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Friday, April 19, 2024

गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे -सतीश सक्सेना

आदरणीय रमाकान्त सिंह जी का अनुरोध पाकर, उनकी ही प्रथम पंक्तियों से, इस कविता की रचना हुई , आभार भाई  ! 

गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना ख़ुद गढ़ेंगे !

धरा से सहनशीलता ले,
अग्नि का ताप सहा हमने 
पवन के ठन्डे झोंको संग 
सलिल से शीतलता पायी 
यही पर ज्ञान लिया तुमसे
परिश्रम की क्षमता आयी 
अब हुआ विश्वास सचमुच 
छू सकेंगे हम गगन ,अब 
ज्ञान पाकर शारदा से, 
भाग्य अपना खुद लिखेंगे !
गढ़ दिया तुमने हमें अब, भाग्य अपना खुद गढ़ेंगे !

अब हमें विश्वास अपना
रास्ता पाएंगे , हम भी  !
ज्ञान का आधार लेकर ,
विश्व को समझेंगे हम भी 
अपने विद्यालय से ही तो 
मिल सका है बोध हमको 
शक्तिशाली पंख पाकर 
छू सकेंगे चाँद हम ,अब 
प्रबल इच्छाशक्ति  लेकर, 
भाग्य अपना खुद बुनेंगे !
गढ़ दिया तुमने हमें अब , भाग्य अपना खुद गढ़ेंगे !

https://www.facebook.com/ramakant.singh.509

Wednesday, July 14, 2021

उनसे कहिये, चलने का अंदाज बदल लें -सतीश सक्सेना

Strava नाम का एक अप्प रनर्स और साइकिलिस्ट में बहुत पॉपुलर है यह दौड़ते हुए न केवल हमारी रनिंग /वाकिंग के टाइमिंग पर नजर रखता है बल्कि हमारे रुट को ट्रेक भी करता है ताकि हमें अपना सम्पूर्ण हेल्थ डाटा मिल सके , इसके अनुसार सतीश सक्सेना उम्र 66+ ने 2015 सितम्बर से लेकर अबतक दौड़ते हुए 7216 Km की दूरी तय की है , इसमें 10 km की दूरी का उनका सर्वश्रेष्ठ समय 64 मिनट्स और 21.10 Km की रनिंग का समय 2:16:31 रहा ! शुरुआत में लम्बी दूरी तय करते हुए अधिकतम हार्ट रेट चिंताजनक 200 तक पंहुच जाता था जो समय के साथ धीरे धीरे कम होता हुआ अब 165 के आसपास रहता है जो काफी संतोषजनक है !

रनिंग एक हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जो कि कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को बेहतर करने के साथ साथ हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायक है ! दौड़ते समय रनर के हर गिरते हुए कदम पर, रनर के शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट उसके घुटने पर पड़ता है जो कि उसकी कमजोर आंतरिक मसल्स को चोटिल करने को पर्याप्त है , अतः दौड़ने की शुरुआत करने से पहले शरीर को उसे झेलने हेतु ,धीरे धीरे अभ्यस्त बनाना होता है ताकि शरीर के अवयव इस शानदार हाई इंटेंसिटी क्रिया को आसानी से वर्दाश्त कर सके !

दौड़ने से आपके हृदय और फेफड़ों के कार्य में आश्चर्यजनक सुधार के अतिरिक्त , मसल्स का मजबूत होना , बेहतर नींद और स्वच्छ खून , पेट के रोग , बढ़ा हुआ वजन , डायबिटीज, हृदय रोग और हाइपरटेंशन गायब होते नजर आते हैं !

ध्यान रहे दौड़ते समय आपके पूरे शरीर के हर आंतरिक अवयव में जबरदस्त इम्पैक्ट और कम्पन लगातार होता है , जिससे पूरे शरीर में हलचल होती है और फेफड़े व् हृदय अपने पूरी गति के साथ ऑक्सीजन खींच कर खून में पम्प करते हैं , अगर आप दौड़ते समय अपने हर गिरते उठते कदम के साथ साँस नहीं ले पा रहे हैं तब आप ऑक्सीजन की कमी के कारण शीघ्र हांफने लगेंगे और कुछ कदम दौड़ने के साथ ही थक कर रुकने को विवश हो जाएंगे अतः दौड़ते समय सांसों को कदमों के साथ लयबद्ध करना आवश्यक होता है !

अब इतने वर्ष दौड़ने के बाद मैं अपने आपको एक सहज रनर मानता हूँ उक्त सारी बीमारियां  पता ही नहीं कहाँ गायब हो गयीं और अब सुबह की लम्बी दौड़ के बाद शरीर से टपकता पसीना वरदान जैसा लगता है साथ ही पूरे दिन मूड की मस्ती मुफ्त ! 
सो आइये गुनगुनाएं  ...

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !




Monday, July 12, 2021

नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

आज सुबह पांच बजे मैं गाडी लेकर DND toll पर पहुँच गया था , बढ़िया मौसम मगर आद्रता 90 प्रतिशत , गाडी एक साइड पार्क कर, रिंग रोड तक जाकर बापस लौटने का (लगभग 8 Km )
मन बनाया और थोड़ी स्ट्रेचिंग के बाद , गहरी गहरी साँस लेकर, बेहद सहज मन से दौड़ना शुरू किया ! आज का संकल्प था कि सहज मन से ही दौड़ना है , न दूरी की चिंता और न समय की , खाली सड़क के किनारे किनारे, पेट के बढे हुए एक टायर पर विचारों को केंद्रित करते हुए कि इस सप्ताह इससे मुक्ति पानी ही है, दौड़ते दौड़ते कब यमुना ब्रिज आ गया पता ही नहीं चला , दिल्ली पुलिस पीसीआर के हैडकांस्टेबल द्वारा गुड मॉर्निंग सर का जवाब देते हुए अच्छा लगा ! इस रुट के लगभग सारे ड्यूटी अफसर जानते हैं कि एक 67 वर्ष का रिटायर्ड जवान नोएडा से दिल्ली तक दौड़ता है !

आज की 8 km की लम्बी दौड़ की विशेषता सहजता रही , बिना किसी तनाव, गरमी ,पसीने पर ध्यान दिए बिना यह बेहद आसान था हालाँकि बढ़ी आद्रता के कारण, बापसी में कार तक पंहुचने पर ऊपर से नीचे तक पसीने से नहाया हुआ था ! 

काया कल्प के संकल्प में सहजता ही आवश्यक है जिसे आज के दिखावटी जगत में पाना बेहद मुश्किल होता है ! सहज आप तभी हो सकेंगे जब मन स्वच्छ हो ईमानदार हो खुद के लिए भी और गैरों के लिए भी ! स्वस्थ मन और शरीर को पाने के लिए आप को भय त्यागना होगा , मृत्यु भय पर विजय पाने के लिए अपनी आंतरिक सुरक्षा शक्ति पर भरोसा रखें कि वह अजेय है किसी भी बीमारी से उसका शरीर सुरक्षित रखने में वह सक्षम है और हाँ, अपने विशाल प्रभामण्डल और तथाकथित आदर सम्मान भार को सर से उतारकर घर पर रख देना होगा अन्यथा यह गर्व बर्बाद कर देने में सक्षम है मेरे हमउम्र तीन मित्र इस वर्ष मोटापे की भेंट चढ़ गए और कुछ हार्ट अटैक की कगार पर हैं ,काश वे समय रहते चेत गए होते ! 

भारत हृदय रोग और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बन चुका है , हर चौथा व्यक्ति इसका शिकार है और उसे पता ही नहीं , चलते समय या सीढियाँ चढ़ते समय सांस फूलता है, उसे यह तक पता नहीं कि साँस फूलने का मतलब क्या होता है और न उसके पास समय है कि इस बेकार विषय पर ध्यान दे मोटापे को वह उम्र का तकाजा समझता है ! खैर  ...

बरसों से आलसी शरीर को सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए कृत्रिम प्रसाधनों , दवाओं का त्याग करना होगा , उनसे शरीर स्वस्थ होगा का विचार, केवल खुद को मूर्ख बनाना है ! शरीर स्वस्थ रखने के लिए जो अंग जिस कार्य के लिए बने हैं उनका सहज भरपूर उपयोग करना सीखना होगा ! गलत लोक श्रुतियों और मान्यताओं, सामाजिक भेदभाव पर खुले मन से विचार कर उनका त्याग करें आप खुद ब खुद सहज होते जाएंगे ! 

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Friday, July 9, 2021

मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ -सतीश सक्सेना

 एक दोस्त ने , बढे हुए वजन को घटाने के लिए व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के किसी ग्रेजुएट का बताया फार्मूला भेजा और पूंछा कि क्या इसे दो दिन कर लूँ ? उसे पढ़ने पर पता चला कि उसमें 17 तरीके के किचेन अवयव शामिल थे , जिनको तलाश करने और बनाने में ही वजन दो किलो घट जाएगा और उसका विवरण इतना जबरदस्त था कि पालन करने वाले को यह फार्मूला रामवाण ही लगेगा !

हमारे देश में ज्ञानियों की भरमार है , ज्ञान देने वाले और लेने वाले दोनों एक से हैं , उनकी हर बीमारी खाने से जुड़ी मानी जाती है और उनकी हर समस्या का निदान भी खाने में ही होता है बस शरीर को तकलीफ न देना पड़े और वजन घट जाए इसकी तलाश जीवन भर चलती रहती है ! जैसे तैसे जब वे 45 के होते हैं तब उन्हें लगता है कि शरीर बेडौल होने लगा है और वे इसका इलाज टहलना मानते हैं सो पड़ोस के किसी एक मित्र के साथ पार्क में आधा घंटा, ऑफिस में मारे हुए तीर उस दोस्त को सुनाते हुए, टहलना शुरू करते हैं जो ताउम्र चलता है बिना यह समझने का प्रयत्न किये कि इस क्रिया से एक किलो भी वजन हिला नहीं है ! उम्र बढ़ने के साथ स्वतः शारीरिक क्षरण के साथ बीमारियां बढ़ने लगती हैं जिनका इलाज वे सड़क छाप ज्ञानियों के दिए फार्मूलों से करते हैं ! इन फॉर्मूलों में अदरक , हल्दी , काली मिर्च , लौंग, दालचीनी , निम्बू , हरा धनिया, सेंधा नमक , जीरा , अजवायन , हींग  और लहसुन अवश्य होता है जो हम बचपन से खाते रहे हैं !

