Sunday, August 16, 2015

बेशर्म गज़ल - सतीश सक्सेना

आजकल हिंदी में चोरों की बहुतायत है और अधिकतर चोर हैं जो दूसरों की शैली और रदीफ़ बेशर्मी के साथ कापी करते हैं ! मज़ेदार बात यह है कि उनका विरोध करने कोई आगे नहीं आ पाता क्योंकि ऐसा उन्होंने भी किया है अतः उनके पास इसे सही ठहराने के अलावा कोई चारा नहीं रह जाता ! सो हिंदी में ग़ज़ल लिखने वालों की धूम है ,और तालियां बजाने वालों की कोई कमी नहीं ! सो सोंचा आज हम भी हाथ फिरा लें दुष्यंत कुमार पर  …। 

माल बढ़िया लगे तो मुफ्त उड़ा लो यारो 
कौन मेहनत करे, हराम की खा लो यारो !

इसे लिख के कोई दुष्यंत मर गया यारो  !
उसकी शैली से ज़रा नाम कमा लो यारो ! 

बड़े बड़ों ने इस रदीफ़ का उपयोग किया
सबको अपनी ही तरह चोर बताओ यारो 

ग़ज़ल रदीफ़ तो , सब ने ही बनाये ऐसे
मीर ग़ालिब पे भी इलज़ाम लगाओ यारो 

बुज़दिलों जाहिलों में नाम कमाओ जमके 
बेहया आँख से इक  बूँद गिरा लो यारो !

26 comments:

  1. ऐसे चोरों की उपेक्षा करने वाले सभी लोग स्वयं चोर हों ऐसा ज़रूरी तो नहीं है सतीश जी.

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    1. यकीनन नहीं भाई जी ! मंगलकामनाएं आपको !

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  2. हा हा बहुत बढ़िया :)

    उपदेश उसके बाद सभी को
    सारे ही दे डालो यारो
    मूर्ती किसी महापुरुष की
    किसी खेत में लगा लो यारो
    कितना कहें किससे कहें
    चिकने घड़े हो सब जानते हैं
    थोड़ा घीं और चुपड़ डालो यारो :)

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  3. वाह वाह सतीश जी बहुत बढिया 1

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  4. प्रगतिशील ....बहुत सुन्दर .....

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  5. जहां भी ऐसा कोई मिले, जूते मारो यारों...

    जय हिंद...

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  6. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" सोमवार 17 अगस्त 2015 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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  7. दिनांक 17/08/2015 को आप की इस रचना का लिंक होगा...
    चर्चा मंच[कुलदीप ठाकुर द्वारा प्रस्तुत चर्चा] पर...
    आप भी आयेगा....
    धन्यवाद...

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  8. किसी के गीत,गजलों का ले सहारा
    उस को गुनगुना तो आ गया यारो !
    माफ़ी के साथ तुकबंदी :)

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  9. बड़े बड़ों ने इस रदीफ़ का उपयोग किया
    सबको अपनी ही तरह चोर बताओ यारो --हरतरफ एतराज होता है मैं अगर रौशनी में आता हूँ। चिकने घड़े पे बेशर्म ग़ज़ल --वाह-वाह।

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  10. गुस्सा टपकाती ग़ज़ल भी ग़ज़ल ही कहलाती है, पर सब चोर नहीं होते :)

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  11. सही कहा है
    आजकल साहित्य की चोरी बहुत हो रही है
    मैने यह शिकायत आज ही की है फेसबुक पर

    मेरी कविता की चोरी के बारे मे

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  12. शर्म उनको मगर नहीं आती

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  13. अच्छी है ये बेशर्म गज़ल.

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  14. इसे लिख के कोई दुष्यंत मर चुका यारो !
    उसकी शैली से ज़रा नाम कमा लो यारो
    एकदम सटीक...सही कहा है आपने !

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  15. ज़दिलों जाहिलों में नाम कमाओ जमके
    बेहया आँख से इक बूँद गिरा लो यारो !.

    बेशर्मी पसंद आई

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  16. वाह .. क्या बात है मौलिक रचना में कापी करने वालों को फटकार लगा दी आपने तो ... मजा आया ...

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  17. सतीश जी बहुत बढिया

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  18. सुन्दर व सार्थक रचना ..
    मेरे ब्लॉग की नई पोस्ट पर आपका स्वागत है...

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  19. बहुत खूब। अच्‍छी गज़ल है।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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