Friday, June 20, 2014

विदेश जाने में डर..- सतीश सक्सेना

जीवन की आपाधापी में ३६ साल की नौकरी कब पूरी हो गयी,पता ही नहीं चला ! घर की जिम्मेवारियों और बच्चों के लिए साधन जुटाने में, समय के साथ दौड़ते दौड़ते अपने लिए समय निकालना बहुत मुश्किल रहा ! कई बार लगा कि जवानी में जो समय अपने लिए देना चाहिए शायद वह कभी दे ही नहीं पाए ! अक्सर इसका कारण पूर्व नियोजित लक्ष्य,बच्चों के भविष्य,की आवश्यकता पूरा करते करते धन का अभाव रहा अथवा अपने मनोरंजन के लिए आवश्यक हिम्मत और समय ही नहीं जुटा पाए !
बचपन में सुनता था कि जवाहर लाल नेहरु के कपडे पेरिस धुलने जाते थे ! धनाड्य लोगों के किस्से सुनकर उनके आनंद को, हम निम्न मध्यम वर्ग , महसूस कर, खुश हो लेते थे ! उड़ते हवाई जहाज की एक झलक पाने को, खाना छोड़कर छत पर भागते थे कि वह जा रहा है एक चिड़िया जैसा जहाज और फिर अपने सपने समेट कर, चूल्हे के पास आकर, रोटी खाने लगते थे ! उन दिनों उड़ते हवाई जहाज में बैठने की, कल्पना से ही डर लगता था !

पेरिस रेलवे स्टेशन 
गौरव अपनी कंपनी कार्य से, जब जब देश से बाहर गए हर बार उसका अनुरोध रहता कि पापा एक बार आप जरूर आ जाओ विभिन्न देशों की संस्कृति, रहनसहन और खानपान  में  बदलाव आपको अच्छा लगेगा ! हर बार व्यस्तता और छुट्टी न मिलने का बहाना करते हुए मैं, उन्हें असली बात कभी नहीं बता पाता था !

मुख्य कारण दो ही थे, पहला पता नहीं कितना खर्चा कितना होगा और दूसरा विदेशियों के परिवेश में घुलने, मिलने, बात करने में, आत्मविश्वास की कमी ....
और यह भय इतना था कि अगर यूरोप के टिकट अचानक बुक नहीं किये जाते तो शायद मैं अपने जीवन काल में कभी विदेश यात्रा का प्लान नहीं बना पाता !
यह प्रोग्राम अचानक ही बन गया जब नवीन ने वियना से अपने माता पिता के साथ मुझे भी वियना आने का
वेनिस की पानी से लबालब गलियां 
निमंत्रण दिया था ! उसके पत्र मिलने के साथ ही, अप्पाजी ने, अपने साथ साथ मेरा  टिकट भी, मेरे द्वारा कभी हाँ कभी न के बावजूद , बुक करा लिए थे ! उस शाम आफिस से लौटने पर पहली बार लगा कि मैं वाकई यूरोप यात्रा पर जा रहा हूँ ! 
उसके बाद, सफर पर जाने के लिए आवश्यक, बीमा कराया गया ! 15 दिन के इस सफर के लिए, आई सी आई सी आई लोम्बार्ड ने  लगभग ५५०० रुपया लिया था ! इस बीमा के फलस्वरूप हमें बीमारी अथवा किसी अन्य  वजह से होने वाली क्षति का मुआवजा शामिल था !
मगर जब पहली बार, विदेश पंहुच गए तब जाकर पता लगा कि बेबुनियाद भय, आत्मविश्वास को किस कदर कम करता है ! अतः सोचा कि मित्रों में अपना अनुभव अवश्य बांटना चाहिए ताकि ऐसी स्थिति और लोग न महसूस करें !
वियना ट्राम 
अधिकतर मेरे मित्र लगभग हर वर्ष देश भ्रमण पर खासा पैसा खर्च करते हैं मगर विदेश जाने के बारे में प्लानिंग की छोड़िये, अपने घर में इस विषय पर चर्चा भी नहीं करते हैं और यह सब आत्मविश्वास और जानकारी के अभाव के कारण ही होता है !  

स्वारोस्की फैक्ट्री ऑस्ट्रिया 
शायद बहुत कम लोग जानते हैं कि विदेश जाएँ या न जाएँ मगर हर परिवार के पास पासपोर्ट होना बहुत आवश्यक है, यह एक ऐसा डोक्युमेंट हैं जिसके जरिये भारत सरकार आपके बारे में, यह सर्टिफिकेट देती है कि पासपोर्ट धारक भारतीय नागरिक है तथा इस परिचयपत्र में आपके नाम और पते के अलावा जन्मतिथि,  तथा जन्मस्थान लिखा होता है ! किसी भी देश में प्रवेश करने  की परमीशन(वीसा) के लिए, इसका होना आवश्यक है ! यह कीमती डॉक्यूमेंट आपके घर के पते और जन्मतिथि के साथ आपके परिचय पत्र की तरह भी भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है !

