Wednesday, April 13, 2022

विवाह गीत -सतीश सक्सेना

जिससे रिश्ता जुड़ा था 
जनम जन्म से  
द्वार पर आ गए , 
आज  बारात ले !
उनके आने से, सब 
खुश नुमा हो गया !
नाच गानों से , घर भी चहक सा गया !

पर यह आँखें मेरी, 
संग नहीं दे रहीं 
हँसते हँसते न जाने 
छलक क्यों रहीं  ?
आज बेटी   चलीं, 
अपना दर छोड़कर
घर नया चुन लिया अपना घर छोड़कर !

आज माता पिता 
भाई बहना सभी 
कर रहे स्वागतें 
इक नयी आस में !
जाओ बहना सजाओ 
नया आशियाँ !
हम सभी की शुभाशीष है साथ में !

रचनी होगी तुम्हें , 
विश्व सर्वोत्तमा 
एक हंसती कलाकृति
 हमारे लिए !
हाथ फैलाये हंसती 
कृति विश्व की 
ऎसी  सौगात देना , हमारे लिए  !


Saturday, February 26, 2022

बंदरों के हाथ में , परमाणु बम है -सतीश सक्सेना

1991 में, यू एस एस आर का विघटन एक ऐतिहासिक घटना थी जिसने इस विशाल विश्व शक्ति को 15 देशों में विभाजित कर दिया , अर्मेनिया , अजरबैजान , बेलारूस , ऐस्टोनिआ , जॉर्जिया , कज़ाख़िस्तान करिगिस्तान ,लैटविआ , लिथुआनिया ,माल्दोवा, रूस ,तज़ाकिस्तान , तुर्कमिनिस्तान , उक्रैन  और उज़्बेकिस्तान और इस घटना की जिम्मेवारी तत्कालीन राष्ट्रपति गोर्वाचेव की बनायी
नीतियां रहीं जिनके द्वारा उन्होंने इस महान कम्युनिस्ट शासन के हर राज्य को लोकतान्त्रिक तरीके से अपना निर्णय खुद लेने की 
आज़ादी दी गयी थी और जिसके फलस्वरूप यह विशाल संयुक्त देश 15 देशो में बंट गया जिसमें सबसे बड़ा राज्य रूस भी शामिल था , लिबरल गोर्बाचेव ने इस्तीफा दिया और समस्त न्यूक्लियर हथियारों के साथ रूस की कमान रूढ़िवादियों के हाथ आ गयी !

और तब से लेकर अब तक इन नव विभाजित देशों में अपनी रक्षा के प्रति संशय भावना जुडी रही , वे रूस और उसकी विचारधारा से बचने के लिए शक्तिशाली नाटो देशो के समूह में शामिल होना चाहते थे और इन देशों में उक्रैन सबसे आगे था और रूस के लिए ऐसा होने का अर्थ, अपनी सीमाओं को नाटो देशों से मिलाना था जिसे वह अपने लिए सीधा ख़तरा मानता आया है , वह नहीं चाहता कि  उसके दरवाजे पर नाटो देश दस्तक दें अपनी नाराजी और रुख उसने उक्रेन को सीधी वार्निंग देते हुए साफ़ कर दिया कि अगर वह नाटो में शामिल होता है तब मुकाबले के लिए तैयार रहे स्वाभाविक है उक्रैन ने इसे नकार दिया और नाटो देशों ने उक्रैन का साथ भी दिया !

इन दिनों रूस ने उक्रैन पर सैनिक आक्रमण कर दिया है और शायद किसी भी समय उक्रैन आत्मसमर्पण करने को मजबूर होगा वह अपने से सैकड़ों गुना शक्तिशाली रूस के आगे कुछ दिन भी टिक पायेगा इसमें शक है !

मगर इसी परिप्रेक्ष्य में रूस और नाटो की तरफ से जो वक्तव्य दिए जा रहे हैं वे विश्व के समझदार हिस्से के लिए चिंतित करने के लिए काफी है ! नाटो का कहना है कि किसी देश की सम्प्रभुता की रक्षा होनी चाहिए जिसमें उसे अपनी रक्षा हेतु समझौते अपनी इच्छानुसार करने की स्वतंत्रता है इसका आदर होना चाहिए ! मगर रूस ने उक्रैन की तरह ही फ़िनलैंड और स्वीडन को भी राजनैतिक एवं सैनिक परिणाम भुगतने को तैयार रहने के लिए वार्निंग दी है कि वे नाटो में शामिल होने की न सोचें और रूस अपने विचारों में इतना दृढप्रतिज्ञ  है कि उसने अमेरिका और नाटो जॉइंट कमांड की सभी चेतावनियों पर कोई ध्यान भी नहीं दिया ! दूसरी तरफ स्वीडन और फ़िनलैंड के इरादे नाटो में बिना शामिल हुए उसकी सुरक्षापंक्ति में शामिल होने के विकल्प तलाशना है जिसे रूस स्वीकार नहीं करता ! 

यूनाइटेड नेशंस एक ऐसा बौना दफ्तर है जिसे पता है कि हमारे हाथ में कुछ नहीं है , जिसके बाबुओं ने हमारे देश से सीख लिया है कि आठ घंटे की ड्यूटी करनी है जिसमें लंच ऑवर एक घंटे पहले और एक घंटे बाद तक होना है ! दफ्तर आते समय और जाते समय की चाय और पकौड़ी आवश्यक पहले से ही हैं ! बिना किसी झंझट के मोटी तनख्वाह जेब में डालो और चलो भइया घरै !

वीटो पावर के आगे सुरक्षा परिषद मात्र अपील कर पाने की क्षमता रखती है यह सिर्फ उस देश को बचा पाती है जब समस्त वीटो पावर देश एकमत हों अन्यथा उसका कोई अर्थ नहीं !

रूस ने समुद्र में न्यूक्लियर एक्सरसाइज शुरू कर दी है जिसमें हाइपरसोनिक एवं क्रूज़ मिसाइल का उपयोग शामिल है ! इस प्रकार की हर एक मिसाइल एक या अधिक न्यूक्लियर वारहेड से युक्त हो सकती हैं तथा इनके चलने के साथ, इन्हें रोकने का कोई विकल्प विश्व में किसी के पास नहीं है , क्योंकि इन्हें रोकने के लिए दागी गयी एंटी मिसाइल भी इन्हें एक एटॉमिक बम में ही तब्दील करेगी !

इस मध्य विश्व का ध्यान नार्थ कोरिया , चीन , और पाकिस्तान की और है कि यह किसका पक्ष लेंगे ! हमारे देश पर दोनों की निगाह रहेगी कि हम अपनी स्थिति स्पष्ट करें जो बेहद संवेदनशील है ! पूरे विश्व की नज़रें इस समय चीन भारत इज़रायल ईरान नार्थ कोरिया और पाकिस्तान पर टिकी हैं , फिलहाल चीन और भारत ने सुरक्षापरिषद की वोटिंग से अनुपस्थिति रहना ही पसंद किया है और अपना निरपेक्ष रहना ही उचित माना है !

