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Tuesday, October 1, 2019

काश कर सकें, पर फैलाकर विचरण अन्य जहान के -सतीश सक्सेना

और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप
जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही सस्ता होता है जितना अपने देश में अंडमान निकोबार अथवा गोवा जाकर एक सप्ताह की मस्ती करना !  
मान लीजिये आपको म्युनिक जर्मनी जाना है तो सबसे पहले कुछ चिंताएं पैदा होंगीं जैसे भाषा कैसे समझेंगे और समस्याएं क्या आएँगी !भाषा के नाम पर हमें बिलकुल परवाह नहीं करनी चाहिए पूरे यूरोप में टूटी फूटी इंग्लिश बोली जाती है व् समझी जाती है ! ग्रीक , इटालियन,जर्मन, फ्रेंच,डच , स्पेनिश , पोलिश एवं अन्य प्रांतीय भाषाएँ बोली जाती हैं ! वहां के लोग टूरिस्ट के लायक टूटी फूटी इंग्लिश और कई जगह बेहतर इंग्लिश धड़ल्ले से बोलते हैं ! और यह वाकई इंटरेस्टिंग होता है जब वे ,भारतीय अम्मा जी को भी इंग्लिश में समझाने में अक्सर कामयाब रहते हैं !

विदेश यात्रा के लिए निम्न तैयारी आवश्यक है , अगर डाक्यूमेंट्स पूरे हों तो वीसा मिलने में लगभग 15 दिन लगते हैं !
  1.  पासपोर्ट जिसकी वैलिडिटी लगभग छह माह बची हो !
  2. वीसा जर्मनी का , वीसा विदेशी दूतावास की एक मुहर है जो आपके पासपोर्ट को विशेष देश आने  की अनुमति देता  है ! और यह मुहर आपके पासपोर्ट पर वह देश लगाता है जहाँ आप भ्रमण के लिए जा रहे हैं ! वह देश आपको अपने देश आने की अनुमति कुछ विशेष जानकारियों के लेने के बाद देता है ! यूरोपियन यूनियन की ख़ास बात है कि आप जर्मनी वीसा अप्लीकेशन पर पूरे 26 देशों का भ्रमण कर सकते हैं ! इसे शेंगेन वीसा कहते हैं , इसे अप्लाई करने से पहले निम्न  डाक्यूमेंट्स आवश्यक हैं !
  3. कन्फर्म फ्लाइट टिकट आने व् जाने का 
  4. इन्हीं दिनों होटल या मित्र के यहाँ ठहरने का कन्फर्मेशन ( रूपये 3000 से 5000 प्रतिदिन ) 
  5. उपरोक्त दिनों के ट्रेवल के लिए आपका हेल्थ ट्रेवल बीमा 
  6. आपका बैंक अकाउंट डिपाजिट , लास्ट तीन महीने का  जिससे यह सुनिश्चित हो की आप अपना खर्चा करने में समर्थ हैं ! ( 50 से 60 यूरो प्रतिदिन के हिसाब से ) लगभग २ लाख रुपए हों  तो अच्छा है ! 
  7. तीन माह की सैलरी स्लिप्स अगर आप नौकरी कर रहे हों 
  8. एम्प्लायर का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट 
  9. लास्ट ३ वर्ष की इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी 
  10. वीसा फीस की रसीद 
  11. उपरोक्त डाक्यूमेंट्स के साथ वीसा एप्लीकेशन , वीसा रसीद के साथ ( Rs 4500 ) 
  12. कवरिंग लेटर जिसमें आप कारण लिख कर देंगे और साथ में आप अपनी टिकट एवं रुकने की डिटेल देंगे  ! 
  13. चेकलिस्ट यह रही 
उपरोक्त डाक्यूमेंट्स तैयार होने के बाद आपको  VFS global में एप्लीकेशन सबमिट करना है जो बेहद आसान है ऑनलाइन एप्लीकेशन भरिये , जमा करिये तथा अपॉइंटमेंट लीजिये ताकि आप पासपोर्ट  व उपरोक्त डाक्यूमेंट्स  सबमिट कर सकें ! अगर आप पहली बार यूरोप जा रहे हैं तब आपके फिंगर प्रिंट्स स्कैन होंगे !
फीस जमा होगी तथा डाक्यूमेंट्स रिसिप्ट  आपको दे दी जाएगी ! कुछ दिन में पासपोर्ट वीसा का ठप्पा लगाए कूरियर द्वारा आपके दरवाजे पर पंहुच जाएगा !

क्रमश  ...
टिकट एवं होटल रिजर्वेशन ,एयरपोर्ट फॉर्मेलिटी ,पैकिंग एवं सावधानी 




Friday, September 14, 2018

जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना

जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में  साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं ब्रैटवुस्ट नामक पोर्क या बीफ या टर्की के बने सॉसेज होते हैं ! साथ में सलाद टमाटर एवं अचार (gherkins) एक्स्ट्रा स्वाद देते हैं !

यहाँ लोग नाश्ते में यह लोग अधिकतर ब्रेड टोस्ट , ब्रेड रोल जिसमें शहद, मार्मलेड , अंडे एवं हैम, सलामी एवं सॉसेज लेना पसंद करते हैं , जिसके बाद गर्म कॉफी, कोको या चाय पीते हैं ! कॉफी यहाँ चाय से अधिक लोकप्रिय है !

यूरोप में अधिकतर लोग मीट प्रोडक्ट पर निर्भर होते हैं इनके भोजन में किसी न किसी रूप में मीट, उपलब्ध अवश्य होगा सो हमवेजीटेरियन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ! जल्दबाजी में ख़रीदे, रेडीमेड पास्ता एवं टू मिनट नूडल्स पहला  चम्मच खाने के बाद ही फेंकने पड़े !


