Sunday, April 5, 2015

क्या जानों सरकार हमारे बारे में -सतीश सक्सेना

कितने  शिष्टाचार , हमारे बारे में !
क्या समझे हो यार हमारे बारे में !

इसीलिये अब, तुमसे दूरी रखते हैं 
दिल न दुखे सरकार,हमारे बारे में !

हमको रोज परिंदे ही बतला जाते 
कितने हाहाकार  , हमारे बारे में !

जो वे चाहें करें फैसला,किस्मत का  
है उनका अधिकार, हमारे बारे में !

मरते दम तक तुम्हें नहीं समझायेंगे 
कितने गलत विचार हमारे बारे में !

26 comments:

  1. बहुत बढ़िया रचना.... बहुत कुछ अभी रहस्य में है... समझने में अभी समय लगेगा ...

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  2. कविता, गीत, नज़्म, क्षणिकाएँ और ग़ज़ल,
    धूम मची है यार, हमारे बारे में!
    इतना कुछ हमने कह डाला कुछ तो कहो,
    तुम भी बरख़ुरदार, हमारे बारे में!

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  3. समस्या समझने के अपने तरीक़े, अपने अपने समाधान।

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  4. क्या कोई जाने किसी के बारे में
    कब होती एक राय किसी के बारे में !

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  5. इक निवाले के लिए हमने किया जिसका शिकार,
    वो परिंदा भी कई रोज़ का भूखा निकला...

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  6. इक निवाले के लिए हमने किया जिसका शिकार,
    वो परिंदा भी कई रोज़ का भूखा निकला...

    जय हिंद...

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  7. बहुत खूब, सर जी!!

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  8. जो वे चाहें करें फैसला,किस्मत का
    है उनका अधिकार, हमारे बारे में !
    bahut khoob
    badhai
    rachana

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  9. Bahut Khub Guruji..

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  10. बड़ा ही नेक विचार है हमारा तो इस
    रचना के बारे में :)
    बहुत सुन्दर सार्थक रचना !

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  11. जान गए सरकार आपके बारे में -----

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  12. जो वे चाहें करें फैसला,किस्मत का
    है उनका अधिकार, हमारे बारे में !

    उनसे मिलकर आसानी से जानोगे
    कितने हाहाकार , हमारे बारे में ! bahut khoob likha hai apne ......hardik badhai saxena ji

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  13. कितने गलत विचार हमारे बारे में !

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  14. शब्द 61 या 62 और लेखा ज़िन्दगी का क्यों लगता है कि इनमें मेरा ही हिसाब लिख दिया आपने
    बेहद करीब सादर प्रणाम

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  15. बहुत सुन्दर विचार अपने बारे में

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  16. कोई कुछ भी समझे आप तो सब समझा चुके अपने बारे में--बेबाक रचना

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  17. बेहद शानदार रचना। बेबाकी से परिपूर्णं।

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आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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