Sunday, August 19, 2012

चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख -सतीश सक्सेना

चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख,
जिससे घर का सम्मान बढ़े ,
कुछ कागज काले कर ऐसे,
जिससे आपस में प्यार बढ़े

रहमत चाचा से गले मिलें,
होली और ईद साथ आकर !
तो रक्त पिपासु दरिंदों को,नरसिंह बहुत मिल जायेंगे !


विध्वंसक भीड़ सामने हो ,
कोई साथी नज़र नही आए !

हर तरफ धधकते शोलों में, 
शीतल जल नज़र नहीं आये !
कुछ नयी कहानी ऐसी लिख,
जिससे अंगारे ठन्डे  हों !
मानवता के मतवालों को, हमदर्द बहुत मिल जायेंगे !

कुछ तान नयी छेड़ो ऐसी
झंकार उठे, सारा मंज़र ,
कुछ ऐसी, परम्परा जन्में ,

हंस गले मिलें फेंकें खंज़र,
होली पर, मोहिद रंग खेलें, 

गौरव हों दुखी, मुहर्रम पर !
तब  धर्म युद्ध में कंधे को , सारथी बहुत  मिल जायेंगे !


वह दिन आएगा बहुत जल्द
नफरत के सौदागर ! सुनलें ,
जब माहे मुबारक के मौके,
जगमग होगा बुतखाना भी !

मुस्लिम बच्चे,  प्रसाद लेते , 
मन्दिर में ,  देखे जायेंगे !
और ईद मुबारक के मौके, हमराह बहुत मिल जाएंगे !

ये जहर उगलते लोग हमें 
आपस में, मरवा डालेंगे !
अपने घर की दीवारों में 
रंजिश का बिरवा बोयेंगे  !
चौकस रहना  शैतानों से , 

जो हम लोगों  के बीच रहें  !
तू आँख खोल पहचान इन्हें,जयचंद बहुत मिल जायेंगे !

64 comments:

  1. बहुत बहुत सुन्दर सतीश जी...
    काश आपकी कही हर बात सच हो जाए ....
    ईद की मुबारकबाद कबूल करें.

    सादर
    अनु

    ReplyDelete
  2. काश आपकी बात सबकी समझ में आ सके..

    ReplyDelete
  3. क्या बात कही है आपने...
    दरिंदे इधर भी हैं उधर भी... सबको सद्बुद्धि आये.... बस यही प्रार्थना है...

    ReplyDelete

  4. पहचानो ऐसे लोगो की जो रह कर गद्दारी कर जाते
    कुछ ऐसा हो जाए अगर होली और ईद समझ पाते,,,,,

    RECENT POST ...: जिला अनुपपुर अपना,,,

    ReplyDelete
  5. सतीश जी आप के इस जज़्बे को हमारा सलाम

    ReplyDelete
  6. सतीश जी आप के इस जज़्बे को हमारा सलाम

    ReplyDelete
  7. ईद,होली संग मनाएं,
    काश ऐसा दिन बनायें !

    ReplyDelete
  8. इंशाल्लाह हम सब को वोह दिन जल्द ही देखने को मिले...ईद मुबारक हो..

    ReplyDelete
  9. चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख मदन ..आपको मेरा सलाम मिले
    इस हिंसा कि धधकती ज्वाला में ...शान्ति अमन का पैगाम मिले
    बहुत ही यथार्थ रचना ... बहुत दिनों बाद आपके ब्लॉग पर आना हुआ..
    आम हिंदू हर धर्म को मानने वाले को अपने परिवार वाले जैसे समझता है और इज़्ज़त करता है और यह बात सभी धर्मावलंबियों को समझना चाहिए.

    ReplyDelete
  10. सार्थक विचार लिए पंक्तियाँ...जाने हम कब जागेंगे ...?

    ReplyDelete
  11. मंशा सबकी ऐसी ही होती है पर पता नहीं क्यों ,कभी कभी ऊपर वाला कुछ सिरफिरे पैदा कर देता है |

    ReplyDelete
  12. यह कवि आह्वान साकार हो जाये ...प्रतीक्षा के बाद एक जोरदार सामयिक रचना ,सद्भाव की रचना !

    ReplyDelete
  13. बहुत अच्छाहो,अगर ऐसा हो!

    ReplyDelete
  14. खूब साथ निभाया है कलम ने.

