
डॉ अमर नदीम एक बेहतरीन संवेदनशील व्यक्तित्व थे उनका अचानक चला जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है , कमजोर ग़रीबों के लिए उठने वाली एक मजबूत आवाज हमेशा के लिए शांत हो गयी , बेहद बुरी खबर ....
उनकी एक रचना याद आती है...
मज़हबी संकीर्णताओं वर्जनाओं के बग़ैर
हम जिए सारे खुदाओं देवताओं के बग़ैर
राह में पत्थर भी थे कांटे भी थे पर तेरे साथ
कट गया अपना सफर भी कहकशाओं के बग़ैर
श्रद्धांजलि बड़े भाई,
आप बहुत याद आएंगे !!
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श्रद्धांजलि।
ReplyDeleteहार्दिक समवेदना के साथ नमन उनको ।
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