरीन चौकीदार सिद्ध होंगे !

Friday, May 10, 2019

यज्ञ सदियों तक चले, जडबुद्धि अभ्युत्थान में -सतीश सक्सेना

साधुओं का वेष रक्खे लार टपकाते दिखें
कौन आएगा नमन को , मेरे हिंदुस्तान में ?


धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !
रोयेंगी अब पीढ़िया, परिवार पुनरुत्थान में !

कौम सारी हो चुकी बदनाम , बहते खून से ,

कई युग बीतेंगे अपनी क़ौम के भुगतान में !

जाहिलों की बुद्धि, कैसे शुद्ध हो इस देश में
यज्ञ सदियों तक चले जडबुद्धि अभ्युत्थान में !


इस मदारी राज में सब , दिग्भ्रमित से हैं खड़े
औ लगाओ जोर हइन्सा राज ध्वजोत्थान में !

Thursday, February 28, 2019

निरंकुश मीडिया बर्बाद कर देगा इस शानदार देश को,समाज को -सतीश सक्सेना

आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक वृद्ध मां को उसका बेटा निर्दयता पूर्वक जमीन पर घसीटता हुआ ट्रेक्टर के आगे ले जा रहा है ताकि उसे कुचल कर मार सके और यह घटना महाराष्ट्र 21जून की है जहाँ राष्ट्र गौरव की बातें सबसे अधिक की जाती हैं !
पिछले कुछ वर्षों में , हमारे देश में नफरत की खेती खूब की गयी है और उसका नतीजा भी नजर आने लगा है, मेरे अपने सर्किल में कई सरल ह्रदय व्यक्तियों के व्यवहार में फर्क आया साफ़ महसूस हो रहा है , पडोसी देश के प्रति उत्पन्न की गयी यह नफरत अब मोहल्ले, घर और ट्रैफिक में भी नजर आ रही है , सोशल मीडिया पर जिनके विचार हमसे न मिलें उन्हें अमित्र करना आम है ! अफ़सोस यह है कि नफरत फ़ैलाने वाले अधिकतर भोले लोग, यहाँ तक कि छोटे बच्चों तक के मानस में , टीवी पर चीखते एंकरों की बाते, अमिट निशान छोड़ रही हैं !

सीधा साधे शांत देश को , जिसमें समस्त जाति ,कौम के लोग आराम से रह रहे थे, इन लोगों ने अपने घरों में भी बच्चों को  झाग उगलते हुए गाली देना सिखा दिया है जिसे सब जोश के साथ आसानी से आत्मसात भी कर रहे हैं , इन जाहिलों को यह नहीं मालुम की स्नेह और प्यार की जगह अनजाने में तुम अपने घर में जहर बो रहे हो जिसकी आग में सबसे पहले तुम्हारे बच्चे ही झुलसेंगे जिन्हें इस माहौल में ही पूरी उम्र जीना है ! मानव की मानव के प्रति बढती हुई गुस्सा इन्हें जानवर बना देने में सक्षम है और शीघ्र यह सड़कों पर नजर आयेगी ! 

मारो , सबक सिखा दो के नारे लगाते, इन बेवकूफों को यह भी नहीं मालुम कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों में युद्ध का अर्थ , घना अन्धेरा होगा जिसमें दोनों ओर कोई नाम लेवा नहीं बचेगा , भारत पाकिस्तान में ताकत की तुलना सिर्फ पारम्परिक युद्ध होने तक ही संभव है , परमाणुशक्ति संपन्न देशों में यह तुलना सिर्फ मूर्खता पूर्ण विचार है , दोनों अपार जीव संहार और मानवता विनाश में सक्षम हैं यहाँ एक पक्ष के धन और जनशक्ति  का कोई मूल्य नहीं , परमाणु युद्ध होने पर लाखों सैनिकों, भरपूर हथियारों , हवाई जहाजों , और अरबों डॉलर का रिज़र्व धन एक क्षण में नष्ट हो जाएगा  और दो जाहिल शासकों के मनहूस स्मारक  के रूप में ,आसमान की जगह सिर्फ घना अन्धेरा बचेगा , जो सैकड़ों बरसों तक मानव की मूर्खता का अवशेष होगा !

