Wednesday, February 17, 2010

क्या आपने कभी किसी बेसहारा की मदद की है ??

35 वर्षीय प्रवेश झा, अनपढ़ पत्नी और दो बच्चों का पिता, जिसे अक्टूबर २००९ में ही बिकानो प्राइवेट लिमिटेड, लारेंस रोड दिल्ली में ३५००.०० प्रति माह पर नौकरी मिली थी , नयी नौकरी की खुशियाँ दो माह ही मना पाया था कि सिरदर्द की बीमारी का कारण एक खतरनाक 4th स्टेज कैंसर (Glioblostoma )बताया गया, और इस गरीब की सारी खुशियाँ, सारे सपने इस महानगर में की चकाचौंध में बुझ गए हैं ! 
मेरे  एक मित्र ने जब इस असहाय परिवार के बारे में बताया दो दिल हिल गया ! फिर एक बार भगवान् से अपने लिए शक्ति मांग रहा हूँ कि इसकी मदद के लायक बना अगर इस रोती लडकी और दो छोटे बच्चों की आंख का एक आंसू भी पोंछ सका तो मैं अपने आपको अच्छा आदमी मान पाऊंगा !
प्रवेश झा की मदद के लिए पता दे रहा हूँ ...
प्रवेश झा 
C/o Bal Kishan Tanwar
wz 408, Basai Dara pur
Near Kirti Nagar , New Delhi-110015
Ph: 9999864887,9555323916, 9334269989
or 
Satish Saxena 
9811076451 
पुनश्च : इस पोस्ट के प्रकाशित होने के तुरंत बाद  प्रवेश झा के भाई से फ़ोन पर बात होने पर प्रवेश झा के निधन का समाचार मिला  है और इसके साथ ही एक लडकी और उसके दो बच्चे बेसहारा हो गए ....! 



     

Thursday, February 11, 2010

ब्लाग जगत में चलता हुआ एक अघोषित युद्ध - सतीश सक्सेना


ब्लाग जगत में आज कल एक अघोषित युद्ध सा छिड़ा लगता है ,अपना अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए, इस  लड़ाई का अंत क्या होगा कुछ नहीं मालूम मगर हम जैसे निर्गुट मेंबर क्या करें यह समझ नहीं आता ! जो अंदाज़ा हुआ है उसके अनुसार एक तरफ एक मस्त मौला  और फक्कड़ सा इंसान , जिस पर लगातार होते वार देख कर मैं  कभी विस्मित सा होता था और हैरान होता था कि क्या सहनशक्ति पायी है इस भले आदमी नें  और दूसरी तरफ एक बढ़िया दिल  वाला शानदार व्यक्तित्व जिसने बिना किसी  उद्देश्य सैकड़ों नवोदित लडखडाते ब्लागर्स को सहारा दिया और उनकी हिम्मत अफजाई की ! निस्संदेह ये सबके सम्मान के अधिकारी हैं  ! 

आश्चर्य है कि यह ब्लाग जगत ऐसा किसको क्या दे रहा है कि सृजन शीलता छोड़ इनके अनुयायियों ने अपने अपने सेनानायक बनाकर, एक दूसरे के खिलाफ हल्ला बोल रखा है और अगर  जल्द स्थिति न सुलझी तो बात गाली गलोग से भी आगे, अनुयायिओं में  मारपीट तक भी पहुँच सकती है ! और अफ़सोस है कि अधिकतर अनुयायी जवान  प्रतिभाशाली लड़के हैं जिनके दिल में आग भरने का कार्य  कुछ वरिष्ठ मगर पिटे हुए ब्लागर, कर रहे हैं ! 

प्रतिभाशाली नयी पौध को आगे बढ़ाने की जगह उनमें द्वेष भावना विकसित करने का यह प्रयास सर्वाधिक निंदनीय है और जो भी इसके प्रायोजक हैं उनकी भर्त्सना होनी ही चाहिए  ! हिन्दी के उत्थान के नाम पर यह लोग एक जहरीली फसल बोने का कार्य कर रहे हैं जिससे इस भाषा की खुशबू,बढ़ने के वजाय कम ही होगी ! 
मैं उम्मीद करता हूँ  कि कुछ जानकार लोग सामने आकर इस समस्या से अवगत कराने में सार्थक भूमिका अदा करेंगे ! 

ब्लाग जगत कि क्रियायों प्रतिक्रियाओं से, लगातार नियमित संपर्क न रखने के कारण, किंकर्तव्यविमूढ़  सा महसूस कर रहा हूँ  ! आजकल यही नहीं समझ पा रहा हूँ कि मैं जिन्हें बहुत अच्छा रचनाकार और सृजन शील समझ रहा हूँ किस गैंग  के मेम्बर हैं  ! ऐसा लगता है कि जमूरों को अपने से अधिक भीड़ इकट्ठी करते देख मदारी अपना आपा खो रहे हैं !  

