Tuesday, October 9, 2018

सावधान ! रनिंग सीखने में लापरवाही ,आपकी जान लेने में भी समर्थ है - सतीश सक्सेना

दो दिन पहले इंग्लैंड में हो रहे कार्डिफ हाफ मैराथन की फिनिश लाइन पर पंहुच कर दो नौजवानों को हार्ट अटैक हुआ और वे बच नहीं पाए , इन दोनों McDonald एवं Dean Fletcher की उम्र क्रमश 25 और 32 वर्ष थी , जिसमें Mcdonald पहली बार हाफ मैराथन दौड़ रहे थे ! रनिंग वर्ल्ड के लिए यह घटना बेहद दुखद और सबक देने वाली है जिसमें सही प्रशिक्षण और जानकारी के अभाव में, दो नौजवानों की जान चली गयी जिन्होंने अभीतक जीवन सही से शुरू भी नहीं किया था !
(https://www.bbc.com/news/uk-wales-45789771)

आज के समय में दौड़ना आना मानवीय शरीर के लिए, एक वरदान है,आलसी शरीर बहुत जल्द फैट इकट्ठा
करने में समर्थ है और मोटापा ह्रदय की धमनियों में ब्लोकेज, बाकी का काम डायबिटीज पूरा कर देता है ! आज के समय में रनिंग के फायदों के प्रति लोगों की समझ  बढ़ी है और लोग रनिंग प्रतियोगिताएं में भरी संख्या में बिना रनिंग समझे और सीखे शामिल होने का प्रयत्न करते हैं !
CoachRavinder Singh भारतीय runners में एक सम्मानित नाम है , एनसीआर में प्रमुख आयोजक हैं जिन्होंने इस क्षेत्र में बहुत काम किया है ! मैंने उनकी कई पोस्ट पढ़ी जिनमें वे खिन्न मन से लिखते रहे कि इन्हें आश्चर्य होता है जब आजकल के नवोदित रनर पहले ही वर्ष हाफ मैराथन और मैराथन दौड़ने का प्रयत्न करते हैं ! वे कहते हैं कि उन्होंने अपना पहला मैराथन पूरा करने के लिए, 5 वर्ष लगाए थे !

अधिकतर नौजवान पहले हाफ मैराथन में जोश के साथ अपने परिवार जनों या मित्रों को अपना रिकॉर्ड दिखाने के लिए जरूरत से अधिक दौड़ने का प्रयत्न करते हैं जो उनके लिए कई बार जीवन भर के लिए अपंगता, इंजुरी अथवा असामयिक ह्रदय आघात का कारण बनता है !


मैंने 61वर्ष की उम्र में दौड़ना सीखना शुरू किया , एब्नार्मल पल्सरेट के चलते मेरी कोशिश रहती कि अपनी गति को बिना बढाए,दौड़ता रहने की प्रक्टिस जारी रखूं ! पिछले तीन वर्ष में लगभग 4500 km दूरी जिसमें 25 से अधिक हाफ मैराथन (21Km ) दौड़ चुका हूँ मगर अभी तक अपने आपको मैराथन 42km दौड़ने के लिए फिट नहीं मानता हूँ !

आज सुबह मैंने लम्बा दौड़ने के लिए संकल्प लेते हुए 17 km की दौड़ लगाई थी और यह पूरी दौड़ बिना हांफे मात्र 300 ml पानी के साथ पूरी हुई ! इस पूरी दौड़ में मैंने अपने दिमाग से एक चीज हटाये रखी कि मैं दौड़ रहा
हूँ और कहाँ तक दौड़ना है ! असली दौड़ वाही मानी जाती है जिसमें रनर को यह महसूस न हो कि वह दौड़ रहा है , ध्यान केन्द्रित पैरों पर हो अपने हाथों पर हो या अपने मूव होते कन्धों के रिदम पर हो , और आपको अहसास भी नहीं होगा कि आपने दौड़ पूरी कर ली है !

21km लगातार दौड़ने का अर्थ पूरे शरीर को लगभग ढाई घंटे तक जबरदस्त उथलपुथल का अहसास देना है इतनी देर तक दौड़ने के लिए शरीर की मसल्स में मजबूती के साथ लचीलापन और भरपूर पानी और साल्ट होना चाहिए ! इतनी देर दौड़ने पर लगभग तीन लीटर पसीना बहता है जिसके जरिये शरीर से बहुत अधिक मात्रा में मग्निसियम, कैल्शियम, पोटेशियम जैसे साल्ट निकल जाते है ! लगातार ढाई घंटे तक शरीर और मस्तिष्क में बॉडी वेट इम्पैक्ट के कारण कम्पन होते रहते हैं साथ ही हर उठकर गिरते कदम पर शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट पड़ता है जिसे घुटनों के जॉइंट झेलते हैं ! इतनी जबरदस्त धुनाई इंसान को तभी करनी चाहिए जब वह अपने शरीर को इस योग्य बना ले और मानसिक तौर पर भी तैयार हो ! जल्दवाजी अक्सर घातक होती है अथवा पीड़ादायक इंजुरी जिससे महीनों जान नहीं छूटती ! मगर यह याद रहे कि इसे सीखने का अर्थ पूरे जीवन डायबिटीज और ह्रदय रोगों से शर्तिया बचाव एवं मेडिकल व्यवसाइयों के चंगुल से दूर रहना है सो दौड़ना सीखना बेहद आवश्यक है !

अंत में दौड़ने के लिए आवश्यक बातें दुबारा :
-एक रात पहले से पानी की मात्रा बढ़ा दें पानी आपके अंगों को लचीलापन देता है !
-सप्ताह में दौड़ चार दिन से अधिक न रखें लम्बी दौड़ के बाद अगले दिन आराम करना आवश्यक है
-सप्ताह में एक दिन साईकिल चलाना आवश्यक है इसके जरिये वे कमजोर मसल्स भी मजबूत होंगे जिनका उपयोग रनिंग के दौरान कम होता है अगर ऐसा न किया तब जांघों में विभिन्न तरह के दर्द महसूस होंगे जिस कारन आपको रनिंग करना मुश्किल होगा
-मसल्स इंजुरी से बचने के लिए, runner के लिए पहले और बाद की एक्सरसाइज करनी बेहद आवश्यक हैं यह एक्सरसाइज इन्टरनेट पर उपलब्ध हैं !
-जीपीएस वाच हो तो अच्छा है यह आपके रनिंग रिकॉर्ड को सहेजने में मददगार होगी जो भविष में आपको हिम्मत और प्रेरणा देगा
-हर रनर को पानी में नमक और नीम्बू क्रेम्प्स से बचने में मददगार हैं !
- अगर आप पांच किलोमीटर दौड़ने की प्रक्टिस कर रहे हैं तो सप्ताह में आपका एवरेज 10 km का होना चाहिए इसी तरह 10km रनर के लिए कम से कम 20 km हर सप्ताह और 21 km की ट्रेनिंग के लिए 42 km प्रति सप्ताह दौड़ना ही चाहिए !

एक तड़प सी उठती रही
अक्सर हमारी सांस से ,
जब तक रहेंगे हम यहाँ
कुछ काम होंगे,शान से !
गीत कुछ,ऐसे रचें जाएँ ,
जो सब के मन बसें !
हम विदा हो जाएँ तो, पदचिन्ह रहने चाहिए !

बात तो तब है कि वे
जगते रहे हों रात से !
और दरवाजे सजे हों 
प्यार, बंदनवार से !
आहटें पैरों की सुनकर,
साज़ भी थम जाएँ जब,
देखकर हमको वहां , कुछ ढोल बजने चाहिए !

Monday, October 1, 2018

तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश सक्सेना

"ऊर्जा को उसकी जड़ों तक पहुँचाने के लिए शरीर को अस्त व्यस्त कर देने वाली विधियों की ज़रूरत है, दौड़ना उन में से एक बेहतरीन विधि मानती हूँ मैं " सुमन पाटिल के इस कमेन्ट ने मुझे अपने तीन वर्ष दौड़ने के अनुभव के बारे में सोंचने को मजबूर कर दिया !

अभी तक साइंस,शरीर के बारे में नौसिखिया स्टेज पर ही है कि वे कौन से कारण हैं कि यह शारीरिक मशीनरी 100 वर्ष तक बिना थके चलने में समर्थ है ! बिना साइंटिफिक बुद्धि का उपयोग किये, हम सोंचें तो इसे सौ वर्ष चलाने के लिए जंगलों खेतों से जो भी खाने योग्य मिले वह थोड़ा सा भोजन, जल और हवा ही काफी है ! शरीर की बनावट ही ऎसी है कि इस जलपान को जुटाने के लिए आपको घर से निकलकर चलना पडेगा और चलते समय पैरों का उपयोग होगा तो हाथ खुद ब खुद चलने लगेंगे सारी मशीनरी हाथ पैरों द्वारा मेहनत करने पर ही निर्भर है 


शरीर के अधिकतर महत्वपूर्ण अंग पेट के अन्दर हैं उनको हर हालत में व्यस्त रखना आवश्यक है ! आधुनिक युग में मानव ने धन का उपयोग खुद को आराम देने के लिए करना शुरू किया और श्रम को निर्धनों की मजबूरी मान लिया ! इस मूर्खता पूर्ण सोंच से उनका शरीर तो बेडौल हुआ ही, शक्ति लगभग समाप्त ही हो गयी !

