Monday, October 30, 2017

दर्द का तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना


साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
 
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

11 comments:

  1. संकल्प को प्रज्वल्लित कर धीरे धीरे दौडिए ...
    बहुत ही आशा और उम्मीद का दामन थामें लाजवाब रचना सतीश जी ...

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  2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" मंगलवार 31 अक्टूबर 2017 को साझा की गई है.................. http://halchalwith5links.blogspot.com पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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  3. बहुत ही सुन्दर सन्देश देती हुई ,एकता के सूत्र में बंधने को प्रेरित करती रचना। सादर

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  4. मन में आशा का संचार करती रचना !!वाह !

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  5. आदरणीय सतीश जी --- जैसा की आपने आत्म कथ्य में लिखा है जब भी आपके ब्लॉग पर आती हूँ कुछ ना कुछ लेकर जाती हूँ | आज भी आपकी लाजवाब रचना पढ़कर रूहानी आनन्द से रूबरू हो जा रही हूँ |एकता की औपचारिक दौड़ को देखने का आपका अनौपचारिक नजरिया काबिले तारीफ है | बहुत -- बहुत बधाई और हार्दिक शुभकामनायें आपको |

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  6. आपकी लिखी रचना "मित्र मंडली" में लिंक की गई है https://rakeshkirachanay.blogspot.in/2017/11/42.html पर आप सादर आमंत्रित हैं ....धन्यवाद!

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  7. बहुत सुन्दर

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  8. तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें
    विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

    समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
    दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

    बहुत सुन्दर प्रेरक प्रस्तुति

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  9. अति मनभावन ।

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  10. बहुत सुन्दर रचना, विश्व के बाद ब्रह्मांड को अपना समझ के दौड़,

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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