यही कारण था कि विश्व का सबसे ताकतवर राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति आज वियतनाम आकर एक गरीब देश नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति से हाथ मिलाने को विवश हो रहा है और यही समय की पुकार भी है कि परमाणुशक्ति संपन्न  देश आपस में युद्ध की सोंच भी न सकें ! 

आज मैंने अपने घर से ललकारने वाले समस्त चैनल विदा कर दिए , सौम्यता से बात करने वाले चैनल ही देखना है इस हेतु न्यूज़ चैनल कम से कम देखूंगा , देखना है कि इस युद्ध यूफोरिया पर लगाम लगाने के लिए हमारी सरकार कब कदम उठाती है ! दुआ करूंगा कि भारत पाकिस्तान नेपाल बंगलादेश एक साथ एक संघ राष्ट्र का निर्माण करें और हम ईद पर होली के उत्साह से ,गले मिलकर, नफरत की करवटें लेना छोड़, आराम की नींद सो सकें ! 

Wednesday, January 16, 2019

हे प्रभु ! मेरे देश में ढोरों से बदतर, लोग क्यों - सतीश सक्सेना

हे प्रभु ! इस देश में इतने निरक्षर , ढोर क्यों ?
जाहिलों को मुग्ध करने को निरंतर शोर क्यों !

अनपढ़ गंवारू जान वे मजमा लगाने आ गए 
ये धूर्त, मेरे देश में , इतने बड़े शहज़ोर क्यों ?

साधु संतों के मुखौटे पहन कर , व्यापार में   
रख स्वदेशी नाम,सन्यासी मुनाफाखोर क्यों !

माल दिलवाएगा जो, डालेंगे अपना वोट सब 
देश का झंडा लिए सौ में, अठत्तर चोर क्यों !

आखिरी दिन काटने , वृद्धाएँ आश्रम जा रहीं !
बेटी बिलख रोई यहाँ,इस द्वार टूटी डोर क्यों !

Saturday, January 5, 2019

अब एक जमुना नाम का नाला है , मेरे शहर में -सतीश सक्सेना

खांसते दम ,फूलता है 
जैसे लगती जान जाए 
अस्थमा झकझोरता है, 
रात भर हम सो न पाए
धुआँ पहले खूब था अब  
यह धुआँ गन्दी हवा में 
समय से पहले ही मारें,
चला दम घोटू पटाखे ,
राम के आने पे कितने 
दीप आँखों में जले,अब 
लिखते आँखें जल रही हैं ,जाहिलों के शहर में !

धूर्त,बाबा बन बताते 
स्वयं को ही राज्यशोषित 
और नेता कर रहे नेतृत्व  
को अवतार घोषित ! 
चोर सब मिल गा रहे हैं 
देशभक्ति के भजन ,
दिग्भ्रमित विस्मित खड़े 
ये,भेडबकरी मूर्खजन !
राजनैतिक धर्मरक्षक 
देख ठट्ठा मारते, अब 
राम बंधक बन चुके हैं , कातिलों के शहर में !

सुगन्धित खुशबू बिखेरें
फूल दिखते ही नहीं हैं
जाने कब भागीरथी भी
मोक्षदायिनि सी रहीं हैं 

कृष्ण की अठखेलियाँ भी 
थीं, कभी कृष्णा किनारे
उस जगह रोती हैं गायें , 
अपने केशव को पुकारें 
किस गली खोये स्वर्ण
अवशेष  मेरे देश के  ?
हाँ , एक जमुना नाम का नाला है , मेरे शहर में !

Thursday, November 8, 2018

कल दिवाली मन चुकी है ,जाहिलों के शहर में -सतीश सक्सेना

खांसते दम ,फूलता है 
जैसे लगती जान जाए 
अस्थमा झकझोरता है, 
रात भर हम सो न पाए
धुआं पहले खूब था अब  
यह धुआं गन्दी हवा में 
समय से पहले ही मारें,
चला दम घोटू पटाखे ,
राम के आने पे कितने 
दीप आँखों में जले,अब 
लिखते आँखें जल रही हैं ,जाहिलों के शहर में !

धूर्त, बाबा बन बताते 
स्वयं को ही राज्यशोषित 
और नेता कर रहे हैं ,  
स्वयं को अवतार घोषित 
चोर सब मिल गा रहे हैं 
देशभक्ति के भजन ,
दिग्भ्रमित विस्मित खड़े 
ये,भेडबकरी मूर्खजन !
राजनैतिक धर्मरक्षक 
देख ठट्ठा मारते, अब 
राम बंधक बन चुके हैं , जाहिलों के शहर में ! 