    ReplyDelete
  15. आपकी कलम ने कमाल किया
    खूबसूरत यह आह्वान किया
    सुनो सुनो ऐ दुनियावालो
    सब ईश्वर- अल्लाह के बन्दे हैं
    सब मिलजुल कर रहेंगे जब, देश हमारा स्वर्ग बनेगा
    ना कोई हिन्दु- मुसलमाँ होगा, सब इंसान बन जाएँगे|

    ReplyDelete
  16. चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख,
    जिससे घर का सम्मान बढ़े ,
    कुछ कागज काले कर ऐसे,
    जिससे आपस में प्यार बढ़े
    यही वह भावना है जिसके बल पर हमारा देश आगे बढ़ सकता है।

    ReplyDelete
  17. नफरत फ़ैलाने वाले एक धर्म /जाति के दुश्मन नहीं , मानवता के दुश्मन हैं !
    सार्थक आह्वान !

    ReplyDelete
  18. ईद के मुबारक मौके पर बहुत सुंदर संदेश देती रचना..

    ReplyDelete
  19. सार्थक गीत...आपके गीत समाज को सन्देश देते हैं.. स्वान्तः सुखाय नहीं हैं... भाईचारे के पर्व ईद पर हार्दिक शुभकामना...

    ReplyDelete
  20. सार्थक गीत...आपके गीत समाज को सन्देश देते हैं.. स्वान्तः सुखाय नहीं हैं... भाईचारे के पर्व ईद पर हार्दिक शुभकामना...

    ReplyDelete
  21. बहुत ही सुन्दर और प्रेरक प्रस्तुति.
    प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार.

    ईद की बधाई और शुभकामनाएँ.

    ReplyDelete
  22. कुछ नयी कहानी ऐसी लिख,जिससे अंगारे ठन्डे हों !
    मानवता के मतवाले को, हमदर्द बहुत मिल जायेंगे !
    ..........सार्थक गीत

    ReplyDelete
  23. भाईचारे का सन्देश देती..
    बहुत बेहतरीन और सार्थक रचना...

    ReplyDelete
  24. जयचंदों के देश में शैतानों को पहचानना...भूंसे में सुई खोजने के सामान है...वोट और नोट ने सारे इमान खरीद रक्खे हैं...

    ReplyDelete
  25. एक दिन आएगा सतीश जी जब आपके ये बोल इंसानों के दिल में उतरेंगे.

    ReplyDelete
  26. आपकी इस सुन्दर प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार२१/८/१२ को http://charchamanch.blogspot.in/2012/08/977.html पर चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा की जायेगी आपका स्वागत है

    ReplyDelete
  27. सुन्दर..सार्थक रचना...

    ReplyDelete
  28. ह दिन आएगा बहुत जल्द
    नफरत के सौदागर ! सुनलें ,
    जब माहे मुबारक के मौके,
    जगमग होगा बुतखाना भी
    मुस्लिम बच्चे, प्रसाद लेते, मन्दिर में , देखे जायेंगे !
    हम प्यार सिखाएं बच्चों को,हमराह बहुत मिल जायेंगे !

    प्रणाम आपके ज़जब्बे को

    ReplyDelete
  29. सुन्दर दिल की सुन्दर अभिव्यक्ति!!

    ReplyDelete
  30. @तो रक्त पिपासु दरिंदों को,नरसिंह बहुत मिल जायेंगे !


    दद्दा अब तो 'मानवता' के मतवाले ही रक्त पिपासु बन बैठे हैं.

    प्रणाम

    ReplyDelete
  31. सुन्दर प्रस्तुति। मरे पोस्ट पर आपका आमंत्रण है। धन्यवाद।

    ReplyDelete
  32. बड़े भाई, कमाल की बात कही है आपने.. ये भावनाएं हमेशा ही नफ़रत फैलाने वालों की भावनाओं से ऊपर ही रहेंगी.. यही आधारशिला है हमारे देश की एकता की!!
    बहुत सुन्दर!!

    ReplyDelete
  33. बहुत सुन्दर......

    ReplyDelete
  34. सार्थक विचार लिए पंक्तियाँ...बहुत सुन्दर...

    ReplyDelete
  35. चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख,
    जिससे घर का सम्मान बढ़े ,
    कुछ कागज काले कर ऐसे,
    जिससे आपस में प्यार बढ़े

    काश सारे कागज कलम
    आपके हाथ आ जायें
    काले सफेद सब जितने हैं
    इंद्र्धनुष बन बिखर जायें !