उपरोक्त फार्मूला में नाटकीयता की भरमार है ताकि गुरु के प्रति आदर भावना और अधिक हो , जबकि सप्ताह में दो दिन अगर रोटी आदि नियमित भोजन बंद कर पहले दिन केवल सब्जियां उबालकर अथवा कच्ची सलाद और दुसरे दिन केवल फलों का सेवन, भरपूर पानी पीते हुए करें तब वजन डेढ़ से ढाई किलो घट जाता है और अगर साथ में रोज ब्रिस्क वाकिंग या रनिंग करें तब यह वजन कभी शरीर पर कब्ज़ा नहीं कर सकता ! 

आज सुबह दौड़ते हुए मेरे पास से एक नौजवान आगे निकला गया उसके हावभाव से लग रहा है कि वह दौड़ने में नौसिखिया है , नतीजा थोड़ी देर बाद ही वह हांफने लगा और वाक करने लगा ! तब मैंने उसे समझाया कि हांफते हुए दौड़ना जान ले सकता है , हांफने का मतलब तुम्हें सही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही अतः हृदय पर अधिक दवाब पड़ रहा है ! मेरे साथ दौड़ो और दौड़ते हुए मेरी तरह साँस लो , हर गिरते उठते कदम पर सांस खींचना और छोड़ना शामिल होना चाहिए जिस दिन कदम ताल के साथ सांस लेना और छोड़ना सीख गए उस दिन तुम कितनी ही दूरी दौड़ोगे , थकोगे नहीं !

सो अगर अपने बीमार हृदय, पेन्क्रियास और मोटापे से पीछा छुटाना है तो दौड़ना सीखना शुरू करें ! आप हर उम्र में खुश रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे !   

  

Friday, February 19, 2021

सम्मान से अधिक प्रोत्साहन देना आवश्यक है -सतीश सक्सेना

हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर उन्हें प्रोत्साहन दिया और कांपते हुए क़दमों को अहसास दिलाया कि वे न केवल चल रही हैं बल्कि बेहतरीन निशान भी छोड़ रही हैं ! 

यह उनके लिए अविश्वसनीय ही था कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कुछ नहीं लिखा उनका लिखना न केवल पढ़ने योग्य है बल्कि तालियों के साथ हिंदी जगत में उन्हें एक सम्मानित पहचान भी मिल रही है , इस विश्वास के साथ ही उनके लेखन में विविधता और पैनापन बढ़ने लगा और कुछ समय पश्चात, उनके बेकार लेख वाकई अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, आज उनमें से कई हिंदी जगत में बेहतरीन लेखक हैं और प्रिंट मीडिया उनके लेख लगातार छापकर उन्हें सम्मानित कर रही है ! 

हिंदी ब्लॉगिंग से लेखकों के उदय में, मैं समीर लाल ( उड़न तश्तरी ) का बहुत बड़ा योगदान मानता हूँ , 2008 में समीर लाल ही थे जो नियमित तौर पर प्रतिदिन लगभग सौ ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा जाकर वाह वाही कर टिप्पणी करते थे , कई लोग कहते थे कि इतनी टिप्पणियां कोई एक व्यक्ति कर ही नहीं सकता यह असंभव ही था कि एक व्यक्ति इतने ब्लॉगों पर जाकर पढ़े और टिप्पणी करे ! कुछ कहते थे कि उन्होंने कोई सॉफ्टवेयर बनवाया है जो इतनी टिप्पणी रोज करता है और कई उनकी मजाक बनाते थे कि वे किसी ब्लॉग को पढ़ते नहीं है बस खुद के ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए वे सबके ब्लॉग पर नियमित टिपियाते हैं ! मगर सच्चाई यही थी कि उनकी टिप्पणी पाने पर एक जोश महसूस होता था कि मैंने कुछ अच्छा लिखा है जो कनाडा से उड़नतश्तरी ने आकर कमेंट दिया है ! हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ाने में समीर लाल का योगदान अमर और सैकड़ों लेखनियों के लिए जीवन दायक रहा , इस योगदान के लिए वे हमेशा वंदनीय रहेंगे !

रनिंग करते समय, स्टेडियम के रनिंग ट्रेक पर या खुली सड़क पर जब कोई भारी वजन का व्यक्ति या महिला दौड़ने का प्रयत्न करते देखता हूँ तब मैं उसकी हिम्मत अफ़ज़ाई अवश्य करता हूँ , शाब्बाश बच्चे तुम अवश्य जीतोगे एक दिन, बस हिम्मत नहीं हारना , दुनियां तुम्हें दौड़ते देख हँस रही है इसकी बिना परवाह किये धीरे धीरे बिना हांफे दौड़ना, सीखते रहो एक दिन तुम्हारा स्लिम शरीर इसी ट्रेक पर तेज गति से भागते हुए दुनिया देखेगी !

अंत में , बढ़ा वजन घटाने के लिए !
-दिन में 12 गिलास पानी कम से कम पीना ही है !
-डिनर ७ -८ बजे तक और बहुत हल्का बिना रोटी चावल के !
कोई भी मीठी चीज नहीं खानी है ! मिल्क प्रोडक्ट कम करें !
-रोज आधा घंटा तेज वाक करें बिना हांफे , और आखिरी दो मिनट बिना हांफते हुए दौड़ कर समाप्त करें ! विश्वास रखें कि वे बहुत जल्द सामान्य पहले जैसे स्मार्ट होंगे ! शरीर आसानी से हर परिस्थिति में अभ्यस्त हो जाने में समर्थ है , रनिंग सिखने के साथ ही शरीर की ढेरों उम्र जनित बीमारियां डायबिटीज , बीपी , कब्ज ,दर्द आदि खुदबखुद गायब हो जायँगी ! 

Friday, February 12, 2021

वजन घटाना आसान है , सिर्फ इच्छाशक्ति मजबूत हो -सतीश सक्सेना

अभी कुछ दिन पहले ही ठंडक और कोरोना के कारण , घर में जमकर खाया और कम्बल की मेहरबानी के कारण एक दिन चेक करने पर पाया कि पूरे तीन किलो वजन बढ़ चुका है , इस उम्र ( 66 वर्ष ) में मुझे बुढ़ापा नहीं चाहिए सो उसी दिन तय कर लिया था कि एक सप्ताह में वजन

सामान्य करना है !

पूरे आठ दिन में रोटी सिर्फ एक बार (घी नमक प्याज मिर्च के साथ), खिचड़ी दो बार दही, घी और धनिये की चटनी के साथ , एक बार बिरयानी रायता , ६ बार टमाटर सूप , दूध की चाय चार बार , ग्रीन टी 10 बार , कहवा २ बार , केला 3 (दो बार ), खजूर लगभग 200 grm ( ४ बार ), उबले अंडे 6 (3 बार ) , पनीर 600 ग्राम (3 बार ), कैप्सिकम , प्याज रोस्टेड और चना जोर गरम ढाई सौ ग्राम के साथ 100 ग्राम चीज़ भी खायीं गयी साथ में रोज १२ गिलास पानी कम से कम पिया !

इन दिनों जो त्यागा गया उसमें, किसी भी शेप में मीठा (बिस्कुट , गजक , रेवड़ी आदि ) , दूध और आयल प्रमुख था ! मानसिक तौर पर लोगों से अपेक्षाएं करना छोड़कर खुद को मस्तमौला रखा , विपरीत परिस्थितियों में और अधिक खुश रहा एवं बोरियत से बचने के लिए रोज दो बार मार्केट /पार्क वाक किया !

मगर वजन घटाने में सबसे अधिक भूमिका रही मेरे द्वारा इस ठण्ड के दिनों में भी , सुबह स्लीवलेस वेस्ट में की गयी धीमे धीमे लम्बी दौड़ , इन आठ दिनों में मैंने, strava रिकॉर्ड के अनुसार 50 km की दूरी दौड़ते हुए तय की तथा एक दिन 15 km साइकिल चलाकर पसीना बहाया !

यह मेरा आज का फोटो है जो इस अवसर पर लगाया गया ताकि उनकी आँखें खुलें , और संकल्प लें कि बुढ़ापा मात्र नाम है अगर मेहनत करने की जिद कर लें , मानवीय शरीर हर बीमारी से आसानी से पार पाने में सक्षम है एक बार विश्वास तो करके देखें तो सही !
सादर मंगलकामनाएं आप सबको ! हँसते रहें हंसाते रहें ...

Monday, November 9, 2020

मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ -सतीश सक्सेना

हिंदी के बदनाम जगत में , यारों  मैं भी लिखता हूँ !
उजड़े घर में ध्यान दिलाने, कड़वी बातें लिखता हूँ !

तुम्हें बुलाने भारी मन से, धुंधली आँखों लिखता हूँ !
टूटा चश्मा, रोती राखी , माँ की धोती लिखता हूँ !

मां को चूल्हा नजर न आये, पापा लगभग टूट चुके
तेरा बचपन याद दिलाने को कुछ बातें लिखता हूँ !

क्रूर विसंगतियाँ समाज की आगत को बतलानी हैं 
आसपास के खट्टे मीठे , कड़वे अनुभव लिखता हूँ !