मगर यूरोप में हम वेजिटेरियन लोगों का सहारा, पीता ब्रेड ( ग्रीक रोटी ) होती है जो अकसर यूरोपियन स्टोर में उपलब्ध रहती है , इसे खरीद कर बटर का उपयोग कर अपना देशी परांठा बनाया जा सकता है ! साथ में आलू उबालकर सूखी सब्जी बनाना अधिक मुश्किल काम नहीं , सहारे के लिए स्टोर्स में तरह तरह के योगर्ट ( दही ) उपलब्ध होता है ! 

म्यूनिख बवेरिया स्टेट की राजधानी है जो अपने बियर गार्डन के लिए मशहूर है , जहाँ खुले में बड़े मैदान में अथवा गार्डन में हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है और फ्रेश बियर सर्व की जाती है , देखने में यह एक ऐसा खुला रेस्टॉरेंट लगता है जहाँ लोग इकट्ठे होकर किसी राष्ट्रीय त्यौहार पर एक साथ बियर पीकर, ख़ुशी मना रहे हों ! कुछ मायनों में हमारे देश के एक बड़े ढाबे जैसा माहौल होता है मगर एक विशेषता लिए होता है कि हजारों लोगों में से एक भी इंसान जोर से न बोलता है और न झूमता है !

आप किसी भी जर्मन मार्किट में चले जाएँ सड़क किनारे रेस्टुरेंट के फुटपाथ पर कुर्सियों पर बैठे लोग बियर पीते मिलेंगे मगर एक शालीनता और सभ्यता के साथ बिना किसी शोर शराबे के ! मैंने यहाँ हार्ड ड्रिंक्स, शराब, स्कॉच आदि बहुत
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !

हाँ, हम जैसे देसी वेजिटेरियन लोग भी मिलेंगे जिन्हें वहां बियर के साथ, उबले अंडे या नमकीन तो मिलने से रही सो विकल्प के रूप में वेज ब्रेड, ऑलिव्स और चीज़ की तलाश करते हैं ! जर्मन बेकरी सबसे अधिक व्यस्त दुकाने हैं जहाँ विभिन्न स्वाद की देश विदेश की नमकीन एवं मीठे ब्रेड , बिस्किट एवं केक उपलब्ध हैं जिनको खाने से मन नहीं भरता !
एक दिन बेहद भूख लगने पर मैंने बाजार से दो शहद की बिस्कुट जिनका वजन ५० ग्राम होगा फिलाडेल्फिया चीज के साथ खायीं तो भूख ऐसे गायब हुई जैसे भरपूर लंच लिया हो ! लाजवाब क्वालिटी के ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट हमारे देश में दुर्लभ हैं , इन प्रोडक्ट के साथ अक्सर लोग सूप, कोकोकोला पीना पसंद करते हैं जिन्हें हमारे देश में देशी व्यापारियों ने त्याज्य घोषित कर दिया गया है !
Swimming in Sea  

कैटालोनिया कोस्ट पर बसे बार्सिलोना का नाम, यूरोप के उन बेहद खूबसूरत शहरों में शामिल होता है जो विश्व के टूरिस्ट नक़्शे में विख्यात हैं ! यह शहर नार्थ स्पेन रीजन में, मेडिटेरेनियन समुद्र तट पर , बसा है तथा अपने विशेष कैटलॉन संस्कृति, गौरव तथा व्यक्तित्व के लिए, एक अलग पहचान रखता है !

कल म्यूनिख से बार्सिलोना, स्पेन पंहुचे थे , एयरपोर्ट से ही 5 दिन का होला बार्सिलोना अनलिमिटेड पास (हेलो बार्सिलोना) ले लिया था, अन्यथा टैक्सी से एयरपोर्ट से शहर अपने अपार्टमेंट तक पंहुचने में ही लगभग 5000 रूपये पड़ जाता ! यह
बार्सिलोना टूरिस्ट  पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था ! 

मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं ! 

अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस,  आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !

जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड , फ्रांस, स्पेन  सब जगह शहरी सप्लाई का पानी, पीने योग्य माना जाता है मगर स्वाद मीठा नहीं होता, हम भारतीयों को म्युनिसिपल सप्लाई वाटर में, नाले का पानी, मुफ्त में मिक्स होकर मिलने के कारण, हर घर में आर ओ ( रिवर्स ओसमोसिस )लगाना ही पड़ता है जोकि पीने में मीठा होता है मगर यूरोप के घरों में आर ओ कहीं नहीं देखा !  बाजार में बिकने वाला पानी मिनरल वाटर के रूप में उपलब्ध है जो बेहद मंहगा पड़ता है ! RO का नुकसान एक ही है कि वह पीने के पानी से, मानव शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्सियम, मैग्निसियम को भी नष्ट कर देता है जो कि हमारे लिए बेहद आवश्यक हैं शुक्र है कि हमारा शरीर यह मिनरल्स भोज्य सामग्री से आसानी से जुटा लेता है ! दूध, बियर और जूस से अधिक महंगा , आधा लीटर पानी का भाव भी ढाई यूरो है सो अक्सर पानी की जगह बियर से काम चलाने  के लिए तैयार रहना होगा !
बहरहाल यूँ देखने में यूरोप महंगा लगेगा मगर यहाँ कम पैसों में भी आराम से घूमा जा सकता , पूरे दिन का भोजन के लिए 6 से 10 यूरो में काम चल सकता है मगर यदि रेस्टॉरेंट में लंच और डिनर लेना है तो यही खर्चा 40 यूरो तक बैठेगा ! 