Friday, February 4, 2022

67 वर्ष में मेरे कायाकल्प हेतु सफल जीवन मंत्र -सतीश सक्सेना

-मन और देह को इतना खुश रखना कि कष्टों को याद करने का समय ही न बचे
-दिन में धूप और रात में नींद का आनंद लेना
-जब भी भूख लगे प्राकृतिक जल पीना
-हाथ पैरों को क्रियाशील बनाये रखना, गौर करें कि यह हिलाने के लिए ही बनाये गए हैं ताकि शारीरिक मशीन बेहतरीन काम करते हुए सौ वर्ष तक आराम से चले ! प्रयोग के लिए केवल तीन दिन तक मुट्ठी रूमाल से बाँध कर रखें और फिर खोल दें आपको अपनी उँगलियों के जोड़ खोलने के लिए एक महीने तक उनकी एक्सरसाइज करनी पड़ेगी !
-और सबसे कम प्राथमिकता भोजन को दें, दिन में लगभग 12 बजे सिर्फ उतना घर का बना साधारण भोजन खाएं जितना पूरे दिन में श्रम किया हो अगर दिन में कुछ काम न किया हो तो उस दिन भोजन का निर्ममता से त्याग करें ! केवल मेहनत कश लोगों के शरीर को शाम के भोजन की आवश्यकता होती है !

Tuesday, January 11, 2022

वजन घटाने का सफल संकल्प कैसे किया करें -सतीश सक्सेना

सैकड़ों बार प्रयत्न कर चुकी / चुका हूँ मगर वजन टस से मस नहीं होता, हताश हो चुकी हूँ / निराश हूँ क्या करूँ समझ नहीं आता ? 
2014 से पहले 

यही प्रश्न है उन सबके मन में, जो जूझ रहे हैं हाई बीपी से, हृदय आघात के खतरे से , डायबिटीज से , कॉन्स्टिपेशन से , आलस्य और कथित वृद्धावस्था से जिसका कोई अस्तित्व ही नहीं होना चाहिए ! उम्र बढ़ने ( 80 के आसपास ) के साथ क्षीण होते शरीर को बचाने का एक मात्र तरीका शारीरिक और मानसिक क्रियाकलाप जारी रखना ही होगा जिसके होते अवसाद , निराशा पास भी नहीं फटकेंगे और एक दिन शांत अवस्था में सोते हुए प्राण जाएंगे ! यही सिद्ध अवस्था माननी चाहिए हम सबको जो देर सबेर सबको आनी चाहिए और सहर्ष स्वीकार्य भी होगी !

सबसे पहले मुझे बताएं क्या आप अपने आपको आमूलचूल बदलने को तैयार हैं तभी तो शरीर बदलेगा अन्यथा व्यर्थ प्रयत्न न करके जैसा है उसे स्वीकार करें और गाना गायें  ...हवन करेंगे हवन करेंगे !आपको मोटापा खराब इसलिए नहीं लगता है कि वह आपको
2012 में 
 अंदर से बर्बाद कर रहा है बल्कि इसलिए लगता है क्योंकि वह आपकी सुंदरता खराब कर रहा है और आप लोगों की नजर में सुंदर दिखना चाहते हैं , यह दिखावा बंद करना होगा ! किसी बच्चे की मुस्कान को गौर से देखें वह नेचुरल है इसीलिए खूबसूरत है !

अगर आप  इसके लिए तैयार हैं तब सबसे पहले अपने उस्ताद मन को बदलना होगा , हर तरह के दिखावे से चाहे वह समाज के प्रति हो या परिवार और दोस्तों के प्रति , अपनी घटिया आदतें जिन्हे आप छिपाते आये हैं को सबके सम्मुख करना सीखना होगा अथवा निर्ममता और ईमानदारी के साथ छोड़ना होगा , एक बार ईमानदारी आते ही मन आपके साथ गहराई से जुड़ेगा और आंतरिक मानवीय रक्षा शक्ति को मजबूत करने को प्रतिबद्ध होगा और यह शरीर सही दिशा में काम करना शुरू करेगा !
before retirement 

खुद को मजबूत दिखाए रखने के आवरण को हटाना होगा उसके लिए मन में गहराई से बैठे मृत्यु भय को मारना होगा एवं उन्मुक्त होकर स्वच्छ मन जो भी कहे करना होगा , रोज नए दिन को आखिरी दिन की तरह जीना सीखना होगा उन्मुक्त मस्त हंसी आते ही मोटापा और बीमारी पास भी नहीं आएगी दोस्त बस बिना समाज भय के सबके मध्य खुद को ठट्ठा मारकर बच्चों की तरह हंसाना, नाचना कैसे है यह नए सिरे से सीखना होगा ! जवान होने की प्रबल इच्छाशक्ति आपसे भीष्म प्रतिज्ञा करवा लेगी और पूरा भी करवाएगी !   
 
म सम्मानित लोग अक्सर अपने ऊपर कोई कठोर फैसला लागू ही नहीं होने देते क्योंकि हम खुद ही नियम बनाने वाले हैं और अक्सर यह नियम दूसरों पर लागू करवाते हैं ! वजन घटाने का फैसला आसान नहीं है क्योंकि बरसों से मेहनत न करने , और जम के बढ़िया भोजन की आदत छोड़ना, भीष्म प्रतिज्ञा जैसा है जो खुद पर लागू ही नहीं करना क्योंकि हम किसी के प्रति जवाब देह नहीं है !
 
हम लोग अक्सर अपने द्वारा किये गए संकल्प भुला देते हैं क्योंकि उसके लिए जवाब हमें खुद को ही तो देना है और इसमें शर्मिंदगी
और कायाकल्प के बाद 2019 

नहीं होती ! अगर हमने अपने बारे में लिया गया कोई संकल्प समाज में जोरदार तरीके से घोषित किया होता तब उसे भुलाने से पहले कई बार सोचना पड़ता सो इस संकल्प की घोषणा 
समाज में खुद के प्रति निर्मम होकर करें , कहें कि आपका वजन इस उम्र में ९० किलो है और इसे 65 किलो लाने के लिए आप आज से कसम खा कर संकल्प लेते /लेती हैं कि अगले दिनों में आप अपने आलसी शरीर पर यह अत्याचार करेंगे / करेंगी जिससे वह अपनी काहिली भुला सके ! शान से बिना शर्मिन्दा हुए अपनी मूर्खता और संकल्प की घोषणा करें, इसके बाद या तो सारी कलई उतर जायेगी या आपको उसे लगातार बचाने का प्रयत्न करते हुए वजन घटाना आ जाएगा जैसा मैंने खुद अपने साथ किया था !

मैंने अपने 61 वर्षीय (ईयर 2015 )आलसी शरीर जिसने पूरे जीवन दौड़ना छोड़िये कभी पार्क में वाक भी नहीं किया था और जिसे घर
2020 
,ऑफिस और कार में एयर कंडीशन सुविधा प्राप्त थी , को सुधारने के लिए घोषणा की थी कि मैं आज से तीन माह बाद 21 Km हाफ मैराथन दौड़ कर पूरा करूँगा और यह घोषणा फेसबुक और तमाम मित्रों परिवार जनों के बीच तब की थी जब मैं दो मंजिल सीढियाँ चढ़ते समय हांफता था और अपने पूरे जीवन में कभी भी 10 मीटर तक नहीं दौड़ा था और अपने ऑफिस और मित्रों में लीडर की भूमिका में था बेहद सम्मानित भी था !

