अली सय्यद सर से आज फोन पर बात करते हुए उनके नए लेख की चर्चा हुई जिसमें उन्होंने किशोरावस्था में किसी विदेशी लड़की को स्वप्न में देखा था और उसका चेहरा मोहरा और आकृति आज भी उन्हें याद है ! समाज वैज्ञानिक अली जैसे विद्वान् के लिए भी यह गुत्थी पहेली जैसी है जिसका जवाब वह आज तक नहीं खोज पाए हैं , और इस लेख के जरिये, पाठकों से उत्तर की अपेक्षा की है !
इस घटना के कुछ माह बाद, बाज़ार में नवभारत टाइम्स का वार्षिकांक १९७६ प्रकाशित हुआ जिसमें "स्वप्नों का अद्भुत संसार " नामक लेख में, एक वर्णन हालैंड के एक किसान का था जिसने सपने में कई बार "३६८४ " अंक देखा था, परेशान होकर वह आधी रात को बिस्तर से उठ बैठा ! कुछ समय बाद वह स्टेट लाटरी का इसी नंबर का टिकट खरीद लाया और उसी वर्ष मार्च १९४८ में उसे स्टेट लाटरी का पहला इनाम मिला ! उस लाटरी टिकट का नंबर वही था जो उसने स्वप्न में देखा था !
यह सब पढ़कर मैं वाकई रोमांचित था, वह स्वप्न इतना साफ़ एवं असरदार था की ऐसी असामान्य बातों को सिरे से खारिज करने वाला मैं आज भी यह विश्वास करता हूँ कि जब भी यह अंक मेरे जीवन से जुड़ेगा मुझे असामान्य धन लाभ होगा :-))
इस घटना के कुछ वर्ष बाद बरेली रेलवे स्टेशन से बदायूं के लिए रेलगाड़ी पर बैठा था अचानक सामने के प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन के एक कम्पार्टमेंट पर नज़र पड़ी , उस डिब्बे पर कम्पार्टमेंट नंबर १००२९ अंक लिखा देखा और मैंने अपनी चलती ट्रेन से छलांग लगा दी कि १००३० नंबर का डिब्बा, जरूर इस गाडी में होगा मगर साथ के कई और अंकों के बावजूद १००३० नहीं मिला हालाँकि इसे ढूँढने में मेरी वह ट्रेन चली गयी !
मैंने कभी लाटरी नहीं खरीदी मगर इस नंबर के लिए मैं मोहन सिंह पैलेस, दिल्ली गया था , जहाँ लाटरी का सेंटर था ! उसमें सबसे बड़े डीलर से बात करने पर मुझे आश्वासन मिला कि यह टिकट अगले हफ्ते आकर ले जाएँ मगर वह टिकट संख्या नहीं मिल सकी !
तेरी सूरत की किसी से नहीं मिलती सूरत
ठीक ऐसी ही एक घटना मेरे साथ भी जुडी है जो मैं प्रबुद्ध पाठकों के साथ बांटना चाहता हूँ !
१९७५ के आसपास की बात है , लगभग सुबह के चार बजे एक स्वप्न देखा था कि चारो और रुपयों की गड्डियाँ बिखरी हैं , और मैं उन्हें समेट रहा हूँ ! एक किशोर को रुपयों का स्वप्न किसी भी तरह असाधारण नहीं कहा जा सकता है मगर जो इस स्वप्न में असाधारण था वह हर गड्डी के ऊपर एक अंक का लिखा होना और वह अंक १००३० बेहद स्पष्ट था ! यह सपना देख मैं जग गया था मगर थोड़ी देर बाद, फिर सोने के बाद, वही सपना दुबारा आया , फिर नोटों की गड्डियाँ और वही अंक १००३० , इस बार जागने पर मैंने वह अंक लिख लिया ताकि भूल न जाऊं !

यह सब पढ़कर मैं वाकई रोमांचित था, वह स्वप्न इतना साफ़ एवं असरदार था की ऐसी असामान्य बातों को सिरे से खारिज करने वाला मैं आज भी यह विश्वास करता हूँ कि जब भी यह अंक मेरे जीवन से जुड़ेगा मुझे असामान्य धन लाभ होगा :-))
इस घटना के कुछ वर्ष बाद बरेली रेलवे स्टेशन से बदायूं के लिए रेलगाड़ी पर बैठा था अचानक सामने के प्लेटफार्म पर खड़ी ट्रेन के एक कम्पार्टमेंट पर नज़र पड़ी , उस डिब्बे पर कम्पार्टमेंट नंबर १००२९ अंक लिखा देखा और मैंने अपनी चलती ट्रेन से छलांग लगा दी कि १००३० नंबर का डिब्बा, जरूर इस गाडी में होगा मगर साथ के कई और अंकों के बावजूद १००३० नहीं मिला हालाँकि इसे ढूँढने में मेरी वह ट्रेन चली गयी !
मैंने कभी लाटरी नहीं खरीदी मगर इस नंबर के लिए मैं मोहन सिंह पैलेस, दिल्ली गया था , जहाँ लाटरी का सेंटर था ! उसमें सबसे बड़े डीलर से बात करने पर मुझे आश्वासन मिला कि यह टिकट अगले हफ्ते आकर ले जाएँ मगर वह टिकट संख्या नहीं मिल सकी !
तेरी सूरत की किसी से नहीं मिलती सूरत
हम जहाँ में तेरी तस्वीर , लिए फिरते हैं !
एक और स्वप्न की चर्चा कर रहा हूँ, जिसके टूटते ही , सोते से उठ कर , एक गीत की रचना की थी , वह गीत "मुक्ता " में छप चुका है !
स्वप्न में आयीं वामा सी
स्नेहमयी तुम कौन हो ?
प्रबुद्ध पाठकों से अनुरोध है कि इस अछूते रहस्यमय विषय पर अपने विचार व्यक्त अवश्य करें ...एक और स्वप्न की चर्चा कर रहा हूँ, जिसके टूटते ही , सोते से उठ कर , एक गीत की रचना की थी , वह गीत "मुक्ता " में छप चुका है !
स्वप्न में आयीं वामा सी
स्नेहमयी तुम कौन हो ?
एक अंक का लिखा होना और वह अंक १००३० बेहद स्पष्ट था ! यह सपना देख मैं जग गया था मगर थोड़ी देर बाद, फिर सोने के बाद, वही सपना दुबारा आया , फिर नोटों की गड्डियाँ और वही अंक १००३० , इस बार जागने पर मैंने वह अंक लिख लिया ....
ReplyDeletekahi kuch aaisa mila to aap ke liye jarur le lenge.....
jai baba banaras....
जय बाबा बनारस ...
