Monday, August 7, 2017

अपना दर्द, उजागर करते, मूरख बनते मेरे गीत ! -सतीश सक्सेना

किसी कवि की रचना देखें,
दर्द छलकता,  दिखता है  !
प्यार, नेह दुर्लभ से लगते ,
शोक हर जगह मिलता है !
क्या शिक्षा विद्वानों को दें ,
रचनाओं  में , रोते गीत !
निज रचनाएँ , दर्पण मन का, दर्द समझते, मेरे गीत ! 

अपना दर्द किसे दिखलाते ?
सब हंसकर आनंद उठाते !
दर्द, वहीँ जाकर के बोलो ,
भूले जिनको, कसम उठाके !
स्वाभिमान का नाम न देना,
बस अभिमान सिखाती रीत ,
अपना दर्द, उजागर करते, मूरख  बनते  मेरे  गीत !

आत्म मुग्धता,  मानव की ,
कुछ काम न आये जीवन में !
गर्वित मन को समझा पाना ,
बड़ा कठिन, इस जीवन में !
जीवन की कड़वी बातों को, 
कहाँ भूल पाते हैं गीत !
हार और अपमान याद कर, क्रोध में आयें मेरे गीत !

जब भी कोई कलम उठाये 
अपनी व्यथा, सामने लाये ,
खूब छिपायें, जितना चाहें 
फिर भी दर्द नज़र आ जाये
मुरझाई यह हँसी, गा रही, 
चीख चीख, दर्दीले गीत !
अश्रु पोंछने तेरे, जग में, कहाँ मिलेंगे निश्छल गीत  ?

अहंकार की नाव में बैठे,

भूल गए  कर्तव्यों  को 
अच्छी मीठी ,यादें भूले , 
संचय कड़वे  कष्टों को
कितने चले गए रो रोकर, 
कौन सम्भाले बुरा अतीत !
सब झूठे ,आंसू पोंछेंगे , कौन सुनाये , मंगल गीत  ?

सभी सांत्वना, देते आकर 
जहाँ लेखनी , रोती पाए !
आहत मानस, भी घायल 
हो सच्चाई पहचान न पाए !
ऐसी जज़्बाती ग़ज़लों को ,
ढूंढें अवसरवादी गीत !
मौकों का फायदा उठाने, दरवाजे पर तत्पर गीत !

एक मित्र को दी गयी सलाह - सतीश सक्सेना


अगर परिवार में कुछ समय से बिना कारण एक घातक लड़ाई का वातावरण तैयार हो चुका हो तो आपस में न लड़कर शांत मन से तलाश करें कि घर में कोई भेड़िया तो नहीं आ गया जिसे आपने कुत्ता समझकर घर की चौकीदारी ही सौंप दी हो !


अगर हम तुम्हें , बिन मुखौटे के पाते ! 
असल देखकर बस दहल ही तो जाते !

Saturday, July 8, 2017

क्षमा करें,यदि चढ़ा न पायें, अर्ध्य देव को,मेरे गीत - सतीश सक्सेना

नेह के प्यासे धन की भाषा
कभी समझ ना पाए थे !
जो चाहे थे ,नहीं मिल सका 
जिसे न माँगा , पाए थे !

इस जीवन में, लाखों मौके,
हंस के छोड़े, हमने मीत !
धनकुबेर को, सर न झुकाया, बड़े अहंकारी थे गीत !


जीवन भर तो रहे अकेले
झोली कहीं नहीं फैलाई
गहरे अन्धकार में रहते ,
माँगा कभी दिया, न बाती
कभी न रोये, मंदिर जाकर ,
सदा मस्त रहते थे गीत !
कहीं किसी ने, दुखी न देखा, जीवन भर मुसकाए गीत  !

सब कहते, ईश्वर लिखते ,
है, भाग्य सभी इंसानों का !
माता पिता छीन बच्चों से
चित्र बिगाड़ें, बचपन का !
कभी मान्यता दे न सकेंगे,
निर्मम रब को, मेरे गीत !
मंदिर, मस्जिद, चर्च न जाते, सर न झुकाएं मेरे गीत ! १०

बचपन से, ही रहे खोजता
ऐसे , निर्मम, साईं को !
काश कहीं मिल जाएँ मुझे
मैं करूँ निरुत्तर, माधव को !
अब न कोई वरदान चाहिए,
सिर्फ शिकायत मेरे मीत !
विश्व नियंता के दरवाजे , कभी न जाएँ , मेरे गीत !