Wednesday, September 5, 2018

जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना

टिकट मशीन 
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए   बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से,  2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी !  


राज भाटिया के साथ 
अगर यूरोप में वास्तविक प्राकृतिक खूबसूरती और रहनसहन का माहौल देखना हो तो किसी गांव में जा कर देखिये आपको आनंद आ जाएगा ! राज भाटिया म्यूनिख से लगभग ४५ km दूर एक गाँव इज़ेन में रहते हैं , उनका आमंत्रण पहले दिन से मेरे पास था मगर जाने का मौका कल मिला जब मैं किसी को छोड़ने एयरपोर्ट गया था और मेरी जेब में पूरे म्यूनिख नेटवर्क का पास था ! मैंने अपने आने के बारे में उन्हें इन्फॉर्म किया तो उनका कहना था कि आप गाँव तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न आएं बल्कि मैं आपको लेने आपके नजदीकी स्टेशन श्वाबिन मार्किट तक आ रहा हूँ आप वहीँ पर मेरा इंतज़ार करें ! जब मैं वहां पंहुचा तो राज भाई अपनी ऑडी के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! खूबसूरत साफ सुथरे रास्तों से होते हुए जब उनके गांव पंहुचे तो हमारे जैसा गांव तो कहीं नजर नहीं आया समझ ही नहीं आया की प्रकृति का इतना सुंदर नज़ारा और शोर शराबे रहित, शांत जगह जहाँ धूल का नामोनिशान न हो , गाँव कैसे हो सकता है ! अगर हमारे देश में, शहर के नजदीक गलती से भी ऐसे गांव रहे होते तो निश्चित ही वहां बड़े सरकारी अधिकारियों के निवास स्थान बन गए होते और उसे सिविल लाइन्स का नाम दिया जाता क्योंकि शहर के सबसे बेहतरीन एरिया में रहने का हक़ कलक्टर एन्ड कंपनी का ही होता है ! बाकी तो सब कीड़े मकोड़े हैं कहीं भी रह लेंगे  ...... 


हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं  यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी ! 

उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं  ..... 

एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! 

इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें 
छोटा लिफाफा होगा जिसे वह कुत्ते का पूप कलेक्ट करने के लिए रखता है इसके अलावा पगडण्डी के साथ साथ एक छोटा बक्सा होगा जिससे कोई भी लिफाफा निकाल सकता है किसी भी हालत में, कोई व्यक्ति  कुत्ते की पूप बाहर नहीं फेंकेगा ! 

यहाँ कौन देख रहा  .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था  .....

इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में  लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह  जमकर 
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !

यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
मुसीबत में हैं तब डिस्ट्रेस कॉल में एम्बुलेंस पंहुचने का समय ३ मिनट और अगर डॉ उपलब्ध न हो तो हैलकॉप्टर एम्बुलेंस तत्काल हाजिर होगी और मुफ्त का इलाज होगा ! राज भाई के 3 हार्ट ऑपरेशन हुए और बिलकुल मुफ्त , बदकिस्मती से आपके घर में बच्चे आपका ख़याल रखने और तीमारदारी करने को उपलब्ध नहीं हों तो नर्स की मुफ्त सेवा है आपका एक पैसा खर्च नहीं होगा ! सारा भारी भरकम बिल का खर्चा इंस्युरेन्स कम्पनियाँ उठाएंगी और बिना वह भी किसी लिखा पढ़ी के, सीधा हॉस्पिटल के साथ  !

शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !

यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं ! 

राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ! 

Sunday, July 29, 2018

आसान यूरोप यात्रा -सतीश सक्सेना

इस बार यूरोप यात्रा का संयोग गौरव की जर्मनी पोस्टिंग के कारण हुआ उसकी इच्छा थी कि पापा और माँ मेरे पास लम्बे समय आकर रहें सो पहली बार घर को लगभग ढाई महीने के लिए छोड़ने का फैसला किया पिछली पोस्ट पर मित्रों का अनुरोध था कि इस यात्रा का विवरण लिखूं सो यह पोस्ट आवश्यक हो गयी है !
यूरोपियन ढाबा पर जौ का रस, मशहूर ब्रेड, ब्रीज़ल के साथ !

-विदेश यात्रा को अधिकतर लोग हौआ मानते हैं और उस पर अक्सर बात करने से या जाने की योजना बनाने से झिझकते ही नहीं बल्कि सोंचने में भी कतराते हैं और इसके पीछे धन का अभाव न होकर अक्सर आत्मविश्वास की कमी ही होती है कुछ अन्य कारण निम्न हैं  ....

- पहला कारण विदेशियों से कम्युनिकेशन में आत्मविश्वास का न होना, अधिकतर का मानना है कि उनकी बेहतरीन फर्राटेदार इंग्लिश समझना और बेहतरीन इंग्लिश में बात करना बहुत मुश्किल है जबकि वास्तविकता इसके उलट है लगभग पूरे विश्व में सामान्य विदेशियों की इंग्लिश काफी कमजोर है अधिकतर जगह पर वे टूटी फूटी इंग्लिश में और हावभाव के साथ ही संवाद करते हैं और तो और हमारी मैडम एयरपोर्ट से लेकर शानदार मॉल तक में धड़ल्ले से अपनी हिंगलिश और हिंदी मिलाकर चमत्कृत करने वाली देसी अंग्रेजी में जर्मन लोगों को समझाने में कामयाब रहीं हैं !

