Friday, May 18, 2018

खुद से कहिये जीने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना

धन कमाने का मतलब आराम और ऐश की जिंदगी है इस विश्वास से बड़ी बेवकूफी मानव ने शायद ही कभी की होगी , साठ वर्ष इसी धारणा के साथ ऐश और आराम किया मगर भला हो रिटायरमेंट का जिसके कारण अपने विगत जीवन का आत्मावलोकन करते समय यह भयंकर बेवकूफी नज़र आ गयी अन्यथा मुझे याद है कि जब बड़े डांटते थे कि कुछ एक्सरसाइज कर लिया करो तो सोंचता था कि मुझे कौन सी स्वास्थ्य  समस्या है जो हेल्थ के बारे में सोंचू और अभी उम्र ही क्या है मेरी ! शुक्र है कि इस लापरवाही के बावजूद मैं इस उम्र तक पंहुच गया !

उन दिनों हेल्थ और स्वास्थ्य को मैं वृद्धों की समस्या मानता था जिसका जवानों से कुछ लेना देना न था और यह धारणा आज भी मैं 90 प्रतिशत लोगों में पाता हूँ यह बेहद अफसोसजनक है ! अपने खास मित्रों  संख्या टटोलता हूँ तो पता चलता है कि लगभग 30 प्रतिशत अकाल ही काल के गाल में चले गए उनमें अधिकतर डर के मारे , बीमारी को ठीक कराने के लिए ,अस्पताल की ऑपरेशन टेबल तक पंहुच गए थे और उन्हें मेडिकल व्यापार ने चूस कर थूक दिया जो बच पाए वे पहले से भी बुरी हालत में कुछ वर्ष तक दस गोली रोज खाते हुए जी पाए !
मगर यह जीना भी कोई जीना है लल्लू  ?

सो जवान रहने के कुछ तरीके नोट करो महाप्रभु 

  1. कष्ट अवसाद को साथ लिए न घूमें जितनी जल्द हो सके कष्टदायी विगत याद न रखें 
  2. उम्र को कभी याद न रखें और न यह कहें कि अब यह मेरे बस का नहीं ध्यान रहे इस वाक्य को अवचेतन मन सुन रहा है और वह उसे सुनकर उसपर अमल करेगा कभी यह न कहें कि आज मैं थक गया आराम करूंगा या सर दबा दो थकान सिर्फ मस्तिष्क का भ्रम है दुबारा कर रहा हूँ थकान सिर्फ मन का भ्रम है आप स्वीकार न करें कि आप थक गए हैं और आप अपने को फ्रेश महसूस करेंगे ! सफ़ेद होते बालों को रंग कर जवान बने रहने की कोशिश न करें इससे भी अपने आपको बूढा होना बता रहे हैं ! हर वह काम जो आप अधिक उम्र के कारण नहीं कर पाए उसे करने का प्रयत्न करें आप देखेंगे कि अधिक उम्र में जवानों वाले काम आप अधिक कुशलता से कर लेंगे !मन से बीमारियों के प्रति भय निकाल दें !
  3. WHO के अनुसार भारत विश्व की डायबिटीज कैपिटल है आप अपने चारो और देखिये हर चौथा आदमी डायबिटिक और हृदय रोग का शिकार है ! आज आप घर के बाहर सड़क पर सिर्फ 100 कदम दौड़ कर देखिये अगर आपकी साँस फूल रही है तो आप शर्तिया हृदय की आर्टरीज़ में फैट जमा कर चुके हैं जो न चेतने की अवस्था में आपकी जान लेने में समर्थ है !
  4. ध्यान रहे सिर्फ रनर, हृदय रोगों और डायबिटीज से अपना बचाव करने में समर्थ हैं , दौड़ते समय बॉडी वेट इम्पैक्ट के कारण बॉडी कोर में उत्पन्न वाइब्रेशन, आपके महत्वपूर्ण अंगों और अवयवों में नयी जान डालकर उक्त बीमारियों से लड़ने के लिए, आपकी रोग प्रतिरक्षा शक्ति को मजबूती देते हैं !
सो जागिये और अपने कमजोर शरीर को मजबूत बनाने के लिए संकल्प लीजिये !

डायबिटीज हृदय पर चोट कर रही कबसे 
उनसे कहिये , चलने का अंदाज़ बदल लें !

Wednesday, May 16, 2018

उनसे कहिये,चलने का अंदाज़ बदल लें -सतीश सक्सेना

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !

बच जाएगा, आया ऊँट पहाड़ के नीचे   
उंची गर्दन, नीची करके , चाल बदल ले !

तीखी उनकी धार , नहीं दरबार सहेगा !
चंवर बादशाही से ही,तलवार बदल लें  !

कोई मसालेदार खबर इन दिनों न आई 
उनको कहिये अपने गोतामार बदल लें !

Thursday, May 10, 2018

चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ? -सतीश सक्सेना

घर कुटुंब की जिम्मेदारी क्या समझेंगे ?
शक संशय में रिश्तेदारी,क्या समझेंगे ?

पर निंदा ,उपहास में, रस तलाशने वाले
व्यथित पिता की हिस्सेदारी क्या समझेंगे ?


नन्हीं बच्ची, तिनके चुग्गा लाने निकली
चिंतित माँ की चौकीदारी क्या समझेंगे ?

सुंदरता में फंस कर ,कितने राजा डूबे
धूर्त कैकेयी की मक्कारी क्या समझेंगे ?

अभी नशे में डूबे हैं , सरकार हुस्न की
चकाचौंध में,आपसदारी क्या समझेंगे ?

Wednesday, May 9, 2018

मेरी पहली बार, नंगे पैर सड़क दौड़ -सतीश सक्सेना

आज सुबह उठा तो लगा बाएं पैर में दर्द है, लग रहा था कि हड्डी में हेयर क्रैक हुआ है लंगड़ा कर टहलते हुए तय किया कि आज सिर्फ वाक पर जाऊंगा मगर जूते के अंदर मोजा नहीं मिला सो सोंचा कि पाँव में दर्द है सो क्यों न धीरे धीरे नंगे पैर टहला जाए और जिंदगी में पहली बार हम अपने घर से बेयर फुट बाहर निकले ! 

