ब्लॉग जगत में आने से पहले ही मैं एक व्यस्त सामाजिक प्राणी था जो अकेला रहना कभी पसंद नहीं करता था जो लोग मुझे अच्छे लगते रहे हैं, उनकी समस्याओं को अपनी पूरी शक्ति के साथ सुलझाने का प्रयत्न करना, मेरा जूनून रहा है, नतीजा हर समय व्यस्तता, जो मेरी अक्षय उर्जा को और शक्ति देता रहता है !मानव समाज में मित्रता और मुहब्बत एक अजीब रंग है जो किस पर चढ़ जाए यह कोई नहीं जानता ! समान गुण स्वभाव के लोगों में परस्पर खिचाव स्वाभाविक ही है , सो ब्लॉग जगत में शुरुआत से ही जिन लोगों से आकर्षित रहा उनमें अनूप शुक्ल, अरविन्द मिश्र और समीर लाल प्रमुख रहे ...मुझे इन लोगों के लेख कहीं न कहीं प्रभावित करते रहते थे और हम मुरीदों में शामिल होते चले गए ! अभी इसी माह समीर लाल के साथ दिल्ली में समय बिताने का मौका मिला ! शायद आपको जानकर आश्चर्य होगा कि प्रोफेशनल चार्टर्ड एकाउंटेंट समीर लाल, बिना किसी विशेष आधिकारिक डिग्री लिए, कम्पयूटर टेक्नालोजी में कनाडा स्टाक मार्केट में, सोफ्टवेयर विशेषज्ञ के रूप में मशहूर हैं ! इस संवेदनशील, पारिवारिक और भावुक व्यक्ति की रचनाओं के जरिये, आप इसमें छिपे एक सीधे साधे सरल व्यक्तित्व को आसानी से देख सकते हैं !
गर्वरहित मगर प्रभावशाली जाकिर अली रजनीश के साथ खड़े डॉ अरविन्द मिश्र , से मिलने में लगा कि एक मस्त परमहंस से मुलाकात हो गयी ! मिलनसारिता और बेबाकी में सीमारहित, अरविन्द में, कई जगह मुझे अपना प्रतिरूप नज़र आया ! अगर आप खुलकर बात करना और कहना पसंद करते हैं तो बेबाक विद्वता के धनी , अरविन्द मिश्र के पास से हटने का दिल नहीं करेगा, और निस्संदेह विभिन्न विषयों पर गहरी पकड़ रखने वाले अरविन्द, किसी को भी आसानी से, हँसते हँसते प्रभावित करने में सक्षम है !
ब्लॉग जगत की शख्शियतों की चर्चा ही बेकार मानी जायेगी अगर अनूप शुक्ल का नाम नहीं लिया जाए ! हिंदी ब्लॉग साहित्य में, अपने योगदान की बिना चर्चा किये, अपनी ही छवि के साथ खिलवाड़ करने वाले इस विद्वान् लेख़क में गज़ब का जीवट है जो निर्ममता के साथ अपने व्यक्तित्व के साथ मज़ाक करता रहता है ! आप एक उदाहरण देखिये "सतीश सक्सेना जी ने मासूम भाई को सुझाया कि वे अनूप शुक्ला से भी अमन का पैगाम लिखवा लें। मुझे लगा कि शायद सतीश जी अमन में हमारे मसखरेपन को शामिल करवाना चाहते हैं। हम कोई पैगाम देंगे तो लोग भले न हंसे हमको खुद हंसी आयेगी कि हम भी पैगाम देने लगे।"
कई बार मुझे महसूस होता है की अगर हिंदी ब्लॉग में अनूप शुक्ल और समीर लाल न होते तो ब्लॉग जगत का आज का स्वरुप हमें कम से कम पांच साल बाद देखने को मिलता ! निस्संदेह ब्लॉग जगत को लोकप्रिय बनाने के प्रयासों में, ये दोनों हमेशा जाने जायेंगे !
ब्लॉग जगत में एक से एक बड़े विद्वान् लिख रहे है जहाँ मेरे जैसे जैसे लोग पासंग भी नहीं है...अगर इन लेखों के कारण इन विद्वानों से कुछ सीख सकूं अथवा इसी प्रकार इनका सामीप्य मिलता रहे तो यह ब्लाग लेखन धन्य हो जाए ! काश प्यार और परस्पर सम्मान के साथ यह ब्लोगर मिलन चलते रहे और सब उन्मुक्त मन स्वागत करें तो शायद आनंद चौगुना हो जाए !















बस इत्ता बता दीजिये कि कौए ने किस चीज से पांखे खुजलाये ? तब हम जान जायं कि सचमुच वजन है आपकी समझ में .न जाने काहें ये डाउट ससुरा बना ही रहता है आपको लेकर !
दुसरे कई और प्राणी गायब हैं ….जो हम सरीखे बिचारों के विचारों को तरह तरह कुरेदता है …….