Wednesday, July 4, 2012

एकलव्य की व्यथा लिखूंगा - सतीश सक्सेना

ज़ख़्मी दिल का दर्द,तुम्हारे  
शोधग्रंथ , कैसे समझेंगे  ?
हानि लाभ का लेखा लिखते  ,
कवि का मन कैसे जानेंगे ?
ह्रदय वेदना की गहराई, 
तुमको हो अहसास,लिखूंगा !
तुम कितने भी अंक घटाओ,अनुत्तीर्ण का दर्द लिखूंगा !

आज जोश में, भरे शिकारी
जहर बुझे कुछ तीर चलेंगे !
विषकन्या संग रात बिताते  
कल की सुबह, नहीं देखेंगे !    
वेद ऋचाएं  समझ न पाया,
मैं ईश्वर का  ध्यान लिखूंगा !  
विषम परिस्थितियों में रहकर,मैं केवल  श्रंगार लिखूंगा !

शिल्प,व्याकरण,छंद, गीत ,   
सिखलायें जाकर गुरुकुल में
हम कबीर के शिष्य,सीखते
बोली , माँ  के  आँचल  से  !
जो न कभी जीवन में पाया,  
मैं वह प्यार दुलार लिखूंगा !
बिना पढ़े दुनिया समझेगी,मैं ऐसी अभिव्यक्ति लिखूंगा !

हमने हाथ में,  नहीं उठायी ,
तख्ती कभी क्लास जाने को !
कभी न बस्ता, बाँधा हमने,
घर से, गुरुकुल को जाने को !
काव्यशिल्प, को फेंक किनारे,
मैं आँचल के गीत लिखूंगा !
प्रथम परीक्षा के, पहले दिन, निष्काषित का दर्द लिखूंगा !

प्राण प्रतिष्ठा गुरु की कब 
से, दिल में, करके बैठे हैं !
काश एक दिन रुके यहाँ 
हम ध्यान लगाये बैठे हैं !
जब तक तन में  जान रहेगी, 
एकाकी की व्यथा लिखूंगा !    
कितने आरुणि,मरे ठण्ड से,मैं उनकी तकलीफ लिखूंगा !

कल्प वृक्ष के टुकड़े करते ,
जलधारा को दूषित करते !  
तपती धरती आग उगलती
सूर्य तेज का, दोष बताते  !   
जड़बुद्धिता समझ कुछ पाए,
ऐसे  मंत्र विशेष लिखूंगा ! 
तान सेन, खुद आकर  गाएँ, मैं  वह राग मेघ  लिखूंगा  !

शब्द अर्थ ही जान न पाए ,
विद्वानों  का वेश बनाए ! 
क्या भावना समझ पाओगे
धन संचय के लक्ष्य बनाए !
माँ की दवा,को चोरी करते,
बच्चे की वेदना लिखूंगा ! 
श्रद्धा तुम पहचान न पाए,एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

88 comments:

  1. बढ़िया |
    बधाई महोदय ||

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  2. ह्रदय वेदना की गहराई, तुमको हो अहसास, लिखूंगा !
    तुम कितने भी अंक घटाओ,अनुत्तीर्ण का दर्द लिखूंगा !
    जड़बुद्धिता समझ में आये , मैं वह मंत्र विशेष लिखूंगा !
    तान सेन, खुद आकर गाएँ , मैं वह राग मेघ लिखूंगा !
    जब तक तन में जान रहेगी, एकाकी की व्यथा लिखूंगा !
    कितने आरुणि मरे ठण्ड से,मैं उनकी तकलीफ लिखूंगा !
    माँ की दवा को चोरी करते , बच्चे की वेदना लिखूंगा !
    श्रद्धा तुम पहचान न पाए, एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

    ..जब कुछ नया कर दिखने का जज्बा हो तभी मन में उमंग -तरंग होकर उर्जा का संचार होता है .
    बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति ..

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  3. मन में इतना कुछ मचलता है...इतने विचार उमड़ते हैं......लिखना तो होगा ही......
    बहुत सुन्दर सतीश जी.
    सादर
    अनु

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  4. वाह वाह जीवन के हर रूप को सहेज दिया।

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  5. बहुत ही संवेदनशील रचना ... एकलव्य को एक अलग ही पहलू से देखने का प्रयास है ... बहुत ही लाजवाब रचना ... काव्यमय अनुपम गीत ...

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    1. शुक्रिया दिगंबर भाई...

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  6. एकलव्य की व्यथा .... कितनी लिख पायेंगे ? उतनी ही , जितनी आपने जिया है

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  7. सतॊश जी बहुत सुन्दर भाव लिए सुन्दर रचना..