इससे पहले एनसीआर में मेरे कुछ रनर मित्र नंगे पैर दौड़ते हैं उनसे मेरा एक सवाल अक्सर होता था कि सड़क पर पड़े कांच का कोई टुकड़ा अगर पैर में घुस गया तो ? मगर अजय कुमार का कहना था कि नीचे देख कर ही पैर रखना है अन्यथा तो काफी दिन को रनिंग छूट जाएगी !

सो आज सड़क पर टहलते हुए लगा कि कोई ख़ास दर्द या समस्या नहीं लग रही क्यों न थोड़ी दूर दौड़कर देखूं और धीरे धीरे दौड़ना शुरू किया तो आसान सा लगा और दौड़ते दौड़ते घर से कब दूर निकल गया पता ही नहीं चला ! एक किलोमीटर जाने के बाद आत्मविश्वास और बढ़ गया लगा कि वाकायदा पूरा रन करना चाहिए और मैं अपनी सामान्य मस्ती में नंगे पैर दौड़ने का आनंद उठाता हुआ एक्सप्रेस वे पर पंहुच चुका था !

और हाँ वह हड्डी के टूटने जैसा दर्द कहाँ गया कुछ पता ही नहीं चला !

Saturday, May 5, 2018

हेल्थ ब्लंडर 7 -सतीश सक्सेना

बरसों से पड़े सुस्त शरीर के साथ जल्दबाजी न करें कायाकल्प एक दिन में नहीं हो सकता , शरीर की
मांसपेशियों धीरे धीरे ही रूप बदलेंगी अगर जबरदस्ती करने की कोशिश की तब वे जख्मी हो सकती हैं और आपके लिए काफी दिन दर्द की शिकायत भी हो सकती है ! पहले साल की रनिंग सीखने में अक्सर लोग बहुत गलतियां करते हैं जिनके कारण मांसपेशियों में भिन्न प्रकार के दर्द या इंजुरी का ख़तरा रहता है !
रनिंग से पहले बॉडी वार्मअप और रनिंग के अंत में धीरे धीरे दौड़कर ही रुकना चाहिए !
नए रनर्स को ध्यान रखना चाहिए कि

  1. सही आरामदेह रनिंग शू होने चाहिए यह आवश्यक नहीं कि मंहगे जूते हो मगर आरामदेह और पैरों में फिट हों !
  2. अगर आप नए हैं तो ध्यान रखें कि अपने पुराने ढीले वाले शरीर की सुस्त मांसपेशियों को एक चुस्त एथलीट की तरह चलाने का प्रयत्न करेंगे तो वे निश्चित ही जख्मी हो जाएँगी और आपको हो सकता है महीनों आराम की सलाह दी जाये ! रनिंग आपके शरीर के लिए हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें  गिरते हुए हर कदम पर आपके शरीर के वजन का तीन गुना वजन इम्पैक्ट के साथ पड़ता है और अगर आप ओवरवेट हैं तो यह खतरनाक हो सकता है ! 
  3. यह आवश्यक है कि रनिंग से पहले अपनी मांसपेशियों को हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज के लिए तैयार  किया जाए ताकि वे इस इम्पैक्ट को झेल सकें ! इसके लिए शुरुआत में सप्ताह के दो दिन, रन /वाक के लिए रखें जिसमें दौड़ते समय याद रहे कि बिना हांफे, साथ दौड़ने वाले से बिना वाक्य टूटे बात कर सकें  ! हर रविवार को रन की लम्बाई थोड़ी बढ़ाएं एवं अगले दिन मांसपेशियों को आराम देने के लिए रेस्ट करें !
  4. अधिकतर लोग रनिंग से पहले वार्मअप और रनिंग के बाद धीमे धीमे कूल डाउन नहीं करते हैं जो कि बहुत आवश्यक है ! नए रनर के लिए सप्ताह में ३ दिन रनिंग एक्सरसाइज एक दिन साइकिल एक्सरसाइज और बाकी दिन रेस्ट आवश्यक है ! ध्यान रहे की कि स्क्वाट्स (Squats) एक्सरसाइज रनर्स के लिए बेस्ट फ्रेंड हैं यह एक्सरसाइज हर रनर को करनी चाहिए !
  5. रनिंग में सबसे आवश्यक पानी है जॉइंट को स्मूथ रखने के लिए शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाना है जो लोग पानी कम पीते हों उन्हें  रनिंग छोड़ देनी चाहिए अन्यथा वे अपने आपको जख्मी कर लेंगे !
  6. रनर फ़ूड मुख्यतः केला और पपीता है जो एनर्जी का बेहतरीन सोर्स हैं 
  7. खाने पर कण्ट्रोल रखें वजन घटाने के लिए जितने कैलोरी बर्न की हैं उसका ध्यान रख कर खाइये 
इंटरनेट पर रनिंग इंजुरी एवं एक्सरसाइज के बारे में लेख मिलेंगे उन्हें पढ़ें और समझदारी के साथ अपना रास्ता चुनें ! https://www.verywellfit.com/common-running-mistakes-to-avoid-2911703

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !

हार्दिक मंगलकामनाएं !

Friday, May 4, 2018

हेल्थ ब्लंडर्स 6 -सतीश सक्सेना

अधिकतर लोग दौड़ने को बेहद आसान मानते हैं जबकि हकीकत इसके बिलकुल उलट है ,यह शरीर को सिखाने के लिए सबसे जटिल एक्सरसाइज है जिसमें शरीर के बॉडी कोर में अवस्थित किडनी, पेन्क्रियास, लीवर ,
आंतें , फेफड़े और हृदय जैसे महत्वपूर्ण अवयवों में लगातार कम्पन होता है साथ में स्किन, मांसपेशियों ,मस्तिष्क में होते कम्पन से एक अलग ही ऊर्जा उत्पन्न होती है जो दौड़ते समय बेपनाह आनंद देती है !