मुझे याद है कि उसके अगले दिन पार्क में मैंने अपना पहला वाक ४५ मिनट का किया था था जिसका आखिरी मिनट जैसे तैसे धीरे धीरे दौड़कर ख़त्म किया था और यह क्रम फिर कभी बंद नहीं हुआ पहला हाफ मैराथन जैसे तैसे ही सही मगर 3 घंटे से कम समय में पूरा करने में कामयाब हुआ था ! आज मुझे कोई बीमारी नहीं , कहाँ गायब हुई यह भी नहीं पता बस शरीर को मेहनत करना सिखा दिया अब आखिरी दिन जब चाहे आये परवाह नहीं !


थुलथुल शरीर से मुक्ति चाहिए तो सोच बदलनी होगी -सतीश सक्सेना

क्या आपने एक भी ऐसे मेहनतकश मजदूर को देखा है जो शरीर से थुलथुल हो , तोंद निकाले हुए बोझा ढो रहा हो अथवा फावड़ा चला रहा हो ! कभी सदर बाजार या अपने शहर की व्यस्त मार्किट में जाएँ वहां आपको हाथ गाड़ी में , अपने शरीर के वजन से 10 गुना सामान लादकर खींचते हुए मेहनतकश मिलेंगे जिनके शरीर से पसीना टपक रहा होगा आप देखेंगे कि जब यह इंसान दोपहर में लंच करने के लिए मैले कपडे में बंधी 4 मोटी रोटियां निकाल, बाजार से 10 रूपये के छोले खरीद कर खाने बैठता है तब आपके मन में कोई विचार खुद को सुधारने के नहीं आते , तब यह लेख आपके लिए नहीं है !

आप भले यकीन न करें मगर अपने रिटायरमेंट के बाद (साठ वर्ष बाद ) मैंने अपने कायाकल्प करने के संकल्प में जिस व्यक्ति को गुरु बनाया वह मेरे मोहल्ले में घर के सामने बरसों से खड़ा होता एक अनपढ़ रिक्शावाला है जो पूरे दिन दो महिलाओं / पुरुषों  को बैठा कर कम से कम 3 से 5 km के , 20 चक्कर रोज लगाता है ! मैं हैरान था कि यह मैला कुचैला, बढाए गंदे बालों वाला इंसान , एक दिन में 120 किलो वजन को लेकर 5 किलोमीटर कैसे आता जाता होगा ! अगर 10 घंटों में यह 20 चक्कर भी लगता है तब इसका अर्थ हुआ कि पूरे दिन में इस दुबले पतले इंसान ने 80 km का सफर , कम से कम 100 kg वजन खींचते हुए किया है , यह जानकारी हतप्रभ करने के काफी थी मेरे लिए !

मैंने उससे उसका भोजन पूछा कि कितने अंडे और दूध ,फल रोज खाते हो भाई तो उसने अपना खाने का डब्बा दिखाया जिसमें चार मोटी रोटियां , आलू की सूखी सब्जी और प्याज था ! यह उसका लंच था , रात को घर जाकर दाल रोटी खायेगा, अंडा और दूध और डॉक्टर उसके बजट में ही नहीं थे , थोड़ा दूध घर में लाता है अपने बच्चों के लिए बस , बुखार उखार आने पर लेटना पड़ता है दो तीन दिन में ठीक हो जाने पर फिर काम पर ! जबकि हमारे ज्ञान के अनुसार अगर मैं मेहनत या एक्सरसाइज करता हूँ तब मुझे पौष्टिक खाना मिलना ही चाहिए अन्यथा शरीर बेकार और बीमार हो जाएगा जबकि यह रिक्शे वाला बीस बरसों से यही कर रहा है और सारी जमा पूँजी अपने गाँव माता पिता के पास भेजता है !

थुलथुल शरीर आपके थुलथुल मन का भी परिचायक है इस पर मनन करके देखिये सो अगर थुलथुल काया से मुक्ति चाहते हैं तो खुद को बदलना होगा  ! उन्मुक्त होकर बोलना और हंसना सीखना होगा बिना किसी की परवाह और दिखावा किये कि कोई क्या कहेगा , आप अपनी भावनाओं को बिना दबाये खुलकर व्यक्त करना सीखिए और यह आप तभी कर पाएंगे जब आप दूसरों के प्रति और खुद के लिए ईमानदार होंगे बिना किसी दिखावे के !

दुनिया की हर उस चीज आनंद लेना शुरू करें जिसके लिए मन हुआ और खर्चे या लोगों के कारण उस इच्छा को कही दबा दिया इसमें हर तरह का खाना पीना जो घर में संभव नहीं, शामिल होगा एवं वह सब काम करें जिसके बारे में सुना है, मगर कर नहीं पाए, ढेरों कारणों के कारण, मन मसोस कर रह गए , खुद को एन्जॉय करना सीखें, बिना किसी दिखावे के गर्व रहित प्यार करें खुद को और शरीर को अपना मित्र बनाएं उससे बातें करें उसपर विश्वास करें वह आपको कभी धोखा नहीं देगा ! प्रसन्न मन आपकी इच्छाशक्ति को अदम्य बनाने में समर्थ है ! जी भर कर हंसना सीखें और इसके लिए कंपनी तलाशें ,पार्क में भीड़ में खड़े होकर हो हो करते हुए बनावटी हंसी आपको जोकर बनाने में ही समर्थ होगी इसका रंच मात्र भी फायदा नहीं !

मेडिकल अथवा अन्य विज्ञापनों से प्रभावित न हों हमेशा यह ध्यान रखें कि विज्ञापनों का सुझाव मानने पर अगर आपको खर्च करना पड़ रहा है तो यह सुझाव सफल है उनके व्यवसाय के लिए और आप असफल !
  1. केवल पांच चीजों का ध्यान रखें गहरी साँस लेकर शुद्ध हवा अंदर खींचना शुरू करें, पूरे फेफड़े खोलने का अभ्यास करें महसूस करें कि यह सामान्य सांस नहीं बल्कि प्राणवायु है जो समूचे रक्तप्रवाह को स्वच्छ करती है हृदय की थकान को दूर करते हुए , बेहतर गतिशील बनाती है ! 
  2. दिन भर में 4 लीटर स्वच्छ पानी , खासतौर पर भूख लगने पर पहले पानी ही पियें ! RO ( रिवर्स ओस्मोसिस ) जल से आवश्यक मिनरल्स निकाल देता है यह हानिकारक है ! कोशिश प्राकृतिक शुद्ध पानी लेने की रहे !
  3. टॉनिक ,विटामिन , प्रोटीन भूलकर कोई भी सामान्य भोजन करें कोशिश रहे कि भोजन परिश्रम करने के बाद ही खाएं और मेहनत के अनुसार ही खाएं अगर पूरे दिन कुछ नहीं किया है तब भोजन न करें अथवा न्यूनतम करें !
  4. कम से कम आधा दिन हाथ पैरों का उतनी मेहनत के साथ चलना आवश्यक है जिससे पसीना बहना शुरू हो जाए अगर आप मेहनतकश नहीं हैं तब वाक करना आरम्भ करें इसमें गति, दूरी , समय आदि में बदलाव लाते रहें ! लगातार एकसार किया गया वाक बेकार हो जाता है क्योंकि शरीर इसे स्वीकार कर अपने नियम में ढाल लेता है ! सो इसमें परिवर्तन करें साथ ही यह अकेले करना चाहिए मनन करते हुए शरीर से बात करते हुए न कि दोस्तों के साथ गप्पे मारते हुए !
  5. भरपूर नींद लें , नींद न आने का कारण आप खुद और आपके लगातार घुमड़ते विचार होते हैं , अपने मन से चालाकी, क्रोध  और समझदारी का त्याग करें बच्चों जैसा निर्मल मन लेकर सोने जाएँ एक दिन तकिये पर सर रखते ही नींद आएगी !
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Monday, January 10, 2022

तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा -सतीश सक्सेना

 आज बहुत दिन बाद 10 Km की दौड़ लगाईं , मगर इसकी विशेषता यह थी कि यह रनिंग 0 डिग्री टेम्प्रेचर में आसमान से होती, स्नो शावर के दौरान, जर्मनी की एक खूबसूरत झील के किनारे किनारे लगाईं गयी ! 67 वर्ष की उम्र में यह काम मेरे जैसे आलसी के लिए एक अजूबा ही था , मगर हो गया आसानी से !

