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Monday, November 1, 2021

परीक्षा मानव शक्ति की -सतीश सक्सेना

आज लगातार दौड़ते हुए सौवाँ दिन था , इस बार अपनी शक्ति और सामर्थ्य की खुद परीक्षा लेनी थी , भरोसा था पिछले छह वर्षों की सतत
मेहनत और अपने ऊपर विश्वास का जिसके कारण यह एग्जाम पास किया इसमें आप सब मित्रों का प्रोत्साहन और साथ शामिल था , उसके लिए आप सबको प्रणाम !

इन सौ दिनों में तमाम अनुभव हुए, साठ बार 21 km या अधिक दौड़ना और दो बार लगातार 10 दिन तक रोज हाफ मैराथन (21 Km) दौड़ा , रोज लगभग 3 से चार घंटे दौड़ने के कारण वजन बेहद तेजी से घटा और अधिक पौष्टिक भोजन लेने का ध्यान नहीं रखने के कारण दो या तीन बार रुकने पर, चक्कर आते प्रतीत हुए तब यह अहसास हुआ कि इतना अधिक पसीना ( लगभग 3 लीटर रोज ) बहने से शरीर से आवश्यक साल्ट्स सोडियम, कैल्सियम, मैग्निसियम की कमी काफी हुई है और इसका नतीजा जीवन में पहली बार कमजोरी महसूस हुई अतः अगले दिनों नियमित खाना छोड़ 3 कोर्स मील्स लेना शुरू कर दिया , इससे धीरे धीरे सामान्य महसूस करने लगा और सौ दिन पूरे हुए , फायदा यह हुआ है कि 20 km लगातार दौड़ने पर भी पैरों में थकान का नाम नहीं है ! पिछले सौ दिन में 1849 km दौड़ा हूँ एवं पूरे विश्व में दौड़ते 13073 लोगों में मेरा रैंक 68 रहा , यह मेरे लिए भी अविश्वसनीय है , भरोसा नहीं होता कि मैं 67 वर्ष की उम्र में लगातार 100 दिन तक रोज 19 km दौड़ पाया हूँ !

कई बार घुटने में दर्द कमर दर्द हार्ट पल्पिटेशन आदि ने परेशान अवश्य किया मगर भय और चिंता को कभी खुद पर हॉवी नहीं होने दिया , और नतीजा आनंददायक मिला ! शरीर का सारा अनावश्यक फैट गायब और न थकने वाली अथाह शक्ति , और जवानी किसे कहते हैं, इसका अहसास और आखिरकार मैंने कायाकल्प कर दिखाया ! यहाँ लिखने का उद्देश्य सिर्फ अपने हम उम्र साथियों को विश्वास दिलाना मात्र है कि मानव शरीर पर भरोसा न छोड़ें वह बेहद शक्तिशाली है !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Friday, July 31, 2020

लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग के फायदे और खतरे -सतीश सक्सेना

3 km या उससे अधिक रनिंग को लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग कहा जाता है , 61 वर्ष में जब मैंने दौड़ना सीखना शुरू किया था तब 100 मीटर लगभग हर लॉन्ग डिस्टेंस रनर यह सुख रनिंग के दौरान या उसके तुरंत बाद महसूस करता है और उस समय शरीर में कोई स्ट्रेस  , दर्द महसूस नहीं होता !

पहला मैराथन रनर यूनानी सैनिक फिडीपिडिस  था जिसने मैराथन नामक जगह से एथेंस तक की लगभग 42 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए तय की और राज दरबार में जाकर ईरान पर अपनी सेना की विजय की सूचना देने के बाद लड़खड़ा कर गिर गया और इतनी लम्बी दौड़ को शरीर सह न सका और उसकी मृत्यु हो गयी !

अक्सर लम्बी दौड़ में मसल्स फाइवर्स में सूजन हो जाती है और इसे ठीक होने में कम से कम 3 सप्ताह से 3 माह तक लगते हैं , रनिंग
एक हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें दौड़ते समय हर कदम पर, शरीर का तीन गुना वजन के बराबर इम्पैक्ट होता है , और शरीर का हर अंग अवयव कम्पन महसूस करता है ! इस खतरनाक एक्सरसाइज के कारण शरीर तरह तरह से रियेक्ट करता है , अस्वस्थ  शरीर, 
परिवार में हृदय रोग हिस्ट्री के रनर को लम्बी दूरी की इस हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए अन्यथा हृदय आघात से मृत्यु की संभावना अधिक रहती है !

फिडीपीडीज़ अकेला रनर नहीं था जिसकी लम्बी दूरी दौड़ने के कारण मृत्यु हुई हो , अधिक समय तक जोश में लम्बी दूरी दौड़ने वाले अक्सर हृदय डैमेज के शिकार तो होते हैं साथ ही बरसाती गर्म मौसम, ठण्ड और बारिश की अक्सर बिना परवाह 3 से 6 घंटे दौडने वाले अक्सर  मसल्स की अंदरूनी चोट , जॉइंट एंड बोन के अलावा घातक हृदय डैमेज, अचानक स्ट्रोक , डिहाइड्रेशन और बेइंतिहा थकान का शिकार होकर अचानक मृत्यु के शिकार होते हैं और इन सब कारणों में अक्सर कुछ और बड़ा करने की तमन्ना और जोश अक्सर घातक होते हैं ! पिछले ४ वर्षों में भारत में ही कम से कम आठ मौतें रनिंग के कारण हुई हैं , जिनमें आधी से अधिक दौड़ते हुए हुई हैं !

मुझे याद है लखनऊ मैराथन के दौरान , लगभग 16 km के बाद ही पैरों में क्रैम्प्स आने शुरू होने के कारण मैं दौड़ने के स्थान पर लड़खड़ा कर मुश्किल से चल रहा था , पानी कम पीने के कारण उस दिन डिहाइड्रेशन के असर साफ़ दिख रहा था उस पर बहता हुआ पसीना , जैसे तैसे लड़खड़ाते पैरों के साथ मैंने उस दिन 21 km की दूरी पूरी की थी , शायद वह दिन मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा !
जब से मैं अपने हर दोस्त को जोश में दौड़ने से रोकता रहता हूँ , और उन्हें कहता हूँ कि 5 km की दौड़ भी अक्सर काफी रहती है !

