Wednesday, October 21, 2015

कौन आये साथ मेरे दर्द सहने के लिए -सतीश सक्सेना

कौन आये साथ , गहरे दर्द सहने के लिए,
हम अकेले ही भले,जंगल में रहने के लिए !

जिस जगह जाओ वहां बौछार फूलों की रहे 
तुम बनाये ही गए , सम्मान पाने के लिए !

शिष्ट सुन्दर सुखद मनहर देवता आदर करें
क्या जरूरत जंगली से, प्यार करने के लिए !

माँद के अंदर न जाएँ, ज़ख्म ताजे बह रहे
समय देना है,बबर के घाव भरने के लिए !

जाति,मज़हब,देश से इंसान भी आज़ाद हो,  
पक्षियों  से सीखिये,उन्मुक्त उड़ने के लिए !




16 comments:

  1. "पक्षियों से सीखिये, उन्मुक्त उड़ने के लिए"

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  2. पक्षियों से सीखिये,उन्मुक्त उड़ने के लिए !

    वाह!

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  3. जिस जगह जाएँ वहां बौछार फूलों की रहे
    तुम बनाये ही गए , सम्मान पाने के लिए !
    ...बहुत सही ...

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  4. बहुत बढ़िया सतीश जी

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  5. हम अकेले ही भले,जंगल में रहने के लिए !

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  6. पक्षियों से सीखिये उन्मुक्त उड़ने ने के लिए.... बहुत बढ़िया।

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  7. बेहतरीन प्रस्तुति, आभार आपका।

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  8. सीखने को बहुत कुछ बाकी है - मन में चाव जाग उठे बस इसी की प्रतीक्षा है .

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  10. कौन आये साथ , गहरे दर्द सहने के लिए,
    हम अकेले ही भले,जंगल में रहने के लिए !
    सुख में सबको साझीदार बनाएँ
    लेकिन हम अकेले ही भले दुःख में :)
    सुन्दर रचना !

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  11. सीखने का शौकीन तो किसी से भी सीख सकता है। भले ही सिखाने वाला इंसान हो या पक्षी।

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  12. जाति,मज़हब,देश से इंसान भी आज़ाद हो,
    पक्षियों से सीखिये,उन्मुक्त उड़ने के लिए !

    बहुत सुन्दर गीत ....

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  13. बहुत प्रभावशाली और सुन्दर रचना.....

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  14. सतीश जी ,खूबसूरत भाव है ..कौन आये साथ दर्द सहने के लिए ...

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- सतीश सक्सेना

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