Saturday, December 26, 2020

तो फिर मेरी चाल देख ले -सतीश सक्सेना

शायद यह अकेला समाज है जहाँ ऊपरी दिखावे को सम्मान देना सिखाया जाता है ! अगर सामने से कोई गेरुआ वस्त्र धारी और पैर में खड़ाऊं पहने आ रहा है तो पक्का उस महात्मा के चरणों में झुकना होगा और आशीर्वाद मांगना ही है चाहे वह बुड्ढा पूरे जीवन डाके डालकर दाढ़ी बढ़ाकर छिपने के लिए बाबा क्यों न बना हो और किसी गए गुजरे का आशीर्वाद पाने के योग्य भी न हो !

मंदिर जाएँ तो पंडित (जी) धोती, कुरता में ही मिलेंगे , और आजतक किसी पुजारी की हिम्मत नहीं कि वह निक्कर या पैंट पहनकर भगवान की पूजा करे ! शायद यह मंदिर का ड्रेस कोड बना दिया गया है हमारे यहाँ , कष्ट निवारण हेतु पूजा पाठ के अलग अलग रेट हैं ज्यादा रेट तगड़ी पूजा की गारंटी है !

भारतीय राजनीति में खद्दर और सफ़ेद कपडे पहनने का रिवाज शुरू से ही है , खद्दर ग़रीबी की मदद करने और 90 प्रतिशत भूखे नंगे समाज में खुद को गरीब सा दिखाने की तड़प है , इससे बहुमत के वोट मिलने में, आसानी रहती है ! उन पर बहुत प्रभाव पड़ता है क्योंकि यही वह तबका है जो जीवन भर सफ़ेद कपडे कभी नहीं पहन पाता और सफ़ेद रंग स्पॉटलेस करेक्टर की पहचान है सो जितने भी दल्ले हमारे देश में दिखते हैं सब के सब बड़े नेताजी से लिंक का प्रतीक, खद्दर पहने ही मिलते हैं , यह लोग कोई भी असम्भव काम सरकार से कराने का वादा करते हैं और आपसे धन लेकर ऊपर पहुंचाते हैं , बदले में इनको बाकायदा मोटा पारितोषिक मिलता है और आपसे वाहवाही कि पैसे देकर नौकरी लगा दी लल्ला की ! अगले ही दिन इन श्वेत वस्त्रधारियों द्वारा श्वेत महंगे जूते भी ख़रीदे जाते हैं इससे इन्हें मिलने वाला सम्मान और अधिक हो जाता है देसी भाषा में इन्हें जमीन से जुड़ा पार्टी कार्यकर्ता कहा जाता है और इसका मुख्यतः काम नेता के पास लल्लुओं के काम कराने के लिए उनसे नेताजी के लिए नोट इकट्ठा करना होता है ! मोटा एक काम भी करा दिया तो अगले दिन इनके पास एक झंडा लगी एस यू वी मिलेगी !

और हिंदी का मशहूर विद्वान बनना और भी आसान है बस अपना खटारा सा सरनेम बदलकर एक बेहतरीन शास्त्रीय सांस्कृतिक नाम तलाश कर लें जैसे सतीश सक्सेना के नाम पर सतीश अपरिमेय हो तो मेरे पाठक मुझे आदरणीय कहना शुरू कर देंगे पक्का , और अगर मैं अपनी दाढ़ी महा गुरु जैसी रख लूँ तब लोग मुझे आचार्यश्री का दर्जा और जयजयकार आसानी से देंगे भले मैंने हिंदी की पढ़ाई, कक्षा १२ सेकंड डिवीजन पास तक ही की हो ! साहित्यिक लेख लिखने में कोई कष्ट ही नहीं , एक पैरा राजीव मित्तल और दूसरा शम्भुनाथ शुक्ल का और तोड़ मरोड़ कर उसे आकर्षक बनाकर पेश कर दूँ तो तालियों की जबरदस्त गड़गड़ाहट न मिले तो कहना क्योंकि आचार्य जैसी शक्ल और ज्ञान टपकाता नाम इनके पास है ही नहीं !

सो नए साल में क्यों न यह रंग ही धारण कर लूँ भाइयों और बैनों !!
तो फिर मेरी चाल देख ले ...!!

https://youtu.be/7iSDtiBipAk

Saturday, December 19, 2020

६७ वां वर्ष और हेल्थ केयर -सतीश सक्सेना

 दौड़ते दौड़ते 67वां वर्ष कब शुरू हुआ पता ही नहीं चला , शायद मैं अधिक खुशकिस्मत हूँ जिसे अपने बड़े होते बच्चों से कभी कष्ट का अनुभव ही नहीं हुआ ! बेटा 40 वर्ष का है और देखता रहता है कि पापा को घर में किस चीज की आवश्यकता है , तलाश करने से पहले घर में वह चीज आ जाती है ! इस बार मेरे हाथ में एप्पल वाच 6, आ गयी है जिसमें फ़ोन इनबिल्ट है , बेटे का कहना है कि इसमें हेल्थ के सारे टूल्स मौजूद हैं जो आपकी केयर के लिए आवश्यक है !

अगर आप घडी पहने दौड़ रहें हैं या घर से बाहर हैं तब मोबाइल साथ ले जाने की कोई आवश्यकता नहीं , यह फ़ोन काल , मेसेज रिसीव कर सकती है , नार्मल फ़ोन की तरह कॉल कर सकती है ! इसमें वॉकी टॉकी की सुविधा भी है जिसमें इन्सटैंट आप अपने मित्र से बात कर सकते हैं !

