Wednesday, March 21, 2018

दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

अधिकतर हार्ट अटैक का कारण, शारीरिक एक्टिविटी का कम होना, अधिक उम्र में बढ़ा हुआ तनाव ,हाइपरटेंशन ,डायबिटीज एवं बढ़ा हुआ वजन मुख्य तौर पर दोषी हैं और अधिकतर केस 50 वर्ष के आसपास ही पाए जाते हैं !
इस उम्र के लोग अधिकतर परिपक्व बुद्धि के मालिक होते हैं और आसानी से अपनी दिनचर्या में बदलाव के लिए ध्यान नहीं देते उनका अधिकतर समय मान सम्मान, प्रभामंडल को सँवारने में बीतता है जिसमें फेसबुक एवं व्हाट्सएप्प से मिलती हुई फ़र्ज़ी वाहवाही का बहुत बड़ा रोल है ! खुद की तारीफ़ सुनने का यह नशा न केवल एडक्टिव है बल्कि आजकल स्वास्थ्य के लिए सबसे हानिकारक भी है !
मोटापा, डायबिटीज एवं हृदय रोगों से बचाव के लिए रनिंग से बेहतरीन कोई एक्सरसाइज नहीं है मगर अधिकतर लोग दौड़ना बिना सीखे हुए दौड़ने का प्रयत्न करते हैं और कुछ दिन में ही वह बंद हो जाता है ! दौड़ने का पहला मंत्र धीमे धीमे बिना हांफे लम्बी दूरी तक दौड़ना है और यह धीरे धीरे ही
होगा !
इसी मंत्र की बदौलत जीवन के साठ वर्ष 10 कदम भी न दौड़ पाने वाला मैं , आज बिना रुके लगातार 3 घंटे तक दौड़ता हूँ और बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर कब का नार्मल हो चुका है !
मैं दिखावे की मित्रता नहीं करता अपने मित्रों से इकतरफा मन से जुड़ा होता हूँ वे महसूस करें इसका प्रयत्न भी नहीं करता सो अपने ऊपर किये प्रयोगों को उनके ऊपर भी लागू होते देखना चाहता हूँ और अक्सर मित्रों को कहता भी रहता हूँ और दिल से कहता हूँ कि कायाकल्प आसान है एक बार संकल्प भर लेना है बस ....
अपने हृदय और इम्यून सिस्टम को सही करने के लिए
- खूब नींद लीजिये कम से कम 8 घंटा, यह पहला नियम
-रोज सुबह हलके हलके दौड़िये और बिना हांफे लंबा दौड़ने का अभ्यास करें इससे डायबिटीज लेवल एवं स्ट्रेस ठीक होगा
- रोज शाम लंबा टहलने जाएँ
-रात का भोजन हल्का करें या न करें अगर वे पूरे दिन घर पर रहते हैं !
खूब मस्त रहें और अकेले भी खुश रहना सीखें !
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये!
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये!
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Tuesday, March 20, 2018

जय किसान के, मक्कार खोखले नारे - सतीश सक्सेना

इस देश की भ्रष्ट राजनीति ने किसानों की कभी परवाह नहीं की उन्हें हमेशा भेंड़ बकरियों की तरह गांव के
मजबूत प्रधानों, मुखियाओं के बाड़े में रखा जाता रहा जिसे तोड़ कर बाहर निकलने का साहस न इन अनपढ़ों गंवारों में पहले था और न आज है !
उनका देश में बहुमत हमेशा था और वोट डालते समय उन्हें घरों से निकालने का काम ग्राम सरपंच और मुखियाओं के जिम्मे था जो उनके बताये निशान पर वोट डालते थे !
उन्हें यह पूंछने का अधिकार कभी नहीं था कि हम किसे वोट दे रहे हैं और 70 प्रतिशत गांवों में आज भी नहीं है , पूंछने का अर्थ जुर्रत करना था और गाँव के दबंगों के लिए यह अपराध, माफ़ी योग्य न तब था और न अब है !

यवतमाल यात्रा के समय मैं उनकी दुर्दशा देखकर आश्चर्यचकित था और साथ ही शर्मिंदा भी कि हम आज भी एक अनपढ़ अविकसित देश के नागरिक हैं जहाँ मानवता का कोई मूल्य नहीं जहाँ सत्ता सिर्फ राजाओं की
बपौती है जहाँ हमें जानवरों की तरह ही जीना है और उनका मुखियाओं का आदेश मरते दम तक मानना है !
जुड़ा हमारा जीवन गहरा ,भोजन के रखवालों से !
किसी हाल में साथ न छोड़ें,देंगे साथ किसानों का
इन्द्र देव  की पूजा करके, भूख मिटायें मानव की  
राजनीति के अंधे कैसे समझें कष्ट किसानों का !