-झिझक का दूसरा कारण विदेश यात्रा में अधिक खर्चे का अनुमान होना होता है जबकि यह कई बार देशी यात्रा से भी कम बैठता है ! दिल्ली से पेरिस या म्यूनिख का एक व्यक्ति के आने जाने का खर्चा लगभग 36000/- है और लगभग 5000 रूपये प्रति दिन में अच्छा होटल मिल जाता  है जिसमें एक समय का खाना शामिल होता है ! इस प्रकार एक मध्यम आय वाले पति पत्नी, सवा लाख रूपये में, ५ दिन के लिए रोम जाकर बापस आ सकते हैं !

-विश्व के किसी भी भाग की यात्रा, बिना जानकारी करना पहले असंभव थी जबकि अब इन यात्राओं को गूगल ने बेहद आसान बना दिया है, अगर स्मार्ट फोन आपके पास है तब आप कहीं किसी शहर में खो नहीं सकते, जीपीएस टेक्नोलॉजी के जरिये आपकी लोकेशन हर वक्त आपके पार्टनर के पास होती है इसके लिए आपने अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों को अपनी लाइव लोकेशन शेयर करनी भर होती है, आजकल हर व्यक्ति को जीपीएस सिस्टम की जानकारी रखना आवश्यक है !


-आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर अनजान शहर में आपको उस शहर में कदम रखने से पहले, गूगल मैप के जरिये ,अपने बस स्टॉप और बस नंबर तक का पता चल जाता है और कितने स्टॉप बाद उतर कर किस दिशा में, कितने कदम चलना है गूगल मैप की मदद से आप अपने गंतव्य पर आसानी से पंहुच जाते हैं !

-अपना टिकिट अपने मोबाइल पर घर बैठे ऑनलाइन खरीद लीजिये और जहाँ चाहे यात्रा करिये कोई चेक करने नहीं आता न कहीं कोई रेलवे टिकिट कलेक्टर जैसा कोई इंसान दिखता, हर जगह एक भरोसा सा महसूस होता है कि आप भले इंसान हैं और चोरी नहीं कर सकते ! अगर किसी वीरान बसस्टॉप या ट्राम पर खड़े हैं तो टिकिट आपको अपने मोबाइल पर खरीदने की सुविधा है ! 

-हर सड़क पर पदयात्रियों के फुटपाथ , साइकिल के लिए अलग ट्रेक बना है ! पैदल चलते व्यक्ति को सड़क पार करते देख गाड़ियां जबतक इंतज़ार करती हैं जबतक वह इंसान सड़क पार न कर ले ! मोहल्ले में कोई शोर शराबा नहीं लेट इवनिंग में आप घर में तेज आवाज में टीवी अथवा ड्रिल से दीवार में या लकड़ी में छेद नहीं कर सकते शोर मचाना या जोर जोर से बोलना  असभ्यता की निशानी माना जाता है ! नियम पालन यहाँ का समाज अपनी जिम्मेदारी समझ कर पालन करता है !
यूरोप के विभिन्न देशों के बीच सीमा नहीं है हर व्यक्ति बिना किसी परमिट के किसी भी देश में जाने को स्वतंत्र है !

-पूरा वातावरण बेहद स्वच्छ है धूल उड़ते कहीं नहीं दिखती , इस बार मैं एक सफ़ेद शर्ट कई दिन से पहने हूँ कॉलर गंदा ही नहीं होता ! ठन्डे और साफ़ वातावरण में सुबह सुबह इसार नदी के किनारे दौड़ने का आनंद ही कुछ और है काश विश्व के देशों की सीमाएं समाप्त हो जाएँ और हम सब एक साथ मिलकर हंसना रहना सीख सकें !

कितना सुंदर सपना होता 
पूरा विश्व  हमारा  होता । 
मंदिर मस्जिद प्यारे होते 
सारे  धर्म , हमारे  होते ।  
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत । 
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।  

काश हमारे ही जीवन में 
पूरा विश्व , एक हो जाए । 
इक दूजे के साथ  बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने, 
घर से निकले मेरे गीत । 
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत । 

Friday, June 20, 2014

विदेश जाने में डर..- सतीश सक्सेना

जीवन की आपाधापी में ३६ साल की नौकरी कब पूरी हो गयी,पता ही नहीं चला ! घर की जिम्मेवारियों और बच्चों के लिए साधन जुटाने में, समय के साथ दौड़ते दौड़ते अपने लिए समय निकालना बहुत मुश्किल रहा ! कई बार लगा कि जवानी में जो समय अपने लिए देना चाहिए शायद वह कभी दे ही नहीं पाए ! अक्सर इसका कारण पूर्व नियोजित लक्ष्य,बच्चों के भविष्य,की आवश्यकता पूरा करते करते धन का अभाव रहा अथवा अपने मनोरंजन के लिए आवश्यक हिम्मत और समय ही नहीं जुटा पाए !
बचपन में सुनता था कि जवाहर लाल नेहरु के कपडे पेरिस धुलने जाते थे ! धनाड्य लोगों के किस्से सुनकर उनके आनंद को, हम निम्न मध्यम वर्ग , महसूस कर, खुश हो लेते थे ! उड़ते हवाई जहाज की एक झलक पाने को, खाना छोड़कर छत पर भागते थे कि वह जा रहा है एक चिड़िया जैसा जहाज और फिर अपने सपने समेट कर, चूल्हे के पास आकर, रोटी खाने लगते थे ! उन दिनों उड़ते हवाई जहाज में बैठने की, कल्पना से ही डर लगता था !