इंटरलेकन, स्विट्ज़रलैंड
यह जानना आवश्यक है कि विदेश यात्रा हेतु , अगर दो माह पहले, किसी भी देश की फ्लाईट टिकिट बुक करायेंगे  तो लगभग आधी कीमत में मिल जाती है ! दिल्ली से पेरिस अथवा स्वित्ज़रलैंड जाने का सामान्य आने जाने का एक टिकट, लगभग ३५ हज़ार का पड़ता है जबकि यही टिकट तत्काल लेने पर ६० हज़ार का आएगा ! सामान्यता एक अच्छा टूरिस्ट होटल ३००० रूपये प्रति दिन में आराम से मिल सकता है !
अगर आपकी ट्रिप ४ दिन की है तो एक आदमी के आने जाने का खर्चा लगभग मय होटल ४५०००.०० तथा भोजन और पब्लिक ट्रांसपोर्ट  मिलकर ५००००-६०००० रुपया

में ! अगर आप यही ट्रिप किसी अच्छे टूर आपरेटर के जरिये करते हैं तो आपका कुछ भी सिरदर्द नहीं, साल दो साल में  ५० - ६० हज़ार रुपया बचाइए और ४ दिन के लिए पेरिस, मय गाइड घूम कर आइये !

जहाँ तक खर्चे की बात है , हर परिवार में पूरे साल घूमने फिरने और बाहर खाने पर जो खर्चा होता है ,उसमें हर महीने कटौती कर पैसा बचाना शुरू करें तो कुछ समय में ही आधा पैसा बच जायेगा, बाकी का इंतजाम करने में बाधा नहीं आएगी !एक बार विदेश जाने के बाद आपके और बच्चों के आत्मविश्वास में जो बढोतरी आप पायेगे, उसके मुकाबले यह खर्चा कुछ भी नहीं खलेगा ! 
यूनाइटेड नेशंस , जेनेवा
अक्सर हम मरते दम तक अपनी सिक्योरिटी के लिए धन जोड़ते रहते हैं ,और बुढापे में , महसूस होता है कि जीवन में , और भी बहुत कुछ देख सकते थे जो  कर ही नहीं पाये और इतनी जल्दी जीवन की रात हो गयी ! मेरा अपना सिद्धांत है कि बेहद उतार चढ़ाव युक्त जीवन को, जब तक जियेंगे, हँसते मुस्कराते जियेंगे ! एक बात हमेशा याद रखता हूँ कि
  
" न जाने किस गली में जिन्दगी की शाम हो जाए ..."
        
विदेश जाकर अच्छी इंग्लिश न बोल पाने के लिए न बिलकुल न डरें , आप वहाँ पंहुच कर पायेंगे कि अधिकतर जगह पर, इंग्लिश जानने वाले बहुत कम हैं ! आपको लगेगा कि आप ही सबसे अच्छी इंग्लिश / अंगरेजी बोलते हैं :-))
जिंदगी जिंदादिली का नाम है !!

24 comments:

  1. :-) बहुत बढ़िया पोस्ट!!
    हम जैसों के लिए तो शानदार :-)

    सादर
    अनु

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  2. आपने लिख दी हमारी बात भी :) आभार ।

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  3. बहुत हीं आनन्दित करता अनुभव ज्यादातर लोग आप जैसे होते है शायद हम भी उनमें से एक है | पर आपका एक भुला सपना पूरा हुआ उसकी बधाइयाँ |

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  4. बहुत अच्छी और उपयोगी पोस्ट -हम भी लाईन में हैं भाई

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  5. वाह ।आप भाग्यशाली हैं मित्र।

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  6. हर जगह अपनी बात समझने समझाने के लिए राह निकल ही आती है ....

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  7. आप की आत्मविश्वास से लबरेज़ इस पोस्ट को पढ़ कर मुझ जैसे कई लोगों के दिल में विदेश यात्रा का स्वप्न तो ज़रूर जग गया होगा...पर कभी-कभी लगता है अपने देश को भी तो ठीक से देख नहीं पाये हैं...इन्हीं व्यस्तताओं के चलते...जिंदगी जिंदादिली का नाम है...घूमना ज़रूर चाहिए...जिसके बजट में जो आ जाए...विदेश यात्रा की बारीकियां सबसे साझा करने के लिए धन्यवाद...बहुत ही रोचक और ज्ञानवर्धक लेख...बधाईयाँ...

