Monday, April 16, 2012

वीणा के टूटे तारों में, झंकार जगाने निकला हूँ -सतीश सक्सेना

क्यों यहाँ अकेले बैठे हो , 
क्यों खुद से बातें करते हो 
ऐसी भी क्यों बेरुखी रहे 
गैरों सी, बाते करते हो !
इस बार पकड़ना हाथ जरा 
मजबूती से, साथी मेरे  !
घनघोर अँधेरी रात मध्य मैं चाँद को लाने निकला हूँ !

रास्ता दुष्कर,बाधा अनगिन 
विधि ने साँसे,  दी गिनी हुई ,
अंजलि भर जल से क्या होगा  
प्यासे की सांसें, छिनी हुई  ! 
चुक जाए समय,अजमाने में,
ऑंखें खोलो, विश्वास रहे !  
मंजिल है कोसों दूर मेरी, संजीवनि   लाने निकला हूँ  !


हर कष्ट सहा तुमने मेरा ,
हर रोज विदाई दी हंसकर
कष्टों में सारी रात जगीं ,
मेरे गीत सुनाये गा गाकर 
मेरे दर्दीले जीवन का , 
हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
अगले जन्मों में साथ रहे,नटराज मनाने निकला हूँ !

क्यों सृष्टि का उपहास करें ,
क्यों न जीवन से प्यार करें 
आओ जीवन में रंग भरें ,
नीरसता  को रंगीन करें  !
तबले में कोई ताल नहीं, 
मैं धनक उठाने निकला हूँ ! 
वीणा के  टूटे   तारों  से , झंकार जगाने निकला हूँ  !

45 comments:

  1. मंजिल है कोसों दूर अभी , सन्जीवनि लाने निकला हूँ !


    बहुत सुंदर मन के भाव ...!!
    शुभकामनायें ....!!

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  2. वाह............
    चुक जाए समय लड़ते लड़ते,गर आँख न खोल सकीं साथी
    मंजिल है कोसों दूर अभी , सन्जीवनी लाने निकला हूँ !

    बहुत सुंदर रचना.....
    सादर.

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  3. शब्दों का चयन अनोखा है, भावो की सरिता बह निकली |
    जब प्रियतम मुझे पुकार रहा, घर में मंदिर की कह निकली |

    कुछ प्यास बुझाने के साधन, कुछ थाल में रख कर फल लाइ
    इक प्रेम डोर लेकर आई, प्रिय दारुण दुःख सह सह निकली ||

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    1. वाह रविकर जी ......
      मुक्तावली ...
      शुभकामनायें

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    2. 1) अंजलि में जल रुक पाए कहाँ
      प्यासे की सांसें = कुछ प्यास बुझाने के साधन

      2)निकला हूँ = सरिता बह निकली

      3)वीणा के टूटे तारों से = इक प्रेम डोर लेकर आई

      4)मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत = प्रिय दारुण दुःख सह सह

      5) वरदान प्रभु का पाने को,
      रास्ता आसान बनाने को = कुछ थाल में रख कर फल लाइ

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    3. दिल वालों की भाषा के लिए आभार भाई जी....

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  4. wah.....kitna sunder likhe hai.

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  5. मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !waah badi acchi koshish .....jari rakhen safalta jarur milegi.....

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    Replies
    1. शुक्रिया डॉ निशा ,
      प्रयत्न बना रहेगा .....

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    2. हम तो सोच रहे थे कि आपको सफलता मिल चुकी है :)

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    3. बहरहाल कविता छोडिये एक्टिंग वगैरह में हाथ आजमाइए ! फोटो बहुतै ज़बर खिंचाए हैं !

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  6. मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    बहुत सुन्दर रचना...आभार!

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  7. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को
    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    कुछ कहते नहीं बन रहा है निशब्द हूँ ......

    ReplyDelete
    Replies
    1. मैं भी ...
      किसी और कारण ...

      Delete
  8. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को
    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    कुछ कहते नहीं बन रहा है निशब्द हूँ ......

    ReplyDelete
  9. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को
    sundar,badhai

    ReplyDelete
  10. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को

    वाह ... बेमिसाल रचना है ... कितनी आशावादी .. प्रेरणा का पुट लिए ... बधाई इस रचना के लिए सतीश जी ...

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  11. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने
    so soft sweet and heart touching lines .

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  12. घनघोर तमस और तूफानों के बीच अपेक्षा और आशा का दिया!!

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  13. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को
    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    .... तुझको पाया है अब तक , तुझे ही पाने निकला हूँ

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  14. बहुत सुन्दर भाव समन्वय्।

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  15. वरदान प्रभु का पाने को,
    रास्ता आसान बनाने को
    है , मुझे जरूरत बस तेरी ,
    जीवनभर साथ निभाने को
    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    ​आपकी कविता हमेशा की तरह शानदार है, लेकिन मुझे इसके साथ लगी फोटो ने थोड़ा कन्फ्यूज़ किया...बड़ा करने पर साफ हुआ कि पीछे कोई खंभा है...वरना मैं तो समझा था कि सतीश भाई माथे पर ये क्या रखकर कैसा संतुलन साध रहे हैं...​
    ​​
    ​जय हिंद...