प्रौढ़ों को वाक् के अंत में थोड़ी दूर तक मस्ती में दौड़ना आना चाहिए और यह दौड़ना किसी भी हाल में , बिना हांफे और बीपी बढे बिना होना चाहिए अन्यथा वे अपने को खतरे में डालेंगे !

अतः हर रनर को अपने शरीर की सीमा क्षमता से अधिक नहीं दौड़ना चाहिए , हर लम्बी रनिंग के बाद 1 दिन से 7 दिन अथवा सप्ताह में दो दिन  विश्राम आवश्यक है ताकि मसल्स में आयी सूजन ठीक हो सके और वे अधिक मजबूत हो ! पानी की मात्रा रनर के शरीर में बहुत अधिक होनी चाहिए , उसे हर वक्त यह याद रखना चाहिए कि 10 से 21 किलोमीटर में वह शरीर से लगभग 3 लीटर पानी पसीने के रूप में बह जाता है उसकी भरपाई न होने पर वह मुसीबत में आ सकता है !

याद रखें जहाँ सप्ताह में 4 - 5 दिन, 4 km की एवरेज रनिंग और एक दिन साइक्लिंग आपके लिए वजन मुक्ति, कब्ज , खून संचार, स्ट्रेस , डायबिटीज और हृदय रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए काफी होगी वहीँ जोश और जवानी दिखाने के लिए 10 km रोज की दौड़ , जान लेने में भी समर्थ है !

हैप्पी रनिंग टू आल !!

Tuesday, February 19, 2019

अनमोल जीवन के प्रति लापरवाही, पछताने का मौक़ा भी नहीं देगी -सतीश सक्सेना

बिना पूर्व तैयारी लम्बे रन दौड़ने का प्रयत्न करना, सिर्फ जोश में, बचकाना पन ही कहलायेगा , मानव देह को धीरे धीरे किसी भी योग्य बनाया जा सकता है वह हर स्थिति के अनुसार अपने आपको ढाल सकती है और इसके लिए उम्र बाधा कभी नहीं होती बशर्ते सोंचने वाले की समझ ब्लाक न हो !शरीर के जोड़, मूवमेंट के लिए बनाए गए हैं
अगर बरसों से आपने धनवान बनने के बाद, सिर्फ आराम किया है तो पक्का आपके जॉइंट जकड चुके हैं और शरीर में फ्लेक्सिबिलिटी समाप्त होने के कगार पर होगी , अधिकतर लोग इसी अवस्था को ही बुढापा कहते हैं जब यहाँ 50 वर्ष से ऊपर हर इंसान के चेहरे पर, उम्र जनित गंभीरता दिखती है , हँसना उनके विचार से जवानों का काम होता है अधिक उम्र में उन्मुक्त हंसना तो उन्हें बेहूदगी लगने लगता है ! हंसने के नाम पर वे अक्सर पार्क में हमउम्र बुड्ढों के साथ खड़े होकर हो हो हो हो कर जोर से आवाज निकाल कर हंसने को ही, हंसना मान लेते हैं !

मेरे विचार से जो उन्मुक्त मन हंस नहीं सकते वे निश्चित ही असमय बुढापे का शिकार हो चुके हैं , कारण चाहे कुछ भी हो , अपने अपने कष्टों के नीचे जीने की इच्छा खो बैठना, मानवता के प्रति सबसे बड़ा गुनाह है , ऐसे लोग अपनों के प्रति, अपने कर्तव्य भुलाकर , रोते रोते जीवन काटते हुए मानव के खूबसूरत जीवन के प्रति अपराध कर रहे होते हैं !

इंसान वही जो हँसते हुए उनके लिए जिए जिन्हें उसकी जरूरत है, इसके लिए मन में स्फूर्ति एवं सतत शौक
रखना और उन्हें सीखने की प्रक्रिया आवश्यक है , इच्छाओं और स्फूर्ति का मरना ही मृत्यु है , सो हंसने के लिए पार्क में अवसाद युक्त चेहरों के साथ खड़े होकर हो हो हो हो करने की निरर्थकता पर गौर करना होगा , हंसना आवश्यक है और उसके लिए नेचुरल उन्मुक्त हँसना, सीखना होगा !

सुबह लगभग एक घंटा पसीना बहाने की आदत डालिए आप इतने में ही उम्र्जनित अवसाद से मुक्त हो जायेंगे , तेज वाक के अंत को एक या दो मिनट तक दौड़ कर समाप्त करें और यह अधिक तेज न हो कि हांफना पड जाए ! इस प्रक्रिया से आपका शरीर दौड़ना सीख जाएगा , शुरू के एक साल शरीर में तरह तरह के दर्द होंगे जो मसल्स के पुनर्निर्माण की पहचान है , उनकी परवाह न करें ! रन /वाक से पहले और बाद में स्ट्रेचिंग और स्ट्रेंग्थ एक्सरसाइज अवश्य करें अन्यथा मांसपेशियां चोटिल हो सकती हैं !

अगर आप 5 km दौड़ना चाहते हैं तो सप्ताह में आराम से 10km दौड़ने का पूर्व अभ्यास बिना हांफे होना चाहिए , 10 km और 21Km के लिए यह दूरी क्रमश 20 और 40 Km होती है ! इसी तरह 5 Km दौड़ने से एक सप्ताह पहले आप कम से कम एक रन में, 4 km बिना हांफे दौड़ चुके हों , तभी शरीर को 5 km दौडाने का प्रयत्न करना चाहिए ! 10km और 21km की रेस के लिए यह दूरी 8 km और 18 km होगी !