मेरी कविता, गीत, लेख, साहित्य नहीं कहलायें, पर 
मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ 

Saturday, June 27, 2020

मजबूत इच्छा शक्ति और कोरोना बचाव - सतीश सक्सेना

इस भयावह समय में अपने आप को व्यस्त रखना और मस्त रहना बेहद आवश्यक है , इससे जीवनी शक्ति में ताज़गी बनी रहती है , इस शक्ति के आगे कोरोना अपने आपको बहुत कमजोर पाता है और एक सामान्य फ्लू से अधिक नुकसान नहीं कर पाता !  अधिकतर लोग इसे बढ़ाने के लिए खाने पीने पर अधिक जोर देते हैं मगर मेरा अपना अनुभव इससे अलग है ! किसी व्यक्ति का इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए उसका फुर्तीला और तनाव रहित होना आवश्यक है ! तनाव दूर करने के लिए आप अपने आपको वे नए शौक सिखाएं जिससे मन जवानों जैसा प्रफुल्लित रहे , हर  बीमारी के लिए दवा लेने न भागें और न खाएं अपनी शारीरिक शक्ति पर भरोसा रखना बहुत आवश्यक है , खुद पर भरोसा टूटने का अर्थ ही बुढ़ापे का आग़ाज़ है, बीमारियों की शुरुआत है !


बीमारियों से भय मुक्ति का एक सरल उदाहरण देता हूँ जो मेरा अपना है , पढ़ने में दिक्कत होने पर मेरी आँख में चश्मा आज से लगभग 30 वर्ष पहले लगा था , और उसके बाद मैंने लगभग १५ वर्ष तक विभिन्न शक्ति के ग्लासेस उपयोग किये और बाद में धीरे धीरे छोड़ दिया , आज ६५ वर्ष की उम्र में मुझे चश्मा लगाने की आवश्यकता केवल बहुत छोटे शब्द पढ़ने पर ही पड़ती है यह पोस्ट मैं बिना चश्मे के लिख रहा हूँ और मुझे कोई परेशानी नहीं होती मेरे घर में +1 से लेकर +3 तक के कम से कम 10 चश्में रखें हैं जो मैंने समय समय पर अपने लिए ख़रीदे थे , मैं हमेशा सोचता रहा हूँ कि आई ग्लास के आविष्कार से पहले भी लोग अंधे नहीं हो जाते थे वे बखूबी देख सकते थे हम लोग जिस सुविधा की आदत डाल लें वही हमारी आदत में शुमार हो जाता है ! 
मैं पिछले ३ माह से घर में बंद हूँ , और सरकार की और से सीनियर सिटीजन के लिए बाहर निकलना निषेध भी है मगर आज सुबह एक मित्र जिनका घर लगभग 12 km दूर है ,को होम्योपैथिक दवा देने जाने के लिए , कपडे पहनने लगा था कि उनका फोन आ गया कि अब वे स्वस्थ हैं और आप इतनी दूर आने की तकलीफ न करें !हालाँकि मुझे इस उम्र में यह डर नहीं था कि मुझे खतरा हो सकता है !

अधिकतर लोग कहते हैं कि इस उम्र में बीमारियां इतनी हैं कि हंसने की हिम्मत ही नहीं होती , मुझे भी ५ वर्ष पहले ऐसी ऐसी बीमारियां थीं जो मुझे भय के कारण आराम से सोने भी नहीं देती थीं मगर ज़िंदा रहने की तेज इच्छा के कारण उनकी उपेक्षा करना शुरू की और एक आलसी और कमजोर शरीर से एक लम्बी दूरी का धावक निकल कर बाहर आया जो लगातार तीन घंटे तक बिना रुके दौड़ता था इस करामात ने जो मजबूत आत्मविश्वास दिया उससे न केवल चेहरे की रौनक जवानों से अधिक बेहतर बन गयी बल्कि मैं अपनी जवान शक्ति को महसूस भी करने लगा था  और मैं वाकई हर फ़िक्र को धुएँ में उड़ाता चला गया !!

जबरदस्त आत्मविश्वास और जवान इच्छा शक्ति आपकी उम्र बढ़ाने के लिए , और बीमारियों का आपके शरीर से नामोनिशान मिटाने के लिए काफी है दोस्त आप अपनी प्रतिरक्षा शक्ति पर यकीन तो करें !

एक कविता ऐसे ही किसी मस्त समय में लिखी है हालांकि मेरी उम्र के लोगों को यह कविता पसंद नहीं आएगी , इसे बेहद दोस्ताना अन्दाज़ में लिखा गया है और वे इसके आदी नहीं हैं , 50 वर्ष से ऊपर के लोग बच्चों की तरह हंसने में असहज होते हैं उन्हें सिर्फ सम्मान चाहिए और वह भी सभ्यता के साथ और जीर्ण शरीर और बुढ़ापा भी यही चाहते हैं !

शाब्बाश बुड्ढे ! यू कैन रन ! 
तवा बोलता छन छन छन !

सारे जीवन काम न करके
तूने सबकी वाट लगाईं !
ढेरों चाय गटक ऑफिस में
जनता को लाइन लगवाई !
चला न जाना अस्पताल में
बेट्टा , वे पहचान गए तो
जितना माल कमाया तूने
घुस जाएगा डायलिसिस में
बचना है तो भाग संग संग
रिदम पकड़ कर छम छम छम ,
शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

जब से उम्र दराज बने हो 
सबके आदरणीय बने हो
सारी दुनिया के पापों को
खुलके आशीर्वाद दिए हो !

इस सम्मान मान के होते
देह हिलाना भूल गए हो
पिछले दस वर्षों से दद्दू
छड़ी पकड के घूम रहे हो
आलस तुझको खा जाएगा
फेंक छड़ी को रन,रन,रन , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

साठ बरस का मतलब सीधा
साठ फीसदी ताकत कम
ह्रदय बहाए खून के आंसू
बरसे जाएँ झम झम झम
चलना फिरना छोड़ा कब से
घुटने रोते , चलते दम !
साँसें गहरी, भूल चुका है
ऑक्सीजन पहले ही कम
अभी समय है रक्ख भरोसा
गैंग बना कर धम धम धम , शाब्बाश बुड्ढे, यू कैन रन !


डायबिटीज खा रही तुझको 
ह्रदय चीखता, जाएगा मर
सीधा साधा इक इलाज है
उठ खटिया से दौड़ने चल
आधे धड़ को पैर मिले हैं
उनको खूब हिलाता चल
ताकतवर शरीर होगा फिर
मगर तभी जब, मेहनत कर
सब देखेंगे जल्द , करेंगे
दुखते घुटने, बम बम बम , शाब्बाश बुड्ढे यू कैन रन !

Tuesday, October 1, 2019

काश कर सकें, पर फैलाकर विचरण अन्य जहान के -सतीश सक्सेना

और अब यह बेहद आसान है अगर दो वर्ष में आप एक बार घर से दूर घूमना चाहते हैं तो कम खर्चे में आप
जर्मनी, चेकिया या रोम जा सकते हैं और निश्चित ही यह आपके या परिवार के लिए उत्साहवर्धक एवं आत्मविश्वास बढाने में कामयाब होगा ,बहुत कम लोग यह जानते होंगे कि यूरोप जाना उतना ही सस्ता होता है जितना अपने देश में अंडमान निकोबार अथवा गोवा जाकर एक सप्ताह की मस्ती करना !  
मान लीजिये आपको म्युनिक जर्मनी जाना है तो सबसे पहले कुछ चिंताएं पैदा होंगीं जैसे भाषा कैसे समझेंगे और समस्याएं क्या आएँगी !भाषा के नाम पर हमें बिलकुल परवाह नहीं करनी चाहिए पूरे यूरोप में टूटी फूटी इंग्लिश बोली जाती है व् समझी जाती है ! ग्रीक , इटालियन,जर्मन, फ्रेंच,डच , स्पेनिश , पोलिश एवं अन्य प्रांतीय भाषाएँ बोली जाती हैं ! वहां के लोग टूरिस्ट के लायक टूटी फूटी इंग्लिश और कई जगह बेहतर इंग्लिश धड़ल्ले से बोलते हैं ! और यह वाकई इंटरेस्टिंग होता है जब वे ,भारतीय अम्मा जी को भी इंग्लिश में समझाने में अक्सर कामयाब रहते हैं !

विदेश यात्रा के लिए निम्न तैयारी आवश्यक है , अगर डाक्यूमेंट्स पूरे हों तो वीसा मिलने में लगभग 15 दिन लगते हैं !
  1.  पासपोर्ट जिसकी वैलिडिटी लगभग छह माह बची हो !
  2. वीसा जर्मनी का , वीसा विदेशी दूतावास की एक मुहर है जो आपके पासपोर्ट को विशेष देश आने  की अनुमति देता  है ! और यह मुहर आपके पासपोर्ट पर वह देश लगाता है जहाँ आप भ्रमण के लिए जा रहे हैं ! वह देश आपको अपने देश आने की अनुमति कुछ विशेष जानकारियों के लेने के बाद देता है ! यूरोपियन यूनियन की ख़ास बात है कि आप जर्मनी वीसा अप्लीकेशन पर पूरे 26 देशों का भ्रमण कर सकते हैं ! इसे शेंगेन वीसा कहते हैं , इसे अप्लाई करने से पहले निम्न  डाक्यूमेंट्स आवश्यक हैं !
  3. कन्फर्म फ्लाइट टिकट आने व् जाने का 
  4. इन्हीं दिनों होटल या मित्र के यहाँ ठहरने का कन्फर्मेशन ( रूपये 3000 से 5000 प्रतिदिन ) 
  5. उपरोक्त दिनों के ट्रेवल के लिए आपका हेल्थ ट्रेवल बीमा 
  6. आपका बैंक अकाउंट डिपाजिट , लास्ट तीन महीने का  जिससे यह सुनिश्चित हो की आप अपना खर्चा करने में समर्थ हैं ! ( 50 से 60 यूरो प्रतिदिन के हिसाब से ) लगभग २ लाख रुपए हों  तो अच्छा है ! 
  7. तीन माह की सैलरी स्लिप्स अगर आप नौकरी कर रहे हों 
  8. एम्प्लायर का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट 
  9. लास्ट ३ वर्ष की इनकम टैक्स रिटर्न की कॉपी 
  10. वीसा फीस की रसीद 
  11. उपरोक्त डाक्यूमेंट्स के साथ वीसा एप्लीकेशन , वीसा रसीद के साथ ( Rs 4500 ) 
  12. कवरिंग लेटर जिसमें आप कारण लिख कर देंगे और साथ में आप अपनी टिकट एवं रुकने की डिटेल देंगे  ! 
  13. चेकलिस्ट यह रही 
उपरोक्त डाक्यूमेंट्स तैयार होने के बाद आपको  VFS global में एप्लीकेशन सबमिट करना है जो बेहद आसान है ऑनलाइन एप्लीकेशन भरिये , जमा करिये तथा अपॉइंटमेंट लीजिये ताकि आप पासपोर्ट  व उपरोक्त डाक्यूमेंट्स  सबमिट कर सकें ! अगर आप पहली बार यूरोप जा रहे हैं तब आपके फिंगर प्रिंट्स स्कैन होंगे !
फीस जमा होगी तथा डाक्यूमेंट्स रिसिप्ट  आपको दे दी जाएगी ! कुछ दिन में पासपोर्ट वीसा का ठप्पा लगाए कूरियर द्वारा आपके दरवाजे पर पंहुच जाएगा !

