Friday, May 24, 2019

भारत में उद्देश्यहीन विपक्ष का कोई भविष्य नहीं -सतीश सक्सेना

मोदी -शाह की जोड़ी को आखिरकार शानदार बहुमत मिला और देश के सत्ता सिंहासन पर अगले पांच वर्षों तक
बैठने का जनादेश भी , इस नाते मैं उन्हें मुबारकबाद देता हूँ और आशा करता हूँ कि वे विरोधियों का विश्वास पाने के प्रयत्न करने के साथ, देश के हर वर्गों को साथ लेकर, चलने का प्रयास करेंगे ! पिछले पांच वर्षों में कांग्रेस ने अपनी डूबती छवि सँभालने का हर संभव प्रयास किया और राहुल की छवि में काफी निखार भी आया मगर कांग्रेस के आलसी और चापलूस कार्यकर्ताओं पर भाजपा के प्रतिबद्ध, वचनबद्ध एवं उद्देश्य के प्रति समर्पित कार्यकर्ता बहुत भारी पड़े, सोने पर सुहागे का कार्य, धन की कोई कमी न होना था इसके होते , प्रचार में भरपूर शक्ति लगाई गयी !

भाजपाई कार्यकर्ताओं के मन में कूट कूट कर असुरक्षा भर दी गयी है, उनमें एक साथ चलो , लाठी चलाना सीखो , अपने लोगों की मदद करने में सबसे आगे रहो , संगठन में शक्ति है , की भावना को सामान्य जन ने सहज भाव से अपना लिया नतीजा हर मोहल्ले में आरएसएस की शाखाएं नजर आने लगीं जबकि अन्य दलों का उद्देश्य, धन लाभ हेतु, ऐन केन प्रकारेण इलेक्शन जीतना ही रहा !


बेहतर विपक्ष की भूमिका निभाने के लिए कांग्रेसियों को चाहिए कि अपनी पार्टी से एक निर्मम मारक क्षमता वाला एक चतुर नेता तलाश करें और उसे अपना प्रेसिडेंट बनाकर समस्त शक्तियां हस्तांतरित करें ! हर हालत में सत्ता केंद्र गांधी परिवार से हस्तांतरित होना चाहिए ! इलेक्शन जीतने के लिए चालाकी , निर्ममता , निडरता एवं धनपतियों का साथ आवश्यक है और यह सब गुण गाँधी परिवार में किसी के पास नहीं !

अगली लड़ाई में विपक्ष को एक और अमित शाह मोदी तलाशना होगा अन्यथा अगले १५ वर्षों तक भारत में विपक्ष जूते ही खाता रहेगा !

अरविन्द केजरीवाल का मैं शुरुआत से ही समर्थक रहा हूँ मेरी नजर में वे भृष्ट नहीं हैं मगर उनके फैसले अव्यवहारिक हैं जो राजनीति में फलीभूत नहीं हो सकते सो उनकी किस्मत में निस्संदेह पराजय ही आएगी , मेरे विचार में वे भारतीय राजनीति के योग्य नहीं उन्हें अगर अपमान और कष्टों से बचना है तो राजनीति छोड़कर चौकीदार की भूमिका अपनानी चाहिए , वे निस्संदेह बेहतरीन चौकीदार सिद्ध होंगे !

Friday, May 10, 2019

यज्ञ सदियों तक चले, जडबुद्धि अभ्युत्थान में -सतीश सक्सेना

साधू सन्यासी हमारे , लार टपकाते दिखें
कौन आएगा नमन को ,मेरे हिंदुस्तान में ?

धूर्तों ने धन कमाने , घर में, कांटे बो दिए !
रोयेंगी अब पीढ़िया,परिवार पुनुरुत्थान में !

कौम सारी हो चुकी बदनाम,बहते खून से ,
कितनीं पीढ़ी बीत जायेंगीं इसी भुगतान में !
 