आश्चर्यजनक है कि यह घडी हृदय गति पर हर वक्त नजर रखती है , ऑक्सीजन लेवल को चेक करके बता देगी कि दौड़ते हुए ऑक्सीजन लेवल कम तो नहीं हुआ यही नहीं ECG हर वक्त चेक करने की सुविधा है और रिपोर्ट देगी कि यह एब्नार्मल है या सही ! अगर पूरे दिन लेटे रहें तो यह बड़े प्यार से याद दिलाती है कि अब आपको थोड़ा टहलना चाहिए ! यह दिन भर में खड़े होना कितना आवश्यक है उसके मापदंड बताती है तथा याद दिलाती है आज कल के मुकाबले आपने आराम अधिक किया ! यह मुझे हाथ २० सेकंड तक धोने के लिए मजबूर करती है ! इस घडी को पहनकर आप नहा सकते हैं , तैर सकते हैं , पानी से कोई खतरा नहीं !

ऐसा लगता है कि एक सुपरवाइज़र हर वक्त चौकन्ना होकर साथ रहता है जिसका काम मेरी सेहत पर नजर रखना है यहाँ तक कि अगर आप दौड़ते समय या साइकिल चलाते समय गिर गए तो यह बिना आपसे पूछे आपके बेटे और बेटी को फ़ोन करने के साथ साथ आपके डॉ को कॉल भी देगी कि आपका दोस्त खतरे में है !

67 वे वर्ष में नयी टेक्नोलॉजी का फायदा उठा रहा हूँ और मस्ती के साथ दौड़ रहा हूँ ! आज सुबह 5 km , सवा 7 मिनट में एक किलोमीटर की गति से दौड़ते हुए यह बिलकुल नहीं लगा कि मैं जवान नहीं हूँ , आज भी नयी चीजों को समझने और सीखने की इच्छा है , अपने आपको सबसे अधिक समझदार नहीं मानता बल्कि सीखने में अच्छा लगता है ! वे सारे काम करता हूँ जो जवान करते हैं शुक्र है ताकतवर इच्छाशक्ति का साथ शरीर बखूबी देता है , समझदार मूर्खों से दूरी बनाकर रहना पसंद करता हूँ !

शुभकामनायें आप सबको कि नए साल में पछतावा कम से कम हो !


Friday, November 13, 2020

दरी बिछाकर फटी तेरे , दरवाजे आके नाचेंगे -सतीश सक्सेना

नाम तुम्हारा ले बस्ती में , जोर शोर से गाएंगे !
दरी बिछाकर फटी तेरे, दरवाजे आके नाचेंगे !

जै जै कारों के नारों में , खेत किसानों को भूले
बर्तन भांडे बिके कभी के, टांग उठा के नाचेंगे !

कोर्ट कचहरी सारे तेरे, जेल मिले, गर बोले तो 
घर की जमा लुट गई, नंगे घर के आगे नाचेंगे !

अनपढ़ जाहिल रहे शुरू से न्याय कहाँ से पाएंगे 
भुला जांच आयोग हम तेरे घर के आगे नाचेंगे !

ब्रह्मर्षि अवतारी जैसे भारत रत्न ने, जन्म लिया !
जनम जनम के पाप धुल गए डर के मारे नाचेंगे !

Monday, November 9, 2020

मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ -सतीश सक्सेना

हिंदी के बदनाम जगत में , यारों  मैं भी लिखता हूँ !
उजड़े घर में ध्यान दिलाने, कड़वी बातें लिखता हूँ !

तुम्हें बुलाने भारी मन से, धुंधली आँखों लिखता हूँ !
टूटा चश्मा, रोती राखी , माँ की धोती लिखता हूँ !

मां को चूल्हा नजर न आये, पापा लगभग टूट चुके
तेरा बचपन याद दिलाने को कुछ बातें लिखता हूँ !

क्रूर विसंगतियाँ समाज की आगत को बतलानी हैं 
आसपास के खट्टे मीठे , कड़वे अनुभव लिखता हूँ !

मेरी कविता, गीत, लेख, साहित्य नहीं कहलायें, पर 
मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ 

Sunday, November 8, 2020

हमको अपने ताल समंदर लगते हैं -सतीश सक्सेना

 मेरे दोस्तों में उम्र में मुझसे २० वर्ष छोटे (45 वर्षीय जो खुद को उम्रदराज समझते हैं) भी अक्सर उन्मुक्त होकर हंस नहीं पाते और अगर कोई मजाक या जोक शेयर कर दूँ तो इधर उधर देखने लगते हैं कि कोई क्या कहेगा ! मुझे लगता है कि प्रौढ़ावस्था के आसपास के अधिकतर व्यक्ति समाज में असहज व्यवहार करने को मजबूर हैं , उन्हें लगता है कि इस उम्र में वे जवानों जैसा व्यवहार नहीं कर सकते, उनके लिए अपने मनोभावों, इच्छाओं को बचे जीवन दबाकर जीना, समाज द्वारा लादी हुई मजबूरी बन जाती है !

कुछ दिन पहले एक महिला लेखक मित्र से बात करते हुए मुझे लगा कि वे असहज महसूस कर रही हैं जबकि मैं सिर्फ अपनी सामान्य बात हँसते हुए साझा कर रहा था , और मैं आगे उनसे बात करने में, खुद ही चौकन्ना रहा क्योंकि उनकी एक ६६ वर्ष के व्यक्ति से, अधिक सौम्यता और गंभीर वार्तालाप की आशा, मैं तोड़ना नहीं चाहता था !

            मुझे लगता है कि उन्मुक्त होकर हँसने के लिए सबसे पहले, एक निर्मल और मस्तमौला मन चाहिए ! अगर आप स्वस्थ जीने के लिए, हंसना सीखना चाहते हैं तब किसी छोटे बच्चे की खिलखिलाहट सुनते हुए , उसकी आँखों में झांकिए उसमें आपके प्रति निश्छल विश्वास और प्यार छलकता दिखाई देगा यही है असली हंसी ....इस हंसी को देखते ही आपका तनाव गायब हो जाएगा और खुद हंस पड़ेंगे !