Monday, February 8, 2010

दिल्ली ब्लागर मिलन में फोटोग्राफर श्री एम् वर्मा एवं डॉ टी एस दराल ! - सतीश सक्सेना

हंसते चेहरे वाले संजू राजीव तनेजा  माहौल को लगातार खुशगवार बनाये रहे , खुशदीप सहगल का एक  प्रयोग, पोस्ट टाइटिल के साथ अपना नाम लिखना बहुत पसंद आया और धन्यवाद के साथ अपना रहा हूँ !    
पूरी व्यवस्था के दौरान फोटोग्राफी का दायित्व संभाले रहे डॉ टी एस दराल एवं बाद में शामिल होने वाले जज्वाती एम् वर्मा जी तथा युगक्रांति  वाले यशवंत मेहता !! अगर यह महानुभाव अपना कैमरा न लाते तो शायद सबको भली भांति जानने का मौका इतनी आसानी से न मिलता ! पंडित डी के शर्मा "वत्स" अधिकतर शांत स्वभाव  से वक्ताओं को सुनने में ही मग्न रहे !   
"अपनी भाषा संयत हो" पर बोलने बालों में से मेरा ध्यान पद्म सिंह ने सिर्फ एक वाक्य बोल कर ही आकर्षित कर लिया कि इसमें नवजवानों से अधिक भागीदारी बड़ी उम्र के ब्लागर की भी है ! संयत भाषा का उपयोग दोनों ही उम्र के लोग करें तभी शोभा देता है ! स्पष्टवादिता और आत्मविश्वास से भरे इस युवक की ऑंखें बहुत कुछ कहती हैं ...  और नवजवानों में भावुक मिथिलेश दुबे  नीशू  और मुसाफिर से लगने वाले नवजवान नीरज जाट  एवं श्री बी पी सिंह बिना अधिक बोले भी प्रसंशा हासिल करने में कामयाब रहे !


सबसे शांत स्वभाव में बैठे सुनते रहे राज भाटिया सबको , मैंने काफी पहले राज के बारे में कुछ लिखा था ! प्रवासी जीवन जीते हुए भारतीयों का दर्द और अपनी मिटटी से अलग होने का गम कभी महसूस करना हो तो राज भाटिया को पढ़ें . पराया देश में बैठे राज, अपने पुराने संस्कारों को ढूँढ़ते रहते हैं ! प्रवासियों में राज का ब्लाग पराया देश  अपने आप में अनूठा है  !   


अंत में चलते चलते अजय कुमार झा के बारे में , सिर्फ एक बार फ़ोन पर बातचीत करने से ही महसूस हुआ कि एक अच्छे इंसान से मुलाकात होगी ! और यह इंसान वैसा ही मिला ! अजय गहरी सोच समझ, प्रतिभाशाली और हिन्दी ब्लाग जगत को बहुत आगे ले जाने का माद्दा रखने वाले ,जीवट के ब्लागर हैं ! मेरी हार्दिक शुभकामनायें !  

दिल्ली ब्लागर मिलन में राज भाटिया ,खुशदीप के साथ विनीत कुमार को सुनना !-सतीश सक्सेना


                 मैं अगर अपनी पसंद की बात कहूं तो शांत राज भाटिया और अविनाश वाचस्पति के साथ बैठ कर विनीत कुमार को सुनना, सुखकर और आनंद दायक लगा, टीवी मिडिया जैसे विषय पर गहरी पकड़, स्पष्ट अभिव्यक्ति और आत्मविश्वास, उनकी प्रतिभा को, अन्य लोगों से साफ़ साफ़ अलग कर रही थी !

               मुझे लगता है कि आने वाले समय में विनीत अपनी विशिष्ट जगह बनाने में कामयाब होंगे ! इससे पूर्व, मुझे इनके किसी भी लेख को, पढने का सौभाग्य नहीं मिला था !

खुशदीप सहगल, समाज और हिंदी ब्लाग को बहुत कुछ देंगे, ऐसा मेरा विश्वास है , उनके निष्छल मन को समझ पाना किसी के लिए भी आसान है !

चिकित्सा क्षेत्र के लोग साहित्य,समाज :-) और कला से कम ही वास्ता रखते हैं , मगर अपने व्यस्त समय को भूल , फक्कड़ों और मस्तमौलों के बीच ,पूरी रूचि के और मुस्कान के साथ डॉ टी एस दराल लगातार सबको बांधे रहे ! उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र के बारे में अपने कुछ अमूल्य नुस्खे ब्लॉग जगत को देते रहने का वायदा किया है !

