शुरुआत नियमित वाक से हुई , अगले तीन महीने में नियमित तौर पर लगातार तीन घंटे तक वाक और जॉगिंग करने की आदत डाल ली , उसके अगले छह महीने में सुबह ठण्ड में शुरुआत के तीन कपड़ों ने एक कपडे की जगह ले ली थी , ठण्ड लगना कम हो गयी थी , साथ ही दौड़ते दौड़ते खांसना भी कम हुआ था , वजन लगभग २ किलो घटा , इससे हिम्मत में इज़ाफ़ा हुआ कि मैं यह कर सकता हूँ , और यह सब सुबह पांच बजे से इकला चलो रे, के मन्त्र के साथ होता था !
अब अगर आज की बात करूँ तो अब तक 2015 से अबतक लगभग 13000 km दौड़ चुका हूँ , 70+वर्ष के इस शरीर में आज के दिन ऊपर लिखी किसी बीमारी का कोई अंश तक नहीं है , शुरुआत से ही मुझे भरोसा था कि मानव शरीर बहुत ताकतवर होता है बशर्ते हम मृत्यु भय के कारण ,दवा व्यापारियों के बनाये इंजेक्शन , कैप्सूल और विटामिन न उपयोग करें !
भारत डायबिटीज की राजधानी है , हमारे यहाँ घी दूध बटर तेल आदि में इस कदर मिलावट होती है कि उनका सेवन करने से ४० वर्ष में ही लोग हार्ट अटैक के शिकार हो रहे हैं , अज्ञानता इस कदर है कि विश्व के अन्य देशों की जीरो जानकारी के होने के बावजूद हम खुद को विश्व गुरु मानते हैं सो पूरे दिन सिर्फ मुंह चलाते रहते हैं , अभक्ष्य दिन में पांच छह बार खाने, पीने में और ज्ञान बघारने में !
सो हो सके तो कल से अकेले घर से वाक पर निकलें , और बिना हांफे सामर्थ्य भर वाक करें और घर आएं , यह नियमित रखें कुछ महीने में शरीर इसे अंगीकार कर लेगा , ध्यान रहे वाक का समापन एक से दो मिनट बिना हांफे धीमे धीमे दौड़ कर करें , दौड़ते हुए अपने शरीर से बात करते रहिये एकाग्रचित्त होकर ! भोजन उतना करें जितनी मेहनत की हो , अगर मेहनत नहीं करते हैं तब एक बार का भोजन से अधिक खाना बीमारी बढ़ाएगा ! दस वर्ष पुराने सतीश में और आज के सतीश में फर्क महसूस करें ! आप भी दौड़ना सीख लेंगे , मुझे विश्वास है !
शुभकामनायें आपको



बहुत बढ़िया सतीश जी!! 70 साल के युवा को सलाम है 🙏💐
ReplyDeleteवाह
ReplyDeleteबहुत बढ़िया
ReplyDeleteहार्दिक अभिनंदन सतीश जी। आप हम जैसों के लिए प्रेरणा-स्रोत हैं। मैं आपका अनुकरण करने का प्रयास करूंगा।
ReplyDeleteयह अनुभव पढ़कर सच में हौसला बढ़ता है। आपने बीमारी को किस्मत मानने के बजाय चुनौती माना और खुद जिम्मेदारी ली, यही सबसे बड़ी बात है। साठ के बाद भी नियमित वॉक, जॉगिंग और अनुशासन से इतना बड़ा बदलाव करना आसान नहीं होता, लेकिन आपने करके दिखाया।
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