Deleteसपनो की गुत्थी आज तक सुलझी नहीं.................
ReplyDeleteसपनों का यथार्थ से कोई लेना देना नहीं.....लोगों ने अपनी सुविधा के लिए मान लिया है कि बुरा सपना याने सुबह होगा कुछ अच्छा....
हाँ मगर आप १००३० नंबर की लाटरी ज़रूर खोजते रहिये......शायद इस गुत्थी को सुलझाने का श्रेय भी मिले और मालामाल भी हो जाएँ.....
:-)
अनंत शुभकामनाएं.
आप भी खोजें अगर मिल गया तो बाँट लेंगे :-)
Delete:-) पक्का..........
Deletesatish ji , main dream interpret karta hoon kabhi kabhi , aur iska matlab aapki spiritual enlightment se hai .aur aapke bahut acchi santaan milengi , isse ye bhi sabit hota hai . jahan tak dhan ka swaal hai , ye number aapko newyork tak le jaa sakta hai . jahan aapko kisi se jod sakta hai.. abhi to itna hi ..
ReplyDeleteaapka
vijay
dream analyst hi kuchh bata paayega satish ji.
ReplyDeleteमुझे लगता है कि इस तरह की अहैतुक कृपा होनी होगी तो स्वयमेव होगी ,उसके लिए छलांग जैसे रिस्क की ज़रुरत नहीं पड़ेगी .कुछ सपने ज़रूर अजीब होते हैं पर इसका रहस्य किसी को नहीं पता !
ReplyDeleteसपनों का संसार अभी भी अबूझ है , प्रत्येक धर्मों में इसका
ReplyDeleteवर्णन है , ......
kai bar sapne sacche hote hain mere sapne aksar sacche hote hain dhyan rakhe kuch n kuch sanket jarur chipa hai.
ReplyDeleteसतीश जी ...रोचक आलेख है ...!स्वप्न के पीछे भागने से कुछ हासिल नहीं होता |स्वप्न तो स्वप्न ही था |उसे भूल जाइये ...!!मेरी तो यही सलाह है ...
ReplyDeleteशुभकामनायें .
परा मनोविज्ञान का दायरा है यह भाई सतीश सक्सेना साहब .सपनो का संसार .हमने तो दिवा स्वप्न भी सच होते देखें हैं वही मिला है घंटे बाद जो हम पहले से देख रहे थे .देख लिया था .कई सपने आकर हमें बता गए कल क्या होगा क्या क्या हो चुका है जिसका भेद दस दिन बाद खुलेगा .यकीन मानिए वैसा ही हुआ भी जो सपने चुपके से कह गए थे .कभी लिखूंगा चिठ्ठे पर वह किस्से .भविष्य कथन सपनों की मार्फ़त दिल चस्प विषय है .
ReplyDeleteयकीनन आपको पढना दिलचस्प और ज्ञानवर्धक होगा ...
Deleteइंतज़ार रहेगा वीरू भाई !
...रोचक आलेख है सतीश जी
ReplyDeleteमेरे साथ बहुत बार ऐसा हुआ है!...सपने हकीकत में बदलते हुए देखें है!..लेकिन सपनों की गुत्थी सुलझा पाना असंभव सा जान पड़ता है!...आपने बहुत विचारणीय विषय पर पोस्ट लिखी है!....आभार!
ReplyDeletekoi 'frayod' ke sisya mile to 'vyakhya' sahi ho.....
ReplyDeletepranam.
सच है यार , मगर फ्रायड का शिष्य लायें कहाँ से ...?
Delete:-)
क्या पता कोई राज़ हो पिछले जनम का .....
ReplyDeleteयही तो जानना है आप लोगों से ...
Deleteआभार
हमारी कामनाओं और कल्पनाओं का विस्तार ही स्वप्न लोक है ऐसी मेरी ही नहीं बहुतों की धारणा है !
ReplyDeleteकिन्तु मेरी इस धारणा को एक घटना के बाद बदलना पड़ा ! आज से लगभग १२ या १३ साल पहले की घटना है, एक रात मेरे
बेटे का अक्सिडेंट हुआ है ऐसा सपना आया ! मैंने सपने की बात को सह्जतासे लिया ! लेकिन दुसरे दिन सुबह उसका सच में अक्सिडेंट हो गया !
तबसे मै सोचती हूँ सपनों की भी एक अजब गजब दुनिया होती है उसकी सत्ता और महत्ता को इनकार नहीं किया जा सकता !
क्या पता १००३० इस अंक का भी कोई राज होगा ! छलांग मारने जैसा कोई रिस्क मत लीजिये सतीश जी :-}
बहुत से अनजाने रहस्य हैं मानव जीवन के ...जिन्हें हम समझने में सर्वथा नाकामयाब हैं ! छटी इन्द्रिय क्या है...???
Deleteधीमे चलती गाडी से कूदने में खतरा नहीं है सुमन जी और फिर वे दिन नौजवानी के थे
:-(
सपनों का रहस्य समझना आसान नहीं , पर सपने कई बातों को इन्गित करते हैं ......आपका अंक ज़रूर आपको याद रखने के लिए होगा ताकि जो कुछ भी वर्तमान में हो वह बहुत सही हो
ReplyDeleteऐसा ही कुछ मुझे लगता है ...
Deleteआभार आपका रश्मि प्रभा जी !
sateesh ji sapnon ki dunia rahasyamay hai main itna kah sakti hoon kai baar mere sapne sach hue jaise bhagvaan ne pahle hi ishara kar diya ki ye hoga aapke is sapne ka bhi koi aadhar jaroor hoga ...wait and watch.
ReplyDeleteठीक कहा आपने ...लगता तो ऐसा ही है !
Deleteआभार आपका !
रात में देखे सपने कभी सच्चे नहीं होते । खुली आँखों से देखे सपने फिर भी सच हो सकते हैं , अपनी मेहनत और लग्न से । अपना तो यही मानना है ।
ReplyDeleteरात में नींद दो तरह की होती है । NREM और REM स्लीप । सपने REM स्लीप में आते हैं जो सुबह होने से १-२ घंटे पहले होती है । इस समय हॉर्मोनल और केमिकल एक्टिविटी भी ज्यादा होती है । इसीलिए इस समय इरेक्शन भी होता है जिसका होना नपुंसक न होने को सिद्ध करता है ।
अक्सर सोते समय हम जो विचारों में लेकर सोते हैं , वाही सपने में बिजारे थोट्स बनकर आते हैं । इसीलिए बड़े बूढ़े कहते थे कि सोते समय राम का नाम लेते हुए सोने जाना चाहिए ।
नवीन जानकारी के लिए आपका शुक्रिया डॉ साहब.....
