Saturday, May 24, 2008

कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये - सतीश सक्सेना

तुम मेरे दिल की रानी हो 
मैं तेरे दिल का कचरा हूँ ,
पति ढूँढा है,लक्ष्मीवाहन
तुम हो देवी सौभाग्यवती 
तुम हो खिचडी में घी जैसी , 

मैं चटनी जैसा दीखता हूँ !   
मैं हूँ कैसा नादान  प्रिये  ! कैसे समझाऊँ  प्यार प्रिये   !!

तुम हो बिलकुल जीनत अमान 
मैं प्राण सरीखा ,  दिखता  हूँ 
तुम तो हेमा की  कापी  हो ,
मैं प्रेम चोपड़ा ,   लगता हूँ  !
दोनों पहिये बेमेल  मिले  , 

जीवन गाडी है खडी  प्रिये  !
मैं हूँ कैसा नादान  प्रिये ,  कैसे समझाऊँ प्यार प्रिये   !!

मैं एक गाँव का हूँ , गंवार ,
तुप छैल छबीली दिल्ली की
मैं  राम राम और पाँव छुऊँ 
तुम हाय हाय ओंर हेल्लो की  ,
जीवन गाडी के दो पहिये , 

दोनों कैसे  बेमेल मिले  !
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये   कैसे समझाऊँ  प्यार प्रिये !

तुम हो गन्ने की रस जैसी 
मैं कोल्हू जैसा दीखता हूँ 
तेरा चेहरा गुलाब जैसा 
मैं  नोडू जैसा  दीखता हूँ 
तुम नॉएडा में इंदिरा गाँधी 

मैं राज नारायण लगता हूँ !
मैं हूँ कैसा नादान प्रिये , कैसे  समझाऊँ प्यार  प्रिये   !!

1 comment:

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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