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  8. This comment has been removed by the author.

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  9. इंतजार रहेगा आपके उस लिखने का |

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    1. आभारी हैं शिल्पा जी .. ...

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  10. बहुत बढ़िया सतीश भाई ! कापी पेस्ट को माइंड ना करें सिर्फ ये बतायें कि ये कविता सही बनी या नहीं :)


    हानि लाभ का लेखा करते ,
    कवि का मन कैसे जानेंगे ?

    नागिन के संग रात बिताते
    कल की सुबह, नहीं देखेंगे

    हम कबीर के शिष्य,सीखते
    बोली , माँ के आँचल में !

    कभी ना बस्ता बाँधा हमने,
    घर से,गुरुकुल को जाने को !

    तपती धरती आग उगलती
    सूर्य तेज का, दोष बताते !

    काश एक दिन रुके यहाँ
    हम ध्यान लगाये बैठे हैं !

    क्या वेदना समझ पाओगे
    जग में जाते,नाम कमाने !

    ReplyDelete
    Replies
    1. बहुत सही सुरताल मिलाया
      सृजन इसी को कहते हैं !!

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    2. बढ़िया अंदाज़ अली भाई ...

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  11. बस लिखते रहिये ऐसे भाव प्रणय गीत..

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  12. वेद ऋचाएं समझ ना पाया,मैं ईश्वर का ध्यान करूंगा !
    विषम परिस्थितियों में जीकर,मैं हंसकर श्रंगार लिखूंगा !
    main bhi aisa hi kuchh chahta hoon:)
    bahut behtareen sir!

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  13. आरुणी , एकलव्य , और माँ की दवा को चुराता बच्चा .... बहुत भाव पूर्ण गीत ...

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    Replies
    1. आभार आपका ध्यान देने के लिए ...

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  14. सतीश जी अनुतीर्ण के दर्द और एकलव्य की व्यथा कहाँ समझती है यह मतलबी दुनिया.. एक बार फिर बढ़िया गीत..

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    Replies
    1. ध्यान देने के लिए आभार अरुण भाई ...

      Delete
  15. जड़बुद्धिता समझ में आये ,
    मैं वह मंत्र विशेष लिखूंगा !
    तान सेन, खुद आकर गाएँ ,
    मैं वह राग मेघ लिखूंगा !
    शिल्प,व्याकरण फेंक किनारे,
    मैं आँचल के गीत लिखूंगा !
    प्रथम परीक्षा के पहले दिन,
    निष्काषित का दर्द लिखूंगा !....आभार उपरोक्त बेहतरीन प्रस्तुति हेतु ...
    ( पी.एस. भाकुनी )

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    Replies
    1. शुक्रिया भाकुनी जी ...

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  16. 'भेद, गीत और कविता में ,
    बतलायें जाकर गुरुकुल में
    हम कबीर के शिष्य,सीखते
    बोली , माँ के आँचल में !'
    वाह!

    सुन्दर गीत!

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  17. विषम परिस्थितियों में जीकर,मैं हंसकर श्रंगार लिखूंगा !

    बहुत सुंदर गीत दद्दा...

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  18. प्राण प्रतिष्ठा गुरु की कब
    से, दिल में करके बैठे हैं !
    काश एक दिन रुके यहाँ
    हम ध्यान लगाये बैठे हैं !
    जब तक तन में जान रहेगी, एकाकी की व्यथा लिखूंगा !
    कितने आरुणि मरे ठण्ड से,मैं उनकी तकलीफ लिखूंगा !
    बहुत सुन्दर गीत है सतीश जी. आभार.

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    Replies
    1. शुक्रिया विनीता जी ...

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  19. Replies
    1. शुक्रिया वंदना जी ..

      Delete
  20. कल्प वृक्ष के टुकड़े करते ,
    जलधारा को दूषित करते !
    तपती धरती आग उगलती
    सूर्य तेज का, दोष बताते !
    जड़बुद्धिता समझ में आये , ऐसे मंत्र विशेष लिखूंगा !
    तान सेन, खुद आकर गाएँ,मैं वह राग मेघ लिखूंगा !
    सतीश जी,
    बहुत सुंदर रचना मन को मोह गई !

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  21. बहुत सुंदर गीत लिखा है सतीश भाई। शब्द शब्द मोती जैसे पिरोए हैं। आभार

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    Replies
    1. ध्यान देने के लिए आभार आपका !

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  22. वेदना हो या व्यथा बस आप लिखते रहिये... शुभकामनायें...

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  23. सुन्दर कविता...बहुत सुंदर..