    बहुत सुंदर रचना !

    ReplyDelete
  36. ये जहर उगलते लोग तुम्हे
    आपस में, मरवा डालेंगे !
    ना हिन्दू हैं,ना मुसलमान
    ये मानवता के दुश्मन हैं !
    पहचान करो शैतानों की, जो हम दोनों के बीच रहें !
    तू आँख खोल पहचान इन्हें,जयचंद बहुत दिख जायेंगे !कौमी तराना लेकर आएं हैं सतीश भाई ,प्रतीक कोई "मीर जाफर" का भी बुरा नहीं हमारी कौमों के नासू र हैं ये जय चंद ..इन्हीं के बारे में कहा गया "घर का भेदी लंका ढावे",फिर मुखर हुए राष्ट्री स्वर ,दुन्दुभी वजाई लेखनी ने आपकी ,मुबारक . कृपया यहाँ भी पधारें -
    मंगलवार, 21 अगस्त 2012
    सशक्त (तगड़ा )और तंदरुस्त परिवार रहिए
    सशक्त (तगड़ा )और तंदरुस्त परिवार रहिए

    ReplyDelete
  37. सतीश भाई, आपके इन शब्दों की जितनी भी तारीफ करूँ उतना ही कम है... धर्म के नाम पर अधर्मी ठेकेदारों ने पुरे समाज का जीना मुश्किल रखा है... ईद के मौके पर रब से दुआ है, मुल्क ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अमन-ओ-अमान कायम हो...

    ईद की ढेरों मुबारकबाद क़ुबूल फरमाइए!

    ReplyDelete
  38. सार्थक संदेश देता हुआ गीत .....सुंदर प्रस्तुति ।

    ReplyDelete
  39. कुछ तान नयी छेड़ो ऐसी
    झंकार उठे, सारा मंज़र,
    कुछ ऐसी परम्परा जन्में ,
    हम ईद मनाएँ खुश होकर ..

    वाह .. ईद के मुबारक मौके को सार्थक करती रचना ... ऐसी मीठी तान छिड जाए वतन में तो महक प्रेम की आने लगे ... लाजवाब गीत है सतीश जी ... बधाई ...

    ReplyDelete
  40. भाई सतीश जी बहुत उम्दा विचार से लिखी उम्दा कविता |जयहिन्द |

    ReplyDelete
  41. bahut sundar, bahut positive message !!
    saaadar .

    ReplyDelete
  42. आओ कुछ ऐसा भी सोचें

    इ्र्रर्ष्या जो करते मनुष्य से
    वे भी तो मनुष्य ही हैं
    अतः कहूँ नर ही नर का अह
    शत्रु बना फिरता है यों।

    यह नर नर ही को कोस रहा
    नर ही नर में जयचंद बना
    नर ही नर को यों खंडित कर
    अस्तित्व बचाना चाह रहा।

    हम जरा ठहर रुक कर सोचें
    हाबी प्रबृत्तियाँ हैं हम पर
    हम इन्हें न जानना चाह रहे
    आतुर अपने से लड़ने को।

    ReplyDelete
  43. सदियां बीत गयी ऐसे गीत गाते हुए लेकिन नफरत बढ़ती ही जा रही है।

    ReplyDelete
  44. ये जहर उगलते लोग तुम्हे
    आपस में, मरवा डालेंगे !
    ना हिन्दू हैं,ना मुसलमान
    ये मानवता के दुश्मन हैं !
    पहचान करो शैतानों की, जो हम दोनों के बीच रहें !
    तू आँख खोल पहचान इन्हें,जयचंद बहुत दिख जायेंगे !

    Aamiin ............kash aisa ho

    ReplyDelete
  45. विध्वंसक भीड़ सामने हो ,
    कोई साथी नज़र नही आए !
    हर तरफ धधकते शोलों में
    शीतल जल नज़र नहीं आये !
    कुछ नयी कहानी ऐसी लिख,जिससे अंगारे ठन्डे हों !
    मानवता के मतवाले को, हमदर्द बहुत मिल जायेंगे !
    सार्थक सन्देश देती रचना ...

    ReplyDelete
  46. .
    .
    .
    सार्थक,सामयिक संदेश...
    आभार आपका...


    ...