हालांकि इस कड़ाके की ठण्ड में , दौड़ते समय कुछ जगह ऑक्सीजन की कमी महसूस अवश्य हुई , पहली बार हार्ट रेट ने 210 को भी छुआ और इनर पसीने में पूरी तरह भीग गए थे मगर खुद को टेस्ट करना भी जरूरी था सो कर लिया ! मुझे लगता है कि साठ के बाद हमें मृत्यु का भय मन से निकाल देना चाहिए , मृत्यु भय हमें बूढ़ा बनाने में सबसे बड़ा रोल निभाता है ,

-यही भय है कि बढ़ती उम्र में भगवान् सबसे अधिक याद आते हैं उन्हें भी जिन्होंने पूरे जीवन में कभी भगवान को याद न किया हो !

-यही भय है जिसके कारण हम जीवन भर मेहनत कर धन जोड़ते रहते हैं और हजारो मौकों पर अपने मन को खुश करने हेतु किये गए खर्चों में कटौती करते रहते हैं , कि अगर बीमारी के समय धन न हुआ तब क्या करेंगे जबकि यह सोच ही नहीं पाते कि आजतक मौत से, कोई डॉ, किसी को भी बचाने में सफल नहीं हुआ अन्यथा अमेरिकन प्रेजिडेंट से ताकतवर विश्व में

कोई नहीं मगर वे सब अपने सामान्य वर्ष ही जी पाए , कितने ही सिरफिरों के उदाहरण हैं जिन्होंने मृत्यु से बचने और अधिक उम्र पाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये मगर वे कम उम्र में ही दुनिया छोड़ गए !

-मेडिकल व्यवसाय का पूरा वृक्ष हमारे शरीर पर खड़ा है , उसे इतने समय में कुछ ही जानकारी हासिल हो पायी है अन्यथा आधुनिक मेडिकल साइंस केवल शैशवावस्था में ही है यह खुद मेडिकल साइंटिस्ट मानते हैं , वे मानव मस्तिष्क संरचना के बारे में सर्वथा अनभिज्ञ है जो मानव को सौ वर्ष तक चलाता है और तमाम बीमारियों से उसकी रक्षा करने में समर्थ है !

-आँखे खोलें , आपका शरीर इस योग्य है कि बिना किसी सपोर्ट के पूरे वर्ष शान से जी सके सिर्फ अपना भरोसा बनाये रखें और

इसकी आवश्यक खुराक शुद्ध हवा , भरपूर स्वच्छ पानी , मामूली भोजन , थकान के बाद की भरपूर नींद एवं पैरों का भरपूर उपयोग करें आप पूरे जीवन वृद्धावस्था से बचे रहेंगे !

सादर प्रणाम आप सबको !

बढ़ी उम्र में , कुछ समझना तो होगा !
तुम्हें जानेमन अब बदलना तो होगा !

उठो त्याग आलस , झुकाओ न नजरें
भले मन ही मन,पर सुधरना तो होगा !

अगर सुस्त मन दौड़ न भी सके तब
शुरुआत में कुछ ,टहलना तो होगा !

यही है समय ,छोड़ आसन सुखों का
स्वयं स्वस्त्ययन काल रचना तो होगा !

असंभव नहीं , मानवी कौम में कुछ ?
सनम दौड़ में,गिर संभलना तो होगा !

Monday, November 1, 2021

परीक्षा मानव शक्ति की -सतीश सक्सेना

आज लगातार दौड़ते हुए सौवाँ दिन था , इस बार अपनी शक्ति और सामर्थ्य की खुद परीक्षा लेनी थी , भरोसा था पिछले छह वर्षों की सतत
मेहनत और अपने ऊपर विश्वास का जिसके कारण यह एग्जाम पास किया इसमें आप सब मित्रों का प्रोत्साहन और साथ शामिल था , उसके लिए आप सबको प्रणाम !

इन सौ दिनों में तमाम अनुभव हुए, साठ बार 21 km या अधिक दौड़ना और दो बार लगातार 10 दिन तक रोज हाफ मैराथन (21 Km) दौड़ा , रोज लगभग 3 से चार घंटे दौड़ने के कारण वजन बेहद तेजी से घटा और अधिक पौष्टिक भोजन लेने का ध्यान नहीं रखने के कारण दो या तीन बार रुकने पर, चक्कर आते प्रतीत हुए तब यह अहसास हुआ कि इतना अधिक पसीना ( लगभग 3 लीटर रोज ) बहने से शरीर से आवश्यक साल्ट्स सोडियम, कैल्सियम, मैग्निसियम की कमी काफी हुई है और इसका नतीजा जीवन में पहली बार कमजोरी महसूस हुई अतः अगले दिनों नियमित खाना छोड़ 3 कोर्स मील्स लेना शुरू कर दिया , इससे धीरे धीरे सामान्य महसूस करने लगा और सौ दिन पूरे हुए , फायदा यह हुआ है कि 20 km लगातार दौड़ने पर भी पैरों में थकान का नाम नहीं है ! पिछले सौ दिन में 1849 km दौड़ा हूँ एवं पूरे विश्व में दौड़ते 13073 लोगों में मेरा रैंक 68 रहा , यह मेरे लिए भी अविश्वसनीय है , भरोसा नहीं होता कि मैं 67 वर्ष की उम्र में लगातार 100 दिन तक रोज 19 km दौड़ पाया हूँ !

कई बार घुटने में दर्द कमर दर्द हार्ट पल्पिटेशन आदि ने परेशान अवश्य किया मगर भय और चिंता को कभी खुद पर हॉवी नहीं होने दिया , और नतीजा आनंददायक मिला ! शरीर का सारा अनावश्यक फैट गायब और न थकने वाली अथाह शक्ति , और जवानी किसे कहते हैं, इसका अहसास और आखिरकार मैंने कायाकल्प कर दिखाया ! यहाँ लिखने का उद्देश्य सिर्फ अपने हम उम्र साथियों को विश्वास दिलाना मात्र है कि मानव शरीर पर भरोसा न छोड़ें वह बेहद शक्तिशाली है !

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
दर्द सारे ही भुलाकर, हिमालय से हृदय में
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !
जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से हृदय में
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Saturday, September 25, 2021

पता नहीं क्यों खाते पीते, ज्ञान की बातें, होती हैं -सतीश सक्सेना

डी पी एस ग्रेटर नॉएडा के, एक क्षात्र, रानू , जो कि, पढने लिखने में बहुत अच्छे होने के साथ साथ, खाने पीने में, भी मस्त हैं, के मन की बातें यहाँ दे रहा हूँ ! जब भी हम सब साथ साथ , खाने पर एक साथ बैठते तो बच्चों से उनके भविष्य की चर्चा तथा क्लास में उनकी पोजीशन की चर्चा जरूर होती ! स्वादिष्ट खाने के समय , पढाई की चर्चा , उनके मुहं का टेस्ट बदलने के लिए काफ़ी होती है ! 

