Friday, February 9, 2018

उम्मीदें कुछ कम कर बेटा -सतीश सक्सेना

अर्थ अनर्थ है,अक्सर बेटा !
शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !

क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में ,
धड़कन,न तलाश कर बेटा !

सूख गए , तालाब प्यार के
अब न रहे, पद्माकर बेटा !

इस निष्ठुर जंगल में तुमको
मिलें खूब , आडम्बर बेटा !

अच्छे दिन जुमले हैं केवल,
उम्मीदें कुछ कम कर बेटा !


13 comments:

  1. वाह ! सुंदर रचना..वाकई अच्छे दिन वे ही होते हैं जब हमें दूसरों से कोई उम्मीद ही नहीं होती..अपने से जो हो जाये वह कार्य करते रहना है, हर भारतीय यदि सजग होकर अपना कर्त्तव्य निभाएगा तभी तो अच्छे दिन आयेंगे.

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  2. जी सही पकड़े हैं। उम्मीदें अब कर नहीं रहे हैं बस जमा कर रहे हैं :)

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  3. उम्मीदें कुछ कम कर बेटा !
    और
    तू ख़ुद भी तो कुछ कर बेटा !

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  4. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १२ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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    1. आभार आपका रचना पसंद करने को !

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  5. बहुत ख़ूब सतीश सक्सेना जी. आपका बेटा कह रहा है -
    जुमले फेंकू अगर नहीं तो, धोखा देना मुश्किल होगा,
    अगर हक़ीक़त दिखलाऊंगा, जनमत पाना मुश्किल होगा.
    पूज्य पिताजी, राजनीति में, झूठ हमेशा फल देता है,
    सत्य-अहिंसा का निर्वाहन, इस धंधे में मुश्किल होगा.

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    1. गज़ब लिखा है मंगलकामनाएं आपकी प्रभावी कलम को !

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  6. बहुत ही प्यारी रचना

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  7. वाह!!बहुत खूब!!

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  8. सच और सटीक
    सादर

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  9. वाह क्‍या खूब लिखा है ...सूख गए , तालाब प्यार के
    अब न रहे, पद्माकर बेटा !

    इस निष्ठुर जंगल में तुमको
    मिलें खूब , आडम्बर बेटा !

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  10. निमंत्रण :

    विशेष : आज 'सोमवार' १९ फरवरी २०१८ को 'लोकतंत्र' संवाद मंच ऐसे ही एक व्यक्तित्व से आपका परिचय करवाने जा रहा है जो एक साहित्यिक पत्रिका 'साहित्य सुधा' के संपादक व स्वयं भी एक सशक्त लेखक के रूप में कई कीर्तिमान स्थापित कर चुके हैं। वर्तमान में अपनी पत्रिका 'साहित्य सुधा' के माध्यम से नवोदित लेखकों को एक उचित मंच प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध हैं। अतः 'लोकतंत्र' संवाद मंच आप सभी का स्वागत करता है। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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