Tuesday, May 22, 2018

भगवा लिवास को कभी लुच्चा नहीं कहते -सतीश सक्सेना

हम मुफ्त में सूरज को भी अच्छा नहीं कहते !
इस देश में अच्छे को ही,अच्छा नहीं कहते !

बच्चों को भूल पर तो माफ़ कर ही दें ,मगर 
कम उम्र,नर पिशाच को ,बच्चा नहीं कहते !

आधार हिल रहा यहाँ  , बचपन से ,नशे में !
इस पाशविक प्रवृत्ति को,कच्चा नहीं कहते !

उस रात एक स्वप्न का , दम घोट चुका है ,
बच्चा है ये शैतान का , टुच्चा नहीं कहते !

बस्ती में जाहिलों की,चोर डाकुओं को भी 
भगवा लिवास में, कभी लुच्चा नहीं कहते ! 

सारे डकैत  मिल के , चोर चोर  कह रहे !
अरविन्द को इस देश में सच्चा नहीं कहते !




Wednesday, May 16, 2018

उनसे कहिये,चलने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !

बच जाएगा, आया ऊँट पहाड़ के नीचे   
उंची गर्दन, नीची करके , चाल बदल ले !

तीखी उनकी धार , नहीं दरबार सहेगा !
चंवर बादशाही से ही,तलवार बदल लें  !

कोई मसालेदार खबर इन दिनों न आई 
उनको कहिये अपने गोतामार बदल लें !

Thursday, March 22, 2018

तीक्ष्ण अभिव्यक्ति को,खतरे भी उठाने होंगे - सतीश सक्सेना

आस्था को  ही, प्रायश्चित्त उठाने होंगे !
ढोंगियों के दिए  ,वरदान भुलाने होंगे  !

रूप संतों का रखे , चोर - उचक्के पूजे ,
बीच गंगा में  ये , अपराध बहाने होंगे !

एक दिन आँख खुलेंगीं जरूर भक्तों की
जाहिलों को ही , सभी ढोंग गिराने होंगे !

अब न गुरुदेव मिलेंगे किसी डेरे में यहाँ 
लम्बी दाढ़ी रखे , ये धूर्त  भगाने  होंगे !

झूठ के बीज को , जड़ से समाप्त करने को
तीक्ष्ण अभिव्यक्ति को,खतरे भी उठाने होंगे !

Tuesday, March 20, 2018

जय किसान के, मक्कार खोखले नारे - सतीश सक्सेना

इस देश की भ्रष्ट राजनीति ने किसानों की कभी परवाह नहीं की उन्हें हमेशा भेंड़ बकरियों की तरह गांव के
मजबूत प्रधानों, मुखियाओं के बाड़े में रखा जाता रहा जिसे तोड़ कर बाहर निकलने का साहस न इन अनपढ़ों गंवारों में पहले था और न आज है !
उनका देश में बहुमत हमेशा था और वोट डालते समय उन्हें घरों से निकालने का काम ग्राम सरपंच और मुखियाओं के जिम्मे था जो उनके बताये निशान पर वोट डालते थे !
उन्हें यह पूंछने का अधिकार कभी नहीं था कि हम किसे वोट दे रहे हैं और 70 प्रतिशत गांवों में आज भी नहीं है , पूंछने का अर्थ जुर्रत करना था और गाँव के दबंगों के लिए यह अपराध, माफ़ी योग्य न तब था और न अब है !

यवतमाल यात्रा के समय मैं उनकी दुर्दशा देखकर आश्चर्यचकित था और साथ ही शर्मिंदा भी कि हम आज भी एक अनपढ़ अविकसित देश के नागरिक हैं जहाँ मानवता का कोई मूल्य नहीं जहाँ सत्ता सिर्फ राजाओं की
बपौती है जहाँ हमें जानवरों की तरह ही जीना है और उनका मुखियाओं का आदेश मरते दम तक मानना है !
जुड़ा हमारा जीवन गहरा ,भोजन के रखवालों से !
किसी हाल में साथ न छोड़ें,देंगे साथ किसानों का
इन्द्र देव  की पूजा करके, भूख मिटायें मानव की  
राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का !

