आतंकवाद और धर्म पर मतीन अहमद कहते हैं -
" इस मज़हब (इस्लाम) में आदेश दिया गया है कि कोई पिता बाहर अन्य बच्चों के साथ खेलते हुए बच्चे को बेटा कहकर आवाज़ न दे बल्कि उसका नाम लेकर बुलाये क्योंकि उन बच्चों में अगर कोई बिना बाप का बच्चा है तो उसका दिल न दुखे कि काश आज कोई मुझे भी बेटा कहने वाला होता !
कोई भी सच्चा मुसलमान किसी का दिल दुखाने का काम नहीं कर सकता सवाल सिर्फ नफरत फैलाने वालों की पहचान का है, फिर वे चाहे किसी कौम के हों ! "