क्रमश  ...
टिकट एवं होटल रिजर्वेशन ,एयरपोर्ट फॉर्मेलिटी ,पैकिंग एवं सावधानी 




Tuesday, July 16, 2019

भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा - सतीश सक्सेना

जो लोग बरसों से बिना पसीना बहाये, ऐयरकंडीशनर ऑफिस में काम करने के आदी हो गए हैं उन्हें यह जान लेना चाहिए कि उनके शरीर की मसल्स, फेफड़ों के नियमित कार्य , धमनियों में रक्त संचार , हाथ, पैरों, रीढ़, कमर, घुटनों व शरीर के अन्य महत्वपूर्ण जॉइंट्स, बेहद धीमी गति से चलने के आदी हो चुके हैं और बरसों से पड़ी उनकी इस आदत के फलस्वरूप शरीर ने अपने अंदर समयानुसार कुछ स्वाभाविक बदलाव भी किये हैं जिनके कारण विभिन्न प्रकार के दर्द एवं बीमारियां उत्पन्न हुई हैं ! और यह स्थिति अपने शरीर के महत्वपूर्ण अवयवों का उपयोग न करने के कारण पैदा हुई है ! आज पहली बार मैं आपका ध्यान आकर्षण उन अवयवों के बारे में करना चाहता हूँ जिनकी स्थिति पर अपने कभी गौर ही नहीं किया और उनकी दुर्दशा कर दी 
जरा गौर करें कि  ... 
  • आपके फेफड़ों का कार्य बेहद जटिल हैं, वे बाहर की हवा को अंदर खींचकर उसमें से ऑक्सीजन अलग कर रक्त में मिलाने के लिए आगे पम्प करते हैं और बची हुई कार्बन डाई ऑक्साइड को शरीर के बाहर निकालते हैं , उनका एक अन्य महत्वपूर्ण काम आपको आवाज देने के लिए हवा की सप्लाई करना भी है ! आप गहरी साँस खींचकर अंदर भरी हुई हवा का अनुमान लगाइये , इस हवा को समाने की क्षमता लिए हैं हमारे फेफड़े मगर अब आप सामान्य सांसे
    लीजिये जिसके आप आदी हैं आप महसूस करेंगे कि आपके फेफड़े सिर्फ 10 प्रतिशत क्षमता पर ही कार्य कर रहे हैं ! इसका मतलब यह भी हुआ कि  जितनी ऑक्सीजन आपके शरीर के लिए मिलनी चाहिए आप उसकी 90 प्रतिशत कम सप्लाई दे रहे हैं , मानवीय शरीर हर परिस्थिति के हिसाब से आसानी से अपने आपको ढाल लेता है और इस कमी के बावजूद भी आपका शरीर चलता रहता है ! जब आप रनिंग जैसी एक्सरसाइज करते हैं तब यही फेफड़े शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन देने के लिए बहुत तेजी से हवा खींचते व् हृदय में पम्प करते हैं बदकिस्मती से उनकी यह क्रिया आपके आरामतलबी के कारण बहुत कम हो गयी है और फलस्वरूप आपका खून गाढ़ा और बिना ऑक्सीजन के काम करने को मजबूर है ! हृदय की तमाम आधुनिक बीमारियां इसी कारण हैं !
  • प्रौढ़ावस्था में जॉइंट दर्द की शिकायत अधिकतर लोगों में मिलती है , शरीर में सैकड़ों जॉइंट्स हैं और यह चलते रहने से यह हमेशा सुचारु रूप से काम करते रहते हैं उम्र चाहे कोई हो ! अगर आप लगातार मूवमेंट करते हैं तो ऑटो लुब्रिकेशन के जरिये हड्डियों के जोड़ों में चिकनापन बना रहता है मगर जॉइंट मूवमेंट बंद करते ही उनमें ब्लड के जरिये रुकावटें जमा होना शुरू हो जाती हैं फलस्वरूप जकड़न के कारण दर्द होता है ! यहाँ डॉक्टरों की सलाह होती है कि आराम करें , जिससे वे और जकड जाते हैं !
  • विश्व में कार्डिओवेस्कुलर डिजीज, मृत्यु का सबसे बड़ा कारण माना जाता है , लगभग 30 प्रतिशत मृत्यु सिर्फ इसी से  होती हैं ! अधिक वजन होना , मेहनत न करना , हाई ब्लड प्रेशर , बढ़ी हुई डायबिटीज , स्मोकिंग , हाई कोलेस्ट्रॉल , बेहतरीन हृदय को रोक देने के लिए काफी हैं !
  • विश्व के मशहूर कार्डियोलॉजिस्ट इस बात को स्वीकार करते हैं कि हृदय रोग और डायबिटीज का सबसे बड़ा कारण मेहनत कम करना है, पूरे दिन बैठे रहकर काम करने वालों को यह बीमारियों अधिक होती हैं , डायबिटीज ग्रस्त लोगों को हृदय रोग का ख़तरा दूसरों के मुकाबले और अधिक होता है ,अगर इंसान अपनी आदतें बदलकर पसीना बहने तक की मेहनत करना सीख ले तो इन बीमारियों पर विजय आसानी से पा सकता है !
एक बार अगर ऑपरेशन थियेटर में पंहुच गए तो फिर पूरे जीवन के लिए डॉक्टरों के चक्कर लगाते रहने और रोज दवाएं खाने के अलावा और कोई चारा नहीं , इंसान मेडिकल व्यवसाइयों के गिरफ्त से निकल ही नहीं सकता !अपने जीवन की पूरी कमाई
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है बुड्ढा ६५ साल का 
इनको जाते असहाय सा देखता रहता है ! इन खतरनाक बीमारियों में परिवार को मृत्युभय दिखाया जाता है अतः वे तुरंत ऑपरेशन टेबल पर पंहुच जाते हैं ! 
शायद ही किसी डॉ ने यह सलाह दी हो कि आप धीमे धीमे रोज व्यायाम करना शुरू करें लगभग एक वर्ष में एक से दो घंटे लगातार मेहनत करना आते ही यह बीमारियां आपके पास से भाग जाएंगी !

इन सब बीमारियों की भगाने की एक दवाई आप खुद को रनिंग करना सिखाइये मगर ध्यान रहे कि रनिंग का अर्थ तेज दौड़ना नहीं होता बल्कि धीमे धीमे बिना हांफे दौड़ते हुए अपने शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण अवयवों में झंकार पैदा करना होता है जो रनिंग द्वारा आसानी से संभव है ! जब आप भागते हैं तो हर गिरते कदम द्वारा जमीन पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट होता है उससे पूरे बॉडी कोर एवं दिमाग तक जो कम्पन की लहरें उठती हैं वह किसी भी बीमारी को दूर भगाने को काफी हैं ! फेफड़ों से शुरू होकर हृदय, किडनी, लिवर, पेन्क्रियास, एब्डोमेन , बॉडी मसल्स , बोन जॉइंट्स , नर्व एवं टिश्यू सबको एक लय में वायब्रेशन मिलता है और हमारा शरीर अधिक फ्रेश महसूस करता है , अधिक ऑक्सीजन पाकर खून स्वच्छ एवं पतला होता है , यह क्रियाएं हम सिर्फ बचपन और जवानी में महसूस करते हैं , बुढ़ापा आराम करते हुए काटने की कोशिश करते हैं कि अब यह काम हमारे लिए संभव नहीं अतः अंत समय अधिक बुरा भुगतते हैं !

अतः मित्रों को चाहिए .. 
-अब हमारी उम्र हो गयी है यह कहना बंद करें और वृद्धावस्था को जड़ से नकारें , हर काम में हाथ डालें जो मजबूत शरीर के साथ करते थे !
-रनिंग सीखना शुरू करें ध्यान रहे रनिंग का अर्थ गति नहीं होता एवं बिना हांफे मुस्कराते हुए दौड़ना सिखाएं अपने शरीर को और याद रहे यह ट्रेनिंग तब पूरी माने जब सुबह ठण्ड के दिनों में ठीक पांच बजे उठकर खुद से कह रहे हों कि उठ बच्चे दौड़ने चलना है  और अगर मन बहाना बनाये तो खुद को कठोर सजा भी दें जैसे क्लास में मिलती थी !
मंगलकामनाएं कि हम सब असमय न जाएँ !!

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें 

भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

सस्नेह  

Monday, July 15, 2019

प्रतिरक्षा शक्ति बढ़ाकर, भय से मुक्ति पाइये - सतीश सक्सेना

भारत में आजकल लगभग 40 डिग्री टेम्प्रेचर है और एक नए बने रनर ट्रेनी के लिए इस गर्मी में, लम्बी दूरी दौड़ना केवल एक भयावह सपना होता है , पिछले माह जब मैं जर्मनी आया था तब अगले दिन ही यहाँ के ठन्डे मौसम में, इसार नदी के किनारे दौड़ते दौड़ते कब 21 km पूरा कर लिया पता ही नहीं चला जबकि अपने देश में पिछले 4 महीने में मेरा कोई भी ट्रेनिंग रन 21 km के आसपास भी न था ! यहीं एक उदाहरण और देना चाहूंगा 18 जून को अकेले दौड़ते हुए मैंने यह रन बेहद मस्ती और आराम से पूरा किया था जबकि इससे पूर्ववर्ती कई हाफ मैराथन मैंने पूरी ताकत लगाकर दौड़ते हुए भी लगभग इसी समय में पूरे किये थे जबकि शरीर थक कर चूर हो जाता था ! आश्चर्य यह है कि जब भी मैं बिना किसी तनाव के आराम से दौड़ने निकलता हूँ उस दिन गति अधिक ही आती है और मेरा शरीर और मन बिलकुल नहीं थकता !