मानवीय शरीर को दुरुस्त रखने के लिए, आवश्यक हवा, भोजन, पानी के लिए चलना और दौड़ना बेहद

आवश्यक हैं दौड़ने से ही पेट (बॉडी कोर) के अंदरूनी अंगों में कम्पन होगा, उनमें जमा चर्बी पिघलेगी एवं वे अंग लम्बे समय तक शरीर को शक्ति देने योग्य रहेंगे ! आज आलसी लोगों से धन कमाने का सबसे बढ़िया तरीका,उन्हें विज्ञापन दिखाते रहिये कि चिंता न करें उनकी बरसों के आलस्य से पैदा बीमारी और मोटापे को ठीक करने के लिए १ ग्राम की मेडिकल गोली काफी होगी और उस डरपोक और काहिल इंसान की समझ को, बरसों तक जिन्दा रहने का एक फर्जी तरीका मिल जाता है !

लोग उम्रदराज होते ही सीखना बंद कर देते हैं और आने आसपास के हर व्यक्ति को सिखाने में और उसे अपना शिष्य बनाने में लग जाते हैं ! उन्हें लगता है किउनके प्रभामंडल से अधिक प्रतिभा और कहीं है ही नहीं काश वे अपनी बेवकूफियों को बताने वालों का सम्मान कर सकते तो निस्संदेह समझ के साथ उनकी उम्र में भी इजाफा होता !

मजेदार बात यह है कि यह सोंच मूर्खों में हो, ऐसा नहीं है, यहाँ के बड़े बड़े तथाकथित विद्वान् एवं सैकड़ों पुरस्कार पाए और आगे का जुगाड़ भिड़ाते , चेलों को आशीर्वाद देते मूर्ख गुरुजन, शामिल हैं ये जाहिल लोग अपने ऊपर मंडराते खतरे को देख ही नहीं पाते सिर्फ अपने जुगाडू नाम पर बजती तालियों से शक्ति पाकर खुश हो जाते हैं काश वे अपनी असमय ह्रदयघात से हुई मौत पर नकली आंसू बहाते अपने मित्रों को देख पाते तो उन्हें अहसास होता कि उन्होंने विद्वता के नशे में अपने ऊपर निर्भर परिवार जनों के साथ कितना बड़ा धोखा किया है !

किसी भी उम्र में सीखना अपमान नहीं है बल्कि समझदारी है इससे निस्संदेह आपका फर्जी आत्मविश्वास, वास्तविक रूप में निखरेगा अपने जीर्ण होते मजबूत शरीर को निखारने के लिए, मेहनत करना सीखिये उसे लम्बी दूर तक दौड़ना सिखाइए !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

असंभव कहाँ, मानवी कौम में कब ?
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

सीढियां चढ़ते समय फूलती साँस नजरंदाज़ न करें -सतीश सक्सेना

अगर हार्ट अटैक एवं डायबिटीज से बचना चाहते हो तो पसीना निकलने तक की मेहनत करना सीखना होगा ! धन का उपयोग कर अपने शरीर को आराम देने वाले लोग जान लें कि अभी तक किसी भी खतरनाक बीमारी का, कोई भी इलाज नहीं जो पैसा देकर बीमारी ठीक कर, उम्र बढ़ा दे !
अगर आप सीढियां चढ़ते समय अपनी उखड़ती सांसों को नज़रन्दाज़ कर रहे हैं तो आप अपने आपको जबरदस्त धोखा दे रहे हैं !
अगले अटैक में ऑपरेशन थिएटर पंहुचते ही बचे जीवन में मजबूत आवाज में बात करने लायक नहीं रहेंगे !
अधिक उम्र में भी आसानी से दौड़ना सीखा जा सकता है टहलना और अखबार पढ़ना छोड़, शरीर से पसीना बहने तक, मेहनत करना सीखना ही होगा अन्यथा अधिक उम्र में दुर्दशा पक्की है !
गली मोहल्ले के रायचन्दों से बचें , हाथ पैरों को मेहनत करने के लिए बनाया गया है , इसका कोई विकल्प नहीं !
आइये, रनिंग सीखकर हम अपने आन्तरिक अंगों को , उत्पन्न कम्पनों के जरिये, मजबूत और रोग मुक्त बनाएं ! अंत में मेरी रचना की कुछ लाइनें पढियेगा ....

ये जीवन जटिल हैं,समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !
उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !
अगर जीना है आओ हंसकर खुले में
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !
यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !
असंभव कहाँ, मानवी कौम में कब ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

Thursday, September 20, 2018

रनिंग टिप्स - सतीश सक्सेना

-रनिंग सीखे बिना, दौड़ने की कोशिश करना, अधिक उम्र वालों के लिए घातक हो सकता है !
-अधिकतर प्रौढ़ व्यक्तियों या "समझदार" व्यक्तियों को दौड़ना नहीं आता है वे बच्चों की तरह, हांफते, रुकते, टहलते, दौड़ने का प्रयास करते हैं जिससे उनके हृदय पर विपरीत असर पड़ता है ! उन्हें लगता है कि रनिंग में सीखने जैसी क्या बात है !
- अगर रनिंग करते समय आनंद नहीं आ रहा तो वह रनिंग आपके हृदय को स्वस्थ नहीं बल्कि कमजोर बनाएगी इसीलिए शरीर को रनिंग सिखानी आवश्यक है कि उसे उसमें आनंद आये !


-अधिक उम्र वालों को स्मूथ रनिंग सीखने में, लगभग 2 से 3 वर्ष लगते हैं जो जल्दबाजी करते हैं उनकी रनिंग जल्द ही बंद हो जाती है !
- मैं 3वर्ष में 25 से अधिक बार हाफ मैराथन के साथ कुल 4285 km दौड़ चुका हूँ और अब भी खुद को रनिंग का जानकार नहीं समझता, मेरा हर नया रन एक नया सबक देता है !
-जब भी दौड़ते समय हांफने लगें मानियेगा कि आप ट्रेनिंग से अधिक तेज दौड़ने का प्रयास कर रहे हैं और शरीर रजिस्ट कर रहा है सो शरीर से जबरदस्ती नहीं करनी !
-आप लगातार 5 मिनट तक न दौड़ें बल्कि 2 मिनट दौड़ें और अगले चार मिनट वाक् करें जब सांस व्यवस्थित हो जाए तब दो मिनट फिर दौड़ें और फिर चार मिनट वाक, यह क्रम दुहराएँ !
-दौड़ते समय शरीर को शक्ति ऑक्सीजन से मिलती है सो दौड़ते समय सांस लेने का एक रिद्म बनता है जिससे मस्तिष्क और फेफड़ों को बेहतर एवं अधिक मात्रा में ऑक्सीजन मिलती है ! जो सही से सांस नहीं लेते वे जल्दी थक जाएंगे
-दौड़ने से पहले व्यायाम और एड़ी पंजें की स्ट्रेचिंग करें !
-पानी दौड़ के लिए और एक रनर के लिए बहुत आवश्यक है सारे दिन में कम से कम 12 गिलास पानी पियें इससे जोड़ों में लचीला पैन आएगा जो कि लम्बी दौड़ों के लिए बेहद आवशयक है !
-पूरे सप्ताह में आराम देना बहुत आवश्यक है कम से कम दो दिन दौड़ने को आराम दें !
सप्ताह में एक दिन साईकिल चलाने जैसी एक्सरसाइज बेहद आवश्यक है यह उन मसल्स को मजबूत करेगी जो रनिंग के द्वारा उपयोग में नहीं आते !
अगर रनिंग के सबसे आवश्यक टिप जानना हों तो पहले तीन टिप निम्न हैं
१.हायड्रेशन
२.हायड्रेशन
३.हायड्रेशन
अर्थात शरीर में अगर पानी अब्सॉर्व नहीं है तो शरीर दौड़ नहीं पायेगा इसका अर्थ यह नहीं कि दौड़ने से पहले एक बोतल पानी पीकर दौड़ा जाये बल्कि दौड़ने से पहले दिन अधिक पानी पीना है
- जिस दिन आप रनिंग 21 km दौड़ते हुए एन्जॉय कर पाएंगे समझियेगा कि आपकी सारी हार्ट आर्टरी ओपन हो चुकी हैं और याद रखें रनर को डायबिटीज तो हो ही नहीं सकती !

यूरोप भ्रमण और रनिंग -सतीश सक्सेना

यूरोप का ट्रिप ढाई महीने का रहा जो कि 25 सितम्बर को पूरा होगा, इस बार जर्मनी से बाहर खूबसूरत प्राग (चेकोस्लोवाकिया या चेकिया) , इंसब्रुक (ऑस्ट्रिया), वेनिस (इटली),  माउंट टिटलिस ( स्विट्ज़रलैंड) पेरिस ( फ्रांस ) और बार्सिलोना ( स्पेन )
घूमने का मौका मिला ! सिर्फ यूरोप में ही यह सुविधा है कि विभिन्न देशों में जाने के लिए आपको अलग अलग वीसा (फीस 60 यूरो ) अप्लाई  नहीं करना पड़ता ! यूरोप महाद्वीप के 26 देशों ने, अपने नागरिकों को, किसी भी देश में स्वतन्त्रता पूर्वक आने जाने के लिए, पूरी आज़ादी देते हुए अपने बॉर्डर समाप्त कर दिए हैं !

पूरे शेंगेन जोन ( Schengen zone ) में इंटरनेशनल बॉर्डर, मात्र मैप में ही नज़र आता है , 26 देशों के नागरिक बिना किसी पासपोर्ट चेक एवं कण्ट्रोल के एक दुसरे देश में कहीं भी आने जाने के लिए स्वतंत्र हैं ! इसी तरह विश्व के किसी भी देश का नागरिक शेंगेन वीसा के साथ इन 26 देशों में कहीं भी बेरोकटोक घूम सकता है ! यह समस्त देश आपस में बस, ट्रैन और फ्लाइट के माध्यम से जुड़े हुए हैं ! जैसे म्युनिक(जर्मनी) से प्राग(चेकिया), 380 km की दूरी तय करने में, बस का टिकिट 15 euro का है, हाँ बस में बैठने से पहले आपको अपना पासपोर्ट एवं टिकिट ड्राइवर को दिखाना होगा !