पेरिस रेलवे स्टेशन 
गौरव अपनी कंपनी कार्य से, जब जब देश से बाहर गए हर बार उसका अनुरोध रहता कि पापा एक बार आप जरूर घूम कर आइये , विभिन्न देशों की संस्कृति, रहनसहन और खानपान  में  बदलाव आपको अच्छा लगेगा ! हर बार व्यस्तता और छुट्टी न मिलने का बहाना करते हुए मैं, उन्हें असली बात कभी नहीं बता पाता था !

मुख्य कारण दो ही थे, पहला पता नहीं कितना खर्चा कितना होगा और दूसरा विदेशियों के परिवेश में घुलने, मिलने, बात करने में, आत्मविश्वास की कमी ....
और यह भय इतना था कि अगर यूरोप के टिकट अचानक बुक नहीं किये जाते तो शायद मैं अपने जीवन काल में कभी विदेश यात्रा का प्लान नहीं बना पाता !
यह प्रोग्राम अचानक ही बन गया जब नवीन ने वियना से अपने माता पिता के साथ मुझे भी वियना आने का
वेनिस की पानी से लबालब गलियां 
निमंत्रण दिया था ! उसके पत्र मिलने के साथ ही, अप्पाजी ने, अपने साथ साथ मेरा  टिकट भी, मेरे द्वारा कभी हाँ कभी न के बावजूद , बुक करा लिए थे ! उस शाम आफिस से लौटने पर पहली बार लगा कि मैं वाकई यूरोप यात्रा पर जा रहा हूँ ! 
उसके बाद, सफर पर जाने के लिए आवश्यक, बीमा कराया गया ! 15 दिन के इस सफर के लिए, आई सी आई सी आई लोम्बार्ड ने  लगभग ५५०० रुपया लिया था ! इस बीमा के फलस्वरूप हमें बीमारी अथवा किसी अन्य  वजह से होने वाली क्षति का मुआवजा शामिल था !
मगर जब पहली बार, विदेश पंहुच गए तब जाकर पता लगा कि बेबुनियाद भय, आत्मविश्वास को किस कदर कम करता है ! अतः सोचा कि मित्रों में अपना अनुभव अवश्य बांटना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति और लोग न महसूस करें !
वियना ट्राम 
अधिकतर मेरे मित्र लगभग हर वर्ष देश भ्रमण पर खासा पैसा खर्च करते हैं मगर विदेश जाने के बारे में प्लानिंग की छोड़िये, अपने घर में इस विषय पर चर्चा भी नहीं करते हैं और यह सब आत्मविश्वास और जानकारी के अभाव के कारण ही होता है !  

स्वारोस्की फैक्ट्री ऑस्ट्रिया 
शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि विदेश जाएँ या न जाएँ मगर हर परिवार के पास पासपोर्ट होना बहुत आवश्यक है, यह एक ऐसा डोक्युमेंट हैं जिसके जरिये भारत सरकार आपके बारे में, यह सर्टिफिकेट देती है कि पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक है तथा इस परिचयपत्र में आपके नाम और पते के अलावा जन्मतिथि,  तथा जन्मस्थान लिखा होता है ! किसी भी देश में प्रवेश करने  की परमीशन(वीसा) के लिए, इसका होना आवश्यक है ! यह कीमती डॉक्यूमेंट आपके घर के पते और जन्मतिथि के साथ आपके परिचय पत्र की तरह भी भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है !

इंटरलेकन, स्विट्ज़रलैंड
यह जानना आवश्यक है कि विदेश यात्रा हेतु , अगर दो माह पहले, किसी भी देश की फ्लाईट टिकिट बुक करायेंगे  तो लगभग आधी कीमत में मिल जाती है ! दिल्ली से पेरिस अथवा स्वित्ज़रलैंड जाने का सामान्य आने जाने का एक टिकट, लगभग ३५ हज़ार का पड़ता है जबकि यही टिकट तत्काल लेने पर ६० हज़ार का आएगा ! सामान्यता एक अच्छा टूरिस्ट होटल ३००० रूपये प्रति दिन में आराम से मिल सकता है !
अगर आपकी ट्रिप ४ दिन की है तो एक आदमी के आने जाने का खर्चा लगभग मय होटल ४५०००.०० तथा भोजन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट  मिलकर ५००००-६०००० रुपया

में ! अगर आप यही ट्रिप किसी अच्छे टूर आपरेटर के जरिये करते हैं तो आपका कुछ भी सिरदर्द नहीं, साल दो साल में  ५० - ६० हज़ार रुपया बचाइए और ४ दिन के लिए पेरिस, मय गाइड घूम कर आइये !

जहाँ तक खर्चे की बात है , हर परिवार में पूरे साल घूमने फिरने और बाहर खाने पर जो खर्चा होता है ,उसमें हर महीने कटौती कर पैसा बचाना शुरू करें तो कुछ समय में ही आधा पैसा बच जायेगा, बाकी का इंतजाम करने में बाधा नहीं आएगी !एक बार विदेश जाने के बाद आपके और बच्चों के आत्मविश्वास में जो बढोतरी आप पायेगे, उसके मुकाबले यह खर्चा कुछ भी नहीं खलेगा ! 
यूनाइटेड नेशंस , जेनेवा
अक्सर हम मरते दम तक अपनी सिक्योरिटी के लिए धन जोड़ते रहते हैं ,और बुढापे में , महसूस होता है कि जीवन में , और भी बहुत कुछ देख सकते थे जो  कर ही नहीं पाये और इतनी जल्दी जीवन की रात हो गयी ! मेरा अपना सिद्धांत है कि बेहद उतार चढ़ाव युक्त जीवन को, जब तक जियेंगे, हँसते मुस्कराते जियेंगे ! एक बात हमेशा याद रखता हूँ कि
  
" न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए ..."
        