अगर ऐसी हंसी, आप नहीं हंस सकते तब आप उस आनंद तक कभी नहीं पहुँच पाएंगे जो स्वस्थ मन और शरीर के लिए आवश्यक है ,मनीषियों ने, इसी हँसी को सेहत और जवान रहने के लिए आवश्यक बताया है !

Thursday, October 22, 2020

विश्व की पहली कविता, जिसकी रचना मैराथन दौड़ते दौड़ते हुई -सतीश सक्सेना

२४ मार्च २०१७ को मैराथन रनिंग प्रैक्टिस में दौड़ते दौड़ते इस रचना की बुनियाद पड़ी , शायद विश्व में यह पहली कविता होगी जिसे 21 किलोमीटर दौड़ते दौड़ते बिना रुके रिकॉर्ड किया ! लगातार घंटों दौड़ते समय ध्यान में बहुत कुछ चलता रहता है उसकी परिणिति इस रचना के रूप में हुई !

न जाने दर्द कितना दिल में, लेकर दौड़ता होगा
कभी छूटी हुई उंगली किसी की, ढूंढता होगा !

सुना है जाने वाले भी , इसी दुनियां में रहते हैं !
कहीं दिख जाएँ वीराने में,आँखें खोजता होगा !

कोई सपने में ही आकर, उसे लोरी सुना जाए
वो हर ममतामयी चेहरे में ,उनको ढूंढता होगा !

छिपा इज़हार सीने में , बिना देखे उन्हें कैसे 
पसीने में छलकता प्यार, उनको भेजता होगा !

अकेले धुंध में इतनी कसक, मन में लिए पगला
न जाने कौन सी तकलीफ लेकर ,दौड़ता होगा !

Thursday, October 15, 2020

कोरोना वारियर डॉ पंकज कुमार , के लिए दुआ करें -सतीश सक्सेना

ONGC हेडक्वार्टर दिल्ली में मेडिकल सर्विसेज के इंचार्ज , डॉ पंकज कुमार (MBBS MS) जून के पहले सप्ताह से अपोलो हॉस्पिटल , सरिता विहार , दिल्ली में कोरोना से जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे हैं , आज लगभग ५ माह होने को आये , वे लगातार आई सी यू में ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं , जब भी मास्क हटाया जाता है उनका ऑक्सीजन लेवल डाउन होते हुए खतरे के लेवल से नीचे पंहुच जाता है ! 

डॉ पंकज कुमार बेहतरीन इंसान हैं , फेफड़ों उनके पहले से ही कमजोर हैं यह जानते हुए भी उन्होंने कोरोना कॉल में , लगातार ऑफिस जाते हुए ,अपनी जान खतरे में डालकर , रोगियों की देखभाल करते रहे , उन्हें पता था कि संक्रमण होने की स्थिति में उनके फेफड़े उनका साथ नहीं देंगे फिर भी वे घर वालों की बात न मानकर लगातार अपनी ड्यूटी पर जाते रहे और अंततः उन्हें कोरोना से लड़ने का मुआवजा भुगतना पड़ा !

पंकज उन डॉ में से एक हैं जिन्होंने बिना अपनी सेहत और परिवार की परवाह किये , हमेशा अपनी जिम्मेवारियों को अधिक तरजीह दी , रात रात भर जगकर दोस्तों की सेवा की , आज वे अपने जीवन की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं ! मैं भगवान पर भरोसा नहीं करता मगर आज मैं भी उनके दरबार में बैठा हूँ कि अगर सच्चे हो तो अपने इस भक्त की रक्षा करो , उसने तो तुम्हारी बहुत पूजा की है !

पंकज उन डॉक्टर्स में से एक हैं जिन्होंने मानवता को बचाकर रखा और धन को कभी महत्व नहीं दिया , मुझे याद है एक मशहूर नर्सिंग होम से नौकरी रिजाइन सिर्फ इसलिए करना पड़ा था , क्योंकि उन्होंने एक वृद्धा के मामूली पेटदर्द को बिना ऑपरेट किये एक गोली देकर ठीक कर दिया था !


पंकज का मुझ से खून का कोई रिश्ता नहीं है मगर उन्होंने मुझे पिछले २५ वर्ष से बड़े भाई का दर्जा दिया है , उस नाते मैं अपने समस्त मित्रों से अपील करता हूँ कि इस ईमानदार कोरोना वॉरिअर की रक्षा के लिए कुछ उपाय करें !

कितने कष्ट सहे जीवन में
तुमसे कभी न मिलने आया
कितनी बार जला अग्नि में
फिर भी मस्तक नही झुकाया
पहली बार किसी मंदिर में
मैं भी , श्रद्धा लेकर आया !
आज तेरी सामर्थ्य देखने ,
तेरे द्वार बिलखने आया !
आज किसी की रक्षा करने, साईं तुझे मनाने आया !

Wednesday, September 30, 2020

कुछ महत्वपूर्ण रनिंग जानकारी जो हर दौड़ना सीखने वाले को याद रहें - सतीश सक्सेना

भारत में बढ़ते डायबिटीज और हृदय रोग चिंताजनक हैं , हर चौथा व्यक्ति इसके असर में है , मेहनत न करने से बचने की आदतों ने , महिलाओं पुरुषों का वजन इतना बढ़ा दिया है कि वे चलने तक से परहेज करने लगे हैं अतः इस विषय पर जागरूक होना बेहद

आवश्यक है ! रनिंग से बेहतर शरीर को स्वस्थ रखने का और कोई बेहतर तरीका नहीं , इससे डायबिटीज पास नहीं आ सकती साथ ही कण्ट्रोल रनिंग से हृदय आर्टरी में रुकावट समाप्त होंगी फेफड़े खुलेंगे ऑक्सीजन बेहतर ले पाएंगे !