50 वर्ष के ऊपर के नवोदितों के लिए 21 km की लम्बी दौड़ सिर्फ तब दौडनी चाहिए जब वे पिछले छह माह में कई बार 17km रन, दौड़ने के अभ्यस्त हों अन्यथा 8-10 km दौड़ने के अभ्यस्त को 21km दौड़ना घातक हो सकता है ! 21 km दौड़ते समय शरीर के तमाम अवयवों में लगातार कम्पन होता है और एनर्जी लॉस होता है , लगातार तीन घंटे , तक दौड़ने का जोश में किया गया, प्रयत्न जान लेने में समर्थ है और इसी भूल में कई धुरंधरों की मौत दौड़ते समय हुई हैं जो कई
मैराथन दौड़ चुके थे ! एक रनर जो अपने शरीर की आवाज नहीं पहचानता उसे दौड़ने से दूर रहना चाहिए , खतरनाक पलों और दिनों का अहसास शरीर अपने मालिक को महीनों पहले बताना शुरू कर देता है कि आप जबरदस्ती न करें अन्यथा बुरा घट सकता है !

हर शरीर अलग होता है, अधिक उम्र वाले वर्ष में दो या तीन हाफ मैराथन या एक मैराथन दौड़ना काफी होता है , अधिक संख्या में दौड़ने का अर्थ आपके कमजोर शरीर को खतरनाक ही साबित होगा ! अतः जल्दबाजी न करें , शरीर को धीरे धीरे कठिन मेहनत का अभ्यस्त बनाएं , तभी आप समझदार कहलायेंगे और शरीर को बीमारियों से मुक्त करने में दौड़ सहायक होगी !


Wednesday, November 21, 2018

मेहनत का कोई विकल्प नहीं -सतीश सक्सेना

अकेले लॉन्ग रन पर जाने में , मन बहुत व्यवधान पैदा करता है ! कल सुबह बेमन घर से निकला कि 10 km दौड़ना है अन्यथा Millennium City Marathon - 4th Edition 2nd Dec 2018​ जिसमें कई अंडर ब्रिज की चढ़ाइयाँ पार करते हुए 21 km दौड़ना इतना आसान नहीं होगा ! पहले दो सौ मीटर दौड़ने में ही तरह तरह के
बहाने नजर आने लगे , आज कोहरा बहुत है  ...अन्धेरे में पैर गड्ढे में आ सकता है ...कुत्ते हो सकते हैं हाथ में डंडा भी नहीं है  ...आज पैर में दर्द है आदि आदि !

मगर मजबूत इच्छा शक्ति ने, मन को धमकाया कि हर हालत में आज लंबा दौड़ना है और मुश्किल रस्ते से जाना है जहाँ फ्लाईओवर आदि मिलें ! अगर बेमन रोते हुए दौड़े तो बेट्टा आज 25 किलोमीटर दौड़ने की सजा मिलेगी इसलिए चुपचाप 17-18 km दौड लो कोई बहाना मंजूर नहीं ! और मजबूत इच्छा शक्ति की इस धमकी के आगे मन अपना मन मसोस कर चुपचाप कोने में बैठ गया और पैरों को एक लम्बे नए रूट पर मजबूत संकल्प के साथ मुड़ते देखता रहा !

और इस चौसठ वर्षीय नवजवान ने तीन चार ब्रिज की चढ़ाइयाँ पार करते हुए लगभग 20 km की दूरी भारी ट्रेफिक के बावजूद, अकेले दौड़ते हुए , तय करने में सफलता प्राप्त की जिसके लिए मात्र ३ वर्ष पहले 100 मीटर भी दौड़ना एक बुरा सपना था !

पेन्क्रियास और ह्रदय की सुरक्षा के लिए आइये, दौड़ना सीखें, मेडिकल व्यवसाइयों से बचें, वे बेहद खतरनाक हैं , वे आपको बचाने की कोशिश भी नहीं करते हैं और न उनके हाथ में हैं , वे सिर्फ आपके गलते शरीर पर दवाओं का प्रयोग कर आपको प्रभावित करने का कामयाब प्रयत्न करते हैं ! 

Sunday, November 11, 2018

मरना है तो,मरो सड़क पर मगर आज हों, ब्रेक बैरियर ! -सतीश सक्सेना

कई दिन बाद,आज सुबह, लम्बा दौड़ने का फैसला कर दौड़ते हुए 13.20 Km का फासला बिना रुके , बिना पानी के तय किया ! यह दूरी 1घंटा 36 मिनट में तय की गयी ! रनिंग के तुरंत बाद, बॉडी कूल डाउन के लिए लगभग 6 km तेज वाक किया ! अब लग रहा है कि जैसे काफी दिन बाद शरीर तरो ताजा और आत्मविश्वास से लबालब हुआ !


लोग सोंचते होंगे कि यह किस्मत वाले वाले हैं कि इन्हें 64 वर्ष की उम्र में भी कोई बीमारी नहीं है , मगर यह सच नहीं है , सत्य है कि मुझे भी बीमारियाँ हैं और परेशान करने वाली बीमारियों हैं मगर मैं उन्हें याद ही नहीं रखता और न दवा खाता अन्यथा बचा जीवन कब का मेडिकल व्यापारियों की भेंट चढ़ गया होता !
मेरा मानना है कि ६४ वर्ष की उम्र में कम से कम 64 प्रतिशत शरीर का क्षरण अवश्य हुआ है और मेरे शरीर का हर अंग की क्षमता भी उसी हिसाब से कम हुई होगी वह और बात है कि मैं अपनी मशीनरी को अधिकतर एक्टिव रखने में कामयाब हूँ सो मेरे शरीर की चुस्ती और स्टेमिना, उम्र के हिसाब से कहीं अधिक है , यकीनन मैं बाद में बिस्तर पर लेटकर बीमारियाँ भोगने से काफी हद तक बचा रहूंगा !