क्यों तकलीफें देते, उनको ?
जिनको शब्द नहीं मिल पाए !
क्यों दुधमुंहे, बिलखते रोते
असमय, माँ से अलग कराये !
तड़प तड़प कर अम्मा खोजें,
कौन सुनाये इनको गीत !
भूखे पेट , कांपते पैरों , ये कैसे , गा पायें गीत ??

जैसी करनी, वैसी भरनी !
पंडित , खूब सुनाते आये !
पर नन्हे हाथों की करनी
पर, मुझको विश्वास न आये
तेरे महलों क्यों न पहुँचती 
ईश्वर, मासूमों की चीख !
क्षमा करें, यदि चढ़ा न पायें अर्ध्य, देव को, मेरे गीत !

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Wednesday, July 5, 2017

साधन संपन्न आम आदमी -सतीश सक्सेना

            आज आपने जीवन की सबसे लम्बी साइकलिंग की , 61 km ,3 घण्टे में पूरे हुए इस बीच 3 मिनट का नेहरूपार्क पर रुक कर बॉडी स्ट्रेचिंग की !
            बेहतरीन मौसम में पैडल मारते हुए मैं याद कर रहा था जब 1977 में दिल्ली आया था नौकरी ज्वाइन करने ,तब से अब तक एक भी दिन ऐसा नहीं गया जब मैं कह पाता कि आज मैं पैदल 1 km बिना मोटर साइकिल या कार के चला ,38 वर्ष निकाल दिए मैंने आलस्य में, बिना पैरों का उपयोग किये, यह ज़हालत का सबसे बड़ा नमूना था ! आम आदमी जैसा था मैं, जिसकी सोंच थी कि साधन संपन्न होने का अर्थ अपने शरीर को आराम देना और बढ़िया भोजन बस ! 
            मगर अब मैं आम आदमी जैसा सुस्त और ढीले शरीर का मालिक नहीं, 63 वर्ष की उम्र में मैंने धीरे धीरे अपने शरीर को लगातार घंटो दौड़ना सिखा दिया ,आज 61 km साईकिल 20 km /hour की स्पीड से तय करके शरीर की अपरिमित शक्ति को महसूस कर अच्छा लग रहा है !

#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Monday, July 3, 2017

लेखन क्वालिटी -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कुछ सक्रियता तो आयी मगर आवश्यकता इस उत्साह को बनाये रखने की है ! हमें विस्तार से विगत का आकलन करना होगा अन्यथा कुछ दिनों में सब जोश ठंडा हो जाएगा !
फेसबुक के शुरू होने के साथ अधिकतर ने ब्लॉग लेखन बंद कर दिया इसके पीछे उन्हें कमेंट का न मिलना या कमेंट संख्या में भारी कमी थी, लोगों का अधिक ध्यान फेसबुक पर था जहाँ आसानी से लाइक और कमेंट मिल रहे थे और वे अधिक इंटरैक्टिव भी थे ! अपनी रचनाओं पर लोगों का ध्यान न देख कर निराशा और अपमान बोध जैसा महसूस हुआ और सबने अपना रुख फेसबुक की ओर कर लिया जहाँ अधिक पहचान मिलने की आशा थी !

मेरे ब्लॉग पर आने वाले कमेंट में 80 प्रतिशत की गिरावट आयी मगर मेरा लेखन इस कारण कभी कम न हुआ , ब्लॉग लेखन का उद्देश्य मेरे लेखन का संकलन मात्र रहा था मेरा विश्वास था कि इसे देर सबेर लोग पढ़ेंगे ज़रूर ,
इसमें बनावट से लोगों को प्रभावित करने की चेष्टा रंचमात्र भी नहीं थी !