दो वर्ष पूर्व इस आनंद की जगह हांफना और गंदा पसीना होता था जो दौड़ने के प्रति वितृष्णा और गुस्सा पैदा करता था कि पागल आदमी  ऐयरकण्डीशन्ड माहौल को छोड़ कहाँ सड़क और धूल में दौड़ने आ गया ! मगर आज शीशे में अपने सपाट पेट को देखकर अपने ऊपर गर्व होता है 


आज लगातार 7 km दौड़ते समय मैं याद कर रहा था अपने उन मित्रों को जो आलस्य को नहीं छोड़ पा रहे और धीरे धीरे अपनी छिपी हुई बेपनाह ताकत से महरूम होते जा रहे हैं !



बीमारियाँ मुझे उनसे कम नहीं हैं , हार्ट पल्पिटेशन , ब्लड प्रेशर ,उम्र बढ़ने के साथ मिलता बेपनाह डिप्रेशन ,शरीर में उम्र के साथ पनपतीं कैंसर नुमा गांठे तथा अन्य डरावने लक्षण , ब्रोन्काइटिस , क्रोनिक खांसी , क्रोनिक पायोरिया , दो बार टूटा एंकल , अच्छे अच्छों को घर में आराम करने को मजबूर कर देतीं मगर यह बाधाएं मुझे न रोक पायीं तो सिर्फ इसलिए कि मैं अपना बीमार दयनीय बुढ़ापा देखना नहीं चाहता था और मैंने रिटायरमेन्ट के बाद, यह कर भी दिखाया !

और यह सब मैंने अपने वृद्ध सुस्त शरीर को धीरे धीरे सिखाया ही नहीं बल्कि उसकी आदत भी डाल दी कि सुगठित शरीर देखने में सुन्दर ही नहीं लगता बल्कि अधिक समय मजबूती के साथ जीने में भी सहायक है !

मानवों ने अपने शरीर को आराम देने के लिए अपने दिल को तसल्ली देने के लिए तरह तरह के व्यायामों का आविष्कार कर लिया है जो उसे इस ग़लतफ़हमी में डाले रहते हैं कि वह अपनी सेहत का समुचित ख्याल कर रहा है उसमें दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए पार्क में टहलना, दूध सब्जी लाना, बच्चे खिलाना और ऑफिस में मीटिंगों में जाने की कवायद भी शामिल है !

अगर कोई एक मंजिल चढ़ने अथवा थोड़ा तेज टहलने में हांफ रहा है तो निश्चित ही वह हृदय रोगी है या बनने की कगार पर है सो सचेत हो जाएँ कि आलसी व्यक्ति  को इस आसन्न खतरे से डॉ की केमिकल गोलियां नहीं बचा पाएंगी अगर कोई बचा पाएगी तो वह उस शरीर की जीर्ण होती प्रतिरक्षा शक्ति ही बचाएगी जिसे शक्तिशाली बनाना होगा !

मृत्युभय, उम्र घटाने के लिए सबसे बड़ी बीमारी है जिसे मेडिकल व्यापारी धड़ल्ले से, डरते हुए व्यक्ति को और डराने में उपयोग करते हैं !अधेड़ अवस्था में हर व्यक्ति छोटे मोटे लक्षणों को भी कैंसर समझ लेता है और भागता है डॉ के पास जो तुरंत पूरे शरीर के टेस्ट लिख देता है कि इस उम्रदराज मालदार आदमी के शरीर में पनपती हुई कोई न कोई खतरनाक बीमारी अवश्य निकल आये और उसके बाद अपने बचे हुए दिन में यह बेचारा कभी जोरदार आवाज में भी बोलने के लायक नहीं रहता !

आलसी और मोटे पेट वाले लोग सबसे अधिक डायबिटीज और हृदय रोगी हैं उन्हें चाहिए कि धीरे धीरे अपने शरीर को तेज चलना सिखाएं और वाक के अंत में एक से दो मिनट धीमे धीमें दौड़ कर समाप्त करें एक से दो माह में उनके शरीर को दौड़ना आ जाएगा और साथ ही सुस्त पेन्क्रियास और हृदय की मोटी फैट से भरी धमनियों में भी जान पड़नी शुरू हो जायेगी !

विश्वास के साथ शुरू करें यह प्रक्रिया और अपने आप शुरू होगा आपका कायाकल्प भी अगले दो वर्ष में मेरी तरह 63 वर्ष की जगह 36 के दिखोगे अगर अवसाद के शिकार हैं तो उनके लिए रनिंग करें जिनको आपकी जरूरत है और मेरा विश्वास है कि वे लोग हतोत्साहित होंगे जिन्हें आपकी जरूरत ही नहीं !

अंत में ध्यान रहे बहुत अधिक पानी और गहरी नींद बहुत आवश्यक है इसके लिए , इस मेहनत के बाद अगर यह दोनों न मिले तब कुछ भी नतीजा नहीं निकलेगा ! अंत में मेरी एक रचना जो शायद अनूठी है अपने तरह की ....

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !


दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !


Monday, April 30, 2018

लेह भ्रमण -सतीश सक्सेना

सुबह लेह की कड़ाके कि ठंड में होटल द्वारा दही परांठा ऑमलेट भारी नाश्ता खाते समय तो स्वादिष्ट लगता था मगर चलते समय हांफते हुए अपने ऊपर गुस्सा आता था ।

लेह से लेक तक का रास्ता इनोवा द्वारा तय करने में लगभग 5 घंटे लगे थे, और बीच में 17586 फुट पर बने चांगला कैफे पर स्वादिष्ट चाय का आनंद गजब का रहा !