Deleteकल से राम नाम लेकर सोऊंगा ..
:-))
राम राम भाई जी !
राम का नाम हिप्नोटिक का काम करता है । :)
Deleteअरे सतीश जी, यह 10030 तो आपका नाम है। 100-30 शत-तीस :)
ReplyDeleteयह नहीं बताया कि स्वप्न में नोटों की गड्डियाँ बटोरने में सफल रहे थे या नहीं? कोई रिस्क न उठाएं, यह अंक स्वयं बता रहा है 100 में से 30 बार आप 'बटोरने' में असफल रहेंगे। बस शान्ति से 31 वी बार का इन्तज़ार करें।
कल ही मेरी एक मित्र ने मुझे बताया कि तुम्हारा नाम बंगाली भाषा में सौतीश बोला जाएगा सो यह नंबर तो तुम्हारे नाम को इंगित करता है !
Deleteअब कसम भगवान की, २२ साल की उम्र में मुझे बंगला उच्चारण का कोई ज्ञान न था :-))
मगर यह विस्मयकारी रहा कि आपने भी सौतीश खोज लिया, विद्वान् दोस्तों का कुछ पता नहीं , कहाँ कहाँ तक न पंहुच जाएँ :-))
आभारी हूँ सुज्ञ जी !
भरोसा रखें सौतीश जी, उन गड्डियों तक पहुंच बनाने की हमारी रुचि नहीं :))
Deleteऔर सपना कहां हिन्दी बंगाली का भेद करता है :)
आपके स्नेह से अभिभूत हूँ सतीश जी!
मुझे स्वप्न बहुत कम आते हैं,पर जब भी आते हैं मैं बस उन गुत्थियों को सुलझाने में उलझ जाती हूँ ....
ReplyDeleteडुबकियां खाती रहती हूँ,पर समझ नहीं पाती हूँ,
पर अपने अभी तक के जीवन में ४ स्वप्न मैंने ऐसे देखे हैं जिन्हें मैं भूल नहीं सकती हूँ ...
जैसे मानो सच में मेरे साथ हुआ हो... स्वप्न न हो... पर था स्वप्न ही..
आपका ये स्वपन मुझे बड़ा ही रोचक लगा....
आपको जब मिल जाये इस नंबर का लौटरी टिकेट.. तो बताईएगा जरुर... :-)
wish you good luck....
हिम्मत बंधाने के लिए आभार ...
Deleteमिल गया तो मित्रों की पार्टी पक्की :-)
1975 के आसपास आपके बैंक अकाउंट का नंबर क्या था ??? कहीं ऐसा तो नहीं कि लड़का बगल मे और दिंढोरा शहर मे ... पता चले सारा माल आपके ही बैंक अकाउंट मे हो और आप उसको यहाँ वहाँ ढूंढ रहे हो ! वैसे आजकल भी बैंक अकाउंट 14 - 16 अंको के होते है ... एक बार उनको भी चेक कीजिये !
ReplyDeleteउन दिनों दूर दूर तक बैंक अकाउंट नहीं था शिवम् भाई अक्सर कडकी रहती थी....
Deleteशुभकामनायें आपको !
यूरेका ....
ReplyDeleteसतीश जी मैंने इस अंक का रहस्य पता लगा ही लिया..
इसका सम्बन्ध लाटरी या ट्रेन से नहीं है
इसका सम्बन्ध ट्रक या क्रेन से भी नहीं है
इसका सम्बन्ध तो ब्लॉग्गिंग से है
आप कम से कम १००३० पोस्ट लगाएंगे
और आप हर किसी के दिल में उतर जायेंगे
वो म्मारा वर्मा जी .......
Deleteलगता तो नहीं कि मैं ऐसा लिक्खाड़ कभी बन पाऊंगा !
शुभकामनाओं के लिए आभार आपका !
सतीश जी, सपनों को मैं भी दस साल पहले तक केवल अपनी दिनचर्या की घटनाओं का फ़िल्मांकन ही समझती थी, लेकिन दस साल पहले जो घटना मेरे साथ घटी उसका साक्षी मेरा पूरा परिवार है. घटना लम्बी है सो मैं भी अब एक पोस्ट के ज़रिये ही उसे सुनाउंगी. लेकिन भरोसा रखिये, इस नम्बर का राज़ ज़रूर खुलेगा, जब भी खुले.
ReplyDeleteयह पोस्ट अली भाई की ताज़ी पोस्ट से प्रेरित होकर लिख तो दी, मगर शंकित था कि भाई लोग (प्रवीण शाह जैसे ) कहीं मज़ाक न बनायें ! मगर आप एवं अन्य मित्रों की टिप्पणियों से काफी आशा जगी है कि कुछ नयी बातें पता चलेंगी !
Deleteआपके लेख की प्रतीक्षा रहेगी ...कृपया खबर अवश्य कर दें !
सादर
आप भी हमारी तरह गणित में कमजोर जान पड़ते हैं, वरना कोई तो हिसाब बैठ ही जाता.
ReplyDeleteसही पहचाना राहुल सर !
Deleteजोड़ भाग आता ही नहीं ...अक्सर मज़ाक उड़वाता रहा हूँ
:-(
स्वागत है आपका कविवर ...
ReplyDeleteआभार आपका जो आपने इस योग्य समझा !
इस संख्या का मतलब यही था कि आगे चलकर आप इस पर एक पोस्ट लिखेंगे जिस पर साथी लोग टिपियायेंगे।
ReplyDeleteजय हो गुरुदेव.....
Deleteसपनो की गुत्थी भले ही अबतक सुलझ न पाई हो पर मै भी इसे वास्तविकता से जोडकर देखती हूं.मैने भी एक बार स्वप्न देखा था कि मै कुछ पकडने की निरंतर कोशिश कर रही हूं,और वो चीज मेरे हाथ के करीब आकर भी छुटी जा रही है.नीन्द मे ही मै रोती रही.जब पापाजी तक मेरे रोने की आवाज गई,तो उन्होने मुझे जगाया और रोने का कारण पूछा.मेरे द्वारा स्वप्न की बात बताने पर उन्होने इतना ही कहा कि तुम्हारी परीछा का परिणाम आनेवाला है,हो सकता है कि तुम कुछ अंको से कुछ छोड रही हो.और,सचमुच एक सप्ताह के अन्दर ही मेरा बी.ए. का परिणाम निकला जो बिल्कुल मेरे स्वप्न की तरह ही था. 6 अंको से मै प्रथम श्रेणी को छोड चुकी थी.
ReplyDeleteअब आगे रोने वाला काम नहीं करना शहजादी ....
Deleteशुभकामनायें !