यह यात्रा मेरे लिए बेहद आनंद दायक रही क्योंकि मैंने अपने इस विदेश प्रवास में, चाहे वह प्राग का चार्ल्स ब्रिज हो या पेरिस में एफिल टावर के नीचे, सीन नदी का किनारा, बार्सिलोना (स्पेन) का खूबसूरत समुद्री किनारा , या वेनिस की जलभरी गलियां हर जगह दौड़ते हुए पार की ! मुझे याद है कि अपनी जवानी के दिनों में ऐसा करने में एक डर रहता था कि नए देश में रास्ता न भटक जाएँ ! अभी 64 वर्ष की उम्र में बिना परवाह के दौड़ना शुरू करता हूँ 5 km दौड़ने के बाद, जब तक शरीर गर्म होता है तबतक यह छोटे छोटे शहर का दूसरा किनारा नज़र आने लगता है ! मेरी फिलहाल दौड़ने की रेंज लगभग 25 km है उतने में पूरा शहर का चक्कर हो
जाता है सो खोने का कोई गम नहीं !

समय जाते पता नहीं चलता , मैंने सितम्बर 2015 से रनिंग सीखना शुरू किया तब से अबतक 582 बार और इन 582 प्रयासों में मैने अपने 61वें वर्ष के बाद, पिछले तीन वर्षों में, 4285 Km की दूरी दौड़ते हुए तय की ! जबकि पहले साठ वर्ष तक मैंने दौड़ते हुए, 1 km की बात छोड़िये, 100 मीटर की दूरी भी नहीं भाग सका ! मैं 80 वर्ष के यूरोपियन वृद्धों को साइकिल चलाते हुए देखता हूँ तब मैं सोंचता हूँ कि हम लोग अधेड़ होते ही यह क्यों मान लेते हैं कि अब हम इस काम को नहीं कर सकते, अब हमारी उम्र हो गयी है काश हम भारतीय, यह नेगटिव सोंचना बंद करें और मैं कर सकता हूँ इस सोंच के साथ, नया प्रयास आरम्भ करें !

Friday, September 14, 2018

जर्मनी से स्पेन, भोजन एवं स्वाद -सतीश सक्सेना

जर्मन लोगों को मैंने अक्सर ट्रेन या बस में शाम ६ बजे के आसपास नेपकिन में दबाये सैंडविच खाते देखा है , और वे यह बेहिचक करते हैं ! वे अक्सर अपना मुख्य भोजन दिन में खाना पसंद करते हैं उनके भोजन में  साबुत अनाज की ब्रेड , चीज़ ,योगर्ट , भुने मीट के स्लाइस एवं ब्रैटवुस्ट नामक पोर्क या बीफ या टर्की के बने सॉसेज होते हैं ! साथ में सलाद टमाटर एवं अचार (gherkins) एक्स्ट्रा स्वाद देते हैं !

यहाँ लोग नाश्ते में यह लोग अधिकतर ब्रेड टोस्ट , ब्रेड रोल जिसमें शहद, मार्मलेड , अंडे एवं हैम, सलामी एवं सॉसेज लेना पसंद करते हैं , जिसके बाद गर्म कॉफी, कोको या चाय पीते हैं ! कॉफी यहाँ चाय से अधिक लोकप्रिय है !

यूरोप में अधिकतर लोग मीट प्रोडक्ट पर निर्भर होते हैं इनके भोजन में किसी न किसी रूप में मीट, उपलब्ध अवश्य होगा सो हमवेजीटेरियन लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है ! जल्दबाजी में ख़रीदे, रेडीमेड पास्ता एवं टू मिनट नूडल्स पहला  चम्मच खाने के बाद ही फेंकने पड़े !


मगर यूरोप में हम वेजिटेरियन लोगों का सहारा, पीता ब्रेड ( ग्रीक रोटी ) होती है जो अकसर यूरोपियन स्टोर में उपलब्ध रहती है , इसे खरीद कर बटर का उपयोग कर अपना देशी परांठा बनाया जा सकता है ! साथ में आलू उबालकर सूखी सब्जी बनाना अधिक मुश्किल काम नहीं , सहारे के लिए स्टोर्स में तरह तरह के योगर्ट ( दही ) उपलब्ध होता है ! 

म्यूनिख बवेरिया स्टेट की राजधानी है जो अपने बियर गार्डन के लिए मशहूर है , जहाँ खुले में बड़े मैदान में अथवा गार्डन में हजारों लोगों के बैठने की व्यवस्था होती है और फ्रेश बियर सर्व की जाती है , देखने में यह एक ऐसा खुला रेस्टॉरेंट लगता है जहाँ लोग इकट्ठे होकर किसी राष्ट्रीय त्यौहार पर एक साथ बियर पीकर, ख़ुशी मना रहे हों ! कुछ मायनों में हमारे देश के एक बड़े ढाबे जैसा माहौल होता है मगर एक विशेषता लिए होता है कि हजारों लोगों में से एक भी इंसान जोर से न बोलता है और न झूमता है !

आप किसी भी जर्मन मार्किट में चले जाएँ सड़क किनारे रेस्टुरेंट के फुटपाथ पर कुर्सियों पर बैठे लोग बियर पीते मिलेंगे मगर एक शालीनता और सभ्यता के साथ बिना किसी शोर शराबे के ! मैंने यहाँ हार्ड ड्रिंक्स, शराब, स्कॉच आदि बहुत
कम लोगों को पीते देखी , 80 प्रतिशत लोग बियर और बचे लोग वाइन का सेवन करते देखे हैं ! अगर आप एक दो दिन को यहाँ आएंगे तो जहाँ नजर डालें फुटपाथ पर पड़ी कुर्सियों पर बैठे लोगों के हाथ में बियर का ग्लास देखेंगे मगर एक भी आदमी शराबी व्यवहार करते नहीं दिखेगा !

हाँ, हम जैसे देसी वेजिटेरियन लोग भी मिलेंगे जिन्हें वहां बियर के साथ, उबले अंडे या नमकीन तो मिलने से रही सो विकल्प के रूप में वेज ब्रेड, ऑलिव्स और चीज़ की तलाश करते हैं ! जर्मन बेकरी सबसे अधिक व्यस्त दुकाने हैं जहाँ विभिन्न स्वाद की देश विदेश की नमकीन एवं मीठे ब्रेड , बिस्किट एवं केक उपलब्ध हैं जिनको खाने से मन नहीं भरता !
एक दिन बेहद भूख लगने पर मैंने बाजार से दो शहद की बिस्कुट जिनका वजन ५० ग्राम होगा फिलाडेल्फिया चीज के साथ खायीं तो भूख ऐसे गायब हुई जैसे भरपूर लंच लिया हो ! लाजवाब क्वालिटी के ऐसे फ़ूड प्रोडक्ट हमारे देश में दुर्लभ हैं , इन प्रोडक्ट के साथ अक्सर लोग सूप, कोकोकोला पीना पसंद करते हैं जिन्हें हमारे देश में देशी व्यापारियों ने त्याज्य घोषित कर दिया गया है !
Swimming in Sea  

कैटालोनिया कोस्ट पर बसे बार्सिलोना का नाम, यूरोप के उन बेहद खूबसूरत शहरों में शामिल होता है जो विश्व के टूरिस्ट नक़्शे में विख्यात हैं ! यह शहर नार्थ स्पेन रीजन में, मेडिटेरेनियन समुद्र तट पर , बसा है तथा अपने विशेष कैटलॉन संस्कृति, गौरव तथा व्यक्तित्व के लिए, एक अलग पहचान रखता है !

कल म्यूनिख से बार्सिलोना, स्पेन पंहुचे थे , एयरपोर्ट से ही 5 दिन का होला बार्सिलोना अनलिमिटेड पास (हेलो बार्सिलोना) ले लिया था, अन्यथा टैक्सी से एयरपोर्ट से शहर अपने अपार्टमेंट तक पंहुचने में ही लगभग 5000 रूपये पड़ जाता ! यह
बार्सिलोना टूरिस्ट  पास दो लोगों का 5000 रूपये का पड़ा और इसके द्वारा मैं पांच दिन तक किसी भी वाहन मेट्रो, ट्रेन , बस और ट्राम से पूरे शहर में कितनी ही यात्रायें करने को स्वतंत्र था ! 

मैं , रुकने के लिए होटल न लेकर, पुराने शहर के बीच प्राइवेट अपार्टमेंट लेना पसंद करता हूँ , इनका रेट लगभग होटल जितना ही पड़ता है मगर , अपना ताला चाबी, प्रायवेसी, अधिक जगह, अपना खुद का किचेन , बाथरूम , और बालकोनी का महत्व इस नयी जगह, संस्कृति के लोगों के बीच रहने की सुविधा मिलने के कारण, इनका महत्व अधिक होता है ! बार्सिलोना में यह अपार्टमेंट एयर बीएनबी के जरिये ऑनलाइन लिया था ! अधिकतर अपार्टमेंट पर पूरा पेमेंट पहले ही देना होता है ! वे इसके बाद आपको दरवाजे के इलेक्ट्रॉनिक बॉक्स का कोड भेजते हैं जिसे द्वार पर डॉयल करने पर बॉक्स ओपन हो जाता है और अंदर आपको चाबी मिलती है जिसके जरिये आप मेन डोर खोल सकते हैं ! 

