Thursday, May 3, 2012

कैसी है, पहचान तुम्हारी -सतीश सक्सेना

दिल  की परतों में सोये हो ,
लगते तो कुछ अपने जैसे 
मन में इतने गए समाये  
तुम्हें छिपायें बोलो कैसे ,
जबसे तुमको देखा मैंने पलकें अपनी बंद रखी हैं !   
कौन जान पायेगा तुमको,कैसी है पहचान तुम्हारी !

जब भी आये, द्वार तुम्हारे !
तुम छिप गए लाज के मारे 
आखें खोज रही तुमको ही 
कब से देखो, बिना सहारे !
बरसों बीते बिन देखे ही , कैसी है ? यह प्रीत  हमारी   !
लोकलाज वश  कहाँ छिपायीं,तुमने मेरी प्रेम निशानी  !

अभी कुछ दिनों पहले तुमने 
प्रणय गीत कुछ गाये तो थे 
पीड़ा मेरी कुछ सुनकर ही  
आँख, अश्रु भर आये तो थे !  
मुझे ख़ुशी है उस घटना की,तुमको भी है याद पुरानी !    
कौन समझ पायेगा जग में,मेरी तेरी अमर कहानी  !

45 comments:

  1. अभी कुछ दिनों पहले तुमने
    प्रणय गीत कुछ गाये तो थे
    पीड़ा मेरी कुछ सुनकर ही
    आँख, अश्रु भर आये तो थे !
    मुझे ख़ुशी है उस घटना की तुमको भी है याद पुरानी !
    कौन समझ पायेगा जग में,मेरी तेरी अमर कहानी !

    वाह...क्या बात है //बहुत सुंदर अभिव्यक्ति // बेहतरीन रचना //

    MY RECENT POST ....काव्यान्जलि ....:ऐसे रात गुजारी हमने.....

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  2. आपके इस गीत ने फिल्म स्वामी के पसंदीदा गीत की याद दिला दी...

    का करूं सजनी, आए ना बालम...

    जय हिंद...

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  3. कल 05/05/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .

    धन्यवाद!

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    1. अच्छा लगा जानकार आपसे !
      आपका स्वागत है !

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  4. संवेदनशील कविता मन के भावों स्पर्श करती हुयी.......प्रसंशनीय

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  5. बरसों बीते बिन देखे ही , कैसी है ? यह प्रीत हमारी!

    कौन समझ पायेगा जग में,मेरी- तेरी अमर कहानी !

    मन तो समझता होगा, जोड़े रखने वाली एक नाजुक अनदेखी डोर जो होगी !
    सुन्दर गीत !

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  6. सुन्दर भावभीनी प्रस्तुति.
    पढकर भावविभोर हो गया हूँ.

    मेरे ब्लॉग को बिसरा न दीजियेगा.

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    1. आदेश सर माथे ...
      सादर

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  7. संवेदनशील कविता

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  8. आपके गीतों का कोई जवाब नहीं है, बधाई।

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    1. शुक्रिया अजित जी...

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  9. कतल है सर कतल है , लगता है आजकल मन ज्यादा बेचैन है । रहने दीजीए और उडेल डलिए सबकुछ । हम पढ रहे हैं सतीश भाई

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  10. आचार्य गीत के |
    उपासक प्रीत के |
    मीत मनमीत के -
    जियो जग-जीत के ||

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    1. आभारी हूँ आपके आशीर्वाद के लिए कविवर ...

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  11. बहुत सुंदर सतीश जी.
    बरसों बीते बिन देखे ही , कैसी है ? यह प्रीत हमारी !
    लोकलाज वश कहाँ छिपायीं,तुमने मेरी प्रेम निशानी !

    बहुत प्यारा....मधुर सा प्रेम गीत.............

    सादर...

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  12. दिल की परतों में सोये हो ,
    लगते तो कुछ अपने जैसे
    मन में इतने गए समाये
    तुम्हें छिपायें बोलो कैसे ,
    जबसे तुमको मैंने देखा , पलकें अपनी बंद रखी हैं !
    कौन जान पायेगा तुमको, कैसी है पहचान तुम्हारी


    आपके लिए बस
    बंद पलकों में तेरे ख्वाब सजाऊँ कैसे ?
    हर एक शाम तेरी याद जब रुलाएगी ..

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  13. बहुत सुंदर गीत के लिये बधाई स्वीकार करे!

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    1. आप खूबसूरत शीर्षक देने के लिए धन्यवाद स्वीकारें !