मेरे ख्याल से सपनों को सपने जैसा ही मानना चाहिए
ReplyDeleteसपनों का रहस्य
ReplyDeleteक्योंकि मैं ईश्वरीय सत्ता में विस्वास रखता हूँ.जहाँ तक मेरा अनुभव है कुछ तो रहस्य छिपा है इन सपनो में ,, यहाँ पर वंदना अवस्थी दुबे जी की टिपण्णी मेरे लिए काफी मायने रखती है....बीस साल पहले की घटना का एक टिपण्णी के रूप में जिक्र करना मेरे लिए भी असंभव नहीं तो आसान मी नहीं है, यदि में जिक्र भी करूँ तो क्या होगा? सर आपको क्या लगता है की इन्सान इन रहस्यों से पर्दा उठाने में सक्षम है ? आपका जवाब जो भी हो ! लेकिन इतना अवश्य कहना चाहूँगा की इन्सान जो आज तक स्वयं को नहीं समझ पाया है वो क्या इन रहस्यों से पर्दा उठाएगा ? संक्षेप में यही कहूँगा की " कुछ तो है...............?'
ReplyDeleteआभार उपरोक्त पोस्ट हेतु...........
आज के समय में, इंसान की समझ में यह परा रहस्य आ पायेंगे कम से कम मुझे संदेह है !
Deleteआज के समय में हम रहस्यों की बातें छेड़ते हुए भी डरते हैं कि कुछ विद्वान मज़ाक उड़ायेंगे, अफ़सोस है कि सच्चाई सामने कम आ पाती है , ढकोसले और अनपढ़ों को प्रभावित करने वाले चोंचले सामने पहले आते हैं !
जन मानस विश्वास करे भी तो कैसे ?
आभार आपका !
सपने कई बार भविष्य में होने वाली घटनाओं की ओर इंगित करते हैं...यह नंबर भविष्य में किसी रूप में आप के लिये शुभ सन्देश ला सकता है यही आशा करनी चाहिए..
ReplyDeleteदेखते हैं क्या होता है भाई जी ...
Deleteमगर विश्वास है
आन क लागे सोन चिरैया, आपन लागे डाइन
ReplyDeleteआन क ख्वाब खयाली हउवे आपन हउवे फाइन
कहे बेचैन सुनो भाई ब्लॉगर ई बतिया ना ठीक
एक में गोरी, एक में नोटिया, दुन्नो हउवे नीक
मजा दुन्नो में आई। भले से ख्वाब में आई।
Deleteआनंद आ गया कविवर ...
आज खूब मस्ती में लग रहे हो ! अहो भाग्य ...
इस मस्ती को आगे बढ़ाइए महाराज तो आनंद आ जाएगा !
बड़े मूड में रहली तब तक हो गयल बिजली गुल
Deleteमैना कौआ जस चीखे, चिचियाये लगलिन बुलबुल
कम्प्यूटर बंद हो गयल। मजा ढेर हो गयल।
:)
aap aur alee bhaai dono mujhe ateendriy kshmta vaale lagte hain ...vaigyaaik vishleshak ESP kahte hain yaanee 'extra sensory perception'
ReplyDeletesorry net connectivitee bahut kharaab hai ..isliye googale indic translateration tool kaam naheen kar raha hai !
आप और अली भाई दोनों मुझे अतीन्द्रिय क्षमता वाले लगते हैं ...वौज्ञानिक विश्लेषक ESP कहते हैं यानी 'एक्स्ट्रा सेंसोरी पर्सेप्सन
ReplyDeleteमैं तो प्रोफ़ेसरअली सय्यद और आपके आगे धूल भी नहीं डॉ साहब ....
Deleteक्यों मज़ाक करते हैं :-))
सतीश जी,
ReplyDeleteआपकी और अली जी दोनों के स्वप्न की चर्चा मैने अपने एक मित्र से की जो एक मशहूर मनोचिकित्सक हैं. उनका कहना है
" The dream is all about a child's thought process. There'r many explanations to this. But it would be pre mature to comment on it without knowing about their childhood. "
मुझे भी यह बात सही लगी...कि बचपन में हम क्या सोचते हैं...हमारी क्या कल्पनाएँ होती हैं..कौन सी बातें प्रभावित करती हैं..इन सबका हमारे स्वप्न देखने पर बहुत असर पड़ता है.
हालैंड के किसान के स्वप्न की बात एक संयोग भी हो सकता है.
आपके मनोचिकित्सक मित्र से हम बहुत पहले से सहमत है पर अपने बचपन से भली भांति परिचित होकर भी किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुँच पा रहे हैं !
Deleteअली जी,
Deleteक्या हम अपने आपको कभी बहुत अच्छी तरह जान पाते हैं ??
@ रश्मि रविजा,
Deleteआभार आपका चर्चा में गहरे शामिल होने पर ...
बचपन मध्यम परिवार में गुज़रा, कम से कम धन का कोई अभाव कभी महसूस नहीं किया एक बात और स्पष्ट कर दूं कि बचपन से आज तक पैसे कि इच्छा कभी नहीं की न ही कभी लालच रहा ! "मेरे पास बहुत धन आ जाए " ऐसी सोंच पर भी चिढ़ता रहा हूँ ! आप मुझे संतुष्ट और हंसमुख मान सकते हैं ...
बिलकुल सतीश जी,
Deleteआप हंसमुख और संतुष्ट व्यक्ति हैं...पूरा ब्लॉग जगत जानता है..
ऐसे सपने देखने का यह अर्थ नहीं कि अवचेतन में कोई गहरी दबी इच्छा हो...बस एक fleeting second का thought भी हो सकता है...या नहीं भी...:)
रश्मि जी ,
Deleteजिस गांव ,परिवार ,पड़ोस ,स्कूल ,माहौल में हम उस वक़्त थे और जो पालन पोषण हमारा हुआ वो तो सब कुछ साफ़ साफ़ अच्छी तरह से पता है !
अगर नहीं पता तो यह 'अतिरिक्त प्रविष्टि' ?
सतीश भाई ,
ReplyDeleteसपनों के आने के कारणों पर चर्चा से पहले आपके और मेरे सपने के बारे में मित्र ब्लागरों की टेलीफोनिक प्रतिक्रिया जानना बेहतर होगा ! हालांकि उनकी सदभावनाओं की एवज में उनके नाम का उल्लेख नहीं करूँगा और शायद इसकी ज़रूरत भी नहीं है :)
(१) कमसिनी के दौर में सपने आने के कारण जो भी रहे हों पर आपका और सतीश जी का 'एजेंडा' बालपन से ही तय था :)
(२) आप दोनों के सपने आप दोनों के जीवन की प्राथमिकताओं की पोल खोलते हैं :)
अब ज़रा आपके ख्वाब की चर्चा कर ली जाये ! असल में आपने उन दिनों के आपके पारिवारिक मित्रवत बैकग्राउंड के बारे में कुछ भी नहीं लिखा है इसलिए मुद्दे को अंकों की रौशनी में ही देखा जाये !