मेरा अभी भी दृढ विश्वास है कि गूगल के दिए इस मुफ्त प्लेटफॉर्म से बेहतर और कोई प्लेटफॉर्म नहीं है जहाँ लोग अपनी रचनाये सदा के लिए सुरक्षित रख सकते हैं ! सो ब्लॉगर साथियों से अनुरोध है कि वे दिल से लिखें और क्वालिटी कंटेंट लिखें ताकि आज न सही कल आने वाली पीढ़ी उनकी अभिव्यक्ति समझे और पुरानी पीढ़ी को अपने साथ महसूस कर सके !

मंगलकामनाएं आपकी कलम को !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Sunday, July 2, 2017

हिन्दी लेखन में ब्लॉगर -सतीश सक्सेना

ब्लॉग लेखन में कोई संदेह नहीं कि टिप्पणियां जीवनदान का काम करती हैं , अगर सराहा न जाय तब बड़े बड़े कलम भी घुटनों के  बल बैठते नज़र आएंगे ! मेरे शुरुआत के दिनों में उड़नतश्तरी की त्वरित टिप्पणियों का बड़ा योगदान रहा है और आज भी मैं उनका शुक्र गुज़ार हूँ,  तब से अब तक 584 से अधिक रचनाएं , गद्य अथवा पद्य के रूप में ब्लॉग पर लिख चुका हूँ तथा पाठकों से 16649 टिप्पणियां एवं कुल 518380 पेज व्यू  मिले हैं ! यह पाठक ही हैं जिन्होंने इन्हें मन से सराहा और उन के कारण कलम को सहारा मिलता रहा !

किसी भी रचनाकार के लिए, ध्यान से पढ़ के दिया गया कमेन्ट, प्रेरणा दायक होने के  साथ साथ, उसके कार्य की समीक्षा और सुधार के लिए बेहद आवश्यक होता है , और मैं आभारी हूँ अपने उन मित्रों का जो लगातार मुझे पढ़ते रहे और उत्साह देते रहे ! इस बीच जब जब लेखन से मन उचाट हुआ इन्होने मुझे आकर जगाया और कहा कि लिखिए हमें पढ़ना है, और इन्ही मित्रों के कारण, कलम आज भी गति शील है !

साधारणतया ब्लॉग लेखन का एक उद्देश्य, अपने आपको स्थापित करने के साथ साथ, लोकप्रियता हासिल करना तो निस्संदेह रहता ही है, अपनी तारीफ़ सभी को अच्छी लगती है बशर्ते वह योग्य लोगों द्वारा पढ़ कर की जाए !  अक्सर टिप्पणियों के बदले में, लेख अथवा कविता को बिना पढ़े मिली ब्लोगर वाहवाही, अक्सर हमारे ज्ञान का बंटाधार करने को काफी है ! केवल वाहवाही की टिप्पणियां हमारे अहम् और फ़र्ज़ी प्रभामंडल को बढाने में ही सफल होती हैं चाहे हमारा लेखन कूड़ा ही क्यों न हो !

मेरा यह मानना है कि ब्लोगिंग के जरिये लेखन में विकास , भाषा  के साथ साथ , मानसिकता में बदलाव भी लाने में सक्षम है जो शायद भारतीय समाज की सबसे बड़ी आवश्यकता है !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Saturday, July 1, 2017

रुकिए नहीं, दौड़ते रहें , रुकना अंत होगा अभिव्यक्ति का, जीवन दौड़ का -सतीश सक्सेना

मेरे लिए ब्लॉगिंग करना हमेशा स्फूर्तिदायक रहा है, ब्लॉगिंग मेरे लिए पहले दिन से लेकर आजतक मेरे विचारों का एकमात्र संकलन स्थल रहा है और इसकी उपयोगिता मेरे लिए कभी कम नहीं हुई भले ही लोग आएं या न आएं ! शुरू से लेकर अबतक लगभग ४ पोस्ट प्रति माह लिखता रहा हूँ जो लगातार जारी रही दुखद यह है कि लोगों ने लिखना बंद कर दिया शायद इसलिए कि अब कमेंट मिलने कम हो गए !
लेखन से आपको अपनी अभिव्यक्ति को व्यक्त करने का अवसर मिलता है इसपर तालियों की आशा नहीं करनी चाहिए बल्कि हर नए लेख को और अधिक ईमानदारी से लिखने का प्रयास करते रहना है !