विदेश जाकर अच्छी इंग्लिश न बोल पाने के लिए न बिलकुल न डरें , आप वहाँ पंहुच कर पायेंगे कि अधिकतर जगह पर, इंग्लिश जानने वाले बहुत कम हैं ! आपको लगेगा कि आप ही सबसे अच्छी इंग्लिश / अंगरेजी बोलते हैं :-))
जिंदगी जिंदादिली का नाम है !!

Tuesday, January 4, 2011

विदेश यात्रा पर जाने में डर -सतीश सक्सेना

 मेरा बेटा जब जब देश से बाहर गया हर बार उसका अनुरोध रहता कि पापा एक बार आप जरूर आ जाओ आपको अच्छा लगेगा ! हर बार मना करते हुए असली बात नहीं बता पाता था ! मुख्य कारण दो ही थे, विदेशियों से बात करने में  आत्मविश्वास की कमी एवं बहुत खर्चा होने का डर ....
मगर जब एक बार बाहर चले गए तब जाकर पता लगा कि बेबुनियाद भय, आत्मविश्वास को किस कदर कम करता है ! अतः सोचा कि अपना अनुभव अवश्य बांटना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति और लोग न महसूस करें !
सबसे पहले पासपोर्ट हर घर में होना बहुत आवश्यक है, यह एक ऐसा डोक्युमेंट हैं जिसके जरिये भारत सरकार आपके बारे में, यह सर्टिफिकेट देती है कि पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक है तथा इस परिचयपत्र में आपके नाम और पते के अलावा जन्मतिथि,  तथा जन्मस्थान लिखा होता है ! किसी भी देश में प्रवेश लेने की परमीशन(वीसा) के लिए इसका होना आवश्यक है !
अगर दो माह पहले, किसी भी देश की फ्लाईट टिकिट बुक करायेंगे  तो लगभग आधी कीमत में मिल जाती है ! दिल्ली से पेरिस अथवा स्वित्ज़रलैंड जाने का सामान्य आने जाने का एक टिकट, लगभग ३० हज़ार का पड़ता है जबकि यही टिकट तत्काल लेने पर ६० हज़ार का आएगा ! सामान्यता एक अच्छा टूरिस्ट होटल ३००० रूपये प्रति दिन में आराम से मिल सकता है ! 
अगर आपकी ट्रिप ४ दिन की है तो एक आदमी के आने जाने का खर्चा लगभग मय होटल ४२०००.०० तथा भोजन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट  मिलकर ५०००० रुपया में ! अगर आप यही ट्रिप किसी अच्छे टूर आपरेटर के जरिये करते हैं तो आपका कुछ भी सिरदर्द नहीं, साल दो साल में  ५० - ६० हज़ार रुपया बचाइए और ४ दिन के लिए पेरिस, मय गाइड घूम कर आइये !
जहाँ तक खर्चे की बात है , हर परिवार में पूरे साल घूमने फिरने और बाहर खाने पर जो खर्चा होता है ,उसमें हर महीने कटौती कर पैसा बचाना शुरू करें तो एक वर्ष में ही आधा पैसा बच जायेगा, बाकी का इंतजाम करने में बाधा नहीं आएगी ! मेरा अगर आप लोग यकीन करें तो एक बार विदेश जाने के बाद आपके और बच्चों के आत्मविश्वास में जो बढोतरी आप पायेगे, उसके मुकाबले यह खर्चा कुछ भी नहीं खलेगा ! मेरा अपना सिद्धांत है कि जब तक जियेंगे, हँसते मुस्कराते जियेंगे ! एक बात हमेशा याद रखता हूँ कि  
" न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए ..."
       
विदेश जाकर अच्छी इंग्लिश न बोल पाने के लिए न बिलकुल न डरें , आप वहाँ पंहुच कर पायेंगे कि अधिकतर जगह पर, इंग्लिश जानने वाले बहुत कम हैं ! आपको लगेगा कि आप ही सबसे अच्छी अंगरेजी बोलते हैं :-))

Wednesday, December 29, 2010

नए वर्ष पर शुभकामनायें चाहिए - सतीश सक्सेना

यूरोप यात्रा की खुशनुमा यादों के साथ, इस वर्ष ब्लॉग जगत की खट्टे, मीठे अनुभव लिए, आपके मध्य हूँ ! ब्लॉगजगत की यादों की बात करुँ तो पूरा वर्ष टिप्पणियों   और लेखों में उलझा रहा और आत्मसंतुष्टि और सत्संग, ढूँढने के बावजूद कम ही मिल पाया ...
स्वप्रकाशित लेखों पर , भीड़ के द्वारा की गयी ,वाह वाही के कारण, बने अपने आभामंडल की चमक में मदांध, हम लोग अक्सर मूर्ख को कालिदास और कालिदास को मूर्ख कह कर, विद्वता को निर्ममता से रौंद डालते हैं !      
ब्लॉग जगत की त्रासदी है कि पढने लायक लेख़क और उसके लेख को समझ कर टिप्पणिया देने वाले पाठक, की तलाश करना, सागर में बिना साधन, मोती ढूँढना है !
जो अच्छे लिखते हैं, वे लोकप्रिय न होने के कारण सामने नहीं आ पाते...मगर जो कूड़ा लिखते हैं, वे  अधिक टिप्पणियां देने के कारण अधिक लोकप्रिय हैं ! ( मैं भी लगा रहता हूँ ...) :-)     

