Saturday, May 24, 2008

पता नहीं क्यों खाते पीते, ज्ञान की बातें, होती हैं -सतीश सक्सेना

डी पी एस ग्रेटर नॉएडा के, एक क्षात्र, रानू , जो कि, पढने लिखने में बहुत अच्छे होने के साथ साथ, खाने पीने में, भी मस्त हैं, के मन की बातें यहाँ दे रहा हूँ ! जब भी हम सब साथ साथ , खाने पर एक साथ बैठते तो बच्चों से उनके भविष्य की चर्चा तथा क्लास में उनकी पोजीशन की चर्चा जरूर होती ! स्वादिष्ट खाने के समय , पढाई की चर्चा , उनके मुहं का टेस्ट बदलने के लिए काफ़ी होती है ! 

मन को काबू कर अंग्रेजी 
ग्रामर लेकर , बैठा हूँ  !
जैसे तैसे रसगुल्लों से , 
ध्यान हटाए , बैठा हूँ !
मगर ध्यान में बार बार, 
ही आतिशबाजी होती है !
अलजब्रा के ही खिलाफ  
क्यों नारे बाजी होती है !
नाना,पापा की बातें सुन ,नींद सी आने लगती है !
इतने बढ़िया मौसम में,एक्जाम की बातें,होती हैं !


समझ नहीं आते बच्चों के 
कष्ट , समस्याएं भारी !
पढ़ते अक्षर नजर न आएं 
दिखे किचन की अलमारी ! 
टीवी पर कार्टून, यहाँ 
भूगोल की बाते होती हैं 
खाने पीने के मौसम मे, 

दुःख की बातें, होती हैं !
ग्रेट खली,इंग्लिश ग्रामर,में हर दम कुश्ती होती है !
पता नहीं घर में हर मौके,क्लास की बातें होती हैं ?

फीस बढ़ा ले भले प्रिंसिपल 
पर बच्चों की क्लासों में !
चॉकलेट लडडू फ्री होंगे 
आने वाले , सालों में !
कठिन गणित का प्रश्न क्लास
में, मैडम जब समझाती हैं !
उसी समय क्यों याद हमारे,
मीठी बातें , आती हैं  !
बिना जलेबी पेट में अक्सर खाली आंतें होती हैं !
सारे अक्षर गड्मड होते और बुद्धि मर जाती है !


हाथ में बल्ला लेकर जब मैं
याद सचिन को करता हूँ,
ध्यान लगा के उस हीरो का 
सीधा छक्का जड़ता हूँ !
मगर हमेशा अगले पल
ये खुशियां भी खो जाती हैं !
पता नहीं ,  क्यों  ध्यान 
हमारे कृष्णा मैडम आतीं हैं !
अक्सर मस्ती के मौकों पर याद सजा की आती है !
पता नहीं क्यों खाते पीते, ज्ञान  की बातें, होती हैं !

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- सतीश सक्सेना

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