जहां बेहद कम ऑक्सीजन के कारण 10 सीढ़ियां चढ़ने में सांस फूलती हो वहां 14250 फुट ऊंचाई पर स्थित पेंगोंग लेक के किनारे दौड़ने का प्रयत्न करना और वह भी 63 वर्ष की उम्र में , तारीफ का काम है न ? सो तारीफ करिए पर्यटकों के मध्य मैंने यह प्रयत्न ही नहीं किया बल्कि 1km से अधिक भागने में सफलता भी प्राप्त की यह और बात है कि मुझे तीन बार उखड़ी सांस व्यवस्थित करने में वाक भी करना पड़ा !

कड़ाके की ठंड में पारदर्शी ब्लू वाटर लेक के किनारे 3 इडियट्स की वे मशहूर कुर्सियां भी रखी हुई थीं , जिन पर बैठकर लोग अपने आपको गौरवान्वित महसूस कर रहे थे ।

अक्सर लोग लेक किनारे टेंट पर रात को रुकना पसंद करते हैं यहां के शांत वातावरण में स्वर्गिक आनंद महसूस
होता है ! आश्चर्य की बात है कि यह स्वच्छ जल , मीठा। न होकर नमकीन है क्योंकि 130 km लंबी झील चारो ओर से लैंड लॉक्ड है ।

बहरहाल लेह में आकर पहली बार हिमालयन डेजर्ट को महसूस करना ही अपने आप में उपलब्धि है ! शेष कल ..

Tuesday, April 10, 2018

हेल्थ ब्लंडर्स 5 - सतीश सक्सेना

@कमज़ोर आदमी हूँ। कोई संकल्प लेता भी हूँ तो कमज़ोर इच्छा शक्ति की वजह से बहुत जल्दी टूट जाता है। इसका इलाज बताइये ?
7 अप्रैल को यह कमेंट पढ़कर अपने पुराने थके हुए दिन याद आ गए , दो वर्ष पूर्व कायाकल्प की शुरुआत में संकल्प पर 
अडिग रहने में सबसे बड़ी रुकावट खुद का मन होता है जो शरीर को परिश्रम करने से रोकने में सबसे बड़ी भूमिका अपनाता है ! यह इच्छा शक्ति को हर संभव कारण बताता रहता है कि आज कम दौड़ना है क्योंकि .......
-आज घुटने में अजीब सा दर्द है
-कल रात देर से सोये थे सो आज नींद जरूरी है कल चलेंगे
-सप्ताह में रेस्ट आवश्यक है और उससे फायदा ही है
-आज पेट हैवी लग रहा है कल चलेंगे
-आज मौसम अधिक गर्म या वारिश होने वाली है
-अधिक उम्र में रोज नहीं दौड़ना है डॉ ने मना किया था
-मैं मेहनत बहुत कर रहा हूँ सो आज नहीं जाएंगे तो कोई फर्क नहीं पडेगा
-आज ट्रेफिक अधिक है सो बस एक चक्कर काफी है 
और जैसे ही आप सहमत हुए उसका काम हो गया फिर कितनी ही कोशिश करें आपका पैर नहीं उठेगा !

मन की इस सुखद गंगा से निकलने के लिए खुद से एक ही बात कहता हूँ कि मर जाओगे बेट्टा अगर आलस किया तो, सोंचो कि सुनसान जंगल में रहकर अपने परिवार का पेट भरने के लिए कितनी दौड़ भाग करनी चाहिए और ऊपर वाले ने यह लम्बे हाथ पैर आराम के लिए नहीं बल्कि रोज दौड़ भाग के लिए दिए हैं अन्यथा खुद तो बर्बाद होंगे ही परिवार जो तुम पर निर्भर है वह भी दर दर भटकने को मजबूर हो जाएगा सो उठो और मजबूत रहने के लिए दौड़ो अगर हृदय स्ट्रोक और डायबिटीज से बचना है तब !

हमेशा याद रखें कि बॉडी कोर में अवस्थित शरीर के महत्वपूर्ण अंग ह्रदय ,लीवर ,किडनी , पेन्क्रियास ,फेफड़ों को स्वस्थ रखना है तो पैरों द्वारा body weight impact एक्सरसाइज (रनिंग) करने से ही कम्पन होगा और वे स्वस्थ रहेंगे अभी वे तीन तीन बार खा खाकर बैठे रहते हैं बिना हिला डुले, और खुद को फैट से लपेट कर बीमार बना लेते हैं और जल्दी ही मेडिकल व्यवसाय के दानव के चंगुल में होते हैं उसके बाद बचे हुए जीवन में, चाहते हुए भी हंस नहीं पाते !

रोज सुबह दौड़ने से पहले यथासंभव दंड बैठक ( squat and Planks exercise ) लगाकर सड़क पर निकलता हूँ और दौड़ के बाद पैरों की, जांघों की स्ट्रेचिंग बेहद आवश्यक है अन्यथा दर्द और मसल्स इंजरी का ख़तरा बना रहता है !
कुछ लोग आपको बहुत प्यार करते हैं उनके लिए जागिये, अपनी शक्तिशाली समझ समय रहते अपने शरीर की डिजाईन पर लगाइए निस्संदेह आप अपने शरीर का रोना महसूस करेंगे !
सस्नेह

Saturday, April 7, 2018

हेल्थ ब्लंडर 4 -सतीश सक्सेना


उम्र बढ़ने के साथ कमजोर होती शक्ति का अहसास सबसे पहले तब हुआ जब कुकिंग गैस के खाली सिलेंडर को उठाने में राइट हैंड बाइसेप्स टूट कर दो इंच नीचे लटक गया था ! पहली बार 50 वर्ष की उम्र में महसूस हुआ था कि अब मैं जवान नहीं रहा
और इस विषय पर सोंचना शुरू किया था ! उस वक्त बॉडी में स्टेमिना 70 वर्ष वाला था , हृदय पर बढ़ता दवाब पहली मंजिल की सीढियाँ चढ़ते ही पता चल जाता था !