दिन भर में ४० - ५० टिप्पणियां देने का लक्ष्य पूरा करने के लिए , अधिकतर लोग यहाँ, दूसरे को पढ़कर, अपना समय बर्बाद नहीं करते , किसी लेख की, पहली और आखिरी कुछ लाइनों  से समझ न आये तो किसी अच्छे ब्लागर की टिप्पणी  पढ़ कर, अपनी टिप्पणी ठोक देने से काम चला जाता है ! हाँ कभी कभी , जल्दी जल्दी समझने को कोशिश कर ,जो राय बने, उसे कायम कर, अक्सर मूर्ख  को समझदार  और समझदार को मूर्ख मान लेते हैं !
ब्लॉगजगत में पिछले वर्ष की उपलब्धियों के नाम पर कुछ ख़ास नहीं मिल पाया जो दिल को तसल्ली मिले  ....
हाँ कुछ ऐसे स्वघोषित विद्वान्  ;-) जरूर मिले जो यह समझा गए कि कुछ अच्छा लिखा करो तो लोग तारीफ़ भी करेंगे :-)))
अपने काम और व्यवहार के प्रति लोगों की बुद्धि समझ कर, अपने बाल नोचने का दिल कई बार किया है  .... 
इस वर्ष तो यही समझ आया कि मूर्खों से ईश्वर रक्षा करे और चालबाजों से दूरी बनी रहे, हालाँकि पहचानने में बार  बार गलती की है  ..... :-(
दोस्तों से अनुरोध है कि सच्चे मन से, अगले वर्ष की शुभकामनायें दे जाना, हमारे ब्लॉग पर...बहुत जरूरत है !
शुभकामनायें चाहिए कि अगले साल  "हमें समझ जाने वाले" और "हमारी असलियत जानने वाले" समझदार, कम से कम टकरायें  :-)), और कुछ भले और ईमानदार लोगों से भेंट हो तो इन लेखों का लिखना सार्थक हो !सबसे  अंत में ईश्वर से प्रार्थना है कि  मेरे पास इतना धन और शक्ति जरूर बचाए रखे  कि वक्त आने पर, मेरे दरवाजे से , कोई मायूस होकर, वापस न लौट जाए ! 
किसी का एक आंसू,बिना उस पर अहसान किये, पोंछ सका, तो अगले वर्ष, अपना मन संतुष्ट मान लूँगा  ...

Friday, July 30, 2010

विश्व की सबसे अधिक कष्टकारक और ह्रदय विदारक मूर्ति " -सतीश सक्सेना



जिस शिल्पकार ने यह बुरी तरह घायल कर, मारे गए शेर की यह प्रतिकृति बनाई है, वह वन्दनीय है ! अपने वर्ग में ऐसी कला, कम से कम मेरी निगाह से  आज तक नहीं गुज़री  !  
लायन आफ लयूजर्न  के नाम से मशहूर यह कलाकृति , अपनी जीवंत बनावट  के कारण , पूरे विश्व में सर्वाधिक पसंद की जाने वाली, शिल्प कला का बेहतरीन उदाहरण है ! अगर आपने बोलती हुई शिल्पकला को महसूस करना है तो चारो तरफ से घेर कर मारे गए, इस घायल शहीद शेर के चेहरे और शरीर के भाव पढ़ें !  
घेर कर मारे गए स्विस सैनिकों की याद दिलाता ,यह शेर ,बुरी तरह से घायल होने के बावजूद , अपनी पूरी शक्ति के साथ, दुश्मनों से, लड़ता हुआ शहीद हुआ है ! 
इसकी पीठ में गहरा घुपा हुआ, टूटा भाला होने के बाद भी, राजघराने के चिन्ह की रक्षा करते ,इसके चेहरे पर कष्ट की कोई शिकन नहीं है !   
उपरोक्त शीर्षक मार्क ट्वैन का दिया हुआ है जिसमें उन्होंने इस शहीद घायल शेर की मूर्ति को "विश्व की सबसे अधिक कष्टकारक और ह्रदय विदारक  मूर्ति "कहा था !  
यह मृत शेर उन स्विस सैनिकों की याद में बनाया गया है जिनको फ्रेंच रेवोलयूशन  के दौरान  १७९२ में  घेर कर मार दिया गया था ! यह स्मारक स्वित्ज़रलैंड के लयूसर्न शहर में ,स्विस सैनिकों की बहादुरी और वफादारी याद  दिलाने के लिए बनाया गया है  !  

Thursday, July 29, 2010

यह खतरनाक खिलौने और तीन टांग की कुर्सी -सतीश सक्सेना

जिनेवा में, यू एन स्कुआयर पर, हाल ऑफ़ नेशंस  के सामने एक विशाल कुर्सी जिसकी एक टांग टूटी हुई है , लोगों के स्वाभाविक आकर्षक का केंद्र है ! ५.५ टन वजनी और ३९ फीट ऊंची यह विशाल टूटी टांग  वाली लकड़ी की कुर्सी , विरोध करती है विभिन्न देशों में, जमीन में छिपी लैंड माइंस और खतरनाक क्लस्टर बमों का ,जो सैनिकों और बच्चों में भेद नहीं करते ! इन गंदे बमों से विश्व में हर साल सैकड़ों बच्चे अपाहिज हो जाते हैं !
विश्व में  ९० देश लैंड माइंस से प्रभावित माने  जाते हैं जिनमे से २५ बेहद संवेदनशील बताये गए हैं ! २३ मिलियन माइंस के साथ मिश्र सबसे आगे है ,उसके बाद इरान ,अंगोला, इराक, अफगानिस्तान, कम्बोडिया, बोस्निया  तथा  क्रोशिया आते हैं, जहाँ हर ३३४ आदमियों में से १ इंसान अपाहिज है ! !