अक्सर लोगों को लगता है कि रनिंग सीखने में क्या है ? वह तो बचपन से आती है , जबकि स्थिति यह है कि रनिंग करना बहुत मुश्किल काम है और उसकी बारीकियां और खतरे सीखने के बिना रनिंग करना अपनी जान जोखिम में डालना है ! हाल में कई मजबूत व्यक्ति जिनमें मेडिकल डॉक्टर भी थे , जिन्होंने दौड़ते समय अपनी जान गंवाई है !

बिना प्रैक्टिस किये लम्बी दौड़ लगाने का प्रयत्न कभी नहीं करना चाहिए , अफ़सोस कि अधिकतर लम्बी दौड़ करने वाले लोग फायदे की जगह नुकसान अधिक उठाते हैं उसका कारण यह है कि वे 5 km की दौड़ को कुछ नहीं समझते और 10 km , 21 km , 42 km को आदर्श बनाने का प्रयत्न करते हैं जबकि 5 km की दौड़ से अधिक दौड़ना बेहद सावधानी का विषय है और धावक को अपने शरीर

की हर गति विधि पर बेहद सावधानी से निगाह रखनी आनी चाहिए ! हाल में हाइकोर्ट के एक रिटायर्ड जस्टिस की असमय मृत्यु हुई है जबकि वे हलके वजन के और बेहतरीन अल्ट्रा रनर भी थे ! धावक को अपने शरीर की क्षमता का पता होना चाहिए अगर वह गलत अंदाजा रखता है तो खामियाजा जान देकर भुगतना पडेगा !

अपने  60 से 65 वर्ष के मध्य , मैंने 926 बार दौड़कर कुल 6585 km दौड़ चुका हूँ , इसमें 35 के लगभग हाफ मैराथन ( 21 Km ) हैं , अगर गति की बात करें तब मेरा 21 km दौड़ में अब तक का बेहतरीन रिकॉर्ड 2 घंटे 16 मिनट 31 सेकंड का है ! जीपीएस डाटा के जरिये यह रिकॉर्ड strava नामक एप्प में सुरक्षित है (https://www.strava.com/athletes/11532172).  लगभग 6500 किलोमीटर दौड़ने के बाद , पिछले वर्ष से मैंने अपने दौड़ने की गति धीमी की है क्योंकि मुझे लगा कि लगातार ढाई घंटे तक दौड़ने की मुझे आवश्यकता नहीं है इससे लगभग ३ लीटर पसीना भी बहता है जिसके जरिये शरीर के आवश्यक मिनरल कम हो जाते हैं जो 
उचित नहीं सो इन दिनों मैंने अपने आपको, सप्ताह में एक बार 10 km की सामान्य गति पर बिना रुके दौड़ एवं नियमित 7 km का तेज वाक लक्ष्य रखा है जिसने मुझे अधिक फुर्ती प्रदान की है !

नए लोग अगर रनिंग सीखना चाहते हैं तो उन्हें याद रखना होगा कि दौड़ से बढ़ी हृदय गति के साथ ,शरीर के सारे अवयवों में लगातार तेज कम्पन होता है अगर कोई अंग पहले से ही बहुत अस्वस्थ है तो वह खराब भी हो सकता है ,  दौड़ने वाले का हर कदम पूरे शरीर के तीन गुने वजन के इम्पैक्ट के साथ जमीन से टकराता है और एक 5 km दौड़ने वाला इंसान ऐसा 7000 बार करता है , इससे उसके शरीर में अगर कॉटन के कपडे पहने हैं तो जख्म होना सामान्य बात है ! ब्रैस्ट निप्पल से खून बहना शुरू हो जाता है , जंघे परस्पर रगड़ से छिल जाती हैं और पैरों में सूजन आने के कारण नाखूनों में खून भर जाता है और अपनी शेप खो बैठते हैं और ऐसा अक्सर पहली लम्बी दौड़ में ही होता है ! मगर जो लोग धीरे धीरे अपने शरीर को दौड़ना सिखाते हैं उनके शरीर में आवश्यक बदलाव धीरे धीरे ही होते हैं और लगभग एक साल के बाद उसका शरीर इन सबका अभ्यस्त हो जाता है और आराम से वह यह दौड़ पूरी करता है !

ध्यान दें कि एक 21 km दौड़ने वाले इंसान को लगातार बिना रुके, अपने हर गिरते हुए कदम से जमीन पर 200 किलो वजन लेकर प्रहार करना होता है और ऐसा वह एक दो बार नहीं बल्कि 30000 बार करता है और ऐसा करने से उसके शरीर में आमूलचूल तूफानी  हलचल के साथ 2 से 3 लीटर पसीना बहता है , जिसमें शरीर के बहुमूल्य तत्व भी होते हैं ! शरीर की हड्डियों के सारे जोड़ एवं मसल्स तेज गति में होने के कारण सूज कर अपना स्वरुप खो बैठते हैं और कई बार खून बहने से अंदरूनी तौर पर गंभीर चोटिल भी हो जाता है जिसका फल कई बार बरसों तक भुगतना पड़ता है ! सो रनिंग को मजाक न समझे  ...बिना समझे न दौड़ें !

