Tuesday, March 31, 2020

शाही सलाम में कलम, क्या ख़ाक लिखेगी ? -सतीश सक्सेना

जयकार में उठी कलम,क्या ख़ाक लिखेगी
अभिव्यक्ति को वतन में,खतरनाक लिखेगी !

अवसाद में निराश कलम , ज्ञान लिखेगी ?
मुंह खोल जो कह न सके,चर्वाक लिखेगी ?

जिसने किया बरवाद , वे बाहर के नहीं थे !
तकलीफ ए क़ौम को भी इत्तिफ़ाक़ लिखेगी !

किसने दिया था दर्द, वह बतला न सकेगी !
कुछ चाहतें दिल में छिपा, बेबाक लिखेगी ?

सुलतान की जय से ही, वो धनवान बनेगी !
मालिक की जो रज़ा हो वही बात लिखेगी !
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