Tuesday, August 10, 2010

तेरा स्वागत है लड़की -सतीश सक्सेना

             कुछ दिन पहले अपने भतीजे की सगाई समारोह में अपने खींचे हुए फोटोग्राफ्स देखते देखते एक फोटो पर निगाह पडी तो उसे देखता ही रह गया  ! वास्तविक जीवन में स्नेह प्रदर्शन का यह दुर्लभ फोटो आज के समय में असंभव जैसा है ! सास बहू के मध्य प्यार की कोई कमी नहीं अपने देश में मगर दोनों के चेहरे पर प्रथम मिलन की ऐसी ख़ुशी , इस चित्र को दुर्लभ बना देती है !
मानव फोटोग्राफी में विभिन्न मौकों पर, चेहरे की अभिव्यक्तियों  का छायांकन मेरा बहुत पुराना शौक रहा है ! मगर ऐसी स्वाभाविक अभिव्यक्ति यहाँ मिलेगी, मैंने यह कल्पना भी नहीं की थी !
इस चित्र में सास अपनी होने वाली बहू का स्वागत ,समारोह स्थल के द्वार पर कर रही हैं , एक हाथ में स्वागत थाल पकडे ,बहू को कुंकुम लगाती आँखों का स्नेह , बरसों की प्रतीक्षा, पूरी होने की साफ़ साफ़ सन्देश दे रहा है !
और दूसरी ओर  "अम्मा मैं आ गयी " सन्देश देती ख़ुशी में अश्रुपूरित यह ऑंखें , इस फोटो को अनमोल बना गयी  !
किसी भी फोटोग्राफर के लिए, प्यार की यह स्वाभाविक अभिव्यक्ति ,कैमरे में ठीक समय पर कैद करना लगभग असंभव सा हो जाता है !
काश टी वी सीरियल पर सास बहुओं को आपस में लड़ाते हमारे प्रोडयूसर ,डायरेक्टर तथा लेख़क ऐसे स्नेह को महसूस कर सकें ! 

47 comments:

  1. सच कहा सतीश जी, सही समय पर क्लिक हो जाए तो फोटो यादगार बन जाते हैं.
    यहां भी कुछ ऐसे ही लम्हे कैद हैं
    http://www.facebook.com/album.php?aid=15235&id=100001354461670
    देखिए तो सही
    आज आपकी कई पोस्ट पढी, बहुत अच्छा लगा.

    ReplyDelete
  2. एक अनोखे स्नेह और विश्वास की अभिव्यक्ति......
    regards

    ReplyDelete
  3. सतीश भाई सचमुच जो आपने कैमरे में कैद किया है वह दुर्लभ दृश्‍य है। पर माफ करें, जो बात आपने शब्‍दों में लिखी है,वह उनके चेहरे से बयान हो रही है,आंखें तो उसमें नजर आ ही नहीं रहीं। इसलिए -आंखों का स्‍नेह -या -अश्रुपूरित यह आंखें- शब्‍द आपके बयान में फिट नहीं बैठ रहे हैं।

    ReplyDelete
  4. सतीशजी, इस रिश्‍ते में बहुत मिठास है ना जाने क्‍यों इसे बदनाम कर दिया गया है। इसी कारण सास भी और बहु भी पूर्वाग्रह पाल लेती है। लेकिन जब स्थितियां साफ होती हैं तब तक थोड़ी कडुवाहट रिश्‍ते में आ जाती है। एक माँ से पूछेंगे कि उसके जीवन का सबसे हसीन क्षण कौन सा है तो वो यही कहेगी कि जब बेटा बहु को लेकर आता है। मेरी एक कविता की कुछ पंक्तियां देखिए -
    तुम गठजोड़े में लिपटे हो
    मेंहदी के हाथ लिए हाथों में
    हल्‍दी के पैरों की पद छाप
    दिखायी देती मेरे आंगन में
    हर ओर बज रही शहनाई
    मेरे घर के हर कोने में
    मैं आज मनाऊँ इस दिन को
    उस पल का इंतजार लिए मन में।
    यह कविता बेटे को जन्‍मदिन पर लिखकर दी थी।

    ReplyDelete
  5. नहीं ऐसा नहीं है कि टीवी सीरियल सिर्फ सास बहु को लड़ते ही दिखाते है प्यार भी दिखाते है पर दोनों ही अति कि हद तक होता है जो वास्तविक नहीं होता है | रही बात सास बहु के झगडे की तो मुझे लगता है कि इस विषय को जरूरत से ज्यादा तुल दिया जाता है घर में तो माँ बेटी बाप बेटे में भी झगडा होता है पर हम उसको सामान्य मानते है तो सास बहु के तकरार को सामान्य क्यों नहीं मानते | कहा भी गया है कि जहा चार बर्तन होंगे तो आपस में टक्करायेंगे ही |

    ReplyDelete
  6. सही समय पर क्लिक हो जाए तो फोटो यादगार बन जाते हैं.