ReplyDeleteउन दिनों आपकी उम्र भविष्य में अपने पैरों पर खडा होने से ठीक पहले वाली है इसलिए धन की कल्पना स्वाभाविक है पर नम्बर ...?
आप जिस क्लास में पढ़ रहे थे उसका रोल नम्बर ?
आपके अभिभावकों ने आपकी कोई पसंदीदा वस्तु खरीदने में इस नोट का इस्तेमाल किया हो ? होने वाली भाभीजान १३ या ऐसे ही मिलते जुलते किसी क्वार्टर नम्बर / गली में रहती हों ?
ऐसी कोई भी वस्तु जो आप खरीदना चाहते हों जिसकी कीमत इस फिगर के आस पास हो ?
बहरहाल अगर इस बात का ताल्लुक अगर पैसे से ना हो तो ज़रूर जीसस क्राइस्ट के १३ शिष्यों में से एक आप रहे होंगे या फिर मामला इसी देश में पुनर्जन्म का हो तो आप तेरापन्थ जैन समुदाय के १३ लोगों में से कोई एक रहे होंगे !
पिछले कुछ दिनों पहले मैंने आपको दस हजारवीं टिप्पणी दी थी उसके बाद की तीसवीं टिप्पणी किसने दी ?
मेरा ख्याल है कि सभी गड्डियों में एक ही नम्बर होने का मतलब है कि रकम ज्यादा नहीं थी पर जो भी एक गड्डी मूल है वह आपको ऐसी अनेक गड्डिया ( उपलब्धियां ) दिलाएगी ! मान लीजिए यह आपका पहला वेतन रहा हो तो ?
सपने के मूल स्रोत आप हैं इसलिए आपकी पृष्ठभूमि से ही इस सपने का सही विश्लेषण किया जा सकता है ! वर्ना अंधेरे में तीर मारने का कोई अर्थ नहीं !
वैसे १३ , २२ या ४ नम्बर का आपके जीवन से क्या वास्ता है ? आपने भाभी जी को पहली गिफ्ट क्या दी थी :)
मेरे ख्याल से एक आप , दूसरी भाभी और कुल दो बच्चे मिलाकर चार हुए ,बेटी गई और बहु आई मामला बराबर :)
लौट कर दोबारा आता हूं !
@ अली साहब ,
Delete- रोल नंबर याद नहीं है
- मेरी ससुराल का मकान नंबर एन १३ था ...
-१००३० वीं टिप्पणी अवन्ती सिंह की है
- मेरी गाड़ी का नंबर १३९९
- मकान नंबर ३४६
- प्रयोग की गयी बाइक्स का नंबर १९८८ , ६४९८
अवंती सिंह पे चर्चा आगे कभी हो पायेगी ! पर बाइक्स को छोड़कर अब तक सारे नम्बर ४ ही दिख रहे हैं !
Deletekabhi kabhi swapn bhavishya ki sunder ghatna ka sandesha dete hai .........intzar kiziye ,,best of luck
ReplyDelete@ अली साहब,
ReplyDelete- पत्नीश्री को पहली भेंट साड़ी दी थी
- मेरे अपने जीवन में सबसे अधिक अंक ८ आया है मगर महत्वपूर्ण कार्य अधिकतर ४ अंक से ही हुए हैं ! मेरा अपना मूलांक ८ है और ४ का अंक मेरे लिए विस्मयकारी रहा है !
कीरो अंक ज्योतिष के अनुसार 4 और 8 अंक के गुण दोष लगभग समान हैं।
Deleteआपके प्रश्न के उत्तर में कहना चाहता हूँ कि मेरे मन को मुझ से बेहतर दूसरा नहीं जान सकता. यही बात आप पर लागू होती है. शब्द हों, अंक हों या उनके अर्थ, ये हमारे मन पर पड़े संस्कारों का घालमेल होता है. आपको दिखा अंक भी उसी का परिणाम है. मन की कार्यप्रणाली इतनी क्लिष्ट है कि इस पर पड़े संस्कार कई रूप धारण करके आते हैं. कभी स्वप्न, कभी दैवी दृष्य बन कर भी. आने वाले समय के दृष्य भी लोग देखते हैं जो सत्य साबित होते हैं और कभी वह भी जो कभी सत्य नहीं होते. हाँ, इन सबमें एक बात सामान्य है कि हम देखते वही हैं जो हम देखना चाहते हैं.
ReplyDeleteआभार सटीक विवेचना के लिए भाई जी !
Deleteकुछ सपने सच हो जाते हैं - किस रूप में और कब यह अनिश्चित!
ReplyDeleteयही मेरा विश्वास है ...
Deleteआदर सहित
आपके लिए ख़ास इस नंबर की खोज करूंगा वैसे पोस्ट ग्रेजुएशन में मेरा रोल नंबर १००३० ही था, कहीं वहीँ तो आपके पैसे नहीं रखे थे.... कहिये तो वापस जाकर खुदाई कर दूं कॉलेज की...??? आपके लिए तो कुछ भी, वैसे थोडा हिस्सा मुझे भी मिलने की उम्मीद लगाये बैठा हूँ....
ReplyDeleteकरो यार ...
Deleteआधे आधे कर लेंगे !
शुभकामनायें खुदाई के लिए :-)
सबने बहुत कुछ कह दिया ........मेरे कहने लायक कुछ रहा ही नहीं ...
ReplyDeleteफिर भी आपकी उलझन जल्दी सुलझे ....सादर
कुछ उलझन नहीं है अनु ...
Deleteकेवल इस विषय पर परिचर्चा आवश्यक लगी ! आभार ..
एक ही बात कह सकता हूँ कि मन को समझना बहुत कठिन है.
ReplyDeleteThanks Sir, read your comment on my blog and got an opportunity to visit your page. It's really rich! Have heard a lot about you from Vidhi.
ReplyDeleteRegards
Mamta
स्वागत है आपका !
Deleteकल ही आपकी चर्चा हुई , आपकी परिपक्व और स्पष्ट विचार युक्त रचनाएं किसी को भी प्रभावित करने में सक्षम हैं ! आपसे नियमित लेखन की अपेक्षा है ...
शुभकामनायें आपको !
एक ही बात कह सकता हूँ कि मन को समझना बहुत कठिन है.