Sunday, March 11, 2018

प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये! - सतीश सक्सेना

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है,बुड्ढा तिरेसठ साल का !
Tech City Marathon में, मुझे पहली बार हाफ मैराथन ( 21.10 Km ) में 2:45 hour का पेसर फ्लैग पकड़ कर, दौड़ने का दायित्व मिला ! यह कार्य बेहद चैलेंजिंग होता है जिसमें आपके फ्लैग टारगेट को लेने के लिए भागते हुए रनर की हौसला अफजाई करते हुए 21 km तक बिना थके, रुके, दौड़ाने की नैतिक जिम्मेदारी होती है !आज की दौड़ में इस पूरी दूरी में Ajay Kumar मेरे साथ भागते रहे वे आम तौर पर बेहद तेज भागने वाले marathoner हैं , उनके साथ स्लो पेस पर भागने का यह अनुभव अविस्मरणीय रहा ! बहुत कम लोग जानते होंगे कि अजय कुमार आज से कुछ वर्ष पहले खतरनाक लेवल की डायबिटीज से पीड़ित रहे थे और अब उन्होंने मात्र दौड़ने की वजह से अपनी इस भयावह बीमारी से पूरी तौर पर मुक्ति पा ली है ! डायबिटीज से ग्रस्त लोगों को अजयकुमार से सीखना चाहिए कि उन्होंने कैसे इस व्याधि से मुक्ति पायी !

हालाँकि पहली बार की पेसिंग में, मैं अपने कार्य से संतुष्ट नहीं था फिर भी लोगों की हिम्मत बंधाते भागते मैंने यह

दूरी 2:43:25 ऑवर में पूरी की ! Tech city marathon के आयोजकों ने अंत में सबसे सीनियर रनर 71 वर्षीय नागराजन जिन्होंने रनिंग 69 वर्ष की उम्र से शुरू की है, के हाथों से पेसर्स को खूबसूरत ट्रोफ़ी भेंट करवाई , यह सुखद था !

आभार Shiva Dixit Shruti Joshi Pandey Trilok Chand Suneel Tomarमंगलकामनाओं सहित !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये!

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये!

तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये!

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Wednesday, March 7, 2018

साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का - सतीश सक्सेना

मैराथन आसान ,भरोसा हो क़दमों की ताल का
साथ तुम्हारे दौड़ रहा है, बुड्ढा तिरेसठ साल का !

करत करत अभ्यास,पहाड़ों को रौंदा इस पाँव ने 
हार न माने किसी उम्र में,साहस मानवकाल का !

इसी हौसले से जीता है, सिंधु और आकाश भी
सारी धरती लोहा माने , इंसानी  इकबाल का !


गिरते क़दमों की हर आहट,साफ़ संदेशा देती है !
हिम्मत,मेहनत,धैर्य,ज़खीरा इंसानों की चाल का !

बहे पसीना कसे बदन से,मस्ती मेहनत की आयी !
रुक ना जाना,उठता गिरता रहे कदम भूचाल सा !