मन को काबू कर अंग्रेजी 
ग्रामर लेकर , बैठा हूँ  !
जैसे तैसे रसगुल्लों से , 
ध्यान हटाए , बैठा हूँ !
मगर ध्यान में बार बार, 
ही आतिशबाजी होती है !
अलजब्रा के ही खिलाफ  
क्यों नारे बाजी होती है !
नाना,पापा की बातें सुन ,
नींद सी आने लगती है !
इतने बढ़िया मौसम में,एक्जाम की बातें,होती हैं !


समझ नहीं आते बच्चों के 
कष्ट , समस्याएं भारी !
पढ़ते, अक्षर नजर न आएं 
दिखे किचन की अलमारी ! 
टीवी पर कार्टून, यहाँ 
भूगोल की बाते होती हैं 
खाने पीने के मौसम मे, 
दुःख की बातें, होती हैं !
ग्रेट खली,इंग्लिश ग्रामर, 
में हर दम कुश्ती होती है !
जाने क्यों घर में हर मौके,क्लास की बातें होती हैं ?

फीस बढ़ा ले भले प्रिंसिपल 
पर बच्चों की क्लासों में !
चॉकलेट लडडू फ्री होंगे 
आने वाले , सालों में !
कठिन गणित का प्रश्न क्लास
में, मैडम जब समझाती हैं !
उसी समय क्यों याद हमारे,
मीठी बातें , आती हैं  !
बिना जलेबी और समोसा 
कैसे मन भी पढ़ पाए
सारे अक्षर गड्मड होते , खाली आंतें रोती  हैं !

हाथ में बल्ला लेकर जब मैं
याद सचिन को करता हूँ,
ध्यान लगा के उस हीरो का 
सीधा छक्का जड़ता हूँ !
मगर हमेशा अगले पल
ये खुशियां भी खो जाती हैं !
पता नहीं ,  जब  ध्यान 
हमारे कृष्णा मैडम आतीं हैं !
ऐसे मस्ती के मौके, क्यों  
याद सजा की आती है !
अक्सर घर में खाते पीते, ज्ञान  की बातें, होती हैं !

Tuesday, August 31, 2021

कौन मनाये जन्माष्टमी, कृष्ण कन्हैया चला गया -सतीश सक्सेना

कौन मनाये जन्माष्टमी, किशन हमारा चला गया !
16 Feb 1968 -25 August 2021 
सबका हाथ बटाते मोहक आँखों वाला चला गया !

इतने लोगों के रहते भी , कैसी किस्मत पायी थी,
बहिनों के रक्षाबंधन पर, सबसे प्यारा चला गया ! 

सबकी कड़वी बातें सुनकर एक शब्द न कहता था
सबको रोता छोड़ अकेला राज दुलारा चला गया ! 

राजकुमारों जैसा बचपन , लेकर किस्मत पायी थी   
चुपके से घरबार छोड़कर आँख का तारा चला गया !

जहाँ बैठता रौनक लाता था हर शख्श के चेहरे पर
रोता छोड़ अँधेरे सबको , इक ध्रुव तारा चला गया !

Saturday, July 17, 2021

जकड़े घुटने पकड़ के बैठा , ढूंढ रहा उपचार आदमी -सतीश सक्सेना

दौड़ते समय घुटनों को नुकसान न पहुँचने पाए इसके लिए कृपया बताइए कि क्या करना चाहिए? मेरे एक मित्र संजय त्रिपाठी का इस प्रश्न का जवाब लगभग हर पोस्ट में देने का प्रयत्न करता हूँ ! #healthblunders लिंक पर मेरे वे लेख दुबारा ध्यान से पढ़ेंगे तो जवाब स्पष्ट मिलेगा , संक्षिप्त में कहूं तो घुटने में नुकसान केवल उन्हें होता है जो घुटनों को बहुत जतन से संभाल कर रखते हैं या बहुत दुरूपयोग करते हैं , घुटने हों या शरीर के अन्य अंग प्रकृति ने उन्हें उपयोग के लिए ही बनाया है , उनका भरपूर उपयोग होना चाहिए अगर नहीं किया है तब जॉइंट जकड जाएंगे ! सो शुरू करें उन्हें प्यार से चलना सिखाना वे आपको सौ वर्षों तक साथ देंगे !

आज से एक रनिंग प्रोग्राम ज्वाइन किया है जिसमें अगले ३० दिनों में कम से कम 194.7 km दौड़ना या साइकिलिंग करना होगा  ! कोच रविंदर सिंह का यह प्रोग्राम बाँध कर रखेगा मुझे एक माह तक लगभग रोज 7 km दौड़ना होगा या साइकिलिंग करना है मगर हर हाल में  195 km पूरे करने होंगे और निस्संदेह 66+ वर्ष के नौजवान के लिए यह बिलकुल मुश्किल नहीं है !

सो आज पहले दिन काफी दिन से खड़ी साईकिल राइडिंग के लिए उसका हेलमेट , हैंड ग्लव्स , शार्ट , रेफ्लेक्टेड जर्सी , फ़्लैश लाइट , वाटर बोतल , जीपीएस वाच , strava अप्प , स्पोर्ट्स शू , आई कार्ड , कुछ रूपये , गॉगल्स , हेड बैंड , स्माल टॉवल , एक्स्ट्रा टायर , टूल्स , एयर पंप , आदि संभाल कर रात को ही तैयार कर इकठ्ठा रख दिए थे ! सुबह सुबह ५ बजे वाच में से स्पोर्ट्स अप्प स्ट्रावा में साइकिल राइड ऑन कर चल दिया दिल्ली की और डीएनडी से आश्रम , इंडिया गेट , प्रगति मैदान , निजामुद्दीन ब्रिज , मयूरविहार होते हुए लगभग 7 बजे घर बापस पंहुचा तो पूरा शरीर पसीने के साथ आनंदमय था कि आज बहुत दिन बाद साइकिल से की गयी यात्रा 30.69 km को 17 km प्रति घंटा की एवरेज स्पीड से तय करने में 1:52 का समय लगा !  इस पूरी यात्रा में कोई कष्ट हुआ तो वह प्रगति मैदान की दुर्दशा देखकर हुआ जिसे डेवलपमेंट की भेंट चढ़ा दिया गया ! राजधानी में यही एक मात्र जगह थी जहाँ बच्चे हमेशा चहकते हुए मिलते थे ! 

अब तक मैं पिछले लगभग छह वर्ष में अपने काया कल्प अनुष्ठान में कुल 7225 km दौड़ने के साथ साथ 2760 km साइकिल भी चला चुका हूँ जो कि लम्बी दौड़ के रनर के लिए बहुत आवश्यक है ! मजबूत जांघों के मसल्स के लिए साईकिल चलाना बहुत आवश्यक है , इससे चोटिल होने का खतरा कम हो जाता है !