लेखन पर कमेंट न मिलना निराशा का कारण नहीं होना चाहिए बल्कि लेखन में निखार लाने के प्रति कृतसंकल्प होना चाहिए ,निश्चित ही सतत लेखन, आपकी अभिव्यक्ति में सुधार करने में सहायक होगा !

मेरा मानना है कि आप सकारात्मक लिखते रहिये अगर आपके विचारों में , रचनात्मकता है तो लोग एक दिन आपके लेखन को अवश्य पढ़ेंगे और उसे सम्मान भी मिलेगा !

सस्नेह मंगलकामनाएं कि आपकी कलम सुनहरी हो !
#हिन्दी_ब्लॉगिंग

Friday, June 23, 2017

जाने कहाँ वे खो गए कुछ शब्द, जो बोले नहीं - सतीश सक्सेना

बरसों से सोंचे शब्द भी उस वक्त तो बोले नहीं 
जब सामने खुद श्याम थे तब रंग ही घोले नहीं !

कुछ अनछुए से शब्द थे, कह न सके संकोच में,
जानेंगे क्या छूकर भी,हों जब राख में शोले नहीं !

प्रत्यक्ष देव,विरक्त मन, किससे कहें, नंदी के भी
सीने में कितने राज हैं,जो आज तक खोले नहीं !

विश्वास ही पहचान हो निर्मल ह्रदय की भावना 
मृदु ह्रदय मंजुल भाव तो हमने कभी तौले नहीं !

उलझी अनिश्चय में रही, मंदाकिनी हर रूप में
थी चाहती निर्झर बहे, शिवकेश थे,भोले नहीं !

Thursday, June 22, 2017

ध्यान बटाने को मूर्खों का, राजा के सहयोगी आये ! - सतीश सक्सेना

भुला पीठसंकल्प कलियुगी आकर्षण में योगी आये,
वानप्रस्थ को त्याग,राजसुख लेने वन से,जोगी आये !

तड़प किसान खेत में मरते,ध्यान बटाने को भूखों का, 
योग सिखाने जोगी बनकर,राजनीति के ढोंगी आये !

महंगाई से त्रस्त,भूख बेहाल ग्राम,शमशान बना के,  
ध्यान बटाने को मूर्खों का, राजा के सहयोगी आये !

लालकिले तक पंहुचाने में जाने कितने पापड बेले,
अश्वमेध फल लेने अपना, भगवा पहने भोगी आये !

कष्ट दूर चुटकी में करने धूर्त,धर्म,भय चूरन लेकर,
रोगमुक्त करने माँ बहिनें,ये संपत्ति वियोगी आये !

Monday, June 5, 2017

कितनी आशाएं पाली थीं, बिके हुए अखबारों से -सतीश सक्सेना

हमको घायल किया तार ने,कैसी रंज गिटारों से !
कितना दर्द लिखा के लाये,रंजिश पालनहारों से !

बेबाकी उन्मुक्त हंसी पर, दुनियां शंका करती है !
लोग परखते हृदय निष्कपट,कैसी कैसी चालों से !

निरे झूठ को बार बार दुहराकर , गद्दी पायी है !
कोई भी उम्मीद नहीं, इन बस्ती के सरदारों से !

किसने कहा ज़मीर न बिकते, दुनियां में खुद्दारों के
सबसे पहले बिका भरोसा,शिकवा नहीं बज़ारों से !

लोकतंत्र का चौथा खम्बा, पूंछ हिलाके लेट गया
कितनी आशाएं पाली थीं, बिके हुए अखबारों से !

Thursday, May 18, 2017

वजन घटाने के लिए रन -वाक -रन कैसे करें - सतीश सक्सेना

-धीमे चलना शुरू करें, बिना हांफे धीमे धीमे मगर अधिक लंबा दौड़ने/वाक की आदत डालें 
तथा उत्सर्जित एंडोर्फिन्स का आनंद लें, इससे न केवल आपकी सहनशीलता बढ़ेगी बल्कि आपका आत्मविश्वास भी ऊपर जाएगा !
- आपका उद्देश्य रोज नयी दूरियां तय करना होना चाहिए एक साथ अधिक लम्बी दूरी तय न करें , सप्ताह में 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी उचित रहेगी और रनर्स इंजुरी से भी बचे रहोगे !