ReplyDeleteयह अंक ज़रूर आपके जीवन से कहीं न कहीं जुड़ा होगा ... बाकी सपने पूरे होते हैं या नहीं ... या सपनों का क्या मतलब होता है यह जानना दुरूह करी है ... रोचक प्रस्तुति ॥टिप्पणियाँ और रोचक बना रही हैं
ReplyDeleteऐसा ही लगता है ...
Deleteअतीन्द्रिय शक्तियों के बारे में ज्ञान की कमी भ्रम पैदा करती है ...
आभार आपका !
बड़े भाई!
ReplyDeleteमेरे जैसे बैंकर की समझ में वह आंकड़ा IOBO आ रहा है जो शायद नंबर के रूप में 1030 दिखा हो आपको.. एक भूखे आदमी को एक ऐसे कमरे में बंद कर डिया जहाँ सिर्फ एक छोटी सी ईंट भर सुराख थी.. जब उसे निकालकर पूछा गया कि उसे क्या दिखता था तो वह बोला FOOD! यकीन मानिए उस सुराख से उसे सिर्फ एक फ़्लैट दिखता था, जिसका नंबर था 400D!
लिहाजा ये अगर IOBO है तो हो सकता है कि अंतिम अक्षर को छोडकर आपका खाता इन्डियन ओवरसीज़ बैंक में हो/या कभी रहा हो!!
या इस अंग्रेज़ी के संक्षिप्ताक्षर को विस्तार करके सोचें..!!
सलिल भाई, आई ओ बी में खाता नहीं था , और नंबर में कोई गलती नहीं थी अविश्वसनीय तौर पर सपना रिपीट हुआ था अतः अच्छी तरह याद है !
Deleteवैसे बैंकिंग अंदाज़ पसंद आया !
@ प्रबुद्ध पाठक से अनुरोध है कि इस अछूते रहस्यमय विषय पर अपने विचार व्यक्त अवश्य करें -
ReplyDeleteबड़े भाई, हम जे कहने आये हैं कि हमारे भरोसे मत रहना :)
हमारे एक और बड़े भाई हैं, संबंधित विषय से संबंधित उनकी एक सीरिज़ का एक लिंक दिये जा रहे हैं वो जरूर काम का होगा। http://pittpat.blogspot.in/2010/02/6.html
अनुराग शर्मा विद्वान् हैं और मैं उन्हें गुरु जनों में से एक मानता हूँ .... उनसे मदद मांगते हैं !
Deleteवैसे अली भाई की विवेचना पर विश्वास होता है
आदरणीय सतीश जी, आपका सपना रोचक है। सपनों की (और हमारे दिमाग की) दुनिया वाकई विचित्र है और हर सपने का सार ढूंढ पाना लगभग असम्भव। कुछ अनूठे सपने मैंने भी देखे हैं जिनका कोई तार्किक स्पष्टीकरण नहीं है। रविजा जी के मनोवैज्ञानिक मित्र के स्पष्टीकरण का इंतज़ार है। सुज्ञ जी का सुझाया हुआ कोण भी रोचक लगा। सलिल जी की बात को आगे बढाते हुए कहूँ तो लूबो (loobo) व ओबूल (obool) अक्षर विन्यास पर ध्यान दीजिये, शायद कोई क्लू मिले। सपनों द्वारा भविष्यवाणी की बात पर मैं अब तक विश्वास नहीं कर सका हूँ इसलिये 10030 दिन (27+ वर्ष) के बारे मेंकुछ नहीं कहूँगा, लेकिन फिर भी आप ध्यान दे सकते हैं, शायद कुछ नया नज़र आ जाये। वैसे गणितज्ञों के लिये 10030 का घनमूल 21.57 और वर्गमूल 100.15 हैं।
Deleteअनुराग जी,
Delete@रविजा जी के मनोवैज्ञानिक मित्र के स्पष्टीकरण का इंतज़ार है।
मेरे मित्र ने आगे यह भी कहा था कि can be done if they are willing to come for consultation
मैने इस पंक्ति का उल्लेख नहीं किया क्यूंकि यह संभव ही नहीं...क्यूंकि अली जी जगदलपुर में हैं...तो सतीश जी दिल्ली में
और शायद जरूरत भी नहीं....क्यूंकि ये सपना उन्हें कोई परेशान तो नहीं कर रहा...बस एक उलझन सी है...जिसका समाधान इतना आसान नहीं.
मनोवैज्ञानिकों के काम करने के तौर तरीके से तो सब अवगत ही हैं...कितने सेशन करते हैं..सैकड़ों सवाल पूछते हैं...और उन्हीं सवालों से वे जबाब ढूंढ लेते हैं...जिनका हमें आभास भी नहीं होता.
@अनुराग शर्मा,
Delete२७+ वर्ष मुझे अधिक सटीक लग रहा `है , इस वर्ष जीवन में जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किये गए उनमें अपने लिए घर का निर्माण शामिल था ...
:)
sir...no mil gaya???
ReplyDeleteअभी ढूंढ रहे हैं :-)
Deleteसपनो का संसार बड़ा ही अजीबो गरीब हैं ..कभी -कभी मैंने खुद अपने सपने सच होते हुए देखे हैं ..बचपन का ऐक किस्सा याद आता हैं ----" हमारे घर एक पंडित जी रोज़ 'सीदा' ( आटा और दाल.सुखा ) लेने आते थे वो चुपचाप मुझसे मेरा सपना पूछते थे, मैं उस दिन आए हुए सपने का वर्णन कर देती थी ...कभी -कभी याद भी नहीं रहता था ? एक दिन मैने उनसे पूछ ही लिया ! तो जवाब मिला की-- "वो रोज़ 'सट्टा' लगाते हैं कभी -कभी पैसे नहीं मिलते पर अक्सर मिल जाया करते हैं " उस दिनों सट्टा क्या हें मैं .. जानती नहीं थी |"
ReplyDeleteमै सोचती हूँ जिस दिन मैं उन्हें कुछ बताती नहीं थी या यू ही गलत -शलत बता देती थी उस दिन उनका सट्टा नहीं खुलता था ..
तो यह सपने आज भी साइंस के लिए और हमारे लिए भी आश्चर्य ही हैं सतीश जी ...आपको भी एक बार उन नम्बरों को अजमाना चाहिए था ..हो सकता हैं वो सच होते ...
नंबर ही तो नहीं मिल रहा ....
Delete:-)
बिन ताले की चाबी लेकर फिरते मारे मारे। विक्टोरिया नम्बर ----
ReplyDeleteहा...हा...हा...हा....
Deleteयह गाना आजकी पोस्ट के लिए बिलकुल उपयुक्त है ...
