Saturday, July 7, 2012

मीठे स्वर बिखराने वाले - सतीश सक्सेना

ठाठ तमाशे के, मेले  में , 
मीठे स्वर बिखराने वाले ,
गीत तुम्ही को ढूंढ रहे हैं 
नेह सुधा बरसाने वाले  !
कौन दिशा में तुम रहते हो,मधुर रागिनी गाने वाले ?
सिर्फ तुम्हारे मीठे स्वर से , गीतों में  झंकार उठेगी !


काश गीत मेरे तुम गाओ  ,   
सूखे  में, वसंत आ जाए ! 
मंद मंद शीतल  झोंकों से ,   
वृक्ष झूम,खुशबू बिखराएँ
कहाँ छिपे हो गाने वाले,रिमझिम धुन बरसाने वाले, 
तेरे अधरों पर आते ही , गीतों में  मुस्कान  उठेगी !  

कहाँ छिपी हो मीठी वाणी 
थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ  
बिखरे फूलों का एक गजरा,
अपने हाथ बना कर जाओ
कहाँ खो गए हो मधुबन में,मधुर गंध बिखराने वाले !  
सिर्फ तुम्हारे छू लेने पर, पतझड़ में भी महक उठेगी !


कहाँ खो गयी वीणावादिन
कैसे ऑंखें ,तुम्हे भुलाएं  !
कब से वीणा करे प्रतीक्षा 
आशा संग छोडती जाए !
कहाँ खो गए इस जंगल में, ह्रत्झंकार जगाने  वाले ! 
जलतरंग ध्वनि के गुंजन से, नवजीवन लहर उठेगी !

32 comments:

  1. कहाँ छिपी हो मीठी वाणी
    थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ
    बिखरे फूलों का एक गजरा,
    अपने हाथ बना कर जाओ

    नेह बरसाता प्यारा गीत .... आज ये सब लुप्त प्राय: सा हो रहा है ... आपका ये आवाहन सुकून देता है

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  2. भावपूर्ण रचना...

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  3. बहुत सुन्दर...
    मीठा मधुर आस भरा गीत...............

    सादर
    अनु

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  4. स्वर से स्वर मिलाने वाले कहाँ मिलगें ऐसे मीत,
    मीठे सुर बिखराने वाले कहाँ मिलेगें ऐसे गीत
    देश भक्ति पर लिखने वाले न जाने अब कहाँ गए
    कभी-कभी मिल जाता सुनने को मीठे२ सुंदर गीत,,,,,

    RECENT POST...: दोहे,,,,

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  5. मन को छूते शब्‍दो का संगम ... आभार

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  6. आज पहली टिप्‍पणी करने का अवसर मिला है। इसे कहते हैं बोअणी। अब देखें कैसी हुई हमारी बोअणी। बड़ा अच्‍छा गीत है, बधाई।

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    1. आपके आने से गीत महक गए अजीत जी ...

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  7. अजीत जी,
    मॉडरेशन लगाने से शुरू में यही भ्रम होता है कि कोई इसके पहले कोई टीप नहीं है,जबकि आपकी सातवीं टीप निकली !

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  8. यह रही आग से कुंदन बनकर निकली स्वर्णिम-कविता !

    ...आह्वान करते व स्वयं को जगाते हुए भाव हैं इसमें !

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  9. कहाँ छिपी हो मीठी वाणी
    थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ
    बिखरे फूलों का एक गजरा,
    अपने हाथ बना कर जाओ
    कहाँ खो गए हो मधुबन में,मधुर गंध बिखराने वाले !
    मात्र तुम्हारे छूने भर से , सूखे फूल महक जायेंगे !.......... बहुत सुन्दर भाव

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  10. कहाँ छिपी हो मीठी वाणी
    थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ
    बिखरे फूलों का एक गजरा,
    अपने हाथ बना कर जाओ
    कहाँ खो गए हो मधुबन में,मधुर गंध बिखराने वाले !
    मात्र तुम्हारे छूने भर से , सूखे फूल महक जायेंगे !

    हमेशा की तरह बहुत सुंदर !!!

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  11. जिन्दगी का मर्म समझाते ...आपके गीत !
    आभार!

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  12. aapka ye neh bhara geet padh kar aapka wo pyara sa bade bhaiya jaisa ahsaas wala chehra deekh gaya...:)
    Satish sir.... bahut khub!

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    Replies
    1. आभारी हूँ मुकेश इस अपनत्व के लिए...

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  13. मीठी वाणी पर सुंदर रचना...
    मीठी वाणी पर मेरे कुछ माहिया छंद...

    आखर-मोती बिखरें
    मधुरिम भाव सजे
    मन अम्बर-सा निखरे|

    है जग की रीत यही
    मीठी वाणी से
    दिल में है प्रीत बही|

    कुछ खर्च नहीं होता
    मीठा बोल सदा
    स्नेहिल रिश्ते बोता|

    सादर

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    Replies
    1. आपका स्वागत है ...
      आभार !

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  14. प्यारा गीत है।
    शीर्षक भी सही है...'मीठे स्वर बिखराने वाले सतीश सक्सेना।':)

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    Replies
    1. आभार आपकी प्यारी नज़रों का देवेन्द्र भाई !

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  15. कहाँ छिपी हो मीठी वाणी
    थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ
    बिखरे फूलों का एक गजरा,
    अपने हाथ बना कर जाओ
    कहाँ खो गए हो मधुबन में,मधुर गंध बिखराने वाले !
    मात्र तुम्हारे छूने भर से , सूखे फूल महक जायेंगे !
    बढिया रूमानी प्रस्तुति .


    Read more: http://satish-saxena.blogspot.com/2012/07/blog-post_07.html#ixzz20APDtYvU

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  16. बहुत प्यारा सा मीठा गीत..

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  17. सब अच्छा अच्छा माँगा है, मिठास भले क्यों न आयेगी?

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  18. बहुत सुंदर भाव ...!!

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  19. बहुत सुंदर गीत ...

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  20. अनूठा स्वर संगम .. वाह

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  21. अनूठा स्वर संगम .. वाह

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  22. मीठी वाणी के लिए प्रकृति से आग्रह है तो समझिए वह आ रही है. भावों भरी कविता बहुत अच्छी लगी सतीश जी.

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  23. बहुत -बहुत सुन्दर गीत:-)

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  24. हर गीत ...पहले से भी अधिक जानदार होता हैं ....बहुत बढिया भाई जी

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  25. वाह! अति सुन्दर.
    आपके गीत भाव विभोर कर देतें हैं,सतीश भाई.

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  26. अद्भुत !!

    कहाँ छिपी हो मीठी वाणी
    थोड़े पुष्प ,चढ़ाकर जाओ
    बिखरे फूलों का एक गजरा,
    अपने हाथ बना कर जाओ

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  27. गीत जब इतने मधुर हो कैसे ना गुनगुनाए कोई
    अक्षर अक्षर मोती की माला कैसे ना बनाए कोई ।

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  28. बहुत प्यारा सा मीठा गीत..

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- सतीश सक्सेना

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