-पहली बार दौड़ना सीखने वाले सिर्फ वाक् के आखिरी हिस्से में सिर्फ 2 मिनट धीमे धीमे दौड़ कर अपने शरीर को दौड़ना सिखाएं ध्यान रहे हांफना नहीं है !
-हर रन में आपके हाथ में पानी की बोतल होनी चाहिए जिससे गला तर करने के लिए छोटे छोटे सिप लेते रहें
-दौड़ते समय ध्यान दूरी अथवा थकान पर न होकर अपने क़दमों की ताल पर होना चाहिए , नए रनर को अपने कदम छोटे छोटे मगर तेज चलाने चाहिए इससे थकान कम तथा दूरी अच्छी तय होगी
-सबसे महत्वपूर्ण अपनी तय दूरी खुश होकर आसानी से दौड़ते हुए तय करनी है , माथे पर बल चेहरे पर तनाव लेकर दौड़ने वाले जल्दी थकेंगे
-जोश में किया गया रन थका देगा अतः स्पीड को सही रखें इसे जानने के लिए दौड़ते दौड़ते एक पूरा वाक्य बोलें अगर आप पूरा वाक्य बिना रुके टूटे बोल पा रहे हैं तब आप ठीक दौड़ रहे हैं !
-अधिक उम्र तथा पहली बार दौड़ने वाले जल्दवाजी न करें वे वाक् के अंत में सिर्फ दो मिनट जॉगिंग करके अपना नियमित वाक् समाप्त करें इससे उनका शरीर रनिंग पोस्चर सीखेगा और कुछ समय में दौड़ने लगेगा
-खाने में कटौती न करें आपके खाने में कार्बोहाइड्रेट्स की मात्रा पर्याप्त होनी चाहिए अन्यथा लम्बी दूरी तय करते समय थकान महसूस करेंगे और एन्जॉयमेंट महसूस नहीं करेंगे
-हैवी डिनर का त्याग करें बेहतर होगा नींद से तीन घंटे पहले डिनर लें
-शुगर का पूरी तौर पर त्याग करें
-रविवार की सुबह लॉन्ग वाक /रन का रखें जो पिछले से अधिक लम्बा हो 

Break your barriers !!

Wednesday, May 17, 2017

जकड़े घुटने पकड़ के रोये , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना

अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !

मोटी चर्बी चढ़ी बदन पर, दूध भैंस का घी बूरा संग, 
भुला दंड बैठक धन आते, भूला ग्रामाचार आदमी !

हाथ पैर को बिना हिलाये, जब से वह धनवान बना,
रोक पसीना, शीतल घर में, करता योगाचार आदमी ! 

शक्ति गंवायी  बैठे रह कर , रोगों से बच पाने की  ,
खा ढेरों गोलियां घटाता अपनी रक्षा शक्ति आदमी !

नौकर धनबल शान औ शौकत से शरीर बरबाद किया  
पत्थर जैसा बदन गँवाकर करता शल्योपचार आदमी !

Thursday, May 4, 2017

उद्दंड राज्य और भयभीत मानवता -सतीश सक्सेना

-नार्थ कोरिया ने इज़राइल को कहा है कि अगर भविष्य में उसके महान नेता के खिलाफ एक भी शब्द बोला तो उसे बिना दया के 1000 गुनी भयानक सजा दी जाएगी अतः भविष्य में अपना मुंह सोंच समझ कर खोले और अमेरिका की चमचा गीरी न करे 

-नार्थ कोरिया ने अमेरिकन विमानवाहक युद्धक बेडा को समुद्र में डुबा देने की धमकी दी  उसने कहा की पूरा विश्व अमेरिका के इस अविजित और घमंडी एयरक्राफ्ट कैरियर को लोहे के कबाड़ में बदलते हुए समद्र में डूबते देखेगा और वह यह भी देखेगा कि कैसे पूरा देश जमीन से गायब हो जाता है  !

-नार्थ कोरिया की विज्ञप्ति के अनुसार हम न केवल साउथ कोरिया में अमेरिकी मूवमेंट पर नजर रखे हुए हैं बल्कि अमेरिकी मुख्य भूमि के सामरिक अड्डों पर भी हमारे परमाणु मिसाइल हमला करेंगे हम उन्हें बताएँगे कि अमेरिकन राजधानी पालक झपकते ही कैसे राख के ढेर में बदलती है ! 