मुझे विश्वास था कि मानवीय शरीर बेहद मजबूत बनाया गया है बेहद लापरवाह इंसान हो या भयंकर शराबी , तब भी शरीर की प्रतिरक्षा शक्ति उस इंसान को 50 वर्ष तक ज़िंदा रखे रहती है मुझे इस बात का विश्वास शुरू से था सो मैंने अपने शरीर को नए सिरे से पुनर्जीवन देने का मन बनाना, पूरे विश्वास के साथ शुरू किया !

शुरुआत में आधा घंटा वाक करना बेहद मुश्किल लगता था , आलस के कारण बिस्तर छोड़ते छोड़ते ही देर हो जाती थी और वाक करते समय मन करता था कि कोई साथ होता तो बातें करते करते, वाक का समय, जैसे तैसे कट जाता ! पूरे पार्क में अक्सर पुरुष महिलाएं इसी मनोवृत्ति को लिए खूब तन्मयता से बतियाते, खुद को स्वस्थ रखने की ग़लतफ़हमी पाले, यह नित्य की ड्यूटी पूरा करते थे !

मैंने फैसला किया था कि कायाकल्प करने के लिए बेहद मजबूत इच्छा शक्ति चाहिए और इस संकल्प में कोई व्यवधान नहीं हो सो अकेले बिना किसी साथ के करना होगा ! मजबूत मन के साथ जो संकल्प लिए वे निम्न थे !

- शुगर किसी भी रूप में न लेना
-रात का भोजन सोने से 3 घंटे पूर्व खाना और दिन भर में खूब पानी पीना
- हर हाल में 6-7 घंटे घंटे नींद लेना
-वाक-रन-वाक- रन का तरीका अख्तियार करते हुए बिना हांफे धीरे धीरे
दौड़ कर साँसों पर कण्ट्रोल करना !

पहले 10 दिन में ही काफ मसल्स और हाथों में दर्द होने लगा था जबकि मैं जिस दिन अधिक मेहनत करता उसके अगले दिन पूरा रेस्ट करता था जिससे थकी मांसपेशियों को आराम मिल सके और वे नयी ताकत के साथ, दौड़ने में साथ दें !
धैर्य और विश्वास जीतने का आधार है कायाकल्प करने के लिए ! शुरुआत के लड़खड़ाते बेबी स्टेप्स अब मजबूत लगने लगे थे और निस्संदेह वे अधिक दूरी तय कर रहे थे इनकी मजबूती में सबसे बड़ी बाधा अपना खुद का मन था जो बेहद आलसी और कामचोर था , जब भी पसीने में तर शरीर को रुकने को कहता मैं खुद को गालियां देता और कहता हार्ट अटैक से मरने से कहीं बेहतर दौड़ते हुए मरना होगा और उन्ही दिनों CoachRavinder Singh जो कि एनसीआर के मशहूर रनिंग आर्गेनाइजर हैं, के द्वारा मुझे 2015 वर्ष के लिए रुकी रनर का पुरस्कार व ट्रॉफी भेंट की गयी ! वह पुरस्कार, मुझे जबरदस्त भरोसा देने में सहायक रहा कि सतीश तुम इस उम्र में कर पा रहे हो और तुम कर लोगे !

उन दिनों यह रचना लिखी थी, इसे गुनगुनाता था दौड़ते हुए !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !


दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Friday, March 30, 2018

हेल्थ ब्लंडर -3 : सतीश सक्सेना

तीन वर्ष पहले जब मैं रिटायर हुआ तब BMI इंडेक्स के अनुसार मैं खतरे के निशान से काफी ऊपर था , और शरीर एयर कण्डीशन्ड माहौल का इस कदर अभ्यस्त था कि बाहर निकलते ही पसीना आता था !अपने दो मंजिले ऑफिस की सीढ़ियां चढ़ने के बाद रुक कर खड़ा होना आवश्यक था सो अधिकतर सुबह की सीढियाँ धीरे धीरे चढ़ता था ताकि लोग हांफते न देखें , सड़क पर पैदल चलना अजीब लगता था !

कभी अपने बॉस नवल किशोर सिंह को तेज धूप में दो किलोमीटर दूर अपने एक अन्य ऑफिस पैदल जाता हुआ देखता तब मुझे हैरानी होती कि ऐसी भी क्या कंजूसी कि थ्री व्हीलर तक नहीं करते , और एक दिन जब आपसी चर्चा में जब मैंने उनसे पूंछा तब उन्होंने कहा कि इस बहाने थोड़ा चलना हो जाता है अन्यथा शरीर को जकड़ने में देर नहीं लगेगी और उनके इस वाक्य ने मुझे आत्म निरीक्षण का मौक़ा दिया जो अपने को मजबूत समझते हुए कभी नहीं कर सका शायद यहीं से मेरे मन में कुछ संकल्प लेने की इच्छा जाग्रत हुई  नियमित वाक से शुरुआत करने का मन बना !

शुरुआत सिर्फ वाक से हुई थी जिसके अंत में मैं 1 मिनट धीरे धीरे दौड़ने का प्रयास करता था फलस्वरूप कुछ दिनों के बाद ही मैं लगभग 200 मीटर तक धीरे धीरे दौड़ने में सफल होने लगा ! दौड़ते दौड़ते अगर हांफने लगता था तब मैं पैदल चलने लगता था और जब साँस व्यवस्थित हो जाती तब फिर धीरे धीरे दौड़ने लगता ! लगभग 2 माह में ही हृदय की बंद आर्टरी, लगने लगा जैसे खुल गयीं हों अब मेरे हांफने में काफी सुधार महसूस होने लगा था साथ ही बीपी भी कभी बढ़ा हुआ नहीं मिला ! 