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  24. आज तो हुंकार ही उठा है कवि-खुदा खैर करे..
    एक उत्कृष्ट गीत !

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  25. गहरी व्यथा -- मन की गहराई से लिखा गीत .
    हमेशा की तरह अपने अंदाज़ में सुन्दर रचना .

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  26. ह्रदय वेदना की गहराई, तुमको हो अहसास, लिखूंगा !
    तुम कितने भी अंक घटाओ,अनुत्तीर्ण का दर्द लिखूंगा !


    बहुत सुंदर मनमोहक गीत. खूबसूरत हृदयोदगार.

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  27. एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

    एकलव्य प्रतीक्षारत है व्यथा की अंतर्कथा पहचानने वाले की

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  28. माँ की दवा, को चोरी करते , बच्चे की वेदना लिखूंगा !
    श्रद्धा तुम पहचान न पाए, एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

    .....अद्भुत भावमयी रचना...शब्दों और भावों का अद्भुत संयोजन...नमन आपकी लेखनी को..

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    Replies
    1. आभार भाई जी,
      आपका आशीर्वाद फलीभूत होगा !

      Delete
  29. शब्द अर्थ ही जान न पाए
    वाचक्नवी का वेश बनाए !
    क्या वेदना समझ पाओगे
    जग में जाते,नाम कमाने !
    माँ की दवा, को चोरी करते , बच्चे की वेदना लिखूंगा !
    श्रद्धा तुम पहचान न पाए, एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

    बहुत बढ़िया गीत !! सच है एकलव्य की कथा ,उस का दु:ख मन को बहुत व्यथित करता है

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  30. मनभावों की प्रवाहमयी सरिता..

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  31. "एकलव्य की व्यथा " इसी में सब कुछ समाहित कर दिया आपने | उत्कृष्ट संरचना भावों की |

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  32. आपकी किसी नयी -पुरानी पोस्ट की हल चल बृहस्पतिवार 05 -07-2012 को यहाँ भी है

    .... आज की नयी पुरानी हलचल में .... अब राज़ छिपा कब तक रखे .

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  33. माँ की दवा, को चोरी करते बच्चे की वेदना लिखूंगा !
    श्रद्धा तुम पहचान न पाए,एकलव्य की व्यथा लिखूंगा !

    बहुत उम्दा अभिव्यक्ति,,,उत्कृष्ट रचना,,,,सतीस जी

    MY RECENT POST...:चाय....

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  34. विषम परिस्थितियों की मनोदशा और मनोव्यथा का जीवंत और सजीव चित्रण।
    गुरु ही पार लगाएगा।

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    Replies
    1. शुक्रिया मनोज भाई ..

      Delete
  35. विषम परिस्थितियों में जीकर,मैं हंसकर श्रंगार लिखूंगा !


    आपकी सकारात्मक और जीवंत सोच हमेशा प्रभावित करती है.....

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  36. ..इस कविता में एक संकल्प और तड़प है जिससे लगता है कि आगे आने वाले दिनों में हमें और अच्छी रचनाएँ मिलेंगी !

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    Replies
    1. पता नहीं संतोष जी,
      अच्छी रचनाएं तब हैं जब लोग समझ पायें , तरह तरह से लोग कविताओं में भी शाब्दिक अर्थ तलाशते हैं यह कष्ट दायक है और अर्थ का अनर्थ निकलते हैं !
      आभार आपकी आशाओं के लिए !

      Delete
  37. .
    .
    .
    जो जो लिखने का आप वादा कर रहे हैं इस रचना में, वह सब आप लिखें... शुभकामनायें...


    ...

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    Replies
    1. स्वागत है आपका प्रवीण भाई ...

      Delete
  38. प्राण प्रतिष्ठा गुरु की कब
    से, दिल में करके बैठे हैं !
    काश एक दिन रुके यहाँ
    हम ध्यान लगाये बैठे हैं !
    जब तक तन में जान रहेगी, एकाकी की व्यथा लिखूंगा !
    कितने आरुणि मरे ठण्ड से,मैं उनकी तकलीफ लिखूंगा !
    अनुपम प्रस्तुति .बढ़िया प्रस्तुति सतीश जी .


    Read more: http://satish-saxena.blogspot.com/2012/07/blog-post.html#ixzz1zw4B30hY

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    Replies
    1. शुक्रिया वीरू भाई ...

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  39. बहुत ही संवेदनशील रचना "एकलव्य की व्यथा "...बहुत बढ़िया

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  40. व्यथा को वाणी और श्रद्धा को संकल्प देता गीतकार

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  41. हानि लाभ का लेखा करते कवि का मन कैसे जानेंगे ?
    तुम कितने भी अंक घटाओ,अनुत्तीर्ण का दर्द लिखूंगा !

