रात में जमकर धोखा देते, दिन में कसमें यारी की !
साकी और शराब रोज़ हो , रस्में चारदीवारी की !
अक्सर बासिन्दे शहरों के , असमंजस में दिखते हैं !
अभिलाषाएं, धुएं में जीवित, चिंता है बीमारी की !
जब भी लगती आग, धमाका नहीं सुनाई पड़ता है !
ऎसी कौन सी ताकत होती, छोटी सी चिंगारी की !
पता नहीं ये शख्श भरोसे लायक,मुझे न लगता है,
मीठी मीठी बातें करता , पर ऑंखें मक्कारी की !
इस बस्ती में लोग हमेशा , मास्क लगाए रहते हैं !
सूरत से धनवान दीखते , आदत पड़ी भिखारी की !
साकी और शराब रोज़ हो , रस्में चारदीवारी की !
अक्सर बासिन्दे शहरों के , असमंजस में दिखते हैं !
अभिलाषाएं, धुएं में जीवित, चिंता है बीमारी की !
जब भी लगती आग, धमाका नहीं सुनाई पड़ता है !
ऎसी कौन सी ताकत होती, छोटी सी चिंगारी की !
पता नहीं ये शख्श भरोसे लायक,मुझे न लगता है,
मीठी मीठी बातें करता , पर ऑंखें मक्कारी की !
इस बस्ती में लोग हमेशा , मास्क लगाए रहते हैं !
सूरत से धनवान दीखते , आदत पड़ी भिखारी की !




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