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  16. रास्ता दुष्कर,बाधा अनगिन
    विधि ने साँसे दी गिनी हुई ,
    अंजलि में जल रुक पाए कहाँ
    प्यासे की सांसें गिनी हुई !
    वाह बहुत ही सुंदर भाव संयोजन से सजी उत्कृष्ट रचना शुभकामनायें आपको,
    समय मिले कभी तो आयेगा मेरी पोस्ट पर आपका स्वागत है।
    http://mhare-anubhav.blogspot.co.uk/

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  17. दिल से निकला गीत...

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  18. झंकार गूंज रही है..

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  19. गीत अच्छा है। पर हमें प्रभु का वरदान नहीं चाहिए।
    नहिं कोउ अस जनमा जग माहीं प्रभुता पाई जाहि मद नाहीं

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  20. मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    bahut khoob sir

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  21. है प्रेम उत्स जीवन का ग़र,सर्वस्व समर्पित इसको हो
    है मिला जिसे,वह पार हुआ,ले प्रभु का आशीर्वाद अहो!

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    Replies
    1. बहुत खूब कुमार राधारमण ...
      आभार आपका !

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  22. ठीक ठाक रहा इस बार का गीत।

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    Replies
    1. सही कहा ....
      अब एक बार फिर पढ़िए :-))

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  23. मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    जीवन के कठिन क्षणों में ईश्वर,तुझे आजमाने निकला हूँ...

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  24. अद्भुत कविता, आपकी स्पष्ट छाप दिख रही है कविता में।

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  25. चुक जाए समय, आजमाने में, ऑंखें खोलो, विश्वास रहे !
    सुंदर और दमदार रचना

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  26. वाह! बेमिसाल, आशावादी, दिल से निकला गीत...

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  27. इस दुनियावी-बियावान में
    संकल्प लिए मैं आया हूँ,
    'जीवन-पथ में बढते रहना'
    काँटों पर चलकर आया हूँ !

    ...प्रेरणा और उत्साह से लबरेज रचना !

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  28. इस गीत को पढ़कर उल्टे-पुल्टे खयाल आ रहे हैं। क्षमाप्रार्थी हूँ अन्यथा न लें। ये मेरे पागल मन के बकवास खयाल हैं लेकिन आ रहे हैं सो अभिव्यक्त करने से खुद को रोक भी नहीं पा रहा हूँ....

    पहला बंद पढ़कर मुझे छात्र जीवन की याद हो आई जब दो मित्र मजबूती से हाथ पकड़कर चाँद की तलाश में भटकते थे....

    इस बार पकड़ना हाथ जरा, मजबूती से साथी मेरे !
    घनघोर अँधेरी रात मध्य मैं चाँद को लाने निकला हूँ !

    दूसरा बंद पढ़कर लगा कि चाँद जिसके नूर से रोशन होता है उस सूरज ने दोनो मित्रों को ठोंक बजा कर घायल कर दिया और उनमे से एक, मृत प्रायः मित्र को जिलाने के लिए संजीवनी लाने के लिए निकल पड़ा है....

    चुक जाए समय, आजमाने में, ऑंखें खोलो, विश्वास रहे !
    मंजिल है कोसों दूर अभी, संजीवनि लाने निकला हूँ !

    तीसरा बंद पढ़कर लगा...

    अब घायल मित्र स्वस्थ हो चुका है लेकिन पिटने की याद अभी ताजा है। प्रेम में दीवाना हो अकेले ही निकल पड़ा है चाँद के प्रेम में.....

    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत, तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    कमाल का प्रेम गीत है! छात्र जीवन में ही लिखा हुआ लगता है मगर फोटू तो अभी का है !! कुछ कनफ्यूजिया गया हूँ:)

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  29. गीत में आपकी सकारात्मक सोच साफ झलक रही है ।
    बेहतरीन रचना ।

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  30. आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा आज के चर्चा मंच पर की गई है।
    चर्चा में शामिल होकर इसमें शामिल पोस्ट पर नजर डालें और इस मंच को समृद्ध बनाएं....
    आपकी एक टिप्‍पणी मंच में शामिल पोस्ट्स को आकर्षण प्रदान करेगी......

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  31. हर कष्ट सहा तुमने मेरा
    हर रोज विदाई दी हंसकर
    कष्टों में सारी रात जगीं ,
    मेरे गीत सुनाये गा गाकर
    मेरे दर्दीले जीवन का हर गीत, तुम्हारे नाम हुआ !
    वीणा के टूटे तारों से , झंकार जगाने निकला हूँ !

    बहुत जोश दिलाता गीत...

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  32. दर्द तो है, मगर कभी टीस भी खुशी देती है और कभी खुशी भी टीसती है। शुभकामनायें!

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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