    ReplyDelete
  7. बहुत सुन्दर फोटो है, आभार
    सास-बहू दोनों को शुभकामनायें
    यह स्नेह ताउम्र बना रहे

    प्रणाम

    ReplyDelete
  8. फोटोग्राफर को केवल कैमरे का ही ज्ञान नहीं होता है वरन मनुष्य और समाज की भावनाओं का भी ज्ञान होता है |

    ReplyDelete
  9. @ राजेश उत्साही ,
    बड़ी तेज निगाह है यार , अगर बात शब्दों से की जाए तो आपने ठीक कहा है मगर यह फोटो मेरा द्वारा लिया गया है, और आँखों की भावाव्यक्ति फोटो से दिखाई ना पड़े पर मैंने देखा है सो व्यक्त किया ! आपका आना अच्छा लगता है राजेश भाई ! आभार !

    ReplyDelete
  10. सतीश भाई,
    ये विडंबना ही है हमारे सामाजिक परिवेश की...सास-बहू का स्नेह कहीं दिखता है तो वो दुर्लभ फोटो के रूप में यादगार बन जाता है...ये इतना स्वाभाविक क्यों नहीं होता जितना मां और बेटी का स्नेह, जो हर पल एक-दूसरे के लिए दिखता है...बात तभी बनेगी जब सास दिल से बहू को बेटी और बेटी सास को मां माने...फिर उस रिश्ते का अहसास जीवन में इतना रच-बस जाएगा कि कभी हमें फोटो के तौर पर सास-बहू के प्यार को दुर्लभ पल को दर्शाने की ज़रूरत नहीं रह जाएगी...काश आपके इस तरह के लेखन से ही हमारी सोच में कुछ बदलाव आए...

    (आजकल व्यस्तता के चलते रेगुलर कमेंट देने नहीं आ पा रहा हूं...आप बड़े भाई हैं, इसलिए आप पर हक़ बनता है)

    जय हिंद...

    ReplyDelete
  11. बहुत बढ़िया भाव हैं सतीश जी ,सच में चित्र दुर्लभ है
    इस लिए नहीं कि दोनों के चेहरे पर स्नेह और आदर के भाव हैं बल्कि इस लिए कि आप ने तस्वीर बहुत सही समय पर ,natural तरीक़े से खींची है,जिस के भाव सद्भावना ,स्नेह और आदर के प्रतीक हैं
    बहुत सुंदर!

    ReplyDelete
  12. सुन्दर भावनाओं को व्यक्त करती अच्छी फोटोग्राफी

    ReplyDelete
  13. aankhon se bhare neh ko kaid karna kaha aasaan hota hai, pyaari tasweer

    ReplyDelete
  14. बहुत अच्‍छी लगी आपकी पोस्‍ट .. और चित्र देखकर तो मन पलकित हो गया .. पर वास्‍तविक जीवन के लंबे अनुभव के आधार में मैं इतना तो अवश्‍य कह सकती हूं कि .. बिल्‍कुल शुरूआती दौर में सास और बहू के मध्‍य चाहे जितना भी प्‍यार क्‍यूं न देखने को मिले .. पर कालांतर में ये संबंध किसी न किसी प्रकार की गलतफहमी के चपेट में आ जाते हैं .. खासकर जहां एक पक्ष भावनात्‍मक तौर पर कमजोर हो .. और अधिकांश जगह ऐसा हो ही जाया करता है .. अर्थ का पक्ष भी आजकल बहुत मायने रखने लगा है .. जिसका पारिवारिक मामलों मे कोई असर नहीं रहना चाहिए !!

    ReplyDelete
  15. दुर्लभ दृश्‍य है।

    ReplyDelete
  16. एक दुर्लभ दृश्य

    ReplyDelete
  17. सतीश भाई सहमत हूं। थोड़ी मेहनत और करते तो यह आपकी आंखों और कैमरे द्वारा देखे गए प्रसंग की यादगार रचना बन जाता। पर इसमें कोई शक नहीं है कि फोटो यह बयान कर ही रहा है कि उन दोनों के बीच स्‍नेह का मजबूत धागा बुना जा रहा है।
    और सतीश भाई आपको अच्‍छा लगता है इसीलिए चले आते हैं और कह भी जाते हैं,जो कहना होता है। आभारी हूं।

    ReplyDelete
  18. सच मे बहुत सुन्दर व दुर्लभ चित्र है।

    ReplyDelete
  19. आशा है ध्यान देंगी !

