Friday, September 27, 2013

पंचों से फैसला करा के ,मम्मी पापा बाँट लिए -सतीश सक्सेना

बरसों से झगडा अापस में,अाधा अाधा बाँट लिए !
पंचों से फैसला करा के , मम्मी पापा बाँट लिए !

अम्मा के जेवर तो पहले से ही, गिरवी रक्खे थे !
स्वर्ण फूल दोनों बहनों ने,चुप्पा चुप्पा बाँट लिए !  

एक बार आँखें खोलें तो , हस्ताक्षर करवाना है  !
दादाजी के पूरे जीवन का , अपनापा बाँट लिए !

सब चिंतित थे उनके हिस्से में जाने क्या आयेगा 
अम्मा के मैके से आये,गणपति बप्पा बाँट लिए !

आधे दरवाजे से घुसने, दो फुट जगह ही बाकी है ! 
नज़र बचाने को दादी के हाथ के,थापा बाँट लिए !

39 comments:

  1. वाह क्या बात है-
    काम मिल गया दोनों को ही फिर जिंदड़ी आसान हुई -
    पुन: बुढ़ापा आहें भरता, तन्हाई मेहमान हुई |

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    1. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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  2. खून पसीने से जोड़ा था घर की ईंटों को चुन-चुन
    फीता लेकर आये वो, इंचों में नापा, बाँट दिये

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    1. भई वाह ...
      आपके बारे में यह तो पता ही नहीं था :(
      बहुत प्यारे भाव !!

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    2. यह मेरा दुर्भाग्य ही है जो आपको मेरी कविताई के बारे में पता ही नहीं थ। कभी-कभी आजमा लेता हूँ। दूसरों की अच्छी कविता का रस लेना भी अच्छा लगता है और उसमें कुछ जोड़ना और अच्छा लगता है। फुरसत मिले तो यहाँ देखिएगा-
      http://satyarthmitra.blogspot.in/search/label/%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE

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    3. मुझे वाकई अफ़सोस है :(
      पढता हूँ..

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  3. सुंदर रचना...
    आप की ये रचना आने वाले शनीवार यानी 28 सितंबर 2013 को ब्लौग प्रसारण पर लिंक की जा रही है...आप भी इस प्रसारण में सादर आमंत्रित है... आप इस प्रसारण में शामिल अन्य रचनाओं पर भी अपनी दृष्टि डालें...इस संदर्भ में आप के सुझावों का स्वागत है...

    उजाले उनकी यादों के पर आना... इस ब्लौग पर आप हर रोज कालजयी रचनाएं पढेंगे... आप भी इस ब्लौग का अनुसरण करना।

    आप सब की कविताएं कविता मंच पर आमंत्रित है।
    हम आज भूल रहे हैं अपनी संस्कृति सभ्यता व अपना गौरवमयी इतिहास आप ही लिखिये हमारा अतीत के माध्यम से। ध्यान रहे रचना में किसी धर्म पर कटाक्ष नही होना चाहिये।
    इस के लिये आप को मात्रkuldeepsingpinku@gmail.com पर मिल भेजकर निमंत्रण लिंक प्राप्त करना है।



    मन का मंथन [मेरे विचारों का दर्पण]


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  4. यही दुनिया है सब जगह बंटवारा है
    कहीं रिश्तेदारों का कहीं जर जमीं का

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  5. ma-bap ki khushi chhin
    saare sapne tod diye
    jo jeete the ghar (apnapan)ke khatir
    unse unke ghar chhin liye ..bhawpurn nd marmik ise wahi samajh sakta hai jisne ise jeeya hai ....

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  6. बेहद मार्मिक रचना, हालात कुछ ऐसे ही हैं...

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  7. बहुत ही मार्मिक, शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. सब चिंतित थे उनके हिस्से में जाने क्या आयेगा
    अम्मा के मैके से आये,गणपति बप्पा बाँट लिए !
    शायद गणपति बप्पा सोने के या चांदी के रहे होंगे :)
    आज के हालात पर सटीक रचना है !

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  9. आप की रचनाएँ अगर दिल से कोई पढ़े तो
    संसार में ही सन्यस्त होने का मन करता है !

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  10. चेहरे पर मुस्कान, ह्रदय से गाली देते, अक्सर मीत !
    कौन किसे सम्मानित करता,खूब जानते मेरे गीत !

    good job buddy could not post comments there ,read it here .

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  11. बरसों से झगडा था घर में,आधा आधा बाँट लिए !
    पंचों से फैसला करा के ,मम्मी पापा बाँट लिए !

    अम्मा के जेवर तो पहले से ही, गिरवी रक्खे थे !
    स्वर्ण फूल दोनों बहनों ने,चुप्पा चुप्पा बाँट लिए !

