Showing posts with label संस्मरण. Show all posts
Showing posts with label संस्मरण. Show all posts

Monday, April 25, 2022

अब और न कुछ कह पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !

अब और न कुछ कह  पाऊंगा, मन की अभिव्यक्ति मौन सही !
कुछ लोग बड़े आहिस्ता से
घर के अंदर , आ जाते हैं !
चाहे कितना भी दूर रहें ,
दिल से न निकाले जाते हैं !
ये लोग शांत शीतल जल में
तूफान उठाकर जाते हैं !
सीधे साधे मन पर, गहरे 
हस्ताक्षर भी कर जाते हैं !
कहने को बहुत कुछ है लेकिन, अब यह अभिव्यक्ति मौन सही  !

इस रंगमंच की दुनिया में
गहरी चोटें खायीं हमने !
कितनी ही रातें नींद बिना   
किस तरह गुजारीं हैं हमने 
जब दिल पर गहरे जख्म लगे 
कुछ आकर मरहम लगा गए 
इन प्यारों द्वारा ही कड़वे 
अवशेष मिटाये जाते हैं !
अहसान न अपनों का होता सो यह अभिव्यक्ति मौन सही !

कुछ चित्रकार आसानी से 
निज चित्र, उकेरे जाते हैं !
आहिस्ता से मुस्कानों के 
गहरे रंग , छोड़े जाते हैं !
पत्थर पर निशाँ पड़े कैसे 
अनजाने, दिल में कौन बसा 
अनचाहे स्मृति चिन्ह बने 
मेटे न मिटाये , जाते हैं !
कहने को जाने कितना है पर यह अभिव्यक्ति मौन सही !

Friday, September 14, 2018

जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना

जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में  साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं ब्रैटवुस्ट नामक पोर्क या बीफ या टर्की के बने सॉसेज होते हैं ! साथ में सलाद टमाटर एवं अचार (gherkins) एक्स्ट्रा स्वाद देते हैं !

यहाँ लोग नाश्ते में यह लोग अधिकतर ब्रेड टोस्ट , ब्रेड रोल जिसमें शहद, मार्मलेड , अंडे एवं हैम, सलामी एवं सॉसेज लेना पसंद करते हैं , जिसके बाद गर्म कॉफी, कोको या चाय पीते हैं ! कॉफी यहाँ चाय से अधिक लोकप्रिय है !

यूरोप में अधिकतर लोग मीट प्रोडक्ट पर निर्भर होते हैं इनके भोजन में किसी न किसी रूप में मीट, उपलब्ध अवश्य होगा सो हमवेजीटेरियन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ! जल्दबाजी में ख़रीदे, रेडीमेड पास्ता एवं टू मिनट नूडल्स पहला  चम्मच खाने के बाद ही फेंकने पड़े !


मगर यूरोप में हम वेजिटेरियन लोगों का सहारा, पीता ब्रेड ( ग्रीक रोटी ) होती है जो अकसर यूरोपियन स्टोर में उपलब्ध रहती है , इसे खरीद कर बटर का उपयोग कर अपना देशी परांठा बनाया जा सकता है ! साथ में आलू उबालकर सूखी सब्जी बनाना अधिक मुश्किल काम नहीं , सहारे के लिए स्टोर्स में तरह तरह के योगर्ट ( दही ) उपलब्ध होता है ! 

म्यूनिख बवेरिया स्टेट की राजधानी है जो अपने बियर गार्डन के लिए मशहूर है , जहाँ खुले में बड़े मैदान में अथवा गार्डन में हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है और फ्रेश बियर सर्व की जाती है , देखने में यह एक ऐसा खुला रेस्टॉरेंट लगता है जहाँ लोग इकट्ठे होकर किसी राष्ट्रीय त्यौहार पर एक साथ बियर पीकर, ख़ुशी मना रहे हों ! कुछ मायनों में हमारे देश के एक बड़े ढाबे जैसा माहौल होता है मगर एक विशेषता लिए होता है कि हजारों लोगों में से एक भी इंसान जोर से न बोलता है और न झूमता है !

आप किसी भी जर्मन मार्किट में चले जाएँ सड़क किनारे रेस्टुरेंट के फुटपाथ पर कुर्सियों पर बैठे लोग बियर पीते मिलेंगे मगर एक शालीनता और सभ्यता के साथ बिना किसी शोर शराबे के ! मैंने यहाँ हार्ड ड्रिंक्स, शराब, स्कॉच आदि बहुत
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !

हाँ, हम जैसे देसी वेजिटेरियन लोग भी मिलेंगे जिन्हें वहां बियर के साथ, उबले अंडे या नमकीन तो मिलने से रही सो विकल्प के रूप में वेज ब्रेड, ऑलिव्स और चीज़ की तलाश करते हैं ! जर्मन बेकरी सबसे अधिक व्यस्त दुकाने हैं जहाँ विभिन्न स्वाद की देश विदेश की नमकीन एवं मीठे ब्रेड , बिस्किट एवं केक उपलब्ध हैं जिनको खाने से मन नहीं भरता !
एक दिन बेहद भूख लगने पर मैंने बाजार से दो शहद की बिस्कुट जिनका वजन ५० ग्राम होगा फिलाडेल्फिया चीज के साथ खायीं तो भूख ऐसे गायब हुई जैसे भरपूर लंच लिया हो ! लाजवाब क्वालिटी के ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट हमारे देश में दुर्लभ हैं , इन प्रोडक्ट के साथ अक्सर लोग सूप, कोकोकोला पीना पसंद करते हैं जिन्हें हमारे देश में देशी व्यापारियों ने त्याज्य घोषित कर दिया गया है !
Swimming in Sea  

कैटालोनिया कोस्ट पर बसे बार्सिलोना का नाम, यूरोप के उन बेहद खूबसूरत शहरों में शामिल होता है जो विश्व के टूरिस्ट नक़्शे में विख्यात हैं ! यह शहर नार्थ स्पेन रीजन में, मेडिटेरेनियन समुद्र तट पर , बसा है तथा अपने विशेष कैटलॉन संस्कृति, गौरव तथा व्यक्तित्व के लिए, एक अलग पहचान रखता है !