एक बेहतरीन दिल के मालिक विनोद पाण्डेय से पहली बार मिलने पर ऐसा नहीं लगा कि इन्हें पहले से नहीं जनता हूँ , इतनी गहरी आत्मीयता ईश्वर बहुत कम लोगों को ही देते हैं !
क्रमश .....

Sunday, February 7, 2010

दिल्ली ब्लागर मिलन - एक सुखद मुलाकात -1

आज की सुखद मुलाकात के लिए सबसे पहले धन्यवाद अजय कुमार झा को देना चाहता हूँ , जिनके कारण मैं पहली बार कुछ बेहतरीन शख्शियतों से आमने सामने परिचित हो सका !इस बैठक से पहले मन में एक संकोच और कुछ शंकाएं थी, जो इस हंसमुख और सुदर्शन व्यक्तित्व से मिलते ही समाप्त हो गयीं ! वहाँ उपस्थित कुछ साथियों से, मैं पहले से ही परिचित था मगर कुछ से पहली बार मुलाकात हुई, !
                                                    डॉ कविता वाचक्नवी  से यहाँ मिलना एक सुखद आश्चर्य जैसा ही रहा, उनसे मिलने के  लिए आज मैं आजाद भवन सभागार, इन्द्रप्रस्थ एस्टेट जाना चाहता था, जहाँ उन्हें उनके कार्य के लिए "अक्षरम सूचना प्रोद्योगिकी सम्मान" दिया जाना था ! इसके अतिरिक्त ८ वें  अन्तराष्ट्रीय हिंदी उत्सव में वे वेब पत्रकारिता पर  उनको वक्ता के रूप में सुनने की मेरी बेहद इच्छा भी थी ! हिंदी की सेवा में समर्पित, ब्रिटेन में बसी इस विद्वान महिला का इस ब्लागर मिलन में शामिल होना मेरी नज़र में, गौरव का विषय है ! अपने संक्षिप्त भाषण में उन्होंने तथाकथित भारतीय संस्कारों के नाम पर हो रही दकियानूसी सोच से बाहर निकालने का आवाहन किया !


सरवत एम् जमाल साहब जैसी संवेदनशील प्रतिभा का भी दिल्ली में मिलने का मैं सोच भी नहीं सकता, बेहद खूबसूरत दिल के मालिक सरवत जमाल साहब अपनी धर्मपत्नी अलका मिश्रा के आदेश पर श्री राज भाटिया को कुछ आयुर्वेदिक दिशा निर्देशन देने हेतु लखनऊ से यहाँ पहुंचे थे ! अलका जी जडी बूटियों पर अपने ज्ञान को हिन्दी जगत में बाँट रहीं हैं , और इस तरह यह दोनों पति पत्नी ग़ज़ल और आयुर्वेद के क्षेत्र में बहुत निस्संदेह सराहनीय कार्य कर रहे हैं !


मसिजीवी और अविनाश वाचस्पति जैसे हिंदी ब्लाग जगत के समर्पित लोगों से ऐसे आयोजनों पर मिलना किसी भी हिंदी प्रेमी के लिए सौभाग्य से कम क्या होगा ! अविनाश वाचस्पति और अजय कुमार झा ने बार बार अनुरोध किये जाने पर भी, किसी भी प्रकार की वित्तीय सहायता लेने हेतु विनम्रता से मना कर देना आज के समय में चर्चा का विषय हो सकता है !३०-३५ लोगों के भोजन की व्यवस्था और चायपान करवाना दिल्ली शहर में आसान बात नहीं है !


....क्रमश:





   

Friday, January 29, 2010

अमन की आशा !!

                            "अमन की आशा" टाइम्स ऑफ़ इंडिया और जंग (Pakistan )द्वारा उठाया गया एक बेहद मीठा और स्वागत योग्य कदम है ! आज के बेहद कडवे माहौल में, जब दोनों देशों में सिर्फ एक दूसरे के प्रति मारने काटने की बातें ही हवा में हो रही हों, कट्टरता के मध्य अमन की आशा बहुत हिम्मत वाला और अलोकप्रिय कदम है ! एक व्यावसायिक संस्थान ने लाखों लोगों की मधुर आशाओं को जगाने के लिए, एक अव्यवसायिक और खर्चीला कदम उठाया है , मैं तहे दिल से शुभकामनायें दे रहा हूँ ! 
इसके प्रणेता देश के स्थापित शांति पुरस्कार के वास्तविक हकदार हैं ! 
भगवान् इस पुनीत कार्य में टाइम्स ऑफ़ इंडिया की मदद करें !
दुबारा शुभकामनायें !!

Saturday, January 23, 2010

दिखावे की हमारी दुनियाँ में, धीरे धीरे दम तोड़ते ये लेखक और कलाकार !!