अंत में मित्रों से दुबारा अनुरोध है कि उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि उन्हें रनिंग बिलकुल नहीं आती है और न उनके शरीर को , उन्हें भूल जाना होगा कि रनिंग करने में कुछ नहीं है इसमें सीखना क्या ? बिना शरीर को सिखाये हुए रनिंग आपकी जान लेने में समर्थ है सो अपने सुस्त और वजनदार शरीर को मेहरबानी कर धीरे धीरे रनिंग सिखाएं जिस दिन आपका शरीर दौड़ना सीख गया उस दिन आप खुद को शीशे में पहचान नहीं पाएंगे !
शुभकामनायें !



Wednesday, July 14, 2021

उनसे कहिये, चलने का अंदाज बदल लें -सतीश सक्सेना

Strava नाम का एक अप्प रनर्स और साइकिलिस्ट में बहुत पॉपुलर है यह दौड़ते हुए न केवल हमारी रनिंग /वाकिंग के टाइमिंग पर नजर रखता है बल्कि हमारे रुट को ट्रेक भी करता है ताकि हमें अपना सम्पूर्ण हेल्थ डाटा मिल सके , इसके अनुसार सतीश सक्सेना उम्र 66+ ने 2015 सितम्बर से लेकर अबतक दौड़ते हुए 7216 Km की दूरी तय की है , इसमें 10 km की दूरी का उनका सर्वश्रेष्ठ समय 64 मिनट्स और 21.10 Km की रनिंग का समय 2:16:31 रहा ! शुरुआत में लम्बी दूरी तय करते हुए अधिकतम हार्ट रेट चिंताजनक 200 तक पंहुच जाता था जो समय के साथ धीरे धीरे कम होता हुआ अब 165 के आसपास रहता है जो काफी संतोषजनक है !

रनिंग एक हाई इम्पैक्ट एक्सरसाइज है जो कि कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को बेहतर करने के साथ साथ हड्डियों को मजबूत करने में भी सहायक है ! दौड़ते समय रनर के हर गिरते हुए कदम पर, रनर के शरीर के वजन का तीन गुना इम्पैक्ट उसके घुटने पर पड़ता है जो कि उसकी कमजोर आंतरिक मसल्स को चोटिल करने को पर्याप्त है , अतः दौड़ने की शुरुआत करने से पहले शरीर को उसे झेलने हेतु ,धीरे धीरे अभ्यस्त बनाना होता है ताकि शरीर के अवयव इस शानदार हाई इंटेंसिटी क्रिया को आसानी से वर्दाश्त कर सके !

दौड़ने से आपके हृदय और फेफड़ों के कार्य में आश्चर्यजनक सुधार के अतिरिक्त , मसल्स का मजबूत होना , बेहतर नींद और स्वच्छ खून , पेट के रोग , बढ़ा हुआ वजन , डायबिटीज, हृदय रोग और हाइपरटेंशन गायब होते नजर आते हैं !

ध्यान रहे दौड़ते समय आपके पूरे शरीर के हर आंतरिक अवयव में जबरदस्त इम्पैक्ट और कम्पन लगातार होता है , जिससे पूरे शरीर में हलचल होती है और फेफड़े व् हृदय अपने पूरी गति के साथ ऑक्सीजन खींच कर खून में पम्प करते हैं , अगर आप दौड़ते समय अपने हर गिरते उठते कदम के साथ साँस नहीं ले पा रहे हैं तब आप ऑक्सीजन की कमी के कारण शीघ्र हांफने लगेंगे और कुछ कदम दौड़ने के साथ ही थक कर रुकने को विवश हो जाएंगे अतः दौड़ते समय सांसों को कदमों के साथ लयबद्ध करना आवश्यक होता है !

अब इतने वर्ष दौड़ने के बाद मैं अपने आपको एक सहज रनर मानता हूँ उक्त सारी बीमारियां  पता ही नहीं कहाँ गायब हो गयीं और अब सुबह की लम्बी दौड़ के बाद शरीर से टपकता पसीना वरदान जैसा लगता है साथ ही पूरे दिन मूड की मस्ती मुफ्त ! 
सो आइये गुनगुनाएं  ...

सुनी सुनाई खबरों पर,एतबार बदल लें !
झूठी खबरों के सस्ते अखबार बदल लें !

चलते, अहंकार की चाल,नज़र आती है !

उनसे कहिये,चलने का अंदाज बदल लें !




Monday, July 12, 2021

नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये -सतीश सक्सेना

आज सुबह पांच बजे मैं गाडी लेकर DND toll पर पहुँच गया था , बढ़िया मौसम मगर आद्रता 90 प्रतिशत , गाडी एक साइड पार्क कर, रिंग रोड तक जाकर बापस लौटने का (लगभग 8 Km )
मन बनाया और थोड़ी स्ट्रेचिंग के बाद , गहरी गहरी साँस लेकर, बेहद सहज मन से दौड़ना शुरू किया ! आज का संकल्प था कि सहज मन से ही दौड़ना है , न दूरी की चिंता और न समय की , खाली सड़क के किनारे किनारे, पेट के बढे हुए एक टायर पर विचारों को केंद्रित करते हुए कि इस सप्ताह इससे मुक्ति पानी ही है, दौड़ते दौड़ते कब यमुना ब्रिज आ गया पता ही नहीं चला , दिल्ली पुलिस पीसीआर के हैडकांस्टेबल द्वारा गुड मॉर्निंग सर का जवाब देते हुए अच्छा लगा ! इस रुट के लगभग सारे ड्यूटी अफसर जानते हैं कि एक 67 वर्ष का रिटायर्ड जवान नोएडा से दिल्ली तक दौड़ता है !

आज की 8 km की लम्बी दौड़ की विशेषता सहजता रही , बिना किसी तनाव, गरमी ,पसीने पर ध्यान दिए बिना यह बेहद आसान था हालाँकि बढ़ी आद्रता के कारण, बापसी में कार तक पंहुचने पर ऊपर से नीचे तक पसीने से नहाया हुआ था ! 

काया कल्प के संकल्प में सहजता ही आवश्यक है जिसे आज के दिखावटी जगत में पाना बेहद मुश्किल होता है ! सहज आप तभी हो सकेंगे जब मन स्वच्छ हो ईमानदार हो खुद के लिए भी और गैरों के लिए भी ! स्वस्थ मन और शरीर को पाने के लिए आप को भय त्यागना होगा , मृत्यु भय पर विजय पाने के लिए अपनी आंतरिक सुरक्षा शक्ति पर भरोसा रखें कि वह अजेय है किसी भी बीमारी से उसका शरीर सुरक्षित रखने में वह सक्षम है और हाँ, अपने विशाल प्रभामण्डल और तथाकथित आदर सम्मान भार को सर से उतारकर घर पर रख देना होगा अन्यथा यह गर्व बर्बाद कर देने में सक्षम है मेरे हमउम्र तीन मित्र इस वर्ष मोटापे की भेंट चढ़ गए और कुछ हार्ट अटैक की कगार पर हैं ,काश वे समय रहते चेत गए होते ! 

भारत हृदय रोग और डायबिटीज की वैश्विक राजधानी बन चुका है , हर चौथा व्यक्ति इसका शिकार है और उसे पता ही नहीं , चलते समय या सीढियाँ चढ़ते समय सांस फूलता है, उसे यह तक पता नहीं कि साँस फूलने का मतलब क्या होता है और न उसके पास समय है कि इस बेकार विषय पर ध्यान दे मोटापे को वह उम्र का तकाजा समझता है ! खैर  ...