एलोपैथिक दवाओं पर मुझे कभी विश्वास नहीं रहा , मुझे पता था कि वे फायदा कम और नुकसान अधिक करती हैं और अगर वे इतनी अधिक उपयोगी होतीं तब विश्व के कई धनवान और शक्तिशाली लोग कम उम्र में ही कैसे मर गए ? कम से कम अमेरिका का राष्ट्रपति, मानव की एवरेज उम्र से अधिक तो जीना ही चाहिए था जो नहीं हुआ ! मेरे कुछ व्यक्तिगत डॉ मित्र अपने घर में एलोपैथिक दवाओं का उपयोग करते ही नहीं है या बेहद आवश्यक होने पर ही उपयोग करते हैं !

मानव शरीर बेहद जटिल है जिसके बारे में अभी भी वैज्ञानिकों को न के बराबर ही जानकारी रखते हैं , हर शरीर की अपनी प्रतिरक्षा शक्ति होती है जो परिस्थितियों के हिसाब से शरीर को सुचारु रूप से चलाये रखने के लिए क्रिया और प्रतिक्रियाएं करती है जिसे हम अस्वस्थता का नाम देते हैं और अधिकतर प्रतिरक्षा शक्ति कुछ समय में ही हमलावर को  समाप्त कर शरीर को फिर पहले जैसा बना देती है ! अस्वाभाविक स्थितियों से निपटते समय शरीर को दी गयीं खतरनाक दवाएं सिर्फ इम्यून सिस्टम के कार्य में व्यवधान ही उत्पन्न करती हैं, हाँ तात्कालिक आराम अवश्य मिल जाता है जिसके दूरगामी परिणाम होते हैं !

आज के मेडिकल साइंस में कोई बीमारी या कष्ट लेकर हॉस्पिटल जाइये, डॉ आपके शरीर के सारे टेस्ट करवाएगा और अगर कोई खतरनाक नाम की बीमारी का कोई अंश निकल आया तब सबसे पहले उसका  इलाज या ऑपरेशन करवाना होगा जिसलिये आये थे वह तो इस नयी खतरनाक बीमारी का नाम सुनते ही गायब हो चुकी होगी ! मेरे कई परिचित हॉस्पिटल में एडमिट किसी और कारण से हुए मगर टेस्ट में कैंसर की तलाश करा कर ऑपरेशन कैंसर का करा के बापस आये ! हॉस्पिटल का उद्देश्य उसके पुराने शरीर से एक बीमारी खोज निकालनी होती है जो शरीर में दबी हुई थी और उसके इलाज से धन की की सप्लाई जारी रहे !

शहर में अक्सर छोटी बड़ी कोई भी गाँठ हो उसे तत्काल निकलवाने की सलाह देते हैं जबकि भारत की ग्रामीण  जनता जिन्हे आज भी हॉस्पिटल का नाम नहीं मालूम बरसों से ऐसी गांठे शरीर के अंदर और बाहर लेकर आसानी से अपने सारे कार्य कर रहे हैं !

मेरे विचार से इम्यून सिस्टम  कैंसर के बढ़ते टिश्यू को गांठ के रूप में बनाकर कैद कर देता है और उसकी अनावश्यक बढ़वार रोकता है जबकि डॉ उस सुरक्षित गांठ को कुरेदकर पहले टेस्ट और बाद में ऑपरेशन कर उसे मुक्त कर देता है और कैंसर इस ऑपरेशन के बाद उन्मुक्त रूप से और तेजी से बढ़ता है !

अगर इंसान मौत के भय पर काबू पा ले तो मेरा  विश्वास है कि वह जब तक चाहे जी सकता है यह भय ही है जो उसे मौत के समीप ले जाता है ! 

63 वर्ष में दौड़ते हुए मैं हमेशा ....
-अपने आपको बीमार नहीं मानता और न उस बीमारी से डरता हूँ जो मुझे होती है !मैं खुद से कहता हूँ कि मेरा शरीर शक्तिशाली है और अपने  किसी बाहरी सहायता के खुद को ठीक कर लेगा !
-दौड़ते समय मस्ती के साथ अकेला दौड़ता हूँ और खुद को शाबाशी देता हूँ अक्सर दौड़ते हुए अपना फोटो खींचता हूँ और पोस्ट भी करता हूँ बिना इसकी परवाह किये कि कुछ लोग क्या कहेंगे !
- उदास कभी नहीं होता चाहे कितना ही अकेलापन क्यों न हो 
-मन में हमेशा एक भाव रहता है कि मैं यह कर सकता हूँ !
-अपनी उम्र के बारे में कभी नहीं सोंचता बल्कि और अक्सर आदरणीय , अंकल जी जैसे बोलने वालों से दूर रहना पसंद करता हूँ !
-बुजुर्गों जैसे कपडे पहनना या उनके जैसी बातें करना पसंद नहीं करता !
- अगर कंपनी बेहतर हो तब यदाकदा बियर या वाइन पीने में कोई परहेज नहीं और न छिपाता हूँ !
-मौत से नहीं डरता मुझे मालूम है वह कभी भी किसी भी समय हो सकती है अतः अपना हर क्षण आखिरी मानते हुए एन्जॉय करता हूँ ! 

दौड़ना सीखने की इच्छा तभी पूरी होगी जब संकल्प लें कि मैं दो माह बाद 5 km दौडूंगा और इस संकल्प को ढिंढोरा पीट कर उन सबको अवश्य बताइये जो आपको कमजोर मानते हैं और आप देखेंगे की आपने कर दिखाया !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये ! 

