Saturday, November 2, 2013

अपने अपने उल्लू ले , महिलायें बाहर निकलीं हैं -सतीश सक्सेना

देखो आज निठल्लू ले,महिलायें बाहर निकली हैं !
दीवाली में  लल्लू ले,महिलायें  बाहर निकली हैं !

आज खरींदे, सोना चांदी,धन की वारिश होनी है !
अपने अपने उल्लू ले , महिलायें बाहर निकलीं हैं !


पूंछ हिलाते देख इन्ही को , कुत्ते बस्ती छोड़ गए !
कैसे कैसे  पिल्लू ले, महिलायें बाहर निकली हैं !

कितने लोग आज भी ऐसे , जो  बंधने को बैठे हैं !
बड़े मनोहर पल्लू ले , महिलायें बाहर निकली हैं !


जीवन इनका राजनीति में, पूंछ हिलाते बीता है ! 
गोरे रंग का कल्लू ले,महिलायें बाहर निकली हैं !

28 comments:

  1. पुरुष-विरोधी विचार :-)

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  2. आज समझ आया। बेटी होते ही लोग कहते हैं लक्ष्मी आई है। बहू आती है तो कहते हैं गृह लक्ष्मी आई है।

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  3. इसलिये हम तो बाहर ही नहीं निकले ! :)

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  4. आज खरींदे, सोना चांदी,धन की वारिश होनी है !
    अपने अपने उल्लू ले , महिलायें बाहर निकलीं हैं
    उल्लू से बेहतर वाहन और कोई नहीं है :)
    मस्त है रचना !

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  5. वाह ! बहुत सुन्दर .दीपावली की शुभकामनाएँ !
    नई पोस्ट : दीप एक : रंग अनेक

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  6. सटीक व्यंग रचना.

    दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  7. शानदार सामयिक रचना

    दीपावली का पावन अवसर पर शुभकामनाएँ

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  8. वाह । बढिया... दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं ।

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  9. !! प्रकाश का विस्तार हृदय आँगन छा गया !!
    !! उत्साह उल्लास का पर्व देखो आ गया !!
    दीपोत्सव की शुभकामनायें !!

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  10. ""अपने प्यारे लल्लू ले महिलायें निकली हैं "" ये दीवाली बम है

    दीपावली की हार्दिक बधाई शुभकामनाएं

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  11. आपकी यह पोस्ट आज के (०२ नवम्बर, २०१३) ब्लॉग बुलेटिन - ये यादें......दिवाली या दिवाला ? पर प्रस्तुत की जा रही है | बधाई

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  12. जब जेब कटती है तब भी ऐसा ही महसूस क्यों होता है कुछ कुछ अन्यथा मत लीजियेगा हो सकता हो मेरी समझ में दूसरी बात आ रही हो ! :P

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    Replies
    1. डॉ साहब ,
      जैसा आपने सोंचा है बिलकुल वैसा ही है :)
      बधाई दीवाली की !

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    2. इसका मतलब हमें भी है कुछ कुछ समझने की समझ !

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  13. सुन्दर प्रस्तुति

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  14. बहुत सुन्दर.. आप को दीपावली पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

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  15. शानदार सामयिक प्रस्तुति...दीपावली की शुभकामनायें...
    नयी पोस्ट@जब भी जली है बहू जली है

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  16. उधर तांत्रिक ढूँढ रहे हैं उल्लुओं को.. इधर भरे पड़े हैं!

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    1. मेरे पास तो आज तक कोई तांत्रिक नहीं आया पाण्डेय जी :)

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  17. हास्य व्यंग्य के रंग बिखेरती कविता.
    पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ”

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  18. दिवाली बम्ब ब्लॉग पर ही फोड़ दिया आपने तो ...
    दीपावली के पावन पर्व की बधाई ओर शुभकामनायें ...

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  19. ये उल्लू सध भी तो खूब जाते हैं इन महिलाओं से !

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  20. man ko tarangit karati behatarin diye se man ko prakashit karati giit ki awali

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  21. kahan koi ullu hai,sabhi sakh khali pade hain.....pyari,fadkti hui rachna...wah

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  22. बहुत खूब जी

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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