बूढों को देखते ही,संभावित बीमारियों का टेस्ट कराने के लिए , अक्सर परिवारजन सलाह देते देखे जाते हैं , मुझे मेडिकल व्यवसाय से अधिक प्रभावी विज्ञापन आजतक देखने को नहीं मिले जहाँ बीमार होते ही पूंछा जाए कि दवा ले आये ? मतलब शरीर में जो बीमारी बरसों में पैदा हुई है वह गोली खाते ही ठीक हो जायेगी इसीलिए मेडिकल पढ़ाई की फ़ीस करोड़ों तक पंहुचती है क्योंकि उस धंधे में पैसों की कोई कमी नहीं , साठ से ऊपर का हर आदमी अपने जीवन भर की कमाई बचाए बैठा रहता है कि उसे देकर इलाज हो जाएगा उसे उससे आगे की सोंचना ही नहीं कि बाद में बचोगे कितने साल ?

हर शहर में मेडिकल टेस्ट लेब्स की भरमार है और एक एक लैब में रोज सैकड़ों टेस्ट सैंपल लिए जाते हैं कोई ज्ञानी यह समझने की कोशिश ही नहीं करता कि क्या इस लैब में इतने टेस्ट करने की क्षमता और मशीनें भी हैं ? एक सामान्य टेस्ट करने में ही लगभग आधा घंटा लगता है पूरे दिन में एक तकनीशियन सिर्फ 12 टेस्ट कर पायेगा फिर यह रोज की 100 टेस्ट रिपोर्ट क्या मंगल वासियों द्वारा किये गए हैं ?

खैर ....दोस्तों से निवेदन है कि भारत डायबिटीज और ह्रदय रोगों की राजधानी बन चुका है, रोज जवान और असमय मृत्यु सुनने को मिलती है सो इनसे और मेडिकल व्यवसाइयों से बचने के लिए खुद को दौड़ना सिखाइए और जीवन का आनंद लीजिये !

सस्नेह सादर ..

आज की पंक्तियाँ जो गाते हुए दौड़ा ....

भाड में जाए धड़कन दिल की
कमर दर्द , कमजोर हड्डियां
मरना है तो , मरो सड़क पर
मगर आज हों, ब्रेक बैरियर !

Tuesday, April 10, 2018

हेल्थ ब्लंडर्स 5 - सतीश सक्सेना

@कमज़ोर आदमी हूँ। कोई संकल्प लेता भी हूँ तो कमज़ोर इच्छा शक्ति की वजह से बहुत जल्दी टूट जाता है। इसका इलाज बताइये ?
7 अप्रैल को यह कमेंट पढ़कर अपने पुराने थके हुए दिन याद आ गए , दो वर्ष पूर्व कायाकल्प की शुरुआत में संकल्प पर 
अडिग रहने में सबसे बड़ी रुकावट खुद का मन होता है जो शरीर को परिश्रम करने से रोकने में सबसे बड़ी भूमिका अपनाता है ! यह इच्छा शक्ति को हर संभव कारण बताता रहता है कि आज कम दौड़ना है क्योंकि .......
-आज घुटने में अजीब सा दर्द है
-कल रात देर से सोये थे सो आज नींद जरूरी है कल चलेंगे
-सप्ताह में रेस्ट आवश्यक है और उससे फायदा ही है
-आज पेट हैवी लग रहा है कल चलेंगे
-आज मौसम अधिक गर्म या वारिश होने वाली है
-अधिक उम्र में रोज नहीं दौड़ना है डॉ ने मना किया था
-मैं मेहनत बहुत कर रहा हूँ सो आज नहीं जाएंगे तो कोई फर्क नहीं पडेगा
-आज ट्रेफिक अधिक है सो बस एक चक्कर काफी है 
और जैसे ही आप सहमत हुए उसका काम हो गया फिर कितनी ही कोशिश करें आपका पैर नहीं उठेगा !

मन की इस सुखद गंगा से निकलने के लिए खुद से एक ही बात कहता हूँ कि मर जाओगे बेट्टा अगर आलस किया तो, सोंचो कि सुनसान जंगल में रहकर अपने परिवार का पेट भरने के लिए कितनी दौड़ भाग करनी चाहिए और ऊपर वाले ने यह लम्बे हाथ पैर आराम के लिए नहीं बल्कि रोज दौड़ भाग के लिए दिए हैं अन्यथा खुद तो बर्बाद होंगे ही परिवार जो तुम पर निर्भर है वह भी दर दर भटकने को मजबूर हो जाएगा सो उठो और मजबूत रहने के लिए दौड़ो अगर हृदय स्ट्रोक और डायबिटीज से बचना है तब !

हमेशा याद रखें कि बॉडी कोर में अवस्थित शरीर के महत्वपूर्ण अंग ह्रदय ,लीवर ,किडनी , पेन्क्रियास ,फेफड़ों को स्वस्थ रखना है तो पैरों द्वारा body weight impact एक्सरसाइज (रनिंग) करने से ही कम्पन होगा और वे स्वस्थ रहेंगे अभी वे तीन तीन बार खा खाकर बैठे रहते हैं बिना हिला डुले, और खुद को फैट से लपेट कर बीमार बना लेते हैं और जल्दी ही मेडिकल व्यवसाय के दानव के चंगुल में होते हैं उसके बाद बचे हुए जीवन में, चाहते हुए भी हंस नहीं पाते !