Tuesday, February 27, 2018

बढ़ते हृदय आघात और प्रभामण्डल -सतीश सक्सेना

आज मन बेहद व्यथित है , सुबह सुबह Rahul Singh जी के बड़े भाई Rajesh Kumar Singh जी के हृदयाघात से अचानक जाने की खबर पढ़कर, दौड़ने के लिए बाहर जाने का मन नहीं हुआ ! अचानक स्वस्थ इंसान ऐसे कैसे चला गया कल हमारा नंबर होगा अतः इस पर ध्यान क्यों न दें !
हाल के दिनों में बढ़ते हुए हृदयघातों से शायद ही कोई परिवार अछूता बचा होगा, यह बेहद चिंताजनक है , अधिकतर लोग सम्पन्नता की निशानी, आराम और सुविधा उपलब्ध होना मानते हैं और सुविधा का मतलब मेहनत न करना है और वह हम धन के बदले दूसरों से कराएंगे !
यह मूर्खता और मूढ़ता की पराकाष्ठा है अफ़सोस कि विद्वान् और बौद्धिक सम्पदा संपन्न लोग अपने बढ़ते प्रभामंडल के नीचे नाचते नाचते, आसन्न मौत की आहट भी महसूस नहीं करते !
मानवीय शरीर लगभग 100 वर्ष के लिए इस तरह डिज़ाइन किया गया है कि इसमें होने वाली टूटफूट और क्षरण की मरम्मत स्वतः होती रहे और इसमें गरीबी रईसी का कोई भेदभाव नहीं होता और न मानवीय हस्तक्षेप (दवा दारु ) की कोई जरूरत , इसकी सारी मरम्मत खुद ब खुद होती है बशर्ते शारीरिक प्रतिरक्षा शक्ति मजबूत हो !
शरीर का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हाथ और पैरों के लिए दिया गया है जो स्वतः चलते समय हिलते हैं और शारीरिक शक्ति इनके हिलने से चार्ज होती रहती है , जो लोग रोज दौड़ने के अभ्यस्त हैं उनके पेट, सीने और मस्तिष्क में हर गिरते कदम के साथ कम्पन होते हैं और महत्वपूर्ण अवयवों का व्यायाम आसानी से हो जाता है जो मात्र टहलने से संभव नहीं सो मित्रों से निवेदन है कि आंखे खोलें और समय रहते दौड़ना सीखना शुरू करें ताकि हृदय में आये परिवर्तन रिवर्स हो सकें !
यह बेहद आसान है और आपका बचना, आपके हँसते हुए परिवार के लिए आवश्यक है !
सस्नेह मंगलकामनाएं !
साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के, धीमे धीमे दौड़िये !

Wednesday, February 21, 2018

बूढ़े होते हताश मन को, बच्चों सा नचाने को दौड़ें -सतीश सक्सेना

रिश्तों  में होते झगडे का , अवसाद मिटाने को दौड़ें !
बूढ़े होते हताश मन को , बच्चों सा नचाने को दौड़ें !

कमजोर नजर जाने कब से , टकटकी लगाए दरवाजे 
असहाय अकेली अम्मा के,आंसू को सुखाने को दौड़ें ! 

उसने अपना पूरा जीवन, केवल तुम पर कुर्बान किया  
तेरा वैभव काम नहीं आया,ये ग्लानि मिटाने को दौड़ें !

जैसे ही दौलतमंद बने, मेहनत त्यागी, बेकार हुए  
बरसों से जकड़े घुटनों को , दमदार बनाने को दौड़ें !

आजाद देश में देशभक्त, उग आये कुकुरमुत्तों जैसे
खादी पहने इन धूर्तों की , पहचान कराने को दौड़ें !

Friday, February 9, 2018

उम्मीदें कुछ कम कर बेटा -सतीश सक्सेना

अर्थ अनर्थ है,अक्सर बेटा !
शब्द अर्थ,रूपान्तर बेटा !


क्रूर, कुटिल, सूखे पत्थर में ,
धड़कन,न तलाश कर बेटा !

सूख गए , तालाब प्यार के
अब न रहे, पद्माकर बेटा !

इस निष्ठुर जंगल में तुमको
मिलें खूब , आडम्बर बेटा !

अच्छे दिन जुमले हैं केवल,
उम्मीदें कुछ कम कर बेटा !


Monday, February 5, 2018

हम रहें या न रहें पदचिन्ह रहने चाहिए -सतीश सक्सेना


अबतक लगभग 300 गीत कवितायेँ एवं इतने ही लेख लिख चुका हूँ मगर प्रकाशनों, अख़बारों, कवि सम्मेलनों और गोष्ठियों में नहीं जाता और न प्रयास करता हूँ कि मुझे लोग पढ़ें या सुने ! 300 कविताओं में मुझे अपनी एक भी कविता की कोई भी छंद पंक्ति याद नहीं क्योंकि मैं उन्हें लिखने के बाद कहीं भी सुनाता नहीं , न घर में न मित्रों में और न बाहर , मुझे लगता है अगर मैंने साफ़ स्वच्छ व आकर्षण लायक लिखा है तो लोग उसे अवश्य पढ़ेंगे चाहे समय कितना ही लगे , लेखन अमर है बशर्ते वह ईमानदार हो ! कवि नाम से चिढ है मुझे अब यह नाम सम्मानित नहीं रहा , कवि उपनाम धारी हजारों व्यक्ति अपनी दुकानें चमकाते चारो और बिखरे पड़े हैं !