- रनिंग में सबसे आवश्यक 3 चीजों का नाम बताएं तो जवाब होगा - 1.पानी 2. पानी 3. पानी  सो दौड़ने से पहले 24 घंटों में खूब पानी पीना चाहिए 
- दौड़ने से पहले और बाद में , वाक करना चाहिए
-धीमे धीमे दौड़िये और हर हालत में बिना हांफे दौड़िये , अगर हाँफते हुए दौड़ रहे हैं तो यकीनन आप अपने हार्ट को कमजोर कर रहे हैं और स्ट्रोक का खतरा ले रहे हैं !
-अगर मात्र वजन घटाने को दौड़ रहे हैं तब याद रहे कि तेज दौड़ने से वजन में कोई ख़ास फर्क नहीं पडेगा , वजन घटाने के लिए , बिना हांफे धीरे धीरे दौड़ना चाहिए इससे बहुत जल्द वजन घटता है , अगर आप दौड़ नहीं पा रहे तो सिर्फ बिना हांफे तेज वाक करें आपको रनिंग जितना ही फायदा होगा ! 
-रोज दौड़ने से बचें , सप्ताह में चार दिन दौड़ना बढ़िया स्वास्थ्य के लिए काफी है ! जिसदिन अधिक दौड़ा हो उसके अगले दिन रेस्ट करें जिससे सूजी हुई मसल्स को आराम मिले !
- एक जैसा लगातार दौड़ने पर बॉडी में एंडोर्फिन्स नामक केमिकल रिलीज़ होते हैं , जिनका अनुभव मार्फिन नमक नशे जैसा होता है , इसके निकलने से शरीर की साड़ी थकान और दर्द जैसे गायब हो जाते हैं अवसाद का कहीं दूर दूर तक पता भी नहीं रहता , अगर महानगरों के किसी रनिंग आयोजन में आप जाएंगे तो वहां कितने ही कंपनियों के सीईओ जैसे रैंक के लोग दौड़ते मिलेंगे उनके व्यस्त और नीरस जीवन में यह जबरदस्त एक्सरसाइज रस घोलने का काम करती है , एंडोर्फिन्स के प्रभाव में , मैं खुद दो घंटे दौड़ते रहने के बाद रास्ते में ही नाचने लगा हूँ जबकि मैंने जिंदगी में कभी भी नाचना न सीखा और न रूचि है !
आज इतना ही , आप सबको मंगलकामनाएं !


Monday, September 28, 2020

ह्यूमन हेल्थ ब्लंडर्स -सतीश सक्सेना

कोरोना के कारण लगभग 8 महीने बाद आज पहली बार , लम्बे रन का आनंद लिया , 65+ उम्र में ८ महीने के अंतराल के बाद 10 km बिना रुके एक स्पीड में दौड़ना आसान नहीं होता , मगर 5:50 सुबह , ही निश्चय कर लिया था कि बीमारियों से घिरे अपने आलसी मित्रों को समझाने के लिए यह दौड़ बिना रुके और बिना वाक के पूरी करनी होगी , सो 10 km की दौड़ समाप्त करने में टौमटौम जीपीएस के अनुसार 1 घंटा 15 मिनट समय रिकॉर्ड किया गया जो कि ८ महीने बिना प्रैक्टिस के , संतोषप्रद माना जायगा ! आज बढ़िया समय निकलने का श्रेय पिछले पांच वर्ष में 6500 km दौड़ने के मेरे लम्बे अनुभव को जाएगा !

जिस व्यक्ति ने 60 वर्ष की उम्र से पहले अपने जीवन में 100 मीटर भी दौडना नहीं सीखा उसने 35 बार से अधिक हाफ मैराथन  (21 km बिना रुके दौड़ ) और देश विदेश में कुल मिलकर अब तक 6500 km की दौड़ रिकॉर्ड करा चुका है ! 
इस बखान का उद्देश्य अपनी तारीफ़ नहीं है बल्कि आप सब की ऑंखें खोलने के लिए कह रहा हूँ कि इस कारण मेरे शरीर का कायाकल्प हुआ है , 65 वर्ष की उम्र में , मैं इस समय 40 वर्ष की निरोग्य युवावस्था का आनंद ले रहा हूँ ! मुझे मालुम है कि मैं इससे अमर नहीं हो जाऊंगा मगर मेरा बढ़ा हुआ बीपी , बॉर्डर डायबिटीज , हाई कोलेस्ट्रॉल , हार्ट प्रॉब्लम , घुटनों का दर्द , स्पॉन्डिलाइटिस और ब्रोंकाइटिस पता नहीं कहाँ गायब हो गए और यह सब बिना किसी दवा लिए हुए हुआ है !

हमेशा याद रहे कि अगर आप श्रमिक नहीं हैं और बॉडी कोर में अवस्थित शरीर के महत्वपूर्ण अंगों हृदय ,लिवर , किडनी , पेन्क्रियास , फेफड़ों को अगर स्वस्थ रखना है तब पैरों द्वारा तेज वाक एवं धीमे धीमे रनिंग करने से ही कम्पन पैदा होगा और वे स्वस्थ होंगे जबकि अभी वे तीन तीन बार खाकर पैदा हुई चर्बी को लपेटे बीमार पड़े हुए हैं , दौड़ते हुए इंसान द्वारा जमीन पर पड़ता हर कदम उसके शरीर के तीन गुना वजन के साथ प्रहार करता है फलस्वरूप पैरों की उँगलियों से लेकर मस्तिष्क तक में कम्पन पैदा होते हैं और ये ढीले पड़े हुए शरीर में आमूलचूल परिवर्तन लाने में समर्थ हैं !

मित्रों से निवेदन है कि भारत में बढ़ी उम्र होते ही हम पैसों का उपयोग अपने आराम के लिए करते हैं , जो मजबूत शरीर को भी मृत्यु शैय्या की और धीरे धीरे ले जाता है , और अंत समय में हम बिस्तर पर अपाहिजों की तरह जान गंवाते हैं आप पिछले वर्षों में कितने मित्रों को खो बैठे हैं उनकी मृत्यु पर गौर करें तो यही पाएंगे अफ़सोस कि विद्वान दोस्त भी इस तरफ ध्यान नहीं देते बल्कि व्हाट्सप्प पर भेजे गए अनपढ़ों के मेसेज जिनमें अमर होने के नुस्खे होते हैं , खाते देखे जाते हैं !