शानदार लेखनी के धनी, शहरोज के  एक मार्मिक लेख   "जिंदादिल इंसान और उम्दा लेख़क का जाना " ने आज सुबह सुबह हिला कर रख दिया , बहुत दिनों के बाद फिर एक मार्मिक विषय मिला  कुछ कहने के लिए ! हम लोगों के लिए , समाज के लिए, बेहतर सृजन करते ये कलाकार और लेख़क ,आर्थिक अभाव में अक्सर बेहद कमज़ोर  होते हैं ! शानदार सोच और महान विचारक, ये लोग अक्सर  मुफलिसी, भुकमरी और गरीबी न झेल पाने के कारण, असमय दम तोड़ते देखे जा सकते हैं और हम लोग ,इस महान देश के  अच्छे नागरिक , इन्हें अपनी श्रद्धांजलि  अर्पित कर अपने कर्त्तव्य की  इतिश्री कर लेते हैं !


शहरोज की डायरी में वर्णित यह घटना बरसों पुरानी है , मगर वर्षों बाद आज भी  लेख़क,प्रकाशन वर्ग से जुड़े लोगों की  स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है बल्कि स्थिति बद से बदतर होती जा रही है ! असंगठित वर्ग  की सुधि लेने के लिए सरकार अथवा समाज ने कुछ  नहीं किया  ! दुनिया और समाज की आँखें खोलने में लगे,  इन लोगों की निजी जिन्दगी बेहद कष्टदायक है ,और हम समर्थवान लोगों का मामूली सहयोग भी इनके बच्चों की आँखों में सुनहरे सपने पैदा कर सकता है ! 


यहाँ लेख़क और पाठकों में  एक से एक दिग्गज मौजूद हैं , जिनकी एक मामूली पहल से इन मुसीबतज़दा लोगों को राहत मिल सकती है ! मगर वास्तविक पहल कोई नहीं करता ...बिलकुल सच है कि...
"साहिल के तमाशाई  ! हर  डूबने  वाले पर ,
अफ़सोस तो करते हैं ,इमदाद नहीं  करते !!"


मगर शहरोज भाई ! उम्मीद ना छोड़ें , आज नहीं तो कल वह  समय भी आएगा जब लोग पछतायेंगे अपने निकम्मे पन पर , खुदा के घर देर है अंधेर नहीं है !!  

Saturday, January 9, 2010

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता ! बोलिए, किस को सावधान करें !

इस तरफ आदमी, उधर कुत्ता ! बोलिए, किस को सावधान करें!
सर्वत एम् जमाल के दिल से निकली यह लाइनें पढ़ कर बहुत देर तक सोचता रह गया, निस्संदेह आदमी बेहद खतरनाक है इस मासूम कुत्ते के आगे ! एक अपनी वफादारी के लिए और दूसरा अपनी

गद्दारी के लिए सारे विश्व के जीवों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किये हुए हैं ! शायद यही एक जीव ऐसा है जो कि
आदमी के जूठे टुकड़े, और गाली खाकर भी अपने मालिक की रक्षा करते हुए अपनी जान की परवाह नहीं करता ! विश्व में अपने मालिक अथवा मालिक के बच्चों की रक्षा करते हुए अपनी जान देने के हजारों उदाहरण देखे जा सकते हैं मगर अपने इस वफादार जीव की रक्षा में किसी आदमी ने अपनी जान दी हो , ऐसा एक भी उदाहरण नहीं सुना गया ! 
प्यार और स्नेह के भूखे इस जीव को, प्यार और स्नेह का नाटक करने वाले आदमी ने हमेशा धोखा देकर अपनी सेवा करने के लिए पालतू बनाया ! हम इंसानों में बहुत कम लोग ऐसे हैं जो इसकी आँखों में झाँक कर, इसमें बसे अपने प्रति, मूक प्यार को पढने का प्रयत्न करें ! इस गूंगे जीव में आदमी के प्रति बहुत प्यार और ममत्व होता है वहीं हम इंसान, इसके निष्छल प्यार के प्रति बेहद अहसानफरामोश होते हैं !

Saturday, December 19, 2009

घर से बहुत दूर, संघर्षरत एक लडकी के लिए एक ख़त !!


प्यारी प्यारी अप्पू !

आज सुबह सुबह जब तुमने नींद से उठाकर यह सुखद समाचार सुनाया तो वाकई आँखे नम हो गयी ! ख़ुशी इस लिए नहीं कि तूने एक टोयोटा करोला खरीद ली है बल्कि इसलिए कि काफी समय पहले, हम से दूर चली गयी, एक दुबली पतली लडकी इस लायक हो गयी है कि वह एक बड़ा फैसला ले सके ! शाबाश बच्चे मुझे तुमसे यह उम्मीद थी कि तुम एक दिन अपने सारे लक्ष्य अवश्य प्राप्त करोगी ! 
पता है इसका राज क्या है ......???