    यह सम्बोधन है भाई जान आपका मेरे लिए. मेरा लिंग परिवर्तन कब हुआ, इसका ज्ञान-भान मुझे तो नहीं हुआ लेकिन दिल्ली वालों को पुख्ता यकीन तो है ही, उस यकीन के साथ सम्बोधन तक स्त्रियों वाले दिए जा रहे हैं. ऊपर वाला मेरे हाल पर रहम करे. सतीश भाई, आप ज्योतिष भी जानते हैं ना.
    ** अब आते हैं आपके दुर्लभ फोटो की तरफ-
    अब भी बहुत सी सास-बहुएं हैं जो माँ-बेटी की तरह रहती हैं. मैं ने अपनी माँ का बहुओं के साथ व्यवहार देखा है. मेरी बहनों को शिकायत पैदा हो गयी थी कि अम्मा को बहू मिली तो बेटियों को भूल गईं.
    फिलहाल, आपके फोटो में हर्ष मिलन का जो सम्मिश्रण नजर आता है क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सास मन ही मन यह सोच कर प्रसन्न हो कि आ गया मेरा शिकार.
    दूसरी तरफ बहू इस ख्याल में मग्न हो कि अब आएगा ऊँट पहाड़ के नीचे.
    फिर भी, यह चित्र इस बात का जीता जागता सबूत है कि मानवता-प्रेम-स्नेह की अभी मौत नहीं हुई और हमारे, भारतीय समाज में इंसानियत अब भी जिंदा है.

    ReplyDelete
  20. aapke alag alag tarah ke posts, sach me hame apka FAN/AC bana gaye.......:)

    aap sach me dharoghar ho sir, ham blogger ke liye..:)

    ReplyDelete
  21. "when you receive something unexpectedly makes you speechless for a moment"
    Satishji today I am in that state because of you ! Esp the photograph captured, speaks the moment , looking at each others eyes with a smile, shared many things…
    Being a simple normal house wife I cannot raise to the level of these persons who are learned scholars & lead a name & fame in society. I am not used to blogging or give comment; today I am here to write a few lines. Thanks Satishji !
    Myself & my new addition member to our family Daughter (in-law) is showered blessings from all corners of the world. I will definitely want to maintain a relation as mother daughter.
    Also here I will like to say that Daughter in law cannot be replaced in place of a daughter, Yes she will plant herself in this new place, & grew slowly into a big tree,with buds, flower & fruit in course of time. As plants need sunshine & water to grow. Here i she will need support & love from all family members more than we give our daughter. This relation is two side of coin.
    I , Thank one & all for your views & Blessings

    ReplyDelete
  22. सुन्दर तस्वीर ..!
    तस्वीर में नजर आ रहा स्नेह व्यवहार ताउम्र बना रहे ...!

    ReplyDelete
  23. अच्छी तस्वीर खींची है ।
    यही कामना है कि ये प्यार शादी के बाद भी बना रहे ।

    ReplyDelete
  24. बड़े भाई... हमारे यहाँ यह मुद्रा प्रेम/स्नेह प्रदर्शन की उनिवर्सल मुद्रा है... दाहिने हाथ की चारों उँगलियों को समेटकर, अपनी तर्जनी से ठोड़ी के नीचे हाथ जमाकर..बस चेहरे को ज़रा सा ऊपर करके कहना, “अले ले ले! कितनी प्याली लग रही है मेरी बिटिया रानी.” लेकिन यह घटना इतनी क्षणिक होती है कि इसको क़ैद करना सचमुच एक यादगार लम्हे को क़ैद करने जैसा है. हमरी पूरबिया ज़ुबान में कहें तो गूलर का फूल हाथ लग गया है आपके!!

    ReplyDelete
  25. बहुत ही बेहतरीन और एकदम उचित समय पर ली गई तस्वीर है...... बेहतरीन!

    तस्वीर इतनी ज़बरदस्त है कि चेहरे के भाव और मौके की ख़ुशी महसूस की जा सकती है....

    ReplyDelete
  26. सही कहा आपने. ये दुर्लभ क्षण होते हैं और ऐसा चित्रांकन भी बहुत मुश्किल है. सास बहु में आजन्म स्नेह बना रहे, यही मेरी कामना है., हमारे द्वारा आज ही खींचे एक चित्र को भेज रहा हूँ (इमेल से)

    ReplyDelete
  27. फ़ोटो और थीम तो बहुत सुंदर और शिक्षादायक है. यह किसी ब्लागर सास बहु का फ़ोटो तो हो ही नही सकता:)

    रामराम.

    ReplyDelete
  28. सुन्दर और एकदम नेचुरल तस्वीर.

    ReplyDelete
  29. गुरुदेव... शटर स्पीड केतना था कि एतना आत्मीय छन भी धरा गया कैमेरा में!! अंगरेजी में ग्रेट वर्क!!!

