Monday, August 4, 2014

दरो दीवार को , हर हाल बचाना होगा - सतीश सक्सेना

दर ओ दीवार को हर हाल बचाना होगा ! 
आंधी तूफ़ान से लड़ने का बहाना होगा !

कैसी ज़िल्लत है नाचने में,बताने के लिए  
भरी महफ़िल में,मदारी को नचाना होगा !

माँ के तकिये में सिले,मेरे ही फोटो निकले 
मेरा ख़याल था, इसमें तो खज़ाना होगा !

आजकल आसमां पर,लोग नज़र रखते हैं
इन चमकते हुए , तारों को हटाना होगा !

कबसे ठहरा हुआ यह दर्द,पोंछने के लिए ! 
सूखे बंजर में भी मेंहदी को लगाना होगा !

22 comments:

  1. माँ के तकिये में सिले मेरे ही फोटो निकले।
    मेरा ख्याल था,इसमें तो खजाना होगा।
    सुन्दर भावनास्पद प्रस्तुति।

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  2. कैसी ज़िल्लत है नाचने में,बताने के लिए
    इसी मजमे में, मदारी को नचाना होगा !
    सही बात है, लाज़वाब लेखन
    जाके पैर न फटी बिवाई
    वो क्या जाने पीर पराई....

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  3. सही कहा है, सबको अपना अपना रोल अदा करना होगा..बहुत खूबसूरत भाव...

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  4. माँ के तकिये में सिले,मेरे ही फोटो निकले
    मेरा ख़याल था, इसमें तो खज़ाना होगा ..

    bahut khoob ... vo khajaana hi th ... maaaa ke dil se soch kar to dekhen ...

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  5. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  6. " शकुन " हर हाल में खुद को ही सिखाना होगा ।
    हम तो बेहतर हैं यही दम्भ मिटाना होगा ॥

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  7. माँ के तकिये में सिले,मेरे ही फोटो निकले
    मेरा ख़याल था, इसमें तो खज़ाना होगा !

    मार्मिक !
    .....................

    शायद मेरे ख़ून ने ही मेरा ख़ून किया होगा !

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  8. बहुत ख़ूब!! एक एक शे'र में गहरे भाव पिरोये हुए!!

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  9. bahut..gahre bhaw ....dil ko chhu gaya ....

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  10. माँ के तकिये में सिले,मेरे ही फोटो निकले
    मेरा ख़याल था, इसमें तो खज़ाना होगा !
    कैसे सोच लेते है ? ...मर्मस्पर्शी , वाह

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  11. जीवन को बचा पाना अब पहली प्राथमिकता हो गयी है
    और इसी जद्दोजेहद की पड़ताल है ये बेहतरीन गजल ----
    सादर ----

    आग्रह है ------मेरे ब्लॉग में सम्मलित हों
    आवाजें सुनना पड़ेंगी -----

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  12. मन को छू गईं--
    मां के तकिये में सिले मेरे ही फोटो निकले
    मेरा खयाल था,इसमेम खजाना होगा
    मां से पूछिए?

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  13. ब्लॉग बुलेटिन की मंगलवार ०५ अगस्त २०१४ की बुलेटिन -- भारतीयता से विलग होकर विकास नहीं– ब्लॉग बुलेटिन -- में आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ...
    एक निवेदन--- यदि आप फेसबुक पर हैं तो कृपया ब्लॉग बुलेटिन ग्रुप से जुड़कर अपनी पोस्ट की जानकारी सबके साथ साझा करें.
    सादर आभार!

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  14. बहुत सुन्दर प्रस्तुति....

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  15. लाजवाब रचना...

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  16. बेहद उम्दा रचना और बेहतरीन प्रस्तुति के लिए आपको बहुत बहुत बधाई...
    नयी पोस्ट@जब भी सोचूँ अच्छा सोचूँ
    रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामनायें....

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  17. कबसे ठहरा हुआ यह दर्द,पोंछने के लिए !
    सूखे बंजर में भी मेंहदी को लगाना होगा !...जबरदस्त!!!

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  18. भावुकता भरी रचना है । सच के बेहद करीब है । यह एकदम सही बात है सभी को मिलकर आगे बढ़ना होगा । सुन्दर रचना के लिए साधुवाद ।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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