कहते हैं कि युद्ध के समय, अमेरिका का न्यूक्लियर पॉवर्ड निमित्ज़ क्लास विमानवाहक विनाशक बेडा, विश्व के अच्छे बड़े देश से निपटने के लिए लिए अकेला काफी है , इस एयरक्राफ्ट कैरियर के ग्रुप में ,इसकी सुरक्षा और दुश्मन पर अटैक करने के लिए इसके डेक पर 90, F-18 सुपर होर्नेट अटैक एयरक्राफ्ट न्यूक्लिअर वेपन एवं मिसाइल के साथ तैनात रहते हैं !

जब किसी विमानवाहक को युद्ध में भेजा जाता है तब उसके साथ सुरक्षा एवं अग्रिम अटैक करने के लिए , स्ट्राइक ग्रुप साथ
चलता है जिसमें बेहद शक्तिशाली एक या दो न्यूक्लिअर पनडुब्बियां, जिसमें जमीन पर 1700 km तक मार करने वाली 154 टॉमहॉक क्रूज़ मिसाइल या उनके स्थान पर न्यूक्लियर वार हेड्स युक्त इंटरकांटिनेंटल बैलस्टिक मिसाइल लोडेड रहती हैं !


एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ ही दो क्रूज़र और दो या अधिक डिस्ट्रॉयर साथ चलते हैं , यह सब टॉमहॉक क्रूज़ गाइडेड मिसाइलों से लेस होते हैं , शिप से जमीन पर मार करने वाली यह मिसाइल फायर करने के बाद 2500 km तक मार करने में सक्षम एवं पारम्परिक बमों अथवा न्यूक्लियर वॉर हेड से लोडेड होती हैं !यह डेस्ट्रॉयर एजिस राडार मिसाइल डिफेन्स टेक्नोलॉजी से युक्त हैं जो हमलावर मिसाइल को पहचानकर ध्वस्त करने के लिए मशहूर है !

अटॉमिक आईसीबीएम से लैस,विश्व के सबसे शक्तिशाली युद्धक एयरक्राफ्ट कैरियर को डुबाने की किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी मगर नार्थ कोरिया का आत्मविश्वास पूरी दुनिया को चौंकाने के लिए काफी है !


दो न्यूक्लियर देशों में आजतक युद्ध नहीं हुआ इसीलिए दुनिया सुरक्षित रही है , मगर हाथ में परमाणु बेम लिए हुए अगर कोई पागल व्यक्ति तानाशाह बन जाए तो विश्व पर मौत के गहरे बादल मंडराते नजर आते हैं ! यह समय ऐसा ही है  ....

अपने अपने प्रभामंडल के नशे में डूबे दो जननायक जिन्हें पहली चिंता अपने लोगों के जीवन की करनी चाहिए थी , झाग उगलते हुए , हाथ में हाइड्रोजन बम और मिसाइल लिए मानवता को नष्ट करने की धमकी दे रहे हैं ताकि उनका गर्व सुरक्षित रहे !
प्रकृति इन्हें पैदा करने की जगह बाँझ होती तो क्या इससे अधिक बुरा होता !

Tuesday, April 4, 2017

बड़े बेचैन हैं वे लोग , जो सब याद रखते हैं - सतीश सक्सेना

हमारे यार, धनदौलत, जमीं, जायदाद रखते हैं !
नवाबी शौक़, सज़दे के लिए, सज्जाद रखते हैं !

मदद लेकर हमारी वे हुए , गद्दी नशीं जब से !  
सबक यारों को देने, साथ में जल्लाद रखते हैं !

वे अब सरदार हैं बस्ती के, हैरत में हूँ मैं तबसे,
हमारे संत धन्धों  से , नगर आबाद रखते हैं  !

वही कहलायेंगे शेरे जिगर, जंगल में रह के भी  
वे अंतिम साँस में भी, हौसला फौलाद रखते हैं !

ये चोटें याद रखने की, हमें आदत नहीं यारों !
बड़े बेचैन हैं वे लोग , जो सब याद रखते हैं !