बरसों से आलसी शरीर को सुंदर और स्वस्थ बनाने के लिए कृत्रिम प्रसाधनों , दवाओं का त्याग करना होगा , उनसे शरीर स्वस्थ होगा का विचार, केवल खुद को मूर्ख बनाना है ! शरीर स्वस्थ रखने के लिए जो अंग जिस कार्य के लिए बने हैं उनका सहज भरपूर उपयोग करना सीखना होगा ! गलत लोक श्रुतियों और मान्यताओं, सामाजिक भेदभाव पर खुले मन से विचार कर उनका त्याग करें आप खुद ब खुद सहज होते जाएंगे ! 

साथ कोई दे, न दे , पर धीमे धीमे दौड़िये !
अखंडित विश्वास लेकर धीमे धीमे दौड़िये !

दर्द सारे ही भुलाकर,हिमालय से हृदय में 
नियंत्रित तूफ़ान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जाति,धर्म,प्रदेश,बंधन पर न गौरव कीजिये 
मानवी अभिमान लेकर, धीमे धीमे दौड़िये !

जोश आएगा दुबारा , बुझ गए से  हृदय में 
प्रज्वलित संकल्प लेकर धीमे धीमे दौड़िये !
   
तोड़ सीमायें सड़ी ,संकीर्ण मन विस्तृत करें  
विश्व ही अपना समझकर धीमे धीमे दौड़िये !

समय ऐसा आएगा जब फासले थक जाएंगे  
दूरियों को नमन कर के , धीमे धीमे दौड़िये !

Friday, July 9, 2021

मैं धीमी आवाजों को अभिव्यक्ति दिलाने लिखता हूँ -सतीश सक्सेना

 एक दोस्त ने , बढे हुए वजन को घटाने के लिए व्हाट्सप्प यूनिवर्सिटी के किसी ग्रेजुएट का बताया फार्मूला भेजा और पूंछा कि क्या इसे दो दिन कर लूँ ? उसे पढ़ने पर पता चला कि उसमें 17 तरीके के किचेन अवयव शामिल थे , जिनको तलाश करने और बनाने में ही वजन दो किलो घट जाएगा और उसका विवरण इतना जबरदस्त था कि पालन करने वाले को यह फार्मूला रामवाण ही लगेगा !

हमारे देश में ज्ञानियों की भरमार है , ज्ञान देने वाले और लेने वाले दोनों एक से हैं , उनकी हर बीमारी खाने से जुड़ी मानी जाती है और उनकी हर समस्या का निदान भी खाने में ही होता है बस शरीर को तकलीफ न देना पड़े और वजन घट जाए इसकी तलाश जीवन भर चलती रहती है ! जैसे तैसे जब वे 45 के होते हैं तब उन्हें लगता है कि शरीर बेडौल होने लगा है और वे इसका इलाज टहलना मानते हैं सो पड़ोस के किसी एक मित्र के साथ पार्क में आधा घंटा, ऑफिस में मारे हुए तीर उस दोस्त को सुनाते हुए, टहलना शुरू करते हैं जो ताउम्र चलता है बिना यह समझने का प्रयत्न किये कि इस क्रिया से एक किलो भी वजन हिला नहीं है ! उम्र बढ़ने के साथ स्वतः शारीरिक क्षरण के साथ बीमारियां बढ़ने लगती हैं जिनका इलाज वे सड़क छाप ज्ञानियों के दिए फार्मूलों से करते हैं ! इन फॉर्मूलों में अदरक , हल्दी , काली मिर्च , लौंग, दालचीनी , निम्बू , हरा धनिया, सेंधा नमक , जीरा , अजवायन , हींग  और लहसुन अवश्य होता है जो हम बचपन से खाते रहे हैं !

उपरोक्त फार्मूला में नाटकीयता की भरमार है ताकि गुरु के प्रति आदर भावना और अधिक हो , जबकि सप्ताह में दो दिन अगर रोटी आदि नियमित भोजन बंद कर पहले दिन केवल सब्जियां उबालकर अथवा कच्ची सलाद और दुसरे दिन केवल फलों का सेवन, भरपूर पानी पीते हुए करें तब वजन डेढ़ से ढाई किलो घट जाता है और अगर साथ में रोज ब्रिस्क वाकिंग या रनिंग करें तब यह वजन कभी शरीर पर कब्ज़ा नहीं कर सकता ! 

आज सुबह दौड़ते हुए मेरे पास से एक नौजवान आगे निकला गया उसके हावभाव से लग रहा है कि वह दौड़ने में नौसिखिया है , नतीजा थोड़ी देर बाद ही वह हांफने लगा और वाक करने लगा ! तब मैंने उसे समझाया कि हांफते हुए दौड़ना जान ले सकता है , हांफने का मतलब तुम्हें सही पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही अतः हृदय पर अधिक दवाब पड़ रहा है ! मेरे साथ दौड़ो और दौड़ते हुए मेरी तरह साँस लो , हर गिरते उठते कदम पर सांस खींचना और छोड़ना शामिल होना चाहिए जिस दिन कदम ताल के साथ सांस लेना और छोड़ना सीख गए उस दिन तुम कितनी ही दूरी दौड़ोगे , थकोगे नहीं !

सो अगर अपने बीमार हृदय, पेन्क्रियास और मोटापे से पीछा छुटाना है तो दौड़ना सीखना शुरू करें ! आप हर उम्र में खुश रहेंगे, स्वस्थ रहेंगे !   

  

Wednesday, April 7, 2021

वारे न्यारे , क्रिप्टो करेंसी से - सतीश सक्सेना

22 मई 2010 को एक प्रोग्रामर लैज़लो हनी (Laszlo Hanyecz) ने, पापा जॉन के दो पिज़्जा खरीदने के लिए 10000 bitcoin दिए थे , इन्होने सपने में भी नहीं सोंचा होगा कि दो पीज़ा लायक यह डिजिटल करेंसी , सिर्फ दस साल बाद Rs 40000000000/= की होगी ,आज एक बिट कॉइन का रेट भारतीय करेंसी में 50 लाख रुपया है ! उनका पीज़ा बिल 30 $ का था और उन दिनों बिट कॉइन की कीमत एक पैनी से भी कम थी लगभग $0.003, सो उन्होंने यह बिल पेमेंट अपने डिजिटल करेंसी बैलेट से करने का फैसला किया और उन्हें डिजिटल वालेट में बेकार पड़े 10000 बिट कॉइन खर्च करने का फैसला किया और वे क्रिप्टो करेंसी इतिहास में सबसे महंगा पीज़ा खाने वाले के नाम से सुरक्षित हो गए ! विश्व का सबसे महंगा पीज़ा खाने वाला व्यक्ति को यह नहीं पता होगा कि वह खा क्या रहा है ! क्रिप्टो कैलेंडर में यह तिथि बिटकॉइन पीज़ा डे के नाम से सुरक्षित है !

