Saturday, October 19, 2013

कितने भेद छिपाए बैठा, एक दुपट्टा, औरत का - सतीश सक्सेना

आओ खेलें खेल देश में नफरत और हिफाज़त का 
जो जीतेगा वही करेगा शासन सिर्फ हिकारत का !

भ्रष्टाचार ख़तम कर डालें , हल्ला गुल्ला  हैरत का ! 
जनता साली क्या जानेगी,किला जीतना भारत का !

टेलीविज़न पर नेताओं को, काले धन की चिंता है !
कैसे भी, सत्ता हथियानी, लक्ष्य पुराना हज़रत का !

ऐसा लगता बदन रंगाये,बिल्ला जमीं पर उतरा है !
लगता वही डालडा डब्बा,बजे चुनावी कसरत का !

तरस, दया, हमदर्दी खाकर ,हाथ फेरना बुड्ढों का ! 
यह तो  वही पुराना फंडा,उस्तादों की फितरत का !

पढ़े लिखे क्या समझ सकेंगे,मक्कारों की बस्ती में !
कितने भेद छिपाए बैठा , एक  दुपट्टा, औरत का !



29 comments:

  1. बहुत ही सच्ची प्रभावशाली गहन अभिव्यक्ति ....सतीश जी

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  2. पहली बात—एक पुराना गीत याद आया—'हवा में उडता जाये मेरा लाल डुपटटा' हालांकि इस रचना से कोई तअल्लुक नहीं है उसका, मगर याद आगया तो आगया
    दूसरी बात — जब भी आपकी रचना पढता हूं हरीओम पवांर की याद आती है क्यों आती है नहीं पता।
    ———कोई भी हो शासन नफरत का ही होगा—निश्चित है।
    —जनता को साली शब्द उचित ही प्रयोग किया गया है
    —मतलब चोरों से सत्ता हथियाते क्यों? आपने स्पष्ट कर दिया
    —सभी रंगे सियार है और कहें तो गिरगिट है
    —महिलाओं और बुजुर्गो का सम्मान इस पर क्या अर्ज करुं
    —पढे लिखे क्या समझ सकेंगे पर से याद आया—
    'मस्लहत आमेज होते हैं सियासत के कदम
    तू न समझेगा सियासत तू अभी इन्सान है।''
    बहुत प्यारी, सच्ची, कडुवी,मीठी भी ररचना पढी— मीठे शब्द पर आपको आश्चर्य हो सकता है।

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  3. वाह वाह ! सटीक सुंदर गजल लिखने के लिए बधाई ! सतीश जी ...

    RECENT POST : - एक जबाब माँगा था.

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  4. आप की ये सुंदर रचना आने वाले सौमवार यानी 21/10/2013 कोकुछ पंखतियों के साथ नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही है... आप भी इस हलचल में सादर आमंत्रित है...
    सूचनार्थ।

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  5. बहुत सही कहा..सुन्दर रचना..

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  6. ब्लॉग बुलेटिन की आज की बुलेटिन कुछ खास है हम सभी में - ब्लॉग बुलेटिन मे आपकी पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

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  7. sachmuch ....kitna bhi wayakt karen kam hai .......sundar aur sahaj aakrosh .....

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  8. बहुत दिनों बाद आया बड़े भाई! देख रहा हूँ कितना परिवर्तन आ गया आप में भी.. इस तरह की पोस्टों पर आप कमेन्ट भी नहीं करना चाहते थे और अब इतना ज़बरदस्त गीत लिख डाला.. खैर, देर आयद दुरुस्त आयद!! खरी कहरी बात कही है आपने!!

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  9. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल {रविवार} 20/10/2013 है जिंदगी एक छलावा -- हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल चर्चा अंक : 30 पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    ललित चाहार

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  10. देश की स्थिति का सटीक चित्रण किया है सतीश जी ..
    आपकी इस उत्कृष्ट रचना की चर्चा कल 20/10/2013, रविवार ‘ब्लॉग प्रसारण’ http://blogprasaran.blogspot.in/ पर भी ... कृपया पधारें ..

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  11. जबरदस्त चोट. अति सुन्दर.

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  12. बहुत सही कहा सर आपने,सुन्दर रचना आभार।

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  13. आज के संदर्भ में यथार्थ परक रचना है !

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  14. आज कल आपकी हर रचना कुछ ना कुछ सोचने पर मजबूर करती है भाई जी

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  15. बहुत सुन्दर सटीक व्यंग करती ग़ज़ल

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  16. बहुत सुन्दर रचना के लिए बधाई स्वीकार करे.

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  17. SACH SE RUBRU KARATI SASHAKT RACHNA HETU AABHAR

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  18. बहुत बढ़िया... सहज परन्तु गंभीर ...

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  19. SACH KO BAYAAN KARATI BEHATARIN GEET

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  20. आज के हालात का सुन्दर चित्रण ..

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  21. वाह, बहुत ही सशक्त रचना.

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  22. समसामयिक चुनावी माहौल के साथ साथ आपने अन्य मुद्दों पर भी बड़ी सुन्दरता से लिखा है |

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एक निवेदन !
आपके दिए गए कमेंट्स बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं, कई बार पोस्ट से बेहतर जागरूक पाठकों के कमेंट्स लगते हैं,प्रतिक्रिया देते समय कृपया ध्यान रखें कि जो आप लिख रहे हैं, उसमें बेहद शक्ति होती है,लोग अपनी अपनी श्रद्धा अनुसार पढेंगे, और तदनुसार आचरण भी कर सकते हैं , अतः आवश्यकता है कि आप नाज़ुक विषयों पर, प्रतिक्रिया देते समय, लेखन को पढ़ अवश्य लें और आपकी प्रतिक्रिया समाज व देश के लिए ईमानदार हो, यही आशा है !


- सतीश सक्सेना

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