मुझे ख़ुशी है कि मैं दौड़ के सहारे अपने तथाकथित वृद्ध शरीर का कायाकल्प करने में सफल रहा , आज उन दसियों बीमारियों में से एक भी शेष नहीं बची जिनसे मैं एक समय चिंतित रहा करता था और या सफलता मुझे 60 वर्ष से 64 वर्ष के मध्य मात्र दौड़ना सीख पाने से मिली ! जो व्यक्ति अपने साठ वर्षों में कभी दस मीटर भी न दौड़ा हो वह सिर्फ एक वर्ष के अभ्यास के बाद 21 km लगातार दौड़ने में सक्षम हुआ है एवं बीमारियां कहाँ गायब हुईं यह पता ही नहीं चला !

दौड़ना स्वस्थ शरीर के लिए एक बेहद आवश्यक क्रिया है जिसके द्वारा, शरीर की आंतरिक प्रतिरक्षा शक्ति, शरीर के विभिन्न
अवयवों को वाइब्रेट कर स्फूर्ति प्राप्त करती है ! दुर्भाग्य से आज के समय में बेहतरीन विद्वान भी इस विषय (मानवीय  प्रतिरक्षा शक्ति) को अछूता छोड़े हुए हैं और भौतिक सुख सुविधाओं का उपयोग, अपने शरीर को आराम देने में प्रयुक्त कर रहे हैं !

आज हमारे देश में, 50 वर्ष के आसपास का हर चौथा व्यक्ति हार्ट आर्टरीज़ की रूकावट का शिकार है एवं हर तीसरा व्यक्ति डायबिटीज का शिकार है और ऐसे समय में इसके निदान के लिए मेडिकल व्यवसायी आगे आते हैं ,उनके एजेंट्स, डॉक्टरों के जरिये संभावित असामयिक मृत्युभय के कारण आम व्यक्ति को समझाने में आसानी से कामयाब हैं कि जान जाने से बचने के लिए, उनके पास कितने तरह के केमिकल एवं ऑपरेशन उपलब्ध हैं जिनके सेवन से आपको हृदय रोग से बचाव होगा। ... 

वे यह कभी नहीं बताते कि इन दवाओं के सेवन से आपकी किडनी कितने दिनों में आधे से अधिक बर्बाद हो जायेगी और फिर उसकी दवा भी पुराने केमिकल्स (तथाकथित दवा) के साथ खानी होगी !

वे यह कभी नहीं बताते कि मात्र नियमित दौड़ना सीखने से ही आप बिना किसी साइड इफक्ट्स के आप आर्टरीज को साफ़ कर पाएंगे एवं डायबिटीज कभी पास नहीं आ पाएगी !

वे यह कभी नहीं बताते कि पैरों का उपयोग किये बिना आप अपने शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को बेहद कमजोर कर रहे हैं और बीमारी रहित मजबूत मानव जीवन के लिए रोज कम से कम 10 kmचलना व् दौड़ना बेहद आवश्यक है !

वे यह कभी नहीं बताते कि मात्र दौड़ने के नियमित अभ्यास से आपके हृदय आर्टरीज़ में जमा रक्त के थक्के समाप्त हो सकते हैं !

वे यह कभी नहीं बताते कि मेडिकल साइंस अभी खुद शैशव अवस्था में है और मेडिकल कॉलेज बरसों से पुराना ज्ञान ही पढ़ाते रहते हैं ऑपरेशन करते समय कई बार डॉक्टर्स को यह पता ही नहीं होता कि इस नए लगे चीरे से क्या क्या कट गया और उसका असर क्या होगा !

वे कभी नहीं बताएँगे कि जंग लगे घुटनों से चलने में दर्द तो होगा मगर यह प्रयत्न करना छोड़ें नहीं एक दिन यह घुटने मजबूत जोड़ वाले घुटनों में बदल जाएंगे हाँ वे सब यह अवश्य बताते हैं कि बढ़ी उम्र में आपके घुटने के कार्टिलेज डैमेज हो गए हैं , अब उनका उपयोग कम करें ! 

वे यह कभी नहीं बताते कि  अपने परिवार में वह दवाएं कभी नहीं देते जो वे अपने मरीजों में धड़ल्ले से बांटते हैं !
वे यह कभी नहीं बताते कि उन्हें हर रेकमेंडेड टेस्ट से लगभग 50 प्रतिशत पैसा कमीशम में बापस मिलता है !
वे यह भी नहीं बताते कि अधिकतर लैब टेस्ट, टेबल पर बैठकर बिना टेस्ट किये , सिग्नेचर कर जारी किये जाते हैं !
वे यह भी नहीं बताते कि लैब्स के पास रोज आये सैकड़ों सैंपल टेस्ट करने की क्षमता, उपकरण एवं तकनीशियन लैब में होते ही नहीं !
हजारों तरह के एड हम रोज देखते हैं , कोई एड यह नहीं बताता कि हम अपने शरीर में दौड़ने की आदत विकसित कर 60 वर्ष की उम्र के बाद भी कायाकल्प करने में समर्थ हो सकते हैं  एवं बड़ी उम्र में भी शरीर से अनावश्यक क्षरण को रोकना संभव है !

वे कहेंगे कि आपकी उम्र अब इस योग्य नहीं कि हैवी व्यायाम करने का प्रयत्न करें वे कभी नहीं बताएँगे कि आप धीमे धीमे हलके व्यायाम करते हुए अपने शरीर को मेहनत करने की आदत डालें और यकीन रखें कि आप भी कुछ वर्षों में युवकों जैसा व्यायाम कर पाने में समर्थ होंगे ! धीमे धीमे व्यायाम करते हुए एक आध वर्षों में आपके जीर्णशीर्ण अवयव पहले बीमारी मुक्त होंगे और बाद में अपनी पूरी शक्ति के साथ नए ऊतकों के साथ आपके शरीर को नया अनुभव देने में समर्थ होंगे !

ये सब एक ही बात कहते हैं कि यह दवाएं खाइये आप स्वस्थ होंगे और दवाओं से पहले उसे बीमारी से संभावित खतरे जो मौत की और ले जाते हैं को खूब घंटे बजाकर बताया जाता है ताकि उस अस्वस्थ व्यक्ति के विचार को इतना शून्य और क्षतिग्रस्त कर दिया जाए कि वह इन दवाओं की शरण से अपनी पूरी जिंदगी में निकलने के बारे में कभी सोंच भी न सके !

इस लेख का उद्देश्य उपरोक्त तथ्यों पर आपका ध्यान दिलाना है ताकि आप उचित फैसले ले सकें !

Thursday, May 9, 2019

जीवन चलने का नाम -सतीश सक्सेना

नमस्ते सर , अजय कुमार बोल रहा हूँ  ...कल सुबह आपके साथ दौड़ने का मन है, जहाँ कहें वहां आ जाऊंगा ...
मेरे साथ अजय कुमार दौड़ेंगे ? क्यों बुड्ढे का मजाक बना रहे हो यार  ...?  और वाकई अजय सुबह सवा पांच बजे फरीदाबाद से चलकर मेरे घर के दरवाजे पर थे !


अजय कुमार NCR के जबरदस्त रनर्स में शुमार होते हैं , और वे अक्सर अल्ट्रा रन में भाग लेते हैं , उनका मैं प्रशंसक इसलिए हूँ कि वे कम उम्र में ही हैवी डायबिटीज के शिकार हुए और उन्होंने दौड़ना शुरू करके उसे हराने में कामयाबी प्राप्त की , आज वे एक सफल धावक हैं और 50 km की शानदार दौड़ लगाने में कामयाब हैं !
अजय कुमार एक बेहतरीन चित्रकार भी हैं और उनकी प्रदर्शनी भी लग चुकी हैं , उनका एक चित्र कमेन्ट लाइन में देखिएगा !

आज के बुरे समय में जब इंसान अपने शरीर का उपयोग ही भूल चूका है , अपने शरीर के प्रति जागरूक रहना बेहद आवश्यक है ! अक्सर रिटायरमेंट उम्र होने के आसपास ही अपने मित्रों की मृत्यु की खबर सुनना आम बात हो गयी है और यह अक्सर हार्ट अटैक से होती हैं , अधिकतर यह साथी उस समय ओवरवेट और डायबिटीज , ब्लडप्रेशर के रोगी होते हैं ! अपने मित्रों की मौत की खबर सुनकर हम सिर्फ एक शब्द ही कहते हैं कि यह भी कोई उम्र थी जाने की , और अगले दिन घर में मीठी स्वादिष्ट इलायची पड़ी चाय के साथ आलू परांठे खा रहे होते हैं !


मुझे बेहद अफ़सोस तब होता है कि अक्सर असमय जाने  वाले लोग बेहतरीन प्रभामंडल युक्त होते हैं जिनके आसपास जी हजूरी तथा हाँ जी हाँ जी कहने वालों की भीड़ होती है और यह गुरु गौरव के साथ, तमाम सामाजिक उपयोग का विशुद्ध ज्ञान भी, नियमित बाँटते रहते हैं , ऐसे विद्वान भी अपने शरीर की चीत्कार सुनने में असमर्थ होते हैं और उसका एकमात्र कारण आलस्य तथा जीभ पर कंट्रोल न करना मात्र है जिसके कारण वे अपने नजदीक आती हुई निश्चित मृत्यु की आहट को सुनने में विफल रहते हैं !