जाहिलों की बुद्धि, कैसे शुद्ध हो इस देश में
यज्ञ सदियों तक चले जडबुद्धि अभ्युत्थान में !

इस मदारी राज में,सब दिग्भ्रमित से हैं खड़े
लडखडाती मूर्ख जनता,राज ध्वजोत्थान में !

Thursday, May 9, 2019

जीवन चलने का नाम -सतीश सक्सेना

नमस्ते सर , अजय कुमार बोल रहा हूँ  ...कल सुबह आपके साथ दौड़ने का मन है, जहाँ कहें वहां आ जाऊंगा ...
मेरे साथ अजय कुमार दौड़ेंगे ? क्यों बुड्ढे का मजाक बना रहे हो यार  ...?  और वाकई अजय सुबह सवा पांच बजे फरीदाबाद से चलकर मेरे घर के दरवाजे पर थे !


अजय कुमार NCR के जबरदस्त रनर्स में शुमार होते हैं , और वे अक्सर अल्ट्रा रन में भाग लेते हैं , उनका मैं प्रशंसक इसलिए हूँ कि वे कम उम्र में ही हैवी डायबिटीज के शिकार हुए और उन्होंने दौड़ना शुरू करके उसे हराने में कामयाबी प्राप्त की , आज वे एक सफल धावक हैं और 50 km की शानदार दौड़ लगाने में कामयाब हैं !
अजय कुमार एक बेहतरीन चित्रकार भी हैं और उनकी प्रदर्शनी भी लग चुकी हैं , उनका एक चित्र कमेन्ट लाइन में देखिएगा !

आज के बुरे समय में जब इंसान अपने शरीर का उपयोग ही भूल चूका है , अपने शरीर के प्रति जागरूक रहना बेहद आवश्यक है ! अक्सर रिटायरमेंट उम्र होने के आसपास ही अपने मित्रों की मृत्यु की खबर सुनना आम बात हो गयी है और यह अक्सर हार्ट अटैक से होती हैं , अधिकतर यह साथी उस समय ओवरवेट और डायबिटीज , ब्लडप्रेशर के रोगी होते हैं ! अपने मित्रों की मौत की खबर सुनकर हम सिर्फ एक शब्द ही कहते हैं कि यह भी कोई उम्र थी जाने की , और अगले दिन घर में मीठी स्वादिष्ट इलायची पड़ी चाय के साथ आलू परांठे खा रहे होते हैं !


मुझे बेहद अफ़सोस तब होता है कि अक्सर असमय जाने  वाले लोग बेहतरीन प्रभामंडल युक्त होते हैं जिनके आसपास जी हजूरी तथा हाँ जी हाँ जी कहने वालों की भीड़ होती है और यह गुरु गौरव के साथ, तमाम सामाजिक उपयोग का विशुद्ध ज्ञान भी, नियमित बाँटते रहते हैं , ऐसे विद्वान भी अपने शरीर की चीत्कार सुनने में असमर्थ होते हैं और उसका एकमात्र कारण आलस्य तथा जीभ पर कंट्रोल न करना मात्र है जिसके कारण वे अपने नजदीक आती हुई निश्चित मृत्यु की आहट को सुनने में विफल रहते हैं !

मैं जब आलस्य से घिरता हूँ तब अजय कुमार जैसे कम साधन युक्त लोगों से सबक और शक्ति लेता हूँ , जो अकेले बिना किसी दवा के डायबिटीज को हारने में कामयाब हुए हैं अवसाद युक्त क्षणों में भी अक्सर मैं उन्हें हँसते देखता हूँ तब मुझे उनसे शक्ति मिलती है ! 



Tuesday, May 7, 2019

क्या जानों सरकार हमारे बारे में -सतीश सक्सेना

कितने  शिष्टाचार , हमारे बारे में !
क्या समझे हो यार हमारे बारे में !

इसीलिये अब, तुमसे दूरी रखते हैं 
दिल न दुखे सरकार,हमारे बारे में !

