आदरणीय रमाकान्त सिंह जी का अनुरोध पाकर, उनकी ही प्रथम पंक्तियों से, इस कविता की रचना हुई , आभार भाई !
गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे !
धरा से सहनशीलता ले,सलिल से शीतलता पायी
माँ की दवा,को चोरी करते,बच्चे की वेदना लिखूंगा !
आदरणीय रमाकान्त सिंह जी का अनुरोध पाकर, उनकी ही प्रथम पंक्तियों से, इस कविता की रचना हुई , आभार भाई !
गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे !
धरा से सहनशीलता ले,
आज सुबह पांच बजे मैं गाडी लेकर DND toll पर पहुँच गया था , बढ़िया मौसम मगर आद्रता 90 प्रतिशत , गाडी एक साइड पार्क कर, रिंग रोड तक जाकर बापस लौटने का (लगभग 8 Km )एक दोस्त ने , बढे हुए वजन को घटाने के लिए व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के किसी ग्रेजुएट का बताया फार्मूला भेजा और पूंछा कि क्या इसे दो दिन कर लूँ ? उसे पढ़ने पर पता चला कि उसमें 17 तरीके के किचेन अवयव शामिल थे , जिनको तलाश करने और बनाने में ही वजन दो किलो घट जाएगा और उसका विवरण इतना जबरदस्त था कि पालन करने वाले को यह फार्मूला रामवाण ही लगेगा !
हमारे देश में ज्ञानियों की भरमार है , ज्ञान देने वाले और लेने वाले दोनों एक से हैं , उनकी हर बीमारी खाने से जुड़ी मानी जाती है और उनकी हर समस्या का निदान भी खाने में ही होता है बस शरीर को तकलीफ न देना पड़े और वजन घट जाए इसकी तलाश जीवन भर चलती रहती है ! जैसे तैसे जब वे 45 के होते हैं तब उन्हें लगता है कि शरीर बेडौल होने लगा है और वे इसका इलाज टहलना मानते हैं सो पड़ोस के किसी एक मित्र के साथ पार्क में आधा घंटा, ऑफिस में मारे हुए तीर उस दोस्त को सुनाते हुए, टहलना शुरू करते हैं जो ताउम्र चलता है बिना यह समझने का प्रयत्न किये कि इस क्रिया से एक किलो भी वजन हिला नहीं है ! उम्र बढ़ने के साथ स्वतः शारीरिक क्षरण के साथ बीमारियां बढ़ने लगती हैं जिनका इलाज वे सड़क छाप ज्ञानियों के दिए फार्मूलों से करते हैं ! इन फॉर्मूलों में अदरक , हल्दी , काली मिर्च , लौंग, दालचीनी , निम्बू , हरा धनिया, सेंधा नमक , जीरा , अजवायन , हींग और लहसुन अवश्य होता है जो हम बचपन से खाते रहे हैं !
उपरोक्त फार्मूला में नाटकीयता की भरमार है ताकि गुरु के प्रति आदर भावना और अधिक हो , जबकि सप्ताह में दो दिन अगर रोटी आदि नियमित भोजन बंद कर पहले दिन केवल सब्जियां उबालकर अथवा कच्ची सलाद और दुसरे दिन केवल फलों का सेवन, भरपूर पानी पीते हुए करें तब वजन डेढ़ से ढाई किलो घट जाता है और अगर साथ में रोज ब्रिस्क वाकिंग या रनिंग करें तब यह वजन कभी शरीर पर कब्ज़ा नहीं कर सकता !
आज सुबह दौड़ते हुए मेरे पास से एक नौजवान आगे निकला गया उसके हावभाव से लग रहा है कि वह दौड़ने में नौसिखिया है , नतीजा थोड़ी देर बाद ही वह हांफने लगा और वाक करने लगा ! तब मैंने उसे समझाया कि हांफते हुए दौड़ना जान ले सकता है , हांफने का मतलब तुम्हें सही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही अतः हृदय पर अधिक दवाब पड़ रहा है ! मेरे साथ दौड़ो और दौड़ते हुए मेरी तरह साँस लो , हर गिरते उठते कदम पर सांस खींचना और छोड़ना शामिल होना चाहिए जिस दिन कदम ताल के साथ सांस लेना और छोड़ना सीख गए उस दिन तुम कितनी ही दूरी दौड़ोगे , थकोगे नहीं !
सो अगर अपने बीमार हृदय, पेन्क्रियास और मोटापे से पीछा छुटाना है तो दौड़ना सीखना शुरू करें ! आप हर उम्र में खुश रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे !
हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर उन्हें प्रोत्साहन दिया और कांपते हुए क़दमों को अहसास दिलाया कि वे न केवल चल रही हैं बल्कि बेहतरीन निशान भी छोड़ रही हैं !
यह उनके लिए अविश्वसनीय ही था कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कुछ नहीं लिखा उनका लिखना न केवल पढ़ने योग्य है बल्कि तालियों के साथ हिंदी जगत में उन्हें एक सम्मानित पहचान भी मिल रही है , इस विश्वास के साथ ही उनके लेखन में विविधता और पैनापन बढ़ने लगा और कुछ समय पश्चात, उनके बेकार लेख वाकई अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, आज उनमें से कई हिंदी जगत में बेहतरीन लेखक हैं और प्रिंट मीडिया उनके लेख लगातार छापकर उन्हें सम्मानित कर रही है !