कल म्यूनिख से बार्सिलोना, स्पेन पंहुचे थे , एयरपोर्ट से ही 5 दिन का होला बार्सिलोना अनलिमिटेड पास (हेलो बार्सिलोना) ले लिया था, अन्यथा टैक्सी से एयरपोर्ट से शहर अपने अपार्टमेंट तक पंहुचने में ही लगभग 5000 रूपये पड़ जाता ! यह
बार्सिलोना टूरिस्ट  पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था ! 

मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं ! 

अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस,  आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !

जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड , फ्रांस, स्पेन  सब जगह शहरी सप्लाई का पानी, पीने योग्य माना जाता है मगर स्वाद मीठा नहीं होता, हम भारतीयों को म्युनिसिपल सप्लाई वाटर में, नाले का पानी, मुफ्त में मिक्स होकर मिलने के कारण, हर घर में आर ओ ( रिवर्स ओसमोसिस )लगाना ही पड़ता है जोकि पीने में मीठा होता है मगर यूरोप के घरों में आर ओ कहीं नहीं देखा !  बाजार में बिकने वाला पानी मिनरल वाटर के रूप में उपलब्ध है जो बेहद मंहगा पड़ता है ! RO का नुकसान एक ही है कि वह पीने के पानी से, मानव शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्सियम, मैग्निसियम को भी नष्ट कर देता है जो कि हमारे लिए बेहद आवश्यक हैं शुक्र है कि हमारा शरीर यह मिनरल्स भोज्य सामग्री से आसानी से जुटा लेता है ! दूध, बियर और जूस से अधिक महंगा , आधा लीटर पानी का भाव भी ढाई यूरो है सो अक्सर पानी की जगह बियर से काम चलाने  के लिए तैयार रहना होगा !
बहरहाल यूँ देखने में यूरोप महंगा लगेगा मगर यहाँ कम पैसों में भी आराम से घूमा जा सकता , पूरे दिन का भोजन के लिए 6 से 10 यूरो में काम चल सकता है मगर यदि रेस्टॉरेंट में लंच और डिनर लेना है तो यही खर्चा 40 यूरो तक बैठेगा ! 

Wednesday, September 5, 2018

जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना

टिकट मशीन 
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए   बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से,  2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी !  


राज भाटिया के साथ 
अगर यूरोप में वास्तविक प्राकृतिक खूबसूरती और रहनसहन का माहौल देखना हो तो किसी गांव में जा कर देखिये आपको आनंद आ जाएगा ! राज भाटिया म्यूनिख से लगभग ४५ km दूर एक गाँव इज़ेन में रहते हैं , उनका आमंत्रण पहले दिन से मेरे पास था मगर जाने का मौका कल मिला जब मैं किसी को छोड़ने एयरपोर्ट गया था और मेरी जेब में पूरे म्यूनिख नेटवर्क का पास था ! मैंने अपने आने के बारे में उन्हें इन्फॉर्म किया तो उनका कहना था कि आप गाँव तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न आएं बल्कि मैं आपको लेने आपके नजदीकी स्टेशन श्वाबिन मार्किट तक आ रहा हूँ आप वहीँ पर मेरा इंतज़ार करें ! जब मैं वहां पंहुचा तो राज भाई अपनी ऑडी के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! खूबसूरत साफ सुथरे रास्तों से होते हुए जब उनके गांव पंहुचे तो हमारे जैसा गांव तो कहीं नजर नहीं आया समझ ही नहीं आया की प्रकृति का इतना सुंदर नज़ारा और शोर शराबे रहित, शांत जगह जहाँ धूल का नामोनिशान न हो , गाँव कैसे हो सकता है ! अगर हमारे देश में, शहर के नजदीक गलती से भी ऐसे गांव रहे होते तो निश्चित ही वहां बड़े सरकारी अधिकारियों के निवास स्थान बन गए होते और उसे सिविल लाइन्स का नाम दिया जाता क्योंकि शहर के सबसे बेहतरीन एरिया में रहने का हक़ कलक्टर एन्ड कंपनी का ही होता है ! बाकी तो सब कीड़े मकोड़े हैं कहीं भी रह लेंगे  ...... 


हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं  यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी ! 

उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं  ..... 

एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! 

इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें 
छोटा लिफाफा होगा जिसे वह कुत्ते का पूप कलेक्ट करने के लिए रखता है इसके अलावा पगडण्डी के साथ साथ एक छोटा बक्सा होगा जिससे कोई भी लिफाफा निकाल सकता है किसी भी हालत में, कोई व्यक्ति  कुत्ते की पूप बाहर नहीं फेंकेगा ! 

यहाँ कौन देख रहा  .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था  .....

इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में  लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह  जमकर 
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !

यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
मुसीबत में हैं तब डिस्ट्रेस कॉल में एम्बुलेंस पंहुचने का समय ३ मिनट और अगर डॉ उपलब्ध न हो तो हैलकॉप्टर एम्बुलेंस तत्काल हाजिर होगी और मुफ्त का इलाज होगा ! राज भाई के 3 हार्ट ऑपरेशन हुए और बिलकुल मुफ्त , बदकिस्मती से आपके घर में बच्चे आपका ख़याल रखने और तीमारदारी करने को उपलब्ध नहीं हों तो नर्स की मुफ्त सेवा है आपका एक पैसा खर्च नहीं होगा ! सारा भारी भरकम बिल का खर्चा इंस्युरेन्स कम्पनियाँ उठाएंगी और बिना वह भी किसी लिखा पढ़ी के, सीधा हॉस्पिटल के साथ  !

शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !

यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं ! 

राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ! 

Sunday, July 29, 2018

आसान यूरोप यात्रा -सतीश सक्सेना

इस बार यूरोप यात्रा का संयोग गौरव की जर्मनी पोस्टिंग के कारण हुआ उसकी इच्छा थी कि पापा और माँ मेरे पास लम्बे समय आकर रहें सो पहली बार घर को लगभग ढाई महीने के लिए छोड़ने का फैसला किया पिछली पोस्ट पर मित्रों का अनुरोध था कि इस यात्रा का विवरण लिखूं सो यह पोस्ट आवश्यक हो गयी है !
यूरोपियन ढाबा पर जौ का रस, मशहूर ब्रेड, ब्रीज़ल के साथ !

-विदेश यात्रा को अधिकतर लोग हौआ मानते हैं और उस पर अक्सर बात करने से या जाने की योजना बनाने से झिझकते ही नहीं बल्कि सोंचने में भी कतराते हैं और इसके पीछे धन का अभाव न होकर अक्सर आत्मविश्वास की कमी ही होती है कुछ अन्य कारण निम्न हैं  ....

- पहला कारण विदेशियों से कम्युनिकेशन में आत्मविश्वास का न होना, अधिकतर का मानना है कि उनकी बेहतरीन फर्राटेदार इंग्लिश समझना और बेहतरीन इंग्लिश में बात करना बहुत मुश्किल है जबकि वास्तविकता इसके उलट है लगभग पूरे विश्व में सामान्य विदेशियों की इंग्लिश काफी कमजोर है अधिकतर जगह पर वे टूटी फूटी इंग्लिश में और हावभाव के साथ ही संवाद करते हैं और तो और हमारी मैडम एयरपोर्ट से लेकर शानदार मॉल तक में धड़ल्ले से अपनी हिंगलिश और हिंदी मिलाकर चमत्कृत करने वाली देसी अंग्रेजी में जर्मन लोगों को समझाने में कामयाब रहीं हैं !

-झिझक का दूसरा कारण विदेश यात्रा में अधिक खर्चे का अनुमान होना होता है जबकि यह कई बार देशी यात्रा से भी कम बैठता है ! दिल्ली से पेरिस या म्यूनिख का एक व्यक्ति के आने जाने का खर्चा लगभग 36000/- है और लगभग 5000 रूपये प्रति दिन में अच्छा होटल मिल जाता  है जिसमें एक समय का खाना शामिल होता है ! इस प्रकार एक मध्यम आय वाले पति पत्नी, सवा लाख रूपये में, ५ दिन के लिए रोम जाकर बापस आ सकते हैं !

-विश्व के किसी भी भाग की यात्रा, बिना जानकारी करना पहले असंभव थी जबकि अब इन यात्राओं को गूगल ने बेहद आसान बना दिया है, अगर स्मार्ट फोन आपके पास है तब आप कहीं किसी शहर में खो नहीं सकते, जीपीएस टेक्नोलॉजी के जरिये आपकी लोकेशन हर वक्त आपके पार्टनर के पास होती है इसके लिए आपने अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों को अपनी लाइव लोकेशन शेयर करनी भर होती है, आजकल हर व्यक्ति को जीपीएस सिस्टम की जानकारी रखना आवश्यक है !


-आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर अनजान शहर में आपको उस शहर में कदम रखने से पहले, गूगल मैप के जरिये ,अपने बस स्टॉप और बस नंबर तक का पता चल जाता है और कितने स्टॉप बाद उतर कर किस दिशा में, कितने कदम चलना है गूगल मैप की मदद से आप अपने गंतव्य पर आसानी से पंहुच जाते हैं !

-अपना टिकिट अपने मोबाइल पर घर बैठे ऑनलाइन खरीद लीजिये और जहाँ चाहे यात्रा करिये कोई चेक करने नहीं आता न कहीं कोई रेलवे टिकिट कलेक्टर जैसा कोई इंसान दिखता, हर जगह एक भरोसा सा महसूस होता है कि आप भले इंसान हैं और चोरी नहीं कर सकते ! अगर किसी वीरान बसस्टॉप या ट्राम पर खड़े हैं तो टिकिट आपको अपने मोबाइल पर खरीदने की सुविधा है ! 

-हर सड़क पर पदयात्रियों के फुटपाथ , साइकिल के लिए अलग ट्रेक बना है ! पैदल चलते व्यक्ति को सड़क पार करते देख गाड़ियां जबतक इंतज़ार करती हैं जबतक वह इंसान सड़क पार न कर ले ! मोहल्ले में कोई शोर शराबा नहीं लेट इवनिंग में आप घर में तेज आवाज में टीवी अथवा ड्रिल से दीवार में या लकड़ी में छेद नहीं कर सकते शोर मचाना या जोर जोर से बोलना  असभ्यता की निशानी माना जाता है ! नियम पालन यहाँ का समाज अपनी जिम्मेदारी समझ कर पालन करता है !
यूरोप के विभिन्न देशों के बीच सीमा नहीं है हर व्यक्ति बिना किसी परमिट के किसी भी देश में जाने को स्वतंत्र है !