इस दुबले पतले कमजोर से शरीर और आधी अंधी ( अब नहीं :-) ) लडकी में गज़ब की हिम्मत है, लोगों द्वारा धक्का देने पर ,गिर पड़ने  पर खूब सुबक सुबक कर रोती है, और थोड़ी देर में आंसू पोंछ कर, फिर खड़ी होकर,
चल पड़ती है ....

एक बात याद रखना , यह निर्दयी दुनिया हंस कर कुछ नहीं देती , तुम्हे इसे बताना पड़ेगा कि तुम बहुत मजबूत हो , तुम्हे लोग हर कदम पर तंग करेंगे तुम्हारे दिल को दुखायेंगे ...और अगर तुम्हे कमजोर होते देखा तो विश्वास करो वे एक धक्का और देंगे ...कमज़ोर की कोई इज्ज़त नहीं बच्चे ...कभी मदद को हाथ नहीं फैलाना ... कोई नहीं देगा ! सिर्फ तुम्हारी आत्मिक शक्ति ही काम आयेगी !
ईश्वर की एक प्रार्थना भेज रहा हूँ , जब थक जाओ  या उदास हुआ करो  तो इसे सुना करो ....
एक और इच्छा है हमारी बिनू को, ऐसा एक लड़का पसंद करे, जो उसके सुन्दर दिल को पहचान सके ....उम्मीद है कि तुझे जानने बाला लड़का तुझे अवश्य बहुत शीघ्र मिलेगा ! मेरा दिल से आशीर्वाद है !

अच्युतम केशवम कृष्ण दामोदरंम
राम नारायणंम जानकी बल्लभम....

Friday, November 20, 2009

धन्य है वह देश जिसने इस परिवार को जन्म दिया !


तीसरा खम्बा पर ओकील साहब ने एक सामयिक और बहुत अच्छा लेख लिखा है जिसमें हाल में ऑस्ट्रेलिया में हुए भारतीयों पर हमले के सन्दर्भ में तीन बीस वर्षीय आस्ट्रेलियाई दोषियों को लम्बी सजाएं सुनाई गयी हैं ! निस्संदेह हर भारतीय को सुन कर बहुत अच्छा लगा होगा कि परदेश में हमारे साथ की गयी क्रूरता के लिए, उसी देश के कोर्ट ने, अपने ही लोगों के खिलाफ, उदाहरण देने योग्य न्याय दिया !  


हमारे देश में २२ जनवरी १९९९ को ग्राहम स्टेंस (५८ )और उनके दो मासूम बच्चे फिलिप( ११ ) और टिमोथी (८ वर्षीय ) जो कि अपनी वैन में सो रहे थे कुछ लोगों ने जला कर जघन्यतम हत्या कर दी थी ! यह ऑस्ट्रेलियन परिवार उडीसा के जंगलों में  पिछले ३० सालों से रहकर  आदिवासी कुष्ठ रोगियों की सेवा कर रहा था ! पूरे परिवार की इस जघन्य हत्या के बावजूद इनकी विधवा ग्लैडिस स्टेंस ने इस अपराध के लिए दोषियों को माफ़ कर दिया , और शेष जीवन में अकेले ही यह कार्य करते रहने की अपनी दृढ इच्छा प्रकट की है  !  
.
"यद्यपि  अपने पति के साथ की कमी और अपने बच्चों को बड़े होते देखने की कमी उन्हें हमेशा खलेगी तब भी उन्हें हत्यारों से कोई शिकायत नहीं है  !


दोषियों के लिए उनका कहना है ..


"हमें माफ़ करना सीखना चाहिए , मुझे कोई कडवाहट नहीं है और अगर कडवाहट नहीं हो तो उम्मीद जगती है , सांत्वना  ईश्वर से मिलती ही है  ! विश्व के लोगों से मेरी प्रार्थना है कि आशा न छोड़ें  और इस देश ( भारत ) के लिए प्रार्थना करें  ! 


अशिक्षित,छुआछूत और धर्मांध  लोगों के बीच  सेवा कार्य करते हुए  ग्राहम स्टेंस की इस विधवा के लिए शुभकामनायें  और ईश्वर से प्रार्थना कि इनकी रक्षा  करें ! 


धन्य है वह देश जिसने इस परिवार को जन्म दिया  !

Friday, November 6, 2009

हमारे अपने ...