    एक बार आँखें खोलें तो , हस्ताक्षर करवाना है !
    दादा जी के पूरे जीवन का , अपनापा बाँट लिए !

    सब चिंतित थे उनके हिस्से में जाने क्या आयेगा
    अम्मा के मैके से आये,गणपति बप्पा बाँट लिए !

    आधे दरवाजे से घुसने, दो फुट जगह ही बाकी है !
    नज़र बचाने को दादी के हाथ के,थापा बाँट लिए !

    जीव ब्रह्म का हिस्सा भैया नित कहते हैं मेरे गीत ,

    जीव जीव से प्रीत न रखें ,संबंधों की यही है रीत ,

    दादी अम्मा रोज़ बटेंगे सच कहते हैं मेरे गीत।

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  12. काश ..माँ बाप को बांटने की जगह उनके दुःख-दर्द बांटे होते

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  13. भाई ब्रजभूषण श्रीवास्तव जी ...फेसबुक से

    यही हो रहा है पता नहीं पहले भी होता रहा हो। एक दफे थोडी देर के लिये आंखें खोललें बस— वसीयत तैयार है अंगूठा लगवाना है बहुत प्यारी बात। आज की जनरेशन स्वर्णफूल शायद भूल गई होगी बडा पुराना शब्द और पुराना ज़ेवर। अपने अपने हिस्से को लेकर सब बेचैन। बडी सच्ची रचना

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  14. बँटवारे इतने दुखद होते हैं तो ये होते ही क्यूँ हैं

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  15. दो भाईयों पर दो बहनें थी अब एक तुम्हारी एक मेरी
    बांट लिये वार-त्यौहार, छुछक-भाता बांट लिये

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  16. दो भाईयों की दो बहनें थी अब एक तुम्हारी एक मेरी
    बांट लिये तीज-त्यौहार, छुछक-भाता बाटं लिये

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  17. हर बार एक नया पक्ष लेकर आते हैं आप संबंधों के, बहुत सुन्दर।

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  18. जन्म से लेकर मृत्यु तक इंसान न जाने क्यों बिभिन्न सीमाओ में बटता रहता है…सुन्दर

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  19. मॉं सुनाया करती थी
    एक तिल के दाने के
    सात बहनों में बटने
    की कहानी कभी हमें
    एक वो था बंटना
    एक आप ने सुनाई
    बांटा बहुत कुछ
    और बहुत बहुत
    ही बांट लिये !



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  20. मम्मी और पापा ने अपना प्यार जनम भर बांटा था
    हम जाने क्या सीखे उनसे रिश्ते नाते बांट लिये।

    बहुत सच्ची प्रस्तुति झकझोरने वाली।

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  21. महोब्बत बाँटना भूल गए लेकिन :)

    लिखते रहिये ...

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  22. आधे दरवाजे से घुसने, दो फुट जगह ही बाकी है !
    नज़र बचाने को दादी के हाथ के,थापा बाँट लिए !

    क्या बात है ! सुंदर सटीक गजल ! बधाई

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  23. बंटवारे को लेकर रची एक सुन्दर रचना |

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  24. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 29/09/2013 को
    क्या बदला?
    - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः25
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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  25. बंटवारा हर ओर :-(

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  26. जब दिल बंट गए ,भावनाएं बंट गयी,तो अब बाकी सब का भी बंटवारा करने से क्या गुरेज,बहुत ही मार्मिक प्रस्तुति,सतीश जी आभार.

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  27. bantavare ke baad bhi kya hath kuchh aaya?? khoobsurat rachna ..

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  28. बरसों से झगडा था घर में,आधा आधा बाँट लिए !
    पंचों से फैसला करा के ,मम्मी पापा बाँट लिए !

    अम्मा के जेवर तो पहले से ही, गिरवी रक्खे थे !
    स्वर्ण फूल दोनों बहनों ने,चुप्पा चुप्पा बाँट लिए !

    एक बार आँखें खोलें तो , हस्ताक्षर करवाना है !
    दादा जी के पूरे जीवन का , अपनापा बाँट लिए !

    सब चिंतित थे उनके हिस्से में जाने क्या आयेगा
    अम्मा के मैके से आये,गणपति बप्पा बाँट लिए !

    आधे दरवाजे से घुसने, दो फुट जगह ही बाकी है !
    नज़र बचाने को दादी के हाथ के,थापा बाँट लिए !

    बहुत सुन्दर रचना सक्सेना साहब -एक हिदायत यह भी -

    जीव ब्रह्म का हिस्सा भैया नित कहते हैं मेरे गीत ,

    जीव जीव से प्रीत न रख्खे ,संबंधों की यही है रीत ,

    दादी अम्मा रोज़ बटेंगे सच कहते हैं मेरे गीत।

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  29. यही दुनिया की रीत--अरजना कम बाँटना ज्यादा --काश!प्यार,एहसास बाँट पाते।

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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