मुझे पहला उल्लेखनीय सम्मान आनंद ही आनंद संस्था ने दिया जब विवेक जी ने मुझे राष्ट्रीय भाष्य गौरव पुरस्कार के लिए हिंदी साहित्य से, लोगों के चयन का जिम्मा लेने के लिए अनुरोध किया था , आश्चर्य यह था कि मैं आनंद ही आनंद संस्था और उसके संस्थापक आचार्य विवेक जी के बारे में पहले से कुछ नहीं जानता था मगर उन्हें मेरे लेखन को पढ़कर मेरी ईमानदारी पर भरोसा हुआ जिसे मैंने इस वर्ष तक सफलता पूर्वक निभाकर अब उनसे इस पदमुक्ति (अध्यक्ष भाष्य गौरव पुरस्कार ) के लिए अनुरोध किया है, लम्बे समय तक एक पद से जुड़े रहना मुझे उचित नहीं लगता !
पिछले माह भारत पेट्रोलियम स्टाफ क्लब में विशिष्ट अतिथि के रूप में आमत्रित किया गया जहाँ मैं किसी को नहीं जानता था, हिंदी साहित्य जगत में लम्बे समय से कार्यरत एवं हिंदुस्तानी भाषा अकादमी के अध्यक्ष सुधाकर पाठक जी का अनुरोध था कि मैं वहां के स्टाफ को अपने स्वास्थ्य अनुभव के बारे में दो शब्द कहूं , इससे पहले सुधाकर पांडेय जी से न कभी भेंट हुई और न कोई परिचय था वे मेरी रचनाओं के मात्र मूक पाठक थे जिनसे मेरा कोई पूर्व परिचय न था !
भारत पेट्रोलियम में मुझे मंच सहभागिता का अवसर मिला जाने पहचाने ओलम्पियन गोलकीपर रोमियो जेम्स के साथ , वे लोग समझना चाहते थे कि रिटायर होने के बाद भी मैं मैराथन कैसे और क्यों दौड़ा और उससे क्या स्वास्थ्य लाभ मिले ? और इस वार्षिक उत्सव के अवसर पर उन्होंने बिना कोई मशहूर नाम के चुनाव के मुझ जैसे एक अनजान व्यक्ति को चुना , मुझे लगता है सुधाकर पाठक का व्यक्तित्व इस नाते विशिष्ट है और उनसे मिलने के बाद विश्वास है कि वे हिंदी जगत में नए आयाम कायम करेंगे !
ऐसे ईमानदार सम्मान अच्छे लगते हैं बशर्ते उसके पीछे अन्य उद्देश्य और प्रयास निहित न हों ! अफ़सोस कि हिंदी जगत में अधिकतर सम्मान प्रायोजित अथवा निहित व्यक्तिगत फायदे लिए होते हैं इस माहौल में आचार्य विवेक जी जैसे व्यक्तित्व का होना सुखद है एवं निश्चित ही शुभ संकेत है !

हिंदी जर्जर, भूखी प्यासी

निर्बल गर्दन में फंदा है !
कोई नहीं पालता इसको
कचरा खा खाकर ज़िंदा है !
कर्णधार हिंदी के,कब से
मदिरा की मस्ती में भूले !
साक़ी औ स्कॉच संग ले
शुभ्र सुभाषित माँ को भूले
इन डगमग चरणों के सम्मुख, विद्रोही नारा लाया हूँ !
भूखी प्यासी सिसक रही,अभिव्यक्ति
को चारा लाया हूँ !




Monday, January 8, 2018

करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !-सतीश सक्सेना


आग लगाई संस्कारों में 
सारी शिक्षा भुला गुरु की
दाढ़ी तिलक लगाये देखो  
महिमा गाते हैं कुबेर की !
डर की खेती करते,जीते 
नफरत फैला,निर्मम गीत !
करें दंडवत महलों जाकर,बड़े महत्वाकांक्षी गीत !

खद्दर पहने नेतागण अब
लेके चलते , भूखे खप्पर,
इन पर श्रद्धा कर के बैठे
जाने कब से टूटे छप्पर !
टुकुर टुकुर कर इनके मुंह 
को,रहे ताकते निर्बल गीत !
कौन उठाये  नज़रें अपनी , इनके टुकड़े खाते  गीत !

