Monday, July 8, 2013

निर्णयकारी मुस्कान तेरी, निश्छल, निर्मल, निर्झरिणी सी -सतीश सक्सेना

आनंदमयी  ऐसी  जैसी निकली, निखरी, भू-तरिणी सी,
निर्णयकारी मुस्कान तेरी,निश्छल निर्मल निर्झरिणी सी !

ध्रुवनंदा सी विशुद्ध मोहक ,मंदिर  में,पद्मज्योति जैसी !
अनुराग मयी जब से आयी,जीवन में बही ,मंदाकिनि सी !

नैसर्गिक प्रतिभा,की स्वामिनि,मेधावी,वीणा वादिनि सी !
कंठस्थ ऋचाएं, मद्धम स्वर, दिखती है,क्षीर केसरी  सी !

तस्बीह के  दानों जैसी  वह ,लगती है  सदा, पाकीज़ा  सी  !
मरियम सी लगे,सीता सी लगे,लगती है कभी ज़हरा जैसी !

सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी  !
घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी  सी  !


60 comments:

  1. Replies
    1. bahut sundar .aaj aapka blog mil hi gaya .....sundar rachna hardik badhai aapko follow kar liya hai ab :)

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  2. यह अनहद नाद और नैसर्गिक मुस्कान कहाँ से भाई -यह तो लौकिक नहीं है !

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  3. वाह वाह बहोत खुब ....आनंदमयी!

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  4. वाह...
    सुन्दर...अति सुन्दर.........

    सादर
    अनु

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  5. आदरणीय सतीश जी,
    निः शब्द करती रचना है , आप ही रच सकते हैं। आभार हम सभी के साथ साझा करने के लिए।


    सादर
    इंदु

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  6. बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  7. आदरणीय सतीश जी,
    निः शब्द करती रचना है , आप ही रच सकते हैं। आभार हम सभी के साथ साझा करने के लिए।


    सादर
    इंदु

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  8. वाह बहुत ही मनमोहक शब्दों में रची पंक्तियाँ....

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  9. एक एक शेर, एक एक शब्द मोतियों जैसा गुंथा हुआ है. बिल्कुल अलौकिक सा.

    आपकी सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक.

    रामराम.

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  10. बार बार पढने का मन कर रहा है. ऐसी रचनाएं अनायास ही जन्म ले लेती हैं.

    रामराम.

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  11. सज़दे में झुके सिर,मस्जिद में ,मंदिर में नमे,गंगा जैसी !
    घंटियों, अज़ान के आवाहन ,कानों में मधुर गुरुवाणी सी !

    वाह !!! बहुत उम्दा मन मोहक प्रस्तुति,,,

    RECENT POST: गुजारिश,

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  12. मनमोहक .......अति सुंदर रचना

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  13. अति सुन्दर.

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  14. अति सुन्दर.

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  15. मुस्कान किसे नहीं अच्छी लगती
    और जब वरदान में मुस्कान मिले तो बात ही कुछ और है
    बहुत ही सुन्दर
    सादर आभार !

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  16. बहुत बार मन होता है कोई अच्छी-सी रचना लिखी जाय लेकिन शब्दों के साथ कई बार भाव साथ ही नहीं देते किन्तु कभी कभी अनायास ऐसी रचना लिखने से ज्यादा मै कहूँगी झर जाती है ह्रदय से,कुछ ऐसे ही इस रचना में पढने को मिला है .....एक उत्कृष्ट रचना पढ़ने का आनंद ही कुछ और होता है .....शब्द योजना भाव संयोजन सब कुछ उत्कृष्ट लगा, मन प्रसन्न हुआ पढ़कर ....बहुत बहुत बधाई सतीश जी,

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    1. आपके ह्रदय से निकले शब्द उत्साहवर्धक हैं ..
      वाकई कई बार शब्द झर जाते हैं ! यह रचना खुद मुझे भी अच्छी लगी है ..
      आभार !

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  17. ध्रुवनंदा सी विशुद्ध मोहक ,मंदिर में, पद्मज्योति जैसी !
    अनुराग मयी जब से आयी, जीवन में बही ,मंदाकिनि सी !
    सुन्दर पंक्तियाँ ...प्रेरक, भावपूर्ण रचनाओं के भाव निर्झर यूँही बहते रहे
    आभार ...!

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  18. बहुत सुंदर रचना,
    आपके ब्लाग पर आना ही एक खुशी देता है।
    रचना पढ़ने के बाद सच में आनंद की ऐसी अनुभूति होती है जिसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता है। बहुत बढिया..

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  19. सुन्दर शब्दों में गुंथी हुई मोहक रचना.

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  20. अति सुंदर ..... मनमोहक भाव

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  21. waah ...bahut sundar rachna ...!!

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  22. सुन्दर शब्दों से सुसज्जित सुरमयी अलंकृत रचना।

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  23. अच्छी लगी यह रचना।

    आनंदमयी शब्द पर चौंका, माँ आनंदमयी को समर्पित जैसा लगा। शायद आप परिचित न हों, नेट में यह लिंक मिला...http://www.dharmchakra.com/detail.php?view=1&id=3

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    Replies
    1. आनंदमयी का शाब्दिक अर्थ लें देवेन्द्र भाई ..
      यहाँ माँ आनंदमयी से कुछ लेना देना नहीं है !

