Monday, April 4, 2016

कुछ मिलावट लग रही है जहर में -सतीश सक्सेना

पहले जल्दी सी नहीं थी शहर में , 
बहुत कुछ था बुजुर्गों के सबर में !

कैसे इस दिल में अभी भी जान है ! 
कुछ मिलावट तो नहीं है जहर में !  

मना कर दो,हम चले ही जाएंगे !
कब तलक लटके रहेंगे अधर में !

तेरे जाने का यकीं दिल को नहीं 
बेईमानी ही लगी , इस खबर में !

होश में जाना दिलाने याद कुछ 
दम अभी बाकी बचा है, लहर में !

10 comments:

  1. पहले जल्दी सी नहीं थी शहर में ,
    बहुत कुछ था बुजुर्गों के सबर में !

    ..सच शहर की भागमभाग भरी जिंदगी के बीच बुजुर्गों का पहले जैसी पूछ परख वाले बहुत ही कम नज़र आते हैं.. अब सब्र किसी को नहीं ..सब सयाने हो गए हैं .
    .
    बहुत बढ़िया चिंतनशील प्रस्तुति

    ReplyDelete
  2. पहले जल्दी नहीं थी शहर में .....बहुत सुंदर रचना ।

    ReplyDelete
  3. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 06/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 264 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।
    आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 06/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 264 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

    ReplyDelete
  4. आपने लिखा...
    कुछ लोगों ने ही पढ़ा...
    हम चाहते हैं कि इसे सभी पढ़ें...
    इस लिये आप की ये खूबसूरत रचना दिनांक 06/04/2016 को पांच लिंकों का आनंद के
    अंक 264 पर लिंक की गयी है.... आप भी आयेगा.... प्रस्तुति पर टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।

    ReplyDelete
  5. "होश में जाना दिलाने याद कुछ
    दम अभी बाकी बचा है, लहर में" - सादर

    ReplyDelete
  6. बेहद खूबसूरत अल्फाज..यकीन और होश में डूबे हुए

    ReplyDelete
  7. बहुत खूब ... शहरी जिन्दगी पे प्रहार ...

    ReplyDelete
  8. तेरे जाने का यकीं दिल को नहीं
    बेईमानी ही लगी , इस खबर में ...वाह, बहुत ही बढ़ि‍या

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,