Tuesday, May 27, 2014

अहंकार,अभिमान,को अपना स्वाभिमान बतलाये रखना - सतीश सक्सेना

श्रद्धा,निष्ठा, सत्य, प्रतिष्ठा, का सम्मान सजाये रखना !
तुम पर गीत लिखे हैं मैंने, इनकी लाज बचाये रखना !

चंचल मन काबू कर पाना इतना भी आसान नहीं पर 
निष्ठा पूजा याद रहे तो , कुछ विश्वास जगाये रखना !

वेद ऋचाएं सुनते सुनते, बे मतलब का तर्क न करना !
आशय भले समझ न आये तो भी भ्रान्ति बनाये रखना !

जैसी भी किस्मत लाये और ये जीवन बेकार गया पर !
पति पत्नी की सुन्दर जोड़ी का आभास दिलाये रखना !

थके हुए नाविक की जैसे नींद से बोझल होती पलकें,
नज़र  दूर से ही आ जाओ, इतने दीप जलाये रखना !

23 comments:

  1. बहुत सुंदर
    चिंता ना करें वहम बना रहेगा
    टूटना चाहेगा तो वो है ना
    कुछ साल तो चलेगा
    रत्ती भर भी ना टूटने देगा :)

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  2. तेरे दर पर हम आए हैं ले कर मन के फूल रुपहले ।
    चरणों पर इन को रख लेना उज्ज्वल भाव बनाए रखना।

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    1. वाह ! आनंद मय , आभार आपका !!

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  3. नयी पुरानी हलचल का प्रयास है कि इस सुंदर रचना को अधिक से अधिक लोग पढ़ें...
    जिससे रचना का संदेश सभी तक पहुंचे... इसी लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 29/05/2014 को नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है...हलचल में आप भी सादर आमंत्रित है...

    [चर्चाकार का नैतिक करतव्य है कि किसी की रचना लिंक करने से पूर्व वह उस रचना के रचनाकार को इस की सूचना अवश्य दे...]
    सादर...
    चर्चाकार कुलदीप ठाकुर
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  4. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति आज बुधवारीय चर्चा मंच पर ।।

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  5. http://bulletinofblog.blogspot.in/2014/05/blog-post_28.html

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  6. बहुत खूब...सुन्दर कथ्य व सन्देश...

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  7. विश्वास , गरिमा बचाये ही रखनी होगी !
    सुन्दर गीत !

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  8. गरिमा और विश्वासों का सम्मान बचा रहेगा यही उम्मीद है।

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  9. प्रेरणामय कविता - बहुत सुन्दर संदेश से पूरित !

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  10. * नज़र दूर से ही आ जाओ, इतने दीप जलाये रखना!
    - अति सुंदर भाव!

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  11. बहुत सुंदर

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    Replies
    1. चंचल मन काबू कर पाना,भी आसान नहीं है,लेकिन !
      अपनी गरिमा औ विश्वासों का सम्मान बचाये रखना !
      bahut khoob likha
      badhai
      rachana

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  12. बहुत अच्छी लगी रचना. गाते हुआ पढ़ा.

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  13. Satish Ji
    I want to comment in Hindi. Please guide me , how to write in hindi

    regards

    Prof. K K garg

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  14. थके हुए नाविक की जैसे,नींद से बोझल होती पलकें !
    नज़र, दूर से ही आ जाओ, इतने दीप जलाये रखना !

    बहुत सुन्दर !!

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  15. काफी दिनों बाद आना हुआ इसके लिए माफ़ी चाहूँगा । बहुत बढ़िया लगी पोस्ट |

    ReplyDelete
  16. काफी दिनों बाद आना हुआ इसके लिए माफ़ी चाहूँगा । बहुत बढ़िया लगी पोस्ट |

    ReplyDelete
  17. थके हुए नाविक की जैसे,नींद से बोझल होती पलकें !
    नज़र, दूर से ही आ जाओ, इतने दीप जलाये रखना !
    bahut sundar !

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  18. खूबसूरत गीत भाई जी ....रिश्ते बनाने से ही बनते हैं ...

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  19. कितने सुन्दर भाव,खूबसूरत गीत ...

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एक निवेदन !
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- सतीश सक्सेना

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