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  24. वाह बहुत ही सुंदर,
    मर्मस्पर्शी

    यहाँ भी पधारे ,
    रिश्तों का खोखलापन
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_8.html

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  25. अलौकिक मुस्कान का शब्द चित्र खींच दिया ... बहुत सुंदर

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  26. अनायास ही मिली ऐसी अनुभूतियाँ भी एक उपलब्धि है । तभी तो वह काव्य बन कर प्रकट हुई है ।

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  27. कसम खुदा की ऐसी ही मुस्कुराहटें देख आया हूँ भगवान के घर में जहां स्वयं भगवान ही होस्ट था उस जगह का नाम है -पीस विलेज ,ए ब्रह्माकुमारीस री -ट्रीट सेंटर ,पता है ,
    54 ,O'Hara Road (at Route 23 A ).Haines Falls ,New-York 124 36
    Phone :518 -589 -50000
    peace-village@bkwsu.org

    लेकिन आपने वहां जाए बगैर इतनी सुन्दर रचना लिख दी बुद्धि की आँखों से सचमुच त्रिनेत्रीं हैं आप .

    तस्बीह के दानों जैसी वह , लगती है सदा , पाकीज़ा सी !
    मरियम सी कभी,सीता सी कभी और चाहे बनना ज़हरा सी !

    हाँ ऐसी इच हैं ये सब शिव -शक्तियां .इनमें अमरीकी भी हैं .

    ॐ शान्ति .




    बहुत खूब .

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    1. आपको बधाई वीरू भाई !!

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  28. मन को गहराई तक छू गयी .बहुत सुन्दर भावनात्मक अभिव्यक्ति आभार इमदाद-ए-आशनाई कहते हैं मर्द सारे आप भी जानें संपत्ति का अधिकार -5.नारी ब्लोगर्स के लिए एक नयी शुरुआत आप भी जुड़ें WOMAN ABOUT MAN हर दौर पर उम्र में कैसर हैं मर्द सारे ,

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  29. निर्मल शब्द . पढ़ के बहुत अच्छा लगा.

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  30. बहुत दिनों बाद अच्छा सा शब्दचित्र पढ़ा देखा और महसूस किया

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  31. निश्मुछल स्कान की दिव्यता को कितने कौशल से व्यक्त कर दिया -आभार !

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  32. सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी !
    घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी सी !

    सुप्रभात ह्रदय को छू देने वाली गरिमा से भरी सुन्दर छवि लिए कल्पना जो साकार है यही बस कभी कभी ही अनुभूत होते है .
    आनंद आनंद और आनंद

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  33. कविता सहज ही मुस्कराहट लिए आती है ...

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  34. अच्छा प्रयास है,
    लिखते रहिये ...

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    Replies
    1. आप भी लिखा करें प्रभू ...

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  35. नैसर्गिक प्रतिभा, की स्वामिनि, मेधावी ,वीणा वादिनि सी ,
    कंठस्थ ऋचाएं मद्धम स्वर ,दिखती है ,क्षीर औ केसर सी !

    तस्बीह के दानों जैसी वह , लगती है सदा , पाकीज़ा सी !
    मरियम सी कभी,सीता सी कभी और चाहे बनना ज़हरा सी !

    सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी !
    घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी सी !

    बढ़िया प्रस्तुति -शुभकामनायें-

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  36. बहुत खुबसूरत रचना ....

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  37. बहुत ही बेहतरीन लिखा है सतीश भाई... ज़बरदस्त!

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  38. सुन्दर गीत है आदरणीय सतीश जी-
    आभार आपका

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    Replies
    1. आपके शब्द महत्वपूर्ण हैं रविकर भाई ! आभार आपका ..

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  39. हँसना ही क्या ...आज जीवन जीना भी बहुत मुश्किल सा हो गया

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  40. सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी !
    घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी सी !

    बढ़िया प्रस्तुति

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  41. तस्बीह के दानों जैसी वह ,लगती है सदा, पाकीज़ा सी !
    मरियम सी कभी,सीता सी कभी और चाहे बनना ज़हरा सी !

    वाह ! बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति , लाजवाब

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  42. बहुत ही सुन्दर रचना ... एक मुस्कान भी क्या क्या रच सकती है ... लाजवाब सतीश जी ...

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  43. वाणी में आत्मीयता हो, प्यार हो, सहायता करने की उत्कण्ठा हो, तो निश्चय ही आपके स्वप्न साकार होंगे। बहुत सुन्दर पंक्तियाँ...

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  44. सज़दे में झुके सिर, मस्जिद में, मंदिर में नमे ,गंगा जैसी !
    घंटियों ,अज़ान के आवाहन, कानों में मधुर गुरुवाणी सी !

    सुन्दरम मनोहरम .ॐ शान्ति

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  45. बहुत सुन्दर...

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  46. इधर आ नहीं पाया पर क्या जबरदस्त लिखा है आप ने....वाह... उम्दा, बेहतरीन अभिव्यक्ति...बहुत बहुत बधाई...

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  47. Very sweat lekhani hai sir, thanks for shareing.

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  48. तस्बीह के दानों जैसी वह ,लगती है सदा, पाकीज़ा सी !
    मरियम सी लगे,सीता सी लगे,लगती है कभी ज़हरा जैसी --इस जहाँ की नहीं लगती वो --विलक्षण अनुभूति. . खूबसूरत शब्द।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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