अच्छा है दिखावे ख़त्म हुए , वे हमें कलावा क्या देते
मंदिर में घुसने योग्य नहीं , वे हमें चढ़ावा क्या देते !

जाते जाते,बातें करके,कुछ उखड़ा मन बहलाये थे !
वे अपने चेहरे दिखा गए , वे और छलावा क्या देते !
उसदिन तो हमारी तरफ देख ,वे हौले से मुस्काये थे !
राजा हैं वे,औ हम है प्रजा, वे और बढ़ावा क्या देते !
उस दिन देवों ने , उत्सव में, नर नारी भी बुलवाए थे !
बादल गरजे,बिजली चमकी,वे और बुलावा क्या देते !
रुद्राभिषेक करने हम तो,परिवार सहित जा पंहुचे थे !
भक्ति के बदले मुक्ति मिली,वे इसके अलावा क्या देते !
मंदिर में घुसने योग्य नहीं , वे हमें चढ़ावा क्या देते !
जाते जाते,बातें करके,कुछ उखड़ा मन बहलाये थे !
वे अपने चेहरे दिखा गए , वे और छलावा क्या देते !
उसदिन तो हमारी तरफ देख ,वे हौले से मुस्काये थे !
राजा हैं वे,औ हम है प्रजा, वे और बढ़ावा क्या देते !
उस दिन देवों ने , उत्सव में, नर नारी भी बुलवाए थे !
बादल गरजे,बिजली चमकी,वे और बुलावा क्या देते !
रुद्राभिषेक करने हम तो,परिवार सहित जा पंहुचे थे !
भक्ति के बदले मुक्ति मिली,वे इसके अलावा क्या देते !