Thursday, March 30, 2017

हेल्थ ब्लंडर 5 - सतीश सक्सेना

63 वर्ष में, मेरा यह दृढ विश्वास है कि शरीर में व्याधि या बीमारी का कोई उपचार नहीं होना चाहिए , हमारा शरीर व्याधियों को खुद ठीक करने के लिए डिजाईन है हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति इतनी जटिल एवं इतनी शक्तिशाली होती है कि किसी भी शरीर को लगभग 100 वर्ष तक जीवित रखने में समर्थ है , यही नहीं, इसको मजबूत बनाये रखने के लिए किसी भी प्रकार के विशेष, मंहगे , दुर्लभ भोजन, टॉनिक, विटामिन की जरूरत नहीं होती केवल सामान्य हवा, जल, प्राकृतिक भोजन एवं शरीर को एक्टिव रखने के लिए थोड़ा बहुत दौड़ना या पसीना निकलने वाला काम करना आवश्यक है ! जानवरों का दूध उनके बच्चों के लिए है वह इंसानों के लिए नहीं है , माँ का दूध सूखने के साथ ही दांत निकलने की क्रिया पर, शक्तिशाली आरामपसंद मानव ने ध्यान दिया होता तो जानवरों का दूध पीना आवश्यक नहीं मानता !

शरीर का सबसे अधिक सत्यानाश मेडिकल प्रयोगों और "रोग" टेस्टिंग सिस्टम ने किया है , जिसके द्वारा मानव अपने शरीर में हो रहीं सामान्य स्वाभाविक क्रिया प्रतिक्रिया को , बीमारी समझकर उसमें अनावश्यक घुसपैठ करने की कोशिश करता है नतीज़ा शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र को कई मोर्चों पर एक साथ लड़ना होता है इससे मानव को स्वस्थ होने में और अधिक समय लगता है ! जटिल मानव शरीर के बारे में हम आजतक जितना भी जान पाये वह शतांश भी नहीं है , उसके बावजूद मेडिकल बिजिनिस शतप्रतिशत अस्वस्थता को सही करने का दावा करता है एवं हम पढ़े लिखे संभावित मौत से भयभीत जाहिल मानव, आंख बंद कर मेडिकल अडवेर्टाइज़्मेंट को अप्रूव करते चले जाते हैं ! पिछले चार सौ वर्षों में मेडिकल साइंस के प्रयोगों ने जितने मानवों की जान ली वह पूरे विश्व की लड़ाइयों और युद्धों से कई गुना ज्यादा है !
63 वर्ष,शक्ति 30 वर्ष की,मेडिकल साइंस नहीं मानेगा 

अफ़सोस कि ऐसा कोई कानून, कहीं नहीं बना जिसमे इन मेडिकल शैतानों को फांसी हो कि इनकी बुरी जानकारी एवं दवा बेंचने की जल्दी होते , लाखो इंसान इन पर गलत भरोसा करते हुए, अपनी जान गवां बैठे ! बढे हुए कोलेस्ट्रॉल की दवाएं बरसों से पूरा विश्व खाता रहा , और इसके होते, हजारों ऑपरेशन किये गए अब जाकर पता चला कि ह्रदय रोग से इसका कोई सम्बन्ध ही नहीं है ! एड्स और कैंसर इसके अन्य उदाहरण हैं , कुछ वर्ष पहले एड्स का अंधाधुंध प्रचार किया गया ऐसा लगा कि पूरा विश्व खतरे में हैं , अफ्रीकन देश तो शायद मनावरहित ही हो जाएंगे , मगर अब सब कुछ शांत है , इसी प्रकार कैंसर के बेकाबू टिश्यू को काबू करने के लिए हमारी प्रतिरक्षा शक्ति उसको एक मजबूत जैली से जकड कर काबू कर लेता है जिसे मेडिकल बिजिनिस, ट्यूमर का नाम देता है ! अगर इन्हें न काटा जाय तो शरीर की प्रतिरोधक शक्ति इसका उपचार कर, शमन करने में कामयाब रहती है ! भारतीय गाँवों कस्बों में हजारों लोग इन ट्यूमर्स के साथ , बरसों से सामान्य काम कर रहे हैं , वे बिलकुल ठीक इसी लिए हैं कि उनकी पंहुच किसी ऑपरेशन थियेटर तक नहीं है और वे मर चुके जिनके भयभीत घर वालों को मेडिकल इंस्टिट्यूट वालों ने बुरी तरह डरा दिया , भयभीत मानव , के मन में यह बैठा दिया है कि कैंसर असाध्य है और अब वह कुछ वर्ष का मेहमान है , बचा खुचा काम इनका ऑपरेशन , जहरीली दवाएं एवं इलाज में लगातार धन की होती कमी कर देती है !