खुद को धोखे में न रखें .....भारत राजधानी बन चूका है डायबिटीज और हृदय रोगों का , और इन दोनों का मिलाप और भी घातक है ! इसका सामान्य इलाज है कि शरीर को धीरे धीरे दौड़ना सिखाइये , फलस्वरूप दौड़ते शरीर के हर कदम पर आपके रुग्ण अंग, कम्पन लेते हुए खुद को एक्टिव बनाने का कार्य खुद ही कर लेते हैं ! डायबिटीज का नामोनिशान कुछ समय में गायब हो जाएगा !

रनिंग करने से पहले ध्यान रखें कि :
  •  शुरुआत में नियमित 30 मिनट वाक का आखिरी मिनट, बिना हांफे ,दौड़ कर समाप्त करें !
  • वजन घटाना आवश्यक है सो किसी भी रूप में पकौड़े परांठे और चीनी खाना छोड़ना होगा यह हृदय आर्टरी की दुश्मन है और डायबिटीज साथ हो तब जहर का काम करती है , रात का भोजन सोने से तीन घंटे पहले , बिना रोटी चावल का रहे !
  • बेहतर नींद के बाद , दिन में 12 गिलास पानी पीना है और गहरी साँसों के द्वारा ऑक्सीजन खींचते हुए बंद पड़े फेफड़े खोलने होंगे अन्यथा बिना ऑक्सीजन खून आपका अधिक साथ नहीं दे पायेगा !
  • खुद पर बुढ़ापा हावी न होने दें , अधिक दिन जवान रहने के लिए खुलकर हंसना अपने व्यक्तित्व का हिस्सा बनाइये ! 
  • घुटने दर्द इसलिए करते हैं कि बिना उपयोग जॉइंट जकड गए हैं , इन्हें सही करने का एकमात्र इलाज मूवमेंट करना है !

Sunday, September 13, 2020

कवितायें बिकाऊ हैं , बग़ावत नहीं रही -सतीश सक्सेना

लोगों में इन कविताओं की, आदत नहीं रही
सुन भी लें तो भी ,मन में  इबादत नहीं रही !

इक वक्त था जब कवि थे देश में गिने चुने
 
यह  वक्त चारणों का, मुहब्बत नहीं रही !

जब से बना है काव्य चाटुकार , राज्य का 
जनता को भी सत्कार की आदत नहीं रही 

माँ से मिली ज़ुबान , कब के भूल चुके हैं !
गीतों से कोई ख़त ओ क़िताबत नहीं रही !

संस्कार माँ बहिन की गालियों में ,खो गए
कवितायें बिकाऊ हैं , बग़ावत नहीं  रही  !

Sunday, August 30, 2020

अरसे के बाद मिले जाना,इतने निशब्द,नहीं मिलते -सतीश सक्सेना

जाने कितने ही बार हमें, मौके पर शब्द नहीं मिलते !
अहसासों के आवेगों में जिह्वा को शब्द नहीं मिलते !


सदियों बीतीं हैं यादों में  , क्यों मौन डबडबाईं आँखें   
अरसे के बाद मिले जाना, इतने निशब्द, नहीं मिलते !

उस दिन घंटों की बातें भी मिनटों में कैसे निपट गयीं
मिलने के क्षण जाने कैसे मनचाहे शब्द नहीं मिलते !

कितना सब कहना सुनना था, पर वाणी कैसे मौन रहीं
दुनिया के व्यस्त बाज़ारों में, इतने अशब्द नहीं मिलते !

हर बार मिले तो आँखों की भाषा में ही प्रतिवाद किये
कैसे भी अभागे हों जाना , इतने प्रतिबद्ध नहीं मिलते !

Friday, August 7, 2020

मानवता खतरे में पाकर, चिंतित रहते मानव गीत -सतीश सक्सेना

हम तो केवल हंसना चाहें  
सबको ही, अपनाना चाहें
मुट्ठी भर जीवन पाए हैं
हंसकर इसे बिताना चाहें
खंड खंड संसार बंटा है ,
सबके अपने अपने गीत ।
देश नियम, निषेध बंधन में, क्यों बांधा जाए संगीत ।

नदियाँ,झीलें,जंगल,पर्वत
हमने लड़कर बाँट लिए।
पैर जहाँ पड़ गए हमारे ,
टुकड़े, टुकड़े बाँट लिए।
मिलके साथ न रहना जाने,
गा न सकें, सामूहिक गीत ।
अगर बस चले तो हम बांटे, चांदनी रातें, मंजुल गीत ।

कितना सुंदर सपना होता
पूरा विश्व हमारा होता ।
मंदिर मस्जिद प्यारे होते
सारे धर्म , हमारे होते ।
कैसे बंटे, मनोहर झरने,
नदियाँ,पर्वत,अम्बर गीत ।
हम तो सारी धरती चाहें , स्तुति करते मेरे गीत ।

काश हमारे ही जीवन में
पूरा विश्व , एक हो जाए ।
इक दूजे के साथ बैठकर,
बिना लड़े, भोजन कर पायें ।
विश्व बंधु , भावना जगाने,
घर से निकले मेरे गीत ।
एक दिवस जग अपना होगा, सपना देखें मेरे गीत ।

जहाँ दिल करे, वहां रहेंगे
जहाँ स्वाद हो, वो खायेंगे ।
काले, पीले, गोरे मिलकर
साथ जियेंगे, साथ मरेंगे ।
तोड़ के दीवारें देशों की,
सब मिल गायें मानव गीत ।
मन से हम आवाहन करते, विश्व बंधु बन, गायें गीत ।

श्रेष्ठ योनि में, मानव जन्में
भाषा कैसे समझ न पाए ।
मूक जानवर प्रेम समझते
हम कैसे पहचान न पाए ।
अंतःकरण समझ औरों का,
सबसे करनी होगी प्रीत ।
माँ से जन्में, धरा ने पाला, विश्व निवासी बनते गीत ?