हिंदी ब्लॉगिंग से लेखकों के उदय में, मैं समीर लाल ( उड़न तश्तरी ) का बहुत बड़ा योगदान मानता हूँ , 2008 में समीर लाल ही थे जो नियमित तौर पर प्रतिदिन लगभग सौ ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा जाकर वाह वाही कर टिप्पणी करते थे , कई लोग कहते थे कि इतनी टिप्पणियां कोई एक व्यक्ति कर ही नहीं सकता यह असंभव ही था कि एक व्यक्ति इतने ब्लॉगों पर जाकर पढ़े और टिप्पणी करे ! कुछ कहते थे कि उन्होंने कोई सॉफ्टवेयर बनवाया है जो इतनी टिप्पणी रोज करता है और कई उनकी मजाक बनाते थे कि वे किसी ब्लॉग को पढ़ते नहीं है बस खुद के ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए वे सबके ब्लॉग पर नियमित टिपियाते हैं ! मगर सच्चाई यही थी कि उनकी टिप्पणी पाने पर एक जोश महसूस होता था कि मैंने कुछ अच्छा लिखा है जो कनाडा से उड़नतश्तरी ने आकर कमेंट दिया है ! हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ाने में समीर लाल का योगदान अमर और सैकड़ों लेखनियों के लिए जीवन दायक रहा , इस योगदान के लिए वे हमेशा वंदनीय रहेंगे !
रनिंग करते समय, स्टेडियम के रनिंग ट्रेक पर या खुली सड़क पर जब कोई भारी वजन का व्यक्ति या महिला दौड़ने का प्रयत्न करते देखता हूँ तब मैं उसकी हिम्मत अफ़ज़ाई अवश्य करता हूँ , शाब्बाश बच्चे तुम अवश्य जीतोगे एक दिन, बस हिम्मत नहीं हारना , दुनियां तुम्हें दौड़ते देख हँस रही है इसकी बिना परवाह किये धीरे धीरे बिना हांफे दौड़ना, सीखते रहो एक दिन तुम्हारा स्लिम शरीर इसी ट्रेक पर तेज गति से भागते हुए दुनिया देखेगी !
अंत में , बढ़ा वजन घटाने के लिए !
-दिन में 12 गिलास पानी कम से कम पीना ही है !
-डिनर ७ -८ बजे तक और बहुत हल्का बिना रोटी चावल के !
कोई भी मीठी चीज नहीं खानी है ! मिल्क प्रोडक्ट कम करें !
-रोज आधा घंटा तेज वाक करें बिना हांफे , और आखिरी दो मिनट बिना हांफते हुए दौड़ कर समाप्त करें ! विश्वास रखें कि वे बहुत जल्द सामान्य पहले जैसे स्मार्ट होंगे ! शरीर आसानी से हर परिस्थिति में अभ्यस्त हो जाने में समर्थ है , रनिंग सिखने के साथ ही शरीर की ढेरों उम्र जनित बीमारियां डायबिटीज , बीपी , कब्ज ,दर्द आदि खुदबखुद गायब हो जायँगी !
अभी कुछ दिन पहले ही ठंडक और कोरोना के कारण , घर में जमकर खाया और कम्बल की मेहरबानी के कारण एक दिन चेक करने पर पाया कि पूरे तीन किलो वजन बढ़ चुका है , इस उम्र ( 66 वर्ष ) में मुझे बुढ़ापा नहीं चाहिए सो उसी दिन तय कर लिया था कि एक सप्ताह में वजन
सामान्य करना है !
अधिकतर लोग कहते हैं कि इस उम्र में बीमारियां इतनी हैं कि हंसने की हिम्मत ही नहीं होती , मुझे भी ५ वर्ष पहले ऐसी ऐसी बीमारियां थीं जो मुझे भय के कारण आराम से सोने भी नहीं देती थीं मगर ज़िंदा रहने की तेज इच्छा के कारण उनकी उपेक्षा करना शुरू की और एक आलसी और कमजोर शरीर से एक लम्बी दूरी का धावक निकल कर बाहर आया जो लगातार तीन घंटे तक बिना रुके दौड़ता था इस करामात ने जो मजबूत आत्मविश्वास दिया उससे न केवल चेहरे की रौनक जवानों से अधिक बेहतर बन गयी बल्कि मैं अपनी जवान शक्ति को महसूस भी करने लगा था और मैं वाकई हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया !!
