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Monday, October 7, 2013

राजा हैं वे, औ हम है प्रजा , वे और बढ़ावा क्या देते - सतीश सक्सेना

अच्छा है दिखावे ख़त्म हुए , वे हमें कलावा क्या देते 
मंदिर में घुसने योग्य नहीं , वे हमें  चढ़ावा क्या देते ! 

जाते जाते,बातें करके,कुछ उखड़ा मन बहलाये थे !

वे अपने चेहरे दिखा गए , वे और छलावा क्या देते !

उसदिन तो हमारी तरफ देख ,वे हौले से मुस्काये थे !
राजा हैं वे,औ हम है प्रजा, वे और बढ़ावा क्या देते !

उस दिन देवों ने , उत्सव में, नर नारी भी बुलवाए थे ! 
बादल गरजे,बिजली चमकी,वे और बुलावा क्या देते !

रुद्राभिषेक करने हम तो,परिवार सहित जा पंहुचे थे  !
भक्ति के बदले मुक्ति मिली,वे इसके अलावा क्या देते !




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