अंदर आकर सबसे पहले बाथरूम , किचेन एवं बैडरूम का निरीक्षण किया तो पाया टॉवल्स सेट , सोप , चादर , ब्लैंकेट , वाशिंग मशीन , फ्रिज , ओवन , माइक्रोवेव , हॉट प्लेट , कॉफी मशीन, इलेक्ट्रिक प्रेस,  आवश्यक बर्तन आदि के अलावा पांच दिन के लिए, चाय कॉफी के लिए आवश्यक सामान , वर्जिन ओलिव आयल, जूस आदि उपलब्ध था ! सो अन्य मन
मुताबिक सामग्री जुटाने के लिए पहला काम, बाहर मोहल्ले के स्टोर पर जाना और अपनी मन मर्जी की आवश्यक सामान खरीद कर फ्रिज में रखना था !

जर्मनी, ऑस्ट्रिया, इटली, स्विट्ज़रलैंड , फ्रांस, स्पेन  सब जगह शहरी सप्लाई का पानी, पीने योग्य माना जाता है मगर स्वाद मीठा नहीं होता, हम भारतीयों को म्युनिसिपल सप्लाई वाटर में, नाले का पानी, मुफ्त में मिक्स होकर मिलने के कारण, हर घर में आर ओ ( रिवर्स ओसमोसिस )लगाना ही पड़ता है जोकि पीने में मीठा होता है मगर यूरोप के घरों में आर ओ कहीं नहीं देखा !  बाजार में बिकने वाला पानी मिनरल वाटर के रूप में उपलब्ध है जो बेहद मंहगा पड़ता है ! RO का नुकसान एक ही है कि वह पीने के पानी से, मानव शरीर के लिए आवश्यक मिनरल्स जैसे कैल्सियम, मैग्निसियम को भी नष्ट कर देता है जो कि हमारे लिए बेहद आवश्यक हैं शुक्र है कि हमारा शरीर यह मिनरल्स भोज्य सामग्री से आसानी से जुटा लेता है ! दूध, बियर और जूस से अधिक महंगा , आधा लीटर पानी का भाव भी ढाई यूरो है सो अक्सर पानी की जगह बियर से काम चलाने  के लिए तैयार रहना होगा !
बहरहाल यूँ देखने में यूरोप महंगा लगेगा मगर यहाँ कम पैसों में भी आराम से घूमा जा सकता , पूरे दिन का भोजन के लिए 6 से 10 यूरो में काम चल सकता है मगर यदि रेस्टॉरेंट में लंच और डिनर लेना है तो यही खर्चा 40 यूरो तक बैठेगा ! 

Wednesday, September 5, 2018

जर्मनी और राज भाटिया -सतीश सक्सेना

टिकट मशीन 
यूरोप के अधिकतर देशों में नगर उपनगर यातायात के लिए , मेट्रो , ट्राम , बस और ट्रेन उपलब्ध हैं और इसके लिए   बेहतरीन व्यस्था है कि आपको हर जगह अलग अलग एजेंसीज से अलग टिकिट लेने की आवश्यकता नहीं है ! मेट्रो स्टेशन या बस स्टैंड पर लगी ऑटोमेटिक मशीन से लिया गया एक टिकिट हर जगह मान्य है और यह टिकिट आप अपने मोबाइल पर भी ऑनलाइन ले सकते हैं ! म्यूनिख में जहाँ एक स्थान से दुसरे स्थान का एक तरफ का टिकिट, किसी भी साधन से,  2.90 यूरो (250 रूपये ) है वहीँ एक दो जोन के लिए एक सप्ताह का अनलिमिटेड पास 12 यूरो का और पूरे म्यूनिख नेटवर्क में पूरे दिन के लिए, अनलिमिटेड यात्रा पास 24 यूरो का है ! यूरोप में किसी शहर में घूमने के लिए, अगर उसे बेहतर समझना हो तो उस शहर का ट्रांसपोर्ट सिस्टम पहले समझना चाहिए , जहाँ आप ठहरे हैं उस स्थान से पॉपुलर रुट के स्टेशन और दिशा याद रखना आवश्यक है बाकी काम आसान हो जाता है ! ड्राइवर युक्त टैक्सी सर्विस बेहद महगीं हैं , 40 km की टैक्सी यात्रा लगभग 6000/=की पडेगी !  


राज भाटिया के साथ 
अगर यूरोप में वास्तविक प्राकृतिक खूबसूरती और रहनसहन का माहौल देखना हो तो किसी गांव में जा कर देखिये आपको आनंद आ जाएगा ! राज भाटिया म्यूनिख से लगभग ४५ km दूर एक गाँव इज़ेन में रहते हैं , उनका आमंत्रण पहले दिन से मेरे पास था मगर जाने का मौका कल मिला जब मैं किसी को छोड़ने एयरपोर्ट गया था और मेरी जेब में पूरे म्यूनिख नेटवर्क का पास था ! मैंने अपने आने के बारे में उन्हें इन्फॉर्म किया तो उनका कहना था कि आप गाँव तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट से न आएं बल्कि मैं आपको लेने आपके नजदीकी स्टेशन श्वाबिन मार्किट तक आ रहा हूँ आप वहीँ पर मेरा इंतज़ार करें ! जब मैं वहां पंहुचा तो राज भाई अपनी ऑडी के साथ इंतज़ार कर रहे थे ! खूबसूरत साफ सुथरे रास्तों से होते हुए जब उनके गांव पंहुचे तो हमारे जैसा गांव तो कहीं नजर नहीं आया समझ ही नहीं आया की प्रकृति का इतना सुंदर नज़ारा और शोर शराबे रहित, शांत जगह जहाँ धूल का नामोनिशान न हो , गाँव कैसे हो सकता है ! अगर हमारे देश में, शहर के नजदीक गलती से भी ऐसे गांव रहे होते तो निश्चित ही वहां बड़े सरकारी अधिकारियों के निवास स्थान बन गए होते और उसे सिविल लाइन्स का नाम दिया जाता क्योंकि शहर के सबसे बेहतरीन एरिया में रहने का हक़ कलक्टर एन्ड कंपनी का ही होता है ! बाकी तो सब कीड़े मकोड़े हैं कहीं भी रह लेंगे  ...... 


हमारे देश में अब अतिथि सत्कार दिखावा और बीते दिनों की बात हो चली है , मगर देश से इतनी दूर , भाटिया दम्पति ने जिस प्यार से विशुद्ध भारतीय भोजन कराया वैसा बहुत कम ही नजर आता है ! भोजन अच्छा तभी लगता है जब वह प्यार से कराया जाय इस मायने में श्रीमती भाटिया साक्षात् अन्नपूर्णा सी लगीं  यूँ भी जर्मनी में किसी भी भारतीय घर में, भारतीय भोजन की उपलब्धता होना आसान नहीं, अधिकतर जगह आपका स्वागत वेस्टर्न नाश्ते या भोजन से होगा क्योंकि यहाँ देशी सामग्री इम्पोर्टेड है और अधिकतर सामान जैसे तेल , देशी घी , हरी मिर्च , मसाले सब तलाश करने के लिए इंडियन स्टोर में ही जाना होगा एवं अत्यंत महंगे (गेंहू का आटा 5किलो 1200 रुपया) भी हैं ! 3000 sqft एरिया में बना उनका साफ़ सुथरा घर बॉलीवुड की फिल्म बनाने योग्य था इतने बड़े घर में धूल और अव्यवस्था का नाम नहीं उसके लिए इन दोनों की जितनी तारीफ की जाय वह कम ही होगी ! 

उसके बाद वे हमें गाँव भ्रमण पर ले गए एक साफ़ सुथरे खेत के बाहर एक छोटे स्टाल पर ताज़ी निकली सब्जियां जिसमें विभिन्न रंग के ऑक्टोपस नुमा कद्दू देखकर हम आश्चर्यचकित थे , सब्जियों पर रेट लिखा था साथ में छोटा सा मनी बॉक्स परन्तु बेंचने वाला कोई नहीं ! आप अपनी मन पसंद सब्जी उठाइये और पैसे बॉक्स में डाल दीजिये कोई देखने वाला नहीं कि आपने पैसे डाले भी कि नहीं  ..... 

एक अन्य जगह अंडे रखे दिखे, यहां भी रेट के साथ मनी बॉक्स था उठाइये, जितने चाहिए और पैसे डाल दीजिये ! आप बेईमानी करना चाहते हैं मुफ्त में ले जाइये कोई आप पर शक नहीं करेगा , सब आपसी विश्वास और भरोसा ! भाटिया जी ने यह भी कहा कि हम अधिकतर समय, घर खुले छोड़ आते हैं कोई ख़तरा नहीं, यहाँ कोई बेईमानी की सोंच भी नहीं सकता ! पुलिस या अन्य सरकारी विभाग रिश्वत लेने अथवा देने की कोई सोंच भी नहीं पाता ! 

इस छोटे से जर्मन गांव में , जब कोई व्यक्ति जब सड़क या पगडण्डी से, कुत्ते के साथ निकल रहा हो तब उसकी जेब में एक
डॉग पूप के लिए थैली यहाँ से लें 
छोटा लिफाफा होगा जिसे वह कुत्ते का पूप कलेक्ट करने के लिए रखता है इसके अलावा पगडण्डी के साथ साथ एक छोटा बक्सा होगा जिससे कोई भी लिफाफा निकाल सकता है किसी भी हालत में, कोई व्यक्ति  कुत्ते की पूप बाहर नहीं फेंकेगा ! 