धन कुबेर और गुंडे पाले 
जितना बड़ा दबंग रहा है
अपने अपने कार्यक्षेत्र में 
उतना ही सिरमौर रहा है 
भेंड़ बकरियों जैसी जनता,
डरकर इन्हें दिलाती जीत !
पलक झपकते ही बन जाते सत्ताधारी, घटिया गीत !

जनता इनके पाँव  चूमती
रोज सुबह दरवाजे जाकर
किसमें दम है आँख मिलाये 
बाहुबली के सम्मुख आकर  
हर बस्ती के गुंडे आकर 
चारण बनकर ,गाते गीत !
हाथ लगाके इन पैरों को, जीवन धन्य बनाते गीत !

लोकतंत्र के , दरवाजे पर 
हर धनवान जीतकर आया
गुंडा राष्ट्र भक्त कहलाया 
राजनीति में जब पद पाया
अनपढ़ जन से वोट मांगने,
बोतल ले कर मिलते मीत !
बिका मीडिया हर दम गाये, अपने दाताओं के गीत !

खादी कुरता, गांधी टोपी,
में कितने दमदार बन गये  !
श्रद्धा और आस्था के बल 
मूर्खों के  सरदार बन गये !
वोट बटोरे झोली भर भर, 
देशभक्ति के बनें प्रतीक ! 
राष्ट्रप्रेम भावना बेंच कर, अरबपति बन जाएँ गीत !

Sunday, November 5, 2017

ज्वालामुखी मुहाने जन्में , क्या चिंता अंगारों की ! -सतीश सक्सेना

पेट्रोलियम मंत्रालय के तत्वावधान में बनायी गयी सोसायटी PCRA द्वारा आज दिल्ली में नेशनल साइकिल चैम्पियन शिप का आयोजन किया गया जिसमें बिना किसी तैयारी के मैंने भी 30 km रेस में डरते डरते भाग लिया, तैयारी की हालत यह थी कि 15 सितम्बर के बाद एक भी दिन साइकिल को हाथ भी नहीं लगाया था फॉर्म भरते हुए अपना रजिस्ट्रेशन रोड साइकिल के रूप में कराया था जबकि मुझे यही नहीं पता था कि मेरी साइकिल रोडी नहीं बल्कि हाइब्रिड क्लास की है जो रोड साइकिल के मुकाबले काफी स्लो होती है !

आज मुझे घर से सुबह 4 बजे, लगभग 17 km साइकिल चलाकर जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम जाना पड़ा साइकिल रेस की कोई समझ न होने के कारण तनाव में था कि कहीं इन स्पीडस्टर के बीच अपने आपको चोट न लगा लूँ !
स्टार्ट लाइन पर मेरे साथ खड़े संजीव शर्मा ने कई उपयोगी सुझाव दिए जैसे साइकिल की सीट एडजस्ट करायी एवं रेस के बीच ब्रेक का उपयोग कम से कम करने की सलाह शामिल थी !

जब रेस शुरू हुई तब पहले लैप (9 Km) में आत्मविश्वास काफी कम था एवं डिफेंसिव मूड में था और अपने को समझा रहा था कि पहले लैप में थकना नहीं सो अन्य सभी साइकिलिस्ट को अपने से तेज और अनुभवी मानते हुए स्पीड अपेक्षाकृत कम रखी मगर लगभग ५ km बाद अपने अंदर का मैराथन रनर जग गया था जो मुझे कह रहा था कि तुम और तेज चल सकते हो फिर घबरा क्यों रहे हो स्पीड बढ़ाओ सतीश ये आसपास चलते हुए रेसर्स में बहुत कम लोग इतना दौड़ते होंगे जितना तुम दौड़ते हो ! तुम नॉन स्टॉप ढाई घंटा दौड़ते हो जबकि यह दौड़ सिर्फ 30 km की है और वह भी साइकिल की , शर्म करो !

कई बार स्वयं धिक्कार काम कर जाता है और मैंने डरते डरते तेज साइकिल सवारों के बीच अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू की तो लगा कि मैं बिना हांफे चला पा रहा हूँ ! तेज चलते हुए नौजवान साइकिल सवारों को पीछे छोड़ते हुए महसूस किया कि मैराथन ट्रेनिंग ने मेरे पैरों को इस उम्र में भी काफी ताकतवर बना दिया है और यह महसूस करते ही मैंने अपनी जीपीएस वाच पर नज़र डाली जहाँ स्पीड पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ रही थी भरोसा नहीं हो रहा था कि अपने जीवन में कभी ग्रुप में भी साइकिल न चलाने वाला मैं लगभग 30 km प्रति घंटे की दर से साइकिल चला रहा था !

