Friday, November 13, 2020

दरी बिछाकर फटी तेरे , दरवाजे आके नाचेंगे -सतीश सक्सेना

नाम तुम्हारा ले बस्ती में , जोर शोर से गाएंगे !
दरी बिछाकर फटी तेरे, दरवाजे आके नाचेंगे !

जय जयकारों के नारों में भूले देश दुर्दशा को !
बर्तन भांडे बिके देश के , टांग उठा के नाचेंगे !

कोर्ट कचहरी सारे तेरे, जेल मिले, गर बोले तो 
घर की जमा लुट गई, नंगे घर के आगे नाचेंगे !

हमें पता है कोई हरा न पाए, तुझको वोटिंग में 
भुला जांच आयोग हम तेरे घर के आगे नाचेंगे !

ब्रह्मर्षि अवतारी जैसे भारत रत्न ने, जन्म लिया !
सकल समाज नपुंसक पा के डर के मारे नाचेंगे !

7 comments:

  1. दीप पर्व की मंगलकामनाएं। सुन्दर सृजन।

    ReplyDelete
  2. सुन्दर प्रस्तुति

    ReplyDelete
  3. कोर्ट कचहरी सारे तेरे, जेल मिले गर बोले तो
    घर की जमा लुट गई, नंगे घर के आगे नाचेंगे !
    बहुत खूब सतीश जी👌👌👌
    जब व्यवस्था के नैतिक मूल्य खंडित हो जाएं तो इस तरह की साहसिक जुबान अस्तित्व में आती है। हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🙏🙏🙏

    ReplyDelete
  4. बहुत सही कटाक्ष. बहुत बढ़िया.

    ReplyDelete
  5. बहुत सुन्दर

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,