Thursday, March 29, 2018

हेल्थ ब्लंडर -2 -सतीश सक्सेना

शारीरिक मेहनत करना मजदूरों का काम है , समर्थ लोगों को खुद काम करने की आवश्यकता ही क्या है, यह धारणा और अपना काम करने में लज्जा महसूस करना ,शायद हमारी ज़हालत की सबसे बड़ी पहचान है ! प्रकृति ने हमारे शारीरिक अनुपात में, हाथ और पैरों को सबसे बड़ा हिस्सा दिया है जिसका हमने उपयोग करना बंद कर
दिया, धन कमाने में उपयोग सिर्फ दिमाग के उस चालाक हिस्से का किया जिसका काम,बिना मेहनत किये अधिक से अधिक धन अर्जित करने का तरीका तलाश करना था और मानव बुद्धि ने बिना हाथ पैर हिलाये कमजोर व्यक्तियों के सामने रोटी फेंक, आराम उठाना सीख लिया और गद्देदार सोफे पर बैठकर टीवी देखते समय उसे अपने बॉडी कोर में अवस्थित किडनी ,लीवर ,हृदय ,पेन्क्रियास ,फेफड़ों की चीत्कार सुनाई नहीं पड़ी जो बिना व्यायाम के सुस्त और आलसी हो रहे थे !

बरसों आराम के परिणाम स्वरुप उत्पन्न बीमारियों के लिए मेडिकल व्यापारियों ने तत्काल हानिकारक गोलियां बना डालीं जिसने शरीर के जटिल स्वरूप और इम्यून सिस्टम को बर्बाद करके रख दिया !

मैं खुद अपने आपको महामूर्ख समझता हूँ जिसने पूरे साठ वर्ष तक अपनी खूबसूरत सुडौल शरीर को आराम देते हुए जीभर कर बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने आपको संपन्न बुद्धिमान समझता रहा !

पिछले 61 वर्षों में मेरे आधे खराब जर्जर हुए अंगों की रिपेयर सिर्फ रनिंग के बदौलत संभव हुई है अन्यथा अब तक ऑपरेशन टेबल पर हृदय का ऑपरेशन हो चुका होता और इम्यून सिस्टम की मजबूती देखिये कि उसने 60 वर्षों की समस्याओं को महज दो वर्ष में ठीक कर दिया !

गैस्ट्रिक, एसिडिटी , कमजोर फेफड़े , ब्लड प्रेशर यहाँ तक कि स्किन प्रॉब्लम आदि कहाँ गायब हुई पता ही नहीं चला और साथ में मुझे जीवन में पहली बार बहते हुए पसीने से तकलीफ और चिढ़ की जगह पर जो आनंद मिलने लगा यह अभूतपूर्व व अविश्वसनीय है !

इस वर्ष मेरे तीन दोस्त जिनका प्रभामंडल बेहद प्रभावशाली था, असमय कम उम्र में हृदय आघात के शिकार हुए हैं उम्मीद करता हूँ कि और बुरी खबर न सुनाई दें सो अनुरोध है कि सुबह घर से बाहर निकल शरीर के सोये अंगों में कम्पन उत्पन्न करने के लिए, रनिंग करना सीखें !

याद रखें डायबिटीज एवं हृदय रोगों की बेस्ट एक्सरसाइज रनिंग ही है जिसे मेडिकल व्यापार भी मानता है !

सस्नेह मंगलकामनाएं !


Wednesday, March 28, 2018

हेल्थ ब्लंडर -सतीश सक्सेना

मेरे मित्रों में से अधिकतर साथी रनिंग करने का प्रयत्न करते हैं उनमें से अधिकतर कुछ दिन बाद रनिंग छोड़कर वाक करने लगते हैं या एक निश्चित दूरी के बाद आगे नहीं जा पाते ! अधिकतर का एक ही कारण है कि वे रनिंग में सीखने योग्य कुछ नहीं समझते, इसके अतिरिक्त बढ़ी उम्र का अतिरिक्त आत्मविश्वास, उन्हें यह समझने ही नहीं देता कि रनिंग एक बेहद जटिल प्रक्रिया है जिसे बरसों से आलसी हुआ शरीर, किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करने देगा !
प लोग शायद यकीन नहीं करेंगे मैं अबतक पिछले ढाई साल में लगभग 4000 Km दूरी दौड़ते हुए तय कर चुका हूँ जिनमें 22 हाफ मैराथन (21 km ) रेस शामिल हैं ! उसके बाद भी मैं अपने आपको बेहतरीन रनर नहीं मानता क्योंकि मैं आज भी दौड़ते समय कई मूलभूत गलतियां करता हूँ जिस कारण मैं अंत में थकने लगता हूँ !
शरीर के महत्वपूर्ण अंग उदर और उसके आसपास हैं जिनमें हर एक का शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान होता है ! पैरों के उठने और जमीन पर गिरने के हर आघात के समय शरीर के इन अंगों में और मस्तिष्क में कम्पन होता रहता है और वह इनका व्यायाम होता है जो प्रकृतिे ने इनके लिए निश्चित किया था यहाँ तक कि बंद रक्त कोशिकाएं, जकड़े जॉइंट एवं मांसपेशिया नरम होकर खुलने लगती हैं और इस शारीरिक बदलाव को,
दौड़ता शरीर बहुत उन्मुक्त मन से स्वागत करता है और दौड़ते समय एक नया जोश आनंद महसूस होता है ! मैं अपनी कई लम्बी दौड़ों में टारगेट भूल कर, बजते ढोल के सामने नाचने लगता हूँ जबकि यह मेरे स्वभाव के विपरीत है !
नए लोग ध्यान रखें कि रनिंग की शुरुआत वार्मअप से करें लंबा वाक करके , वाक के अंत में 1 या 2 मिनट दौड़ कर समाप्त करें मगर शर्त यह है कि यह दौड़ बिना हांफे की गयी हो ! हांफते हुए दौड़ना शरीर का नुकसान करता है और दौड़ से विरक्ति पैदा करेगा सो अगर आप दौड़ते हुए हांफ रहे हैं तो आप दौड़ नहीं पाएंगे यह पक्का है !
समस्त जीवों में बीमारियों से लड़ने की शक्ति, उनके शरीर में निहित है जिसका निदान शरीर खुद करता है मगर पिछले 100 वर्ष से सक्रिय मेडिकल व्यापार ने मानव को डराकर धन कमाने की तरकीब निकाल रखी है, वे समय समय पर विभिन्न शारीरिक प्रतिक्रियाओं को अलग अलग बीमारियों का नाम देकर मानव को डराते रहे और उनके इलाज के नाम पर धन का अम्बार लगाते रहे हैं किस्मत वाले सिर्फ जानवर हैं जिनके संपर्क में कोई मेडिकल व्यवसायी नहीं है और वे अपनी मधुमेह, हृदय रोग, किडनी आदि को चलते फिरते दौड़ते ही ठीक कर लेते हैं और अपनी पूरी आयु जीते हैं !
सो अगर स्वस्थ जीना है तब अपने शरीर के हर अंग का उपयोग करना होगा जिसके लिए वह बनाये गए हैं ताकि वे जकड़ न जाएँ !
अकर्मण्यता की आदत से, है कितना लाचार आदमी !
जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी !
दुरुपयोग मानस का करके,ढेरो धन संचय कर.भयवश
निष्क्रिय और आलसी मन से करता योगाचार आदमी !