रोज सुबह दौड़ने से पहले यथासंभव दंड बैठक ( squat and Planks exercise ) लगाकर सड़क पर निकलता हूँ और दौड़ के बाद पैरों की, जांघों की स्ट्रेचिंग बेहद आवश्यक है अन्यथा दर्द और मसल्स इंजरी का ख़तरा बना रहता है !
कुछ लोग आपको बहुत प्यार करते हैं उनके लिए जागिये, अपनी शक्तिशाली समझ समय रहते अपने शरीर की डिजाईन पर लगाइए निस्संदेह आप अपने शरीर का रोना महसूस करेंगे !
सस्नेह

Wednesday, March 28, 2018

हेल्थ ब्लंडर -सतीश सक्सेना

मेरे मित्रों में से अधिकतर साथी रनिंग करने का प्रयत्न करते हैं उनमें से अधिकतर कुछ दिन बाद रनिंग छोड़कर वाक करने लगते हैं या एक निश्चित दूरी के बाद आगे नहीं जा पाते ! अधिकतर का एक ही कारण है कि वे रनिंग में सीखने योग्य कुछ नहीं समझते, इसके अतिरिक्त बढ़ी उम्र का अतिरिक्त आत्मविश्वास, उन्हें यह समझने ही नहीं देता कि रनिंग एक बेहद जटिल प्रक्रिया है जिसे बरसों से आलसी हुआ शरीर, किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करने देगा !
प लोग शायद यकीन नहीं करेंगे मैं अबतक पिछले ढाई साल में लगभग 4000 Km दूरी दौड़ते हुए तय कर चुका हूँ जिनमें 22 हाफ मैराथन (21 km ) रेस शामिल हैं ! उसके बाद भी मैं अपने आपको बेहतरीन रनर नहीं मानता क्योंकि मैं आज भी दौड़ते समय कई मूलभूत गलतियां करता हूँ जिस कारण मैं अंत में थकने लगता हूँ !
शरीर के महत्वपूर्ण अंग उदर और उसके आसपास हैं जिनमें हर एक का शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान होता है ! पैरों के उठने और जमीन पर गिरने के हर आघात के समय शरीर के इन अंगों में और मस्तिष्क में कम्पन होता रहता है और वह इनका व्यायाम होता है जो प्रकृतिे ने इनके लिए निश्चित किया था यहाँ तक कि बंद रक्त कोशिकाएं, जकड़े जॉइंट एवं मांसपेशिया नरम होकर खुलने लगती हैं और इस शारीरिक बदलाव को,
दौड़ता शरीर बहुत उन्मुक्त मन से स्वागत करता है और दौड़ते समय एक नया जोश आनंद महसूस होता है ! मैं अपनी कई लम्बी दौड़ों में टारगेट भूल कर, बजते ढोल के सामने नाचने लगता हूँ जबकि यह मेरे स्वभाव के विपरीत है !
नए लोग ध्यान रखें कि रनिंग की शुरुआत वार्मअप से करें लंबा वाक करके , वाक के अंत में 1 या 2 मिनट दौड़ कर समाप्त करें मगर शर्त यह है कि यह दौड़ बिना हांफे की गयी हो ! हांफते हुए दौड़ना शरीर का नुकसान करता है और दौड़ से विरक्ति पैदा करेगा सो अगर आप दौड़ते हुए हांफ रहे हैं तो आप दौड़ नहीं पाएंगे यह पक्का है !
समस्त जीवों में बीमारियों से लड़ने की शक्ति, उनके शरीर में निहित है जिसका निदान शरीर खुद करता है मगर पिछले 100 वर्ष से सक्रिय मेडिकल व्यापार ने मानव को डराकर धन कमाने की तरकीब निकाल रखी है, वे समय समय पर विभिन्न शारीरिक प्रतिक्रियाओं को अलग अलग बीमारियों का नाम देकर मानव को डराते रहे और उनके इलाज के नाम पर धन का अम्बार लगाते रहे हैं किस्मत वाले सिर्फ जानवर हैं जिनके संपर्क में कोई मेडिकल व्यवसायी नहीं है और वे अपनी मधुमेह, हृदय रोग, किडनी आदि को चलते फिरते दौड़ते ही ठीक कर लेते हैं और अपनी पूरी आयु जीते हैं !
सो अगर स्वस्थ जीना है तब अपने शरीर के हर अंग का उपयोग करना होगा जिसके लिए वह बनाये गए हैं ताकि वे जकड़ न जाएँ !
अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !
दुरुपयोग मानस का करके,ढेरो धन संचय कर.भयवश
निष्क्रिय और आलसी मन से करता योगाचार आदमी !

Wednesday, March 21, 2018

दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

अधिकतर हार्ट अटैक का कारण, शारीरिक एक्टिविटी का कम होना, अधिक उम्र में बढ़ा हुआ तनाव ,हाइपरटेंशन ,डायबिटीज एवं बढ़ा हुआ वजन मुख्य तौर पर दोषी हैं और अधिकतर केस 50 वर्ष के आसपास ही पाए जाते हैं !
इस उम्र के लोग अधिकतर परिपक्व बुद्धि के मालिक होते हैं और आसानी से अपनी दिनचर्या में बदलाव के लिए ध्यान नहीं देते उनका अधिकतर समय मान सम्मान, प्रभामंडल को सँवारने में बीतता है जिसमें फेसबुक एवं व्हाट्सएप्प से मिलती हुई फ़र्ज़ी वाहवाही का बहुत बड़ा रोल है ! खुद की तारीफ़ सुनने का यह नशा न केवल एडक्टिव है बल्कि आजकल स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक भी है !
मोटापा, डायबिटीज एवं हृदय रोगों से बचाव के लिए रनिंग से बेहतरीन कोई एक्सरसाइज नहीं है मगर अधिकतर लोग दौड़ना बिना सीखे हुए दौड़ने का प्रयत्न करते हैं और कुछ दिन में ही वह बंद हो जाता है ! दौड़ने का पहला मंत्र धीमे धीमे बिना हांफे लम्बी दूरी तक दौड़ना है और यह धीरे धीरे ही
होगा !
इसी मंत्र की बदौलत जीवन के साठ वर्ष 10 कदम भी न दौड़ पाने वाला मैं , आज बिना रुके लगातार 3 घंटे तक दौड़ता हूँ और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कब का नार्मल हो चुका है !
मैं दिखावे की मित्रता नहीं करता अपने मित्रों से इकतरफा मन से जुड़ा होता हूँ वे महसूस करें इसका प्रयत्न भी नहीं करता सो अपने ऊपर किये प्रयोगों को उनके ऊपर भी लागू होते देखना चाहता हूँ और अक्सर मित्रों को कहता भी रहता हूँ और दिल से कहता हूँ कि कायाकल्प आसान है एक बार संकल्प भर लेना है बस ....
अपने हृदय और इम्यून सिस्टम को सही करने के लिए
- खूब नींद लीजिये कम से कम 8 घंटा, यह पहला नियम
-रोज सुबह हलके हलके दौड़िये और बिना हांफे लंबा दौड़ने का अभ्यास करें इससे डायबिटीज लेवल एवं स्ट्रेस ठीक होगा
- रोज शाम लंबा टहलने जाएँ
-रात का भोजन हल्का करें या न करें अगर वे पूरे दिन घर पर रहते हैं !
खूब मस्त रहें और अकेले भी खुश रहना सीखें !
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये!
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये!
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Tuesday, February 27, 2018