और फिर आखिर तक यह स्पीड कम नहीं हुई, चीयर करते हुए लोगों के बीच जब फाइनल टाइमिंग स्ट्रिप से गुजरा तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड बना चुका था !


अपने ६३ वर्ष में, आखिरी स्थान पर आने की उम्मीद लिए मैं, रेस ख़त्म होने पर 27 Km की दूरी 57:33 मिनट में तय करते हुए कुल 376 रेसर्स में 163वें स्थान पर रहा !

प्यार बाँटते, दगा न करते , भीख न मांगे दुनिया से !
ज्वालामुखी मुहाने जन्में , क्या चिंता अंगारों की ! -सतीश सक्सेना

Saturday, November 4, 2017

अब आया हूँ दरवाजे पर,तो विदा कराकर जाऊँगा ! - सतीश सक्सेना

आजकल कुछ लोग सोशल मीडिया पर मुहिम चला रहे हैं कि दिल्ली में बढे हुए प्रदूषण की वजह से , सक्षम सैक्लोथॉन एवं एयरटेल दिल्ली हाफ मैराथन को कैंसिल कर दिया जाय ! उनका यह सोंच है कि इससे एथलीट की सेहत पर बहुत बुरा प्रभाव पडेगा !
अफ़सोस यह है कि अक्सर ऎसी मुहिम चलाने वालों को एथलीट की मानसिक और शारीरिक अवस्था के बारे में कुछ भी पता नहीं होता है मगर दिमागी बम चलाने वाले सलाह हर जगह देते हैं !
कल मुझे सक्षम पेडल साइक्लोथॉन के आयोजकों ( Saumjit )द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में जाने का न्योता मिला था जहाँ मुझसे पूंछे गए तमाम प्रश्नों में से एक प्रश्न यह भी था कि 
क्या आप 63 वर्ष की उम्र में, इस प्रदूषण में साइकिल चलाना, अपने स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं मानते  ? 
मेरा जवाब था कि दिल्ली का प्रदूषित वातावरण में किसी भी यूरोपियन अमेरिकन के लिए हानिकारक हो सकता है क्योंकि उनका शरीर प्रदूषण बर्दाश्त नहीं कर सकता और न वे इस वातावरण के लिए अभ्यस्त हैं , हम भारतीय शुरू से इसी वातावरण केआदी हैं और हमारा इम्यून सिस्टम इसके प्रतिरोध के लिए बेहद मजबूत है सो हमारे ऊपर इसका कोई प्रभाव नहीं पडेगा !
और यही प्रश्न कल शाम मेरे मोबाइल पर रेडिओ सिटी से रेडिओ जॉकी नितिन द्वारा अचानक कॉल करके पूंछा गया तो उन्हें भी यही जवाब दिया , कि मैं 63 वर्ष की उम्र में कल 30 किलोमीटर रेस में भाग लूँगा और शान से पूरी भी करूंगा निश्चिन्त रहें मुझे प्रदूषण की कोई चिंता नहीं इसकी चिंता उन आलसियों को है जो मेडिकल बिजनिस की सलाह लेकर विटामिन खा कर अपने को स्वस्थ रखने का दावा करते हैं , मैं अगर दौड़ते दौड़ते मृत्यु को प्राप्त हुआ तब अपने को बेहद सौभाग्य शाली मानूंगा कि मैं अकर्मण्य मौत नहीं मरा !
मुझे दिल्ली सेक्लोथॉन का सबसे यंगेस्ट साइकिलिस्ट का ख़िताब देते हुए नितिन ने मुझे 1000 रूपये का वाउचर देने की घोषणा की जो यकीनन मेरे जैसे नवोदित साइकिलिस्ट के लिए उत्साहवर्धक था !
सो धन्यवाद सक्षम पेडल और रेडिओ सिटी को जिन्होंने मुझे अपनी बात कहने का मौक़ा दिया कि मैं अपनी बात आम जनता को पंहुचा सकूँ !
कल तमाम प्रदूषण की परवाह न करते हुए 30 km अमेच्योर साइकिलिंग में हिस्सा लूंगा और इस विश्वास के साथ लूंगा कि मेरे स्वास्थ्य पर इसका कोई दुष्प्रभाव नहीं पडेगा बल्कि इम्यून सिस्टम और मजबूत होगा !