मैं जब आलस्य से घिरता हूँ तब अजय कुमार जैसे कम साधन युक्त लोगों से सबक और शक्ति लेता हूँ , जो अकेले बिना किसी दवा के डायबिटीज को हारने में कामयाब हुए हैं अवसाद युक्त क्षणों में भी अक्सर मैं उन्हें हँसते देखता हूँ तब मुझे उनसे शक्ति मिलती है ! 



Monday, April 15, 2019

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इस हिन्दुस्तान में रहते, अलग पहचान सा लिखना !
कहीं  गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !
दिखें यदि घाव धरती के तो आँखों को झुका लिखना 
घरों में बंद, मां बहनों पे, कुछ आसान सा लिखना !

विदूषक बन गए मंचाधिकारी , उनके शिष्यों के ,
इन हिंदी पुरस्कारों के लिए, अपमान सा लिखना !

किसी के शब्द शैली को चुरा के मंच कवियों औ ,
जुगाड़ू गवैयों , के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !

अगर लिखने का मन हो तड़पते परिवार को लेकर
हजारों मील पैदल चल रहे , इंसान पर लिखना !

तेरी भोगी हुई अभिव्यक्ति , जब चीत्कार कर बैठे
बिना परवा किये तलवार की, सुलतान सा लिखना !


Tuesday, February 26, 2019

६५ वर्ष में फ़िटनेस उम्र 52 वर्ष -सतीश सक्सेना

जीपीएस वाच मेरी एक्टिविटी रिकॉर्ड करती है , उसके एप्प टॉमटॉम स्पोर्ट्स के अनुसार 65 वर्ष की उम्र में, मेरी फ़िटनेस ऐज 52 वर्ष है जबकि पिछले वर्ष फिटनेस ऐज 47 वर्ष थी , इसका अर्थ है कि मैंने पिछले वर्ष की तुलना
में इस वर्ष कम एक्टिविटी की हैं नतीजा एक वर्ष में 5 वर्ष उम्र बढ़ गयी , पिछले चार माह से दिल्ली में वायु प्रदूषण के कारण, सुबह दौड़ना केवल नाममात्र को ही रहा, आज भी सुबह आरामदेह कम्बल से दुखी मन तभी निकला जब खुद को ढेरों गालियाँ देनी पड़ीं !

इतिहास गवाह है कि सफलता मानव को पागल बना देती है, वह अपने किये हर काम को श्रेष्ठ मानना शुरू कर देता है , हम सब भी धन और सम्मान पाते ही उसका अनजाने में दुरुपयोग शुरू कर देते हैं , धन का उपयोग सबसे पहले आराम करने में लगाते हैं , सुख सुविधाओं के होते सबसे अधिक ह्रदय रोग और डायबिटीज (शाही रोग) धनवान और सम्मान सज्जित लोगों को ही होते हैं , मैंने आजतक एक भी मेहनतकश व्यक्ति को ह्रदय रोग से मरते नहीं सुना और न उसे डायबिटीज हुई जबकि चीनी भी वह सबसे अधिक खाता रहा ,इन बीमारियों का शिकार सबसे अधिक सम्मानित और बड़े लोग ही होते हैं जिनके प्रभामंडल पर समाज को नाज होता है ! वे पूरे समाज को दिशा देने में समर्थ होते हैं मगर शारीरिक मेहनत और पसीना बहाना उन्हें भी निरर्थक लगता है !

मजबूत मानवीय शरीर के इंजन के विभिन्न अवयवों को शक्ति सप्लाई देने के लिए , हाथ पैरों का निर्माण किया गया है ,लगातार चलते हुए हाथ पैर शारीरिक इंजिन को ईंधन देते रहते हैं ताकि वह अंत तक कार्यशील रहे ,
इसीलिये पुराने समय में लोग बहुत कम बीमार पड़ते थे ,रोग अपने आप ठीक हो जाते थे ! उद्यम शीलता के होते ढाई लाख वर्ष के मानव जीवन में मेडिकल व्यापार का दखल पिछले दो सौ वर्षों से ही हुआ है और यकीन मानिए इसके बदौलत मानव उम्र में कोई ख़ास योगदान नहीं हुआ है सिर्फ धन बहने के एक श्रोत का सर्जन अवश्य हुआ है आज एक ऑपरेशन होते ही इंसान के जीवन की आधी एक्टिविटी और उत्साह नष्ट हो जाता है बचा जीवन धीरे धीरे बात करते हुए ही गुजरता है !

रिटायरमेंट के बाद मैंने पहली बार शारीरिक मेहनत का सुख महसूस किया, पिछले 41 माह में 638 बार घर से दौड़ने निकला हूँ और लगभग 5000 Km दौड़ चुका हूँ, प्रति सप्ताह 30 km एवरेज रनिंग करने के साथ 26 बार हाफ मैराथन रेस (21Km) पूरी करने में सफलता प्राप्त की !

६५ वर्ष की उम्र में लगातार ढाई घंटा दौड़ने के बाद पूरे शरीर से बहते पसीने का आनंद का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता उसे केवल महसूस किया जा सकता है , चेहरे और पेट का भारी वजन, कोलेस्ट्रोल , डायबिटीज , बढ़ा बीपी , पेट के रोग , जोड़ों के दर्द कब गायब हो गये, पता ही नहीं चला ! भरोसा नहीं होता कि मैं वही सतीश हूँ जिनका फोटो नीचे लगा है ! यह सब करने के लिए मैंने आत्मविश्वास के साथ लीक से हटकर चलने की आदत डाली और सफल रहा !
सस्नेह आप सबको ...

Tuesday, February 19, 2019

अनमोल जीवन के प्रति लापरवाही, पछताने का मौक़ा भी नहीं देगी -सतीश सक्सेना

बिना पूर्व तैयारी लम्बे रन दौड़ने का प्रयत्न करना, सिर्फ जोश में, बचकाना पन ही कहलायेगा , मानव देह को धीरे धीरे किसी भी योग्य बनाया जा सकता है वह हर स्थिति के अनुसार अपने आपको ढाल सकती है और इसके लिए उम्र बाधा कभी नहीं होती बशर्ते सोंचने वाले की समझ ब्लाक न हो !शरीर के जोड़, मूवमेंट के लिए बनाए गए हैं
अगर बरसों से आपने धनवान बनने के बाद, सिर्फ आराम किया है तो पक्का आपके जॉइंट जकड चुके हैं और शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी समाप्त होने के कगार पर होगी , अधिकतर लोग इसी अवस्था को ही बुढापा कहते हैं जब यहाँ 50 वर्ष से ऊपर हर इंसान के चेहरे पर, उम्र जनित गंभीरता दिखती है , हँसना उनके विचार से जवानों का काम होता है अधिक उम्र में उन्मुक्त हंसना तो उन्हें बेहूदगी लगने लगता है ! हंसने के नाम पर वे अक्सर पार्क में हमउम्र बुड्ढों के साथ खड़े होकर हो हो हो हो कर जोर से आवाज निकाल कर हंसने को ही, हंसना मान लेते हैं !

मेरे विचार से जो उन्मुक्त मन हंस नहीं सकते वे निश्चित ही असमय बुढापे का शिकार हो चुके हैं , कारण चाहे कुछ भी हो , अपने अपने कष्टों के नीचे जीने की इच्छा खो बैठना, मानवता के प्रति सबसे बड़ा गुनाह है , ऐसे लोग अपनों के प्रति, अपने कर्तव्य भुलाकर , रोते रोते जीवन काटते हुए मानव के खूबसूरत जीवन के प्रति अपराध कर रहे होते हैं !

इंसान वही जो हँसते हुए उनके लिए जिए जिन्हें उसकी जरूरत है, इसके लिए मन में स्फूर्ति एवं सतत शौक
रखना और उन्हें सीखने की प्रक्रिया आवश्यक है , इच्छाओं और स्फूर्ति का मरना ही मृत्यु है , सो हंसने के लिए पार्क में अवसाद युक्त चेहरों के साथ खड़े होकर हो हो हो हो करने की निरर्थकता पर गौर करना होगा , हंसना आवश्यक है और उसके लिए नेचुरल उन्मुक्त हँसना, सीखना होगा !

सुबह लगभग एक घंटा पसीना बहाने की आदत डालिए आप इतने में ही उम्र्जनित अवसाद से मुक्त हो जायेंगे , तेज वाक के अंत को एक या दो मिनट तक दौड़ कर समाप्त करें और यह अधिक तेज न हो कि हांफना पड जाए ! इस प्रक्रिया से आपका शरीर दौड़ना सीख जाएगा , शुरू के एक साल शरीर में तरह तरह के दर्द होंगे जो मसल्स के पुनर्निर्माण की पहचान है , उनकी परवाह न करें ! रन /वाक से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंग्थ एक्सरसाइज अवश्य करें अन्यथा मांसपेशियां चोटिल हो सकती हैं !

अगर आप 5 km दौड़ना चाहते हैं तो सप्ताह में आराम से 10km दौड़ने का पूर्व अभ्यास बिना हांफे होना चाहिए , 10 km और 21Km के लिए यह दूरी क्रमश 20 और 40 Km होती है ! इसी तरह 5 Km दौड़ने से एक सप्ताह पहले आप कम से कम एक रन में, 4 km बिना हांफे दौड़ चुके हों , तभी शरीर को 5 km दौडाने का प्रयत्न करना चाहिए ! 10km और 21km की रेस के लिए यह दूरी 8 km और 18 km होगी !

50 वर्ष के ऊपर के नवोदितों के लिए 21 km की लम्बी दौड़ सिर्फ तब दौडनी चाहिए जब वे पिछले छह माह में कई बार 17km रन, दौड़ने के अभ्यस्त हों अन्यथा 8-10 km दौड़ने के अभ्यस्त को 21km दौड़ना घातक हो सकता है ! 21 km दौड़ते समय शरीर के तमाम अवयवों में लगातार कम्पन होता है और एनर्जी लॉस होता है , लगातार तीन घंटे , तक दौड़ने का जोश में किया गया, प्रयत्न जान लेने में समर्थ है और इसी भूल में कई धुरंधरों की मौत दौड़ते समय हुई हैं जो कई
मैराथन दौड़ चुके थे ! एक रनर जो अपने शरीर की आवाज नहीं पहचानता उसे दौड़ने से दूर रहना चाहिए , खतरनाक पलों और दिनों का अहसास शरीर अपने मालिक को महीनों पहले बताना शुरू कर देता है कि आप जबरदस्ती न करें अन्यथा बुरा घट सकता है !

