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Friday, April 8, 2011

आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता है .... -सतीश सक्सेना

डॉ अमर कुमार का कहना है कि ...
"अब लीजिये, शरदपवार भये अमर कुमार : यहाँ कुछ यही बानगी है, आज मैंने स्वयं से अनुमति लेकर, अपने वेवकैम से अपना ही फोटो अपने हाथों खींचा है । जिसमें कुछ कलाकारी करने का असफल प्रयास भी शामिल है । अस्थायी रूप से मेरा थोबड़ा बिगड़ गया तो क्या, मैं गर्व से यह तो पूछ ही सकता हूं । सर जी, फोटो ठीक आयी है ?"

           अगर ब्लोगिंग में बहादुरी की मिसाल देखनी है , तो राय बरेली चलें डॉ अमर कुमार से मिलने  !  कानपूर मेडिकल कॉलेज से  एम् बी बी एस  डॉ अमर कुमार , देश में हिंदी विकास के लिए ,समर्पित गिने चुने योद्धाओं में से  एक हैं ! और ब्लोगिंग में अपनी बेवाक भाषा के लिए मशहूर हैं !  
                  अगर अचानक किसी मस्तमौला और हँसते हुए सर्वसम्पन्न इंसान को यह कहा जाए कि उसे कैंसर है तो शायद अच्छे भले पहलवानों  को पसीने छूट जायेंगे ! ऐश्वर्यशाली  जिन्दगी के एक खराब मोड़ पर, खुद  डॉ अमर कुमार को यह पता नहीं चला कि लोगों का इलाज़ करते करते  वे खुद कैंसर वार्ड में दाखिल हो चुके हैं !

              शानदार सुदर्शन व्यक्तित्व के मालिक अमर कुमार, कैंसर ओपरेशन के बाद का, अपने  बदले  चेहरे  का फोटो , अपने  नए लेख के साथ प्रदर्शित करते हुए लिखते हैं ,कि अमर कुमार भी, अब शरद पवार जैसे लग रहे हैं ! :-(

           कम से कम मेरे लिए यह पढना बेहद दर्दनाक  रहा ! शायद मैं,  हँसते हुए कह रहे, डॉ अमर कुमार की वेदना को महसूस कर पाया था ! इन शब्दों को पढ़ते हुए मेरा मस्तक इस कर्मयोगी के आगे अनायास ही झुक गया ! वन्दनीय है यह बहादुरी ! जीवन में दर्दनाक क्षणों को , हँसते हुए क्षणों की तरह ही जीना है ! यह समय भी कट जाएगा ! कल का किसी को कुछ नहीं पता ...... 

           यह पोस्ट लिख दी ताकि मेरे बच्चों को एक शिक्षा मिल सके कि बहादुरी के साथ शानदार जीवन कैसे जिया जाता है ! 
आ बता दें कि तुझे कैसे जिया जाता है .....
(यू ट्यूब  से साभार ) 


डॉ अमर कुमार का इस पोस्ट पर दिया गया कमेन्ट , मैं पोस्ट का हिस्सा बनाना चाहता हूँ , शायद यह प्रेरणास्पद शब्द ,हम सबको कुछ समझा सकें ..


यहाँ अब तक उपस्थित सभी शुभाकाँक्षियों को मेरा विनम्र अभिवादन !
सँदेश साफ़ है.. जो अपरिहार्य है, उसे हँस कर स्वीकार करिये । बिसूरने से.. रोने चिल्लाने से आपकी सज़ा की मियाद कम न होगी.. उल्टे दर्द और बढ़ ही जायेगा । जब तक जीवित हो, बुरे से अच्छों के पक्ष में लड़ते रहो.. कल कोई तुम्हें याद भले ही न करे... पर तुम उन अच्छाईयों में ज़िन्दा रहोगे ।
गीतकार के शब्दों में... नाम गुम जायेगा... चेहरा यह बदल जायेगा.. मेरी आवाज़ ही पहचान है.. ग़र याद रहे ।

Wednesday, December 22, 2010

डॉ अमर कुमार के लिए प्रार्थना - सतीश सक्सेना

डॉ अमर कुमार की एक टिप्पणी जो उन्होंने कैंसर वार्ड से लिखी है, प्रकाशित कर रहा हूँ ! 
Wow Satish Bhaiya, 
I read your mail today only, after recovering a lot from a crisis.
I was the first man to offer my proposal in the likewise manner to The Gupt Duo, I could understand their grief of parting with their dream project.
I took interest and suggested some modifications in Blogprahari,he kindly honored them too... but He was taken for ride, rather lured for a ride by few stalwarts and he Gone Gudum, the fellow kanishk Kashyap !

I own my personal website AMARHINDI and some technical resources too, So I planned an agregater in detail with Kush... BUT THE IRONY OF THE SCENARIO IS A BITTER TRUTH that we need a segregator not an agregater... 
who can categorically sort out the region, topic, and GUTwise ;)Posts.

Sorry for such an inexpressive english.. but chalega, I am already being moderated in this Cancer Ward !