यहाँ कौन देख रहा  .... वाले शब्द बोलने वाले लोगों के देश से आये हुए मेरे जैसे व्यक्ति के लिए यह सब देखना आश्चर्य के सिवा और कुछ नहीं था  .....

इस गांव में हर रास्ते में फूल और फल लगे देखे जिन्हें सुबह के अँधेरे में आकर भगवान की पूजा के लिए कोई नहीं चुराता ! पके हुए सेब हर घर में  लगे हैं और बाहर भी लटके हैं , इस खूबसूरती की हम अपने यहाँ कल्पना भी नहीं कर सकते , अगर किसी की जेब से टहलते हुए कोई तौलिया रूमाल या मोबाइल गिर जाए तो घबराने की कोई बात नहीं वह अगले दिन सुबह भी वहीँ पड़ा मिलेगा ! इस राम राज्य की कल्पना हमारे पूर्वजों ने सैकड़ों बरसों से की थी और लगता नहीं कि हमारे देश में जहाँ हर व्यक्ति चतुरसेन पहले है, अब कभी भी पूरी होगी ! पश्चिमी देशों की, बिना उन्हें देखे, समझे, मूर्खों की तरह  जमकर 
उनकी बुराई करते हैं यही हमारी सभ्यता को पहचान बची है ! अगर रामराज्य कहीं है तो वह वाकई इन देशों में है जिन्हें हम गाली देना अपनी शान समझते हैं !

यहाँ की सड़क पर स्पीड लिमिट तोड़ने को कोई कोशिश नहीं करता अगर किसी कैमरे में आ गयी तो जुर्माना जो लगभग १५००० रूपये होगा घर आ जाएगा और सफाई देने की कोई गुंजाइश नहीं ! मानव जीवन को यहाँ बहुमूल्य माना जाता है अगर आप
मुसीबत में हैं तब डिस्ट्रेस कॉल में एम्बुलेंस पंहुचने का समय ३ मिनट और अगर डॉ उपलब्ध न हो तो हैलकॉप्टर एम्बुलेंस तत्काल हाजिर होगी और मुफ्त का इलाज होगा ! राज भाई के 3 हार्ट ऑपरेशन हुए और बिलकुल मुफ्त , बदकिस्मती से आपके घर में बच्चे आपका ख़याल रखने और तीमारदारी करने को उपलब्ध नहीं हों तो नर्स की मुफ्त सेवा है आपका एक पैसा खर्च नहीं होगा ! सारा भारी भरकम बिल का खर्चा इंस्युरेन्स कम्पनियाँ उठाएंगी और बिना वह भी किसी लिखा पढ़ी के, सीधा हॉस्पिटल के साथ  !

शराब पीकर ड्राइविंग करना आपको कम से कम 40000 रूपये से 120000 रूपये तक महंगा पड़ सकता है यहाँ तक कि आपकी साइकिल पर अगर लाइटिंग इक्विपमेंट नहीं लगे हैं तब 2000 रुपया जुर्माना होगा अगर वह रेड लाइट क्रॉस करता है तो 60 यूरो ( 5000 रूपये ) जुर्माना है और पैदल चलने वाले को भी माफ़ी नहीं है , पेडस्ट्रियन क्रॉसिंग पर अगर आपने पैदल चलते हुए जल्दी से रेड लाइट जंपिंग की है तो 400 रुपया देने को तैयार रहिये !

यहाँ घर पर नौकर रखना और मरम्मत करवाना बेहद खर्चीला साबित होगा क्योंकि कामगरों की तनख्वाह बहुत अधिक हैं उनसे व्यक्तिगत काम कराना नया सामान खरीदने जितना पड सकता है अतः घरों में मरम्मत, रिपेयर, पेण्ट आदि खुद करना होता है !
सो यहाँ के लोग कामचोर नहीं है इसीलिए फिटनेस की कोई समस्या नहीं ! साईकिल से बाजार जाना , बगीचे की तथा अपने घर से बाहर की घास काटना, झाड़ू लगाना, बर्तन धोना , घर का फर्श आदि सब कुछ आपको खुद करना होगा वह और बात है कि अधिकतर काम के लिए आप मशीनों का उपयोग करते हैं ! 

राज भाई के घर में इन्होने एक कमरा वर्कशॉप में बदल रखा है , उनके पास हर तरह के टूल्स देखकर पता चला कि समय ने इन्हें हर काम खुद करना भी सिखा दिया इनके घर से निकलते समय एक संकल्प मैंने भी लिया कि अब से घर में अधिकतर काम और रिपेयर खुद करना है जब राज भाई यह कर सकते हैं तो मैं क्यों नहीं ! 

Sunday, August 19, 2018

निराशाओं के दौर में जीना कर्तव्य बन जाता है : सतीश सक्सेना

बढ़ती उम्र, घटती सामर्थ्य, अपनों में ही कम होता महत्व, बुढ़ापा जल्दी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ! पूरे जीवन सम्मान से जीते हुए इंसान के लिए, निराशाओं के इस दौर में हँसते हुए जीना कर्तव्य होना चाहिए साथ ही बदलते समय से समझौता कर, अपने कार्यों का पुनरीक्षण करना, लगातार होती हुई गलतियों में सुधार भी, परिपक्व उम्र की आवश्यकता होती है ! 
निराशा बेहद खतरनाक रोल अदा करती है इससे बाहर निकलने के लिए नयी रुचियाँ और उत्साह पैदा करना होगा अन्यथा यह निराशा असमय जान लेने में समर्थ है ! 

गोपालदास नीरज की यह कालजयी रचना मुझे बेहद पसंद है 

जिन मुश्किलों में मुस्कुराना हो मना,
उन मुश्किलों में मुस्कुराना , धर्म है।

जिस वक़्त जीना गैर मुमकिन सा लगे,
उस वक़्त जीना फर्ज है इंसान का,
लाजिम लहर के साथ है तब खेलना,
जब हो समुन्द्र पे नशा तूफ़ान का
जिस वायु का दीपक बुझना ध्येय हो
उस वायु में दीपक जलाना धर्म है।


जब हाथ से टूटे न अपनी हथकड़ी
तब मांग लो ताकत स्वयं जंजीर से
जिस दम न थमती हो नयन सावन झड़ी
उस दम हंसी ले लो किसी तस्वीर से
जब गीत गाना गुनगुनाना जुर्म हो
तब गीत गाना गुनगुनाना धर्म है।

Sunday, July 29, 2018

आसान यूरोप यात्रा -सतीश सक्सेना

इस बार यूरोप यात्रा का संयोग गौरव की जर्मनी पोस्टिंग के कारण हुआ उसकी इच्छा थी कि पापा और माँ मेरे पास लम्बे समय आकर रहें सो पहली बार घर को लगभग ढाई महीने के लिए छोड़ने का फैसला किया पिछली पोस्ट पर मित्रों का अनुरोध था कि इस यात्रा का विवरण लिखूं सो यह पोस्ट आवश्यक हो गयी है !
यूरोपियन ढाबा पर जौ का रस, मशहूर ब्रेड, ब्रीज़ल के साथ !

-विदेश यात्रा को अधिकतर लोग हौआ मानते हैं और उस पर अक्सर बात करने से या जाने की योजना बनाने से झिझकते ही नहीं बल्कि सोंचने में भी कतराते हैं और इसके पीछे धन का अभाव न होकर अक्सर आत्मविश्वास की कमी ही होती है कुछ अन्य कारण निम्न हैं  ....

- पहला कारण विदेशियों से कम्युनिकेशन में आत्मविश्वास का न होना, अधिकतर का मानना है कि उनकी बेहतरीन फर्राटेदार इंग्लिश समझना और बेहतरीन इंग्लिश में बात करना बहुत मुश्किल है जबकि वास्तविकता इसके उलट है लगभग पूरे विश्व में सामान्य विदेशियों की इंग्लिश काफी कमजोर है अधिकतर जगह पर वे टूटी फूटी इंग्लिश में और हावभाव के साथ ही संवाद करते हैं और तो और हमारी मैडम एयरपोर्ट से लेकर शानदार मॉल तक में धड़ल्ले से अपनी हिंगलिश और हिंदी मिलाकर चमत्कृत करने वाली देसी अंग्रेजी में जर्मन लोगों को समझाने में कामयाब रहीं हैं !

-झिझक का दूसरा कारण विदेश यात्रा में अधिक खर्चे का अनुमान होना होता है जबकि यह कई बार देशी यात्रा से भी कम बैठता है ! दिल्ली से पेरिस या म्यूनिख का एक व्यक्ति के आने जाने का खर्चा लगभग 36000/- है और लगभग 5000 रूपये प्रति दिन में अच्छा होटल मिल जाता  है जिसमें एक समय का खाना शामिल होता है ! इस प्रकार एक मध्यम आय वाले पति पत्नी, सवा लाख रूपये में, ५ दिन के लिए रोम जाकर बापस आ सकते हैं !

-विश्व के किसी भी भाग की यात्रा, बिना जानकारी करना पहले असंभव थी जबकि अब इन यात्राओं को गूगल ने बेहद आसान बना दिया है, अगर स्मार्ट फोन आपके पास है तब आप कहीं किसी शहर में खो नहीं सकते, जीपीएस टेक्नोलॉजी के जरिये आपकी लोकेशन हर वक्त आपके पार्टनर के पास होती है इसके लिए आपने अपने परिवार के सदस्यों या मित्रों को अपनी लाइव लोकेशन शेयर करनी भर होती है, आजकल हर व्यक्ति को जीपीएस सिस्टम की जानकारी रखना आवश्यक है !