हमको रोज परिंदे ही बतला जाते 
कितने हाहाकार  , हमारे बारे में !

जो वे चाहें करें फैसला,किस्मत का  
है उनका अधिकार, हमारे बारे में !

मरते दम तक तुम्हें नहीं समझायेंगे 
कितने गलत विचार हमारे बारे में !

Thursday, April 25, 2019

इस्लाम की छाती पे, ये निशान रहेंगे -सतीश सक्सेना

लाशों पे  नाचते तुम्हें , यमजात कहेंगे !
शायर और गीतकार भी बदजात कहेंगे !

कातिल मनाएं जश्न,भले अपनी जीत का
इस्लाम की छाती पे  , इन्हें दाग़ कहेंगे !

इन्सान के बच्चों का खून,उनकी जमीं पर
रिश्तों की बुनावट पे,हम आघात कहेंगे !

दुनियां का धर्म पर से, भरोसा ही जाएगा !
हम दूध मुंहों के रक्त से, स्नान  कहेंगे !

जब भी निशान ऐ खून,हमें याद आएंगे
इंसानियत के नाम , एक गुनाह कहेंगे !

Monday, April 15, 2019

कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना -सतीश सक्सेना

इस हिन्दुस्तान में रहते,अलग पहचान सा लिखना !
कहीं गंगा किनारे बैठ कर , रसखान सा लिखना !

दिखें यदि घाव धरती के,वहां ऋणदान सा लिखना
घरों में बंद,मां बहनों पे,कुछ आसान सा लिखना !

किसी के शब्द शैली को चुरा के मंच कवियों औ ,
जुगाडू गवैयों,के बीच कुछ प्रतिमान सा लिखना !

तेरी भोगी हुई अभिव्यक्ति ,जब चीत्कार कर बैठे
बिना परवा किये तलवार की,सुलतान सा लिखना !


Friday, April 12, 2019

आजादी का नाम कन्हैया जीतेगा -सतीश सक्सेना

घर घर से आवाज कन्हैया जीतेगा !
कौओं में परवाज़ ,कन्हैया जीतेगा !

बुलेट ट्रेन,स्मार्ट सिटी के झांसों में 
फंदे काट तमाम,कन्हैया जीतेगा !

नहले दहले, अंतिम  ठठ्ठा मार रहे
मक्कारों पर गाज़,कन्हैया जीतेगा !

भारत मां घायल है ,इन गद्दारों  से , 
जनमन लेके साथ,कन्हैया जीतेगा !

लोकतंत्र स्तम्भ बहुत , बर्बाद हुए , 
आजादी का नाम कन्हैया जीतेगा !