-पूरा वातावरण बेहद स्वच्छ है धूल उड़ते कहीं नहीं दिखती , इस बार मैं एक सफ़ेद शर्ट कई दिन से पहने हूँ कॉलर गंदा ही नहीं होता ! ठन्डे और साफ़ वातावरण में सुबह सुबह इसार नदी के किनारे दौड़ने का आनंद ही कुछ और है काश विश्व के देशों की सीमाएं समाप्त हो जाएँ और हम सब एक साथ मिलकर हंसना रहना सीख सकें !

कितना सुंदर सपना होता 
पूरा विश्व  हमारा  होता । 
मंदिर मस्जिद प्यारे होते 
सारे  धर्म , हमारे  होते ।  
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत । 
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।  

काश हमारे ही जीवन में 
पूरा विश्व , एक हो जाए । 
इक दूजे के साथ  बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने, 
घर से निकले मेरे गीत । 
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत । 

Friday, June 23, 2017

जाने कहाँ वे खो गए कुछ शब्द, जो बोले नहीं - सतीश सक्सेना

बरसों से सोंचे शब्द भी उस वक्त तो बोले नहीं 
जब सामने खुद श्याम थे तब रंग ही घोले नहीं !

कुछ अनछुए से शब्द थे, कह न सके संकोच में,
जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !

प्रत्यक्ष देव,विरक्त मन, किससे कहें, नंदी के भी
सीने में कितने राज हैं,जो आज तक खोले नहीं !

विश्वास ही पहचान हो निर्मल ह्रदय की भावना 
मृदु ह्रदय मंजुल भाव तो हमने कभी तौले नहीं !

उलझी अनिश्चय में रही, मंदाकिनी हर रूप में
थी चाहती निर्झर बहे, शिवकेश थे,भोले नहीं !

Wednesday, June 15, 2016

रनिंग की जद्दोजहद पर यह लेख लड़कियों, महिलाओं के लिए भी है - सतीश सक्सेना

Running ka Bachpan- "Appreciate a novice that's the only advice"

Appreciation and encouragement do wonders for a kid (and to a novice runner) taking baby steps--> balancing/ falling/ trying --> and the baby walks --> finally runs :) A novice runner tries, gets breathless, overcomes inhibitions, manages pain and finally a star runner is born...!
It doesn't really matter where you are, what you are or who you are; What really matter is your Will to succeed and belief "I think I can..."


