Sunday, August 3, 2014

कभी कभी बेचारा मन -सतीश सक्सेना

माँ का रहा, दुलारा मन !
उन आँखों का तारा मन !

कितनी मायूसी में सोया 
उनके बिन बेचारा मन !

चंदा सूरज से लड़ आया
ऐसे कभी  न हारा मन !

कैसे बेमन होकर माना  
माँ ममता का मारा मन 

जाने किसको ढूंढ रहा है    
गलियो  में बंजारा मन !

37 comments:

  1. बहुत सुंदर .......

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  2. मन तो चंचल है रुकता कहाँ
    अभी यहाँ तो अगले पल कहाँ ? ....सुन्दर प्रस्तुति |

    : महादेव का कोप है या कुछ और ....?
    नई पोस्ट माँ है धरती !

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  3. खूबसूरत और मासूम पंक्तियां ..प्यारा न्यारा मन

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  4. छोटी बहर की लहर, बहुत खूबसूरत है।

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  5. चंदा सूरज से लड़ आया
    ऐसे कभी न हारा मन !
    बहुत सुन्दर गज़ल बधाई

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  6. इक कविता चुभती सी दुखती सी

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  7. सुंदर प्रस्तुति...
    दिनांक 04/08/2014 की नयी पुरानी हलचल पर आप की रचना भी लिंक की गयी है...
    हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...
    हलचल में शामिल की गयी सभी रचनाओं पर अपनी प्रतिकृयाएं दें...
    सादर...
    कुलदीप ठाकुर

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  8. शब्द संयोजन भाव संयोजन बड़ी खूबसूरती से किया है !

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  9. सुंदर प्रस्तुति , आप की ये रचना चर्चामंच के लिए चुनी गई है , सोमवार दिनांक - 4 . 8 . 2014 को आपकी रचना का लिंक चर्चामंच पर होगा , कृपया पधारें धन्यवाद !

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  10. मन को समझाना पडता है , मन ही तो है मित्र हमारा ।

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  11. बहुरत ही सुन्दर भाव लिए अच्छी ग़ज़ल ... दिल के तारों को छूते हुए ...

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  12. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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    मोडरेटर
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  13. सुन्‍दर शब्‍द संयोजन .... के साथ बेहतरीन अभिव्‍यक्ति
    सादर

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  14. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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  16. bechara man...kabhi n wash me aaya...kabhi baz n aaya....sundar rachna..

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  17. माँ पर सुन्दर सुरभित गीत ,बहुत सुन्दर

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  18. bahut khubsurt ...नमस्ते भैया

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  19. बेमन हुए बिना अमन भी तो नहीं मिलता..सुंदर रचना !

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  20. लाजवाब रचना...

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  21. बहुत सुन्दर

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  22. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

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  23. चंदा सूरज से लड़ आया
    ऐसे कभी न हारा मन !
    ...वाह...बहुत सुन्दर प्रस्तुति...

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  24. कितनी मायूसी में सोया
    उनके बिन बेचारा मन !
    चंदा सूरज से लड़ आया
    ऐसे कभी न हारा मन !

    बहुत सुन्दर

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  25. कितनी मायूसी में सोया
    उनके बिन बेचारा मन !
    चंदा सूरज से लड़ आया
    ऐसे कभी न हारा मन !

    बहुत सुन्दर

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  26. बहुत सुंदर ..

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  27. वाह बहुत खूब ॥

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  28. माँ और मन दोनों पर ,सुन्दर मनन !

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  29. वाह कहूँ कि आह कहूँ...क्या जाने मैं क्या कहूँ..

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  30. प्यारा सा मन :)

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- सतीश सक्सेना

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