बढ़ते हृदय आघात और प्रभामण्डल -सतीश सक्सेना

आज मन बेहद व्यथित है , सुबह सुबह Rahul Singh जी के बड़े भाई Rajesh Kumar Singh जी के हृदयाघात से अचानक जाने की खबर पढ़कर, दौड़ने के लिए बाहर जाने का मन नहीं हुआ ! अचानक स्वस्थ इंसान ऐसे कैसे चला गया कल हमारा नंबर होगा अतः इस पर ध्यान क्यों न दें !
हाल के दिनों में बढ़ते हुए हृदयघातों से शायद ही कोई परिवार अछूता बचा होगा, यह बेहद चिंताजनक है , अधिकतर लोग सम्पन्नता की निशानी, आराम और सुविधा उपलब्ध होना मानते हैं और सुविधा का मतलब मेहनत न करना है और वह हम धन के बदले दूसरों से कराएंगे !
यह मूर्खता और मूढ़ता की पराकाष्ठा है अफ़सोस कि विद्वान् और बौद्धिक सम्पदा संपन्न लोग अपने बढ़ते प्रभामंडल के नीचे नाचते नाचते, आसन्न मौत की आहट भी महसूस नहीं करते !
मानवीय शरीर लगभग 100 वर्ष के लिए इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें होने वाली टूटफूट और क्षरण की मरम्मत स्वतः होती रहे और इसमें गरीबी रईसी का कोई भेदभाव नहीं होता और न मानवीय हस्तक्षेप (दवा दारु ) की कोई जरूरत , इसकी सारी मरम्मत खुद ब खुद होती है बशर्ते शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत हो !
शरीर का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हाथ और पैरों के लिए दिया गया है जो स्वतः चलते समय हिलते हैं और शारीरिक शक्ति इनके हिलने से चार्ज होती रहती है , जो लोग रोज दौड़ने के अभ्यस्त हैं उनके पेट, सीने और मस्तिष्क में हर गिरते कदम के साथ कम्पन होते हैं और महत्वपूर्ण अवयवों का व्यायाम आसानी से हो जाता है जो मात्र टहलने से संभव नहीं सो मित्रों से निवेदन है कि आंखे खोलें और समय रहते दौड़ना सीखना शुरू करें ताकि हृदय में आये परिवर्तन रिवर्स हो सकें !
यह बेहद आसान है और आपका बचना, आपके हँसते हुए परिवार के लिए आवश्यक है !
सस्नेह मंगलकामनाएं !
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Saturday, November 4, 2017

अब आया हूँ दरवाजे पर,तो विदा कराकर जाऊँगा ! - सतीश सक्सेना

आजकल कुछ लोग सोशल मीडिया पर मुहिम चला रहे हैं कि दिल्ली में बढे हुए प्रदूषण की वजह से , सक्षम सैक्लोथॉन एवं एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन को कैंसिल कर दिया जाय ! उनका यह सोंच है कि इससे एथलीट की सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पडेगा !
अफ़सोस यह है कि अक्सर ऎसी मुहिम चलाने वालों को एथलीट की मानसिक और शारीरिक अवस्था के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है मगर दिमागी बम चलाने वाले सलाह हर जगह देते हैं !
कल मुझे सक्षम पेडल साइक्लोथॉन के आयोजकों ( Saumjit )द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने का न्योता मिला था जहाँ मुझसे पूंछे गए तमाम प्रश्नों में से एक प्रश्न यह भी था कि 
क्या आप 63 वर्ष की उम्र में, इस प्रदूषण में साइकिल चलाना, अपने स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं मानते  ? 
मेरा जवाब था कि दिल्ली का प्रदूषित वातावरण में किसी भी यूरोपियन अमेरिकन के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि उनका शरीर प्रदूषण बर्दाश्त नहीं कर सकता और न वे इस वातावरण के लिए अभ्यस्त हैं , हम भारतीय शुरू से इसी वातावरण केआदी हैं और हमारा इम्यून सिस्टम इसके प्रतिरोध के लिए बेहद मजबूत है सो हमारे ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं पडेगा !
और यही प्रश्न कल शाम मेरे मोबाइल पर रेडिओ सिटी से रेडिओ जॉकी नितिन द्वारा अचानक कॉल करके पूंछा गया तो उन्हें भी यही जवाब दिया , कि मैं 63 वर्ष की उम्र में कल 30 किलोमीटर रेस में भाग लूँगा और शान से पूरी भी करूंगा निश्चिन्त रहें मुझे प्रदूषण की कोई चिंता नहीं इसकी चिंता उन आलसियों को है जो मेडिकल बिजनिस की सलाह लेकर विटामिन खा कर अपने को स्वस्थ रखने का दावा करते हैं , मैं अगर दौड़ते दौड़ते मृत्यु को प्राप्त हुआ तब अपने को बेहद सौभाग्य शाली मानूंगा कि मैं अकर्मण्य मौत नहीं मरा !
मुझे दिल्ली सेक्लोथॉन का सबसे यंगेस्ट साइकिलिस्ट का ख़िताब देते हुए नितिन ने मुझे 1000 रूपये का वाउचर देने की घोषणा की जो यकीनन मेरे जैसे नवोदित साइकिलिस्ट के लिए उत्साहवर्धक था !
सो धन्यवाद सक्षम पेडल और रेडिओ सिटी को जिन्होंने मुझे अपनी बात कहने का मौक़ा दिया कि मैं अपनी बात आम जनता को पंहुचा सकूँ !
कल तमाम प्रदूषण की परवाह न करते हुए 30 km अमेच्योर साइकिलिंग में हिस्सा लूंगा और इस विश्वास के साथ लूंगा कि मेरे स्वास्थ्य पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पडेगा बल्कि इम्यून सिस्टम और मजबूत होगा !

