Monday, October 1, 2018

सीढियां चढ़ते समय फूलती साँस नजरंदाज़ न करें -सतीश सक्सेना

अगर हार्ट अटैक एवं डायबिटीज से बचना चाहते हो तो पसीना निकलने तक की मेहनत करना सीखना होगा ! धन का उपयोग कर अपने शरीर को आराम देने वाले लोग जान लें कि अभी तक किसी भी खतरनाक बीमारी का, कोई भी इलाज नहीं जो पैसा देकर बीमारी ठीक कर, उम्र बढ़ा दे !
अगर आप सीढियां चढ़ते समय अपनी उखड़ती सांसों को नज़रन्दाज़ कर रहे हैं तो आप अपने आपको जबरदस्त धोखा दे रहे हैं !
अगले अटैक में ऑपरेशन थिएटर पंहुचते ही बचे जीवन में मजबूत आवाज में बात करने लायक नहीं रहेंगे !
अधिक उम्र में भी आसानी से दौड़ना सीखा जा सकता है टहलना और अखबार पढ़ना छोड़, शरीर से पसीना बहने तक, मेहनत करना सीखना ही होगा अन्यथा अधिक उम्र में दुर्दशा पक्की है !
गली मोहल्ले के रायचन्दों से बचें , हाथ पैरों को मेहनत करने के लिए बनाया गया है , इसका कोई विकल्प नहीं !
आइये, रनिंग सीखकर हम अपने आन्तरिक अंगों को , उत्पन्न कम्पनों के जरिये, मजबूत और रोग मुक्त बनाएं ! अंत में मेरी रचना की कुछ लाइनें पढियेगा ....

ये जीवन जटिल हैं,समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !
उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !
अगर जीना है आओ हंसकर खुले में
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !
यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !
असंभव कहाँ, मानवी कौम में कब ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

5 comments:

  1. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 01/10/2018 की बुलेटिन, ये बेचारा ... होम-ऑटोमेशन का मारा “ , मे आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    ReplyDelete
  2. वाह

    आप दौड़ा कर छोड़ेंगे :) जो काम बीबी नहीं कर पायी आप करवा कर छोड़ेंग़े :) :)

    ReplyDelete
  3. सजग करती है आपकी पोस्ट ...
    और लाजवाब रचना भी साथ देती है ...

    ReplyDelete
  4. सही कहा...मेरे नानाजी कहते थे... यह शरीर चमड़े के जूते के समान है. इसे जितना घिसेंगे उतनी चमक आएगी... आप जितना आराम से रखेंगे उतना यह बीमारियों का घर बनता जायेगा इसलिए चलो फिरो, हँसो मुस्कराओ....नेक सलाह..

    ReplyDelete
  5. बेहतरीन सुझाव..

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,