    ReplyDelete
  47. वह दिन आएगा बहुत जल्द
    नफरत के सौदागर ! सुनलें ,
    जब माहे मुबारक के मौके,
    जगमग होगा बुतखाना भी
    मुस्लिम बच्चे, प्रसाद लेते, मन्दिर में , देखे जायेंगे !
    हम प्यार सिखाएं बच्चों को,हमराह बहुत मिल जायेंगे !

    सतीश जी कमाल का लिखा है । आमीन ।

    ReplyDelete
  48. वाह ! क्या बात कही ! आपकी भावनाओं को शत शत नमन !

    ReplyDelete
  49. चल उठा कलम कुछ ऐसा लिख,
    जिससे घर का सम्मान बढ़े ,
    bahut khub sir..........

    ReplyDelete
  50. बस एक ही शब्द हैं कहने को .........बहुत खूब

    ReplyDelete
  51. ये जहर उगलते लोग तुम्हे
    आपस में, मरवा डालेंगे !
    ना हिन्दू हैं,ना मुसलमान
    ये मानवता के दुश्मन हैं !

    एक सच्चाई को सुघड़ता से गीत में पिरोया है आपने।

    ReplyDelete
  52. कौमी तराने लिख नए इकबाल से ,पहचान तेरी मेरी कौमी एक हो ...बढ़िया लिखते रहें आप ऐसे ही तराने कौम के लिए ,कौमी एतबार के लिए .....शुक्रिया हमारे घर आने का ,टिपियाने का ,आते रहिए ...

    ReplyDelete
  53. काश..! कलम की ये ख्वाइश पूरी हो जाए |
    अतिसुंदर रचना

    मेरा ब्लॉग आपके इंतजार में-
    "मन के कोने से..."
    आभार...

    ReplyDelete
  54. आपकी किसी पुरानी बेहतरीन प्रविष्टि की चर्चा मंगलवार २८/८/१२ को चर्चाकारा राजेश कुमारी द्वारा चर्चामंच पर की जायेगी मंगल वार को चर्चा मंच पर जरूर आइयेगा |धन्यवाद

    ReplyDelete
  55. अहो! साधुवाद..साधुवाद..

    ReplyDelete
  56. कुछ तान नयी छेड़ो ऐसी
    झंकार उठे, सारा मंज़र,
    कुछ ऐसी परम्परा जन्में ,
    हम ईद मनाएँ खुश होकर
    होली पर,मोहिद रंग खेलें,गौरव हों दुखी ! मुहर्रम पर
    इस धर्मयुद्ध में संग देने, सारथी बहुत मिल जायेंगे
    बहुत अच्छी बात कही है आपने.भगवान करे पूर्ण हो जाये.तुम मुझको क्या दे पाओगे?

    ReplyDelete
  57. ये जहर उगलते लोग तुम्हे
    आपस में, मरवा डालेंगे !
    ना हिन्दू हैं,ना मुसलमान
    ये मानवता के दुश्मन हैं !
    पहचान करो शैतानों की, जो हम दोनों के बीच रहें !
    तू आँख खोल पहचान इन्हें,जयचंद बहुत दिख जायेंगे !
    पारस्परिक सद्भावनाओं को प्रगाढ़ करने के सुन्दर भाव को समेटे राष्ट्रीय प्रेम एवं सद्भावनाओं को जीवंत करती प्रेरणादायी प्रस्तुति ....सादर अभिनन्दन !!!

    ReplyDelete
  58. ये जहर उगलते लोग तुम्हे
    आपस में, मरवा डालेंगे !
    ना हिन्दू हैं,ना मुसलमान
    ये मानवता के दुश्मन हैं !
    पहचान करो शैतानों की, जो हम दोनों के बीच रहें !
    तू आँख खोल पहचान इन्हें,जयचंद बहुत दिख जायेंगे !

    ....अप्रतिम भावमयी रचना...लाज़वाब प्रवाह और सम्प्रेषण...बधाई

    ReplyDelete
  59. ऊर्जा से भरी सार्थक और सशक्त रचना ,बहुत कुछ सन्देश देती हुई ...

    ReplyDelete
  60. ऊर्जा से भरी सार्थक और सशक्त रचना ,बहुत कुछ सन्देश देती हुई ...

    ReplyDelete
  61. ऊर्जा से भरी सार्थक और सशक्त रचना ,बहुत कुछ सन्देश देती हुई ...

    ReplyDelete
  62. Aman chain ki sarthak sandesh deti hui aapki rachna....

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,