अब आप आ ही गयी हैं तो कम से कम कुछ क्लू दे जाइएगा क्या पता कुछ भला हो जाए ..
mama, sapno me jo dikhta hai wo hamare ya kisi de dhoondne se nahi milta, par anayaas hi hamre saamne aa jata hai, sahi waqt par hame sapna yaad raha to theek warna wo aapke saamne se hawa ki tarha nikal jaata hai,
ReplyDeleteaisa hi ek wakya mere saath hua tha, muze aksar ek railway line aur sakdak saath saath dikhti thi aur itni baar dikhi ki poora raasta yaad ho gaya, aur hamesha train ek jagah rukti thi aur sadak paar karke ek ladki muzse milne aur paani pilane jaroor aati thi. ek din mai car me bareilly se kannoj pahli baar jaa raha tha aur uske baad muze kanpur bhi jaana tha, jab farrukhabad se kannauj ke liye aage bada to mai jis road par chal raha tha uske side me ek railway line bhi chal rahi the aur muze aisa bilkul nahi lag raha tha ki mai pahli baar aaya hu.aur mazedaar baat ye hai ki muze kisi se rasta poochne ki bhi jaroorat nahi padi kuki sapne me mai bahut baar aa chuka tha. aur jab se mai waha se wapas aaya tab se muze wo sapna kabhi dobara hani aaya.
mai aaj tak nahi samaz paya ki ye sapna ku aata tha..
raha sawal us ladki ka .....meri shaadi kanpur ki ek ladki se hi ho gai. but unfortunately geetanjali ki surat us ladki se nahi milti...
@ शिवानी ,
Deleteयह पूरी पोस्ट स्वप्न अर्थ जानने के लिए ही लिखी गयी है , ऊपर दिए गए कमेन्ट ध्यान से पढ़ते रहें और समझने का प्रयत्न करें ! देश के बेहतरीन विद्वान क्या लिख रहे हैं इसे अनुभव करें और ग्रहण करें मुझे विश्वास है कि काफी कुछ स्पष्ट होगा ...
शुभकामनायें !
Deleteजो विद्वजन यहाँ टिप्पणी दे रहे हैं, उनका लिखा पढने और समझने से पहले बेहतर होगा कि उनके नाम के जरिये क्लिक करके उनका प्रोफाइल पहले जाना जाय !
मेरी पोस्ट पर कई बार इन माननीय विद्वानों की प्रतिक्रियाएं मूल लेख से कहीं बेहतर होती रही हैं !
यही ब्लॉग लेखन की शक्ति और खूबसूरती है कि आपको बैठे बिठाए बेहतरीन विद्वान अपने ज्ञान को आपसे साझा करते हैं और नतीजा बेहद परिष्कृत विचारों से हम सब लाभान्वित होते हैं ! ...........
सतीश जी, आपका स्वप्न विमर्श रोचक बनता जा रहा है। मेरे पुत्र का एक मित्र है 'जीतेन'। उसे अपनी मोबाइल फोन बुक में लिख रखा है 'G-10'। याद कीजिए आपका कोई उस समय का बंगाली मित्र हो और वह आपका नाम 100,30 लिख विशिष्ट अंदाज देता हो।
ReplyDelete10030 और गड्डी दिखना, याद कीजिए यह 100-100 के 30 करारे नोटों की गड्डी तो नहीं जो आपका पहला अर्न हो?
अली साहब के अनुसार 4 का जोड तो बैठता है पर प्रश्न होता है, 4 का योग कईं संख्याओं में घटित हो सकता है। यह 10030 ही क्यों?
वैसे आपके ससुराल का मकान नंबर एन १३, आपके मकान नंबर ३४६ का योग 13 और इस स्वप्न संख्या में 13 का आना खुबसूरत संयोग है।
रश्मि जी नें सही कहा कि कईं सपने ज्वलंत इच्छाओं के परिणाम होते है। निश्चित ही आप संतोषी है किन्तु कुछ इच्छाएं ही मनुष्य मात्र की ज्वलंत होती है वे तीन प्रमुख है (स्त्री)साथी,धन और जमीन। गोरी का स्वप्न अली साहब को आया, गड्डी का स्वप्न आपको अब कोई बन्धु प्रोपर्टी के स्वप्न का उल्लेख करे तो कोई आश्चर्य नहीं :)
यही ईशारा माननीय सलिल जी की बात में गर्भित है, भोजन की तीव्रेच्छा में 400D को FOOD पढ़ा जाता है।
अनुराग जी नें भी एक सोच दी कि 10030 दिन जोडकर 27+ की उम्र की किसी घट्ना को याद किया जा सकता है।(obool) पर भी ध्यान दिया जा सकता है।
एक और बात भविष्य कथन की तरह……इस अंक खोज के प्रयास में आपको डिब्बे का नंबर १००२९ मिला, अर्थात् वह संख्या 10030 अभी घटित नहीं हुई, यह निकट भविष्य में ही घटने का संकेत हो सकता है।
@ सुज्ञ जी ,
Deleteसौतीश पहली बार ही सामने आया है भाई जी ....
अंक ज्योतिष के बारे में बहुत समझ नहीं है मगर यह सच है कि मेरे जीवन में अंक ४ एवं ८ का अधिकतर योग रहा है ...
२७+ वर्ष मुझे अधिक सटीक लग रहा `है , इस वर्ष जीवन में जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य किये गए उनमें अपने लिए घर का निर्माण शामिल था
सपने कभी न कभी हकीकत का रूप ले ही लेते हैं ...बहुत ही रोचक प्रस्तुति।
ReplyDeleteवाह!!रोचकआलेख सतीशजी,अच्छी प्रस्तुति........
ReplyDeleteMY RECENT POST...काव्यान्जलि ...: यदि मै तुमसे कहूँ.....
समय बिताने को अच्छी चर्चा है। जिस से कभी कुछ न निकलेगा।
ReplyDeleteमैं यहाँ आपसे सहमत नहीं भाई जी , कई नयी बाते सामने आई हैं और वैसे भी विषय में नयापन तो है ही ...
Deleteअपने बचपन में अक्सर एक स्वप्न मैं भी देखता था हवा के झोंके के साथ मैं उपर उडता चला गया, हवा का प्रवाह रुक गया और मैं पूरे वेग से नीचे की तरफ गिर रहा हूँ । बस...
ReplyDeleteन इसके पहले कुछ और न ही इसके बाद का कुछ याद आ पाया किन्तु उपरोक्तानुसार यह स्वप्न कई बार देखा । शायद आपके साथ इससे सम्बन्धित गुत्थी भी कुछ सुलझ जावे । और हाँ लाटरी टिकिट इन्दौर में देखने में नहीं आ रहे हैं वर्ना आपके लिये 10030 नंबर का टिकिट खरीदकर आपको गिफ्ट करने में मुझे भी बेहद प्रसन्नता होती । आभार सहित...
