आज PC Quest मैगज़ीन के पुराने पेज देखकर बुलेटिन बोर्ड सिस्टम से लेकर ब्लाग लेखन तक का सफ़र याद आ गया ! सोचा आप लोगों से साझा करुँ !
१९९२ में मैंने 40 MB हार्ड ड्राइव और 1 MB RAM,5.25" floppy drive युक्त अपना पहला कम्पयूटर लिया था तो दोस्तों ने मुझे पागल बताया था क्योंकि मैं उतने पैसे में अच्छी कंडीशन की फिएट ले सकता था ! उन दिनों कम्पयूटर के जानकार, मार्केट में उपलब्ध नहीं थे बिना किसी जानकारी के कम्पयूटर लेकर घर आया और पीसी क्वेस्ट मैगजीन लेकर, घंटो कम्पयूटर के सामने बैठ, ऑटो एक्सिक बैच और कॉन्फिग फ़ाइल में सर खपाता रहता था ! अगले दिन कम्पयूटर सीखने की कक्षा में एडमिशन लेने के बाद गया तो टीचर के बचकाने तरीके को देख, जमा पैसे छोड़कर घर बापस आ गया था और पी सी क्वेस्ट मैगज़ीन को गुरु मानकर साउंड कार्ड ...वीडियो कार्ड ...मेमरी मैनेजमेंट में सर खपाता रहता था !
पीसी क्वेस्ट मैगज़ीन पढ़ कर मैं अपनी जानकारी को अपडेट करता रहता था नेहरु प्लेस में अपने मित्र की जिस दुकान से मैं कम्पयूटर के पार्ट्स खरीदता था वहां मेरी कम्यूटर जानकारी की अच्छी भली धाक थी ..जब भी मैं दुकान में जाता उसके मेकेनिक, अनसाल्व्ड प्रोब्लम मुझसे डिस्कस करते थे और मुझे भी बड़ा आनंद आता था उन्हें समझाने में !
(चित्र गूगल से साभार )
१९९२ में मैंने 40 MB हार्ड ड्राइव और 1 MB RAM,5.25" floppy drive युक्त अपना पहला कम्पयूटर लिया था तो दोस्तों ने मुझे पागल बताया था क्योंकि मैं उतने पैसे में अच्छी कंडीशन की फिएट ले सकता था ! उन दिनों कम्पयूटर के जानकार, मार्केट में उपलब्ध नहीं थे बिना किसी जानकारी के कम्पयूटर लेकर घर आया और पीसी क्वेस्ट मैगजीन लेकर, घंटो कम्पयूटर के सामने बैठ, ऑटो एक्सिक बैच और कॉन्फिग फ़ाइल में सर खपाता रहता था ! अगले दिन कम्पयूटर सीखने की कक्षा में एडमिशन लेने के बाद गया तो टीचर के बचकाने तरीके को देख, जमा पैसे छोड़कर घर बापस आ गया था और पी सी क्वेस्ट मैगज़ीन को गुरु मानकर साउंड कार्ड ...वीडियो कार्ड ...मेमरी मैनेजमेंट में सर खपाता रहता था !
पीसी क्वेस्ट मैगज़ीन पढ़ कर मैं अपनी जानकारी को अपडेट करता रहता था नेहरु प्लेस में अपने मित्र की जिस दुकान से मैं कम्पयूटर के पार्ट्स खरीदता था वहां मेरी कम्यूटर जानकारी की अच्छी भली धाक थी ..जब भी मैं दुकान में जाता उसके मेकेनिक, अनसाल्व्ड प्रोब्लम मुझसे डिस्कस करते थे और मुझे भी बड़ा आनंद आता था उन्हें समझाने में !
सबसे अधिक समस्या अमेरिका से मंगाए गए जूम १४.४ केबीपीएस मोडेम को इंस्टालेशन और उसे चलाने में में हुई जिसमें अंततः काम पोर्ट पर मुझे जीत हासिल हुई ! पहली बार मोडम हैण्ड शेक की आवाज सुनकर जो ख़ुशी हुई उसका वर्णन मैं यहाँ नहीं कर सकता ! उसके बाद रात रात भर लोकल बुलेटिन बोर्ड सर्विस का उपयोग कर एक दूसरे से जानकारी शेयर करना कम रोमांचक नहीं होता था !
उन दिनों कम्पयूटर जानकारी जुटाना बहुत दुर्लभ मानी जाती थी, उस माहौल में मैं पी सी क्वेस्ट और डाटाक्वेस्ट नामक मैगजीन बहुत अच्छा कार्य कर रही थीं ! भारत में, मैं कम्यूटर के प्रति जागरूकता बढ़ाने में पी सी क्वेस्ट मैगज़ीन का बहुत बड़ा हाथ मानता हूँ और उन्हें धन्यवाद देता हूँ !
(चित्र गूगल से साभार )