बिट कॉइन , एथेरियम कॉइन या डॉग कॉइन आदि एक स्वतंत्र करेंसी है जिसके ऊपर विश्व के किसी भी देश का प्रभुत्व नहीं है ! यह एक ऐसा सिक्का जिसकी कीमत विश्व बाजार भाव निर्धारित करता है और उसे कोई भी व्यक्ति किसी भी अन्य व्यक्ति को जो उसे मान्यता देता हो , दे सकता है ! अब तक जापान , अमेरिका , फ्रांस ,जर्मनी , कनाडा , नीदरलैंड ,सिंगापुर और रूस और तमाम देश मान्यता दे चुके हैं ! भारत में कई क्रिप्टो एक्सचेंज खुल चुके हैं जिसके जरिये इसकी खरीद फरोख्त की जा सकती है , शीघ्र ही रिज़र्व बैंक भी, अपना क्रिप्टो करेंसी ज़ारी करने पर विचार कर रहा है !
क्रिप्टो कॉइन लेनदेन विश्व का सबसे सुरक्षित लेनदेन है , इसकी खरीद फरोख्त ब्लॉक चेन नामक एक नवीनतम टेक्नोलॉजी करती है जो कि अपने आप में औटोमैटिक है ! इसमें धन के लेनदेन में कोई बैंकिंग सिस्टम का उपयोग नहीं होता और टेक्नोलॉजी में सबसे कठिन मानकधारी है, शायद इसी लिए सबसे पहले मान्यता देने वालों में जापान , अमेरिका , जर्मनी जैसे विकसित राज्य आगे आये है , आने वाले समय में इसे विश्व करेंसी का दर्जा मिलेगा ऐसा इन देशों में अनुमान है !
पहले पहल मैंने बिट कॉइन का नाम शायद आठ वर्ष पहले सुना था , और आम भारतीय की तरह सरसरी नजर से पढ़कर भूल गया, 2013 में भी अगर किसी ने 10000 रूपये के बिट कॉइन खरीद लिये होते तो आज वह 2 करोड़ का मालिक था ! खरीदना आसान है , wazirx या zebpay पर रजिस्ट्रेशन कराइये , KYC पूरा करें और मनचाही क्रिप्टो खरीदें , मगर याद रहे यह धन बहुत तेजी से बढ़ता है उतनी ही तेजी से गिरता भी है , बेहतर सिलेक्शन में ही धन लगाएं और भुला दें यह सोचकर कि कहीं लुट गए और हो सकता है कुछ वर्षों बाद आपको एक दबा हुआ खजाना मिल जाए !
विश्व की पहली डिजिटल करेंसी बिटकॉइन, एक छद्मनाम सातोशी नाकामोतो नामक सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने , 2008 में लांच की थी और इसकी कीमत ज़ीरो थी जो कि अगले तीन साल में बढ़कर 1$ प्रति बिट कॉइन और आजकल इसकी कीमत लगभग $50000 है ! विश्व में इतनी तेज प्रगति का यह अकेला पहलवान है सो इसको समय रहते नमस्कार करना सीख लेना चाहिए ...

Friday, February 19, 2021

सम्मान से अधिक प्रोत्साहन देना आवश्यक है -सतीश सक्सेना

हिंदी जगत में ब्लॉगिंग का आगमन , हिंदी के नवोदित लेखकों के लिए संजीवनी का काम कर गया , झिझकती लड़खड़ाती शर्मीली सैकड़ों कलमें हिंदी की चाल दिखाने के लिए फ्लोर पर पहली बार जब आयीं थी तो उनमें कितनी ही खड़े होने लायक भी नहीं थीं , मगर पाठक रुपी दर्शकों ने वाह वाह कर उन्हें प्रोत्साहन दिया और कांपते हुए क़दमों को अहसास दिलाया कि वे न केवल चल रही हैं बल्कि बेहतरीन निशान भी छोड़ रही हैं ! 

यह उनके लिए अविश्वसनीय ही था कि जिन्होंने पूरी जिंदगी कुछ नहीं लिखा उनका लिखना न केवल पढ़ने योग्य है बल्कि तालियों के साथ हिंदी जगत में उन्हें एक सम्मानित पहचान भी मिल रही है , इस विश्वास के साथ ही उनके लेखन में विविधता और पैनापन बढ़ने लगा और कुछ समय पश्चात, उनके बेकार लेख वाकई अपनी जगह बनाने में कामयाब हुए, आज उनमें से कई हिंदी जगत में बेहतरीन लेखक हैं और प्रिंट मीडिया उनके लेख लगातार छापकर उन्हें सम्मानित कर रही है ! 

हिंदी ब्लॉगिंग से लेखकों के उदय में, मैं समीर लाल ( उड़न तश्तरी ) का बहुत बड़ा योगदान मानता हूँ , 2008 में समीर लाल ही थे जो नियमित तौर पर प्रतिदिन लगभग सौ ब्लॉगरों के ब्लॉग पर जा जाकर वाह वाही कर टिप्पणी करते थे , कई लोग कहते थे कि इतनी टिप्पणियां कोई एक व्यक्ति कर ही नहीं सकता यह असंभव ही था कि एक व्यक्ति इतने ब्लॉगों पर जाकर पढ़े और टिप्पणी करे ! कुछ कहते थे कि उन्होंने कोई सॉफ्टवेयर बनवाया है जो इतनी टिप्पणी रोज करता है और कई उनकी मजाक बनाते थे कि वे किसी ब्लॉग को पढ़ते नहीं है बस खुद के ब्लॉग पर टिप्पणी पाने के लिए वे सबके ब्लॉग पर नियमित टिपियाते हैं ! मगर सच्चाई यही थी कि उनकी टिप्पणी पाने पर एक जोश महसूस होता था कि मैंने कुछ अच्छा लिखा है जो कनाडा से उड़नतश्तरी ने आकर कमेंट दिया है ! हिंदी ब्लॉगिंग को बढ़ाने में समीर लाल का योगदान अमर और सैकड़ों लेखनियों के लिए जीवन दायक रहा , इस योगदान के लिए वे हमेशा वंदनीय रहेंगे !

रनिंग करते समय, स्टेडियम के रनिंग ट्रेक पर या खुली सड़क पर जब कोई भारी वजन का व्यक्ति या महिला दौड़ने का प्रयत्न करते देखता हूँ तब मैं उसकी हिम्मत अफ़ज़ाई अवश्य करता हूँ , शाब्बाश बच्चे तुम अवश्य जीतोगे एक दिन, बस हिम्मत नहीं हारना , दुनियां तुम्हें दौड़ते देख हँस रही है इसकी बिना परवाह किये धीरे धीरे बिना हांफे दौड़ना, सीखते रहो एक दिन तुम्हारा स्लिम शरीर इसी ट्रेक पर तेज गति से भागते हुए दुनिया देखेगी !

अंत में , बढ़ा वजन घटाने के लिए !
-दिन में 12 गिलास पानी कम से कम पीना ही है !
-डिनर ७ -८ बजे तक और बहुत हल्का बिना रोटी चावल के !
कोई भी मीठी चीज नहीं खानी है ! मिल्क प्रोडक्ट कम करें !
-रोज आधा घंटा तेज वाक करें बिना हांफे , और आखिरी दो मिनट बिना हांफते हुए दौड़ कर समाप्त करें ! विश्वास रखें कि वे बहुत जल्द सामान्य पहले जैसे स्मार्ट होंगे ! शरीर आसानी से हर परिस्थिति में अभ्यस्त हो जाने में समर्थ है , रनिंग सिखने के साथ ही शरीर की ढेरों उम्र जनित बीमारियां डायबिटीज , बीपी , कब्ज ,दर्द आदि खुदबखुद गायब हो जायँगी ! 

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