आपका आना ही आनंद है भाई जी ...
Deleteआप कहें तो आपके लिये वह कम्पार्टमेन्ट ढूढ़ते हैं।
ReplyDelete
Delete@ आप कहें तो आपके लिये वह कम्पार्टमेन्ट ढूढ़ते हैं।
हा...हा...हा....हा....हा....हा.....
मैं भूल ही गया था कि ट्रेन ओपरेशन और ट्राफिक ( ट्रांसपोर्टेशन ) के चीफ हमारे मध्य में ही मौजूद हैं ! यह कमेन्ट ब्लॉग जगत की ताकत का परिचायक है प्रवीण भाई...
आभार आपके स्नेह का !
बचपन में पीपल के पेड के नीचे सोते समय एक स्वप्न मेरे भी अनेक बार देखने में आया - हवा के वेग के साथ मैं उडता जा रहा हूँ अचानक हवा का चलना बन्द हो गया और मैं पूरे वेग से नीचे गिर रहा हूँ । न इसके पहले का और न ही इसके बाद का कुछ याद आता है किन्तु इस हिस्से को अनेकों बार देखा हुआ याद है । शायद आपके स्वप्न रहस्य के साथ यह गुत्थी भी कुछ सुलझ जावे । इन्दौर में लाटरी टिकिट बिकते नहीं दिखते वर्ना आपके लिये 10030 नं. का टिकिट ढूंढकर आपको गिफ्ट करने में मुझे बेहद प्रसन्नता होती । आभार सहित...
ReplyDeleteसतीश जी , वैसे तो मुझे स्वप्नों कए बहुत मतलब तो नही पता , मगर हाँ जितना भी थोडा बहुत जानती हूँ उस आधार पर यह कह सकती हूँ कि सस्वप्न हमारी जिन्दगी से जुडे अवश्य होते हैं , कभी यह हमारे भविष्य की और इशारा करते हैं और कभी भूत काल में हुयी घटनाओं की ओर..
ReplyDeleteजहाँ तक आपके स्वप्न की बात हैं , तो यह नोटों की गड्डियां शायद यह इशारा कर रही थी , आपका भविष्य एक सुखद एंव सम्पन्न है , अवसर आपके आस पास है, जिन पर मेहनत से आपको अपना नाम लिखना है .... अंको का भी अपना महत्व होता है शायद १००३०= ४ आपके जीवन पर अपना प्रभाव रखता हो...
चार नंबर की बात सही है अपर्णा जी ..
Deleteहा.....
ReplyDeleteसतीश जी यह क्या किया .....?
इतना कीमती सपना जग जाहित कर दिया ?
किसी ने चुरा लिया तो .....??
अजी छोडिये इसका मतलब है सौ बार तीस मार खाँ बनेंगे आप .....:))
या....
सौ-सौ की तीस गड्डियाँ .....:))
अब भी मौका है तुरंत लाटरी ka टिकट खरीद लें इससे पहले कि मैं खरीद लूँ ....;))
(मुझे तो सपने में हमेशा एक कब्रिस्तान दिखाई देता है और उस कब्रिस्तान में एक अपंग घसीट कर चलने वाला व्यक्ति , बड़ा डरावना सा सपना है इसलिए दिन में इसे याद भी नहीं करती ....)
अपने सपने वाले आदमी से मिलवाइए न कभी ...:)
Deleteआभार आपका !
स्वपन रहस्य पर न जाने कितना कुछ लिखा पढ़ा जा चुका है और निष्कर्ष वही ढाक के तीन पात...अच्छा है इस बहाने मित्र इक्कठा हुए, बातचीत हुई...रोचकता बनी रही और बनी रहे पूरे १००३० मिनटों तक...अनेक शुभकामनाएँ.
ReplyDeleteशुक्रिया समीर भाई ...
Delete१००३० मिनट तो मिलेंगे ही ...
केवल आपका स्वप्न वाला संस्मरण ही नहीं अपितु टिप्पणियां पढकर भी बहुत मज़ा आया... बहुत उत्सुकता हो रही है, जब भी यह पहेली हल हो तो अपने इस मित्र को अवश्य सूचित करना....
ReplyDeleteइस नंबर को तलाश तो करो ...
Delete:-)
अपने तो अपने होते हैं,
ReplyDeleteबाकी सब सपने होते हैं...
जय हिंद...
एक ठो नया मोबाइल नम्बल ले लीजिए ना .....
ReplyDelete*****10030
कैसा रहेगा ?
एक ठो नया मोबाइल नम्बल ले लीजिए ना .....
ReplyDelete*****10030
कैसा रहेगा ?
यह आइडिया बुरा नहीं होगा प्रवीण भाई ...
Deleteया फिर 10029 स्त्रियों से प्रणय का जुगाड़ कीजिये :)
ReplyDeleteटीप :
10029 लिखा सो भाभी के सामने इसे कैरेक्टर सर्टीफिकेट की तरह से यूज मत करियेगा कि ये देखो अली भाई भी मान रहे है कि सतीश जी ने भाभी से अलग कोई लफड़ा नहीं किया :)
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फोटो में मुस्कराहट मौजूद हो तो कमेन्ट के दूसरे उत्तर समझ में नहीं आते :)
Deleteआदरणीय सतीश जी मुझे लगता है कि यह तरह का मनोरोग है।
ReplyDeleteइस तरह की पुस्तकें या अलेख हमें भ्रमित करते हैं।
आश्यर्च तब होता है कि जब कोई विद्वान इन पर विश्वास करता है,
जिस कारण से इन बातों को बल मिलता है।
यदि सपने हकीकत होने लगते तो अब तक इनका नाम बदल चुका होता।
फिर भी आलेख रोचक एवं मनोरंजक है।
एक अज्ञानी भला क्या समीक्षा करे आप के इस ख़्वाब की :)
ReplyDeleteयदि आप की दृष्टि में ये स्वप्न सुंदर है तो संजो कर रखिये वर्ना भूल जाइये
लेखन अवश रोचक लगा
सपनों की इस फंतासी दुनिया का रहस्य कभी न कभी तो खुलेगा ... विज्ञानं को कुछ और तरक्की करने दे ....
ReplyDeleteहकीकत का रूप ले ही लेते हैं सपने कभी न कभी
ReplyDeletekuch swapn jaldi fal dete hai,kuch thoda samay lete hai,aur kuch thoda adhik samay lelete hai,yeh is baat pr depend karta hai ki ki ratri k kis peher me swapn dekha gya.but kuch sapne hamare man me chal rahi ichao ko darshane k liye b nindra awastha me
ReplyDeleteswapn rup me prakat hote h,jinka bhavishya se koi lena dena nhi hota.