धोखा,झूठ,छलावा,भले मुखातिब हों,
है सच की आवाज,कन्हैया जीतेगा।

Tuesday, April 9, 2019

आदत भोजन की -सतीश सक्सेना

आज चौथा दिन है पारंपरिक भोजन का त्याग किये , रोटी , दाल , चावल, सब्जियां बंद किये हुए , और आश्चर्य है कि मन एक बार भी नहीं ललचाया और न भूख लगी न कमजोरी ...शायद इसलिए कि अपने आपको चार दिन पहले बे इंतिहा गालियाँ दी थीं , अपना वजन देखने के बाद अगर उस दिन मशीन न देखता तो पता ही न चलता कि मेरा वजन पिछले कुछ माह में सामान्य से ४ किलो अधिक हो चुका है ! शीशे में चमकती शक्ल दिखती है तोंद नहीं !
घर में बैठना एक अभिशाप है ख़ास तौर पर बड़ी उम्र वालों के लिए , सुबह नाश्ता ९ बजे से पहले , 12 बजे दाल चावल रोटी सब्जी अचार और चटनी के साथ, चार बजे लोंग इलायची की चाय के साथ श्रुस्बेर्री चाय बिस्कुट , 6 बजे लॉन में बैठकर मेहमानों के साथ चाय और आठ बजे स्वादिष्ट डिनर और तोंद पर हाथ फिराकर सो जाना, और सबसे बड़ी बेवकूफी यह है कि उम्र के नाते हमने खुद अपने हाथ से कुछ नहीं करना पूरे दिन , सब कुछ आर्डर देते ही हाजिर हो जाता है ! मतलब अभिशप्त बुढापे की हॉस्पिटल मौत साक्षात सामने है और दिखती नहीं !
अधिक उम्र में सुस्वाद भोजन , जान देने की जगह जान लेने में समर्थ है , भारत में हर चौथा व्यक्ति हार्ट आर्टरी में रूकावट और डायबिटीज से पीड़ित है और ५० वर्ष से अधिक का हर आदमी बढ़िया भोजन पर ध्यान केन्द्रित किये रहता है , यह घातक है यह उन्हें मेडिकल व्यवसाय के निर्मम कसाइयों की तरफ ले जाएगा !
हम बुजुर्ग पूरी दुनिया को लंबा जीने का आशीर्वाद देते रहते हैं जबकि अपने ऊपर कोई नसीहत लागू नहीं ! मगर इस बार चार दिन पहले खुद को गरियाने का असर वाकई हुआ उस दिन लिये संकल्प ने भूख की इच्छा ही खत्म कर दी इस परिणाम से मेरे इस विचार को दृढता मिली कि शरीर आपके मन से चलता है इसकी आवश्यकताएं न्यूनतम हैं ! हम जैसी आदत डालेंगे शरीर उसी में जीवनयापन करने में समर्थ है !
पहले दिन मैंने सुबह एक कटोरा पपीता जो मुझे बिलकुल अच्छा नहीं लगता खाया था और शाम को पांच छः टमाटर नीबू के साथ , बाकी पूरे इन दो बार ग्रीन चाय और एक वार कश्मीरी कहवा !
दुसरे दिन सुबह एक बड़ी प्लेट टमाटर काला नमक और नीम्बू के साथ और शाम को फिर पपीता ...
तीसरे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और शाम जीरा लौकी की सब्जी बड़ी प्लेट ...
आज चौथे दिन सुबह तरबूज ढेर सारा और पूरे दिन शिकंजी , ग्रीन टी और
यह पहली बार हुआ है कि चार दिनों में वजन ढाई किलो कम हुआ बिना भूख लगे , न कोई कमजोरी न सरदर्द !
अब आज से अपनी जबान पर कंट्रोल रखूंगा , काम नहीं तो भोजन नहीं इस व्रत का पालन पूरी शिद्दत से करूंगा इस भरोसे के साथ कि बिना काम किये खाना शरीर की जरूरत है ही नहीं , बिना भूख लगे भोजन करना ही नहीं है, चाहे कितने दिन हो जायें !

Thursday, April 4, 2019

मिट्ठी का स्वागत है अपने घर में , ढेरों प्यार से -सतीश सक्सेना

अंततः इंतज़ार समाप्त हुआ , विधि, गौरव की पुत्री मिट्ठी ने, आज (3April) म्युनिक, जर्मनी में जन्म लिया और मुझे बाबा कहने वाली इस संसार में आ गयी !

मिट्ठी का स्वागत है अपने घर में , ढेरों प्यार से !
गुलमोहर ने भी बरसाए लाखों फूल गुलाल के !

नन्हें क़दमों की आहट से,दर्द न जाने कहाँ गए
नानी ,दादी ,बुआ बजायें ढोल , मंगलाचार के !