  एक क्लस्टर बम के अन्दर लगभग १५० रंगीन चमकीले खिलौने नुमा बम होते हैं जो बम के गिरते ही चारो और बिखर जाते हैं , यह बिना फटे रंगीन टुकड़े बरसों बाद भी जीवित एवं विनाश लीला के लिए प्रभावी होते हैं ! ये रंगीन, छोटे खिलौने नुमा, आकर्षक आकार जो सोफ्ट ड्रिंक केन जैसे लगते हैं , बच्चों को स्वभावतः ही आकर्षित करते हैं ! अधिकतर, युद्ध के बरसों बाद भी , मासूम बच्चे  इनके शिकार होते हैं ! यह मानवता की क्रूरतम छवि है जिसका विरोध इस कुर्सी के द्वारा किया गया है ! 

जमीन के अन्दर छिपे हुए यह घातक लैंड माइंस और खिलौने की भांति लगते यह क्लस्टर बम मानवता के प्रति अपराध है ! अधिकतर नागरिकों को और बच्चों को निशाना बनाते यह छिपे हुए बम बरसों बाद भी अपना कहर बरपाते रहते हैं ! 


हॉल ऑफ़ नेशंस के सामने स्थापित इस टूटी कुर्सी का मकसद, संयुक्त राष्ट्र संघ में आने वाले ,विश्व के पोलिटिकल नेताओं और और अन्य सम्मानित लोगों को लैंड माइंस और क्लस्टर बमों को उपयोग में न लाने का अनुरोध है ! लैंड माइंस द्वारा निर्दोष अपाहिजों की याद दिलाती यह कुर्सी क्या अपने मकसद में कामयाब हो पायेगी ..

Sunday, July 11, 2010

सड़क के किनारे का यूरोप, मेरे कैमरे की नज़र से -सतीश सक्सेना

जब भी मैं चित्रों में यूरोप के खींचे हुए फोटो देखता हूँ , मशहूर स्मारकों  के खींचे गए फोटो ही नज़र आते हैं  , मैंने कोशिश की है कि सड़क किनारे का आम माहौल ,रहनसहन और वहां की संस्कृति की झलक आप को दिखा सकूं  ! 
लेफ्ट साइड में, रोम में हमारा अमेरिकेन गाइड ,माइकेल जब  भारतीय तिरंगा हाथ में लेकर, अपनी प्रभावशाली आवाज़ में रोमन साम्राज्य और संस्कृति के बारे में समझाता था तो हम लोग मंत्रमुग्ध से उसकी गहरी आवाज के साथ रोम साम्राज्य में खो जाते थे ! दाहिनी ओर का चित्र रोमन सिपाही के कपडे पहने, पैसे लेकर फोटो खिंचवाने का प्रयत्न करते, इस रोम वासी को देख, मुझे अपने यहाँ के मदारी याद आ गए  !
   
 
बायीं तरफ रोम का मशहूर कोलीज़ियम है , जो रोमन लोगों की उत्कृष्ट  भवन एवं वास्तुकला  की, सैकड़ों सालों बाद आज भी याद दिलाता है ! विश्वप्रसिद्द ग्लेदिएतर लड़ाके यहीं अपने जौहर दिखाते थे ! दीवारों से चोरों द्वारा उखाड़े गए, कॉपरपिन होल, इन विश्व धरोहरों की बर्वादी के सबूत के रूप में , हमारे देश की तरह यहाँ भी  उपस्थित थे  !
"दिल खुश हुआ मस्जिदे वीरान देख कर 
  मेरी तरह खुदा का भी खाना खराब है "
रास्ते में कोच में बैठे हुए घरों के फोटो खींचने का लोभ नहीं रोक पाया मैं !अपने घर के लान में खेलते ये बच्चों को देखना बहुत मन भावन था ! आसपास सूखते कपडे , और घर का फालतू समान कुछ कुछ अपने घर जैसा ही लगा  !
काफी हद तक इटली अपने देश जैसी  नज़र आई ! घरों में बंधे डोरी पर सूखते कपडे, पूरे यूरोप में सिर्फ यही देखने को मिले !
 दिल्ली के जनपथ मार्केट की तरह फूटपाथ पर सामान बेचते लोग, हमारे यहाँ के मुकाबले अधिक सभ्य नज़र आये !
कोई खींचा तानी या सामान बेचने की आपाधापी  नहीं दिखी  दुकान में खड़े होते ही हमारा मुस्कान के साथ स्वागत अवश्य किया जाता था !
 इटालियन पत्थर पूरे विश्व में अपनी सुन्दरता के लिए मशहूर रहा है ! जगह जगह रोड साइड पर लगी हुई इटालियन ग्रेनाईट की फैक्ट्रियां , और कटी हुई पत्थर की सिल्लियाँ , भवन निर्मातों की मांग बता रही थीं ! इटालियन ओनेक्स अपने कलर और खूबसूरती के लिए धनवानों के घर में अक्सर शोभा बढाता आया है ! परन्तु यह महंगा होने के कारण आम आदमी की पंहुच से बाहर है !


इटली में करारा नामक जगह का महत्व वही है जो भारत में मकराना का ! ऊपर दिया गया फोटो उसी स्थान का है ! मगर पहाड़ों का बेतरतीब खनन, हमने वहाँ भी बहुतायत में देखा, जैसा हमारे देश में है ! प्रकृति का दोहन, मानव  बहुत क्रूरता से करता रहा है , इसके दूरगामी परिणामों , के बारे में हम सोचने का प्रयत्न ही नहीं करते  ! करारा  (तस्किनी ), में जगह जगह,  बेदर्दी से काटे गए नंगे पहाड़, अपनी दुर्दशा सुना रहे थे !
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