    शिल्प,व्याकरण फेंक किनारे,मैं आँचल के गीत लिखूंगा !
    प्रथम परीक्षा के पहले दिन, निष्काषित का दर्द लिखूंगा !

    इतना सब कुछ ख़ास लिख तो दिया है !

    बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ ...

    ReplyDelete
  42. हानि लाभ का लेखा करते कवि का मन कैसे जानेंगे ?
    तुम कितने भी अंक घटाओ,अनुत्तीर्ण का दर्द लिखूंगा !
    बेहद सशक्‍त भाव ...आभार आपका

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  43. जड़बुद्धिता समझ में आये , ऐसे मंत्र विशेष लिखूंगा !
    तान सेन, खुद आकर गाएँ,मैं वह राग मेघ लिखूंगा !........बहुत बढ़िया

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  44. duniya ke dard ke alawa bhee duniya main bahut kuch hai ....


    jai baba banaras....

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  45. बहुत श्रेष्‍ठ गीत है सतीश भाई।

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  46. वाह, विषम परिस्थितियों से उपजे दर्द को कितनी भावुकता से शब्दों में ढाला है । आपकी लेखनी को नमन आप और सुंदर सुंदर गीत लिखते जायें ।

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  47. jiske hisse jitna dard aaya,
    use vah shabdo me dhalega....
    aaj ek bin guru (maa) ka baccha
    ek-lavy ka dard sawaarega.....!!

    badhayi.....ham intzaar karenge....

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  48. आपकी कविता पढ़ते पढ़ते खो जाता हु. बहुत आनंद आता है. प्रेरणा मिलती है की मैं भी कुछ ऐसा ही लिखु जी. जीवन के बहुत गहरे ,तीखे, अनुभवों को अपनी कविता मे बहुत ही सरल शब्दों मे व्यक्त करते है आप. शब्दों के साथ चित्र भी चलते रहते है . . . . बहुत खूब जी .

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    Replies
    1. शुक्रिया रावत भाई ,
      आपके शब्द प्रेरणास्पद हैं !

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  49. बहुत ही प्रशंसनीय कविता जो कई काथाओं के प्रति संवेदना जगाती चलती है. आप की यह कविता भा गई भाई जी.

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  50. मेरा ये मानना हैं कि हर इंसान इस जीवन में एकलव्य हैं ......और ये ही जीवन का सार भी हैं ...सादर

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  51. कल्प वृक्ष के टुकड़े करते ,
    जलधारा को दूषित करते !
    तपती धरती आग उगलती
    सूर्य तेज का, दोष बताते !
    जड़बुद्धिता समझ कुछ पाए,ऐसे मंत्र विशेष लिखूंगा !
    तान सेन, खुद आकर गाएँ,मैं वह राग मेघ लिखूंगा

    बहुत सुन्दर भावमय हृदय को आंदोलित करता गीत.
    पढकर भाव विभोर हो उठा हूँ.

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  52. बहुत ही मार्मिक एवं ह्रदय को छु लेने वाली रचना .एक पुत्र की टीस अपने अधूरे ज्ञान की आपने अच्छे तरीके से उकेरने में सफलता पाई है .मैंने आपको अपने ब्लाग के पठनीय सामग्री में जोड़ लिया है ,जिससे भविष्य में भी आपके सुन्दर रचनाओं का स्वाद ले सकूं.

    ReplyDelete
  53. बहुत ही मार्मिक एवं ह्रदय को छु लेने वाली रचना .एक पुत्र की टीस अपने अधूरे ज्ञान की आपने अच्छे तरीके से उकेरने में सफलता पाई है .मैंने आपको अपने ब्लाग के पठनीय सामग्री में जोड़ लिया है ,जिससे भविष्य में भी आपके सुन्दर रचनाओं का स्वाद ले सकूं.

    ReplyDelete
  54. बहुत सुन्दर रचना !

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  55. जीवन की सच्चाई और कविता के रूप में...बहुत ही सशक्त भाव प्रकट किये हैं, शुभकामनाएं.रामराम.

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  56. वाह सतीश जी गजब की कविता, गजब के अंदाज में ।

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  57. बेहतरीन रचना है आपकी

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  58. माँ की दवा, को चोरी करते , बच्चे की वेदना लिखूंगा !
    श्रद्धा तुम पहचान न पाए,एकलव्य की व्यथा लिखूंगा--क्या मोहक अभिव्यक्ति है।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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