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  14. कृष्ण-राधा सा प्रेम है .....शुभकामनाएँ !

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  15. दिल से निकली ....दिल तक पहुंचे ,,!!!
    शुभकामनाएँ!

    एक अपील ...सिर्फ एक बार ?

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  16. बड़े गुलाम अली खां साहब की मशहूर ठुमरी "आए न बालम" की याद दिलाता है यह गीत!! आपके इन्हीं गीतों को पढकर खुद के संगीत से अनभिज्ञ होने का अफ़सोस होता है!! कभी अपनी आवाज़ में पोडकास्ट करें, बड़े भाई!!

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    1. मुझे नहीं लगता कि मैं गायक बन सकता हूँ ...
      फिर भी कोशिश करूंगा ...
      आपका अनुरोध महत्वपूर्ण है !

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  17. अभी कुछ दिन पहले ---- यानि प्रेम कहानी नई है ! :)
    कौन समझ पायेगा जग में,मेरी तेरी अमर कहानी !

    हम तो बिना समझे ही समझ गए भाई जी -- बहुत सुन्दर प्रेम कहानी है .

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    Replies
    1. मैंने तो अपनी रचना में हर गीत तुम्हारे नाम लिखा
      जाने क्या अर्थ निकालेगी इन छंदों का दुनिया सारी !!

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  18. बरसों बीते बिन देखे ही , कैसी है ? यह प्रीत हमारी !
    लोकलाज वश कहाँ छिपायीं,तुमने मेरी प्रेम निशानी !
    मन की गहराई से निकले कोमल भाव... बहुत सुन्दर गीत...

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  19. दिल की परतों में सोये हो ,
    लगते तो कुछ अपने जैसे
    मन में इतने गए समाये
    तुम्हें छिपायें बोलो कैसे ,

    गहन अनुभूतियों की सुन्दर अभिव्यक्ति ...

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  20. श्री मन जी नमस्कार ,बहुत ही सुन्दर कवि़त है |अंतिम पंक्तियों में जो सार दिया है वोह बहुत ही अच्छा है |

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  21. अभी कुछ दिनों पहले तुमने
    प्रणय गीत कुछ गाये तो थे
    पीड़ा मेरी कुछ सुनकर ही
    आँख, अश्रु भर आये तो थे !

    बहुत कोमल भावों को सँजोया है गीत में ... सुंदर गीत

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  22. ्भावप्रवण रचना

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  23. जबसे तुमको मैंने देखा , पलकें अपनी बंद रखी हैं !
    कौन जान पायेगा तुमको, कैसी है पहचान तुम्हारी

    वाह ...!बहुत ह्रदय के भाव ....!
    शुभकामनायें ...!!

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  24. मेरी तेरी अमर कहानी !
    अब तो सारे समझ गया और जान गए

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    Replies
    1. गीत अनुरोध पर भी लिखे जाते हैं , हाँ भाव कवि के हैं ...
      आशा है ग़लतफ़हमी नहीं पाली जायेगी !

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  25. बहुत सुंदर कोमल भाव से सजी कविता!

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  26. वाह बहुत खूबसूरत गीत लिखा गया हैं ...सोच और शब्द को ध्यान में रखते हुए

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  27. अभी कुछ दिनों पहले तुमने
    प्रणय गीत कुछ गाये तो थे
    पीड़ा मेरी कुछ सुनकर ही
    आँख, अश्रु भर आये तो थे !
    मुझे ख़ुशी है उस घटना की,तुमको भी है याद पुरानी !
    कौन समझ पायेगा जग में,मेरी तेरी अमर कहानी !
    bhaav bibhor kar diya

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  28. बहुत सुन्दर श्रृंगार अभिव्यक्ति!

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  29. आपके शब्दों में भाव इतने सरस हो निकलते हैं कि आनन्द आ जाता है।

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    1. अब आपके कहने पर विश्वास सा हो रहा है ....
      आभार

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  30. सरल शब्दों में सहज ही मन में उतरती रचना ...

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  31. अभी कुछ दिनों पहले तुमने
    प्रणय गीत कुछ गाये तो थे
    पीड़ा मेरी कुछ सुनकर ही
    आँख, अश्रु भर आये तो थे !
    मुझे ख़ुशी है उस घटना की,तुमको भी है याद पुरानी !
    कौन समझ पायेगा जग में,मेरी तेरी अमर कहानी !
    रूहानी रिश्ता

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  32. कोमल भावो से लिखी
    बेहतरीन गीत....
    बहूत हि उत्कृष्ठ लिखा है...

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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