हर शरीर अलग होता है, अधिक उम्र वाले वर्ष में दो या तीन हाफ मैराथन या एक मैराथन दौड़ना काफी होता है , अधिक संख्या में दौड़ने का अर्थ आपके कमजोर शरीर को खतरनाक ही साबित होगा ! अतः जल्दबाजी न करें , शरीर को धीरे धीरे कठिन मेहनत का अभ्यस्त बनाएं , तभी आप समझदार कहलायेंगे और शरीर को बीमारियों से मुक्त करने में दौड़ सहायक होगी !


Sunday, December 9, 2018

सारी धरती लोहा माने , इंसानी इकबाल का ! -सतीश सक्सेना

सत्येन दादा,उन लोकप्रिय लोगों में से एक हैं जिन्हें मैं सम्मान के साथ पढने ,समझने का प्रयत्न करता हूँ , हर एक
के प्रति संवेदनशील, स्नेही सत्येन भंडारी को अगर पढ़ना शुरू करें तो समाप्ति से पहले रुक नहीं पायेंगे , उनकी सहज अभिव्यक्ति,आसानी से आपको मुक्त नहीं करेगी बल्कि सोंचने को विवश कर देगी, ऐसी है उनकी लेख्ननी !
स्नेही संवेदनशील लोग अगर लेखक हों तो वे निस्संदेह उनके लेखन में अनूठापन और ईमानदारी स्पष्ट नजर आएगी ऐसे लोग अपनी तारीफ नहीं चाहते और न इसका प्रयत्न करते हैं सो अक्सर यह बहुमूल्य व्यक्तित्व साहित्य जगत में गुमनामी में ही रहते हैं ,हाँ, ढोल बजाते प्रशस्ति पत्र पाते लोगों से कोसों दूर इन लोगों की कुटिया में उनके भले मित्रों की कोई कमी नहीं होती !

आज Anand भाई के एक कमेन्ट के द्वारा Satyen Bhandari की अस्वस्थता के बारे में ज्ञात हुआ, सुनकर खराब लगा , हाइपरटेंशन वाकई खराब बीमारी है खासतौर पर यदि 50 के बाद हो तब, मैं खुद इसका 55-60 वर्ष की उम्र में शिकार रहा हूँ , पेट के इर्दगिर्द वजन , और चेहरे का भारी होना इसकी शुरुआत मानता हूँ ! इसके साथ ह्रदय आर्टरीज में रूकावट होने का खतरा हमेशा सामने रहता ही है ! आज सर्वाधिक डायबिटीज और ह्रदय रोगी हमारे देश में ही हैं जिनसे मेडिकल व्यवसाय जबरदस्त तरीके से फलफूल रहा है !

सर्विस रिटायरमेंट (2014) के समय मुझे यह सारी समस्याएं, जन्मजात भावुकता एवं संवेदनशीलता के साथ मौजूद थीं, किसी भी जीव के कष्ट में खुद को आत्मसात कर लेना , इस खतरे को चर्म सीमा पर पंहुचाने के लिए 
काफी था मगर मैं इस उम्र में रगड़ रगड़ कर मरना नहीं चाहता था और इन्हीं दिनों मैं अपनी जिम्मेवारियों से
मुक्त हुआ था और अब खुद के लिए जीने की तमन्ना थी सो बड़प्पन को एक तरफ झटक अभी तो पार्टी शुरू हुई है, के नारे के साथ शरीर को निरोग बनाने का फैसला , अभूतपूर्व विश्वास के साथ कर 61 वर्ष की उम्र में नियमित वाक शुरू किया था ...

पौराणिक कहानियों में मैंने भीष्म पितामह से एक सबक लिया कि जीवनीशक्ति पर किया आत्मविश्वास आपको विजयी बनाएगा बशर्ते इसपर कोई संशय न हो ! अगर आसन्न मृत्यु उन्हें डिगा नहीं पायी तो मैं अभी उस भयावह अवस्था में नहीं हूँ बस सबसे पहले यह ठान लेना होगा कि मुझे अगले 20 वर्ष बेहद मजबूती के साथ जीना हैं और उसके बाद तदनुसार खानपान सम्बन्धी उचित आचरण करना होगा !

लोग अक्सर मुझसे मेरे स्वास्थ्य का राज पूंछते हैं , ऐसा नहीं कि मुझे बीमारियाँ नहीं होतीं हर वर्ष जाड़ों में खांसी की समस्या मेरे बढ़िया स्वास्थ्य में रुकावट रही है ! पिछले दो माह से दिल्ली के प्रदूषण में दौड़ने का प्रयास और फलस्वरूप गले में इन्फेक्शन के कारण लगभग तीन किलो वजन बढ़ा है साथ ही स्वाभविक तौर पर लम्बी दूर की दौड़ पर प्रतिकूल प्रभाव भी दिख रहा है मगर यह समस्याएं आत्मविश्वास नहीं तोड़ पाएंगीं , कुछ दिनों में अन्धेरा दूर होगा और फिर वजन घटेगा और सतीश दौड़ेगा ...

अपने ऊपर यह भरोसा तुम्हें हर बीमारी से मुक्त रखेगा , हाँ यह सब एक दिन में न होकर काफी लम्बे समय में होगा जब तक जीना है शरीर को एक्टिव बनाए रखना होगा अन्यथा हल्की से मायूसी और खुद पर अविश्वास उसी दिन शरीर को जमीन पर लिटाने के लिए काफी होगा !

जिस व्यक्ति को यही नहीं मालूम कि उसके शरीर का मोटापा क्या खाने से बढ़ रहा है वह यकीनन अपने जीवन के प्रति लापरवाह है ! हर शरीर अलग है, अगर एक शरीर पर, मीठा वजन बढाने का दोषी है तो दूसरे शरीर पर चना या दूध यह काम बखूबी कर रहा होगा और यह पता करना कोई अधिक मुश्किल काम नहीं, 
याद रहे बढ़ा हुआ वजन हर बीमारी बढाने में समर्थ है !

हर व्यक्ति को लगभग ५ km रोज धीरे धीरे दौड़ना चाहिए , इतना दौड़ना शरीर को सिखाने के लिए , लगभग २ माह का समय लगता है ! और मजबूत शरीर के लिए आवश्यक दौड़ सीखने के लिए हर रोज वाक का आखिरी 200 मीटर, बिना हांफे भाग कर समाप्त करना चाहिए ! मानवीय बॉडी कोर में अवस्थित महत्वपूर्ण अवयव, दौड़ने से उत्पन्न कम्पन पाकर अपने आपको धन्य समझेंगे और नए जोश से आपके शरीर को नवऊर्जा संचार देंगे ! आपकी आन्तरिक शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति आपको धन्यवाद् देगी कि चलो इस उम्र में ही सही बुड्ढे में बुद्धि तो आई ....

और २०१५ में ६१ वर्ष की उम्र में मेरा बीपी कब ठीक होगया पता ही नहीं चला , हैं मैंने शरीर के साथ जबरदस्ती नहीं की धीरे धीरे उसे एथलीट बनाया और सफल भी रहा !

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !

Wednesday, November 21, 2018

मेहनत का कोई विकल्प नहीं -सतीश सक्सेना

अकेले लॉन्ग रन पर जाने में , मन बहुत व्यवधान पैदा करता है ! कल सुबह बेमन घर से निकला कि 10 km दौड़ना है अन्यथा Millennium City Marathon - 4th Edition 2nd Dec 2018​ जिसमें कई अंडर ब्रिज की चढ़ाइयाँ पार करते हुए 21 km दौड़ना इतना आसान नहीं होगा ! पहले दो सौ मीटर दौड़ने में ही तरह तरह के
बहाने नजर आने लगे , आज कोहरा बहुत है  ...अन्धेरे में पैर गड्ढे में आ सकता है ...कुत्ते हो सकते हैं हाथ में डंडा भी नहीं है  ...आज पैर में दर्द है आदि आदि !

मगर मजबूत इच्छा शक्ति ने, मन को धमकाया कि हर हालत में आज लंबा दौड़ना है और मुश्किल रस्ते से जाना है जहाँ फ्लाईओवर आदि मिलें ! अगर बेमन रोते हुए दौड़े तो बेट्टा आज 25 किलोमीटर दौड़ने की सजा मिलेगी इसलिए चुपचाप 17-18 km दौड लो कोई बहाना मंजूर नहीं ! और मजबूत इच्छा शक्ति की इस धमकी के आगे मन अपना मन मसोस कर चुपचाप कोने में बैठ गया और पैरों को एक लम्बे नए रूट पर मजबूत संकल्प के साथ मुड़ते देखता रहा !

और इस चौसठ वर्षीय नवजवान ने तीन चार ब्रिज की चढ़ाइयाँ पार करते हुए लगभग 20 km की दूरी भारी ट्रेफिक के बावजूद, अकेले दौड़ते हुए , तय करने में सफलता प्राप्त की जिसके लिए मात्र ३ वर्ष पहले 100 मीटर भी दौड़ना एक बुरा सपना था !

पेन्क्रियास और ह्रदय की सुरक्षा के लिए आइये, दौड़ना सीखें, मेडिकल व्यवसाइयों से बचें, वे बेहद खतरनाक हैं , वे आपको बचाने की कोशिश भी नहीं करते हैं और न उनके हाथ में हैं , वे सिर्फ आपके गलते शरीर पर दवाओं का प्रयोग कर आपको प्रभावित करने का कामयाब प्रयत्न करते हैं ! 