कोच रविन्दर की यह संक्षिप्त पोस्ट मेरी नज़र में शायद उनकी सबसे बेहतरीन पोस्ट है जो एक अनाड़ी मगर मजबूत इरादे वाले रनर के हौसले व मनोदशा बताने के लिए पर्याप्त है ! 
मुझे दुःख है कि अधिकतर शानदार रनर, जिन्होंने इस स्टेज पर पंहुचने के लिए ढेरों पसीना बहाया है अपना अनुभव शेयर नहीं करते हैं या यूं कहें कि उन्हें लिखने में झिझक होती है , काश वे यह सोंचते कि अगर वे अपना अनुभव लिख दें तो कितने नवोदित रनर उस दर्द तकलीफ से बच जाते जो वे अनाड़ीपन में झेल चुके हैं ! 
बड़े बूढ़े कहते हैं एथलीट या पहलवानों में बुद्धि नहीं होती अगर यह सच मान लें तो शायद यही कारण होंगे कि ज्यादातर रनर उसी श्रेणी के हैं जो पूरे जीवन ठोकरें खा खा कर, घायल मसल्स लेकर भी, लंगड़ाते हुए खुद शानदार रनर बन चुके हैं ,मगर वही अनुभव दूसरों को बांटने की समझ या दिल नहीं है ! यह शब्द कड़वे जरूर लगेंगे मगर सच्चाई यही है कि इस क्षेत्र में रनिंग के बारे में बहुत कम लिखा गया है !मैं सोंचता हूँ कि यह जिम्मेदारी अथाह कष्ट उठाकर प्रथम श्रेणी में दौड़ते उन्ही रनर की है जो अपने से जूनियर मगर तमीज की रनिंग सीखने की जद्दोजहद में लगे एक कमजोर रनर  के लिए कुछ देना नहीं चाहते !
फिर सोंचता हूँ कि बिना मदद के सीखना , शायद अधिक अच्छा है कि उड़ना सीखने के लिए बच्चे को कई बार ऊंचाई से गिरना पड़ता है , और अंततः वह अनन्त आकाश की गहराइयों में एक दिन शान से उड़ रहा होता है ! 
एक अनुभव साझा करता हूँ , मुझे दूसरों के मुकाबले पसीना कई गुना अधिक आता है, मगर मेरा ध्यान पसीने के जरिये बहते शारीरिक शक्ति के लिए बेहद आवश्यक साल्ट पर कभी नहीं गया , २१ मई को , 44 डिग्री तापमान में starry night
अजय कुमार 
marathon मुझे बेहद भारी पड़ा जब मैं पहले 10 किलोमीटर में ही लगभग दो-तीन लीटर पसीना बहा चुका था, हेडबैंड से टपकता नमकीन पसीना आँखों में जा रहा था और इस पसीने के जरिये बहते शरीर के बहुमूल्य साल्ट तेजी से शारीरिक शक्ति घटा रहे थे , शुरुआत से ही से मैंने अपनी गति धीमी रखी थी और जब 12 किलोमीटर के बाद मैंने अपनी गति बढ़ाना चाहा तब पैरों में क्रैंप आने शुरू हो गए ! मैं अपनी सीमित शारीरिक शक्ति को बचाते हुए गति धीमे कर जैसे तैसे दौड़ता रहा , काफ मसल्स में होते तीखे दर्द के बावजूद दृढ निश्चय था कि दौड़ हर हाल में पूरी करनी है , अंततः मेडल लेते हुए पसीने में बहते साल्ट की कमी की वैल्यू समझ आ चुकी थी ! 21 km रनिंग के बाद मुझे कम से कम 4-7 दिन का आराम करना चाहिए था जो
संतोष कुमार 
लगातार सौ दिन दौड़ने में शामिल होने के कारण  मैं नहीं कर सका और अगले दिन से ही दौड़ना शुरू कर दिया और 21 तारीख की हाफ मैराथन के बाद २२ तारीख से लेकर ४ जून तक मैं 53 किलोमीटर और दौड़ चुका था जिनमें पांच दिन मैं 5 किलोमीटर से 8 किलोमीटर तक दौड़ा था , बिना रेस्ट और एक्स्ट्रा साल्ट के लिए दौड़ने के पहले किलोमीटर में जांघों व् कमर में अजीब सी दुखन महसूस कर रहा था , listen to your body के तहत मुझे लगा कि मैं अति कर रहा हूँ अंततः मुझे अपनी लगातार रनिंग बंद करनी पड़ी , शायद इस दर्द का कारण मीठे का पूर्ण त्याग एवं बेहद पसीने के कारण बहते पोटेशियम सोडियम की कमी रही होगी ! 
अब पिछले ९ दिन से लगातार रेस्ट कर रहा हूँ , कल पहली बार काफी दिन बाद साइक्लिंग और पुशअप किये जो दर्द के दौरान, करना असम्भव हो गए थे ! 
यह आवश्यक है कि नए रनर के लिए हिम्मत दिलाते रहें उसके लिए तालियां बजाते रहें यही काफी होगा वह लड़खड़ाते हुए, गिरते हुए अपने पैरों से अपने आपको बैलेंस करके, दौड़ने की कोशिश तो कर रहा है, विश्वास रखिये आखिर कार एक दिन वह दौड़ेगा .... 
एक नौसिखिया रनर अपनी उम्र भूलकर, झिझक छोड़कर, भारी बदन लेकर भी, अपना दर्द और तकलीफें भुलाकर अगर दौड़ने निकला है तो विश्वास रखें कि वह एक दिन स्टार रनर बनेगा और शान से दौड़ेगा 
इससे कोई लेना देना नहीं कि आप क्या करते हैं, कहाँ रहते हैं ,और कौन हैं ? रनिंग के लिए आवश्यक सिर्फ आपकी इच्छा शक्ति और आत्मविश्वास है कि अगर वे कर रहे हैं तो मैं भी कर सकता हूँ !
अंत में मैं दो डायबिटिक रनर जिन्होंने अपनी डायबिटीज़ बिना दवा कंट्रोल कर ली उनके चित्र दे रहा हूँ , अजय कुमार एवं संतोष कुमार ने , न केवल बीमारी पर विजय पाई है बल्कि रनिंग में शानदार ऊंचाइयां भी हासिल की हैं ! 
हैप्पी रनिंग !!!

Monday, April 11, 2016

सब तो रोये थे मगर हम तो, रो नहीं पाये -सतीश सक्सेना

कल ही कुछ याद किया, रात सो नहीं पाये
औ तड़प के जो बुलाया भी , तो नहीं पाये !

तेरी रुखसत का भरोसा ही नहीं है मुझको 
सब तो रोये थे मगर हम तो, रो नहीं पाये !

कसम खुदा की सिर्फ खैरियत बता जाएँ ! 
खिले वसंत अहले दिल से,खो नहीं पाये !

जाने कब से थे मेरे साथ,जानता ही नहीं 
बिन कहे जान सकें अक्ल ,वो नहीं पाये !

तुझे हर बार मना ही किया था मिलने को
आज मन ढूंढता अहसास, जो नहीं पाये !

Wednesday, October 21, 2015

कौन आये साथ मेरे दर्द सहने के लिए -सतीश सक्सेना

कौन आये साथ , गहरे दर्द सहने के लिए,
हम अकेले ही भले,जंगल में रहने के लिए !

जिस जगह जाओ वहां बौछार फूलों की रहे 
तुम बनाये ही गए , सम्मान पाने के लिए !

शिष्ट सुन्दर सुखद मनहर देवता आदर करें
क्या जरूरत जंगली से, प्यार करने के लिए !

माँद के अंदर न जाएँ, ज़ख्म ताजे बह रहे
समय देना है,बबर के घाव भरने के लिए !

जाति,मज़हब,देश से इंसान भी आज़ाद हो,  
पक्षियों  से सीखिये,उन्मुक्त उड़ने के लिए !




Wednesday, December 24, 2014

सनम सुलाने तुम्हें, हमारे गीत ढूंढते आएंगे - सतीश सक्सेना

आदरणीय ध्रुव गुप्त की दो पंक्तियाँ इस रचना के लिए प्रेरणा बनी हैं , उनको प्रणाम करते हुए ……  

यदि रूठोगे कहीं तुम्हें हम , रोज मनाने आएंगे,
चाहा सिर्फ तुम्हीं को हमने, ये बतलाने आएंगे !