इन तथाकथित असाध्य बीमारियों का इन अस्पतालों के पास एक ही इलाज है अधिक से अधिक धन उस पीड़ित व्यक्ति से छीन कर उस डरे हुए व्यक्ति के शरीर में जबरन जहरीले मेडिकल साधन पंहुचाये जाएँ जबकि प्राकृतिक साधन आसान है कि वह इस बीमारी  को निर्भय होकर भुला दे व अपना ध्यान बिना डरे अन्य आवश्यक कार्यों में लगाए जो उसे पूरे करने हैं , रोज प्राणायाम पर बैठकर एकाग्रचित्त होकर अपनी आत्मिक शक्ति का आवाहन करे कि इस अस्वस्थ स्थिति से मैं बाहर निकल रहा हूँ मेरा शरीर और मेरी आत्मा बेहद वलिष्ठ है , इन शक्तिशाली विचारों से अपने आपको हर वक्त घेर कर रखे, शीघ्र देखेगा कि इन पोजीटिव विचारों की ताकत से उस बीमारी का नाम भी नहीं बचेगा !

लगभग २० वर्ष से हर जाड़े में, मुझे लगातार क्रोनिक खांसी के साथ खून आता था , थोड़ा सा बोलते ही आवाज बैठ जाती थी ! सरे निशान कैंसर के थे , दो बार ह्रदय की पल्पिटेशन 300-400 हुई थी पारिवारिक मित्र डॉ ने तुरंत हॉस्पिटल ले जाने को कहा मगर मैं आई सी यू के बेड से भाग आया और  रिटायर मेंट के बाद बढे हुए बीपी के साथ दौड़ने की ट्रेनिंग लेनी शुरू की और मैंने न केवल इन बीमारियों को भगाने में सफलता प्राप्त की बल्कि 63 वर्ष की उम्र में 4 लीटर पसीना बहाते हुए, 21 किलोमीटर आराम से भागता हूँ !

अगर आप आलसी हो गए हैं तो यकीन मानिए आपका शरीर खतरे में है , शरीर को लंबे समय तक स्वस्थ रखने के लिए , पसीना बहना, नियमित आवश्यक क्रिया है अगर आप दिन भर कुर्सी पर या कार में रहते हैं , और शरीर को निष्क्रिय कर रखा है तो आप बीमारियों के शिकार अवश्य होंगे उनका नाम दमा , खांसी , बीपी , डायबिटीज , हार्ट अटैक अथवा कैंसर कुछ भी हो सकता है !

अगर आप इनसे जकड़े हुए हैं और पछतावा है तब उठे कल से शरीर को बिना जल्दबाजी, धीरे धीरे चलने की आदत डालना शुरू करें ! छह महीने में कायाकल्प शुरू होगा और आपके शरीर के सारे अवयब फुर्तीले होकर इन बीमारियों से एक जुट होकर लड़ पाएंगे एवं वे निस्संदेह जीतेंगे !

हमारी निम्न दवाओं के नाम याद रखिये आप स्वस्थ ही नहीं रहेंगे बल्कि जीवन को 10 वर्ष और बढ़ा पाएंगे :

-विश्वास अपनी आत्मिक प्रतिरक्षा शक्ति पर 
-मुस्कान एवं हँसी 
-खाने के लिए सामान्य प्राकृतिक भोजन
-बार बार खूब जल पीना
-एक घंटा रोज धीमे धीमें दौड़ते हुए शुद्ध हवा का आनंद जिससे शरीर कोर के आलसी अवयवों में फुर्ती आये 
-सकारात्मक सोंच कि मुझे कुछ नहीं हो सकता , मरना मेरी इच्छा पर होगा !
हार्दिक मंगलकामनाएं !


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