-आपके शहर से हजारों किलोमीटर दूर अनजान शहर में आपको उस शहर में कदम रखने से पहले, गूगल मैप के जरिये ,अपने बस स्टॉप और बस नंबर तक का पता चल जाता है और कितने स्टॉप बाद उतर कर किस दिशा में, कितने कदम चलना है गूगल मैप की मदद से आप अपने गंतव्य पर आसानी से पंहुच जाते हैं !

-अपना टिकिट अपने मोबाइल पर घर बैठे ऑनलाइन खरीद लीजिये और जहाँ चाहे यात्रा करिये कोई चेक करने नहीं आता न कहीं कोई रेलवे टिकिट कलेक्टर जैसा कोई इंसान दिखता, हर जगह एक भरोसा सा महसूस होता है कि आप भले इंसान हैं और चोरी नहीं कर सकते ! अगर किसी वीरान बसस्टॉप या ट्राम पर खड़े हैं तो टिकिट आपको अपने मोबाइल पर खरीदने की सुविधा है ! 

-हर सड़क पर पदयात्रियों के फुटपाथ , साइकिल के लिए अलग ट्रेक बना है ! पैदल चलते व्यक्ति को सड़क पार करते देख गाड़ियां जबतक इंतज़ार करती हैं जबतक वह इंसान सड़क पार न कर ले ! मोहल्ले में कोई शोर शराबा नहीं लेट इवनिंग में आप घर में तेज आवाज में टीवी अथवा ड्रिल से दीवार में या लकड़ी में छेद नहीं कर सकते शोर मचाना या जोर जोर से बोलना  असभ्यता की निशानी माना जाता है ! नियम पालन यहाँ का समाज अपनी जिम्मेदारी समझ कर पालन करता है !
यूरोप के विभिन्न देशों के बीच सीमा नहीं है हर व्यक्ति बिना किसी परमिट के किसी भी देश में जाने को स्वतंत्र है !

-पूरा वातावरण बेहद स्वच्छ है धूल उड़ते कहीं नहीं दिखती , इस बार मैं एक सफ़ेद शर्ट कई दिन से पहने हूँ कॉलर गंदा ही नहीं होता ! ठन्डे और साफ़ वातावरण में सुबह सुबह इसार नदी के किनारे दौड़ने का आनंद ही कुछ और है काश विश्व के देशों की सीमाएं समाप्त हो जाएँ और हम सब एक साथ मिलकर हंसना रहना सीख सकें !

कितना सुंदर सपना होता 
पूरा विश्व  हमारा  होता । 
मंदिर मस्जिद प्यारे होते 
सारे  धर्म , हमारे  होते ।  
कैसे बंटे,मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत । 
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।  

काश हमारे ही जीवन में 
पूरा विश्व , एक हो जाए । 
इक दूजे के साथ  बैठकर,
बिना लड़े,भोजन कर पायें ।
विश्वबन्धु,भावना जगाने, 
घर से निकले मेरे गीत । 
एक दिवस जग अपना होगा,सपना देखें मेरे गीत । 

Monday, July 9, 2018

तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा - सतीश सक्सेना

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें 
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

अगर सुस्त मन दौड़ न भी सके तब 
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !

यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का 
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !

असंभव नहीं , मानवी कौम में  कुछ  ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

Tuesday, June 26, 2018

सावधान -सतीश सक्सेना

सावधान -सतीश सक्सेना
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कुछ वर्ष पहले के बेहद खूबसूरत चेहरे , चंद वर्षों में ही , बेडौल और भद्दे दिखने लगते हैं , बुरा हो उनके खैरख्वाहों की बजती तालियों और तोंद से नीचे बंधी बेल्ट का, जो उन्हें अहसास ही नहीं होने देतीं कि वे कितना कुछ खो चुके हैं !
और बुरा हो उन बहानों का जो बढ़ते वजन का कारण हैं , कोई बेचारा समय, कम होने के कारण मोटा है तो कोई दवाओं के कारण तो कोई घुटने के दर्द के कारण वाक् नहीं कर पाते तो दौड़ना कैसे सीखें ?
कुछ लोग खुद को तसल्ली दे लेते हैं कि वे रोज दोस्तों के साथ पार्क में टहलते हैं और कुछ तो जिम भी जाते हैं !
इन्हें नहीं मालुम कि बढ़ते फैट के कारण शरीर का हर अंग बीमार हो रहा है अगर वे दो मंजिल सीढियाँ या 100 मीटर दौड़ने में हांफ रहे हैं तो समझिये, ह्रदय घात कभी भी होगा और पछताने का मौक़ा नहीं देगा !
To avoid danger of Obesity, Diabetes and Heart attack, Learn Running ....

Wednesday, June 20, 2018

हेल्थ ब्लंडर -9

आप कई वर्ष से वाक कर रहे हैं, आप कई वर्ष से जानवरों का दूध पी रहे हैं , आप बरसों से रोटी,दाल,सब्जी खा
रहे हैं , यह सब आपकी आदत का हिस्सा बन गयी हैं और उसी तरह से आपका शरीर भी बरसों से एक शक्ल अख्तियार कर चुका है और वजन टस से मस नहीं हो रहा तो मान लीजिये शरीर ने इन आदतों को स्वीकार कर लिया है और आप यह सब करते रहिये शरीर इसी वजन के साथ थुलथुल शरीर के साथ जीने की आदत डाल लेगा और आप इस भुलावे में मस्त रहिये कि आप व्यायाम कर रहे हैं जबकि अब यह व्यायाम न होकर शरीर का एक रुटीन भर रह गया है जिससे शरीर में रत्ती भर बदलाव आना संभव नहीं !

अगर बदलाव लाना है तो अपने व्यायाम की एकरसता को तोडिये और अपनी एक्टिविटी में विविधिता लाइए शरीर में हलचल मचना शुरू हो जायेगी ! सप्ताह में चार पांच अलग गति और एक्शन के साथ वाक /रन करें अन्यथा लटके हुए मांस में बदलाव आना संभव नही ! अधिकतर एथलीट एक दिन साधारण वाक्, एक दिन तेज वाक, अगले दिन साईकिल, अगले दिन रेस्ट और फिर जोगिंग और एक दिन तेज रन करता हूँ !

जानवरों का दूध पीना लगभग एक माह बंद करके देखें इसके साथ ही वह सब कुछ महीने के लिए त्याग करें जो आपको बहुत खाने में बहुत अच्छा लगता हो, इनमें से कुछ खाद्य पदार्थ हो सकता है आपका नुकसान कर रहे हों , इनको छोड़ने के साथ वह प्राकृतिक खाद्य शुरू करें जो आपने बहुत कम खाया हो !

आप डरपोक हैं इसीलिए एक सप्ताह में कैंसर ठीक, जैसे न्यूज़ नुमा विज्ञापन ध्यान से पढ़ते ही नहीं बल्कि अपने तमाम दोस्तों को शेयर भी तुरंत करते हैं ! आकर्षक हैडिंग वाली ख़बरें आपको खींचती हैं उस माल को खरीदने के लिए जो मुफ्त में फायदा देने का झांसा दे रहा है तब आप मृत्यु के प्रति घबराए हुए तो हैं ही साथ ही मूर्ख और लालची भी हैं जो किसी व्यापारी के लुभावने ऑफर को धन्यवाद् सहित स्वीकार ही नहीं कर रहे बल्कि अनजाने में उसके एजेंट भी बन रहे हैं ! मृत्यु के प्रति यह भय आपकी जान ले लेगा और आपके जाते जाते मेडिकल व्यवसाइयों को धन दिलाने में कामयाब रहेगा !

अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !

दुरुपयोग मानस का करके,ढेरो धन संचय कर.भयवश
निष्क्रिय औ भयभीत ह्रदय से करता योगाचार आदमी !

Tuesday, June 12, 2018

बिना समझे, दौड़ना खतरनाक हो सकता है -सतीश सक्सेना

६ जून की पोस्ट पर भाई लकी सिंह के स्नेहिल प्रश्न के जवाब में यह पोस्ट लिखनी आवश्यक हो गयी है मुझे दुःख है कि अधिकतर लोग ध्यान से बिना समझे रनिंग शुरू करते हैं जबकि यह बेहद घातक सिद्ध हो सकता है अतः आज रनिंग से सम्बंधित कुछ ख़ास बातें , फायदे और संभावित नुकसान की भी चर्चा आवश्यक है !

चूंकि रनिंग अकेली ऎसी एक्सरसाइज है जो डायबिटीज और ह्रदय आर्टरिज़ में आयी रूकावट को दूर करने में समर्थ है मगर रनिंग के बारे में कोई यह जानना नहीं चाहता कि रनिंग का सही तरीका क्या है, नुकसान क्या हो सकते हैं , उनका सोंचना है कि रनिंग के बारे में किसी से क्या पूंछना ? और वे दौड़ना शुरू कर देते हैं यही नहीं उनकी कोशिश होती है कि वे लम्बी दूरियां, बढ़िया स्पीड के साथ तय कर सकें ताकि साथियों में अपनी बुलंदी के किस्से सुनाये जा सकें और अधिकतर इस जोश का अंत किसी गंभीर मसल्स इंजरी के साथ ही होता है जिसके कारण कई लोगों की रनिंग पूरे जीवन नहीं हो पाती !