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  8. नया देश परिवेश और भाषा ,पहली बार जाने में ऐसा लगना स्वाभाविक है(देखो न, लड़कियाँ ससुराल जाने में कितना घबराती हैं).फिर तो आदत बन जाती है कि जैसे हम हैं वैसे ही ये लोग भी . जीवन जीने के कितने ढंग हैं दुनिया में, नए-नए अनुभव दृष्टिकोण को उदार और व्यापक बनाते हैं.कहीँ घूमने का मौका कभी मत छोड़ना !

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  9. अच्छी जानकारी..... दूर से कोई समस्या बड़ी लगती है जब कि उतनी बड़ी होती नहीं है....

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  10. सुना है पेरिस बहुत सुन्दर है और स्वित्ज़रलैंड तो पृथ्वी स्वर्ग!!
    खूब घूम फिर लीजिये और तस्वीर सहित यात्रा का वृतांत पोस्ट कीजिये। . इसी बहाने हम भी देख-सुन कर मन को फ़िलहाल संतुष्ट दें। ।
    देश दुनिया घूम -फिर आने का मन तो बहुत होता है लेकिन अभी तो बच्चों के साथ लगे है.. जाने कब मौका मिले। .

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  11. रोचक संस्‍मरण। आपने आत्‍मविश्‍वास बढ़ाने के लिए अच्‍छा काम किया।

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  12. बहुत उपयोगी जानकारी

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  13. पहली विदेश-यात्रा की बधाई । इसी बहाने हमें भी सुन्दर दृश्य देखने व अनुभव करने का मौका मिला । वास्तव में पैसे का अपने लिये अच्छा सार्थक उपयोग है ।

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  14. यात्रा के सारे पहलुओं को अच्छे से छुआ है आपने.

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  15. प्रेरक संस्मरण सुन्दर चित्रों के साथ !
    मेरी बहन अमेरिका में रहती है अक्सर वहां आने के लिए अनुरोध करती है किन्तु जिम्मेदारिया कुछ ऐसी थी कि कभी विदेश जाने के लिए सोचा ही नहीं, अब तो बच्चे भी अपने पैरों पर खड़े हुए है सो कुछ दिन पूर्व ही पासपोर्ट के लिए अप्लाई भी किया है देखते है कब विदेश जाने का योग बनता है :) अच्छे निर्देश दिए है, आभार !

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  16. विदेश भ्रमण की बहुत-बहुत बधाई .....बड़िया टिप्स दिए हैं आपने भाई जी ....मेरा भी जाने से पहले येही हाल था ...अब तो अपने बेटी के पास कैनाडा में दो दफा घूम आया और वहां उसने भी बहुत घुमाया ....
    बहुत अच्छा किया आपने ...जिन्दगी के कुछ पल अपने लिए भी रखो | स्वस्थ रहें|

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  17. बढ़िया पोस्ट!! बधाइयाँ |

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  18. विदेश यात्रा पर बधाई..रोचक और काम की जानकारी

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  19. बहुत ही बढ़िया पोस्ट....कितने लोगों के लिए ये काम की जानकारी है !!!

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  20. सुन्दर जानकारी । मुझे विदेश जाने में डर इसलिए नहीं लगा कि मैं अपनी संस्था " अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन " के साथ जाती हूँ , जिसमें सभी मेरे मित्र हैं पर मैं दायित्व - निर्वाह के बाद ही विदेश जाना चाहती थी , क्योंकि मेरे पास भी पैसे की कमी थी । अब मैं बच्चों की ओर से निश्चिन्त हूँ ,अब मैं वर्ष में एक बार विदेश जाती हूँ । 2012 में मैं " श्री लंका " गई , 2013 में " "थाईलैंड" और अब " मलेशिया " जा रही हूँ । विदेश में घूमते हुए , मुझे ऐसा लगता है जैसे मैं , भारत में ही घूम रही हूँ , पता नहीं क्यों ऐसा लगता है जैसे यह सब कुछ देखा हुआ है पर फिर भी मैं अपनी सहेलियों के साथ , बहुत एन्जॉय करती हूँ ।

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  21. सुंदर, रोचक और उपयोगी विवरण, जीवंत तस्वीरें.  बहुत अच्छा लगा आपका ये अनुभव. पहली विलायत यात्रा पर हार्दिक बधाई.  ब्लॉग पर प्रतिक्रिया के लिए आभार.

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  22. विदेश भ्रमण की बहुत-बहुत बधाई .....उपयोगी जानकारी...........

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  23. आपकी विदेश यात्रा , निश्चित रूप से आपने ही करी लेकिन आपने जो जानकारी दी है वो बहुतही लाभदायक है जो औरों को प्रोत्साहित भी करेगी और गाइड भी करेगी !

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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