Friday, August 7, 2020

मानवता खतरे में पाकर, चिंतित रहते मानव गीत -सतीश सक्सेना

हम तो केवल हंसना चाहें  
सबको ही, अपनाना चाहें
मुट्ठी भर जीवन पाए हैं
हंसकर इसे बिताना चाहें
खंड खंड संसार बंटा है ,
सबके अपने अपने गीत ।
देश नियम,निषेध बंधन में, क्यों बांधा जाए संगीत ।

नदियाँ,झीलें,जंगल,पर्वत
हमने लड़कर बाँट लिए।
पैर जहाँ पड़ गए हमारे ,
टुकड़े,टुकड़े बाँट लिए।
मिलके साथ न रहना जाने,
गा न सकें,सामूहिक गीत ।
अगर बस चले तो हम बांटे,चांदनी रातें, मंजुल गीत ।

कितना सुंदर सपना होता
पूरा विश्व हमारा होता ।
मंदिर मस्जिद प्यारे होते
सारे धर्म , हमारे होते ।
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत ।
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।

काश हमारे ही जीवन में
पूरा विश्व , एक हो जाए ।
इक दूजे के साथ बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने,
घर से निकले मेरे गीत ।
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत ।

जहाँ दिल करे,वहां रहेंगे
जहाँ स्वाद हो,वो खायेंगे ।
काले,पीले,गोरे मिलकर
साथ जियेंगे, साथ मरेंगे ।
तोड़ के दीवारें देशों की,
सब मिल गायें मानव गीत ।
मन से हम आवाहन करते, विश्व बंधु बन, गायें गीत ।

श्रेष्ठ योनि में, मानव जन्में
भाषा कैसे समझ न पाए ।
मूक जानवर प्रेम समझते
हम कैसे पहचान न पाए ।
अंतःकरण समझ औरों का,
सबसे करनी होगी प्रीत ।
माँ से जन्में,धरा ने पाला, विश्वनिवासी बनते गीत ?

मानव में भारी असुरक्षा
संवेदन मन, क्षीण करे ।
भौतिक सुख,चिंता,कुंठाएं
मानवता का पतन करें ।
रक्षित कर,भंगुर जीवन को,
ठंडी साँसें लेते मीत ।
खाई शोषित और शोषक में, बढती देखें मेरे गीत ।

अगर प्रेम,ज़ज्बात हटा दें
कुछ न बचेगा मानव में ।
बिना सहानुभूति जीवन में
क्या रह जाए, मानव में ।
पशुओं जैसी मनोवृत्ति से,
क्या प्रभाव डालेंगे गीत !
मानवता खतरे में पाकर, चिंतित रहते मानव गीत ।

8 comments:

  1. विश्व बंधुत्व और मानवता के भावों से सुसज्जित श्रेष्ठ शुभेच्छाओं भरा अत्यंत सुन्दर गीत .

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  2. लाजवाब हमेशा की तरह आपके गीत।

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  3. अगर प्रेम,ज़ज्बात हटा दें
    कुछ न बचेगा मानव में ।
    बिना सहानुभूति जीवन में
    क्या रह जाए, मानव में ।
    पशुओं जैसी मनोवृत्ति से,
    क्या प्रभाव डालेंगे गीत !

    सभी भावनाएं तो प्रेम से ही है,मगर मानव अब पशुवत होता जा रहा है,भावपूर्ण सृजन सर,सादर नमन

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  4. सुन्दर अभिव्यक्ति

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  5. वाह ! मानवीयता की अलख जगाते सुंदर अति आपके गीत !

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  6. मनुष्यता ख़त्म हो तो ऐसे ही होता है ...
    लाजवाब गीत ...

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  7. सुंदर सपना सा गीत ....

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  8. जहाँ दिल करे,वहां रहेंगे
    जहाँ स्वाद हो,वो खायेंगे ।
    काले,पीले,गोरे मिलकर
    साथ जियेंगे, साथ मरेंगे ।
    तोड़ के दीवारें देशों की,
    सब मिल गायें मानव गीत ।
    मन से हम आवाहन करते, विश्व बंधु बन, गायें गीत ।
    गीत में पिरोई सद्भावनाये यदि फलीभूत ho जाएं तो रामराज्य ही आ जाए कविवर!!! सुंदर भावनाओं से सजी रचना। 🙏🙏💐💐

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- सतीश सक्सेना

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