भूल न जाना मुझको वरना, हौले हौले रातों के 
अनचाहे सपनों में, अक्सर खूब सताने आएंगे !

सुना, चाँदनी रातों में तुम भूखे ही सो जाते हो 
थाली मीठी यादों की ले संग खिलाने आएंगे !

खूब सताएं दुनियाँ वाले, वादे छीन न पाएंगे
जितना काटें बांस, हरे हो, नए सामने आएंगे !

कैसे निंदिया खो बैठे हो, अवसादों के घेरों में
सनम सुलाने  तुम्हें , हमारे गीत  ढूंढते आएंगे !

Sunday, November 30, 2014

मगर हृदय ने पढ़ लीं कैसे, इतनी सदियाँ आँखों में -सतीश सक्सेना

अरसे बाद मिली हैं नज़रें, छलके खुशियां आँखों में !
लगता खड़े खड़े ही होंगी, जीभर बतियाँ आँखों में !

बरसों बाद सामने पाकर, शब्द न जाने कहाँ गए !
मगर हृदय ने पढ़ लीं कैसे इतनी सदियाँ आँखों में ! 

इतना भी आसान न होता, गुमसुम दर्द भुला पाना !
बहतीं और सूखती रहतीं, कितनी नदियां आँखों में !

सावन की हरियाली जाने कब से याद न आयी है ,
तुम्हें देख लहरायीं कैसे, इतनी बगियां आँखों में !

इतना हंस हंस बतलाते हो कितना दर्द छिपाओगे !
कब से आंसू  रोके बैठीं, गीली गलियां आँखों में ! 



Sunday, September 21, 2014

मौत हर वक्त याद रखता हूँ ! - सतीश सक्सेना

सिर्फ इक बात याद रखता हूँ !
आखिरी रात , याद रखता हूँ !

मुझ पे प्यारों के,कर्ज बाकी हैं !
उनकी सौगात, याद रखता हूँ !

कौन जख्मों को सोंच कर रोये !
हर हसीं  रात,  याद रखता हूँ !

मौलवी और पंडितों को नहीं !
भले असरात , याद रखता हूँ !

जो कभी साथ ही न चल पाये
वे भी आघात, साथ रखता हूँ !





Friday, June 20, 2014

विदेश जाने में डर..- सतीश सक्सेना

जीवन की आपाधापी में ३६ साल की नौकरी कब पूरी हो गयी,पता ही नहीं चला ! घर की जिम्मेवारियों और बच्चों के लिए साधन जुटाने में, समय के साथ दौड़ते दौड़ते अपने लिए समय निकालना बहुत मुश्किल रहा ! कई बार लगा कि जवानी में जो समय अपने लिए देना चाहिए शायद वह कभी दे ही नहीं पाए ! अक्सर इसका कारण पूर्व नियोजित लक्ष्य,बच्चों के भविष्य,की आवश्यकता पूरा करते करते धन का अभाव रहा अथवा अपने मनोरंजन के लिए आवश्यक हिम्मत और समय ही नहीं जुटा पाए !
बचपन में सुनता था कि जवाहर लाल नेहरु के कपडे पेरिस धुलने जाते थे ! धनाड्य लोगों के किस्से सुनकर उनके आनंद को, हम निम्न मध्यम वर्ग , महसूस कर, खुश हो लेते थे ! उड़ते हवाई जहाज की एक झलक पाने को, खाना छोड़कर छत पर भागते थे कि वह जा रहा है एक चिड़िया जैसा जहाज और फिर अपने सपने समेट कर, चूल्हे के पास आकर, रोटी खाने लगते थे ! उन दिनों उड़ते हवाई जहाज में बैठने की, कल्पना से ही डर लगता था !

पेरिस रेलवे स्टेशन 
गौरव अपनी कंपनी कार्य से, जब जब देश से बाहर गए हर बार उसका अनुरोध रहता कि पापा एक बार आप जरूर घूम कर आइये , विभिन्न देशों की संस्कृति, रहनसहन और खानपान  में  बदलाव आपको अच्छा लगेगा ! हर बार व्यस्तता और छुट्टी न मिलने का बहाना करते हुए मैं, उन्हें असली बात कभी नहीं बता पाता था !

मुख्य कारण दो ही थे, पहला पता नहीं कितना खर्चा कितना होगा और दूसरा विदेशियों के परिवेश में घुलने, मिलने, बात करने में, आत्मविश्वास की कमी ....
और यह भय इतना था कि अगर यूरोप के टिकट अचानक बुक नहीं किये जाते तो शायद मैं अपने जीवन काल में कभी विदेश यात्रा का प्लान नहीं बना पाता !
यह प्रोग्राम अचानक ही बन गया जब नवीन ने वियना से अपने माता पिता के साथ मुझे भी वियना आने का
वेनिस की पानी से लबालब गलियां 
निमंत्रण दिया था ! उसके पत्र मिलने के साथ ही, अप्पाजी ने, अपने साथ साथ मेरा  टिकट भी, मेरे द्वारा कभी हाँ कभी न के बावजूद , बुक करा लिए थे ! उस शाम आफिस से लौटने पर पहली बार लगा कि मैं वाकई यूरोप यात्रा पर जा रहा हूँ ! 
उसके बाद, सफर पर जाने के लिए आवश्यक, बीमा कराया गया ! 15 दिन के इस सफर के लिए, आई सी आई सी आई लोम्बार्ड ने  लगभग ५५०० रुपया लिया था ! इस बीमा के फलस्वरूप हमें बीमारी अथवा किसी अन्य  वजह से होने वाली क्षति का मुआवजा शामिल था !
मगर जब पहली बार, विदेश पंहुच गए तब जाकर पता लगा कि बेबुनियाद भय, आत्मविश्वास को किस कदर कम करता है ! अतः सोचा कि मित्रों में अपना अनुभव अवश्य बांटना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति और लोग न महसूस करें !
वियना ट्राम 
अधिकतर मेरे मित्र लगभग हर वर्ष देश भ्रमण पर खासा पैसा खर्च करते हैं मगर विदेश जाने के बारे में प्लानिंग की छोड़िये, अपने घर में इस विषय पर चर्चा भी नहीं करते हैं और यह सब आत्मविश्वास और जानकारी के अभाव के कारण ही होता है !  