Friday, March 23, 2018

सिंपल ट्रथ : शुगर किल्स -सतीश सक्सेना

कल मॉल में घूमते हुए एक नौजवानों के ग्रुप को देखा सबके हाथ में एक मशहूर ब्रांड ऑरेंज जूस का एक बड़ा गिलास था और उनमें कोई भी मित्र 90 kg से कम नहीं था !
मुझे आश्चर्य है कि बहुत कम लोग जानते हैं कि इंसानों के भोजन में शुगर का कोई उपयोग नहीं और एक मजबूत व्यक्ति रोज सिर्फ 24 ग्राम शुगर ही बिना नुकसान सहन कर सकता है , मगर लोग रोज, मस्ती के साथ एवरेज 100 ग्राम शुगर आराम से खाते हैं जो कि पुरुषों के लिए सामान्य से चार गुनी है और महिलाओं के लिए 6 गुनी !
आज हर चौथा वयस्क भारतीय,चाहे वह मोटा हो या पतला, हृदय रोगी है और उसे यह पता ही नहीं ,ऐसे लोगों की पहचान करनी हो तो 10 सीढ़ियां चढ़ने के बाद,हांफते, रुकते लोगों को देख लीजिये और
मजेदारी यह कि यह सब संपन्न व्यक्ति, बाजार आकर, अपनी सेहत के लिए जूस अवश्य पीते हैं !
शायद आपको यह पता ही नहीं होगा कि बढे हुए बीपी एवं कार्डियोवैस्कुलर बीमारियों के लिए शुगर , नमक खाने से अधिक हानिकारक है !
किसी जमाने में खाते पीते सतीश को देखिये, फोटो में तोंद को छिपाने के लिए जैकेट पहनता था  अगर आप अब भी सावधान न हुए तो आपको सस्नेह मंगलकामनाएं ही दे सकता हूँ कि आपको असामयिक हृदय स्ट्रोक न आये !

Thursday, March 22, 2018

तीक्ष्ण अभिव्यक्ति को,खतरे भी उठाने होंगे - सतीश सक्सेना

आस्था को  ही, प्रायश्चित्त उठाने होंगे !
ढोंगियों के दिए  ,वरदान भुलाने होंगे  !

रूप संतों का रखे , चोर - उचक्के पूजे ,
बीच गंगा में  ये , अपराध बहाने होंगे !

एक दिन आँख खुलेंगीं जरूर भक्तों की
जाहिलों को ही , सभी ढोंग गिराने होंगे !

अब न गुरुदेव मिलेंगे किसी डेरे में यहाँ 
लम्बी दाढ़ी रखे , ये धूर्त  भगाने  होंगे !

झूठ के बीज को , जड़ से समाप्त करने को
तीक्ष्ण अभिव्यक्ति को,खतरे भी उठाने होंगे !

रिश्ते दिखावे के -सतीश सक्सेना

मैंने आज तक किसी को बेटी नहीं कहा क्योंकि मेरे पास अपने पापा को बेहद प्यार करने वाली बेटी पहले से ही मौजूद है, मैंने किसी को बहिन नहीं बनाया क्योँकि मेरी हर वक्त चिंता करने वाली दो बड़ी बहिनें पहले से ही हैं , बहनों और बेटी को जितना प्यार और समय मुझे देना चाहिए वह मैं इन्हें नहीं दे पाता और कहीं न कहीं अपने आपको इन दोनों रिश्तों के प्रति गुनाहगार मानता हूँ !


ऐसे में , मैं आश्चर्यचकित रह जाता हूँ जब मैं मित्रों को आपस में , भाई या बहिन बनाते हुए राखी बांधते बंधवाते देखता हूँ जबकि उनके घर में अपने भाई बहिन पहले से ही मौजूद हैं जिनके साथ उनके रिश्ते तल्ख़ हैं या हजारों शिकायतें मन में लिए, मात्र दिखावे के लिए बातचीत है !

लोगों के, समाज के भय से हम उन्हें मित्र या दोस्त खुलकर न कह पाते हैं और न मित्रता के रिश्ते निभा पाते हैं मगर राखी बाँधने के बाद हमारा ज़ाहिल समाज उसे स्वीकार ही नहीं करता बल्कि घर में सम्मान भी दिलाता है ! समाज के बनाये पवित्र रिश्तों का चालाक दिमाग ने कितना बदसूरत उपयोग किया है !

स्वाभाविक है कि यह पवित्र रिश्तों का ढिंढोरा समाज को दिखाने के लिए बजाया जाता है जिससे लोग उनके रिश्तों पर शक न कर सकें और इस पाखण्ड की आड़ में उनकी मित्रता सुरक्षित रहे !
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