                              हमारे अपने जो उँगलियों पर गिनने लायक ही होते हैं, कहते हैं कि अगर अपना दिल दुखाना हो तो उनके प्यार और अपनापन के बारे में जरा सोच कर देखें, थोडी देर में ही नींद उड़ जायेगी उनके प्यार और ममता में जो विरोधाभास दिखाई पड़ेंगे, उसके अहसास मात्र से आप सो नहीं पायेंगे !
                               मैं अक्सर अपनों से कहता रहा हूँ कि अपनों के प्यार पर कभी शक न करें और अगर अधिक प्यार से मन भर गया हो तो केवल कुछ क्षण अपने आत्मीय जनों की कमिया याद करके देखें यह नकारात्मक सोच के कुछ क्षण ही आपको अपनों से बरसों दूर ले जायेंगे !
                             संक्रमण काल से गुज़रते हुए लगता है कि अपनों के प्रति अधिक संवेदनशील होता जा रहा हूँ, पूरे जीवन अपने कष्टों के बारे में कभी सोचने ही नहीं बैठा , केवल इन अपनों के कष्टों की चिंता रही ! अपना अकेलापन याद न आये इसलिए सारे जहान के कष्टों को दूर करने के लिए अविराम अपने आपको व्यस्त रखा ! और अब जब अपने कार्यों या अकार्यों पर अपनों की उठी उंगली देखता हूँ तो एक टीस सी महसूस होती है, लगता है कि पूरे जीवन कुछ किया ही नहीं ! अपने किये गए कार्यों और निष्छल प्यार का स्पष्टीकरण देने की ,अपनों की अपेक्षा महसूस करने से ही, दुनिया के लिए बेहद मज़बूत  इस दिल की आँखों में आंसू आ जाते हैं !
                               अक्सर हमें दो तरह के प्यारों के बीच रहना पड़ता है , एक जो वाकई अपने हैं जो आपको बहुत प्यार करते हैं , जिनके कारण ही जीवन में मधुरता और रस बना रहता है , दूसरे वे जिनके साथ जीना हमारी नियति है , प्यार का दिखावा करते ऐसे प्यारे अक्सर देखे जाते हैं !
                               जब अपनी पूरी ईमानदारी से किये गए कार्यों की समीक्षा, दूषित,स्वार्थी और असम्वेदन शील "अपनों " के द्वारा करते हुए देखता हूँ तो मन एक अनचाही वित्रष्णा से भर जाता है ! मगर फिर अपने मन को समझाने लगता हूँ कि अगर  इनसे दूर होता हूँ तो इनका अपना कौन है ... क्या होगा इनका ? ईश्वर ने मुझे इनके जहर को सहने की शक्ति दी है और  साथ ही इन्हें सुरक्षा देने का दायित्व भी  ! अगर मैं  इनकी मदद नहीं करूंगा तो  इनका और कौन है  ? और अगर यह  मुझे  नहीं काटेंगे तो किसे काटेंगे ? बेहतर है कि यह जहर मैं ही सहन करुँ क्योंकि मुझे ईश्वर ने इसे सहने की शक्ति दी  है  ! ईश्वर ने इन्हें  मुझे दिया है  कि इनको हंसते हुए झेलो और इनको मैं  मिला हूँ  जिस पर  रत्ती भर विश्वास न होते हुए भी इन्हें मित्रता निभानी पड़ रही है !   

Wednesday, October 14, 2009

कहीं आपकी पीठ पर किसी और का नाम तो नहीं !!

                              कुछ समय पहले एक महिला ब्लागर ने किसी बात पर क्षुब्द्ध होकर कहा था कि मैंने हिंदी ब्लाग लिखना इसी लिए बंदकर दिया कि यहाँ पर लोग एक दूसरे पर बिना बात कीचड उछालते हैं ! उस समय अतिरंजित लगने वाली यह बात आज मुझे काफी प्रभावशाली लगती है ! आज लगता है ब्लाग रुपी चौपाल पर बैठ, हम सब ज्ञानी लोग यह मौका ढूँढ़ते रहते हैं कि कब नए अज्ञानी ( ज्ञानी )का मज़ाक उड़ाने का मौका मिले, और हम लगे हाथों उसकी हजामत बनाने में शामिल हों !
                 एक समय यह देख कर अजीब लगता था  कि चौपाल पर बैठे कुछ लोग मेरे सादर नमन (कमेंट्स ) का जवाब देना भी पसंद नहीं करते जबकि मेरा नमन उनकी  लेखन शैली के प्रति श्रद्धा मात्र और प्रणाम सिर्फ उनसे कुछ सीखने की इच्छा हेतु उनका ध्यान आकर्षित करने का एक साधन , मगर  दूर रहने का कारण सिर्फ  उनके ग्रुप धारणा का मेरी सोच  का विरोधी होना था !
               कुछ समय बाद समझ आया कि अधिकतर लोग  किसी न किसी ग्रुप के सदस्य मात्र हैं और ९० प्रतिशत भीड़ की पीठ पर किसी न किसी नेता या नेत्री (महान ब्लागर ) का नाम लिखा हुआ है , और यह महान ब्लागर , अपने ग्रुप सदस्यों  को, किसी का भी अपमान करने और नीचा दिखने के लिए,  शाबाशी देने के साथ साथ, पूरा उत्साह वर्धन करने के लिए विभिन्न आयोजन भी करते हैं ! सबसे अधिक दुखदायी तथ्य यह है,कि अच्छी लेखनी से  धनी कुछ योग्य लेख़क भी इनका नाम अपनी पीठ पर लिख कर न केवल गौरव समझते हैं बल्कि  इनके इशारे मात्र से किसी का भी अपमान करने के लिए तैयार रहते हैं !
कुछ समय पहले ब्लाग जगत पर मजाक में कुछ पंक्तियाँ लिखी थीं , जो आज सच लगने लगी हैं ....