Thursday, February 28, 2019

निरंकुश मीडिया बर्बाद कर देगा इस शानदार देश को,समाज को -सतीश सक्सेना

आजकल एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक वृद्ध मां को उसका बेटा निर्दयता पूर्वक जमीन पर घसीटता हुआ ट्रेक्टर के आगे ले जा रहा है ताकि उसे कुचल कर मार सके और यह घटना महाराष्ट्र 21जून की है जहाँ राष्ट्र गौरव की बातें सबसे अधिक की जाती हैं !
पिछले कुछ वर्षों में , हमारे देश में नफरत की खेती खूब की गयी है और उसका नतीजा भी नजर आने लगा है, मेरे अपने सर्किल में कई सरल ह्रदय व्यक्तियों के व्यवहार में फर्क आया साफ़ महसूस हो रहा है , पडोसी देश के प्रति उत्पन्न की गयी यह नफरत अब मोहल्ले, घर और ट्रैफिक में भी नजर आ रही है , सोशल मीडिया पर जिनके विचार हमसे न मिलें उन्हें अमित्र करना आम है ! अफ़सोस यह है कि नफरत फ़ैलाने वाले अधिकतर भोले लोग, यहाँ तक कि छोटे बच्चों तक के मानस में , टीवी पर चीखते एंकरों की बाते, अमिट निशान छोड़ रही हैं !

सीधा साधे शांत देश को , जिसमें समस्त जाति ,कौम के लोग आराम से रह रहे थे, इन लोगों ने अपने घरों में भी बच्चों को  झाग उगलते हुए गाली देना सिखा दिया है जिसे सब जोश के साथ आसानी से आत्मसात भी कर रहे हैं , इन जाहिलों को यह नहीं मालुम की स्नेह और प्यार की जगह अनजाने में तुम अपने घर में जहर बो रहे हो जिसकी आग में सबसे पहले तुम्हारे बच्चे ही झुलसेंगे जिन्हें इस माहौल में ही पूरी उम्र जीना है ! मानव की मानव के प्रति बढती हुई गुस्सा इन्हें जानवर बना देने में सक्षम है और शीघ्र यह सड़कों पर नजर आयेगी ! 

मारो , सबक सिखा दो के नारे लगाते, इन बेवकूफों को यह भी नहीं मालुम कि दो परमाणु शक्ति संपन्न देशों में युद्ध का अर्थ , घना अन्धेरा होगा जिसमें दोनों ओर कोई नाम लेवा नहीं बचेगा , भारत पाकिस्तान में ताकत की तुलना सिर्फ पारम्परिक युद्ध होने तक ही संभव है , परमाणुशक्ति संपन्न देशों में यह तुलना सिर्फ मूर्खता पूर्ण विचार है , दोनों अपार जीव संहार और मानवता विनाश में सक्षम हैं यहाँ एक पक्ष के धन और जनशक्ति  का कोई मूल्य नहीं , परमाणु युद्ध होने पर लाखों सैनिकों, भरपूर हथियारों , हवाई जहाजों , और अरबों डॉलर का रिज़र्व धन एक क्षण में नष्ट हो जाएगा  और दो जाहिल शासकों के मनहूस स्मारक  के रूप में ,आसमान की जगह सिर्फ घना अन्धेरा बचेगा , जो सैकड़ों बरसों तक मानव की मूर्खता का अवशेष होगा !

यही कारण था कि विश्व का सबसे ताकतवर राष्ट्र अमेरिका का राष्ट्रपति आज वियतनाम आकर एक गरीब देश नार्थ कोरिया के राष्ट्रपति से हाथ मिलाने को विवश हो रहा है और यही समय की पुकार भी है कि परमाणुशक्ति संपन्न  देश आपस में युद्ध की सोंच भी न सकें ! 

आज मैंने अपने घर से ललकारने वाले समस्त चैनल विदा कर दिए , सौम्यता से बात करने वाले चैनल ही देखना है इस हेतु न्यूज़ चैनल कम से कम देखूंगा , देखना है कि इस युद्ध यूफोरिया पर लगाम लगाने के लिए हमारी सरकार कब कदम उठाती है ! दुआ करूंगा कि भारत पाकिस्तान नेपाल बंगलादेश एक साथ एक संघ राष्ट्र का निर्माण करें और हम ईद पर होली के उत्साह से ,गले मिलकर, नफरत की करवटें लेना छोड़, आराम की नींद सो सकें ! 

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