रनिंग एक हार्ड हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें शरीर के हजारो अंग एक  साथ वायब्रेट करते हैं और विभिन्न व्यक्तियों पर अपनी अपनी आदत के अनुसार उन पर अच्छा या बुरा असर पड़ता है ! अतः रनिंग करते समय हर व्यक्ति का ध्यान अपने शरीर पर होना चाहिए कि वह क्या कह रहा है , और हर शरीर अपने स्वस्थ होने या बीमार होने का संकेत काफी पहले ही देता है अगर इसे दौड़ने के जोश में, नज़रंदाज़ करेंगे तो यकीनन आपका नुकसान हो सकता है !

हर रनिंग में शरीर के मसल्स एवं जॉइंट्स को बहुत काम करना पड़ता है गिरते हुए हर कदम पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट जमीन पर पड़ता है इसका अर्थ यह है कि दौड़ते समय अगर आपका वजन 70 kg है तो हर गिरते कदम पर आपका पैर जमीन से 210 kg के वजन के साथ टकराएगा और हर बार 210 किलोग्राम  इम्पैक्ट का कम्पन आपके घुटने,हिप जॉइंट्स , बॉडी कोर, हृदय, फेफड़े और मस्तिष्क तक महसूस करेगा ! 5 Km दौड़ते हुए ,एक रनर लगभग 6000 बार अपने घुटनों और काफ मसल्स पर 210 किलोग्राम का इम्पैक्ट देता है , और यह झनझनाहट, शरीर के हर नाजुक जॉइंट्स से गुजरती हुई मस्तिष्क तक जाती है !

इतनी दुष्कर हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज अगर कोई आलसी वृद्ध व्यक्ति , या अनाड़ी जोशीला जवान एक दिन में करने की कोशिश करेगा तो इस मूर्खता स्वरुप उसकी मसल्स एवं जॉइंट्स में सूजन आ जाएगी और अधिक  करने पर,वे फटकर घायल भी हो सकती हैं जिनके हील होने में कई बार महीनों, बेडरेस्ट करना पडेगा और अगर मेडिकल व्यापारियों के पास चला गया तो वह ऑपरेशन के साथ,लोहे के घुटने लगा कर, बचे जीवन भर रनिंग को गालियां देता रहेगा !


इस तरह की चोट लगने से बचाव के लिए, सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता अधिक मात्र में पानी पीना है ! अगर शरीर में पानी पर्याप्त मात्र में नहीं है तब दौड़ते समय मसल्स क्रेम्प्स आना और अंदरुनी जख्म के कारण दर्द होना, सामान्य बात है ! अतः हर रनर दौड़ने से पहले 24 घंटे अपने शरीर को, पर्याप्त हाइड्रेशन देने की व्यवस्था करता है अधिकतर जल, जूस , दूध या  लिक्विड भोजन इसकी जरूरत पूरी करता है !

हर लम्बी दौड़ के बाद एक या अधिक दिनों का आराम आवश्यक है जिसमे सूजे हुए मसल्स आराम के बाद ठीक होकर और शक्तिशाली बनकर अगली रनिंग के लिए अधिक मजबूती के साथ तैयार हो सकें ! इस प्रक्रिया को मसल्स अथवा शारीरिक रिकवरी कहते हैं यह रनिंग की सबसे बड़ी उपलब्धि है मैं इसे कायाकल्प कहता हूँ इस प्रक्रिया से ही शरीर ढीले मसल्स का त्याग कर , नौजवान मसल्स की शक्ल लेकर , नए
स्वरुप को प्राप्त करता है ! सो हर लम्बी मेहनत के बाद , ढेरों जल , लंबा आराम एवं बेहतरीन नींद अवश्यक है !
  

याद रहे हर रनर दौड़ से पहले बॉडी वार्मअप करता है फिर धीरे धीरे दौड़ना और दौड़ के समाप्ति पर कुछ देर तक जोगिंग मोड में दौड़ना बेहद आवश्यक होता है ! इतनी मेहनत के करने बाद रिकवरी के लिए निम्न टिप ध्यान में रखना आवश्यक हैं !
  • रनिंग के बाद एक या दो दिन आराम करें उसके बाद जब शरीर ठीक हो जाए तब अगली दौड़, पहली दौड़ से स्लो करें न कि जोश में और तेज दौड़ने का प्रयत्न करें यह भयानक भूल होगी आप यह न भूले कि आपके मसल्स ऊपर से भले सहज लग रहे हैं मगर वे भीतर से जख्मी हैं उन्हें और जख्म न दें !
  • बेहतरीन नींद ही सूजे हुए अंगों को ठीक करके स्वस्थ बनाने में समर्थ है सो 10 km या अधिक लम्बी दूरी के रनर कम से कम 8 घंटे या 10 घंटे की नींद अवश्य लें ! 
  • रनर के लिए हाइड्रेशन से महत्वपूर्ण कुछ नहीं होता हर रनिंग से पहले के 24 घंटे ढेरों पानी पीना है ताकि आपके शरीर में स्मूथनेस और शरीर से सफाई हो सके और इसी तरह रन के बाद अगले दो दिन खूब पानी एवं लिक्विड आहार लें ताकि मसल्स रिकवरी इफेक्टिव हो , हाँ दौड़ते समय पानी कम लेना चाहिए
    गला सूखते समय सिर्फ सिप भर लेना है ताकि गला गीला रहे ! भर पेट पानी दौड़ते हुए पीना मूर्खता होगी वह आपको दौड़ने नहीं देगा !
  • रनिंग के बाद बिना आराम किये, जोश में लोग, पिछली थकान को साथ लेकर अगले दिन फिर दौड़ने जाते हैं और सूजी हुई मसल्स को डैमेज करते हैं अगर इन्हीं मसल्स को समुचित आराम दिया जाता तो वे अगली रनिंग और अधिक ताकत के साथ बिना थके करने के लिए तैयार होती !
  •   सप्ताह में एक दिन रनिंग की जगह क्रॉस ट्रेनिंग बेहद आवश्यक है जिनके द्वारा उन मसल्स को मजबूत किया जाता है जिनका उपयोग रनिंग के समय नहीं होता बहुतायत में रनिंग इंजुरी इसी के न करने के कारण होती है ! और साइकलिंग को बेहतरीन क्रॉस एक्सरसाइज माना जाता है !सो सप्ताह में एक दिन साईकिल चलायें !
  • रनिंग से पहले बॉडी स्ट्रेचिंग एवं वार्मिंग रनिंग के दौरान सिप करने के लिए पानी की छोटी बोतल एवं रन के अंत में धीमे धीमे स्लो डाउन करते हुए रुकना , इंजुरी से बचने के लिए बहुत आवश्यक है !
  • सीनियर उम्र के रनर अगर जल्दवाजी और जोश में रनिंग करेंगे तो तरह तरह के दर्द होंगे जिन्हे मेडिकल व्यापारी  खतरनाक बताकर पैसे निकलवा लेंगे ! उन्हें खासतौर पर शरीर का लचीलापन बनाये रखने के लिए विभिन्न एक्सरसाइज करना होगा तथा अपने लिए गहरी  नींद , सप्ताह में दो दिन पूरा रेस्ट तथा एक दिन साइक्लिंग करनी ही होगी  तभी शरीर लम्बे समय तक रनिंग के लिए साथ देगा , थके हुए पैरों को लेकर लम्बी दौड़ नहीं करनी चाहिए !
निम्न वेब साइट पर जाकर आप अन्य जानकारी ले सकते हैं 
https://www.runnersworld.com/training/

एवं रनिंग ट्रेनिंग के लिए 
https://www.halhigdon.com/training/5k-training/

यह मत भूल जाना कि इन दिनों जिन के पेट का घेरा बढ़ा हुआ है वे सब हृदय आर्टरीज में चर्वी जमा कर चुके हैं और डायबिटीज के शिकार हैं और इससे मुक्ति का इलाज केवल और केवल रनिंग सीखना है ! उनका जबरदस्त प्रभामंडल , समाज से मिलता सम्मान का नशे में व्यस्त वे आसन्न मौत की आहट भी नहीं ले पाएंगे  !

उन्हें चाहिए कि अगर अपने यश और सम्मान का सुख लेना है तो थोड़ा समय उस भूल पर लगाएं जो उन्होंने वर्षों से की है, आज से मेहनत करना और पसीने के साथ दौड़ने में सुख लेने का प्रयत्न करें अन्यथा जिनके लिए जीना आवश्यक है उन्हें ही खतरे में डालकर अचानक जाने के लिए तैयार रहें !
मंगलकामनाएं आप सबको !

Friday, June 8, 2018

मृत्युभय और इम्यून सिस्टम (हेल्थ ब्लंडर 9) -सतीश सक्सेना

गिरिजा कुलश्रेष्ठ एवं शशि शर्मा जी का सवाल है कि इम्यून सिस्टम को मजबूत कैसे करें ? इसके जवाब में आधुनिक सिस्टम और मेडिकल व्यवसाय के अनुसार वही टोटके बताये गए हैं जो हर मालदार आसामी को कहे
जाते हैं जैसे खूब सारे फ्रूट्स , सब्जियां , मेवा , और प्रोटीन आदि खाइये और बीमारियों से  दूर रहिये अगर इनकी बात पर विश्वास करें तब गरीब आदमी, मेहनतकश मजदूर आदि जो सूखी रोटी खाते हैं उनमें इम्यून सिस्टम शायद सबसे कमजोर ही होता होगा ! जबकि एक गरीब रिक्शे वाला 50 वर्ष की उम्र में 150 किलो की दो तोंदवालों को बिठाकर दिन भर 100 km से अधिक चलता है और देर रात घर पंहुचने पर खाने के नाम पर उसे ४ रोटी और दाल मिलती है सुबह फिर रिक्शा लेकर अपने काम पर !