Sunday, November 11, 2018

मरना है तो,मरो सड़क पर मगर आज हों, ब्रेक बैरियर ! -सतीश सक्सेना

कई दिन बाद,आज सुबह, लम्बा दौड़ने का फैसला कर दौड़ते हुए 13.20 Km का फासला बिना रुके , बिना पानी के तय किया ! यह दूरी 1घंटा 36 मिनट में तय की गयी ! रनिंग के तुरंत बाद, बॉडी कूल डाउन के लिए लगभग 6 km तेज वाक किया ! अब लग रहा है कि जैसे काफी दिन बाद शरीर तरो ताजा और आत्मविश्वास से लबालब हुआ !


लोग सोंचते होंगे कि यह किस्मत वाले वाले हैं कि इन्हें 64 वर्ष की उम्र में भी कोई बीमारी नहीं है , मगर यह सच नहीं है , सत्य है कि मुझे भी बीमारियाँ हैं और परेशान करने वाली बीमारियों हैं मगर मैं उन्हें याद ही नहीं रखता और न दवा खाता अन्यथा बचा जीवन कब का मेडिकल व्यापारियों की भेंट चढ़ गया होता !
मेरा मानना है कि ६४ वर्ष की उम्र में कम से कम 64 प्रतिशत शरीर का क्षरण अवश्य हुआ है और मेरे शरीर का हर अंग की क्षमता भी उसी हिसाब से कम हुई होगी वह और बात है कि मैं अपनी मशीनरी को अधिकतर एक्टिव रखने में कामयाब हूँ सो मेरे शरीर की चुस्ती और स्टेमिना, उम्र के हिसाब से कहीं अधिक है , यकीनन मैं बाद में बिस्तर पर लेटकर बीमारियाँ भोगने से काफी हद तक बचा रहूंगा !

बूढों को देखते ही,संभावित बीमारियों का टेस्ट कराने के लिए , अक्सर परिवारजन सलाह देते देखे जाते हैं , मुझे मेडिकल व्यवसाय से अधिक प्रभावी विज्ञापन आजतक देखने को नहीं मिले जहाँ बीमार होते ही पूंछा जाए कि दवा ले आये ? मतलब शरीर में जो बीमारी बरसों में पैदा हुई है वह गोली खाते ही ठीक हो जायेगी इसीलिए मेडिकल पढ़ाई की फ़ीस करोड़ों तक पंहुचती है क्योंकि उस धंधे में पैसों की कोई कमी नहीं , साठ से ऊपर का हर आदमी अपने जीवन भर की कमाई बचाए बैठा रहता है कि उसे देकर इलाज हो जाएगा उसे उससे आगे की सोंचना ही नहीं कि बाद में बचोगे कितने साल ?

हर शहर में मेडिकल टेस्ट लेब्स की भरमार है और एक एक लैब में रोज सैकड़ों टेस्ट सैंपल लिए जाते हैं कोई ज्ञानी यह समझने की कोशिश ही नहीं करता कि क्या इस लैब में इतने टेस्ट करने की क्षमता और मशीनें भी हैं ? एक सामान्य टेस्ट करने में ही लगभग आधा घंटा लगता है पूरे दिन में एक तकनीशियन सिर्फ 12 टेस्ट कर पायेगा फिर यह रोज की 100 टेस्ट रिपोर्ट क्या मंगल वासियों द्वारा किये गए हैं ?

खैर ....दोस्तों से निवेदन है कि भारत डायबिटीज और ह्रदय रोगों की राजधानी बन चुका है, रोज जवान और असमय मृत्यु सुनने को मिलती है सो इनसे और मेडिकल व्यवसाइयों से बचने के लिए खुद को दौड़ना सिखाइए और जीवन का आनंद लीजिये !

सस्नेह सादर ..

आज की पंक्तियाँ जो गाते हुए दौड़ा ....

भाड में जाए धड़कन दिल की
कमर दर्द , कमजोर हड्डियां
मरना है तो , मरो सड़क पर
मगर आज हों, ब्रेक बैरियर !

Saturday, October 20, 2018

मजबूत ह्रदय,पेन्क्रियास के लिए शरीर को दौड़ना सिखाएं -सतीश सक्सेना

भारत में पचास वर्ष से अधिक उम्र का हर तीसरा व्यक्ति, हार्ट आर्टरीज में रुकावट का ख़तरा लिए हुए है इस उम्र में हर व्यक्ति 60-80 प्रतिशत आर्टरिज़ ब्लॉक कर चुका होता है, आलस्य और खानपान के कारण घर घर में आई डायबिटीज सोने पर सुहागे का कार्य करता है और अचानक किसी दिन आपके जीवन भर की कमाई और हँसी, मेडिकल व्यवसायी ले जाते हैं !

अगर आपको यह जानना हो कि आप ह्रदय रोगी हैं या नहीं तो सिर्फ सौ मीटर दौड़ कर देखें अगर इतने में सांस फूल जाती है तब आप तमाम बढ़िया टेस्ट रिपोर्ट के बावजूद, निस्संदेह खतरे में हैं ! इससे निजात पाने का सबसे बेहतर तरीका अपने भारी शरीर को धीरे धीरे दौड़ना सिखाएं आप जल्द पायेंगे कि अब आप एक किलोमीटर बिना हांफे थके, दौड़ने में सक्षम हैं !

शुरू में बेहद परेशान होंगे, खराब लगेगा मगर कुछ समय बाद यही बहता पसीना आनंद देगा और इतना आनंद देगा कि आप अक्सर दौड़ के बाद नाचते हुए घर में घुसेंगे ! एक रनिंग आपके आत्मविश्वास को कई गुना बढाता है, तमाम उम्र्जनित बीमारियाँ, डिप्रेशन और झुंझलाहट नजदीक नहीं आयेंगे ! दौड़ते समय पूरे शरीर में बॉडी वेट इम्पैक्ट के कारण उत्पन्न कम्पन आपके आन्तरिक सुस्त पड़े अंगों में वह उथल पुथल करते हैं कि उन सोये हिस्सों में नयी जान पड़ जाती है !

दौड़ना आसान नहीं है , मैंने देखा है कि कोई नहीं पूंछता कि दौड़ना कैसे है , अधिकतर का माइंड प्रीसेट है कि दौड़ने में क्या है जबकि सच्चाई इसके विपरीत है आपका शरीर और मन आपको दौड़ने ही नहीं देगा और अगर जोश और हिम्मत के सहारे दौड़ते रहे तब कुछ दिनों में आन्तरिक मसल्स इंजरी के कारण इतने तरह के दर्द होंगे की आप भविष्य में दौड़ने के योग्य ही न रहें !

आराम पसंद मसल्स, अगर सामर्थ्य से अधिक कार्य करेंगे तब निस्संदेह आप कुछ समय में दौड़ना भूल जायेंगे हर रनर का पहला वर्ष बहुत महत्वपूर्ण होता है , जिसमें उसे अपनी मसल्स को मेहनत करना , आराम देना और उनकी शक्ति व tissues को regenerate करना होता है ! सो शुरुआत में कृपया ध्यान रखें

-सप्ताह में चार दिन से अधिक रन न करें !
- रविवार को लंबा दौड़ें(रन या वाक ) , सोम रेस्ट करें ताकि थकी मसल्स को आराम मिले और वे अधिक मजबूत हो सकें , मंगल बुध ब्रहस्पति तीनों दिन दौड़ें ( रन या वाक ), शुक्र को साइकिल चलायें शनिवार रेस्ट !
-पूरे सप्ताह पानी अधिक पीने की आदत डालें , रनिंग /वाकिंग में शरीर से पसीना बहता है पानी की कमी आपके मसल्स में क्रंप उत्पन्न करेगी, रनिंग में सबसे महत्वपूर्ण भाग आपके शरीर में जल का होना है इससे फ्लेक्सिबिलिटी रहेगी और दौड़ने में आनंद आएगा ! हाँ , दौड़ते समय जल नहीं पीना है पानी भरे पेट से आप दौड़ नहीं पायेंगे, प्यास होते समय गला तर करने को हाथ में ली हुई छोटी बोटल से सिप करें उतना काफी है !
-अगर GPS वाच नहीं है तब मोबाइल पर strava नामक app इंस्टाल करें और दौड़ या वाक के शुरू और अंत में स्टार्ट और बंद करना न भूलें ! खुद की मेहनत को देखना बेहद आनंद देता है !
-दौड़ते समय कपडे हलके पहने जो दौड़ने में रुकावट न करें , रनिंग शोर्ट और स्लीवलेस वेस्ट अच्छी रहती है ! रनिंग शोर्ट में जिप पॉकेट होती है जिसमें अपने मोबाइल को रखकर आप दौड़ सकते हैं ! हलके और आरामदेह जूते महत्वपूर्ण हैं !
- हर रनर को अपने साथ दौड़ते समय , पसीना से बचने के लिए हेडबैंड , मोबाइल , कुछ पैसे , ID कार्ड ,पानी की छोटी बोतल और कार की चावी
रखना होता है सो रनर शोर्ट में कम से कम दो ज़िप पॉकेट आवश्यक हैं !
अंत में फिर बता दूं कि मैंने रनिंग तमाम उम्र जनित बीमारियों के साथ, 61 वर्ष की अवस्था में सीखनी शुरू की तथा दो वर्ष में मोटा पेट और भारी भरकम चेहरे से निजात पा ली थी , लटकी हुई मांसपेशियां, झुर्रियां सब गायब हो चुकी हैं , पूरे जीवन पहले साठ बरसों में 100 मीटर न दौड़ पाने वाला मैं अबतक ४५०० km दौड़ चुका हूँ और बिना रुके ६५ वर्ष की उम्र में 21 किलोमीटर (2 घंटा 15 मिनट ) दौड़ने में समर्थ हूँ !
यकीन करें आप आराम से कर लेंगे और बीमारियों से मुक्त होंगे बस मेडिकल व्यवसाइयों की गोलियां पर भरोसा न करें बल्कि घर से निकल शरीर को फिट बनाएं और कुछ दिन बाडी आप ठठ्ठा मारकर हँसते हुए घर में दौड़ते हुए प्रवेश कर पायेंगे !

आप सबको मंगलकामनाएं !

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !
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