मानव में भारी असुरक्षा
संवेदन मन, क्षीण करे ।
भौतिक सुख, चिंता, कुंठाएं 
मानवता का पतन करें ।
रक्षित कर, भंगुर जीवन को,
ठंडी साँसें  लेते मीत ।
खाई शोषित और शोषक में, बढती देखें मेरे गीत ।

अगर प्रेम, जज़्बात हटा दें
कुछ न बचेगा मानव में ।
बिना सहानुभूति जीवन में
क्या रह जाए, मानव में ।
पशुओं जैसी मनोवृत्ति से,
क्या प्रभाव डालेंगे गीत !
मानवता खतरे में पाकर, चिंतित रहते मानव गीत ।

Friday, July 31, 2020

लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग के फायदे और खतरे -सतीश सक्सेना

3 km या उससे अधिक रनिंग को लॉन्ग डिस्टेंस रनिंग कहा जाता है , 61 वर्ष में जब मैंने दौड़ना सीखना शुरू किया था तब 100 मीटर लगभग हर लॉन्ग डिस्टेंस रनर यह सुख रनिंग के दौरान या उसके तुरंत बाद महसूस करता है और उस समय शरीर में कोई स्ट्रेस  , दर्द महसूस नहीं होता !

पहला मैराथन रनर यूनानी सैनिक फिडीपिडिस  था जिसने मैराथन नामक जगह से एथेंस तक की लगभग 42 किलोमीटर की दूरी दौड़ते हुए तय की और राज दरबार में जाकर ईरान पर अपनी सेना की विजय की सूचना देने के बाद लड़खड़ा कर गिर गया और इतनी लम्बी दौड़ को शरीर सह न सका और उसकी मृत्यु हो गयी !

अक्सर लम्बी दौड़ में मसल्स फाइवर्स में सूजन हो जाती है और इसे ठीक होने में कम से कम 3 सप्ताह से 3 माह तक लगते हैं , रनिंग
एक हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जिसमें दौड़ते समय हर कदम पर, शरीर का तीन गुना वजन के बराबर इम्पैक्ट होता है , और शरीर का हर अंग अवयव कम्पन महसूस करता है ! इस खतरनाक एक्सरसाइज के कारण शरीर तरह तरह से रियेक्ट करता है , अस्वस्थ  शरीर, 
परिवार में हृदय रोग हिस्ट्री के रनर को लम्बी दूरी की इस हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज से बचना चाहिए अन्यथा हृदय आघात से मृत्यु की संभावना अधिक रहती है !

फिडीपीडीज़ अकेला रनर नहीं था जिसकी लम्बी दूरी दौड़ने के कारण मृत्यु हुई हो , अधिक समय तक जोश में लम्बी दूरी दौड़ने वाले अक्सर हृदय डैमेज के शिकार तो होते हैं साथ ही बरसाती गर्म मौसम, ठण्ड और बारिश की अक्सर बिना परवाह 3 से 6 घंटे दौडने वाले अक्सर  मसल्स की अंदरूनी चोट , जॉइंट एंड बोन के अलावा घातक हृदय डैमेज, अचानक स्ट्रोक , डिहाइड्रेशन और बेइंतिहा थकान का शिकार होकर अचानक मृत्यु के शिकार होते हैं और इन सब कारणों में अक्सर कुछ और बड़ा करने की तमन्ना और जोश अक्सर घातक होते हैं ! पिछले ४ वर्षों में भारत में ही कम से कम आठ मौतें रनिंग के कारण हुई हैं , जिनमें आधी से अधिक दौड़ते हुए हुई हैं !

मुझे याद है लखनऊ मैराथन के दौरान , लगभग 16 km के बाद ही पैरों में क्रैम्प्स आने शुरू होने के कारण मैं दौड़ने के स्थान पर लड़खड़ा कर मुश्किल से चल रहा था , पानी कम पीने के कारण उस दिन डिहाइड्रेशन के असर साफ़ दिख रहा था उस पर बहता हुआ पसीना , जैसे तैसे लड़खड़ाते पैरों के साथ मैंने उस दिन 21 km की दूरी पूरी की थी , शायद वह दिन मेरे लिए हमेशा यादगार रहेगा !
जब से मैं अपने हर दोस्त को जोश में दौड़ने से रोकता रहता हूँ , और उन्हें कहता हूँ कि 5 km की दौड़ भी अक्सर काफी रहती है !

प्रौढ़ों को वाक् के अंत में थोड़ी दूर तक मस्ती में दौड़ना आना चाहिए और यह दौड़ना किसी भी हाल में , बिना हांफे और बीपी बढे बिना होना चाहिए अन्यथा वे अपने को खतरे में डालेंगे !

अतः हर रनर को अपने शरीर की सीमा क्षमता से अधिक नहीं दौड़ना चाहिए , हर लम्बी रनिंग के बाद 1 दिन से 7 दिन अथवा सप्ताह में दो दिन  विश्राम आवश्यक है ताकि मसल्स में आयी सूजन ठीक हो सके और वे अधिक मजबूत हो ! पानी की मात्रा रनर के शरीर में बहुत अधिक होनी चाहिए , उसे हर वक्त यह याद रखना चाहिए कि 10 से 21 किलोमीटर में वह शरीर से लगभग 3 लीटर पानी पसीने के रूप में बह जाता है उसकी भरपाई न होने पर वह मुसीबत में आ सकता है !

याद रखें जहाँ सप्ताह में 4 - 5 दिन, 4 km की एवरेज रनिंग और एक दिन साइक्लिंग आपके लिए वजन मुक्ति, कब्ज , खून संचार, स्ट्रेस , डायबिटीज और हृदय रोगों से मुक्ति दिलाने के लिए काफी होगी वहीँ जोश और जवानी दिखाने के लिए 10 km रोज की दौड़ , जान लेने में भी समर्थ है !

हैप्पी रनिंग टू आल !!