    ReplyDelete
  30. सतीश जी ,बहुत सुन्दर क्षण को पकड़ा है आपने यह पहला क्षण ही हृदय में भावी संबंधों की नींव बन जाता है .
    20वर्ष पहले पुत्र के विवाह पर वधू के स्वागत-हेतु मेरी कविता का अंश,यही भाव लिए हुए -
    *
    द्वार खडा हरसिंगार फूल बरसाता है
    तुम्हारे स्वागत में ,
    पधारो, प्रिय पुत्र- वधू !
    ममता की भेंट लिए खडी हूँ कब से ,
    सुनने को तुम्हारे मृदु पगों की रुनझुन !
    सुहाग रचे चरण तुम्हारे , ओ कुल- लक्ष्मी ,
    आएँगे यह देहरी पार कर सदा निवास करने यहाँ .....
    जो कुछ मेरा है तुम्हे अर्पित !
    ग्रहण करो आँचल पसार कर ,प्रिय वधू ,
    समय के झंझावातों से बचा लाई हूं जो ,
    अपने आँचल की ओट दे ,
    सौंपती हूँ तुम्हें -
    उजाले की परंपरा !
    ले जाना है तुम्हे
    और उज्ज्वल ,और प्रखर ,और ज्योतिर्मय बनाकर
    कि बाट जोहती हैं अगली पीढियाँ !
    .......
    *
    और यह कविता सार्थक हुई है!
    चित्र का यह स्नेहिल क्षण आजीवन पल्लवित होता रहे !
    - प्रतिभा.

    ReplyDelete
  31. sahi baat bhai ji......or haan beech me charcha n ho saki par white wine swad nahi lagi...

    ReplyDelete
  32. सही समय पर क्लिक हो जाए तो फ़ोटो यादगार बन जाती है ........इस एक वाक्य के अलावा सब कुछ धुंधला पड गया है । और यकीनन कि क्लिक तो समय पर ही हुआ है ...........बेहतरीन पोस्ट सतीश भाई

    ReplyDelete
  33. बहुत कम अवसरों पर फिजिक्स ऐसी केमिस्ट्री को फ्रेम कर पाता है!
    आभार और बधाई।

    ReplyDelete
  34. आपने एक यादगार लम्हे को कैद किया है ......स्नेह हो भी तो उसे दर्शाने के मौके बहुत कम मिलते है .....या बहुत बार संकोचवश हम स्नेह प्रदर्शित नहीं करते ......एक बात याद आ रही है---मेरी बेटी जब पढने के लिए मुझसे दूर दूसरे शहर गई तो फ़ोन पर बात होती थी....बात खतम करते समय वो हमेशा कहती ---"love you mom"और मैं "ह्म्म्म्म" कर देती..........उसे शिकायत रहती --आप नहीं बोल सकते ?........और सच मे जब मैने कहना शुरू किया " me too " तो इतनी खुश हो गई वो, मैं बता नहीं सकती ......इसी तरह मैनें देखा है हम बच्चों के बड़े होने पर उनसे थोड़ी दूरी बनाकर रखते हैं------पर यकीन मानिये एक जादू की झप्पी बहुत असरदार होती है ---- जिंदगी भर के लिए -------

    ReplyDelete
  35. आपने एक यादगार लम्हे को कैद किया है .....


    दोनों को शुभकामनायें. यह स्नेह ताउम्र बना रहे

    ReplyDelete
  36. आपने एक यादगार लम्हे को कैद किया है .....


    दोनों को शुभकामनायें. यह स्नेह ताउम्र बना रहे

    ReplyDelete
  37. बहुत ही सुंदर जी. धन्यवाद

    ReplyDelete
  38. यह चित्र जो बखान कर रहा है, हजारों शब्द न कर पायें। यह चित्र ही अपने आप में पोस्ट है।

    ReplyDelete
  39. बहुत अच्छी प्रस्तुति।
    राजभाषा हिन्दी के प्रचार-प्रसार में आपका योगदान सराहनीय है।

    ReplyDelete
  40. मोहक!
    देर तक फोटोग्राफ को देखते रहने का मन करता है ,. जैसे कोई रोचक पुस्तक हो और रोचकता खत्म ही न होती हो... अच्छा लगा देख कर ... वैसे सास बहुवों के रिश्तों मे अब काफी बदलाव आ रहे हैं ... बजह कुछ भी हो

    ReplyDelete
  41. मोहक!
    देर तक फोटोग्राफ को देखते रहने का मन करता है ,. जैसे कोई रोचक पुस्तक हो और रोचकता खत्म ही न होती हो... अच्छा लगा देख कर ... वैसे सास बहुवों के रिश्तों मे अब काफी बदलाव आ रहे हैं ... बजह कुछ भी हो

    ReplyDelete
  42. पिक्चर सच में आपने अच्छे लिए हैं--चेहरे के भाव स्पष्ट हैं।

    ReplyDelete

एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

Related Posts Plugin for Blogger,