कुछ वादे करके निकला हूँ अपने दिल की गहराई से
अब आया हूँ दरवाजे पर,तो विदा कराकर जाऊँगा ! - सतीश सक्सेना 
#WillRunADHM , 

Monday, October 30, 2017

दर्द का तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Saturday, October 7, 2017

62 वर्षीय घुटनों से पहला मैराथन दौड़ना -सतीश सक्सेना

दिसम्बर 2014 में केंद्रीय सरकार से एक राजपत्रित अधिकारी पद से रिटायर होते समय मैं अपने कमजोर होते स्वास्थ्य के प्रति चिंतित था ! बढ़िया भोजन से एसिडिटी, मोटापा, बढ़ा हुआ बीपी , एबनॉर्मल हार्ट रेट , कब के जाम हुए खांसते फेफड़े , कब्ज़ और चलते हुए हांफना सामान्य था ! विद्यार्थी जीवन से लेकर शानदार नौकरी से रिटायर होते समय तक शायद ही कभी पसीना बहाया होगा ! एक किलोमीटर दूर जाने के लिए रिक्शा के बिना जाना असम्भव था यहाँ तक कि मॉल में घूमते हुए भी थोड़ी देर में थक जाता था !

ऎसी स्थिति में विधि ने मुझे सुझाव दिया कि पापा ढाई महीने बाद मिलेनियम हाफ मैराथन हो रही है क्यों न आप और मैं उसमें भाग लें , तैयारी के लिए आप 45 मिनट वाक् करते हुए अंत में थोड़ा दौड़ा करिये और आपको धीरे धीरे दौड़ना आ जाएगा और मेरी झिझक के बावजूद उसने अपने साथ मेरा रजिस्ट्रेशन करा दिया !

1नवंबर २०१५ को होने वाली हाफ मैराथन जिसे मशहूर धावक एवं उस समय के आयरन मैन अभिषेक मिश्रा करा रहे थे , की तैयारी शुरू करने से पहले, मैंने अपने ब्लॉग और फेसबुक मित्रों में घोषणा कर दी थी कि मैं हाफ मैराथन दौड़ने जा रहा हूँ ! इससे मैंने अपने आपको मानसिक तौर पर प्रतिबद्ध कर लिया ताकि कमजोर मन आदि कारणों के होते मैं इससे बाहर न निकल पाऊं !

1 नवंबर 2015 को आखिर वह दिन आ गया जब मैं अपने जीवन की पहली दौड़ में भाग रहा था ,मेरा बेटा गौरव मेरी और विधि की हिम्मत बांधने के लिए साइकिल से पूरे रुट पर साथ साथ था जो लगातार हमारी हिम्मत बंधा रहा था !आधा दूरी पार करने में मैंने लगभग 82 मिनट लिए थे , यू टर्न लेते समय मैं अपने आप से कह रहा था यहाँ तक आ तो गए हो अब बापस कैसे जाओगे मगर रास्ते में अपने से कमजोर महिलाओं और पुरुषों को भी दौड़ते देख, हिम्मत आ गयी और जैसे तैसे दौड़ता रहां, आखिरी 5 किलोमीटर मेरे लिए पहाड़ जैसे लग रहे थे , पैर बुरी तरह थक कर ठोस हो रहे थे आखिरी दो किलोमीटर में बेटा बार बार मुझे दौड़ने के लिए कह रहा था जब भी वह मुझे पैदल चलता देखता तो कहता कि बस थोड़ा ही और बचा है ! आखिरी किलोमीटर पर बज रहे नगाड़े मुझे मीलों दूर लग रहे थे मगर बेटे का वहां होना मुझे दौड़ने को लगातार प्रेरित कर रहा था !और आखिर में जब मैंने दौड़ते हुए फिनिश लाइन को पार किया उस समय गौरव साइकिल पर मेरा वीडियो बना रहे थे कि उसके पिता ने 61 वर्ष की उम्र में ३ घंटे से कम समय में हाफ मैराथन पूरी कर ली और उस समय तक मुझे यकीन नहीं हो रहा था कि एक किलोमीटर भी न चलने वाला मैं वाकई ३ घंटे तक लगातार दौड़ चुका हूँ !

जब थके हुए पैरों से लड़खड़ाते हुए घर की सीढिया चढ़ रहा था तो मन एक जबरदस्त आत्म विश्वास से भरा हुआ था कि मैं इस उम्र में भी जवानों के साथ लम्बी दौड़ें, दौड़ सकता हूँ !