Tuesday, July 28, 2020

टी विद अरविन्द कुमार -सतीश सक्सेना

हिंदी साहित्य में ऐसे बहुत कम लोग हैं जो बिना किसी दिखावा शानशौकत के चुपचाप अपना कार्य करते हैं , उनमें ही एक बेहद सादगी भरा व्यक्तित्व अरविन्द कुमार का है जिनको मैंने जितना जानने का प्रयत्न किया उतना ही प्रभावित हुआ !
वे मेरठ पोस्ट  ग्रेजुएट  कॉलेज ऑफ़ मेडिकल साइंस में मेडिकल फिजिक्स में प्रोफेसर एवं हिंदी जगत में कहानीकार एवं कवि हैं !
अरविन्द कुमार हिंदी इंग्लिश के अलावा रशियन भाषा के जानकार हैं , आजकल वे हिंदी जगत के प्रख्यात लेखकों, कवियों, कहानीकारों और आलोचकों से लाइव वार्ता कर रहे हैं , उनके प्रसारण का नाम टी विद अरविन्द कुमार है और यह वार्ता फेसबुक पर प्रसारित होती है !
मेरी खुशकिस्मती है कि अरविन्द कुमार ने मुझे भी इस चाय के लायक समझा और आज शाम को अपने साथ चाय पर आमंत्रित किया है उनके साथ मुख्य विषय शारीरिक फिटनेस होगा साथ में एक दो गीत भी उनके अनुरोध पर प्रस्तुत किये जाएंगे !
आप सब आमंत्रित हैं इस चर्चा में शामिल होने के लिए  ...
आज दिनांक 28.07.2020 (दिन मंगलवार) की शाम 8.00 बजे
https://www.facebook.com/tkarvind
आभार  ..!!
कल दिनांक 28.07.2020 (दिन मंगलवार) की शाम 8.00 बजे मेरे बातचीत के मंच पर होंगे गीतकार और द फिटनेस मैं Satish Saxena जी। उनसे उनकी जीवन यात्रा, रचना यात्रा और उनके फिटनेस मंत्र के बारे में बातें होंगी। आशा है हमारी यह गुफ्तगू आप सभी मित्रों के लिए प्रेरणादाई होगी। आपसे गुजारिश है कि आप सभी इस बातचीत में सक्रिय भागीदारी निभाएं। हमारी यह बातचीत मेरे फेसबुक वॉल पर लाइव स्ट्रीम होगी जिसका लिंक मैं नीचे दे रहा हूं---
https://www.facebook.com/tkarvind
 — with Satish Saxena 

Sunday, July 26, 2020

पता नहीं मां ! सावन में यह आँखें क्यों भर आती हैं - सतीश सक्सेना

जिस दिन एक बेटी अपने घर से, अपने परिवार से, अपने भाई,मां तथा पिता से जुदा होकर अपनी ससुराल को जाने के लिए अपने घर से विदाई लेती है, उस समय उस किशोरमन की त्रासदी, वर्णन करने के लिए कवि को भी शब्द नही मिलते !
जिस पिता की ऊँगली पकड़ कर वह बड़ी हुई, उन्हें छोड़ने का कष्ट, जिस भाई के साथ सुख और दुःख भरी यादें और प्यार बांटा, और वह अपना घर जिसमे बचपन की सब यादें बसी थी.....इस तकलीफ का वर्णन किसी के लिए भी असंभव जैसा ही है !और उसके बाद रह जातीं हैं सिर्फ़ बचपन की यादें, ताउम्र बेटी अपने पिता का घर नही भूल पाती ! पूरे जीवन वह अपने भाई और पिता की ओर देखती रहती है !

राखी और सावन में तीज, ये दो त्यौहार, पुत्रियों को समर्पित हैं, इन दिनों का इंतज़ार रहता है बेटियों को कि मुझे बाबुल का या भइया का बुलावा आएगा ! अपने ही घर को  वह अपना नहीं कह पाती वह मायके में बदल जाता है ! !
नारी के इस दर्द का वर्णन बेहद दुखद है  .........

याद है उंगली पापा की 
जब चलना मैंने सीखा था ! 
पास लेटकर उनके मैंने 
चंदा मामा  जाना था !
बड़े दिनों के बाद याद 
पापा की गोदी आती है  
पता नहीं माँ सावन में, यह ऑंखें क्यों भर आती हैं !

पता नहीं जाने क्यों मेरा 
मन , रोने को करता है !

बार बार क्यों आज मुझे
सब सूना सूना लगता है !
बड़े दिनों के बाद आज, 
पापा सपने में आए थे !
आज सुबह से बार बार बचपन की यादें आतीं हैं !

क्यों लगता अम्मा मुझको

इकलापन सा इस जीवन में,
क्यों लगता जैसे कोई 
गलती की माँ, लड़की बनके,
न जाने क्यों तड़प उठी ये 
आँखे झर झर आती हैं !
अक्सर ही हर सावन में माँ, ऑंखें क्यों भर आती हैं !

एक बात बतलाओ माँ , 

मैं किस घर को अपना मानूँ 
जिसे मायका बना दिया या 
इस घर को अपना मानूं !
कितनी बार तड़प कर माँ 
भाई  की यादें आतीं हैं !
पायल,झुमका,बिंदी संग , माँ तेरी यादें आती हैं !

आज बाग़ में बच्चों को
जब मैंने देखा, झूले में ,

खुलके हंसना याद आया है,
जो मैं भुला चुकी कब से
नानी,मामा औ मौसी की 
चंचल यादें ,आती हैं !
सोते वक्त तेरे संग, छत की याद वे रातें आती हैं !

तुम सब भले भुला दो ,
लेकिन मैं वह घर कैसे भूलूँ 
तुम सब भूल गए मुझको 

पर मैं वे दिन कैसे भूलूँ ?

छीना सबने, आज मुझे 
उस घर की यादें आती हैं,
बाजे गाजे के संग बिसरे, घर की यादें आती है !
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