Wednesday, February 21, 2018

बूढ़े होते हताश मन को, बच्चों सा नचाने को दौड़ें -सतीश सक्सेना

रिश्तों  में होते झगडे का , अवसाद मिटाने को दौड़ें !
बूढ़े होते हताश मन को , बच्चों सा नचाने को दौड़ें !

कमजोर नजर जाने कब से , टकटकी लगाए दरवाजे 
असहाय अकेली अम्मा के,आंसू को सुखाने को दौड़ें ! 

उसने अपना पूरा जीवन, केवल तुम पर कुर्बान किया  
तेरा वैभव काम नहीं आया,ये ग्लानि मिटाने को दौड़ें !

जैसे ही दौलतमंद बने, मेहनत त्यागी, बेकार हुए  
बरसों से जकड़े घुटनों को , दमदार बनाने को दौड़ें !

आजाद देश में देशभक्त, उग आये कुकुरमुत्तों जैसे
खादी पहने इन धूर्तों की , पहचान कराने को दौड़ें !

Friday, February 9, 2018

उम्मीदें कुछ कम कर बेटा -सतीश सक्सेना

अर्थ अनर्थ है,अक्सर बेटा !
शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !


क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में ,
धड़कन,न तलाश कर बेटा !

सूख गए , तालाब प्यार के
अब न रहे, पद्माकर बेटा !

इस निष्ठुर जंगल में तुमको
मिलें खूब , आडम्बर बेटा !

अच्छे दिन जुमले हैं केवल,
उम्मीदें कुछ कम कर बेटा !


Monday, January 8, 2018

करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !-सतीश सक्सेना


आग लगाई संस्कारों में 
सारी शिक्षा भुला गुरु की
दाढ़ी तिलक लगाये देखो  
महिमा गाते हैं कुबेर की !
डर की खेती करते,जीते 
नफरत फैला,निर्मम गीत !
करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !

खद्दर पहने नेतागण अब
लेके चलते , भूखे खप्पर,
इन पर श्रद्धा कर के बैठे
जाने कब से टूटे छप्पर !
टुकुर टुकुर कर इनके मुंह 
को,रहे ताकते निर्बल गीत !
कौन उठाये  नज़रें अपनी , इनके टुकड़े खाते  गीत !

धन कुबेर और गुंडे पाले 
जितना बड़ा दबंग रहा है
अपने अपने कार्यक्षेत्र में 
उतना ही सिरमौर रहा है 
भेंड़ बकरियों जैसी जनता,
डरकर इन्हें दिलाती जीत !
पलक झपकते ही बन जाते सत्ताधारी, घटिया गीत !

जनता इनके पाँव  चूमती
रोज सुबह दरवाजे जाकर
किसमें दम है आँख मिलाये 
बाहुबली के सम्मुख आकर  
हर बस्ती के गुंडे आकर 
चारण बनकर ,गाते गीत !
हाथ लगाके इन पैरों को, जीवन धन्य बनाते गीत !

लोकतंत्र के , दरवाजे पर 
हर धनवान जीतकर आया
गुंडा राष्ट्र भक्त कहलाया 
राजनीति में जब पद पाया
अनपढ़ जन से वोट मांगने,
बोतल ले कर मिलते मीत !
बिका मीडिया हर दम गाये, अपने दाताओं के गीत !

खादी कुरता, गांधी टोपी,
में कितने दमदार बन गये  !
श्रद्धा और आस्था के बल 
मूर्खों के  सरदार बन गये !
वोट बटोरे झोली भर भर, 
देशभक्ति के बनें प्रतीक ! 
राष्ट्रप्रेम भावना बेंच कर, अरबपति बन जाएँ गीत !

Monday, August 7, 2017

एक मित्र को दी गयी सलाह - सतीश सक्सेना


अगर परिवार में कुछ समय से बिना कारण एक घातक लड़ाई का वातावरण तैयार हो चुका हो तो आपस में न लड़कर शांत मन से तलाश करें कि घर में कोई भेड़िया तो नहीं आ गया जिसे आपने कुत्ता समझकर घर की चौकीदारी ही सौंप दी हो !


अगर हम तुम्हें , बिन मुखौटे के पाते ! 
असल देखकर बस दहल ही तो जाते !
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