स्वारोस्की फैक्ट्री ऑस्ट्रिया 
शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि विदेश जाएँ या न जाएँ मगर हर परिवार के पास पासपोर्ट होना बहुत आवश्यक है, यह एक ऐसा डोक्युमेंट हैं जिसके जरिये भारत सरकार आपके बारे में, यह सर्टिफिकेट देती है कि पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक है तथा इस परिचयपत्र में आपके नाम और पते के अलावा जन्मतिथि,  तथा जन्मस्थान लिखा होता है ! किसी भी देश में प्रवेश करने  की परमीशन(वीसा) के लिए, इसका होना आवश्यक है ! यह कीमती डॉक्यूमेंट आपके घर के पते और जन्मतिथि के साथ आपके परिचय पत्र की तरह भी भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है !

इंटरलेकन, स्विट्ज़रलैंड
यह जानना आवश्यक है कि विदेश यात्रा हेतु , अगर दो माह पहले, किसी भी देश की फ्लाईट टिकिट बुक करायेंगे  तो लगभग आधी कीमत में मिल जाती है ! दिल्ली से पेरिस अथवा स्वित्ज़रलैंड जाने का सामान्य आने जाने का एक टिकट, लगभग ३५ हज़ार का पड़ता है जबकि यही टिकट तत्काल लेने पर ६० हज़ार का आएगा ! सामान्यता एक अच्छा टूरिस्ट होटल ३००० रूपये प्रति दिन में आराम से मिल सकता है !
अगर आपकी ट्रिप ४ दिन की है तो एक आदमी के आने जाने का खर्चा लगभग मय होटल ४५०००.०० तथा भोजन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट  मिलकर ५००००-६०००० रुपया

में ! अगर आप यही ट्रिप किसी अच्छे टूर आपरेटर के जरिये करते हैं तो आपका कुछ भी सिरदर्द नहीं, साल दो साल में  ५० - ६० हज़ार रुपया बचाइए और ४ दिन के लिए पेरिस, मय गाइड घूम कर आइये !

जहाँ तक खर्चे की बात है , हर परिवार में पूरे साल घूमने फिरने और बाहर खाने पर जो खर्चा होता है ,उसमें हर महीने कटौती कर पैसा बचाना शुरू करें तो कुछ समय में ही आधा पैसा बच जायेगा, बाकी का इंतजाम करने में बाधा नहीं आएगी !एक बार विदेश जाने के बाद आपके और बच्चों के आत्मविश्वास में जो बढोतरी आप पायेगे, उसके मुकाबले यह खर्चा कुछ भी नहीं खलेगा ! 
यूनाइटेड नेशंस , जेनेवा
अक्सर हम मरते दम तक अपनी सिक्योरिटी के लिए धन जोड़ते रहते हैं ,और बुढापे में , महसूस होता है कि जीवन में , और भी बहुत कुछ देख सकते थे जो  कर ही नहीं पाये और इतनी जल्दी जीवन की रात हो गयी ! मेरा अपना सिद्धांत है कि बेहद उतार चढ़ाव युक्त जीवन को, जब तक जियेंगे, हँसते मुस्कराते जियेंगे ! एक बात हमेशा याद रखता हूँ कि
  
" न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए ..."
        
विदेश जाकर अच्छी इंग्लिश न बोल पाने के लिए न बिलकुल न डरें , आप वहाँ पंहुच कर पायेंगे कि अधिकतर जगह पर, इंग्लिश जानने वाले बहुत कम हैं ! आपको लगेगा कि आप ही सबसे अच्छी इंग्लिश / अंगरेजी बोलते हैं :-))
जिंदगी जिंदादिली का नाम है !!

Tuesday, October 29, 2013

जिसको लेखक समझा हमने,यह केवल हरकारा है - सतीश सक्सेना

कितने पुरस्कार सर धुनते,ज्ञान ध्यान से मारा है ,
हिंदी के गुरुघंटालों ने , आँगन खूब बुहारा है !

कर्णधार हिंदी के बन कर, मस्ती सुरा, सुंदरी में,
भावभंगिमा और आँखों से चलता साहूकारा है !

विद्वानों का रूप देखकर,हमको ऐसा लगता है !
जिसको ज्ञानी हमने माना वो केवल हरकारा है !

पहली बार मिले हैं तुमसे,ज़रा सांस तो लेने दो ! 
जल्दी ज्ञान कहाँ समझेंगे, आदत से बंजारा हैं !

धीरे धीरे समझ सकेंगे, इंसानों की फितरत को !
हमने सारा जीवन अपना,पशुओं साथ गुज़ारा है!