कुछ मनमौजी थे, छेड़ गए ! 
कुछ कलम छोड़ कर भाग गए
कुछ संत पुरूष भी पतित हुए
कुछ अपना भेष बदल बैठे , 
कुछ मार्ग प्रदर्शक, भाग लिए 
कुछ मुंह काले करवा आए, 
यह हिम्मत उन लोगों की है,जो दम सेवा का भरते हैं !!
कुछ ऋषी मुनी भी मुस्कानों के, आगे घुटने टेक गए !  
कुछ यहाँ शिखन्डी भी आए 
तलवार चलाते हाथों से, 
कुछ धन संचय में रमे हुए, 
वरदान शारदा से लेते !, 
कुछ पायल,कंगन,झूमर के
गुणगान सुनाते झूम रहे , 
मैं कहाँ आ गया, क्या करने,दिग्भ्रमित बहुत हो जाता हूँ ! 
अरमान लिए आए थे हम , अब अपनी राहें भूल चले !
                                कुछ यहाँ बगुला भगत भी  हैं ,जो  प्रत्यक्ष में  ईश पूजा में लगे रहते हैं मगर रात होते ही अन्य नामों से बनाये गए अपने ब्लाग पर जाकर लोगों को भरपूर गलियां देकर जहर उगलते हैं ! इनकी पहचान करना आसान नहीं है , समय के साथ ही उन्हें पहचाना जा सकता है ! मैं  जिन्हें सिद्ध पुरुष समझता था वे  अक्सर आवरण हटने पर मात्र गिद्ध पुरुष  पाए गए !
                                 मैं भी सोचता हूँ कि ऐसे लोगों को ढूँढने का प्रयत्न करुँ, जिनकी पीठ पर किसी का हाथ न हो, किसी का नाम न हों, उनका एक ग्रुप बनाया जाये , जो किसी की अवमानना न करें , चाहें कोई अच्छा लिखे या बुरा सबकी तारीफ करते हुए उसे प्रोत्साहित करे , समाज या धर्मं कोई हो हम सब उसको पढें और सराहें ! अपने धर्म के साथ साथ जैन, बौद्ध , ईसाइयत, सिख और इस्लाम  के बारे में श्रद्धा पूर्वक जानने की इच्छा रखें  और  उनको अपने से अधिक सम्मान दें  !
ऐसा  करते हुए मुझे अपने हिन्दू और हिन्दुस्तानी होने पर हमेशा गर्व होता है !

Saturday, October 3, 2009

ब्यूटीफुल रिनी की एक झलक !

सोचा था कि आज की पोस्ट कुछ अलग हट कर हो , अचानक ध्यान 2 वर्षीया रिनी की ओर चला गया, जो अपने आप में सारे घर का ध्यान आकर्षित किये रहती है , अपने बारे में उसका  कहना है कि "रिनी ब्यूटीफुल हैं" और सारा घर और उसे जानने वाले यह मानने पर मजबूर भी हैं कि रिनी ब्यूटीफुल हैं ! 
आशा है आप लोग भी इस मासूम सुन्दरता को पसंद करेंगे !

दो वर्षीया इस बच्ची को अपना ही  अंदाज़ है , और  साडी पहन कर चलने और बात करने का अंदाज़  देख कर  श्रष्टि रचयिता के प्रति अनायास ही  धन्यवाद देने का दिल करता है !  

इन्ही  का  एक अन्य फोटो मेरे डेस्क टॉप  पर लगा है , जिसकी  निष्छल मुस्कान देखकर सारे दिन की थकान गायब हो जाती है ! काश  हम बड़े लोग भी ऐसी मुस्कान लोगों को दे सकें  !