जो लोग बरसों से बिना पसीना बहाये, ऐयरकंडीशनर ऑफिस में काम करने के आदी हो गए हैं उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर की मसल्स, फेफड़ों के नियमित कार्य , धमनियों में रक्त संचार , हाथ, पैरों, रीढ़, कमर, घुटनों व शरीर के अन्य महत्वपूर्ण जॉइंट्स, बेहद धीमी गति से चलने के आदी हो चुके हैं और बरसों से पड़ी उनकी इस आदत के फलस्वरूप शरीर ने अपने अंदर समयानुसार कुछ स्वाभाविक बदलाव भी किये हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के दर्द एवं बीमारियां उत्पन्न हुई हैं ! और यह स्थिति अपने शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों का उपयोग न करने के कारण पैदा हुई है ! आज पहली बार मैं आपका ध्यान आकर्षण उन अवयवों के बारे में करना चाहता हूँ जिनकी स्थिति पर अपने कभी गौर ही नहीं किया और उनकी दुर्दशा कर दी ![]() |
| साथ तुम्हारे दौड़ रहा है बुड्ढा ६५ साल का |
-अब हमारी उम्र हो गयी है यह कहना बंद करें और वृद्धावस्था को जड़ से नकारें , हर काम में हाथ डालें जो मजबूत शरीर के साथ करते थे !
मुझे ख़ुशी है कि मैं दौड़ के सहारे अपने तथाकथित वृद्ध शरीर का कायाकल्प करने में सफल रहा , आज उन दसियों बीमारियों में से एक भी शेष नहीं बची जिनसे मैं एक समय चिंतित रहा करता था और या सफलता मुझे 60 वर्ष से 64 वर्ष के मध्य मात्र दौड़ना सीख पाने से मिली ! जो व्यक्ति अपने साठ वर्षों में कभी दस मीटर भी न दौड़ा हो वह सिर्फ एक वर्ष के अभ्यास के बाद 21 km लगातार दौड़ने में सक्षम हुआ है एवं बीमारियां कहाँ गायब हुईं यह पता ही नहीं चला !
वे यह कभी नहीं बताते कि इन दवाओं के सेवन से आपकी किडनी कितने दिनों में आधे से अधिक बर्बाद हो जायेगी और फिर उसकी दवा भी पुराने केमिकल्स (तथाकथित दवा) के साथ खानी होगी !
मुझे बेहद अफ़सोस तब होता है कि अक्सर असमय जाने वाले लोग बेहतरीन प्रभामंडल युक्त होते हैं जिनके आसपास जी हजूरी तथा हाँ जी हाँ जी कहने वालों की भीड़ होती है और यह गुरु गौरव के साथ, तमाम सामाजिक उपयोग का विशुद्ध ज्ञान भी, नियमित बाँटते रहते हैं , ऐसे विद्वान भी अपने शरीर की चीत्कार सुनने में असमर्थ होते हैं और उसका एकमात्र कारण आलस्य तथा जीभ पर कंट्रोल न करना मात्र है जिसके कारण वे अपने नजदीक आती हुई निश्चित मृत्यु की आहट को सुनने में विफल रहते हैं !
इतिहास गवाह है कि सफलता मानव को पागल बना देती है, वह अपने किये हर काम को श्रेष्ठ मानना शुरू कर देता है , हम सब भी धन और सम्मान पाते ही उसका अनजाने में दुरुपयोग शुरू कर देते हैं , धन का उपयोग सबसे पहले आराम करने में लगाते हैं , सुख सुविधाओं के होते सबसे अधिक ह्रदय रोग और डायबिटीज (शाही रोग) धनवान और सम्मान सज्जित लोगों को ही होते हैं , मैंने आजतक एक भी मेहनतकश व्यक्ति को ह्रदय रोग से मरते नहीं सुना और न उसे डायबिटीज हुई जबकि चीनी भी वह सबसे अधिक खाता रहा ,इन बीमारियों का शिकार सबसे अधिक सम्मानित और बड़े लोग ही होते हैं जिनके प्रभामंडल पर समाज को नाज होता है ! वे पूरे समाज को दिशा देने में समर्थ होते हैं मगर शारीरिक मेहनत और पसीना बहाना उन्हें भी निरर्थक लगता है !
स्नेही संवेदनशील लोग अगर लेखक हों तो वे निस्संदेह उनके लेखन में अनूठापन और ईमानदारी स्पष्ट नजर आएगी ऐसे लोग अपनी तारीफ नहीं चाहते और न इसका प्रयत्न करते हैं सो अक्सर यह बहुमूल्य व्यक्तित्व साहित्य जगत में गुमनामी में ही रहते हैं ,हाँ, ढोल बजाते प्रशस्ति पत्र पाते लोगों से कोसों दूर इन लोगों की कुटिया में उनके भले मित्रों की कोई कमी नहीं होती !
मेरा मानना है कि ६४ वर्ष की उम्र में कम से कम 64 प्रतिशत शरीर का क्षरण अवश्य हुआ है और मेरे शरीर का हर अंग की क्षमता भी उसी हिसाब से कम हुई होगी वह और बात है कि मैं अपनी मशीनरी को अधिकतर एक्टिव रखने में कामयाब हूँ सो मेरे शरीर की चुस्ती और स्टेमिना, उम्र के हिसाब से कहीं अधिक है , यकीनन मैं बाद में बिस्तर पर लेटकर बीमारियाँ भोगने से काफी हद तक बचा रहूंगा !