Wednesday, June 30, 2010

रिटायर होते, आपके घर के यह मुखिया - सतीश सक्सेना

ज्ञानदत्त पाण्डेय जी ने, कुछ समय पहले प्रवीण पाण्डेय के रूप में एक बेहतरीन सोच और समझ रखने वाले लेख़क का परिचय कराया था , उनके पहले ही लेख से यह महसूस हुआ कि ब्लागजगत में एक ईमानदार ब्लाग जन्म लेने जा रहा है जो समय के साथ सही सिद्ध हुआ ! 
आज उन्होंने अपनी माँ के रिटायर होने के अवसर पर एक पुत्र की ओर से एक भावुक पोस्ट लिखी है ! अधिकतर हम लोग देखते हैं कि रिटायर होते ही, देर सवेर घर के अन्य सदस्य , उन्हें घर के मुखिया पोस्ट से भी रिटायर करने की तैयारी करने लगते हैं ! बेहद पीड़ा दायक यह स्थिति, आज सामान्यतः अधिकतर घरों में देखी जा सकती है ! "रिटायर" शब्द का प्रभाव, प्रभावित व्यक्ति पर तथा समाज पर  इतना गहरा पड़ता है कि रिटायरमेंट के  बाद अक्सर उन्हें बुद्धि हीन, धनहीन और हर प्रकार से अयोग्य समझ लिया जाता है ! छोटे बच्चे को खिलाने घुमाने के अलावा, दूध सब्जी लाना और घर की चौकीदारी जैसे कार्य  आम तौर पर उनके लिए सही और उचित मान लिए जाते हैं ! प्रवीण जी को मेरे द्वारा दी गयी  सप्रेम प्रतिक्रिया निम्न है....

"अपने बच्चों को मजबूत बना कर, सेवानिवृत्त होतीं वे आज अपने आपको शक्तिशाली मान रहीं होंगी प्रवीण जी ! उनकी पूरी जीवन की मेहनत का फल, आप तीनों के रूप में, उनके सामने  है ! उन्होंने अपना काम पूरा कर लिया ! 

अब आप लोगों की बारी है ...
आप तीनों साथ बैठकर कुछ अभूतपूर्व निर्णय आज लें .....
कि यह भावनाएं जो आपने व्यक्त कीं हैं पूरे जीवन नहीं भूलेंगे ......
कि उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने देंगे कि वे अब बेकार हैं .......
कि उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने देंगे कि वे अब रिटायर हो चुकी हैं ...
कि अब इस घर में उनकी सलाह की जरूरत नहीं है ... 
और अंत में जो सुख़ वे न देख सकीं हों या उन्हें न मिल पाया हो उसके लिए कुछ प्रयत्न कर वह उपलब्ध कराने की चेष्टा ...
मैं अगर अपनी सीमा लांघ गया होऊं तो आप लोग क्षमा करें आशा है बुरा नहीं मानेंगे ! आपकी माँ को भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनायें !"

21 comments:

  1. meree bhavnao ko bhee aapne represent kar diya ........
    aabhar

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  2. बहुत ही सुन्दर.

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  3. बहुत नेक विचार व्यक्त किये हैं आपने ।
    सेवा निवृत होने के साथ सिर्क काम का क्षेत्र बदल जाता है , काम नहीं । आपका अनुभव अब घर , समाज और देश के लिए काम आता है ।
    और अनुभव की हमारे समाज में कद्र की जाती है ।

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  4. सतीश जी
    प्रवीण जी की भी भावुकता देखी
    आपकी भी भावुकता देख रहा हूँ
    और फिर आप दोनों की पोस्ट ने हमें भी तो भावुक बना ही दिया

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  5. आपके द्वारा बताये सारे संकल्प शिरोधार्य । आपने सीमायें निर्धारित की हैं, पालन करना हमारा सौभाग्य है ।
    रिटायर होने पर दिनचर्या में आया एकान्त भरना परिवारवालों का कार्य है और यह उनसे अधिक बातचीत कर के भरा जा सकता है ।
    एक और एकान्त आता है आत्मसम्मान का । कार्यक्षेत्र में पद और सम्मान की ऊँचाईयों के बाद घर में इसको भी भरना आवश्यक है जिसे हम अपने स्नेह और आदर से भर सकते हैं ।

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  6. अभिव्यक्ति के माध्यम से आपने बहुत ही प्रेरणास्पद सन्देश दिया है .....आभार भाई

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  7. आपने बहुत उपयुक्त सलाह दी ....और प्रवीण जी भी विवेकशील हैं ...

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  8. बहुत उत्तम विचार दिये..

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  9. आपकी हर पोस्ट की तरह यह पोस्ट भी अति सुंदर

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  10. मेरी माता जी को पिता जी की फैमिली पेंशन मिलती है. एक होममेकर तो कभी रिटायर नहीं होती... एक बार सर्दियों में वो यहाँ थीं और उन्होंने मेरी पत्नी को ठंड में कपड़े धोते देखा.. यहाँ से पटना वापस जाते ही उन्होंने मेरे भाई के पास पैसे भेजे और कहा कि मेरे घर एक वाशिंग मशीन पहुँचा दे… उनको रेलवे का मुफ्त यात्रा पास मिलता है, लेकिन यहाँ आते समय वो टिकट लेकर यात्रा करती हैं...उनका कहना है कि जब वो अफोर्ड कर सकती हैं तो मुफ्त यात्रा क्यों करना... सारी ज़िंदगी हमें इंसान बनाने में लगाकर, वो आज भी रिटायर नहीं हुईं हैं… कभी किसी तरह की कोई मदद नहीं ली उन्होंने हम भाइयों से... और उनका आदेश ऐसा कि छठ में सारा परिवार पटना में होता है...

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  11. बहुत सुंदर लगी आप की बाते

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  12. मैंने अपनी भावनाएं उसी पोस्‍ट पर अंकित की हैं।

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  13. गुरूजी, माता जी रिटायर नहीं होतीं... माएँ रिटायर हो गईं तो देश समाप्त हो जाएगा… ऊ एगो कहावत है न कि जऊन हाथ पलना झुलाता है, ओही हाथ राज भी करता है... माँ तुझे सलाम!!!

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  14. सतीश भाई हम तो यही कहेंगे...
    मुझे थकने नही देता ज़रूरतो का पहाड़
    मेरे बच्चे मुझे बूडा नही होने देते

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  15. Satish ji ,

    Bahut sahi baat kahi aapne. Maan se badhkar kaun hai. Aaj hum jo bhi hain unhi ke mehnat ka parinaam hain. Dhanya hain wo suputr aur suputriyan jo maan ka samman karte hain.

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  16. बहुत सही लिखा है आपने . आपकी और प्रवीण जी की इस प्रेरणा दायक सोच के लिए आपको और प्रवीण जी दोनों को साधुवाद ..

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  17. बहुत ही मानवीय विचार प्रस्तुत किए हैं आपने। सोच में पड़ गया हूं। संवेदनशीलता का होना सबसे ज्यादा जरूरी है।

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  18. प्रवीण जी के बहाने से दी गई ये शिक्षाप्रद पंक्तियां मैं भी हमेशा याद रखूंगा जी

    प्रणाम स्वीकार करें

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  19. जो कहना था दराल सर ने कह दिया.. मैं दोहरा भर देता हूँ.. प्रवीण जी का मैं भी प्रशंसक हूँ..

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  20. संसार कितना सुन्र हो जाएगा !

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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