Tuesday, September 29, 2009

ब्लाग वाणी की वापसी का स्वागत है !

"स्वाँतः सुखाय लिखने का दम भरने वाले पसँद की परवाह ही क्यों करें ?"  यह शब्द डॉ अमर कुमार के हैं  बहुत सार गर्भित और अच्छे लगे ! 


                   सवाल यह है, हम किस लिए लिखते हैं  , अपने सम्मान को बढ़ाने के लिए ? तारीफ़ पाने के लिए ?अगर ऐसा है तो क्या हमारे सोचने से, या जगह  जगह जाकर,  सुर्खियों में बने रहने से   सम्मान मिल पायेगा  ? मुझे लगता  है इससे सिर्फ  लोगों को आपके अस्तित्व का पता लग सकता है , वास्तविक सम्मान  सिर्फ तब ही संभव है जब लोग  आपकी बात पर यकीन करें , जब लोगों को आपके लिखे के प्रति आदर  हो . और उसके लिए आपको शायद बरसों तक  चुपचाप अपना कार्य करना पड़े  !


हम लोग अक्सर किसी अच्छे व्यक्ति का दिल  दुखा कर बाद में अपनी बात पर कायम करने के लिए क्या क्या नहीं करते , मगर सबके  मध्य  अपनी भूल का अहसास कैसे करें  ? वाकई समस्या है  ! स्वान्तः सुखायः लिखने का  दावा  करने वालों को अपने यश और तारीफ़ से क्या लेना , अगर अच्छा लिख रहे हो तो लोग आपसे बिना कुछ चाहे, आयेंगे  और आपको सम्मान देंगे , और लोग  वाकई में ज्ञानी हैं , समय के साथ सबको पता लग जायेगा  !


प्रार्थना  यही है कि अगर हम किसी की तारीफ न कर सकें  तो किसी के किये पर , बिना उसे समझे, अपने ज्ञान का  कचरा न फेंके ! 

Monday, September 21, 2009

ईद का मतलब -सतीश सक्सेना


आज पूरे देश में ईद मनाई जा रही है, रमदान के पवित्र माह में अल्लाह का नाम लेते हुए, और कोई भूल न हो इसकी दुआ मानते हुए, आज खुशियाँ मनाने और गले मिलने का दिन आता है ! यकीन करें आज के दिन का इंतज़ार पूरे साल उन्हें भी रहता है जो आपस में शिकवे शिकायत लेकर रंजिश पाले रहते हैं मगर मन में कहीं न कहीं यह इच्छा रहती है कि ईद के बहाने गले मिल कर यह रंजिशें ख़त्म कर लेंगे ! और अक्सर यह खुशफहमियां सच भी होती हैं, शायद पवित्र मौकों पर ईश्वर भी सहारा देते हैं !
मगर पुनर्मिलन की यह खुशियाँ पहल करने पर ही मिलती हैं, और एक शैतान हमें अपनों से मिलने को रोकता है और वो शैतान है हमारा अहम् या ईगो जो कहता है कि अपने खून के रिश्तों या दोस्तों के दरवाजे पर पहले हम क्यों जाएँ पहले वो क्यों न आयें हमारे दरवाजे पर ! और दोनों तरफ की यह सोच हमारे प्यारों को कभी गले मिल कर रोने नहीं देती ! खुल कर रोने का जी चाहता है मगर यह शैतान हमें रोने भी नहीं देता !   
इस खास माह पर यह हिदायत दी गयी है कि पुरानी गलतियों की ईश्वर से माफ़ी मांगते हुए अब हम आपस में अपनों के साथ मिलकर खुशियाँ मनाएंगे साथ साथ अपने घमंड को भूल कर अपने गिले शिकवे दूर करें ! आज के दिन दुआ करें कि टूटते परिवार आपस में गले मिलें, दिल से रंजिश मिटाकर वाकई अपने बचपन के दिनों में लौटने की कोशिश करें, पुराने प्यार और उन दिनों की खुशियों को याद करने की कोशिश करें, एक दूसरे की अच्छाइयों को याद करने और गुस्से में कहीं कड़वी बातों को भुलाने से आज का दिन वाकई पूरे जीवन को खुशियों से भर देगा !
काश लोग ईद ( खुशियों का त्यौहार ) का अर्थ समझ सकें, तो अपने बिछडों से मिलने की इच्छा से ही बहुत से मासूमों के चेहरे पर रौनक आ जायेगी !और ईश्वर की दी हुई हिदायतों का वास्तविक पालन होगा ! 
अंत में मेरा एक पसंदीदा शेर ( नामालूम शायर ) नज़र है ..
"बदगुमानी आपस में देर तक नहीं रखना  
रंजिशें मिटाने को एक सलाम काफी है !!"
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