शुरू के दिनों में जब मैं अपने कमजोर मन और शरीर के साथ लड़ रहा था तब यही प्रश्न अल्ट्रा रनर एवं कई बार के आयरन मैन @अभिषेक मिश्रा से पूंछा था कि एक हाफ मैराथन रनर जो 60 वर्ष का हो उसे क्या खाना चाहिए  तो अभिषेक का जवाब था कि यह सब बेकार के चोचले हैं आप वही खाइये जो साधारण लोग खाते हैं दाल सब्जी रोटी और मौसमी फल , और आपका शरीर इनसे ही भरपूर शक्ति ले लेगा !

अधिक उम्र में इम्यून सिस्टम बढ़ाने के लिए :
सबसे पहले अपने आप को हंसना सिखाइये जो कि बीमारी के भय और नकारात्मक विचारों के साथ जीते हुए व्यक्ति के लिए मुश्किल होता है ! मैं ऐसे तमाम लोगों को जानता हूँ जो अपने विगत सम्मान का ढिंढोरा पीटते हैं और अपने चेहरे को पेंट करने में ही अधिकतर समय बिताते हैं ऐसे लोग कुछ समय में ही निढाल हो जायेंगे ! सम्मान की चाहत ही, बुढापे की निशानी है और यह अधिकतर परिपक्व अवस्था में ही आती है ! किसी बच्चे को किशोर अवस्था तक, आपने सम्मान के लिए प्रयास रत नहीं देखा होगा , सम्मान योग्य कर्म कीजिये और उसके बदले में बिना आशा किये उसे भुला दीजिये अगर वह कार्य विशुद्ध मन से किया होगा तो अपने निशान अवश्य छोड़ेगा, जिसे लोग अपनाएंगे भी ! यही सच्चा सम्मान होगा चाहे आपके सामने मिले या पीठ पीछे !

स्वस्थ वही होगा जो प्रसन्नचित होगा, अपने आपको वृद्ध मानना और वैसा ही आचरण करना सबसे अधिक नुकसान करता है ! कुछ लोग अधिक उम्र में अपना गुणगान , अपने किये गए कार्यों का बखान , और सम्मान की चाहत में ,कमउम्र संगति में गंभीरता ओढ़े रहते हैं यह बड़प्पन ही आपको वृद्ध बनाने के लिए काफी है आपको समझना होगा कि सम्मान वह नहीं जो किसी के द्वारा दिया जाए यह सिर्फ खुद को भुलावे में रखने का आधार मात्र है ! ऐसे लोग चेहरे पर आयी झुर्रियों से मुक्ति नहीं पा सकते !

अगर आप खुद को वृद्ध नहीं मानते हैं तब आपका शरीर भी जवानों की फुर्ती रखने में कामयाब रहता है ! खुद को दी गयी मजबूत सलाह और आत्म विश्वास ही बेहतर प्रतिरक्षा शक्ति की कुंजी है सो मेडिकल व्यवसाय द्वारा  दिया ज्ञान भूलकर, बीमारी को लाइलाज न मानकर, मात्र शारीरिक प्रतिक्रिया मानिये जो कुछ दिन में सामान्य हो जायेगी और ऐसा करते समय मृत्युभय न रखें अन्यथा स्वस्थ होने में रूकावट आएगी !

उत्साह का मर जाना मृत्यु और उत्साह का होना ही जवानी है ,अपने ऊपर विश्वास के साथ नए कार्य सीखने का उत्साह होना सबसे आवश्यक है अगर ऐसा नहीं कर पा रहे तो आप नकारात्मक व्यक्तित्व के साथ जवान बनने का प्रयास कर रहे हैं ! सामाजिक वर्जनाओं को आँख बंद कर न अपनाएँ , लोग क्या कहेंगे कि इस उम्र में ..... जैसे सुझावों से मुक्ति पाएं और मन को प्रसन्न रखने के लिए तैरना, झूला झूलना ,साईकिल चलाना, और दौड़ना सीखना ,नए फैशन के कपडे पहनना शुरू करें ! शारीरिक एक्टिविटी जिसमें शरीर के हर अंग में कम्पन हो, व्यायाम हो उसमें लिप्त होना सबसे अधिक आवश्यक है !रनिंग जैसी एक्टिविटी आपको दीर्घ और स्वस्थ आयु दिलाने में समर्थ है ! 

अपने जीवन में कोई बैरियर न लगायें , मैं यह नहीं खा सकता मुझे यह पसंद नहीं ! वह हर चीज खाइए  जो विश्व में खायी जाती हो और उसे एन्जॉय करते हुए खाएं  वेज, नॉन वेज , बियर ,व्हिस्की, कॉफी, चाय , मिठाई , नमकीन मगर गुलाम किसी का न बनें !

अंत में भीष्म प्रतिज्ञा जैसी इच्छा शक्ति का विकास करें कि मैं अपना जीवन 100 वर्ष तक चाहता हूँ और वह भी मजबूती के साथ और यह मैं लेकर रहूँगा ! इस वरदान को लेने के लिए मंदिर जाकर ईश्वर की तपस्या आवश्यक नहीं है बल्कि बिना मेडिकल व्यवसाइयों के उपचार और टेस्ट के अपने मन को मजबूत भरोसा दिलाना ही ,शरीर को सौ वर्ष ज़िंदा रखने के लिए पर्याप्त होगा ! 

विश्व में वे लाखों व्यक्ति पूरे 100 वर्ष जिए हैं जिन्होंने जीवन में मृत्यु का भय दिलाने, विभिन्न बीमारियों का नाम और ज्ञान देने वाले व्यवसाइयों से मिलने में परहेज रखा !

Wednesday, June 6, 2018

हेल्थ ब्लंडर 8 -सतीश सक्सेना

रोज सवेरे वाक करके स्वस्थ रहने की ग़लतफ़हमी पालने वालों के लिए अरुण द्विवेदी की तल्ख़ टिप्पणी को ध्यान से पढ़ना चाहिए शायद वे अपनी गलती महसूस करें !


वाकई में यह वाक उनके किसी काम का नहीं , बरसों से आरामदेह शरीर , अपनी नियमित क्रियाएं भूल चुका है और आलसी आदमी अपने शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति पर ध्यान न देकर कम मेहनत और बिना पसीना बहाये सेठ रामदेव की ओर, किसी संजीवनी बूटी की आशा में देख रहा है !

मृत्यु भय और बढ़ती उम्र में आलसी शरीर के कारण उत्पन्न बीमारियां उसे अपने शरीर का ध्यान रखने के लिए सुबह वाक करने को मजबूर करती हैं और इस बोरियत से बचने के लिए वह अपने किसी संगी साथी की तलाश करता है जिसे वह अपने बड़प्पन के किस्से सुनाकर खुश महसूस करे साथ ही यह मुसीबत का समय भी बढ़िया कटे ! ऐसे लोगों को जब हृदय आघात होता है तब साथी चर्चा करते हैं कि यह तो नियमित टहलने जाते थी फिर इन्हें हार्ट अटैक क्यों हुआ ?

इसे ही ब्लॉक माइंड कहते हैं इन्हें समय ही नहीं है अपने गलते शरीर या अपनी प्रतिरक्षा शक्ति की चीत्कार सुनने का और न इसकी समझ कि मैं बेवकूफी क्या कर रहा हूँ , पछताना सिर्फ तब होता है जब मेडिकल व्यवसाय का कोई अनाड़ी डॉक्टर ,इनके शरीर के ऊपर ऑपरेशन थियेटर में, बेतुकी जगह पर चीरफाड़ करते हुए ऑपरेशन करना सीखता है फलस्वरूप यह लोग अपनी बची हुई जिंदगी ,रेंगते हुए बिताने को मजबूर होते हैं !

कोई भी डॉ अपने मरीज को उसके इम्यून सिस्टम के बारे में जानकारी देने का प्रयत्न नहीं करता कि वह (इम्यून सिस्टम ) उसे बचाने के लिए क्या करता है और न वह यह बताता है कि इन गोलियों के खाने से आपके शरीर का कितना नुकसान होगा !

बीमारी कोई भी हो हर डॉ सबसे पहले विभिन्न टेस्ट करवाता है और अधेड़ शरीर में कम से कम दो तीन स्वाभाविक उम्र जनित बीमारियां निकल ही आती हैं जिनके उपाय में, मेडिकल व्यवसाइयों को अच्छी खासी राहत और एक डरा हुआ मरीज अगले कुछ वर्षों के लिए नोटों का थैला लिए हुए मिल जाता है !

कितने ही पढ़े लिखे जाहिल, अपने शरीर से संवाद न करके इन व्यवसाइयों की सलाह पर निर्भर होकर अपने दुखते घुटने , कमर , किडनी और हृदय रोगों की दवा खाते जी रहे हैं साथ ही अपने आपको तसल्ली देते रहते हैं कि अब हमारी उम्र बीमारियों की तो है ही और मैं "इलाज" भी बढ़िया डॉ से करा रहा हूँ ! काश इन बेवकूफों को पता हो कि इसका विश्व में कोई इलाज उपलब्ध ही नहीं इन गोलियों को खाने से बेहतर बिना दवा लिए जीना है सिर्फ अपने इम्यून सिस्टम से बाते करना सीखना होगा !

इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाओ, शरीर झूम उठेगा ! वह किसी भी बीमारी, जिसका नाम कुछ भी हो, को खुद ठीक करने में समर्थ है बशर्ते कि तुम भयभीत होकर न जी रहे हो !

मंगलकामनाएं सदबुद्धि के लिए !
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