Sunday, August 13, 2017

अंगदान दिवस पर लम्बी रनिंग के बाद बेहतरीन न्यूट्रीशियस नाश्ता -सतीश सक्सेना

आज अंगदान दिवस है ,हाल में डॉ अमर नदीम की इच्छा अनुसार उनके निधन के बाद परिवार ने उनके शरीर का दान किया, यह एक सुखद एवं स्वागत योग्य कदम है ! बेहद अफ़सोस की बात है कि इतने बड़े देश में अब  तक देहदान के लिए  500 से भी कम लोग ही उपलब्ध हैं !

मैं लगभग 15 वर्ष पूर्व  अपोलो हॉस्पिटल में किसी मित्र को देखने गया था वहां देहदान की अपील देखकर तुरंत फॉर्म भरा और मरने के बाद अपनी देह एवं समस्त अंग सिर्फ इसलिए दान किये ताकि मेरा शरीर मरने के बाद भी किसी के काम आ सके मुझे याद है उस दिन मैं बेहद खुश था लगा कि आज का दिन सफल हुआ और उसीदिन मैंने हॉस्पिटल में रेगुलर ब्लड डोनर के रूप में भी अपना नाम लिखवा था जबसे अब तक हर बर्ष अनजान व्यक्तियों की कॉल पर भी खून देता रहा हूँ ! 

अपने जन्मदिन पर मैं हमेशा कुछ न कुछ दान करने की नियति से घर से निकलता हूँ कई बार अपनी हैसियत से अधिक भी अनजान लोगों या जरूरत मंदों को देता रहा हूँ और ऐसा करके हमेशा भूला हूँ , क्योंकि दान वही जो बदले की आशा में न दिया जाय अन्यथा उसका उद्देश्य ही निष्फल है !

आज सुबह कोच रविंदर की रनिंग Footloose Run में शामिल हुआ , वंडरफुल आयोजन था आज का , रजिस्ट्रेशन मनी 1700 थी मगर उसके बदले हर प्लेयर को मिजुनो रनिंग जूते ( MRP Rs 3999 /=) टाइमिंग चिप एवं बेहतरीन स्वास्थ्यवर्धक नाश्ता दिया गया ! 
लम्बी दूरी के रनर्स को रनिंग के बाद , फिनिश पॉइंट पर पंहुचने के बाद बुरी तरह एक्सहॉस्टेड शरीर के लिए बेहतरीन और भरपूर नाश्ते की आवश्यकता रहती है और आज की रनिंग के बाद तो खिलाने का जबरदस्त   इंतज़ाम था , क्वैकर के बनाये गए हैल्थी फ़ूड उपमा ,दलिया ,खिचड़ी , साम्भर , इडली ,  के अलावा पाइन एप्पल और ब्लू बेरी योगहर्ट , जूस , एनर्जी ड्रिंक्स , बिस्किट , मेडिकल फैसिलिटी आदि बढ़िया क्वांटिटी में उपलब्द्ध थी ! लगता है इस बार आयोजकों ने दिल खोलकर पिछली सारी शिकायतें थोक में निपटाने का फैसला किया था !
Ref: http://notto.nic.in/

Thursday, August 10, 2017

श्रद्धांजलि डॉ अमर नदीम -सतीश सक्सेना

मोहन श्रोत्रिय की वाल से बेहद दुखद खबर है कि मशहूर शायर डॉ अमर नदीम नहीं रहे ....  

डॉ अमर नदीम एक बेहतरीन संवेदनशील व्यक्तित्व थे उनका अचानक चला जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है , कमजोर ग़रीबों के लिए उठने वाली एक मजबूत आवाज हमेशा के लिए शांत हो गयी , बेहद बुरी खबर  .... 

उनकी एक रचना याद आती है... 

मज़हबी संकीर्णताओं वर्जनाओं के बग़ैर 
हम जिए सारे खुदाओं देवताओं के बग़ैर 

राह में पत्थर भी थे कांटे भी थे पर तेरे साथ 
कट गया अपना सफर भी कहकशाओं के बग़ैर 

श्रद्धांजलि  बड़े भाई, 
आप बहुत याद आएंगे !!

https://puraniyaden.blogspot.in/

http://satish-saxena.blogspot.in/2009/08/blog-post_01.html
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