कुछ वादे करके निकला हूँ अपने दिल की गहराई से
अब आया हूँ दरवाजे पर,तो विदा कराकर जाऊँगा ! - सतीश सक्सेना 
#WillRunADHM , 

Saturday, December 10, 2016

हेल्थ ब्लन्डर्स II - सतीश सक्सेना


मानवीय शक्ति अपरिमित है और हम उसका अपने मस्तिष्क की तरह शतांश भी उपयोग नहीं करते , अक्सर 40 वर्ष का होते होते अपने आपको समझाना शुरू कर देते हैं कि चढ़ना नहीं, दौड़ना नहीं , गिर जाओगे ! असुरक्षा इस कदर होती है कि शरीर को , दांतों को , मजबूत बनाने के लिए तुरंत डॉक्टर की शरण में भागते हैं बिना सोंचे कि न केवल हम अपने बेहद मजबूत शरीर , जो बिना दवा के 90 वर्ष के लिए डिजाइन है, को न केवल केमिकल जहर दे रहे हैं बल्कि दवा विक्रेताओं के निर्मम और निर्दयी उद्योग को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे अधिक मानव शरीर का नुकसान, विश्व में किसी ने नहीं किया है !
मैं जब भी सामान्य रोगों में एलोपैथिक दवा खाते किसी व्यक्ति को देखता हूँ तब मुझे उसके शरीर की सुरक्षा शक्ति की स्पष्ट चीत्कार सुनाई देती है , हमारा शरीर लंबे समय जीने के लिए डिज़ाइन है , जिसमें हर बीमारी का उपचार करने के लिए शक्तिशाली रोग प्रतिरोधक शक्ति निहित है जो कि संक्रमण होने पर शरीर में तुरंत सक्रिय हो जाती है और उसके एक्शन को मानव विभिन्न रूपों में जैसे प्यास,पसीना, बुखार, जुकाम ,खांसी,बीपी, गांठे, खुजली, आदि के रूप में अनुभव करता है और अगर ऐसा न होता तो लाखों वर्ष की मानव यात्रा यहाँ तक पंहुचती ही नहीं इसकी रक्षा के लिए मेडिकल व्यवसाय कुछ ही वर्षों से है !

शक्तिशाली धनवान मेडिकल व्यवसाय की मेहरबानी है कि हम शरीर की प्राकृतिक रोगनाशक शक्ति के हर आवश्यक उत्पन्न प्रतिक्रिया (बुखार , गांठे आदि ) से भयभीत होकर उसे गोलियां खाकर अथवा ऑपरेशन कराकर बेकार कर देते हैं और अपने ताकतवर शरीर को एक शक्तिशाली भयानक जकड़न के हवाले कर देते हैं जिसका इलाज मानव प्रदत्त उपचार मात्र है ! ऐसा करते हम भूल जाते हैं कि हम मानव शरीर के जटिल रक्षातंत्र को, अपने अविकसित मस्तिष्क ( ढाई प्रतिशत ) द्वारा निर्दयता पूर्वक बर्वाद कर रहे हैं ..... कैंसर की गांठों के ऑपरेशन एक सामान्य उदाहरण है , जिसे हमारे शरीर ने रोक लिया था और हमने उसे कटवाकर मुक्त दिया !

मानव शरीर की इस रक्षा शक्ति के दो उदाहरण देने आवश्यक हैं यहाँ ......
पंजाब के एक दबंग किसान को उसके दुश्मनों ने रात को जंगल में पकड़कर उसके दोनों हाथ और दोनों पैर काट डाले थे , डॉक्टरों को आश्चर्य था कि उसका खून नहीं बहा था , क्योंकि उसके मन में हाथ पैर कटते समय भय न होकर, उन लोगों से बदला लेने की भावना इतनी प्रबल थी कि उसकी सुरक्षा शक्ति ने उसका खून नहीं बहने दिया और वह जीवित बच गया !
जीवित रहने की प्रबल भावना के कारण ही उसकी प्रतिरोधक शक्ति ने उसकी रक्षा की !

हमारे देश में ही ऐसे कितने ही फौजी मिल जाएंगे जिनके शरीर में लगीं दसियों गोलियों में से डॉक्टरों द्वारा खतरनाक गोलियां ही निकाली जा सकीं बाकी शरीर में ही छोड़ दी गयीं , जहरीले लेड से बनीं गोलियों के चारो ओर शरीर की प्रतिरोधक शक्ति, एक जैली जैसा मजबूत कवच चढ़ा देती है जिसके अंदर से कोई भी इंफेक्शन , इन्फेक्टेड टिश्यू अथवा , जहर बाहर नहीं आ सकता मगर आज हम सबसे पहले इन सुरक्षा करती गांठों को काट कर निकाल देते हैं !

आश्चर्य जनक धूर्तता यह है कि हमारे पाठ्यक्रम में शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति के बारे में पढ़ाया ही नहीं जाता या हम ( मेडिकल व्यापारी ) पढ़ाना ही नहीं चाहते अन्यथा उनका पूरा व्यवसाय ही नष्ट हो जाने का खतरा है !