अपनी जीवंत टिप्पणियों से, ब्लॉगजगत को जागरूक करते, अमर कुमार को कैंसर वार्ड में देखना , निस्संदेह एक बुरा सपना है ! मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूँ कि वे आपरेशन के बाद, इस भयानक रोग द्वारा , कम से कम क्षति लेकर बाहर आयें  और हमें जागरूक करने का काम दुबारा शुरू करें !!
डॉ अमर कुमार को पूरे प्यार और सम्मान सहित शुभकामनायें !


पुनश्च :
उनसे मिले एक मैसेज के अनुसार जबड़े के कैंसर का आपरेशन ६ घंटे तक चला है, इससे इस बीमारी की भयावहता पता चलती है मगर उनकी जीवन्तता हम सबके लिए अनुकरणीय है...आप उनकी मस्ती की झलक इस मोबाइल मेसेज में देख सकते हैं ....


" Had jaw cancer, got an 7 hour marathon commando surgery last Monday . Do not worry I am ok and will continue to haunt the blogwud for several years. unable to speak clearly for next 3 months. chalega ....sab chalega bhai !
sab manjoor ! "

उनकी यह बीमारी हम सबके लिए चिंता का विषय है , आइये हम प्रार्थना करें कि वे शीघ्र ठीक होकर, हमारे बीच उसी ठसक के साथ आयें !

Monday, August 30, 2010

डॉ अमर कुमार ! एक बेहतरीन व्यक्तित्व - सतीश सक्सेना

ब्लाग जगत में  जिन उस्तादों को पसंद करता रहा हूँ वे धीरे धीरे अपने असली रंग में दिखने लगे हैं और  मुझे अपनी नादान समझवश ,पहचानने में बहुत समय लगा ! मगर एक डॉ अमर कुमार जरूर  ऐसे रहे जो अपने आपको नहीं बदल पाए  ! तीखे और चुभने वाले कमेन्ट के लिए मशहूर अमर दादा कहीं नहीं बिक पाए ..... किसी गैंग में भी शामिल नहीं हो पाए ! सो यह जबरदस्त शख्शियत इस ब्लाग जगत में कम आकलन का शिकार सी रही है  ,आज का यह लेख उन्ही को समर्पित कर रहा हूँ !

कल उनका जन्म दिन था और मुझे पाबला जी द ग्रेट   की बदौलत आज ही पता चला !


कल  ब्लाग जगत के एक निठल्ले तरुण  ने  दुसरे निठल्ले पर एक बड़ी प्यारी पोस्ट लिखी  बदकिस्मती से यह बेहतरीन पोस्ट लोगों की निगाह में नहीं आ पायी अतः सोचा कि अमर दादा के लिए कुछ लिख कर अपने  बेकार लेखों  की श्रंखला में कुछ अच्छा भी लिख सकूं !   


मैं एक नासमझ ब्लागर के नाते, इस बेहतरीन निष्पक्ष ब्लागर को  आज तक समझ नहीं पाया , हर जगह और हर महत्वपूर्ण विषय पर आपको यह मिल जाते हैं अपनी विशिष्ट शैली में साफ़ साफ़ बोलते हुए ! शायद ब्लाग जगत के सबसे अच्छे जानकारों में से एक डॉ अमर कुमार को आम ब्लागर समझने में बहुत समय लगाएगा  ! मगर निस्संदेह वे उन सर्वश्रेष्ठ ईमानदार लोगों में से एक हैं जिन्हें ब्लाग जगत की सबसे अधिक समझ है  !     

कभी उलझे अमर , 
कभी दादा अमर, 
कभी जल्दवाज अमर, 
कभी गुस्सैल अमर, 
कभी महीनों गायब रहने वाले लडाका अमर, 
और कभी रख्शंदा जैसी प्यारी लड़की को दुलारते हुए अमर कुमार, पूरे ब्लाग जगत में अलग खड़े नज़र आते हैं ! मगर मैं इन्हें डरते हुए पसंद करता हूँ जो मस्त जवानों की ऐसी तैसी करने की सम्पूर्ण क्षमता रखते हैं और खुद मस्त रहते हैं !


लिंक्डइन प्रोफाइल में अनके प्रति मेरे कमेंट्स आपके लिए नज़र करता हूँ.... 

"Dr Amar Kumar, a Graduate in Medicine, is not only one of the most honest,empathetic in nature and a fearless writer of hindi language, but also having dynamic command over vast social subjects and heritage of Indian society and culture, he has the caliber to fight against injustice. Besides managing and practicing own nursing home successfully he is also able to devote time to serve his own national language with great zeal"

कहीं इन्हें हमारी नज़र न लग जाए .... 
खुदा महफूज़ रखे हर बला से हर बला से 



मगर मैं इनकी तारीफ़ क्यों कर रहा हूँ इससे तो ब्लागर इन्हें मेरा गुरु मान लेंगे :-( .....
ऐसा करते हैं यह लेख किसी अनाम का मान लें तो अच्छा होगा ! अपने नाम से तारीफ़ करना ठीक नहीं कहीं अमर कुमार से कल को लड़ाई हो गयी तो इन्हें गरिया भी न पाऊंगा  !
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