Saturday, August 30, 2014

आखिरी फैसला - सतीश सक्सेना

"बेटा मैंने वह ऍफ़ डी  तुड़वा  कर सारे पैसे निकाल लिए तुम भी अपनी बीबी के साथ हिल स्टेशन जा सकते हो....."
 

              उसी दिन दे देते तो दोनों भाइयों के साथ ही चला जाता न  तब सबके सामने इतनी गाली गलौज  की  जरूरत नहीं पड़ती उस दिन तो दबाये बैठे रहे कि आखिरी ऍफ़ डी है ! लाइए पैसे, भाइयों को मत बोलना कि मैंने आपसे लिए हैं ! नहीं तो वह मुझसे अपना हिस्सा लड़ के ले लेंगे ! आज मन करे तो बड़े भाई के कमरे में ऐ सी चलाकर सो जाओ अच्छी नींद आएगी , मैं किसी को नहीं कहूँगा ! जीने के नीचे गर्मी ज्यादा है !

"नहीं पांच छह सालों में मेरी अब मेरी आदत पड़ गयी है , मैं यही ठीक हूँ !"

                                                  ***********
                    जैसा आपसे बात हुई थी सारे अमाउंट का चेक आपकी बैंक में जमा करा दिया गया है यह रही रसीद ! अब आप यहाँ यहाँ दस्तखत कर दीजिये मगर अब आप अकेले कैसे रहेंगे  ?

          "मैंने इस घर के सामने वाले मकान में एक कमरा किराए  पर ले लिया है , काम करने को मेरी पुरानी नौकरानी रहेगी ! इन लड़कों ने धीरे धीरे मकान के तीनो कमरे कब्ज़ा लिए , ड्राइंग रूम में मेरे सोने से घर में इन्फेक्शन फैलता था सो पिछले २ वर्ष से सीढियों के नीचे मेरी खाट डाल दी, अब यह तीनो मेरे मरने का इंतज़ार कर रहे हैं ! मुझे कम पैसों की चिंता नहीं जो तुमने इस मकान के बदले दिए हैं मेरे बुढ़ापे के लिए काफी हैं ! रही बात मकान की , सो मैंने अपने पैसों से बनाया था , उसी मकान में मेरे इन लालची लड़कों ने , धीरे धीरे मुझे सीढियों के नीचे  तक पंहुचा दिया ! तुम तीनों कमरों का सारा सामान निकाल कर सड़क पर रख दो और बाहर एक चौकीदार रख दो, जब तक यह तीनों बापस आएं !"

वे तीनों आपसे लड़ेंगे बाबूजी !

"मुझे परवाह नहीं, पुलिस एस पी से मिल चूका हूँ उन्होंने मेरी रिपोर्ट दर्ज कर ली है किसी भी गलत हालत में तीनों अपनी बीबियों के साथ जेल जायेंगे,मैं अब डरता नहीं !"

20 comments:

  1. faisala to yesa hi hona chahiye...jb beten bap na samjhen.....

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  2. सही किया 1 जैसे को तैसा होना ही चाहिये1

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  3. जि़ंदगी की किताब के आखि़री पन्ने कितने डरावने होते हैं !
    आजकल की सच्चाई !

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  4. बहुत कम लोग इतना सोच पाते हैं करना दूर की बात है होना यही चाहिये ।

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  5. bahut acchha faisala .....sundar prastuti ....

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  6. जिंदगी की तल्ख़ सच्चाईओं से रूबरू कराती कड़वी दास्ताँ, आपने जो फैशला लिया वह आज के वक्त की आवाज के मुताबिक है , ज़िन्दगी जीने का नाम है , मुस्कुराते हुए जीने का ज़ज्बा बनाए रखिये| नेकदिल इन्सान की उपरवाला मदत करता है | सादर

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  7. अब तो सबको पहले से ही सँभल जाना चाहिये -शुरू से ही उनकी अपेक्षाएँ न बढ़ें और अपनी इच्छाओं का मान बना रहे - यही न्यायोचित होगा . बात कंट्रोल में रहेगी ,और वे सिर पर चढ़ने की हिम्मत नहीं करेंगे .

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  8. ऐसे हालात में यही उचित फैसला बनता है !

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  9. आख़िरी फ़ैसला.....अब यही बदलाव होना चाहिए ! बढ़िया !

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  10. इस सच्चाई को समय रहते ही समझ लेना अच्छा है ... उचित फैंसला ...

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  11. आखिर कब तक घुटता रहेगा अपनों के बीच रहकर कोई बेगाना बनकर ...
    बिलकुल सही कठोर निर्णय लाजिमी है

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  12. सही चित्र खींचा है आपने

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  13. पढ - लिख के दाई - ददा के आघू झन इतरा
    काल तोरेच लइका हर तो तोला अडहा कइही ।
    मर्मस्पर्शी रचना ।

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  14. वाह...सुन्दर पोस्ट...
    समस्त ब्लॉगर मित्रों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाएं...
    नयी पोस्ट@हिन्दी
    और@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ

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  15. ऐसे हालात में यही उचित फैसला बनता है !

    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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