आज मैं बहुत थक गया हूँ , इस उम्र में अब यह हमारे काम नहीं , कभी हम भी मोटर साइकिल चलाते थे , जैसे वाक्य हमारी मजबूत आत्मिक शक्ति को कमजोर मानने के लिए मजबूर कर देते हैं ! ऐसे शब्दों का उपयोग की जगह कहना यही चाहिए कि मैं भी यह कर सकता हूँ और नौजवानों से अधिक बेहतर कर सकता हूँ क्योंकि मैं उनसे अधिक अनुभवी हूँ ! अपने शरीर की शक्ति पर विश्वास करें यह आपको शर्मिंदा नहीं होने देगी !

अपने ऊपर विश्वास पैदा करें कि आप यह कर सकते हैं !! सो आप कायाकल्प आसानी से कर सकते हैं !

Monday, April 25, 2016

रिटायरमेंट के बाद रनिंग, जिसने जीवन ही बदल दिया - सतीश सक्सेना

वाह !!
मशहूर रनर तनवीर काज़मी का लगातार 100 दिन दौड़ने का न्योता मिला है ! नियमों के अनुसार 30 अप्रैल को पहले रन से , जो कम से कम 2 km का होगा, शुरू करके 7 अगस्त तक हर हालात में चाहे भयंकर वारिश हो अथवा बीमार हों,अथवा सफर में हों, बिना नागा दौड़ना होगा ! इसमें बंदिश 2 किलोमीटर की रहेगी, अगर आप बारिश या सफर में हैं तब छोटे छोटे टुकड़ों में ही सही पर दो किलोमीटर दूरी तय करना अनिवार्य होगी इसमें इनडोर अथवा ऑफिस में होने की स्थिति में ट्रेडमिल रनिंग भी शामिल है , जिसे आप अपने मोबाइल अथवा जी पी एस सिस्टम पर रिकॉर्ड कर सकते हैं !

मैं समझता हूँ कि मेरे जैसे व्यक्ति के लिए जिसने कभी घर पर अथवा ऑफिस में शारीरिक मेहनत या एक्सरसाइज नहीं की, उसके लिए इस उम्र में अपने शरीर और शक्ति को फिट रखने के लिए अपने नाकारा पैरों से दौड़ना निस्संदेह हिम्मत वाला फैसला रहा है ! अब जैसे जैसे मैं झिझक छोड़कर इन इवेंट्स में हिस्सा ले रहा हूँ वैसे वैसे हर एक नए रन के साथ, अपरिमित मानवीय शक्ति  को महसूस करके, आत्मविश्वास से सराबोर हो रहा हूँ इन इवेंट्स में जब मैं अपने से अधिक कमजोर और उम्रदराज लोगों का रनिंग स्पीड और रिकॉर्ड देखता हूँ तब आँखे खुली रह जाती है और दिल करता है कि जब ये लोग कर सकते हैं तब मैं क्यों नहीं ?
और यह न समझना कि यह रनर, पहलवान टाइप लोग हैं, सुबह सुबह अँधेरे में यह दौड़ने वाले बेहतरीन रिकॉर्ड होल्डर प्रबुद्ध लोगों में से अधिकतर लोग अपने जीवन के उच्चतम शिखर पर हैं , इनमें विदेशी कंपनियों में कार्यरत उच्च पदस्थ अधिकारी , डॉक्टर, सी ई ओ, डायरेक्टर ,जी एम आदि जैसी बड़ी पोस्ट पर कार्यरत लोग शामिल हैं !
बहरहाल पिछले कुछ माह में ही सिर्फ रनिंग के बदौलत लटकी हुई थुलथुल तोंद 90 प्रतिशत गायब हो गयी है , 74 kg वजन पिछले ७ माह में घटकर 66 किलो रह गया है , बीपी आदि बीमारियां कहाँ गईं पता ही नहीं चला ! जिस पसीने से कभी चिढ थी, उसी पसीने से दौड़ने के बाद सुबह सुबह पूरे कपडे लथपथ हो जाते हैं , अब गीले कपड़ों को देख अपनी मेहनत और शक्ति पर प्यार आता है ! बुढ़ापे के लटके हुए मसल्स आश्चर्य जनक रूप मजबूत हो गए हैं और शीशे में खुद को बार बार देखने का मन करता है !
६० वर्ष से पहले, जो व्यक्ति कभी पूरे जीवन में 50 मीटर न दौड़ा हो वह पिछले 7 माह में  102 रनों के जरिये 885 km दौड़ चुका है और इन दिनों मेरा प्रति सप्ताह रनिंग एवरेज 32 km है ! यह आश्चर्यजनक है , मैं जीवन में कभी एथलीट नहीं रहा और मात्र 7 माह पहले मैं अपने इस कारनामे के बारे में सोंच भी नहीं सकता था !
सबसे आश्चर्यजनक बदलाव अपने मानसिक व्यवहार में आया है , गाडी ड्राइव करने का दिल ही नहीं करता , एक दिन 12 बजे धूप में 2 km दूर एक मॉल तक आराम आराम से दौड़ता पंहुच गया था और बहुत अच्छा लगा था ! इससे पहले मैं, जीवन में कभी सलाद अथवा फल नहीं खाता था अब मनपसंद शोरवे की सब्ज़ी, दम आलू ,परांठे, जलेबी रबड़ी अथवा लेट नाईट डिनर अच्छे ही नहीं लगते ! 
रन मशीन तनवीर काज़मी केडेन्स डिज़ाइन सिस्टम में कंसलटेंट हैं , उनका आवाहन ठुकराया नहीं जा सकता और यह बेहद चैलेंजिंग है , अब आज से पांच दिन के बाद लगातार सौ दिन तक रोज दौड़ना होगा , मुझे यकीन है सौ दिन बाद , आग में तपकर एक नया सतीश बाहर आयेगा ! 
इस आवाहन के लिए धन्यवाद तनवीर काज़मी !! 

(http://navsancharsamachar.com/100-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%A8-%E0%A4%A6%E0%A5%8C%E0%A5%9C%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B6/#respond)
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