Monday, July 8, 2013

निर्णयकारी मुस्कान तेरी, निश्छल, निर्मल, निर्झरिणी सी -सतीश सक्सेना

आनंदमयी  ऐसी  जैसी निकली, निखरी, भू-तरिणी सी,
निर्णयकारी मुस्कान तेरी, निश्छल निर्मल निर्झरिणी सी !

ध्रुवनंदा सी विशुद्ध मोहक ,मंदिर  में, पद्मज्योति जैसी !
अनुराग मयी जब से आयी, जीवन में बही ,मंदाकिनि सी !

नैसर्गिक प्रतिभा, की स्वामिनि, मेधावी, वीणावादिनि सी !
कंठस्थ ऋचाएँ , मद्धम स्वर, दिखती है, क्षीर केसरी  सी !

तस्बीह के  दानों जैसी  वह ,लगती है  सदा, पाकीज़ा  सी  !
मरियम सी लगे, सीता सी लगे, लगती है कभी ज़हरा जैसी !

सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी  !
घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी  सी  !

Saturday, January 19, 2013

भाषा इन गूंगो की -सतीश सक्सेना

कुछ दिन पूर्व, घर के बाहर, ४ नन्हें दुधमुहों ने जन्म लिया, माँ द्वारा एक झुरमुट में सुरक्षित छिपाए जाने के बावजूद, ये नन्हे भाग भाग कर सड़क पर आ जाते थे  ! तेज जाती हुई कारों को सावधानी से चलाने के लिए कहतीं इनकी माँ द्वारा, कार के पीछे भौंकते हुए दौड़ने से, होते शोर से पडोसी परेशान थे  ! 
गुडिया के बुलाने पर, मैं बाहर गया तो एक को छोड़ सारे बच्चे, भाग कर माँ के पास छुप गए ! केवल एक था जो निडरता के साथ खड़ा रहा और बढे हुए हाथ की उंगलियाँ अपने नन्हे दांतों से काटने का प्रयत्न करने लगा ! कुछ बिस्कुट इन बच्चों और उस वात्सल्यमयी को देकर हम दोनों बाप बेटी घर आ गए !
अगले दिन सुबह ,घर के बाहर अजीब सन्नाटा देख बाहर गया तो दिल धक् से रह गया , वही निडर बच्चा, किसी तेज और असंवेदनशील कार  द्वारा सड़क पर कुचला पड़ा था .......
और उसकी माँ बिना भौंके, अपने ३ बच्चों के साथ उदास निगाहों से मुझसे पूंछ रही थी मेरे बच्चे का कसूर क्या था , क्यों मार दिया तुम लोगों ने  ??

Thursday, August 16, 2012

परिहास तुम्हारे चेहरे पर -सतीश सक्सेना

नीचता की पराकाष्ठा की बाते हम अक्सर सुनते हैं , मगर जब लोग इस सीमा को भी आसानी से लांघ जाते हैं तब शायद हमको क्रूरता और नीचता की नयी परिभाषाएं पता चल पाती हैं ! इतिहास गवाह है कि अक्सर बेहतरीन लोग, अपनों के द्वारा बड़ी निर्दयता से, बिना उफ़, क़त्ल किये गए ! यह सब आज भी चल रहा है बस समय , स्थान और परिस्थितियां ही बदली हैं ! अपने ही एक अभिन्न मित्र के प्रति नफ़रत, मानव मन की निष्ठुरता और क्रूर स्वभाव  की इस तस्वीर पर गौर फरमाएं 

कब दिन बीता कब रात गयी 
कब बिन बादल बरसात हुई  !  
कब बिना कराहे, दिल  रोया ,    
कब  सोये - सोये , घात  हुई ! 
जब घेर दुश्मनों ने मारा था, 
राज तिलक के  मौके पर  !
अपनी गर्दन कटते देखा , संतोष तुम्हारे  चेहरे  पर  !

जब समय लिखे इतिहास कभी 
जब  मुस्काए,  तलवार   कभी, 
जब शक होगा, निज  बाँहों पर ,
जब इंगित करती, आँख  कहीं,    
जब बिना कहे दुनिया जाने,
कृतियाँ, जीवित कैकेयी   की !
हम बिलख बिलख जब रोये थे, परिहास तुम्हारे चेहरे पर !

क्यों बेमन साथी संग चलें
ऐसे क्यों जग में हंसी उड़े !
यह कैसा संग दिया तुमने 
पीछे से धक्का दिया मुझे !
गहरी खाई में गिरते दम  , 
वह  दर्द भरा, क्रन्दन  मेरा  !  
विस्फारित आँखों से देखी , इक जीत तुम्हारे चेहरे पर !

क्यों नाम हमारा   आते  ही  ? 
मुस्कान, कुटिल हो जाती थी 
बच्चों सी निश्छल हंसी देख
मन में, कडवाहट आती थी  ?
अभिमन्यु  जैसा वीर गया,
यह व्यूह सजाया था किसने  ?
इतिहास तड़प उठता, देखे, जब चमक तुम्हारे चेहरे पर  !

जब गिरा जमीं पर थका हुआ 
वह धूल धूसरित,रण योद्धा !
तब  अर्धमूर्छित प्यासे  को,
तुम जहर, पिलाने आये  थे,
धुंधली  आँखों ने देखी थी,
तलवार तुम्हारे हाथों में  !
अंतिम साँसें  लेते  देखी , मुस्कान तुम्हारे चेहरे पर !
Related Posts Plugin for Blogger,